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आध्यात्मिक चिंतन : शब्द ऊँचे हों, आवाज नहीं

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छत्तीसगढ़।रायपुर। मनुष्य के जीवन में संवाद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हम अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव शब्दों के माध्यम से ही प्रकट करते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी बात मनवाने के लिए आवाज़ ऊँची कर लेते हैं।

इस संदर्भ में कहा गया है – “हमारे शब्द ऊँचे हों, आवाज़ नहीं।” यह वाक्य न केवल व्यवहारिक बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थ भी समेटे हुए है।

“हमारे शब्द ऊँचे हों, आवाज नहीं क्योंकि फूल बरसाया जाता है, शोले नहीं।”

यह कथन केवल एक सूक्ति नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक जीवन-दृष्टि है। आज जब समाज में संवाद की जगह शोर, तर्क की जगह आक्रोश, और भाषा की जगह भाषण लेता जा रहा है, तब यह विचार हमें आत्मचिंतन के लिए आमंत्रित करता है।

शब्द की शक्ति— सृष्टि और संवाद से श्राप तक

आदी सनातन दर्शन में कहा गया है — “वागर्थाविव संपृक्तौ” अर्थात शब्द और उसका अर्थ कभी अलग नहीं होते। वेदों की ऋचाएँ हों या शिव बाबा की मुरली (ईश्वरीय ज्ञान), सभी इस बात पर बल देती हैं कि शब्द न केवल संवाद का माध्यम हैं, बल्कि चेतना के संप्रेषण का सेतु भी है।

शब्द ब्रह्म हैं। उन्हीं से सृजन हुआ, उन्हीं से सृजन बचा है। जब हम शब्दों को संयम से, करुणा से, विनम्रता से प्रयोग करते हैं, तो वे आशीर्वाद बनते हैं। जब हम उन्हें गुस्से, तिरस्कार और क्रोध में बोलते हैं, तो वही शब्द श्राप बन जाते हैं।

 ऊँची आवाज़ नहीं, ऊँचे विचार चाहिए

गर्व, अहंकार और क्रोध में डूबी आवाज़ चाहे जितनी भी ऊँची हो, वह किसी को जीत नहीं सकती। लेकिन प्रेम, करुणा और सत्य से निकले शब्दों की ऊँचाई हर दिल को छू लेती है। सृष्टि पर जितने भी महात्मा हुए हैं, उनका जीवन ही उनका संदेश है। ब्रम्हा बाबा के मुख से साक्षात शिव दर्शन और साक्षात्कार होता है।

गौतम बुद्ध मौन में भी क्रांति कर देते थे। महावीर ने कठोर वाणी नहीं, अनुप्रास और अहिंसा के साथ प्रवचन दिए। संत कबीर ने कितनी अच्छी बात कही है —

"ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय,

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय।"

आज जब बहसें कटुता में बदल जाती हैं, सोशल मीडिया से लेकर संसद तक शब्दों की मर्यादा टूट जाती है, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि वाणी वह दीपक है जिससे आत्मा उजियारी होती है।

 आत्मसंयम और माधुर्य

जब हम अपनी आवाज़ ऊँची करते हैं, तो दूसरे की आवाज़ और भी ऊँची हो जाती है। यह प्रतिस्पर्धा नहीं, संघर्ष बन जाती है। लेकिन जब हम अपने शब्दों को ऊँचा करते हैं, अर्थात उनमें अर्थ, संवेदना, करुणा और विवेक भरते हैं ,तो कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं रहती, केवल संवाद होता है। इस तरह से अभिमान (अहंकार) की ऊँची आवाज़ शोर करती है। स्वमान के ऊँचे शब्द शांति लाते हैं।

वाणी की साधना— एक आत्मिक अभ्यास

जैसे योग में प्राणायाम से मन को नियंत्रित किया जाता है, वैसे ही राजयोग में वाणी-संयम और मेडिटेशन से आत्मा को निर्मल किया जाता है। दुनिया भर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग से विश्व शांति, आनंद और प्रेम का संदेश दे रहे हैं। हम इस तरह आध्यात्मिक अभ्यास कर सकते हैं:

मौन का अभ्यास — हर दिन कुछ क्षण बिना बोले रहना, आत्मनिरीक्षण के लिए। जब वाणी निःशब्द हों, तब मन से मन की बात होनी चाहिए। यही मौन का सार्थक अभ्यास है।

विचारपूर्वक बोलना — “क्या यह सत्य है? क्या यह आवश्यक है? क्या यह शुभ है?” — इन तीन प्रश्नों के आधार पर शब्द चुनना, फिर बोलना।

कठोर शब्दों से बचना — भले ही सच बोलें, पर उसे माधुर्य से बोलें। कहा गया है- 'सत्यम ब्रूयात, प्रियम ब्रूयात' अर्थात सत्य वचन बोलिए, साथ ही सुनने वाले को प्रिय लगे ऐसा बोलिए। कठोर वचन नहीं।

शब्द से सेवा— परिवार और समाज में

परिवार, समाज या राष्ट्र — सब जगह हमारी भाषा का प्रभाव पड़ता है। यदि हम बच्चों से डाँट के बजाय समझदारी से बात करें, यदि हम विवादों में चिल्लाने के बजाय शांति से अपनी बात रखें, तो संवाद अधिक सार्थक बनता है। स्वामी विवेकानंद कहा करते थे — "Talk to yourself once a day, otherwise you may miss meeting an excellent person." मतलब- " दिन में एकबार खुद से बात करें, वरना आप किसी बेहतरीन इंसान से मिलने से चूक सकते हैं। "

देह अभिमान से परे हर पल यह याद रहना चाहिए कि मैं अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूँ। इस तरह से जब यह संवाद आत्मा से हो, तो स्वाभाविक है कि बाहर की भाषा भी अधिक निर्मल, सुसंस्कृत और प्रभावी होगी।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी आवाज़ नहीं, अपने विचार, अपने शब्द, अपने भाव ऊँचे करें। ऊँचे शब्दों का अर्थ है — सत्य से जुड़ी बात, प्रेम से भरी भाषा, विवेक से युक्त दृष्टि और विनम्रता से सज्जित आत्मा।

चिंतन कीजिए-

"शब्द ही शस्त्र हैं, शब्द ही शांति है।

शब्द ही पूजा है, शब्द ही क्रांति है।

शब्द ऊँचे हों, तो आत्मा ऊँचाई को छूती है।

आवाज़ ऊँची हो, तो केवल दूरी ही बढ़ती है।"

आइए, हम सब अपने शब्दों को ऊँचा करें, अपनी वाणी में मधुरता लाएँ और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाई की ओर अग्रसर करें।

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मंत्रिपरिषद के निर्णय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित उनके निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

मंत्रिपरिषद ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सूची में तकनीकी कारणों से शामिल होने से वंचित जातियों को प्राप्त होने वाली कतिपय सुविधाएं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डिहारी कोरवा, बघेल क्षत्री, संसारी उरांव तथा पबिया, पविया, पवीया समाज के विद्यार्थियों को अनुसूचित जनजाति के समतुल्य एवं डोमरा जाति के विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति के समतुल्य राज्य मद से मात्र राज्य छात्रवृत्ति तथा शिष्यवृत्ति प्रदान किये जाने एवं छात्रावास-आश्रमों में स्वीकृत सीट के अधीन प्रवेश दिए जाने की सुविधा प्रदान करने की सहमति दी है।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत घर की छतों में सोलर रूफटॉप संयंत्र की स्थापना में राज्य शासन द्वारा उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता दिए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के माध्यम से पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने पर केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ-साथ राज्य की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी, जो सोलर प्लांट की क्षमता (1 किलोवाट, 2 किलोवाट, 3 किलोवाट और उससे अधिक) के आधार पर अलग-अलग होगी। उदाहरण के लिए, 1 किलोवाट प्लांट के लिए कुल 45,000 रूपए, (30,000 रूपए केंद्रीय और 15,000 रूपए राज्य सहायता) जबकि 3 किलोवाट या उससे अधिक के प्लांट के लिए 1,08,000 रूपए (78,000 रूपए केंद्रीय और 30,000 रूपए राज्य सहायता) की मदद मिलेगी। हाउसिंग सोसाइटी/रेसिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के लिए भी इसी तरह की सहायता प्रस्तावित की गई है। यह अनुदान राशि CSPDCL को अग्रिम रूप से मिलेगी और वही इसे लाभार्थियों को देगी। वर्ष 2025-26 में 60,000 और 2026-27 में 70,000 सोलर पावर प्लांट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 180 करोड़ एवं 2026-27 में 210 करोड़ रूपए का वित्तीय भार आएगा।

CSPDCL इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे लागू करेगी। कंपनी इस योजना के संचालन के लिए एक अलग बैंक खाता खोलेगी, जिसमें सब्सिडी की राशि रखी जाएगी और उसका हिसाब-किताब किया जाएगा। राज्य वित्तीय सहायता उन घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता से दी जाएगी जिनके सोलर प्लांट का ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद हुआ है।

मंत्रिपरिषद ने राज्य में वन्यजीव, खासकर बाघों के संरक्षण और ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘‘छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी‘‘ का गठन करने का निर्णय लिया है। यह सोसायटी वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत काम करेगी। मध्य प्रदेश में यह 1996 से संचालित है। इसका मुख्य लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में लगातार घट रही बाघों की आबादी (फिलहाल लगभग 18-20) को बचाना है। यह संस्था स्व-वित्तपोषित होगी, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। यह सहयोग देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से फंड जुटाएगी।

यह सोसायटी बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सीधे शामिल होगी। यह स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगी, जिससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और आय के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह पर्यावरणीय शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भविष्य के संरक्षणवादी तैयार होंगे। इस पहल से संरक्षण के लिए बाहरी धन, विशेषज्ञता और संसाधन मिलेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे और राज्य का पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा।

यह छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, जो जैव विविधता की रक्षा के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी मजबूत आधार देगी।

मंत्रिपरिषद द्वारा अशासकीय अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था ‘‘रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर की सहयोगी संस्था ‘‘विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल हेल्थ वेलफेयर एवं सेवायें, छत्तीसगढ़ (विश्वास)‘‘ को रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर में अंतर्भूत (मर्ज) करने का अनुमोदन किया गया।

उद्यानिकी महाविद्यालय (उद्यानिकी विश्वविद्यालय) की स्थापना के लिए बेमेतरा जिले के साजा तहसील अंतर्गत बेलगांव में राजगामी संपदा की 94.290 हेक्टेयर भूमि में से 100 एकड़ भूमि उद्यानिकी विभाग को निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

जशपुर जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल व महुआ चाय जैसे पारंपरिक उत्पाद ‘JashPure’ ब्रांड के तहत तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और विपणन को बढ़ावा देने हेतु इस ब्रांड को राज्य शासन अथवा CSIDC को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का मंत्री परिषद ने अनुमोदन किया है।

ब्रांड हस्तांतरण से एग्रो व फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय कच्चे माल की मांग बढ़ेगी और आदिवासी महिलाओं को  रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। ट्रेडमार्क हस्तांतरण से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

मंत्रिपरिषद द्वारा शहीद पुलिसकर्मियों के सर्वाेच्च बलिदान को ध्यान में रखते हुए अनुकम्पा नियुक्ति हेतु जारी एकजाई पुनरीक्षित निर्देश-2013 की कंडिका 13 (3) में संशोधन करते हुए निर्णय लिया है कि - नक्सली हिंसा में शहीद पुलिस सेवकों के प्रकरण में उनके परिवार के किसी भी पात्र सदस्य (महिला या पुरूष) को विकल्प के आधार पर पुलिस विभाग के अलावा, किसी अन्य विभाग में, राज्य के किसी भी जिला, संभाग में अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकेगी। पहले अनुकम्पा नियुक्ति यथासंभव उसी विभाग या कार्यालय में देने की व्यवस्था थी, जिसमें दिवंगत शासकीय सेवक निधन के पूर्व कार्यरत था।

मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में गौण खनिजों के सुव्यवस्थित अन्वेषण, पूर्वेक्षण एवं अधोसंरचना के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘‘स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट‘‘ (एसएमईटी) के गठन की अधिसूचना के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के तहत समस्त गौण खनिजों से प्राप्त होने वाली रायल्टी 2 प्रतिशत राशि अतिरिक्त रूप से एसएमईटी फंड में जमा की जाएगी। जिसका उपयोग गौण खनिजों के अन्वेषण, अधोसंरचना विकास में उच्च तकनीकों का उपयोग, इन्फॉर्मेशन सिस्टिम, लॉजिस्टिक सपोर्ट, मानव संसाधनों के उन्नयन आदि में किया जा सकेगा। भारत सरकार के नेशनल मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की तर्ज पर राज्य में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का गठन किया जाएगा।

मंत्रिपरिषद की बैठक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर मंत्रिपरिषद द्वारा द्वितीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2024-2025 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।


मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के छत्तीसगढ़ पुलिस में भर्ती के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उम्मीदवारों के लिए ऊंचाई और सीना के निर्धारित मापदण्ड में एक बार के लिए छूट प्रदान करने का निर्णय लिया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार, उपनिरीक्षक संवर्ग, प्लाटून कमाण्डर की सीधी भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2024 में निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई 163 सेंटीमीटर तथा सीना बिना फुलाये 78 से.मी. एवं फुलाने पर 83 से.मी. केवल अनुसूचित जनजाति वर्ग के पुरूष अभ्यर्थियों के लिए केवल एक बार के लिए छूट देने का निर्णय लिया गया है। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य में डेयरी उद्यमिता को प्रोत्साहन देने एवं दुग्ध संकलन तथा प्रसंस्करण में वृद्धि हेतु राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ एम.ओ.यू. करने का निर्णय लिया गया। इससे नवीन तकनीक के उपयोग के साथ ही दुग्ध महासंघ के प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी। अनुसूचित क्षेत्रों में दुधारू पशु उत्प्रेरण से स्वरोजगार में वृद्धि के साथ ही दुग्ध उत्पादन की लागत कम होगी तथा दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही प्रदेश के दुग्ध उत्पादक कृषकों के दुग्ध विक्रय के लिए सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित हो सकेगी।   

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में संशोधन बाबत् छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

राजधानी रायपुर में 15 जनवरी से 15 फरवरी 2025 तक आयोजित ऑटो एक्सपो के दौरान वाहनों के लाईफ टाईम रोड टैक्स पर एकमुश्त 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया तथा प्रदेश के सभी डीलरों को इस सुविधा का  लाभ वाहन क्रेताओं को दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए सुदृढ़ वातावरण तैयार करने, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा राज्य के खिलाड़ियों के लिए सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर जिला मुख्यालय में खेल हेतु आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया।

इसके तहत छत्तीसगढ़ में खेल क्लब को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए संबंधित पंजीकृत समितियों को खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पारंपरिक खेलोें को पुनर्जीवित किया जाएगा। ओलम्पिक खेलों को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में बढ़ावा देने के साथ ही राज्य के खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने पर उनको शत-प्रतिशत यात्रा व्यय  तथा खेल उपकरण की सुविधा देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित अतिशेष (सरप्लस) धान के निराकरण के संबंध में गहन विचार-विमर्श किया गया। कैबिनेट ने खरीफ सीजन में उपार्जित शतप्रतिशत धान की कस्टम मिलिंग उसी खरीफ सीजन में पूरा कर जमा कराने तथा इस साल के अतिशेष धान का चावल केन्द्रीय पूल के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम में सितम्बर 2025 तक उपार्जित किए जाने के लिए लक्ष्य वृद्धि हेतु प्रस्ताव धान खरीदी समाप्त होते ही भारत सरकार को पुनः भेजे जाने के संबंध में चर्चा की गई तथा अतिशेष धान का निराकरण नीलामी से करने की अनुमति दी गई है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कस्टम मिलिंग हेतु फोर्टिफाईड राईस कर्नेल की व्यवस्था के संबंध में फोर्टिफाईड चावल जमा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा NeML के माध्यम से दर का निर्धारण पश्चात् आपूर्ति प्रारंभ होने तक गत् खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 अनुसार मिलरों द्वारा एफआरके निर्माताओं से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दर के अधीन फोर्टिफाईड राईस कर्नेल (FRK) क्रय कर फोर्टिफाईड चावल जमा किये जाने की अनुमति दी गई है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि 80 रूपए करने का निर्णय लिया खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राईस मिलों को लंबित प्रोत्साहन राशि की प्रथम किश्त प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 (क्रमांक 1 सन् 1994)  की धाराओं में संशोधन संबंधी छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ नगर पालिक अधिनियम 1961 (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

मंत्रिपरिषद की बैठक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन तथा कस्टम मिलिंग की नीति का अनुमोदन किया गया। मंत्रिमण्डलीय उप समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान समर्थन मूल्य पर राज्य के किसानों से नगद एवं लिंकिंग में धान खरीदी 14 नवम्बर 2024 से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। राज्य में धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक की जाएगी।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए कृषि विभाग द्वारा एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से किसान पंजीयन की प्रक्रिया जारी है, जो 31 अक्टूबर 2024 तक चलेगी। वर्ष 2024-25 में 160 लाख टन धान के उपार्जन का अनुमान है। समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था पूर्व वर्ष की भांति लागू रहेगी। मंत्रिपरिषद में खरीदी केन्द्रों में धान के नियंत्रित एवं व्यवस्थित रूप से उपार्जन हेतु सीमांत एवं लघु कृषकों को अधिकतम दो टोकन तथा दीर्घ कृषकों को अधिकतम तीन टोकन प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। सभी खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र के माध्यम से धान खरीदी होगी। धान खरीदी के लिए 4.02 लाख गठान नये जूट बारदाना जूट कमिश्नर के माध्यम से क्रय करने की स्वीकृति दी गई है। धान खरीदी के लिए कुल 8 लाख गठान बारदाने की जरूरत होगी। 

मंत्रिपरिषद की बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सहकारी समितियों में कार्यरत डाटाएन्ट्री ऑपरेटरों को 18,420 रूपए प्रतिमाह के मान से कुल 12 माह का मानदेय भुगतान का निर्णय लिया गया। इस पर कुल 60 करोड़ 54 लाख रूपए का व्यय भार आएगा। जिसके भुगतान के लिए पूर्व वर्षाें की भांति राशि मार्कफेड को प्रदाय की जाएगी। 

विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लिये जाने के संबंध में गठित मंत्रिपरिषद की उपसमिति द्वारा अनुशंसित 49 प्रकरणों को माननीय न्यायालय से वापस लिए जाने का निर्णय लिया गया है। 

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 2021 के नियम 8 (2) में सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमाण्डर के पद पर नियुक्ति हेतु भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2024 में केवल एक बार के लिए अभ्यार्थियों की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में 05 वर्ष की छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सभी छूटों को मिलाकर अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

राज्य के सभी ग्राम पंचायतों के प्रत्येक घर में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु छत्तीसगढ़ ग्रामीण पेयजल संचालन एवं संधारण नियम, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति अपने दायित्वों के साथ-साथ ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के संचालन एवं संधारण का कार्य भी देखेगी। ग्राम सभा के अनुमोदन से जल प्रभार का निर्धारण के अलावा नये कनेक्शन का निर्णय, वित्तीय प्रबंधन, मरम्मत, पेयजल गुणवत्ता का निर्धारण एवं शिकायतों का निराकरण करेगी।

दिवंगत शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के कर्मचारियों के अनुकम्पा हेतु पात्र आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत ऐसे शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के कर्मचारी जिनकी मृत्यु सेवाकाल में हो गई थी और जिनके आश्रित नियमानुसार अनुकम्पा हेतु पात्र है, उन्हें छत्तीसगढ़ शिक्षक (पंचायत) संवर्ग नियम 2018 के आधार पर पात्रता अनुसार अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी। ऐसी स्थिति में स्कूल शिक्षा विभाग से पद पूर्ति के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पद प्रदाय करने के पूर्व के आदेश को शिथिल करने का निर्णय भी लिया गया है, ताकि दिवंगत के पात्र आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जा सके।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मीसा/डी.आई.आर. राजनैतिक या सामाजिक कारणों से निरूद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम, 2008 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों का राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्ठि की जाएगी तथा अंत्येष्ठि के लिए उनके परिवार को 25 हजार रूपए की सहायता राशि दी जाएगी।

देशी/विदेशी मदिरा बोतलों पर चस्पा किये जाने हेतु Excise Adhesive Label (Hologram) होलोग्राम में अधिक सुरक्षात्मक फीचर्स उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के उपक्रम भारत प्रतिभूति मुद्रणालय, नासिक रोड  (महाराष्ट्र) से होलोग्राम क्रय करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य की औद्योगिक नीति 2019-24 के तहत स्टील डाउन स्ट्रीम प्रोजेक्ट्स, एथेनॉल इकाईयों एवं कोर सेक्टर के सीमेंट उद्योगों के लिये विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज के निर्धारण का अनुमोदन किया गया।

सीएम भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया :-

आवासहीनों और कच्चे कमरे वाले परिवारों को पक्का आवास मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत स्थायी प्रतीक्षा सूची में शामिल शेष सभी 6 लाख 99 हजार 439 पात्र परिवारों को आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया गया।

सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना वर्ष 2011 की सर्वे सूची में शामिल होने से वंचित रह गए ऐसे परिवार जो आवासहीन है उन्हें राज्य सरकार द्वारा अपने मद से आवास उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में ग्रामीण आवास न्याय योजना की घोषणा की थी। इस योजना के नीति निर्धारण एवं क्रियान्वयन के संबंध में मंत्रिपरिषद की बैठक में निर्णय लिया गया।

प्रदेश में जरूरतमंद परिवारों की आवश्यकता एवं समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2023 के अनुसार कुल 47,090 परिवार ऐसे पाए गए है जो आवासहीन है और इनका नाम सर्वे सूची 2011 में नही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण न्याय योजना के लिए का शत प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा आवास निर्माण के लिए दी जाएगी। वर्ष 2023-24 के बजट में राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 100 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आज नवा रायपुर में आयोजित राजीव युवा मितान सम्मेलन में  शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के हित में सीधी भर्ती के पदों पर 03 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में प्रथम 3 वर्ष में क्रमशः वेतनमान के न्यूनतम का 70, 80 एवं 90 प्रतिशत स्टायपेण्ड दिये जाने के प्रावधान को समाप्त करने की बड़ी घोषणा की गई । जिसे मंत्रिपरिषद की बैठक में अनुमोदित किया गया।

डिप्लोमाधारी और डिग्रीधारी स्टाफ नर्सेस को दी गई 3 एवं 4 वार्षिक वेतन वृद्धि की वसूली पर आगामी आदेश तक रोक लगाए जाने का निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के अनुपालन में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में एक बड़ा फैसला लिया गया। जिसके तहत मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य सेवा परीक्षा नियम, 2008 में संशोधन का अनुमोदन किया गया।

जिसमें आयोग द्वारा राज्य सेवा परीक्षा संबंधी अंतिम चयन सूची जारी किए जाने के पश्चायत प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा अंतिम चयन परिणाम की अंक सूचियां अभ्यर्थियों के ऑनलाइन एकाउन्ट उपलब्ध करायी जाएगी। राज्य सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के परिणाम के साथ ही उक्त परीक्षा के विज्ञापित वर्ग एवं उपवर्गवार कट-ऑफ अंक जारी किए जाएंगे।

साक्षात्कार या व्यक्तित्व परीक्षण अब 150 अंक के स्थान पर 100 अंक का होगा।

गोधन न्याय योजना के तहत गोठानों से संबद्ध स्व-सहायता समूहों एवं प्राथमिक सहकारी समितियों को कम्पोस्ट विक्रय पर प्रोत्साहन (बोनस) राशि प्रदान करने का निर्णय लिया गया। स्व सहायता समूहों को 8 जुलाई 2022 से 7 जुलाई 2023 तक प्रति किलोग्राम कम्पोस्ट विक्रय पर एक रूपए प्रति किलो प्रोत्साहन राशि के मान से कुल 12.32 करोड़ रूपए तथा प्राथमिक सहकारी समितियों को प्रति किलो 10 पैसे की दर से कुल 13.55 लाख रूपए प्रोत्साहन (बोनस) राशि दिए जाने का निर्णय लिया गया।

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 में निहित प्रावधान के तहत् राज्य बांध सुरक्षा संगठन के लिए मुख्य अभियन्ता के पद सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई।

भारत स्काउट गाईड जिला संघ रायपुर को प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना हेतु ग्राम माठ, जिला रायपुर में आवंटित शासकीय भूमि की निर्धारित प्रब्याजि या भू-भाटक को माफ कर निःशुल्क में आवंटन करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ निषाद केवट समाज को शैक्षणिक (छात्रावास) तथा सामाजिक भवन के लिए ग्राम फुण्डहर, जिला रायपुर में आबंटित शासकीय भूमि की निर्धारित प्रब्याजि राशि में छूट प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

कल्याण सेवा आश्रम, अमरकंटक द्वारा छत्तीसगढ़ में आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग के कल्याण हेतु संस्कार अध्ययन शाला, चिकित्सालय एवं गौशाला निर्माण हेतु श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा समिति जिला राजनांदगांव के स्वामित्व की भूमि को सशर्त आबंटित किए जाने का निर्णय लिया गया।

संस्था प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अंबिकापुर जिला सरगुजा को अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन पर आवंटित नजूल भूमि की निर्धारित प्रब्याजि राशि में छूट प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 के द्वितीय अनुसूची के भाग- एक के स्पष्टीकरण में संशोधन प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम, 2017 के अंतर्गत ग्रेड पे 8700 का वेतन मैट्रिक्स में तत्स्थानी लेवल 15 में कोष्टिकाएं निर्धारण हेतु गुणांक 2.57 को 2.67 करने का निर्णय लिया गया।

सेरीखेड़ी में मंत्रालयीन सेवा के अधिकारी एवं कर्मचारियों हेतु विशेष आवासीय योजना सेरीखेड़ी रायपुर में विकसित भूखण्डों के पात्रता में संशोधन का निर्णय लिया गया। योजना के लाभ की पात्रता सूची में न्यायिक सेवा श्रेणी के अधिकारी-कर्मचारियों सहित अन्य को शामिल किया गया है।

पढिए : पीडीएफ फ़ाइल

मंत्रिपरिषद की बैठक : 2 सितंबर 2023-1 MB

बेटियों को दें अच्छी शिक्षा, रखें स्वास्थ्य का ख्याल: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कुर्मी समाज प्रगतिशील समाज है। किसी भी समाज मे परिवर्तन के लिए शिक्षा बहुत आवश्यक है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा एवं उनके स्वास्थ्य पर अधिक जोर देते हुए कहा कि मां ही जीवन की पहली गुरु होती है। उनका सिखाया हुआ शिक्षा, संस्कार, व्यवहार आजीवन काम आता है। इसलिए उनकी स्वास्थ्य एवं शिक्षा महत्वपूर्ण है। बघेल आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा विकासखंड के ग्राम खपराडीह में हाईस्कूल प्रांगण में आयोजित बलौदाबाजार राज कुर्मी क्षत्रिय समाज के 5 वें राज अधिवेशन को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बघेल ने सम्मेलन में जिला मुख्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए 24 घण्टा सातों दिनों खुलने वाला आधुनिक ई-लायब्रेरी, सुहेला के दक्षिण में ग्राम तिल्दाबांधा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्राम खपराडीह में मंगलभवन एवं मुक्तिधाम के लिए 20-20 लाख रुपये एवं खपराडीह में ही हाईस्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल में उन्नयन करने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने कुम्हारी जलाशय सम्बंधित के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने आगे कहा कि राज्य के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त किसानों को इस वर्ष दिवाली के पूर्व भुगतान किया गया। आगामी 31मार्च को चौथी किश्त का भुगतान कर दिया जाएगा। सरकार अन्नदाताओं को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कार्यक्रम में सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योजना सहित किसानों, गरीबों और मजदूरों के जीवन में बेहतरी लाने के लिए चलाई जा रही योजना का विस्तार से उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने किसानों से गौठानों में तैयार किए जा रहे वर्मी कम्पोस्ट का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ ही फसल की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। उन्होंने गौठान में पैरादान को महाअभियान बनाने पर सभी किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जा रहे हैं।

कुर्मी क्षत्रिय समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष चोवा राम वर्मा ने पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के पूरे कुर्मी समाज एवं पिछड़ा वर्ग की ओर से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सासंद श्रीमती छाया वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश वर्मा, जीव जंतु कल्याण बोर्ड अध्यक्ष विद्याभूषण शुक्ल, कृषक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरिश देवांगन, पूर्व विधायक जनकराम वर्मा, कुर्मी समाज के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।

मंत्रिपरिषद की बैठक : प्रदेश में किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के लिए एक नई योजना ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना‘

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कृषकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत कृषकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से एक नई योजना मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाको वित्तीय वर्ष 2023-24 से लागू करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनामें भाग लेने हेतु इच्छुक कृषक अथवा संस्था अपने क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय में सम्पर्क कर आगामी वर्ष में रोपण हेतु आवश्यक पौधों की जानकारी सहमति पत्र के साथ दे सकते हैं।


गौरतलब है कि इस योजना में कृषकों के निजी भूमि में प्रतिवर्ष 36 हजार एकड़ के मान से पांच वर्षों में एक लाख 80 हजार एकड़ वाणिज्यिक वृक्ष प्रजातियों (क्लोनल नीलगिरी, टिशू कल्चर बांस, टिशू कल्चर सागौन, मिलिया डूबिया एवं अन्य आर्थिक लाभकारी प्रजाति) का रोपण किया जाएगा। समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध-शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाएं, पंचायतें तथा भूमि अनुबंध धारक जो अपने भूमि में रोपण करना चाहते है, इस योजना के हितग्राही होंगे। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ तक भूमि पर (अधिकतम 5000 पौधे) पौधों का रोपण हेतु 100 प्रतिशत तथा 05 एकड़ से अधिक भूमि पर रोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाएगा।

इस योजना में सहयोगी संस्था अथवा निजी कम्पनियों के सहभागिता का प्रस्ताव है। उनके द्वारा वित्तीय सहभागिता के साथ शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर हितग्राहियों के वृक्षों की वापस खरीद का प्रस्ताव भी दिया गया है। सहयोगी संस्था अथवा निजी कम्पनियों की सहभागिता से कृषकों को उनके उत्पाद के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होगी तथा शासन पर वित्तीय भार भी कम होगा। टिशू कल्चर सागौन, टिशू कल्चर बांस एवं मिलिया डूबिया वृक्षों के परिपक्व होने के पश्चात् निर्धारित समर्थन मूल्य पर शासन द्वारा क्रय किया जाएगा।

 राज्य में इस योजना के अंतर्गत कुल पांच वर्षों में एक लाख 80 हजार एकड़ में रोपित 15 करोड़ पौधे परिपक्व होने के पश्चात् हितग्राहियों को लगभग 5000 करोड़ की आय प्राप्त होने की संभावना है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाके क्रियान्वयन से प्रति वर्ष लगभग 30 हजार किसान लाभान्वित होंगे। इस योजना के क्रियान्वयन से हितग्राहियों को प्रतिवर्ष प्रति एकड़ 15 से 50 हजार रूपए तक आय की प्राप्ति होगी। वाणिज्यिक वृक्षारोपण के रकबे में वृद्धि से काष्ठ आधारित उद्योगों जैसे पेपर मिल, प्लाईवुड, फर्नीचर, विनियर इत्यादि के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। नये उद्योगों की स्थापना से स्थानीय निवासियों के रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा विभिन्न करों के माध्यम से शासन को अधिक राजस्व की प्राप्ति होगी।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले का शुभारंभ 3 सितम्बर को

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रायपुर। भूपेश बघेल प्रदेश के 3 सितम्बर को राज्य दो और नये जिलों का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही राज्य के 30 वें जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ तथा 31वा जिले के रूप में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई अस्तित्व में आ जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि दो दिनों के अंतराल में तीन नये जिलों की सौगात जनता को मिली है। इन नये जिलों के बन जाने से शासन-प्रशासन की लोगों तक पहुंच और मजबूत होगी, जिससे इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को तीव्र गति मिलेगी।



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सारंगढ़ और खैरागढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उक्त दोनों जिलों का शुभारंभ करने के साथ ही इन नवगठित जिलों में विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए 931 करोड़ 37 लाख रूपए की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री बघेल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शुभारंभ अवसर पर 512.29 करोड़ के विकास कार्यो का भूमिपूजन एवं 54.52 करोड़ के विकास कार्यो का लोकार्पण करेंगे, जबकि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के शुभारंभ कार्यक्रम में 364 करोड़ 56 लाख रूपए के विकास कार्यो की सौगात के साथ ही 213 हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 37 लाख 48 हजार रूपए की सामग्री एवं अनुदान सहायता राशि वितरण होगा।

नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ का जिला मुख्यालय सारंगढ़, रायगढ़ से रायपुर राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक 200 पर स्थित है। यहां रियासत कालीन समय से हवाई पट्टी स्थित है। जिला मुख्यालय सारंगढ़ छत्तीसगढ़ गठन के पूर्व से तहसील मुख्यालय एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मुख्यालय है। ज्ञात हो कि बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिला रायगढ़ के उप खण्ड सारंगढ़, तहसील सारंगढ़ एवं बरमकेला तथा रायपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के उप खण्ड-बिलाईगढ़ तथा तहसील बिलाईगढ़ को शामिल करते हुए नये जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ का गठन किया गया है

जिसमें तीन तहसील सारंगढ़, बरमकेला एवं बिलाईगढ़ एवं उप तहसील कोसीर तथा भटगांव शामिल होंगे। नवगठित जिले में तीन जनपद पंचायत सारंगढ़, बरमकेला व बिलाईगढ़ शामिल हैं। इस नवगठित जिलेे की सीमाएं उत्तर में रायगढ़, दक्षिण में महासमुंद जिले तथा पूर्व में उड़ीसा के बरगढ़ और पश्चिम में बलौदा बाजार तथा उत्तर-पश्चिम में जांजगीर-चाम्पा जिले से लगी हुई है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 6 लाख 17 हजार 252 है। 759 ग्राम, 349 ग्राम पंचायत, 5 नगरीय निकाय है। 

जिसके अंतर्गत 20 राजस्व निरीक्षक मंडल शामिल है जिनमें सारंगढ़, हरदी, सालर, कोसीर, छिंद, गोड़म, उलखर, बरमकेला, गोबरसिंघा, देवगांव, डोंगरीपालीसरिया, बिलाईगढ़, पवनी, गोविंदवन, जमगहन, भटगांव, गिरसा, बिलासपुर एवं सरसीवा शामिल है। जिसका कुल राजस्व क्षेत्रफल 01 लाख 65 हजार 14 है एवं 2518 राजस्व प्रकरण की संख्या है। वर्तमान में नवीन जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1406 स्कूल, 7 कालेज, 33 बैंक, 3 परियोजना, 141 स्वास्थ्य केन्द्र, 10 थाना एवं 2 चौकी स्थापित है।

नवगठित खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई दुर्ग संभाग के अंतर्गत होगा। इसकी जनसंख्या 3 लाख 68 हजार 444 है। कुल ग्रामों की संख्या 494 तथा 3 नगरीय निकाय हैं। दो उप खण्ड खैरागढ़ एवं गण्डई-छुईखदान होंगे। तीन तहसील गण्डई, छुईखदान, खैरागढ़ होंगे, वहीं 2 विकासखण्ड छुईखदान एवं खैरागढ़, 16 राजस्व निरीक्षक मंडल होंगे। इस नवीन जिले में 107 पटवारी हल्का, 221 ग्राम पंचायतें है। इस नवीन जिले के उत्तर में कबीरधाम जिला, दक्षिण में तहसील डोंगरगढ़, तहसील राजनांदगांव, पूर्व में तहसील साजा एवं धमधा और पश्चिम में तहसील लांजी जिला- बालाघाट (मध्यप्रदेश) की सीमाएं लगी है।

 

नया जिला बन जाने से यहां के नागरिकों को काफी राहत मिलेगी और कई महत्वपूर्ण कार्य आसानी से होंगे। प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण होने का फायदा आम जनता को मिलेगा।  बुनियादी सुविधाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, खाद्यान्न लोगों तक आसानी से उपलब्ध होगी और सुविधाओं का विस्तार होगा। वहीं शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन दूरस्थ अंचलों तक आसानी होगा। रोड कनेक्टिविटी, पुल-पुलिया के निर्माण से सुदूर वनांचल के क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ेगी।

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