Media24Media.com: भारतीय खाद्य निगम

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कस्टम मिलिंग में लापरवाही बरतने वाले 9 राइस मिलरों पर कार्रवाई

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रायपुर। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के कस्टम मिलिंग का चावल समय पर भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में जमा करने में लापरवाही बरतने वाले 9 राइस मिलरों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। जिला खाद्य अधिकारी श्रीमती श्वेता अग्रवाल ने बताया कि तहसीलदार, सहकारिता विस्तार अधिकारी, खाद्य निरीक्षको और मार्कफेड के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा राईस मिलों में भौतिक सत्यापन किया गया।


भौतिक सत्यापन में पाये गये धान की मात्रा का मिलान ऑनलाईन रिपोर्ट से करने पर कम पाए जाने पर कुल 2 लाख 5 हजार 229.20 क्विंटल धान जप्त की गई। खाद्य अधिकारी ने बताया कि मेसर्स जे.पी. अग्रवाल सन्स कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड अजनी गौरेला के राइस मिल में भौतिक सत्यापन में धान और चावल की मात्रा का मिलान किया गया। ऑनलाईन रिपोर्ट के अनुसार धान एवं चावल का स्टाक नहीं पाये जाने 20041.20 क्विंटल धान जप्त किया गया।

इसी तरह धान एवं चावल की मात्रा का मिलान ऑनलाईन रिपोर्ट से करने पर कम पाए जाने पर मेसर्स जेपी अग्रवाल एग्रोटेक अंजनी गौरेला के राईस मिल में 18650 क्विंटल धान की जप्ती की गई। मेसर्स गर्ग फूड प्रोडक्टस गौरेला के राईस मिल में 38892 क्विंटल धान, मेसर्स मां नर्मदा एग्रोटेक गौरेला के राईस मिल में 33292 क्विटल धान, मेसर्स मां नर्मदा राईस प्रोडक्ट गौरेला के राईस मिल में 74210 क्विटल धान, मेसर्स लक्ष्मी एग्रो इंडस्ट्रीज पेण्ड्रा के राइस मिल में 11493 किवंटल धान, मेसर्स दक्ष फूडस्ट्रीज पेण्ड्रा के राईस मिल में 2965.60 क्विंटल धान, मेसर्स शिवानी ट्रेडर्स पेण्ड्रा के राईस मिल में 640 क्विंटल धान और मेसर्स बुआजी फर्म्स प्रा. लिमिटेड पेण्ड्रा के राईस मिल में 7044.80 क्विंटल धान जप्त की गई।

भारतीय खाद्य निगम: भारतीय खाद्य निगम ने दूसरी ई-नीलामी में 901 करोड़ रुपये में 3.85 एलएमटी गेहूं की बिक्री की

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गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिये यह ई-नीलामी मार्च 2023 के दूसरे सप्ताह तक हर बुधवार को की जायेगी

भारतीय खाद्य निगम ने 15 फरवरी, 2023 को जो दूसरी ई-नीलामी की थी, उसमें 1060 से अधिक बोलीकर्ताओं ने हिस्सा लिया और 3.85 एलएमटी गेहूं की बिक्री की गई। निगम ने 15.25 एलएमटी गेहूं के भंडारण की नीलामी में पेशकश की थी।

दूसरी ई-नीलामी में 100 से 499 एमटी की मात्रा की अधिकतम मांग थी। इसके बाद 500-1000 एमटी मात्रा की मांग दूसरे नंबर पर रही। तीसरे नंबर पर 50-100 एमटी गेहूं की मांग रही। इससे पता चलता है कि नीलामी में छोटे और मंझोले आटा मिल वालों तथा कारोबारियों ने सक्रिय हिस्सा लिया। एकमुश्त 3000 एमटी की अधिकतम मात्रा के लिये केवल पांच बोलियां ही प्राप्त हुई थीं।

नीलामी में एफसीआई ने भार-आधारित औसत दर 2338.01 रुपये/कुंतल जारी की थी। दूसरी ई-नीलामी में एफसीआई ने 901 करोड़ रुपये अर्जित किये।

देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिये मंत्रियों के समूह द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के अनुपालन में एफसीआई ई-नीलामी के लिये गेहूं की पेशकश कर रहा है। ई-नीलामी के जरिये गेहूं की बिक्री देशभर में मार्च 2023 के दूसरे सप्ताह तक हर बुधवार को की जायेगी।

भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, सहकारिताओं तथा केंद्रीय भंडार, एनसीसीएफ और नाफेड जैसे संघों के लिये बिना ई-नीलामी के 03 एलएमटी गेहूं का आवंटन किया है। पहले रियायतों दरों पर गेहूं 23.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उठाया जा सकता था। इसी तरह इस योजना के तहत आटा भी जनता को एमएसपी की दर के मद्देनजर उपलब्ध कराया जाता रहा है, जो 29.50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं था। भारत सरकार ने इन दोनों दरों में संशोधन कर दिया है, जिसके अनुसार गेहूं 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम और आटा एमएसपी की दर से ऐसे भंडारण से उठाया जा सकता है, जिसकी कीमत 27.50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं होगी।

भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) को उपरोक्त योजना के तहत आठ राज्यों में 68,000 एमटी गेहूं उठाने की अनुमति दी गई है। इस योजना के तहत नाफेड को 01 एलएमटी गेहूं का आवंटन और केंद्रीय भंडार को 1.32 एलएमटी गेहूं का आवंटन किया गया है, ताकि देशभर में आटे की कीमत को नीचे लाया जाये। एफसीआई से भंडारण उठाने के बाद आटे की बिक्री इन्हीं सहकारिताओं द्वारा संचालित की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि ओएमएसएस (डी) योजना के जरिये दो महीनों की अवधि में बाजार में ओएमएसएसडी (डी) के तहत बिक्री के लिये 30 एलएमटी गेहूं रखा गया था, जिसमें से 25 एलएमटी से अधिक गेहूं उठा लिया गया है। यह गतिविधि अनेक चैनलों के माध्यम से चलाई जा रही है। इसका भी गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में भूमिका रहेगी तथा खाद्य अर्थव्यवस्था में कीमतों को स्थिर करके आम आदमी को राहत मिलेगी।


FCI ने ई-नीलामी के पहले दिन होलसेल कंज्यूमर्स को 8.88 लाख टन गेहूं बेचा

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नई दिल्ली : भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) (Food Corporation of India (FCI)) ने ई-नीलामी बिक्री योजना (E-Auction Sale Plan) के तहत घरेलू बाजार में 22 राज्यो को 8 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से ज्यादा गेहूं बेचा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।


मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि एफसीआई ने बुधवार को 22 राज्यों में ई-नीलामी के पहले दिन खुला बाजार बिक्री योजना के तहत घरेलू बाजा़र में 8.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की बिक्री की। मंत्रालय के मुताबिक एफसीआई केंद्रीय पूल स्टॉक से ई-नीलामी के लिए निर्धारित 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के स्टॉक में से 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री करेगा।

गेहूं की पहली ई-नीलामी में 1100 से ज्यादा बोली लगाने वाले उपस्थिति थे। राजस्थान में गेहूं की ई-नीलामी के लिए बोली 2 फरवरी को आयोजित की गई है। एफसीआई ई-नीलामी के माध्यम से गेहूं की बिक्री देशभर में 15 मार्च, 2023 तक प्रत्येक बुधवार को 2 बजे तक जारी रहेगी। मंत्रालय ने बताया कि देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए ई-नीलामी की जा रही है।


उपार्जित धान का समय पर कस्टम मिलिंग हो: CM बघेल

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खरीफ वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जा रहे धान का समय पर कस्टम मिलिंग कराने के संबंध में केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में राज्य की कस्टम मिलिंग की क्षमता का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय पूल के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।





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मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल (Union Food Minister Piyush Goyal) को लिखे पत्र में कहा है कि भारतीय खाद्य निगम के द्वारा पूर्व खरीफ वर्षो 2016-17 एवं उसके पहले उसना के साथ-साथ अरवा चावल भी उपार्जित किया जाता रहा है। अतः एफ.सी.आई. द्वारा राज्य की आवश्यकता से अतिशेष चावल उसना के साथ-साथ अरवा चावल के रूप में भी लिया जाना होगा ताकि डी.सी.पी. योजना अंतर्गत उपार्जित समस्त धान का समय पर निराकरण किया जा सके और धान के रख-रखाव में कोई क्षति न हो।  





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 मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा है राज्य में स्थापित 400 उसना राईस मिलों की उसना मिलिंग क्षमता 5.68 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह और 1504 अरवा मिलों की अरवा मिलिंग क्षमता 18.83 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह है। इसे ध्यान में रखते हुए खरीफ वर्ष 2020-21 में भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति दी जाए।





धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन





 उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जाने वाले धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन चावल लेने की कार्ययोजना का अनुमोदन भारत सरकार द्वारा किया गया है। इसमें से भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत अनुमानित सरप्लस 40 लाख मेट्रिक टन चावल उपार्जित किया जाएगा तथा शेष 20 लाख मेट्रिक टन (एन.एफ.एस.ए. अंतर्गत 15 लाख मेट्रिक टन अरवा व स्टेट पूल अंतर्गत 4.80 लाख मेट्रिक टन अरवा एवं 0.20 लाख मेट्रिक टन उसना) चावल राज्य में पीडीएस की आवश्यकता हेतु छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में उपार्जित किया जाएगा।


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