Media24Media.com: बाल विकास

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’बच्चों से जुड़ी योजनाओं का हो शत.प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन’

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नौनिहालों के पोषण और उनको सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों के समुचित विकास हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित योजनाओं की जिलेवार नियमित मॉनिटरिंग सचिव स्तर से की जाए तथा आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारभूत संरचनाए बजट और संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभाग बच्चोंए किशोरियों और महिलाओं के पोषण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों की देखभाल और पोषण जितनी संवेदनशीलता और कुशलता से की जाएगीए उनका शारीरिक और मानसिक विकास उतना ही प्रभावी और सुदृढ़ होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चे हमारे देश के भविष्य की नींव हैं और इस नींव को मजबूत करने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अमले को जमीनी स्तर पर सक्रियता और स्वप्रेरणा के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को पूरक पोषण आहार और विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो।

उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहारए गर्म भोजनए उसकी मात्राए गुणवत्ता और कैलोरी मानकों सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की और वितरण की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री साय ने पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित 197 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जानकारी ली तथा विशेष पिछड़ी जनजाति ;च्टज्ळद्ध समुदाय के बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों की समीक्षा करते हुए अपेक्षित सुधार लाने हेतु ठोस प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सूचकांकों के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आंकलन संभव होता हैए और जहां भी कमी दिखाई देए वहां त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि यह प्रगति इसी प्रकार सतत बनी रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास पर छोटी.छोटी बातों और व्यवहार का गहरा प्रभाव पड़ता हैए इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संवेदनशीलता के साथ बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव बनाएं।

मुख्यमंत्री साय ने विभागीय अमले के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहाए ताकि वे तकनीकी रूप से दक्ष और अनुसंधानपरक दृष्टिकोण के साथ परिणामोन्मुखी कार्य कर सकें।

बैठक में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियानए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनाए सखी वन स्टॉप सेंटरए शक्ति सदनए महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइनए महिला कोषए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओए मिशन वात्सल्य तथा अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़ेए मुख्य सचिव अमिताभ जैनए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंहए मुख्यमंत्री के सचिव पीण् दयानंदए राहुल भगतए महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदीए संचालक पीण् एसण् एल्मा सहित विभाग के अधिकारी.कर्मचारी उपस्थित थे।

मंत्री राजवाड़े ने समाधान शिविर में जनता से किया सीधा संवाद, कहा-जनहित में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आज सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खोड़ में समाधान शिविर में उपस्थित रहीं। छत्तीसगढ़ सरकार की संवाद से समाधानपहल के तहत आयोजित इस शिविर में खोड़ क्लस्टर के आठ ग्राम पंचायतों-बेदमी, छतोली बीजो, इंजानी, करवा, केसर, खोंड़, मसंकी और टमकी के नागरिकों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं शासन-प्रशासन के समक्ष रखीं।

शिविर के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल संकट और सौर ऊर्जा से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जिस पर मंत्री राजवाड़े ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और क्रेडा के अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने दोनों विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि कार्यों में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, और इसमें लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। 

इस दौरान मंत्री राजवाड़े ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवाद से समाधानपहल की सराहना की और कहा कि इस अभियान के माध्यम से शासन सीधे जनता से जुड़ रहा है और समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहा है। शिविर के दौरान ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं के निराकरण के साथ ही कई नए आवेदन भी प्राप्त हुए। ग्रामीणों ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी समस्याएं सीधे शासन तक पहुंचाने का सशक्त मंच मिला है। इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने देवी अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति में समाज सेवा में योगदान देने वाली पाँच महिलाओं को साड़ी और नारियल भेंट कर सम्मानित किया।

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से मंत्री राजवाड़े ने की सौजन्य मुलाकात

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रायपुर। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा  देवी से छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने नई दिल्ली में  सौजन्य मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि  डबल इंजन की सरकार में छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास के कार्यक्रमों के लिए किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी। इस दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े से उन्होंने छत्तीसगढ़ में महिलाओं के और बच्चों के लिए संचालित किए जा रहें कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, भविष्य की योजनाओं और रणनीतियों पर सार्थक चर्चा भी की। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण एवं पोषण अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

श्रीमती राजवाड़े ने केंद्रीय मंत्री को छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही महतारी वंदन योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन एवं कुशल नेतृत्व में प्रदेश के समग्र विकास हेतु लगातार कार्य हो रहे हैं। जिससे राज्य हर क्षेत्र में प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

महासमुंद : सम्मान दिवस में उत्कृष्ट कार्य के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं व सहायिकाएं सम्मानित

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महासमुंद। राज्य शासन के निर्देशानुसार परियोजना क्षेत्र के बच्चों, गर्भवती, शिशुवती माताओं को समेकित बाल विकास सेवा योजना अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने में अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाली प्रत्येक परियोजना से एक-एक उत्कृष्ट ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को सम्मानित करने आज बाल दिवस के अवसर पर सम्मान दिवसके रूप में मनाया गया। सम्मान दिवस का आयोजन आज स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उषा पटेल ने इस अवसर पर सभी सम्मानित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं व सहायिकाओं को बधाई देते हुए कहा कि फील्ड में ये 24 घंटे समर्पित भाव से कार्य करती है।


बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके लालन-पालन तक की जवाबदारी उनके उपर होती है। वास्तव में वे बच्चों को मां की तरह देखरेख करती हैं। कोरोना काल के दौरान उन्होंने असाधारण कार्य किए हैं। उन्होंने सभी पुरस्कृत कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विशिष्ट अतिथि नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती राशि महिलांग ने कहा कि वास्तव में महिला बाल विकास विभाग की कार्यकर्ता और सहायिका विभाग की धुरी है। इनके ममत्व और संवेदनशीलता से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है। ये कुपोषण को मिटाने के लिए योद्धा की तरह काम करती है। किसी भी परिस्थिति में काम करने के लिए तैयार रहती है। वास्तव में सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका सम्मान की हकदार है। कार्यक्रम को पार्षद देवीचंद राठी एवं महेन्द्र जैन ने संबोधित करते हुए बधाई और शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास समीर पांडेय ने बताया कि बच्चों के समग्र विकास के लिए भाषा, संज्ञानात्मक, शारीरिक, रचनात्मक और सामाजिक-भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित करने वाली ईसीसीई गतिविधियाँ भी संचालित की गईं। इस आयोजन का उद्देश्य जिले के विभिन्न परियोजना और सेक्टर के अंतर्गत आने वाले आंगनबाडी केन्द्रों में ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका द्वारा किए जा रहे बेहतर प्रयासों को प्रस्तुत करने का अवसर देना, ईसीसीई के गतिविधियों के महत्व को समझने एवं नियमित इसे केन्द्रों में संचालित करने की दिशा में उन्मुख करना है। साथ ही आयोजन में अभिभावक के रूप में आए पालक, अन्य कार्यकर्ता/सहायिका और समुदाय के सदस्यों को बीच केन्द्रों में हो रहे प्रयासों से आंगनवाड़ी को सकारात्मक छवि प्रस्तुत करना है जिससे आगामी माह से सभी केन्द्रों में ईसीसीई की गतिविधियाँ संचालित की जा सके।

सम्मान समारोह में 12-12 कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मानित किया गया। जिसमें महासमुंद शहरी परियेजना अंतर्गत बेमचा केन्द्र की कार्यकर्ता श्रीमती त्रिवेणी चंद्राकर व श्यामा प्रसारद मुखर्जी केन्द्र की सहायिका श्रीमती सविता साहू, महासमुंद ग्रामीण परियोजना अंतर्गत खट्टी क्रमांक 3 की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अहिमन घृतलहरे व लाफिनकला केन्द्र 01 की सहायिका तिजिया निषाद, बागबाहरा परियोजना अंतर्गत सिर्री केन्द्र की कार्यकर्ता चन्द्रप्रभा चंद्राकर व चंदरपुर केन्द्र की सहायिका विम्बा बाई, बसना परियोजना अंतर्गत कुरमुंडी केन्द्र की कार्यकर्ता श्रीमती नीलिमा बीसी व चिमेरकेल केन्द्र की सहायिका श्रीमती पद्मा बाई, पिथौरा पिरयोजना अंतर्गत लोहरीनडोंगरी केन्द्र की कार्यकर्ता प्रभावशालिनी चौहान व बुंदेली केन्द्र की सहायिका उषा ठाकुर एवं सरायपाली परियोजना अंतर्गत बैतारी केन्द्र की कार्यकर्ता सुश्री लक्ष्मी सेठ व किसड़ी की सहायिका श्रीमती दयमती को सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर परियोजना अधिकारी श्रीमती शैल नाविक, पर्यवेक्षक शीला प्रधान, कुंती यादव एवं सभी पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका मौजूद थी।

 

प्रवर्तकता और मिशन वात्सल्य कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का किया जाएगा चिन्हांकन

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रायपुर। एकीकृत बाल संरक्षण योजना, मिशन वात्सल्य महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत प्रवर्तकता कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के देख-रेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को चिकित्सकीय, पोषण, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु परिवारों को अनुपूरक सहायता के रूप में धन राशि प्रदान किया जाना है, जिससे बच्चे के जीवन स्तर की गुणवत्ता में सुधार हो सके और बालक का सर्वाेत्तम हित सुनिश्चित किया जा सके।

महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली हुई जानकारी के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 यथा संशोधित 2021 का एक प्रमुख मार्गदर्शी सिद्धांत यह है कि किसी बच्चे को अंतिम उपाय के रूप में संस्थागत देखरेख में रखा जावे। परिवार तथा पारिवारिक वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सर्वाधिक अनुकूल होता है। अतः बच्चों के पुनर्वास और समाज में एकीकरण के लिए परिवार एवं समुदाय आधारित विकल्प में प्रवर्तकता (स्पॉसरशिप) का प्रावधान रखा गया है। जिसके तहत प्रवर्तकता हेतु पात्र बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 4 हजार रूपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

प्रवर्तकता की निवारक और पुनर्वास 02 श्रेणियां है। निवारक श्रेणी में जैविक परिवार में निवासरत बालकों को परिवार में बने रहने, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 4 हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे बेघर, बालश्रम, बाल विवाह, पलायन इत्यादि के लिए मजबूर न हो। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ऐसे परिवारों या बच्चों का चिन्हांकन सामाजिक कार्यकर्ता, आऊटरीच वर्कर, स्वयं सेवकों, वार्ड समिति या ग्राम पंचायत की मदद से किया जाता है। पुनर्वास श्रेणी अंतर्गत ऐसे बच्चों को 4 हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो परिवार के आर्थिक अभाव के कारण मिशन वात्सल्य के तहत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत है, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर परिवार में पुनर्वासित किया जाता है। 

निवारक प्रवर्तकता के तहत समुदाय में निवासरत ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है तथा विस्तारित परिवार की देखरेख में रहते है। एकल माता-पिता के बच्चे, विशेषकर विधवा या तलाकशुदा या परिवार द्वारा परित्यक्त माता के बच्चे। माता-पिता द्वारा परित्यक्त बच्चे, जो विस्तारित परिवार की देखरेख में रहते है। ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता जेल मे हो। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता अक्षम या बच्चों की देखभाल करने में आर्थिक और शारीरिक रूप से असमर्थ हो। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 यथा संशोधित 2021 के अनुसार देखरेख और संरक्षण के आवश्यकता वाले बच्चे जैसे बेघर, प्राकृतिक आपदा के शिकार, बालश्रम, बाल विवाह के शिकार, अवैध मानव परिवहन किये गये बच्चे, एचआईवी, एड्स प्रभावित बच्चे, निःशक्त बच्चे, गुमशुदा या भागे हुए बच्चे, बाल भिक्षुक या सड़क पर रहने वाले बच्चे, प्रताडित या शोषण किये गये बच्चे। 

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के हितग्राही बच्चे इन सभी श्रेणी के बच्चे 4 हजार रूपये प्रति माह आर्थिक सहायता प्राप्त करने के पात्र है। प्रवर्तकता के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 72 हजार रूपये प्रतिवर्ष और अन्य क्षेत्रों के लिए 96 हजार रूपये प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रवर्तकता कार्यक्रम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता 18 वर्ष तक की आयु पूर्ण होने तक मिल सकती है।

प्रवर्तकता कार्यक्रम का क्रियान्वयन जिला बाल संरक्षण ईकाई द्वारा किया जाता है। प्रवर्तकता हेतु पात्र बच्चों का चिन्हांकन जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा किया जाता है। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाईन (1098), जिला बाल संरक्षण ईकाई के अधिकारी, क्षेत्रीय बाल संरक्षण समितियों अथवा किसी प्रबुद्ध नागरिक द्वारा भी बालकों का चिन्हांकन किया जा सकता है।

प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समिति एवं प्रवर्तकत्ता एवं पालन पोषण देखरेख अनुमोदन समिति गठित है। प्रवर्तकता प्रकरण प्राप्त होने अथवा जरूरतमंद बालक या परिवार का आवेदन प्राप्त होने पर मिशन वात्सल्य योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रवर्तकता की स्वीकृति दी जाती है एवं बाल कल्याण समिति द्वारा स्थापन आदेश जारी किया जाता है। बाल कल्याण समिति के स्थापन आदेश उपरांत बालक के नाम पर बैंक खाता खोला जाता है। जिसका संचालन समिति के आदेश में नाम निर्दिष्ट व्यक्ति के द्वारा किया जाता है एवं बालक के बैंक खाते में प्रतिमाह जिला बाल संरक्षण समिति द्वारा राशि अंतरित की जाती है। प्रवर्तकता के संबंध में अधिक जानकारी एवं आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम सहित अन्य कार्यों के संबंध में दिए गए निर्देश

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े दो दिवसीय सक्ती जिले के प्रवास के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में चल रहे राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम से संबंधित विभिन्न गतिविधियों पर चर्चा की। उन्होंने अन्य संबंधित विभागों से समन्वय करते हुए विविध कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए।

श्रीमती राजवाड़े ने विशेष रूप से एनीमिया जांच, वजन त्यौहार एवं पोषण के संबंध में किशोरी, बालिकाओं एवं स्कूली छात्राओं के लिए कार्यशाला आयोजित करने के संबंध में महिला एवं बाल विकास अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सभी गतिविधियों का प्रतिदिन डैशबोर्ड में एंट्री कराना सुनिश्चित कराएं।

 

गरीब परिवारों की बेटियों के लिए सहारा बनी नोनी सुरक्षा योजना

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रायपुर। गरीब परिवार में जन्म लेने वाली बेटियों के लिए नोनी सुरक्षा योजना बड़ा सहारा बन रही है। इससे परिवार की बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता दूर हुई है। योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों को 18 वर्ष पूरा होने और 12वीं उत्तीर्ण होने पर एक लाख रूपए प्रदान किए जाते हैं। इसके लिए जीवन बीमा निगम एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्य अनुबंध किया गया है। नोनी सुरक्षा योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों की पंजीकृत बालिका के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम में 05 वर्ष तक प्रति वर्ष 5 हजार रूपये अर्थात कुल 25 हजार रूपये जमा किए जाते हैं।

अब तक भारतीय जीवन बीमा निगम में कुल 122.64 करोड़ की राशि कॉरपस फंड में विनियोजित की गई है। नोनी सुरक्षा योजना अंतर्गत अब तक 84 हजार 594 बालिकाओं का पंजीकरण किया गया है। जनगणना वर्ष 2001 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में बाल लिंगानुपात प्रति हजार 975 था जो कि जनगणना वर्ष 2011 में घटकर एक हजार के अनुपात में 969 हो गया। इस प्रकार राज्य में घटते बाल लिंगानुपात तथा बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए 01 अप्रैल 2014 से ’’नोनी सुरक्षा योजना’’ लागू की गई। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बालिकाओं की शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाना, बालिकाओं के अच्छे भविष्य की आधारशिला रखना, बालिका भ्रूण हत्या रोकना और बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच लाना और बाल विवाह की रोकथाम करना है।

छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की 01 अप्रैल 2014 के बाद जन्मी अधिकतम दो बालिकाओं को योजना के तहत लाभ मिलता है। योजना के शुरू होने से शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों के साथ दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बसे परिवारों में भी बेटियों के भविष्य की चिंता दूर हुई है। योजना का लाभ लेने के लिए जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और विकासखण्ड स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पांच मंत्रियों के विभागों के बजट तैयारियों की समीक्षा की

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, पंजीयन एवं स्टाम्प, उच्च शिक्षा एवं तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं जनशक्ति नियोजन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल एवं युवा कल्याण, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना आर्थिक एवं सांख्यकी, संस्कृति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामोद्योग विभाग की बजट तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन एवं मुद्रांक) जयसिंह अग्रवाल, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्र कुमार, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणुजी पिल्ले, सचिव एस.भारतीदासन, सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गरीब परिवारों की बेटियों के लिए सहारा बनी नोनी सुरक्षा योजना

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रायपुर। गरीब परिवार में जन्म लेने वाली बेटियों के लिए नोनी सुरक्षा योजना बड़ा सहारा बन रही है। इससे परिवार की बेटियों के भविष्य को लेकर चिंता दूर हुई है। योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों को 18 वर्ष पूरा होने और 12वीं उत्तीर्ण होने पर एक लाख रूपए प्रदान किए जाते हैं। इसके लिए जीवन बीमा निगम एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्य अनुबंध किया गया है। नोनी सुरक्षा योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों की पंजीकृत बालिका के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम में 05 वर्ष तक प्रति वर्ष 5 हजार रूपये अर्थात कुल 25 हजार रूपये जमा किए जाते हैं। योजना के तहत अब तक 76 हजार 477 बच्चियों का पंजीयन किया गया है। वर्ष 2021-22 में 11 हजार 765 बेटियों को योजना का लाभ दिया गया है।

जनगणना वर्ष 2001 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में बाल लिंगानुपात प्रति हजार 975 था जो कि जनगणना वर्ष 2011 में घटकर एक हजार के अनुपात में 969 हो गया। इस प्रकार राज्य में घटते बाल लिंगानुपात तथा बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए 01 अप्रैल 2014 से ’’नोनी सुरक्षा योजना’’ लागू की गई। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बालिकाओं की शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाना, बालिकाओं के अच्छे भविष्य की आधारशिला रखना, बालिका भ्रूण हत्या रोकना और बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच लाना और बाल विवाह की रोकथाम करना है।

छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की 01 अप्रैल 2014 के बाद जन्मी अधिकतम दो बालिकाओं को योजना के तहत लाभ मिलता है। योजना के शुरू होने से शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों के साथ दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बसे परिवारों में भी बेटियों के भविष्य की चिंता दूर हुई है। योजना का लाभ लेने के लिए जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और विकासखण्ड स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग सूरजपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वहां अभी तक 4193 बच्चियों को चिन्हंकित कर ऑनलाईन एंट्री कर दी गई है। इनमें से 1032 बच्चियों को एलआईसी के द्वारा जारी बॉण्ड प्रदान किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल नोनी सुरक्षा योजना लागू किये जाने से लड़कियों के उज्जवल भविष्य की राह आसान हो गयी है और बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या की घटनाओं में कमी आ रही है।

कोरबा शहरी परियोजना के आंगनबाड़ी केंद्रों में भर्ती के लिए आवेदन अब 27 दिसंबर तक

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कोरबा। एकीकृत बाल विकास परियोजना अंतर्गत कोरबा शहरी परियोजना के आंगनबाड़ी केन्द्रों में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि में वृद्धि की गयी है। आवेदक अब 27 दिसंबर तक आवेदन जमा कर सकते हैं। एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा शहरी के अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों में भर्ती के लिए भर्ती प्रक्रिया 22 अक्टूबर 2022 से प्रारंभ की गयी थी। जिसमें आंगनबाड़ी केंद्र पोड़ीबहार-01 वार्ड क्रमांक 29 एवं घुड़देवा-02 वार्ड क्रमांक 64 में सहायिका पद पर तीन से भी कम आवेदन प्राप्त होने के कारण आवेदन जमा करने की अवधि 20 दिसंबर से 27 दिसंबर तक बढ़ायी गयी है।



अभ्यर्थियों से उक्त केंद्रों के ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगे। आवेदिकाओं को उसी वार्ड की निवासी होना अनिवार्य है जिसके लिए आवेदन किया जा रहा है। आवेदन पत्र पर पद एवं केंद्र के नाम का स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होगा। आवेदन निर्धारित प्रारूप में कार्यालय परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना कोरबा शहरी में निर्धारित तिथि तक कार्यालयीन समय में सीधे जमा कर सकते हैं। भर्ती के संबंध में नियम, शर्तें, आवेदन प्रारूप एवं अन्य जानकारी के लिए परियोजना कार्यालय कोरबा शहरी के सूचना पटल, नगर निगम के सूचना पटल एवं संबंधित वार्डों के आंगनबाड़ी केंद्रों के सूचना पटल से अवलोकन किया जा सकता है। आवेदिका की आयु 18 से 44 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। आंगनबाड़ी सहायिका पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं बोर्ड उत्तीर्ण है।

महिलाओं के सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ है आगे- अनिला भेड़िया

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रायपुर। राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण विभाग की मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया आज पंडरिया में महिला सम्मान समारोह में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब से मुख्यमंत्री का बागडोर भूपेश बघेल ने संभाला है तब से राज्य में छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति और सभ्यता का अदभूत संगम देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश अपनी मूल संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्परा और धार्मिक मान्यताओं के साथ आगे बढ़ रहा है। केबिनेट मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री बघेल ने स्वयं रूचि लेकर प्रदेश में प्रभु श्री राम-सीता की वनवास को राम वन गमन पथ के रूप में चिन्हांकित 52 स्थलों को विकसित कराया है



जिसमें प्रदेश के कोरिया जिले से सुकमा जिले में राम वन गमन पथ विकसित किया किया जा रहा है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रमु श्री राम का ननिहाल है, माता कौशिल्या का जन्म स्थल रायपुर के समीप ग्राम चन्दखुरी है, जहां मुख्यमंत्री की पहल पर ग्राम चन्दखुरी में माता कौशिल्या का मंदिर का निर्माण हुआ है।  वहां हम सब के आराध्य देव प्रभु श्रीराम का प्रतिमा स्थापित कराई गई है। उन्होने कहा कि राज्य में माता कौशिल्या की मंदिर निर्माण से पूरे माताओं का सम्मान हुआ है।

संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशिष सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की पहचान देश दुनिया में बढ़ रही है। उन्होंने केरल यात्रा का स्मरण करते हुए बताया कि जब देश में रामनाथ कोविंद जी राष्ट्रपति थे, जब उनसे भेंट-मुलाकात करने का अवसर मिला। जब उन्हे अपना परिचय छत्तीसगढ़ से दी तो उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया सबसे बढिया। तब उस दिन अहसास हुआ कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति सिर्फ राज्य में नहीं अपुति देश-दुनिया में इसकी पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य छत्तीसगढ़िया रंग से रंग गया है और अपनी स्वाभिमान के साथ राज्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस अवसर पर राज्य सरकार की अनेक योजनाओं की जानकारी भी दी।



क्षेत्रीय विधायक श्रीमती ममता चन्द्राकर ने संबोधित करते हुए आज के आयोजन में सम्मानित होने वाले सभी महिला, अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य मितानिन और महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज का दिन महिलाओं की सम्मान का दिन है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। आज राज्य की बेटिया राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरान्वित कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है, इससे राज्य महिला सशक्तिकरण की दिशा में उत्कृष्ट मुकाम हासिल कर रही है।

 पंडरिया में आयोजित महिला सम्मान समारोह में जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाली दो सौ से अधिक महिलाओं, माताओं और बहनों को सम्मानित किया गया है। सम्मानित होने वाली महिलाओं में जिले की महिला स्वसहायता समूह, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका, स्कूली छात्राएं, स्वाथ्य मितानिन, सहित खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला अधिकारी-कर्मचारी शामिल है। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती पुष्पा होरी साहू, बोडला नपा अध्यक्ष श्रीमती सावित्री साहू और गंगोत्री योगी ने संबोधित किया। कार्यक्रम में श्रीमती समुंद कुर्रे, श्रीमती लीला धनुक वर्मा, अमिता प्रभाती मरकाम, राजिन गायगवाड़ सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि महिलाएं उपस्थित थे। 

राज्यपाल सुश्री उइके से महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने की भेंट

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से आज राजभवन में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों के लिए संचालित योजनाओं,


उनके क्रियान्वयन सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेज कुंवर नेताम और सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव उपस्थित थीं।

ईश्वर ने दिव्यांगों को अपार प्रतिभा दिया है- मंत्री श्रीमती भेंडिया

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने कहा कि हमारे दिव्यांग भाई-बहन किसी भी स्थिति में समाज के अन्य व्यक्तियों से अपने को कमतर न आंके। ईश्वर ने दिव्यांगो को अपार प्रतिभा से नवाजा है। ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्तियों को कुछ कमियों के साथ खूबियॉ भी दी है। हमारे दिव्यांगजनों अपने मेहनत और लगन के बदौलत आज सफलता के झण्डे गाड़ रहे हैं। श्रीमती भेंड़िया आज जिला मुख्यालय बालोद के पुराना अस्पताल के पास कुर्मीपारा में स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांग आश्रम गृह ‘‘घरौंदा‘‘ में प्रदेश के पहले दिव्यांग स्वावलंबन केन्द्र के शुभारंभ अवसर पर अपना उद्गार व्यक्त कर रही थी।



मंत्री श्रीमती भेंड़िया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उन्होंने जिला मुख्यालय बालोद में प्रदेश के पहले दिव्यांग स्वावलंबन केन्द्र के शुभारंभ होने पर उपस्थित दिव्यांगजनों एवं जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर संजारी-बालोद की विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, नगर पालिका परिषद बालोद के अध्यक्ष विकास चोपड़ा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती चंद्रप्रभा सुधाकर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

श्रीमती भेंड़िया ने राज्य शासन द्वारा दिव्यांगो के कल्याण हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार समाज के सभी वर्गों के साथ-साथ दिव्यांगो को भी स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने के लिए हर संभव उपाय सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय बालोद में आज शुभारंभ किए गए छत्तीसगढ़ के पहले स्वावलंबन केन्द्र हमारे दिव्यांगजनों के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगी। 

इस स्वावलंबन केन्द्र के माध्यम से दिव्यांगजन अपने रूचि के अनुसार प्रशिक्षण लेने के बाद आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकेंगे। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांगजनों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने जिला मुख्यालय बालोद में प्रदेश के पहले स्वावलंबन केन्द्र के स्थापना को जिलेवासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया को धन्यवाद दिया।

 इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांगो के कल्याण हेतु राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के संबंध में भी जानकारी दी। नगर पालिका परिषद बालोद के अध्यक्ष विकास चोपड़ा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मंत्री श्रीमती भेंड़िया एवं अतिथियों ने दिव्यांगजनों को सामर्थ्य विकास योजना के अंतर्गत बैटरी चलित ट्रायसायकल, सामान्य ट्रायसायकल, क्षितिज-अपार संभावनाएॅ अंतर्गत शिक्षा प्रोत्साहन राशि का चेक, मिशन गंूज अंतर्गत स्मार्ट फोन, सेंसर छड़ी, विशिष्ट दिव्यांग पहचान पत्र और दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन राशि का चेक वितरण कर लाभान्वित किया।

बच्चों के सही पोषण और देखरेख के लिए ‘उमंग‘ का आयोजन

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने आज रायपुर में पोषण देखरेख कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की भूमिका और समन्वय विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल करने पर चर्चा की गई। इस अवसर पर श्रीमती भेंड़िया ने पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर) कर रहे दो पोषक परिवारों को भी सम्मानित किया।



कार्यशाला का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से किया गया। श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कुशल नेतृत्व में विभाग ने महिलाओं एवं बच्चों के लिये कई कल्याणकारी कदम उठाये हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी बच्चों का सर्वांगीण विकास है, इसमें वे बच्चे भी शामिल है, जिन्हें विभिन्न कारणों से संस्थाओं में रहना पड़ रहा है। संस्थाएं बच्चों का घर नहीं, वास्तव में किसी व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास परिवार और समाज के बीच ही हो सकता है। 

इसे ध्यान में रखकर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 में गैर संस्थागत देखरेख का समावेश किया गया है। उन्होंने कहा कि पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर), संस्था के बाहर बच्चों की देखरेख का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। मिशन वात्सल्य के अन्तर्गत देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए गैर नातेदार परिवार में वैकल्पिक अस्थाई देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था की जाती है। इससे पोषक परिवार में जहां उत्साह, उमंग का संचार होता है, 

वहीं बच्चे को समुचित विकास का पूरा अवसर मिलता है। इन बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रत्येक नागरिक का संवेदनशील और सहयोगी होना आवश्यक है। उन्होंने अपील कि है कि समाज के सभी वर्ग, स्वयं-सेवी संस्थाएं, सरकार के साथ बच्चों को पारिवारिक वातावरण और विकास के सभी अवसर उपलब्ध कराने के लिए एकजुट हों, जिससे एक योग्य नागरिक तथा सशक्त भारत का निर्माण हो सके। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बच्चों के लिए प्राकृतिक पोषण आहार की उपयोगिता बताई। 


उन्होंने पैक्ड फूड की जगह प्राकृतिक पोषक आहार अपनाने की समझाईश दी। 
रूप में उमंग जोड़ा जा रहा है। राज्य में 45 बाल गृह और 13 विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण संचालित है। विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में 119 बच्चे निवासरत है। वर्ष 2021-22 में 112 बच्चों को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वासित किया गया। अभी 54 बच्चे पोषण देखरेख कार्यक्रम हेतु चिन्हांकित है। अब तक प्रदेश में 4 बच्चे पोषण देखरेख के तहत परिवारों का हिस्सा बने हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में स्पॉन्सरशिप के अंतर्गत 165 बच्चों को लाभ दिया गया है।

यूनिसेफ के राज्य प्रमुख जॉब जकारिया ने बताया कि विश्व में 75 लाख बच्चे संस्थानों में रहते हैं, लगभग 2 लाख बच्चे सड़कों में रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासंघ ने बच्चों को घर या वैकल्पिक परिवार में रखने का प्रावधान किया है। इस आधार पर परिवार आधारित बच्चों का देखरेख प्रोग्राम तैयार किया गया है। छत्तीसगढ़ के 10 जिलों में इस पर विशेष फोकस कर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बधाई का पात्र है कि वह देश के अन्य प्रदेशों से आगे हैं। उन्होंने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत देखरेख के लिए प्रति माह 4 हजार रूपए तक की राशि भी प्रदान की जाती है।

कार्यशाला में बच्चों का पालन-पोषण और देखरेख कर रहे पोषक परिवार रायपुर के प्रताप एवं दुर्गा महापात्रे और कांकेर के कृषक परिवार के खोरबहरा राम और चंदा बाई का सम्मान किया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आई यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ सुश्री वंदना कन्धारी और अन्य विशेषज्ञों ने पोषण देखरेख पर जानकारी दी। इस अवसर पर जिलों के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, सदस्य, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सचिव, बाल गृहों के अधीक्षक, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रतिनिधि, स्वयं सेवी संस्थाओं के सदस्य और पोषण देखरेख हेतु चयनित पोषक परिवार उपस्थित थे।

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