Media24Media.com: भू-जल

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समशान नाला किसानों और वन्य प्राणियों के लिए बना वरदान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में चलाए जा रहे नरवा कार्यक्रम के तहत भू-जल, सवर्धन एवं संरक्षण के कार्यों के सकारात्मक परिणाम बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भी देखने को मिल रहे है, जहां नाले के उपचार से न केवल भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी के साथ ही पशुओं को भी बारह महीने पानी उपलब्ध हो रहा है। वाटर रिचार्जिंग के उद्देश्य से बलरामपुर वनमंडल के वन परिक्षेत्र  रामानुजगंज स्थित समशान नाला में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण कराया गया। नरवा कार्यक्रम के तहत अब तक 6395 नालों को उपचारित किया जा चुका है। जिसके आशानुकूल परिणाम सामने आ रहे हैं। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि नरवा विकास कार्यक्रम से वन क्षेत्रों में भू-जल स्तर, सिंचाई के रकबे में वृद्धि के साथ जैव-विविधता की स्थिति बेहतर हो रही है।

नरवा विकास कार्यक्रम के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के बलरामपुर वनमंडल के वन परिक्षेत्र रामानुजगंज स्थित समशान नाला में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण कराया गया। स्ट्रक्चर के बनने से लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। साथ ही वन्य प्राणियों को भी पानी मिलने लगा है। इसी तरह नजदीकी ग्राम गरगोड़ी का भू-जल स्तर भी 0.25 मीटर बढ़ गया है। आसपास के कुंए एवं अन्य जल स्त्रोत भी पुनर्जीवित हुए हैं। कुंए और बोरवेल का जल स्तर बढ़ने से 70 हेक्टेयर खरीफ फसल क्षेत्र की भी सिंचाई हो पा रही है। वहीं रबी के मौसम में भी लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र इससे सिंचित होगा। भू जल के बढ़ते स्तर से कृषि के साथ ही वनौषधियों के उत्पादन बढ़ोत्तरी देखी गई है।

सघन वनों के बीच स्थित शमशान नाला का प्रवाह क्षेत्र लक्ष्मण पानी पहाड़ के मध्य बनाया गया है। लक्ष्मण पानी पहाड़ की सुंदरता सहज ही आकर्षित करती है लेकिन स्ट्रक्चर बनने से इसकी सुंदरता अधिक बढ़ गई है, जिससे पर्यटन स्थल के रूप में इसको अब पहचान मिल रही है। औसतन 10-15 व्यक्ति प्रत्येक दिन बाँध में घूमने आते हैं और धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कैम्पा के तहत 2020-21 में बलरामपुर वनमंडल के रामानुजगंज में स्थित समशान नाला वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार किया गया है, जिसकी चौड़ाई 165 मीटर तथा ऊंचाई 12 मीटर है।

वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का कैचमेंट एरिया 320 हेक्टेयर एवं जल भराव क्षेत्र 16.00 हेक्टेयर है। अधिकारियों ने कहा कि स्ट्रक्चर जिस उद्देश्य के साथ तैयार किया गया है, अब वह पूरा हो रहा है। वर्षा जल संचयन न होने, जल के अनियंत्रित दोहन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण भू-जल स्तर लगातार घट रहा है। भू-जल स्तर घटने से कई स्तरों पर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीगसढ़ सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए भूू-जल स्तर बढ़ाने के नवाचारी उपायों के तहत नालों के उपचार का कार्य कर रही है।

 

 

 

छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रहा पुरस्कार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नरवा विकास कार्यक्रम के तहत कैम्पा मद अंतर्गत वनांचल स्थित नालों में काफी तादाद मे भू-जल संरक्षण संबंधी कार्याे का तेजी से क्रियान्वयन जारी हैं। राज्य में इसके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को स्कॉच अवार्डके पर्यावरण श्रेणी के लिए स्वर्ण पुरस्कार हेतु चयन किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्कॉच अवार्ड में चयन होने पर विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।




गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में गत चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी नरवा विकासयोजना के तहत वनांचल स्थित 6 हजार 395 नालों के लगभग 23 लाख हेक्टेयर जल ग्रहण क्षेत्रों को उपचारित करते हुए विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत एक करोड़ 61 लाख से अधिक भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं। यह राष्ट्रीय अवार्ड देश में जनसामान्य की प्रगति की दिशा में कराए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए नई दिल्ली की स्कॉच संस्था द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों तथा संस्थाओं के प्रस्तुतिकरण के आधार पर दिया जाता है।

 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य के वन क्षेत्रों में भू-जल संरक्षण तथा संवर्धन के लिए बड़े तालाब में जल स्त्रोतों, नदी-नालों और तालाबों को पुनर्जीवित करने का कार्य लिया गया है। इनमें वर्ष 2019-20 में 863 नालों का चयन कर लगभग 5 लाख हेक्टेयर भूमि को उपचारित करने के लिए 12 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण  शामिल है। इसी तरह वर्ष 2020-21 में 2 हजार से अधिक नालों का चयन कर 6 लाख हेक्टेयर भूमि के उपचार के लिए 46 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण तथा वर्ष 2021-22 में एक हजार 974 नालों का चयन कर 5 लाख 70 हजार हेक्टेयर भूमि के उपचार के लिए 73 लाख से अधिक भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण शामिल हैं।

इसके अलावा वर्ष 2022-23 में एक हजार 503 नालों का चयन कर 6 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि के उपचार के लिए 29 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण जारी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में नरवा विकास योजना के तहत भू-जल संरक्षण संबंधी कार्यों के कुशल क्रियान्वयन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा का भी विशेष योगदान रहा है।

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