Media24Media.com: मनरेगा

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मनरेगा और अमृत सरोवर योजना से ग्रामीण विकास को मिली नई दिशा

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रायपुर। गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एवं अमृत सरोवर योजना के माध्यम से सूरजपुर जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। इन योजनाओं के प्रभाव से न केवल स्थायी जल स्रोतों का सृजन हुआ है, बल्कि मछली पालन, सिंचाई सुविधा, कृषि विस्तार एवं ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

ग्राम पंचायत देवीपुर में मनरेगा के तहत निर्मित अमृत सरोवर आज एक आदर्श जलस्रोत के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका का केंद्र बन गया है। लगभग 10,000 क्यूबिक मीटर जल संग्रहण क्षमता वाला यह तालाब ढलान क्षेत्र में स्थित है, जिसकी गुणवत्ता पूर्ण चिनाई, सिल्ट ट्रैप और वैज्ञानिक संरचना इसे टिकाऊ बनाती है। सरोवर की देखरेख की जिम्मेदारी 11 सदस्यीय ‘कामना स्वयं सहायता समूह’ को सौंपी गई है, जो मछली पालन के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 40,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रहा है। इसके अतिरिक्त, सरोवर से लगभग 80 किसानों की 150 एकड़ भूमि सिंचित हो रही है, जिससे किसान अब खरीफ के साथ-साथ रबी फसल भी उत्पादित कर पा रहे हैं। प्रति एकड़ औसतन 30,000 रुपये तक की आय होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

ग्राम पंचायत भुवनेश्वरपुर में अमृत सरोवर योजना के तहत पुराने तालाब का पुनरुद्धार कार्य सफलता से पूर्ण किया गया है। गर्मियों में सूख जाने वाले इस जल स्रोत को गहरीकरण, विस्तार एवं मजबूती देकर नया जीवन मिला है। इनलेट और आउटलेट नालियों का निर्माण कर जलप्रवाह को नियंत्रित किया गया है तथा छोटे पत्थरों से बाँधों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जिससे मिट्टी कटाव की समस्या समाप्त हुई है। निर्माण कार्य में ग्रामवासियों को मनरेगा के माध्यम से नियोजित कर मजदूरी भुगतान किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिला। वर्तमान में तालाब में मछली पालन प्रारंभ हो चुका है। ग्रामीण मछली बीज संचयन, पालन एवं विक्रय कर आय अर्जित कर रहे हैं, जिससे आजीविका को नया आधार मिला है।

ग्राम पंचायत जगतपुर अंतर्गत खरौक झरिया नाला में अर्दन चेक डेम का निर्माण जल संरक्षण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया है। यह कार्य 4 अप्रैल 2023 से 7 अप्रैल 2024 तक सम्पन्न हुआ, जिसकी कुल लागत 12.88 लाख रुपये रही। इसमें 11.21 लाख रुपये मजदूरी तथा 1.67 लाख रुपये सामग्री मद में व्यय हुए। परियोजना की परिकल्पना ग्राम पंचायत द्वारा की गई और इसे ग्रामसभा के अनुमोदन से क्रियान्वित किया गया। डेम के निर्माण से जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। अब यह नाला गर्मियों में भी सूखा नहीं रहता, जिससे मवेशियों के लिए पीने योग्य पानी और ग्रामीणों को निस्तार हेतु जल उपलब्ध हो रहा है। परियोजना के अंतर्गत चार हितग्राहियों को उनकी निजी भूमि पर कूप एवं डबरी निर्माण का लाभ दिया गया है, जिससे वे अब वर्ष भर खेती कर पा रहे हैं।

निर्माण के दौरान अतिक्रमण हटाना, नरम चट्टानों को तोड़ना, और बंड निर्माण में श्रमिकों को होने वाली कठिनाइयाँ जैसी कई चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन पंचायत एवं प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इन तीनों परियोजनाओं ने ग्रामीणों को जल संरक्षण, रोजगार, कृषि सुविधा और आजीविका के क्षेत्र में नया आत्मबल दिया है। मनरेगा एवं अमृत सरोवर योजनाएँ अब केवल योजनाएँ नहीं, बल्कि ग्राम विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

छत्तीसगढ़ में मनरेगा के अंतर्गत 4 साल का टूटा रिकार्ड

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने फिर से विकास की रफ्तार पकड़ ली है। इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ में मनरेगा के अंतर्गत 4 साल का रिकार्ड टूटा है। छत्तीसगढ़ में मनरेगा न सिर्फ मजदूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है बल्कि उनके जीवन में व्यापक बदलाव भी ला रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के क्रियान्वयन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में माह अप्रैल में 2 करोड़ 57 लाख तथा माह मई में 3 करोड़ 15 लाख रोजगर सृजित हुआ इसप्रकार मई तक 5 करोड़ 82 लाख से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजन कर विगत चार वित्तीय वर्ष के माह अप्रैल और मई में हुए सृजित मानव दिवस का आंकड़ा प्राप्त कर नई उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में मई माह तक 4 करोड़ 81 लाख, वर्ष 2022-23 में मई माह तक 1 करोड़ 19 लाख, वर्ष 2023-24 में मई माह तक 4 करोड़ 49 लाख तथा 2024-25 में मई माह तक 5 करोड़ 72 लाख रोजगार का सृजन हुआ है। मनरेगा अंतर्गत विगत 6 माह में 10 करोड़ 93 लाख मानव दिवस सृजित हुआ वही 1 लाख 73 हजार निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक आजीविका संवर्धन एवं रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।  ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही जल संरक्षण की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। अमृत सरोवर के निर्माण में प्रतिदिन लगभग 59 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जो देशभर  में  सर्वाधिक है। अमृत सरोवर के क्रियान्वयन में प्रदेश के कार्यों का केंद्र स्तर पर सराहना की गई है। आगामी चार वर्षों में 8966 ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह राज्य के प्रत्येक ग्राम पंचायतों को इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग विजय शर्मा ने बताया कि  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नियद नेल्लानार योजनान्तर्गत  माओवाद प्रभावित ईलाके के  87 ग्रामों को चिन्हित कर मनरेगा योजना से वृहद पैमाने पर कार्यों की स्वीकृति कर नियमित रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं,जिससे उक्त अंदरूनी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार सुलभ हो रहा है। मनरेगा अंतर्गत वनाधिकार पट्टाधारी परिवारों को हितग्राहीमूलक कार्यों के माध्यम से जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का सकारात्मक प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश स्तर से विभागीय अधिकारियों को नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा को रोजगार सृजन के साथ आजीविका संवर्धन हेतु  दूरगामी मंशा के अनुरूप कार्यान्वयन के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में नियमित समीक्षा और राज्य स्तर से बेहतर क्रियान्वयन रणनीति का परिणाम है कि मनरेगा नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

 


मनरेगा से मजदूरों के हाथों में काम वहीं किसान हुए खुशहाल

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गरियाबंद। जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत निर्मित व्यक्तिगत भूमि सुधार कार्य से जहां एक ओर मजदूरों के हाथों में काम मिला है, वहीं भूमि सुधार कार्य से किसानों के खेतों की पैदावारी बढ़ी है। ऐसा ही एक किसान ग्राम घुटकुनवापारा निवासी परमानंद है, जिन्होंने अपने कृषि भूमि सुधार कर धान फसल की पैदावारी बढ़ाने में सफलता हासिल की है। किसान परमानंद के कृषि भूमि सुधार हेतु स्वीकृत कार्य से गांव के 361 जॉब कार्डधारी मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध हुई है।

उक्त ग्राम में पर्याप्त मात्रा में कृषि भूमि है, जिसमें से अधिकतर भूमि भर्री है, जहॉ पर फसल का उत्पादन नाम मात्र होता है। ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों ने कृषि भूमि सुधार की जानकारी लेकर अपने कृषि भूमि में सुधार कार्य स्वीकृत कराने आगे आये। जॉब कार्डधारी व किसान परमानंद ने भी अपने जमीन में भूमि सुधार का कार्य कराने हेतु आवेदन किया। जनपद पंचायत के माध्यम से प्राक्कलन तैयार कर प्रशासकीय स्वीकृति हेतु जिला पंचायत को प्रस्तुत की गई। जिसके आधार पर 1.03 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। जनपद पंचायत के तकनीकी मार्गदर्शन से गुणवत्तापूर्ण भूमि सुधार कार्य किया गया, जिसमें स्वयं हितग्राही व उनके परिवार के मजदूरों द्वारा कार्य किया गया है।

कृषक परमानंद निषाद ने बताया कि पहले वह रोजी-मजदूरी के साथ-साथ खेती किसानी का कार्य करता था। परन्तु भर्री जमीन होने से उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने नया करने के प्रयास के साथ भूमि सुधार हेतु पहल किया। अब फसलों की पैदावारी बढ़ने से उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। किसान परमानंद ने भूमि सुधार कार्य होने के पश्चात् अपने खेत में धान का फसल लगाया व मेड़ो में तिल का फसल लगाकर आज अपनी आय को दुगुना कर लिया है। भूमि सुधार होने से पूर्व वह अपने जमीन पर फसल उगा पाने में असमर्थ था। परन्तु भूमि सुधार कार्य करावाने के पश्चात् अब ज्यादा फसल उत्पादन होने से प्रति वर्ष अच्छी आमदनी हो रही है। पूर्व में जमीन में उपज कम होती थी, परन्तु वर्तमान समय में फसल उत्पादन अच्छी होने से वह अपने परिवार का भरण पोषण अच्छे तरीके से कर पा रहा है। बंजर भूमि को मुक्त में फसल योग्य भूमि बनाये जाने में सहयोग के लिए परमानंद खुश होकर शासन प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने हुए वह गांव के अन्य कृषकों को भी भूमि सुधार के लिए प्रेषित कर रहा है। 

प्रवासी मजदूरों के लिए संबल बनी मनरेगा : 241 मजदूरों को मिली 11 लाख से ज्यादा की मजदूरी

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (mgnrega yojana) अपने शुरुआती दौर से ही अकृषि मौसम में जरूतमंद ग्रामीणों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम रही है। इससे ग्रामीण अंचल में जनोपयोगी सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण से एक ओर जहां ग्रामीणों को सुविधाएं सुलभ हुई है।





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वहीं दूसरी ओर इस योजना (mgnrega yojana) के माध्यम से मजदूरी के रूप में मिली राशि से जरूमंद ग्रामीणों का जीवनयापन आसान हुआ है। कोविड-19 कोरोना संक्रमण महामारी के दौरान लॉकडाउन की अवधि में रोजी-रोजगार बंद हो जाने की वजह से घर वापस लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए मनरेगा वरदान साबित हुई।





मनरेगा का जॉब कार्ड





मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वापस लौटे श्रमिकों को मनरेगा का जॉब कार्ड दिए जाने के साथ ही उन्हें गांव में ही काम उपलब्ध कराया गया। लॉकडाउन की अवधि में छत्तीसगढ़ राज्य जरूरतमंद ग्रामीणों और प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में देश का अग्रणी राज्य रहा।





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लॉकडाउन की अवधि अप्रैल-मई महीने में छत्तीसगढ़ राज्य ने रोजाना 25 हजार से ज्यादा जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की थी। धमतरी जिले में देश के विभिन्न प्रांतों से लॉकडाउन के चलते वापस लौटे 241 मजदूरों को उनके गांव में ही मनरेगा के तहत भरपूर काम मिला। इन प्रवासी श्रमिकों ने 5802 मानव दिवस के जरिए 11 लाख 2 हजार 384 रूपए की मजदूरी अर्जित की, जो कोरोना संक्रमणकाल में उनके परिवार के जीवनयापन का सहारा बनी।





मनरेगा के अंतर्गत संचालित कार्य





धमतरी विकासखंड में 16 प्रवासी मजदूरों ने मनरेगा के अंतर्गत संचालित कार्यों में 412 दिवस काम कर 78 हजार 280 रूपए, कुरूद विकासखंड के 47 प्रवासी मजदूरों ने 586 दिवस काम कर एक लाख 11 हजार 340 रूपए, मगरलोड विकासखंड के 16 प्रवासी मजदूरों ने 268 दिन के रोजगार के माध्यम से 50 हजार 920 रूपए और नगरी विकासखंड के 162 मजदूरों 4536 दिवस कार्य अर्जित कर 8 लाख 61 हजार 844 रूपए की मजदूरी हासिल की।









प्रवासी मजदूरों ने मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण, पौधारोपण काम, मिट्टी मुरूम सड़क, नाला सफाई, धरसा सड़क निर्माण, मिनी स्टेडियम, मिश्रित वृक्षारोपण काम, पशुशेड निर्माण, धान चबूतरा निर्माण, निर्मला घाट और डबरी निर्माण जैसे कई काम किया।





प्रवासी मजदूर लेखराम ने दी जानकारी





धमतरी विकासखंड के सेमरा (बी) के प्रवासी मजदूर लेखराम ने बताया कि लॉकडाउन के समय वे ओडिशा के फरसाबुड़ा में भवन निर्माण काम में गये थे। लॉकडाउन के दौरान वह अपने गांव लौटे और रोजगार के लिए ग्राम पंचायत में आवेदन लगाया। उन्होंने बताया कि वह तालाब गहरीकरण, सड़क निर्माण और पचरीकरण निर्माण में 81 दिन काम किए, जिसके एवज में उन्हें 15 हजार 390 रूपए की मजदूरी मिली, जो संकट के समय में परिवार के जीवनयापन का सहारा बनी।





इन लोगों को मिला फायदा





इसी तरह नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत भोथापारा निवासी राजकुमार ने 65 दिन, जैतपुरी के कृष्णा ने 60 दिन, सांकरा के टाकेश्वर कुमार साहू ने 56 दिन कुम्हड़ा के भागीरथी ने 56 दिन, कोलियारी के शैलन्द्री नेताम ने 56 दिन, बेलरबाहरा के देवकी बाई ने 56 दिन और जबर्रा के कमलेश्वर कुमार ने 55 दिन काम कर अपने परिवार का गुजर-बसर करने में सफल रहें।





मजदूरी के एवज में 5 हजार 130 रूपए अर्जित





नगरी विकासखंड के ग्राम पंचायत झुंझराकसा निवासी रूपसिंह नेताम ने बताया कि वे जिला जांजगीर चांपा में पिछले 01 साल से जैविक खाद निर्माण कंपनी में काम थे। 22 मार्च 2020 को जब पूरे भारत भर में कोरोना वायरस कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन हुआ, तब वह अपने गांव लौट आए। मनरेगा के तहत उन्हें मेट का काम दिया गया और उन्हें मजदूरी के एवज में 5 हजार 130 रूपए अर्जित किए।





सोशल डिस्टेसिंग का पालन





झुंझराकसा सरपंच कलेश्वरी मरकाम ने बताया कि कोरोना वायरस कोविड-19 के मद्देनजर ग्रामीणों को सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराते हुए गांव में ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (mgnrega yojana) के तहत काम दिया गया।


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