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रेरा ने कॉलोनी–फ्लैट मेंटनेंस चार्ज से जुड़े नियमों का जारी किया स्पष्टीकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने कॉलोनी और फ्लैट्स के हस्तांतरण और मेंटनेंस चार्ज से जुड़े नियमों का स्पष्टीकरण जारी किया है। इसके तहत किसी भी कॉलोनी या फ्लैट के निर्माण के बाद उसे एक पंजीकृत सोसाइटी को हस्तांतरित किया जाता है, जो उसके रखरखाव और सुविधाओं के लिए जिम्मेदार होती है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवंटित व्यक्ति (आबंटिती) के लिए निर्धारित मेंटनेंस चार्ज का भुगतान करना अनिवार्य है। यदि कोई आवंटित व्यक्ति इसका भुगतान नहीं करता, तो संबंधित सोसाइटी इस मामले को रेरा के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। ऐसे मामलों में बकाया राशि पर ब्याज सहित भुगतान करना होगा।

इसके अलावा, यदि कोई आवंटित व्यक्ति अपने एलॉटमेंट डीड में निर्धारित मेंटनेंस चार्ज या अन्य शर्तों का उल्लंघन करता है, तो इससे जुड़े विवादों की सुनवाई का अधिकार रेरा को होगा। हालांकि, मेंटनेंस चार्ज की दरों में बदलाव से संबंधित मामलों की सुनवाई सहकारिता अधिनियम के तहत की जाएगी।

रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने रेरा की महत्वपूर्ण बैठक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में बैंक खातों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिसूचित बैंक अधिकारियों एवं बिल्डर्स के संगठन (क्रेडाई) के सदस्यों के साथ आज स्थानीय न्यू सर्किट हाऊस में संयुक्त बैठक किया गया। बैठक में रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यपालक निदेशक महेन्द्र डोहरे, पंजाब नेशनल बैंक के जोनल मैनेजर और 28 राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के अधिकारी, साथ ही क्रेडाई (रायपुर और बिलासपुर) के सदस्य शामिल हुए।

रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने कहा कि बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए बैंकों द्वारा खाता संचालन रेरा के नियमों के अनुसार हो। रेरा ने कई अवसरों पर पाया है कि कुछ बैंकों द्वारा खातों के संचालन में अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे निवेशकों और बैंकों के हितों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। इसके लिए बैंकों को नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रेरा प्रावधानों के अनुसार, किसी भी प्रोजेक्ट के लिए तीन प्रकार के खाते आवश्यक हैं। कलेक्शन अकाउंट में जमा राशि का 70 प्रतिशत रेरा डेजिग्नेटेड खाते और 30 प्रतिशत राशि बिल्डर्स के प्रोजेक्ट से संबंधित खाते में अंतरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेरा खाते में जमा 70 प्रतिशत राशि समय-समय पर बिल्डर द्वारा कार्य की प्रगति के आधार पर बिल्डर के खाते में अंतरित किया जाता है, जिससे बिल्डर आबंटितों से प्राप्त राशि का दुरुपयोग नहीं कर सकता है।

बैठक में बैंकों ने रेरा के साथ मिलकर प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने तथा सॉफ्टवेयर में आवश्यक सुधार करने की सहमति दी। रेरा ने भविष्य में खातों की पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का संकल्प लिया। इस संबंध में विस्तृत जानकारी रेरा की वेबसाइट rera.cgstate.gov.in पर प्राप्त कर किया जा सकता है।

रेरा की बड़ी कार्यवाही : निजी हाउसिंग प्रोजेक्ट सिटी आफ वैलेंसिया को हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का आदेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) द्वारा भूखण्ड आबंटितियों के हित में नरदहा स्थित निजी हाउसिंग प्रोजेक्ट सिटी आफ वैलेंसियाको छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का आदेश पारित किया गया है। उक्त प्रोजेक्ट के प्रमोटर आफताब सिद्दकी द्वारा ब्रोशर में दिखाए गए सड़क, बिजली, पानी, सिवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं किए जाने के कारण रेरा द्वारा यह कार्यवाही की गई है।


प्रमोटर द्वारा 2010 में नरदहा में 1072 भूखण्डों का हाउसिंग प्रोजेक्ट तैयार कर वहां सभी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का वादा किया गया था, किन्तु प्रोजेक्ट शुरू होने के पांच साल बाद भी उक्त प्रोजेक्ट में कोई भी विकास कार्य नही किया गया। भूखण्ड आबंटितियों द्वारा रेरा में शिकायत के बाद इस पूरे मामले की सुनवाई की गई और भूखण्ड आबंटितियों के हित में उक्त प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का फैसला किया गया। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड अब इस प्रोजेक्ट को आधिपत्य में लेकर वहां जरूरी मूलभूत सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना दो माह के भीतर रेरा को सौंपेगा।

रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांढ ने बताया कि रायपुर के नरदहा स्थित सिटी ऑफ वेलेंसिया के 130 आबंटितियों द्वारा छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के समक्ष 2019 में परिवाद प्रस्तुत कर प्रोजेक्ट का विकास कार्य पूरा नही होने की शिकायत की गई थी। इस परिवाद की सुनवाई के दौरान यह तथ्य आया कि इस प्रोजेक्ट के प्रमोटर श्री आफताब सिद्दकी नया पारा, रायपुर ने इस प्रोजेक्ट में कुल 1072 भूखण्डों की सर्वसुविधायुक्त आवासीय कॉलोनी का निर्माण करने के लिए वर्ष 2010 में विकास की अनुमति प्राप्त की थी और उसका एक ब्रोशर के माध्यम से भूखण्डों के विक्रय का प्रचार-प्रसार किया गया था, जिसके फलस्वरूप उनके द्वारा 691 भूखण्डों का विक्रय कर 41 करोड़ 3 हजार रूपए प्राप्त किए थे।

प्रमोटर द्वारा आबंटितियों से प्राप्त राशि का निवेश प्रोजेक्ट के विकास के लिए नही किया गया। यह प्रोजेक्ट 2015 तक पूर्ण हो जाना था, लेकिन निर्धारित समय पूरा होने के 6 वर्षो के बाद भी उक्त प्रोजेक्ट पर कोई भी विकास कार्य नही किया गया। प्रमोटर द्वारा नियमानुसार इस प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीयन भी नहीं कराया गया था। उक्त प्रोजेक्ट का विकास अवरूद्ध होने के कारण रेरा द्वारा  इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट प्रकरण क्रमांक 940/2017 विक्रम चटर्जी व अन्य विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के संबंध में जारी निर्देशों के परिपालन में आबंटितियों के हितों के संरक्षण हेतु उक्त प्रोजेक्ट का विकास कार्य पूर्ण कराने को प्राथमिकता देते हुए आदेश पारित किया गया। इस सुनवाई में प्रोजेक्ट के प्रमोटर आफताब सिद्दकी को अपना पक्ष रखने के लिए पूरा मौका दिया गया। भूखण्ड आबंटितियों द्वारा भी प्रोजेक्ट में विकास कार्य छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड से कराने की मांग की गई थी।

रेरा द्वारा पारित आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल उक्त प्रोजेक्ट के विकास के लिए समस्त आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर प्रोजेक्ट विकास की कार्ययोजना दो माह के भीतर रेरा के समक्ष प्रस्तुत करेगा। हाउसिंग बोर्ड नियमानुसार इस प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीयन भी कराएगा। पारित आदेश में कलेक्टर रायपुर को इस प्रोजेक्ट के हस्तांतरण की आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा गया है। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को प्रोजेक्ट हस्तांतरण के बाद प्रोजेक्ट के विकास तथा बंधक और अविक्रित भूखण्डों के विक्रय का अधिकार होगा। भूखण्डों का पंजीकृत विक्रय विलेख निष्पादित करने तथा विक्रय प्रतिफल प्राप्त करने का अधिकार भी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को होगा। यदि किसी पूर्व आबंटिती द्वारा विक्रयशुदा भूखण्ड की राशि भुगतान हेतु शेष है

तो छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल उक्त राशि प्राप्त करने का अधिकारी होगा। गृह निर्माण मंडल प्रोजेक्ट के विकास कार्य की प्रगति और भूखण्डों के विक्रय से प्राप्त राशि के संबंध में मासिक प्रतिवेदन रेरा और कलेक्टर रायपुर को भेजेगा। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल प्राक्कलन और कार्य योजना के अनुरूप निर्धारित समयावधि में प्रोजेक्ट का विकास कार्य पूर्ण करने के बाद रख-रखाव के उद्देश्य से इस प्रोजेक्ट का हस्तांतरण वहां की रहवासी समिति को करेगा। 

रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ऑनलाईन आवेदन प्रक्रिया के संबंध में कार्यशाला 23 से 30 सितंबर तक

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रायपुर। रियल एस्टेट प्रमोटरों के लिए 23 से 30 सितंबर तक छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के कार्यालय में प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।  छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की रजिस्ट्रार डॉ. अनुप्रिया मिश्रा ने बताया कि रियल एस्टेट के प्रोजेक्ट पंजीयन के लिए प्रमोटरों को प्रोजेक्ट के संबंध में ऑनलाईन आवदेन करना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि ऑनलाईन आवेदन करने के बाद प्रमोटरों को प्रोजेक्ट की हार्ड कॉपी में दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।


उन्होंने बताया कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रजिस्टेशन प्रक्रिया (एसओपी) में कुछ आंशिक संशोधन करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया गया है
, यह रेरा के वेबसाईट पर भी उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की रजिस्ट्रार डॉ. अनुप्रिया मिश्रा ने बताया कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के पंजीयन के संबंध में संभागवार आयोजित की जा रही प्रशिक्षण सह-कार्यशाला में प्रमोटरों को पंजीयन से संबंधित विभिन्न जानकारियां दी जाएंगी। इस प्रशिक्षण सह-कार्यशाला में संबंधित संभाग के प्रमोटर्स कार्यशाला में हिस्सा ले सकेंगे।

 डॉ. अनुप्रिया मिश्रा ने बताया कि रायपुर संभाग के प्रमोटर्स के प्रतिनिधियों के लिए कार्यशाला 23 और 26 सितम्बर, बिलासपुर संभाग के लिए 27 सितम्बर, दुर्ग संभाग के लिए 28 सितम्बर, सरगुजा संभाग के लिए 29 सितम्बर और बस्तर संभाग के लिए 30 सितम्बर की तिथि निर्धारित की गई है। निर्धारित तिथियों में कार्यशाला दोपहर 3.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण कार्यालय रायपुर के सभागृह में आयोजित होगी।

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