Media24Media.com: बरसात

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आयुष्मान में फर्जी क्लेम को रोकने कलेक्टर ने सीएमएचओ और बीएमओ को निगरानी के दिए निर्देश

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कोरबा। कलेक्टर अजीत वसंत की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों-वयोवृद्ध शिविर, मलेरिया,कुष्ठ, सिकलसेल जॉच, आयुष्मान कार्ड, एचआरपी, मातृस्वास्थ्य, प्रसव, शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार कल्याण, एनसीडी, एनक्यूएएस, आयुष, आरबीएसके, एनआरसी दवाओं की उपलब्धता एवं कार्यक्रमों की प्रगति के संबंध में जानकारी ली। 

बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया फैलने की संभावना को देखते हुए कलेक्टर वसंत ने शहरी क्षेत्रो में नगर निगम से समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी और कष्ठ रोग की समीक्षा के दौरान कहा कि अभियान चलाकर ऐसे मरीजों को चिन्हित किया जाएं और जांच कराकर उन्हें समय पर उपचार और दवा प्रदान करना सुनिश्चित करें। एक्सरे एवं अन्य उपकरण जेम से खरीदते समय ध्यान रखें की गुणवत्तापूर्ण तथा प्रचलित रेट पर खरीदा जावे ।

समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने आयुष्मान भारत की समीक्षा की और निर्देश दिए छूटे हुए लोगों का आधार अपडेट के साथ ही सात दिवस के भीतर आयुष्मान कार्ड बनाया जाएं। उन्होंने कार्य नहीं करने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश सीएमएचओ को दिए। कलेक्टर ने विकासखंड स्तर पर प्रायवेट चिकित्सालयों के आयुष्मान में फर्जी क्लेम की निगरानी बीएमओ को करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में फर्जी क्लेम नहीं होना चाहिए। उन्होंने सीएमएचओं को निजी अस्पतालों के क्लेम पुटअप करने के निर्देश दिए। मातृ स्वास्थ्य की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त गर्भवती माताओं में एचआरपी की पहचान कराना है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों में यदि दिन में प्रसव हो सकता है दिन में और रात्रि में हो सके तो रात्रि में भी प्रसव करावें। गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रेफर ना करें। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित लक्ष्य अनुसार प्रसव कराया जाएं। 

जहाँ 20 से ज्यादा प्रसव हो रहे हैं वहाँ संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। कलेक्टर ने रानी धनराज कुंवर शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में 02 स्त्री रोग विशेषज्ञ के होते हुए भी महिलाओं के कम उपचार होने की बात कहते हुए सुधार के निर्देश दिए। मातृ मृत्यु की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 102 एम्बूलेंस में ईएमटी नियुक्त नहीं है। आपात स्थिति में प्रसव हो जाता है तो परेशानी होती है इस पर कलेक्टर ने निर्देशित किया कि डीएमएफ से ईएमटी की नियुक्ति की जाएं। एनआरसी की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि एनआरसी में 100 प्रतिशत आक्यूपेंसी होना चाहिए। शिशु मृत्यु संस्थागत कमी से नहीं होना चाहिए। कलेक्टर ने सिकल सेल के मरीजों का इलेक्ट्रोफोरेसिस जॉच करवाकर दिव्यांग कार्ड बनाने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि नाक, कान, गला से संबंधित चिन्हांकित मरीजों तथा मोतियाबिन्द के रेफर मरीजों का उपचार एवं ऑपरेशन तथा सभी प्रकार की सेवाएं जिनका उपचार मेडिकल कॉलेज में हो सकता है उनका उपचार किया जाएं। उन्होंने सीएचसी में शिविर लगाकर उपचार करने, मोतियाबिन्द मरीजों की सर्जरी कराने और बीएमओ को फॉलोअप करने के निर्देश दिए। उन्हांने निर्देशित किया कि समस्त राष्ट्रीय कार्यक्रमों की शतप्रतिशत उपलब्धि प्राप्त करें।

बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला टीबी एवं कुष्ठ अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, समस्त नोडल अधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक, आरएमएनसीएचए, समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारी, समस्त विकासखण्ड कार्यक्रम प्रबंधक तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।


लघु सिंचाई तालाब निर्माण योजना से ग्राम टिभुपाली और अरण्ड में पहली बार सूखे खेत हुए तर

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महासमुंद। राज्य शासन की लघुत्तम सिंचाई तालाब निर्माण योजना से सूखे खेतों में पहली बार पानी पहुंचा है। जिससे सैकड़ों एकड़ सूखे और दरार पड़े खेतों में हरियाली छायी है। किसान अब यहां धान की फसल लेकर अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहें हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन की झलक सरायपाली अंतर्गत ग्राम टिभुपाली में वर्ष 2023-24 में कृषि विभाग द्वारा खोदे गए लघु तालाब से किसानों की जिंदगी में खुशी झलक रही है। ग्राम टिभुपाली में वर्ष 2023-24 में लघुत्तम सिंचाई तालाब निर्माण योजना अंतर्गत 43.79 लाख रुपए की लागत से तालाब खोदा गया। यहां पहली बरसात में तालाब लबालब हो गया। इससे तालाब के नीचे खेतों में हरियाली बिखर गई। अब यहां के किसान खरीफ में पहली बार धान की फसल ले रहें हैं। तालाब से लगभग 56 किसानों को 39.50 हेक्टेयर क्षेत्र में लाभ होगा।

ग्राम टिभुपाली के किसान विपिल पटेल, रीतु पटेल, शोभित धु्रव, मोनू बरिहा ने बताया कि उनके खेत पहले भर्री किस्म के थे। जिसमें कभी-कभी कुछ फसल लगा दिया करते थे। लेकिन पूरी तरह बरसात के पानी पर और भगवान भरोसे निर्भर रहना पड़ता था। किसान विपिल पटेल जिनकी 6 एकड़ की खेती है ने बताया कि वे पहली बार अपने खेत में धान की फसल लिए है और इस सीजन में भी अच्छी फसल की उम्मीद है। इसी तरह रीतु पटेल के 2 एकड़ खेत, शोभित ध्रुव के 1.50 एकड़ खेत एवं मोनू ध्रवु के 3 एकड़ खेत में धान की फसल लहलहा रही है। ग्राम के सरपंच मोती पटेल ने भी बताया कि इससे फिरहाल 35 एकड़ में सिंचाई हो रही है। 10 किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस सफल योजना के लिए धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।

इसी तरह पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम अरण्ड में इसी वर्ष तालाब खनन का कार्य किया गया है। यहां के किसानों ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग फसल नहीं हो पाती थी और अंतिम सिंचाई के लिए नाले के पानी पर निर्भर रहना पड़ता था। तालाब खनन से करीब 30 एकड़ खेतों में सिंचाई हो रही है। अरण्ड के सरपंच देवराज सिंह ठाकुर ने बताया कि तालाब खनन से दोहरा फायदा हुआ है एक तो आसपास के क्षेत्र में भू जल का स्तर बढ़ा है वहीं दूसरी ओर फसल पकने के पूर्व अंतिम सिंचाई के लिए किसान निश्चिंत है। उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया है।

बारिश के समय में राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

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रायपुर। नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा में अति वर्षा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। कई लोगों के घरों में जलभराव से नुकसान हुआ है वहीं बड़ी संख्या में किसानों की फसल नुकसान हुई है। ऐसे में वनमंत्री केदार कश्यप ने इन जिलों के कलेक्टर को राहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देश जारी कर समय पूर्व सभी तैयारियां पुख्ता कर लेने को कहा है।

वनमंत्री कश्यप ने कहा कि समय रहते बचाव के उपाय भी किए जाएं। उन्होंने  कहा की बरसात के मौसम में कई मौसमी बीमारियों का भी खतरा रहता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर दवाओं के छिड़काव के साथ अन्य जरूरी उपाय किए जाएं। जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर आपदा नियंत्रण केन्द्र 24 घंटे सक्रिय रखा जाए। बांधों, जलाशयों, पुलों से संबंधित अमला पूरे समय अलर्ट रहे। उन्होंने कहा जल भराव की स्थिति पर आवश्यक व्यवस्थाएं तत्परता से कराई जाए। मंत्री कश्यप ने अत्यधिक वर्षा प्रभावित जिलों के कलेक्टर से बात कर स्थिति पर नज़र रखने का निर्देश दिये है ताकि खरीफ सीजन की  चल रहे कृषि कार्य में कोई व्यवधान न हो।


बरसात के मौसम में बीमारियों से रहें सावधान, मच्छर जनित रोगों की बढ़ जाती है संभावना

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रायपुर। जून के अंत तक प्रायः देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून आ जाता है। हालांकि मानसून के शुरूआती दिनों में कभी धूप, कभी बारिश की स्थिति सेहत के लिए कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो जाती है। वातावरण में आर्द्रता की शुरूआत के साथ ही कई प्रकार के रोग भी पनपने शुरू हो जाते हैं। यह मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए भी काफी अनुकूल माना जाता है, जिसके कारण बरसात शुरू होते ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी कई तरह की मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि बदलते मौसम के मद्देनजर सभी लोगों को अपनी सेहत के प्रति विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जरा सी भी लापरवाही बीमार कर सकती है। बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, सर्दी, खांसी, उल्टी, दस्त, वायरल बुखार, फंगल इन्फेक्शन, हेपेटाइटिस और टायफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि मानसून में कई तरह के मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू आदि का खतरा काफी बढ़ जाता है। बारिश के दिनों में गड्ढों में भरे हुए पानी को मच्छरों के प्रजनन के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। इस मौसम में संक्रमित मच्छरों के काटने के कारण मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। ये दोनों ही बीमारियां गंभीर स्थिति में पहुंचने पर जानलेवा भी हो सकती हैं। इसलिए इनसे बचाव के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना चाहिए। घर के आसपास जल जमाव नहीं होने देना चाहिए। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। बुखार, उल्टी, दस्त जैसी समस्या होने पर अपने मन से दवा नहीं लेनी चाहिए, बल्कि निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक की सलाह से ही दवाईयों का सेवन करना चाहिए।

मानसून में सबसे प्रमुख बीमारियों में से एक आम सर्दी यानि कॉमन कोल्ड है। यह नम और उमस भरे मौसम में पनपने वाले वायरस की वजह से होता है। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने या लगातार बारिश के पानी में भीगने से सर्दी, बुखार, खांसी व फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में तापमान में होने वाला भारी उतार-चढ़ाव शरीर को बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील बना देता है। यह मौसमी सर्दी और फ्लू का कारण बन सकता है। सर्दी और फ्लू का जोखिम कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में अधिक देखा जाता है। इनसे बचने के लिए बाहर जाते समय अपने साथ कपड़ों का एक अतिरिक्त जोड़ा रखें। एयर कंडीशनर के बजाय ताजी हवा में रहें। ताजे फल और सब्जियां खाएं तथा अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें।

हेपेटाइटिस-ए, डेंगू और टायफाइड से रहें सावधान

संचालक, महामारी नियंत्रण डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि हेपेटाइटिस-ए मुख्यतः दूषित भोजन या पानी के कारण होता है जो लिवर को प्रभावित करता है। इसके कारण बुखार, उल्टी, शरीर पर दाने आदि हो सकते हैं। पर्याप्त साफ-सफाई न होने के कारण हेपेटाइटिस-ए का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए स्वच्छता का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

टाइफाइड का भी मुख्य कारण दूषित पानी होता है। बारिश के मौसम में पानी इकट्ठा हो जाने से पैदा हुए मच्छर व गंदगी की वजह से टाइफाइड की बीमारी होती है। टाइफाइड का बुखार बैक्टीरिया संक्रमित लोगों के मल-मूत्र के जरिए दूसरे लोगों में ट्रांसफर हो सकता है। टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए साफ पेयजल का सेवन करें। यदि पेयजल सुरक्षित न हो  तो इसे उबालकर पीना चाहिए। 

बरसात के मौसम में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू का सबसे ज्यादा प्रकोप रहा है। यह बीमारी एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलती है। सिरदर्द, थकान, जोड़ों में दर्द, प्लेटलेट्स कम होना आदि डेंगू के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर इलाज कराना चाहिए।   

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