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भेंट मुलाकात करने मुख्यमंत्री पहुंचे कुरूद विधानसभा, किसानों ने बताया शासन की योजनाओं से आई आर्थिक समृद्धि

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रायपुर। कुरूद विधानसभा में भेंट मुलाकात के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां सेमरा ग्राम में ग्रामीणों से शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी। साथ ही उन्होंने इस अवसर पर 82 करोड़ 39 लाख रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया। लोकार्पित होने कार्याे में 45 करोड़ 27 लाख रुपए के 31 कार्य शामिल हैं। 37 करोड़ रुपए की लागत से 34 कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

मुख्यमंत्री ने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कहा कि हम लोग श्रमिकों के लिए भी कार्य कर रहे हैं। भूमिहीन श्रमिकों को राशि दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मई दिवस के अवसर पर श्रमिकों के लिए रायपुर में सम्मेलन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी में अपनी चर्चा में मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से कहा कि आप मन के झारा-झारा न्योता हे। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास तथा जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया, सिहावा विधायक श्रीमती लक्ष्मी ध्रुव, अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी पिल्लै, मुख्यमंत्री के सचिव एस भारतीदासन, संभागायुक्त यशवंत कुमार, एसपी प्रशांत ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारीगण मौजूद रहे।

वर्मी कंपोस्ट से फसल में बीमारी नहीं- मुख्यमंत्री ने सबसे पहले किसानों से बातचीत की। भखारा निवासी एक किसान ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट के बड़े अच्छे नतीजे आये हैं। फसल में बीमारी बिल्कुल नहीं हुआ। इससे काफी बचत हो गई। इसके साथ ही 3 लाख रुपए का ऋण माफ हो गया है। अभी तो सरकार ने 20 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा कर दी है। इससे तो किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। किसान गोविंद राम साहू ने बताया कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की सारी किश्त मिल गई है। एक एकड़ खेत था। कुछ कर्ज था जो कर्जमाफी योजना के चलते माफ हो गया। वर्मी कंपोस्ट की बात आई तो बसंती साहू ने बताया कि हम लोग वर्मी खाद बनाते हैं और इसकी अच्छी खासी बिक्री होती है।

अभी उनके समूह ने 77 हजार रुपए का वर्मी कंपोस्ट बना लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि की ऊर्वरा शक्ति बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि हम जैविक खाद का ही प्रयोग करें। अस्पताल तो आप गांव में भेज देते हैं- जब मुख्यमंत्री ने हाट बाजार में मोबाइल वैन के बारे में पूछा तो अमृत लाल साहू भेंडरवानी ने बताया कि ये तो बहुत अच्छी योजना है। इस योजना में तो हमको अस्पताल तक नहीं जाना पड़ता। अस्पताल ही गाँव में आ जाता है। हाटबाजार जाते हैं तो इलाज करा लेते हैं और मुफ्त में दवा भी मिल जाती है। राजेश्वरी ने बताया कि मेरा बेटा 3 साल का है पहले कमजोर था। मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन का लाभ उठाया और अब पूरी तरह स्वस्थ और तंदरूस्त है।

स्वामी आत्मानंद स्कूल की वजह से हमारे 50 हजार रुपए बचे, बचत से हायर स्टडी में मिलेगी मदद- प्रियांशु दास मानिकपुरी स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि शिक्षक भी बहुत अच्छे हैं। मेरे पिता भी सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। यहां पढ़ाई बहुत अच्छी है। प्रियांशु ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। सान्या गायकवाड ने बताया कि मैं कामर्स संकाय की छात्रा हूँ। सान्या ने बताया कि वो छाती में रहती है वो कुरूद स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ती हूँ। मेरे पिता किसान है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इनके पिता किसान हैं और अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए कितना ध्यान रख रहे हैं। सान्या ने बताया कि इसके पहले उसे 30 हजार रुपए देने पड़ते थे और 50 हजार तक बस का खर्च मिलाकर हो जाता था। अब मैं इस बचे पैसे को हायर एजुकेशन में खर्च करूंगी।

मुख्यमंत्री की घोषणाएं- इस अवसर पर सेमरा बी में मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की। इसमें कुरूद-चर्रा- कातलबोड-नवागांव मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण , गाड़ाडीह-परखंदा-गुदगुदा नारी मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, कुरमातराई, भेण्डरा, कोर्रा जुगदेही, सिलौटी, सेमरा, अरकार मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य शामिल है। साथ ही ग्राम पंचायत सेमरा बी में पशु औषधालय का पशु चिकित्सालय में उन्नयन, नगर पंचायत भखारा में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विभिन्न निर्माण कार्य, ग्राम पंचायत गातापार के अंतर्गत सिर्री और कोर्रा में मुक्तिधाम, ग्राम पंचायत के भेंडरी के बालक प्राथमिक शाला का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय शिवप्रसाद साहू( शिक्षक) के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने ग्राम पंचायत सेमरा बी में धान खरीदी केंद्र सेमरा में शेड एवं खाद गोदाम का निर्माण करने तथा ग्राम कोर्रा में जिला सहकारी बैंक हेतु भवन के निर्माण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 25 मार्च को मुंगेली के सरगांव में आयोजित प्रदेश स्तरीय ‘भरोसे का सम्मेलन‘ में शामिल होंगे

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 25 मार्च को मुंगेली जिले के सरगांव में आयोजित प्रदेश स्तरीय भरोसे का सम्मेलनमें प्रदेश के किसानों, भूमिहीन मजदूरों और पशुपालकों के लिए संचालित न्याय योजनाओं के अंतर्गत कुल 1946 करोड़ 26 लाख रूपए की राशि का हितग्राहियों के खाते में अंतरण करेंगे। 

इसके साथ ही साथ मुख्यमंत्री बघेल महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क योजना के तहत ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्थानों में नवनिर्मित 278 मल्टीएक्टिविटी सेन्टर का लोकार्पण और राजीव गांधी नगरीय भूमिहीन मजदूर न्याय योजना का शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री क्षेत्र के विकास के लिए 731 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत के 73 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत सम्मेलन में अति विशिष्ट के रूप में शामिल होंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे करेंगे।

मुख्यमंत्री बघेल राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2021 की चौथी एवं अंतिम किस्त के रूप में 23 लाख 23 हजार 154 किसानों के खाते में 1793 करोड़ रूपए की राशि, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत 4 लाख 99 हजार 756 पात्र हितग्राहियों के खाते में तृतीय किस्त की 3000 रूपए प्रति हितग्राही के मान से कुल 149 करोड़ 92 लाख 68 हजार रूपए की राशि का अंतरण करेंगे। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रेता, पशुपालकों,

महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों के खाते में 6 करोड़ 34 लाख रूपए की राशि का भुगतान करेंगे। इस राशि में से 8367 गौठानों और गोबर खरीदी केन्द्रों में 1 से 15 मार्च 2023 तक खरीदे गए 01 लाख 67 हजार 932 क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेता, पशुपालकों को 03 करोड़ 68 लाख रूपए, लाभांश राशि के रूप में स्व-सहायता समूहों को 1.08 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों को 1.58 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जाएगा। गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में से 2.02 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा तथा 1.66 करोड़ रूपए की राशि विभाग द्वारा दी जा रही है।

731.54 करोड रूपए की लागत के 73 कार्यों की देंगे सौगात

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरगांव में आयोजित कार्यक्रम में 731 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत के 73 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। बघेल इसमें से 555.42 करोड़ रूपए की राशि से 54 कार्यों भूमिपूजन एवं शिलान्यास तथा 176.12 करोड़ रूपए की लागत से 19 कार्यों का लोकार्पण करेंगे। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं मुंगेली जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टी.एस. सिंहदेव, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्कूल शिक्षा

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, बिलासपुर लोकसभा सांसद अरूण साव, विधायक धरमलाल कौशिक, पुन्नूलाल मोहले, धरमजीत सिंह, अध्यक्ष जिला पंचायत मुंगेली श्रीमती लेखनी सोनू चन्द्राकर, अध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग थानेश्वर साहू, अध्यक्ष नगर पंचायत सरगांव राजीव तिवारी एवं गणमान्य जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूती के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम पर विशेष ध्यान दे : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चलाए जा रहे नरवा, गौठान, रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन मजदूर न्याय योजना का लाभ दिलाने पर अधिकारी विशेष ध्यान दे। मुख्यमंत्री विधानसभा क्षेत्र खल्लारी में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के बाद आज सुबह बागबाहरा रेस्ट हाउस में अधिकारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।



मुख्यमंत्री ने गोबर खरीदी नहीं होने की शिकायत पर अधिकारियों को गोबर की नियमित खरीदी सुनिश्चित करने का निर्देश दिए। इस दौरान गौठानो में वर्मी कम्पोस्ट में मिट्टी मिलने की शिकायत पर उन्होंने कहा कि खाद में मिट्टी व अन्य मिलावट की किसी प्रकार की शिकायत नहीं आनी चाहिए, वर्मी कम्पोस्ट के गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। उन्होंने राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन मजदूर न्याय योजना पर चर्चा करते हुए इस योजना से वंचित परिवारों का यथाशीघ्र सर्वे कराकर उन्हें लाभ दिलाने के साथ ही एग्रीकल्चर में नकली कीटनाशक के शिकायत पर भी जांच के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि वें अधिक से अधिक  किसानों को पैरादान अभियान से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने लोगों को पैरा जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण व अन्य स्वास्थ्यगत नुकसान के बारे में जागरूक करने को कहा। उन्होंने गांजा और अवैध शराब बिक्री पर  पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी हॉस्पिटल में दवाई की उपलब्धता की जानकारी लेते हुए कहा कि हॉस्पिटल को रेफर सेंटर न बनाएं। उन्होंने ग्राम चुरकी में पानी में फ्लोराइड व किडनी संबधी बीमारी के शिकायत का जल्द समाधान करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जिले के नरवा प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली, इस पर सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि ज़िले में 54 प्रोजेक्ट संचालित हैं, मुख्यमंत्री ने नरवा विकास कार्य में तेज़ी से काम करने और कृषकों को इसकी उपयोगिता भी बताने का निर्देश दिए जिससे जिले में दलहन, तिलहन फसलों को बढ़ावा मिल सके। बैठक में उन्होंने जर्जर स्कूल भवनों के लिए फंड रिलीज करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी को जिन स्कूलों में शिक्षक अनुपलब्ध है वहां  समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। स्थानांतरित कर्मचारियों को रिलीव नही करने की शिकायत को जल्दी दूर करने को कहा।

प्रदेश में 17 दिसंबर को मनाया जाएगा छत्तीसगढ़ गौरव दिवस

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार के 04 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर 17 दिसंबर को शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस दिन राज्य के सभी गौठानों, सहकारी सोसायटी परिसरों, धान खरीदी केंद्रों, तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्रों, वनोपज प्रबंधन समितियों के कार्यालय स्थलों, सभी जिलों में संचालित हाट-बाजारों, नगरीय क्षेत्रों के वार्डों में कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारियां दी जाएंगी। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य की जनता के नाम संदेश भी देंगे।



छत्तीसगढ़ गौरव दिवस के आयोजन की जो रूपरेखा तैयार की गई है, उसके अनुसार राज्य के सभी गौठानों में 17 दिसंबर 2022 को सुबह 11 बजे किसानों,  गौठान समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों, पशुपालकों, भूमिहीन मजदूरों,  जनप्रतिनिधियों, स्थानीय निकायों के सदस्यों,  राजीव युवा मितान क्लब के सदस्यों सहित स्थानीय निवासियों को आमंत्रित किया जाएगा एवं शासन द्वारा विगत 04 वर्षों में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हासिल की गई उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही शासन की प्रमुख योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

दोपहर 3 बजे प्राथमिक सहकारी सोसायटी परिसर,  धान खरीदी केन्द्रों पर किसानों को आमंत्रित करके शासन की कृषि संबंधी प्रमुख योजनाओं जैसे कि ब्याज मुक्त ऋण योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना इत्यादि की जानकारी उन्हें दी जाएगी। प्रदेश के वन क्षेत्रों में इसी दिन सुबह 11 बजे तेंदुपत्ता संग्रहण केन्द्रों एवं वनोपज प्रबंधन समिति के कार्यालय स्थलों पर भी किसानों एवं मजदूरों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। सभी जिलों में संचालित हाट बाजार स्थलों में भी लोगों  को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारियां दी जाएंगी।

नगरीय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर सुबह 11 बजे से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वार्ड के निवासियों को आमंत्रित करते हुए शासन की 4 वर्षों की उपलब्धियों से उन्हें अवगत कराया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 17 दिसंबर 2018 को कामकाज शुरू किया था। सरकार बनने के दो घंटे के भीतर ही ढाई हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने, किसानों का कर्ज माफ करने, सिंचाई कर माफ करने जैसे वादे शासन ने पूरे कर दिए। सरकार ने उस वर्ष 2500 रुपए क्विंटल की दर से 80.37 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की थी।

इसके बाद राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत करते हुए किसानों को फसलों पर इनपुट सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई। इस योजना के लागू होने के बाद हर साल किसानों की संख्या, खेती के रकबे और धान खरीदी की मात्रा में बढ़ोतरी होती गई। वर्ष 2019-20 में 84 लाख मीटरिक टन, 2020-21 में 92 लाख मीटरिक टन, 2021-22 में 98 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी हुई। इस साल 110 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत चार सालों में अब तक 16,401 करोड़ 45 लाख रुपए की इनपुट सब्सिडी का भुगतान किया जा चुका है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब इसमें खरीफ की सभी फसलों, उद्यानिकी फसलों, वृक्षारोपण और कोदो-कुटकी-रागी को भी शामिल कर लिया गया है। 

अपने कार्यकाल की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने 17 लाख 82 हजार किसानों पर बकाया 9270 करोड़ रुपए का कृषि ऋण माफ कर दिया था। इसी तरह 17 लाख से अधिक किसानों पर वर्षों से बकाया 244 करोड़ 18 लाख रुपए का सिंचाई कर भी दो घंटे के भीतर माफ कर दिया। इसके बाद वर्ष 2018 से जून 2021 तक का 80 करोड़ रुपए का और बकाया सिंचाई कर भी माफ कर दिया गया। इसी तरह सरकार ने अपना एक और वादा पूरा करते हुए बस्तर के लोहंडीगुड़ा में 1707 किसानों की 4200 एकड़ अधिग्रहित भूमि लौटा दी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का नारा देते हुए सुराजी गांव योजना की शुरुआत की, इसके अंतर्गत संचालित नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का आधार बना।

इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लक्ष्य को भी हासिल किया। न्याय योजनाओं की श्रृंखला की शुरुआत करते हुए राज्य में गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसी योजनाएं भी लागू की गईं। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत 2 रुपए किलो में गोबर और 4 रुपए लीटर में गौमूत्र की खरीदी करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना। राज्य में सुराजी गांव योजना के गरवा घटक के तहत निर्मित 9 हजार 619 से अधिक गौठानों में गोधन न्याय योजना के साथ-साथ आजीविका मूलक गतिविधियों की भी शुरुआत की गई,

इससे हजारों की संख्या में महिला स्व सहायता समूहों की सदस्यों को रोजगार मिला। रीपा योजना की शुरुआत करते हुए 300 गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में उन्नत किया जा रहा है। वन क्षेत्रों के निवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2500 रुपए मानक बोरा से बढ़ाकर 4000 रुपए मानक बोरा कर दी गई। इसी तरह समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले लघु वनोपजों की संख्या 07 से बढ़ाकर 65 कर दी गई। वनक्षेत्रों में लघु वनोपजों के संग्रहण के साथ-साथ उनके वैल्यू एडीशन और प्रसंस्करण के माध्यम से भी सैकड़ों की संख्या में रोजगार के नये अवसरों का निर्माण किया गया।


पंजीकृति भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर आर्थिक सहायता का जोड़ा गया नया प्रावधान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार प्राकृतिक आपदा के विरूद्ध प्रभावित व्यक्तियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की राशि में बढ़ोतरी की गई है। केबिनेट की बैठक में अनुमोदित संशोधन प्रस्ताव के अनुसार कृषि भूमि से गाद/मलबा निकालने हेतु वर्तमान में 12,200 रूपए प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। 



नवीन प्रावधान में इसे बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है। भू-स्खलन/नदी से भूमि हानि के लिए वर्तमान प्रावधान 37,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को नवीन प्रावधान में बढ़ाकर 47,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 6,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 8,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 13,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 17,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, बारहमासी फसल हानि पर वर्तमान में 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 22,500 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।

इसी प्रकार रेशम ( ऐरी, मलबरी, टसर) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 4,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, रेशम (मूगा) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 7,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, टिड्डी नियंत्रण हेतु रसायन स्प्रे पर नवीन प्रावधान राज्य के अंश की सीमा तक प्रावधान किया गया है। बड़े दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 30,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 37,500 रूपए, छोटे दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान में 3,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4,000 रूपए, बड़े सूखे पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 25,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 32,000 रूपए

छोटे सूखे पशु की हानि पर वर्तमान में 16,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 20,000 रूपएपोल्ट्री के लिए वर्तमान प्रावधान 5,000 रूपए प्रति परिवार, 50 रूपए प्रति पक्षी को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10,000 रूपए प्रति परिवार, 100 रूपए प्रति पक्षी किया गया है। इसी प्रकार गौशाला में पशु चारा के लिए वर्तमान प्रावधान 70 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 35 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 80 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़ेपशु, 45 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु, पशुगृह क्षति में 1500 रूपए प्रति शेड को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 3000 रूपए प्रति शेड, सामान्य क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 95,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,20,000 रूपए, पहाड़ी क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 1,01,900 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,30,000 रूपए

पक्का मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 5200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6500 रूपए, कच्चा मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 3200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, झोपड़ी क्षति वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 8000 रूपए, कपड़ा क्षति वर्तमान प्रावधान 1800 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, बर्तन क्षति वर्तमान प्रावधान 2000 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, जनहानि पर वर्तमान प्रावधान 4,00,000 रूपए को नवीन प्रावधान में यथावत रखा गया है। इसी प्रकार अंग हानि (40 से 60 प्रतिशत) पर वर्तमान प्रावधान 59,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 74,000 रूपए, अंग हानि (60 प्रतिशत से अधिक) पर 2,00,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2,50,000 रूपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से कम) वर्तमान प्रावधान 4300 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5400 रूपए

अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से ज्यादा) वर्तमान प्रावधान 12700 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 16000 रूपए, हथकरघा बुनकर को क्षति पर वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए प्रति कारीगर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5000 रूपए प्रति कारीगर, मछुवारों के नाव की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 9600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 15000 रूपए, मछुवारों के नाव की आंशिक क्षति पर 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6000 रूपए, मछुवारों के जाल की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, मछुवारों के जाल की आंशिक क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 3000 रूपए, मछली चारे हेतु इनपुट सब्सिडी पर वर्तमान प्रावधान 8200 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10000 रूपए प्रति हेक्टेयर, पंजीकृत भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर नवीन प्रावधान आपदा की अवधि (30 दिन) तक 02 सदस्य को मनरेगा दर पर आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।  

तैं बने हस सरकार, गरीब के रक्षा करत हस: सियान अनंद राम

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रायपुर। सुकुलदैहान में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भूमिहीन किसान योजना के हितग्राहियों को हो रहे लाभ के बारे में पूछा तो एक ग्रामीण अनंदराम ने भावुक होकर इस योजना से हो रहे लाभ के संबंध में बताया। अनंदराम ने बताया कि गरीबों और किसानों की सुनवाई भी होती है आपने यह दिखाया है। तैं बने हस सरकार, गरीब के रक्षा करत हस।



अनंदराम ने बताया कि मेरे पास जमीन नहीं है। एखर बावजूद मौला पैसा मिल गे। मोर खाता में 6000 रुपया आए है। बहुत बढ़िया योजना हवय। किसान मन बहुत खुश हवय। जेखर जमीन नई हे ओमन भी बहुत खुश हें। मुख्यमंत्री ने इस बुजुर्ग को हो रहे लाभ को सुनकर खुशी जताई और कहा कि हमारी इस तरह की योजनाओं से ऐसे लोगों को जिनके पास किसी ठोस आय नहीं है उन्हें भी राहत मिल रही है।

महासंमुद : सरकारी योजनाओं से ग्रामीणों के जीवन में आ रहे बदलाव को करीब से देखा

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महासंमुद। सचिवालय प्रशिक्षण प्रबंधन संस्थान (आईएसटीएम) और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) नई दिल्ली के सहयोग से केन्द्रीय सचिवालय भारत सरकार के विभिन्न विभागों के दल के 40 असिस्टेंट सेक्शन ऑफीसर ने महासंमुद और बागबाहरा विकासखंण्ड के 20 गांवों में जाकर गांव की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति को करीब से समझा। इसके अलावा वहां के भूमिहीन एवं गरीब परिवारों की समस्याओं का भी अध्ययन किया। केन्द्रीय सचिवालय के विभन्न विभागों से आये ऑफीसर ने ग्रामीण महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक एवं उनकी राजनीति क्षेत्र में सहभागिता तथा विभिन्न केन्द्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं तथा पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीणों के जीवन में गुणवत्तापूर्ण सुधार संबंधी व्यवस्था का भी अध्ययन किया। 



केन्द्रीय सचिवालय से आये दल ने 20 गांव का किया अध्ययन

ये दल दो दिवसीय प्रवास पर आये थे। अध्ययन दल के सदस्यों ने कलेक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर, अधीक्षक भोजराम पटेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एस. अलोक और वनमण्डाधिकारी पंकज राजपूत को अध्ययन दल सदस्यों ने गांव में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों, गौठानों में चल रही मल्टीएक्टिविटी और बिहान दीदियो द्वारा उत्पादित की जा रही  सामग्री गांव से रू-ब-रू- हुए आदि के अनुभव साजा किए। कुछ ऑफिसरों ने गांव के विकास के विचार रखें।

कलेक्टर ने सरकार की फ्लैशिप योजनाओं के बारे में बताया

​कलेक्टर क्षीरसागर ने राज्य सरकार की फ्लैशिप योजनाओं की जानकारी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिले के गौठानों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बड़ी संख्या में विभिन्न विभागों के समन्वय से मल्टीएक्टीविटी व्यवसायों से जोड़कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। नरवा, गरूवा,घुरवा और बाड़ी के तहत जिले में जल संरक्षण एव संवधर्न के साथ-साथ किसानों के लिए सिंचाई के साधन भी उपल्बध हो रहे है। उन्होंने कहा कि आपको गांव में जाकर पता चला होगा कि पालकों से दो रूपये किलो में गोबर खरीदा जा रहा है। गौठानों में समूस की महिलायें वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन कर रही है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

​मुख्य कार्यपालन एस. आलोक ने दल द्वारा दिये गए सुझाव और सस्याओं और उनकी जिज्ञासों का एक-एक कर के समाधान किया।उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में किये जा रहे विकास संबधीं कार्य केे बारे में बातया। उन्होंने कहा कि कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत राज्य सरकार की प्राथमिकता वाले किये जा रहे कार्य के बारे में जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक पटेल ने भी कानून व्यवस्था और गांव के अपने अपने अनुभव साक्षा किए। दल के सभी सदस्यों को जनसंपर्क विभाग द्वारा सरकारी की योजनाओं और उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक और प्रचार सामग्री दी गयी। कलेक्टर द्वारा बिहान समूह द्वारा उत्पादित सामग्री भेंट की।

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में किसानों की समृद्धि और बढ़ता उत्पादन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के मेहनतकश किसानों, मजदूरों और गरीबों का मर्म समझकर जनसरोकार से जुड़े अनेक फैसले लिए। छोटे-बड़े सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदने और राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। उन्होंने ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूरों के बारे में सोचा और राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना लाकर गरीबों-मजदूरों के जेब में पैसे डालने का काम किया। इन नीतियों का परिणाम है कि साल दर साल धान खरीदी का नया रिकार्ड बनता जा रहा है। यही नहीं साल दर साल पंजीकृत किसानों की संख्या और रकबे में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।



समर्थन मूल्य में धान खरीदी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने राज्य के किसानों का हौसला बढ़ाया। जो किसान खेती-किसानी छोड़ चुके थे। उन किसानों ने भी खेती-किसानी की ओर रूख किया और कठिन चुनौतियों के बावजूद पिछले वर्ष लगभग 21.77 लाख किसानों से 98 लाख मीट्रिक टन रिकार्ड धान खरीदी की। किसानों  का उत्साह और सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री बघेल द्वारा इस खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में एक नवम्बर से धान खरीदी करने के निर्णय किसानों के उत्साह को दुगुना कर दिया है।

राज्य में वर्ष 2018-19 में पंजीकृत धान का रकबा जो 25.60 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 30.44 लाख हेक्टेयर हो गया है। इन चार वर्षो में पंजीकृत किसानों की संख्या 16.92 लाख से बढ़कर 25.12 लाख के पार जा पहुची है। खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में 80.30 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2019-20 में 83.94 लाख मीट्रिक टन, 2020-21 में 92.06 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2021-22 में रिकार्ड 98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इस वर्ष किसानों से 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का अनुमान है।

राज्य सरकार द्वारा किसानों से न केवल खरीदी की सुनिश्चित व्यवस्था की है, बल्कि उन्हें तत्काल भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। किसानों को उनके बैंक खातों के जरिये ऑनलाईन भुगतान किया जाएगा। किसानों को पिछला खरीफ सीजन में धान खरीदी के एवज में 19,084 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया है। किसानों-ग्रामीणों की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए नवीन धान खरीदी केन्द्र प्रारंभ किए गए। इस वर्ष 2 हजार 497 से अधिक धान उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी व्यवस्था की गई।

छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों की माली हालत सुधारने के लिए वर्ष 2018 में लगभग 18 लाख 82 हजार किसानों पर चढ़ा अल्पकालीन कृषि ऋण लगभग 10 हजार करोड़ रूपए माफ किया, वहीं 244.18 करोड़ रूपए के सिंचाई कर की माफी ने भी खेती-किसानी और किसानों के दिन बहुराने में महत्वपूर्ण रोल अदा किया। पिछले चार सालों में विभिन्न माध्यमों से किसानों-मजदूरों और गरीबों की जेब में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि डाली गई है। इसका परिणाम यह रहा कि कोरोना संकट काल में जहां देश में आर्थिक मंदी रही, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर खेती-किसानी के लिए सहकारी समिति से ऋण और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी देने का फैसला क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। खेती-किसानी से जुड़े पर्वाें को अब महत्व दिया जा रहा है। विलुप्त हो चुकी रोका-छेका परंपरा को फिर से पुनर्जीवित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ में ऐसे किसान जिनके पास सिंचाई सुविधा थी, उन्हें दोहरी फसल लेने का अवसर मिल रहा है।

कृषि पंपों के ऊर्जीकरण के लिए प्रति पम्प एक लाख अनुदान राशि दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा कृषकों को वित्तीय राहत प्रदाय किये जाने के उद्देश्य से कृषक जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत कृषकों को 3 अश्वशक्ति तक कृषि पम्प के बिजली बिल में 6000 यूनिट प्रति वर्ष एवं 3 से 5 अश्वशक्ति के कृषि पम्प के बिजली बिल में 7500 यूनिट प्रति वर्ष छूट दी जा रही है। इस छूट के अलावा कृषकों को फ्लेट रेट दर पर बिजली प्राप्त करने का विकल्प भी दिया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए विद्युत खपत की कोई सीमा नहीं रखी गई है।

बस्तर जिले का लोहण्डीगुड़ा इलाके में इस्पात संयंत्र के लिए पूर्व में किसानों से अधिग्रहित की गई भूमि उन्हें लौटाई गई। किसानों को उनकी जमीन उन्हें फिर से सौंपकर जमीन का मालिक बना दिया है। किसान अब बेफिक्र होकर खेती किसानी का काम अपनी जमीन में करने लगे हैं। लोहण्डीगुड़ा क्षेत्र में निजी इस्पात संयंत्र के लिए 1700 से अधिक किसानों की लगभग 5 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना से राज्य में समृद्ध होती खेती-किसानी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें खरीफ और उद्यानिकी की सभी प्रमुख फसलों को शामिल कर लिया है। कोदो, कुटकी और रागी के उत्पादक किसानों को भी इस योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से 9 हजार रूपए की सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। धान के बदले अन्य फसलों की खेती या वृक्षारोपण करने वाले किसानों को 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से इनपुट सब्सिडी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गांव, मजदूर और किसान को फोकस में रखकर काम रही है। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 356.14 करोड़ रूपए से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिला। इस कड़ी में 3 फरवरी 2022 को लोकसभा सांसद राहुल गांधी के हाथों राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाकी भी शुरूआत की गई है। 4 लाख 66 हजार ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को प्रति वर्ष 7 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जा रही है।

त्यौहार के पहले सभी वर्गो के पास पैसा आने से बाजार में बढ़ेगी रौनक : सीएम

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां उनके निवास कार्यालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य सरकार की तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं-राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना तथा राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत हितग्राहियों के खाते में 1866 करोड़ 39 लाख रूपये की राशि ऑनलाइन अंतरित की। मुख्यमंत्री बघेल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजनाकी वर्ष 2021-22 की तीसरी किस्त के रूप में प्रदेश के 23 लाख 99 हजार 615 किसानों को कुल 1745 करोड़ रूपए, ’राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ 



के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 की राशि के रूप में 4 लाख 66 हजार 880 हितग्राहियों को 115 करोड़ 80 लाख 32 हजार रूपए और गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 5 करोड़ 59 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि दीपावली का त्यौहार नजदीक है और आप सभी के खाते में राशि आने से त्यौहार अच्छे से मना सकेंगे। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना तथा राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के हितग्राहियों को लगभग 1900 करोड़ की राशि अंतरित की गई, जिससे प्रदेश के किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, स्व सहायता समूहों की महिलाओं और गौठान समितियों को लाभ प्राप्त होगा। 



मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों का डी.ए. बढ़ाकर 33 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे कर्मचारी वर्ग में भी खुशी का माहोल है। त्यौहार के पहले सभी वर्गो के पास पैसा आने से बाजार में भी रौनक रहेगी। बैठक में मंत्री रविन्द्र चौबे, टी.एस.सिंह देव, ताम्रध्वज साहू, मोहम्मद अकबर, प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, डॉ.शिवकुमार डहरिया, अमरजीत भगत, जयसिंह अग्रवाल, श्रीमती अनिला भेंड़िया, गुरू रूद्र कुमार, उमेश पटेल, मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, डॉ. एस.भारतीदासन, अंकित आनंद, उपसचिव सुश्री सौम्या चौरसिया एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

दीपावली के पहले छत्तीसगढ़ के किसानों, ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों के खाते में 1800 करोड़ रूपए का करेंगें भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि दीपावली के पहले 17 अक्टूबर को किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किस्त के साथ राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना और गोधन न्याय योजना की राशि का भुगतान हितग्राहियों को किया जाएगा। किसानों, भूमिहीन कृषि मजदूरों और गोबर विक्रेताओं को लगभग 1800 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा दीपावली हम सब के लिए बड़ा त्यौहार है। 



दीपावली के पहले राशि मिलने से हम सब धूमधाम से दीपावली मनाएंगे। मुख्यमंत्री बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 8 करोड़ 13 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण करते हुए यह जानकारी दी। इस राशि में से गोबर विक्रेता पशुपालकों, ग्रामीणों को 5.34 करोड़ रुपए की राशि, गौठान समितियों को 1.69 करोड़ और महिला स्व सहायता समूहों को 1.11 करोड़ रूपए की लाभांश राशि वितरित की गई। 

गोबर विक्रेताओं को आज भुगतान की गई राशि को मिलाकर गोबर खरीदी के एवज में अब तक 170.34 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इस अवसर पर गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अवनीश शरण, संचालक पशुधन श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, कृषि विभाग के उप सचिव सुश्री तूलिका प्रजापति भी उपस्थित थीं।

किसानों से पैरादान की अपील

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में किसानों से पैरादान की अपील करते हुए कहा कि धान की कटाई शुरू होने वाली है। किसान पैरा न जलाएं, गौठानों में मवेशियों के चारे के लिए पैरादान करें। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था होने से वे खेत में नही जाएंगे। इससे खरीफ फसल के साथ-साथ उन्हारी फसल भी बचेगी। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों से उन्हारी फसलों, सरसों, तिवरा, अलसी आदि के बीज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 1 नवम्बर से शुरू की जाएगी। अधिकारियों को बारदाने सहित धान खरीदी केन्द्रांे में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे किसानों को धान बेचने में असुविधा न हो।

ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों में गौठान शुरू करने तैयार करें कार्ययोजना

बघेल ने कहा कि प्रदेश में अब तक 10 हजार 624 गौठानों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 8408 गौठान निर्मित हो चुके हैं। अब ग्राम पंचायतों के बाद उनके आश्रित गांवों में गौठान की मांग आ रही है। इन गांवों में गौठान प्रारंभ करने की कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब गांवों में पहले पहल गांवों में गौठान बने तो महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं में गौठान से जुड़कर वहां आजीविका मूलक गतिविधियां चलाने के लिए होड मच गई। महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट के साथ सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन, मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ी।

अब विगत 2 अक्टूबर को 300 रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क के शुभारंभ के बाद अनेक गांवों से रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ करने की मांग आ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे गांवों में रीपा शुरू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। हमें युवाओं को भी गौठानों से जोड़ना होगा। गौठानों में इन पार्को में वर्किंग शेड, पहंुच  मार्ग निर्माण और बिजली, पानी की व्यवस्था के लिए प्रति गौठान दो-दो करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। गौठानों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने से यहां ग्रामीण युवाओं को अपने उद्यम शुरू करने में आसानी होगी। 

कृषि उपज मण्डी की जमीन पर रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क शुरू करने कार्ययोजना बनाएं

मुख्यमंत्री बघेल ने कृषि मंत्री द्वारा कृषि उपज मण्डी की खाली पड़ी जमीन में रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ करने के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि मंडियों में शेड और चबूतरे बने हैं, लेकिन इनका उपयोग नही हो पा रहा है। यहां रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क शुरू किए जा सकते हैं। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में भी यदि अर्बन इंडस्ट्रीयल पार्क प्रारंभ किए जाएं और इससे युवाओं को जोड़ा जाए तो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने मण्डी की खाली जमीन पर कृषि सेवा केन्द्र प्रारंभ करने गौठानों में विभिन्न आय मूलक गतिविधियों के लिए महिलाओं और युवाओं की ट्रेनिंग शुरू करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में अब तक 53 हजार 231 लीटर गौ मूत्र का क्रय किया गया है, जिससे तैयार कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत की बिक्री से महिला समूहों को 10.05 लाख रूपए की आय हुई है। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस अवसर पर कहा कि गांवों के गौठान, गोधन न्याय योजना और रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क आने वाले समय में हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूलभूत आधार बनेंगे। चौबे ने कहा कि राज्य शासन की योजनाओं से छत्तीसगढ़ आज देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है।

चौबे ने गोधन न्याय योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना के तहत अब तक 170 करोड़ के गोबर की खरीदी की जा चुकी है। इस योजना में गौठान समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को 162 करोड़ 21 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ-साथ गौठानों में विभिन्न गतिविधियों में संलग्न 11 हजार 187 महिला स्व सहायता समूह की 83 हजार 874 महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट सहित विभिन्न आय मूलक कार्यो से 81 करोड़ 84 लाख रूपए की आमदनी हुई है। मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।

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