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मनरेगा में होगी 11 नए लोकपालों की भर्ती, 22 अप्रैल तक कर सकते हैं आवेदन

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राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के अंतर्गत 11 नए लोकपालों की नियुक्ति की जाएगी। राज्य मनरेगा कार्यालय द्वारा प्रदेश के 11 जिलों बेमेतरा, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बालोद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, सुकमा, सूरजपुर और मुंगेली में लोकपाल के एक-एक पद पर राज्य स्तरीय भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया है। 

इच्छुक अभ्यर्थी इसके लिए 22 अप्रैल 2022 तक शाम पांच बजे तक अपना आवेदन कर सकते हैं। आवेदक की आयु नियुक्ति के समय 66 साल से कम होनी चाहिए। लोकपाल के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन संबंधी प्रारूप, अर्हता और शर्तों की जानकारी वेबसाइट www.cgstate.gov.in और www.mgnrega.cg.nic.in पर अपलोड की गई है। 

आवेदक अपना आवेदन आयुक्त, महात्मा गांधी नरेगा, विकास आयुक्त कार्यालय, तृतीय तल, कक्ष क्रमांक-19, विकास भवन, नॉर्थ ब्लॉक, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर, रायपुर छत्तीसगढ़ को भेज सकते हैं। सिर्फ स्पीड पोस्ट या पंजीकृत डाक द्वारा भेजा गया आवेदन ही स्वीकार किया जाएगा।  

मल्टी-यूटिलिटी सेंटर ने खोला स्वरोजगार का द्वार, महिलाओं ने अकुशल श्रम से व्यवसाय की ओर बढ़ाए कदम

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स्वरोजगार के लिए अच्छा माहौल और उपयुक्त स्थान पाकर सुदूर कोरिया जिले के आदिवासी बहुल चिरमी गांव की महिलाओं ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और DMF(जिला खनिज न्यास निधि) के अभिसरण से बने मल्टी-यूटिलिटी सेंटर में वहां की गंगा माई स्वसहायता समूह की 12 महिलाएं खुद का उद्यम स्थापित कर फेंसिंग पोल बनाने का काम कर रही है। खेतों और मनरेगा कार्यों में मजदूरी करने वाली इन महिलाओं को अकुशल श्रम से स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाते देखकर गांव की बांकी महिलाएं भी प्रेरित हो रही है। इनके काम शुरू करने के बाद से गांव में 12 स्वसहायता समूह गठित हो चुके हैं। 

मनरेगा और DMF के अभिसरण से 12 लाख 15 हजार रु की लागत से वर्क-शेड के रूप में तैयार मल्टी-यूटिलिटी सेंटर में चिरमी की गंगा माई स्वसहायता समूह की महिलाएं फेंसिंग पोल बनाकर खड़गंवा विकासखंड के कई गांवों में आपूर्ति कर रही है। इनके द्वारा निर्मित 300 से अधिक पोल्स (Poles) की बिक्री अब तक की जा चुकी है। ग्राम पंचायतें इनका उपयोग गौठान और ब्लॉक-प्लांटेशन की घेराबंदी में कर रही है। पोल्स की बिक्री से समूह को 80 हजार रूपए मिले हैं। इन महिलाओं को तीन लाख रूपए का वर्क-ऑर्डर मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित इस समूह की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन की उड़ान को देखकर गांव में 12 नए महिला स्वसहायता समूह गठित हो गए हैं।

12 स्वसहायता समूह गठित हो चुके हैं। गंगा माई स्वसहायता समूह की सदस्य उर्मिला सिंह और रामवती मनरेगा में पंजीकृत श्रमिक हैं। खेती-किसानी, वनोपज संग्रहण और मनरेगा में मजदूरी ही उनकी आजीविका का साधन हुआ करता था। उन्होंने कुछ साल पहले गांव की अन्य महिलाओं को जोड़कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गंगा माई स्वसहायता समूह बनाया। समूह में 12 सदस्य हैं। इन महिलाओं ने मनरेगा काम से मिली मजदूरी में से कुछ रकम बचाकर समूह की गतिविधियां शुरू की। इनके समूह को आजीविका मिशन से 15 हजार रूपए की आर्थिक सहायता भी मिली। इससे उत्साहित होकर इन्होंने वन-धन केंद्र के माध्यम से वनोपज संग्रहण का काम शुरू किया। इस काम के लिए समूह को वन प्रबंधन समिति के माध्यम से बतौर कमीशन 18 हजार रु मिले। 

चिरमी में बीते साल गौठान बनने के बाद इन महिलाओं ने वहां जैविक खाद बनाने का काम किया। इससे उन्हें साढ़े आठ हजार रु की अतिरिक्त कमाई हुई। उर्मिला सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत से उनके समूह को जून-2021 में यह मल्टी-यूटिलिटी सेंटर मिला था, लेकिन इसके तुरंत बाद खेती-किसानी का काम आ जाने से उन लोगों ने सितंबर-2021 से फेंसिंग पोल बनाने का काम शुरू किया। आजीविका मिशन से मिले संसाधनों, वहां बने समान रखने का स्टोर और पोल्स की तराई के लिए पानी की व्यवस्था होने के बाद काम में तेजी आई। वो बताती है कि समूह को आसपास के ग्राम पंचायतों से अब तक करीब एक हजार पोल का ऑर्डर मिल चुका है। वे इनमें से 300 पोल्स की आपूर्ति भी कर चुके हैं।

समूह को स्वरोजगार के लिए मिला ठौर

कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से 28 किलोमीटर दूर चिरमी में गौठान के पास ही वर्क-शेड का निर्माण कराया गया है। इसके लिए 12 लाख 15 हजार रु की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई थी। मनरेगा से मजदूरी भुगतान के लिए मिले एक लाख 54 हजार रु और DMF से सामग्री के लिए प्राप्त दस लाख 61 हजार रु के अभिसरण से इसका निर्माण हुआ है। गांव में मल्टी-यूटिलिटी सेंटर के निर्माण से जहां एक ओर 39 मनरेगा श्रमिकों को 798 मानव दिवस का सीधा रोजगार मिला। वहीं स्थानीय समूह को स्वरोजगार के लिए ठौर भी मिल गया।

महिलाओं के परिवार ने 612 दिनों का रोजगार

मनरेगा के तहत साल 2020-21 में गंगा माई स्वसहायता समूह की महिलाओं के परिवार ने 612 दिनों का रोजगार प्राप्त किया था। जबकि इस साल 2021-22 में उन्होंने सिर्फ 306 दिनों का रोजगार प्राप्त किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि ये महिलाएं अब अकुशल श्रम के स्थान पर रोजगार के स्थाई साधन अपने व्यवसाय को तरजीह दे रही हैं। कल तक खेतों और  मनरेगा कार्यों में मजदूरी ढूंढने वाली ये महिलाएं अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), मनरेगा और DMF से संबल और संसाधन पाकर आर्थिक स्वावलंबन के नए आयाम गढ़ रही है।

मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार देने में राजनांदगांव जिला प्रदेश में अव्वल नंबर

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत प्रदेश में राजनांदगांव जिले में सर्वाधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान किया गया है। श्रमिकों को रोजगार देने में राजनांदगांव जिला प्रदेश में अव्वल नंबर पर है। श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा के मार्गदर्शन और जिला पंचायत CEO लोकेश चंद्राकर के निर्देशन में श्रमिकों को रोजगार देने की दिशा में प्रभावी काम किए जा रहे हैं। 

जिले में डबरी निर्माण, कुंआ निर्माण, नरवा बंधान, शेड निर्माण, तालाब गहरीकरण और नया तालाब निर्माण जैसे कार्य मनरेगा के तहत किए जा रहे हैं। राजनांदगांव जिले के 813 ग्राम पंचायतों में 780 कार्य प्रगति पर है, जिनमें 1 लाख 50 हजार 690 श्रमिक कार्यरत हैं। जिले के डोंगरगांव विकासखंड के 72 कार्य चल रहे हैं, जिससे 9606 श्रमिकों को रोजगार मिला है। वहीं अंबागढ़ चौकी विकासखंड में 67 कार्य जारी है, जहां 12772 श्रमिक,  राजनांदगांव विकासखंड में 112 कार्य प्रारंभ, जहां 13942 श्रमिक काम कर रहे हैं।

इतने मजदूर कर रहे काम

मोहला विकासखंड में 57 कार्य प्रारंभ, जहां 16356 श्रमिक, छुईखदान विकासखंड में 90 कार्य प्रारंभ, जहां 17598 श्रमिक, डोंगरगढ़ विकासखंड में 101 कार्य प्रारंभ, जहां 18197 श्रमिक, मानपुर विकासखंड में 59 कार्य प्रारंभ, जहां 18415 श्रमिक, खैरागढ़ विकासखंड में 109 कार्य प्रारंभ, जहां 20630 श्रमिक, छुरिया विकासखंड में 113 कार्य प्रारंभ, जहां 23174 श्रमिक कार्यरत हैं।

मनरेगा से बने तालाब ने दिया आजीविका का नया साधन, बेटी की बीमारी में साबित हुई संजीवनी

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मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) कई रूपों में लोगों का जीवन बदल रहा है। जरूरत के समय सीधा रोजगार देने के साथ ही आजीविका के साधनों को भी मजबूत कर रहा है। ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए रोजगार के वैकल्पिक साधन भी निर्मित कर रहा है। कोरिया जिले के किसान धर्मपाल सिंह के जीवन में मनरेगा हवा का सुखद झोंका लेकर आया है। खेत में मनरेगा से बने तालाब में मछलीपालन कर वे अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। सिंचाई का साधन मिलने से खेती में अब जोखिम कम हो गया है। पैदावार बढ़ गई है और मुनाफा भी। बेहतर हुई माली हालत के कारण बेटी के थैलेसीमिया से पीड़ित होने पर अच्छा इलाज करा पाए। इलाज के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ा। मुश्किल वक्त में मनरेगा से बना तालाब संजीवनी बना।


मनेंद्रगढ़ विकासखंड के मुसरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव बाही के साढ़े तीन एकड़ जोत के छोटे किसान हैं  धर्मपाल सिंह। मनरेगा से खेत में तालाब खुदाई के पहले उनकी कृषि बारिश के भरोसे थी। धान की खेती के बाद आजीविका के लिए वे मनरेगा के अंतर्गत होने वाले कार्यों और गांव के दूसरे बड़े किसानों के यहां मिलने वाले कामों पर निर्भर थे। अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे। पांच सदस्यों के परिवार में जब उनकी तीसरी संतान दस साल की पूर्णिमा को थैलेसीमिया नामक रक्त न बनने की बीमारी हुई, तो परिवार परेशानी में आ गया।  धर्मपाल सिंह के सामने परिवार के भरण-पोषण के साथ बेटी के लगातार चलने वाले इलाज के लिए पैसों के इंतजाम की भी चुनौती थी।


84 मानव दिवस का सीधा रोजगार 

इस कठिन समय में सहायक मत्स्य अधिकारी हिमांचल नाथ वर्मा की सलाह उम्मीद की किरण लेकर आई। उन्होंने आजीविका संवर्धन और आमदनी बढ़ाने के लिए धर्मपाल सिंह को मछलीपालन की सलाह दी। मनरेगा के तहत खेत में तालाब निर्माण के लिए धर्मपाल सिंह के आवेदन के ग्रामसभा में अनुमोदन के बाद साल 2019-20 में इसके लिए तीन लाख रूपए मंजूर किए गए। तालाब खुदाई के लिए मछलीपालन विभाग को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तालाब निर्माण के दौरान  धर्मपाल सिंह के परिवार को भी 84 मानव दिवस का सीधा रोजगार प्राप्त हुआ, जिसके लिए उन्हें 15 हजार रूपए की मजदूरी मिली।


खेत में तालाब के निर्माण से जहां कम बारिश की स्थिति में फसलों को बचाने का साधन मिल गया, तो वहीं इससे खेतों में नमी भी बनी रहने लगी। तालाब खुदाई के बाद पिछले साल से धर्मपाल सिंह के खेतों में धान की अच्छी उपज होने लगी है। वे धान के बाद अब सब्जी की भी खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त कमाई होने लगी है। पिछले साल रबी सीजन में उन्होंने उड़द लगाकर एक क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया था। तालाब में मछलीपालन का धंधा भी अच्छा चल रहा है। 


खर्च की चुनौतियों का मजबूती से सामना

बीते एक साल से बेटी के लगातार चल रहे इलाज में मछलीपालन से हो रही कमाई ने अच्छा संबल दिया है। थैलेसीमिया के कारण उसे हर महीने खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। धर्मपाल सिंह के मुश्किल समय में मनरेगा से निर्मित तालाब ने बड़ा सहारा दिया है।  बीते छह महीनों में उन्होंने मछली बेचकर 50 हजार रूपए कमाए हैं। इसकी बदौलत उन्होंने परिवार के भरण-पोषण और बेटी के इलाज के खर्च की चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है।

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