Media24Media.com: प्रावधानों

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रेरा द्वारा अधिनियम के प्रावधानों का पालन में चूक करने वाले 412 बिल्डर्स को नोटिस जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) द्वारा अधिनियम के प्रावधानों का पालन में चूक करने वाले 412 बिल्डर्स को नोटिस जारी किया गया है। संबंधित बिल्डर्स द्वारा समय पर त्रैमासिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत नहीं किया गया है।
              

कुछ प्रोजेक्ट्स निर्धारित समयावधि के बाद भी पूर्ण नहीं हुए है उन्हें भी नोटिस दिया गया है। 15 दिवस के भीतर ऑनलाइन जानकारी अपडेट करने तथा प्रोजेक्ट अपूर्ण होने की स्थिति में कारण बताते हुए समय विस्तारण हेतु आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किये गये हैं। 15 दिवस के भीतर निर्देशों का पालन नहीं करने की स्थिति में रेरा द्वारा संबंधित बिल्डर्स/प्रमोटर के विरूद्ध प्रकरण दर्ज करते हुए कार्यवाही की जाएगी।

 

ई-वे बिल के प्रावधान में छूट समाप्त करने से ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले व्यापारियों को होगा फायदा

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रायपुर। वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग द्वारा कर अपवंचन पर निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुये राज्य में ई-वे बिल के प्रावधानों में दी गई छूट को समाप्त कर दिया गया है। इसके लिए सरकार ने 24 मई को ही अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य में व्यवसायियों के लिए अब 50 हज़ार रूपए से अधिक के गुड्स का परिवहन करने पर ई-वे बिल जेनरेट करना आवश्यक होगा। अभी तक राज्य में एक जिले के भीतर माल के परिवहन करने पर ई-वे बिल जारी करना आवश्यक नहीं था, साथ ही 15 वस्तुओं को छोड़ कर राज्य के भीतर किसी भी वस्तु के परिवहन पर ई-वे बिल कि आवश्यकता नहीं थी।


वर्ष 2018 में ई-वे बिल के प्रावधानों से छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि ये प्रावधान नए थे और व्यवसायियों/ट्रांसपोर्टर्स को इन प्रावधानों से अच्छी तरह परिचित होने के लिए समय दिया जाना जरूरी था। देश भर में ई-वे बिल के प्रावधान लागू हुये अब 6 साल का समय हो गया है और सभी इससे अच्छी तरह परिचित भी हो चुके हैं, यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि एक दो राज्यों को छोडकर देश के अधिकांश राज्यों में राज्य के भीतर माल के परिवहन पर ई-वे बिल अनिवार्य है। केंद्रीय कर विभाग द्वारा भी ई-वे बिल से छूट को खत्म करने पर सहमति दी गई है।

ई-वे बिल जारी करने में दिये गए छूट का सबसे अधिक दुरुपयोग सर्क्युलर ट्रेडिंग करने वाले और बोगस बिल जारी करने वालों ने किया है, इसलिए इस छूट को समाप्त किए जाने का सबसे अधिक लाभ उन व्यवसायियों को होगा जो ईमानदारी से अपना कर जमा करते हैं परंतु सर्क्युलर ट्रेडिंग या बोगस बिल जारी करने वालों के कारण उन्हें आइ.टी.सी. का लाभ नहीं मिल पाता है। ई-वे बिल के प्रावधान लागू होने से सर्क्युलर ट्रेडिंग और बोगस बिलिंग रोकने में विभाग को मदद मिलेगी।

ई-वे बिल के प्रावधानों में दी गई छूट को समाप्त किए जाने से राज्य में कर अनुपालन के वातावरण में सकारात्मक प्रभाव होगा। इससे बोगस बिल जारी करने, कच्चा बिल जारी करके कर अपवंचन करने की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।

 


प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृहमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं भारत के नवीन कानून : सीएम विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के तीन नवीन कानूनों को लेकर कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दूरदर्शी सोच की वजह से ही ये संभव हो पाया है। साय ने कहा है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी हम अंग्रेजों के बनाए कानून का ही पालन कर रहे हैं जिसे बदलने का समय आ गया है। साय ने कहा है कि समय के साथ परिवर्तन अनिवार्य है और देश, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बेहतर परिवर्तन की ओर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज रायपुर के पुराना पुलिस मुख्यालय में नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण में शामिल हुए और कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस को आने वाले समय में संसाधनों की कमी नहीं होगी और प्राथमिकता के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस को और सशक्त करेंगे।

नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण के मौके पर राज्य के गृहमत्री विजय शर्मा ने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था देश का एक अहम विषय है। उन्होंने नवीन कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृहमंत्री के प्रयासों से ये संभव हो पाया है कि हमें अंग्रेजों के कानून से मुक्ति मिलने जा रही है।

छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा ने मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री के समक्ष नवीन कानूनों के प्रावधानों की प्रस्तुति देते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023, नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। जुनेजा ने बताया कि नवीन कानून दंड देने की बजाए पीड़ित को न्याय देने की भावना के साथ तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुराने कानून दंड पर आधारित हैं जबकि नए कानून महिला सुरक्षा एवं न्याय पर आधारित हैं।

नवीन कानूनों के प्रावधानों के प्रस्तुतिकरण के मौके पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव विधि रजनीश श्रीवास्तव, एडीजीपी विवेकानंद, एडीजीपी अमित कुमार, वित्त सचिव अंकित आनंद समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जिला उपभोक्ता आयोग सरगुजा में महिला सदस्य नियुक्त

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रायपुर। राज्य शासन द्वारा उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 के प्रावधानों के अनुरूप श्रीमती अर्चना सिन्हा को जिला उपभोक्ता आयोग सरगुजा (अम्बिकापुर) में महिला सदस्य के पद पर नियुक्त किया गया है। 
                    

जिला उपभोक्ता आयोग में सदस्य के रूप में श्रीमती सिन्हा का कार्यकाल 04 वर्ष या 65 वर्ष जो भी पहले हो, तक के लिए नियत किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ बाल कोष गठित

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रायपुर। किशोर न्याय निधि के प्रावधान अनुसार राज्य में बच्चों के सर्वाेत्तम हित में छत्तीसगढ़ बाल कोष का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ बाल कोष में बालकों के कल्याण और पुनर्वास के लिए दान, अनुदान, अंशदान के माध्यम से सहयोग राशि दी जा सकती है।इस राशि का उपयोग किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत आने वाले बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, पुनर्वास जैसे उनके सर्वाेत्तम हित में खर्च किया जाएगा। 
               

राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ बाल कोष के क्रियान्वयन के संबंध में सभी कलेक्टरों और जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों को अधिसूचना दिनांक 23 मार्च 2022 के माध्यम से विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास द्वारा बच्चों के हित के लिए दान, अनुदान, अंशदान प्राप्त करने हेतु राज्य स्तर पर आईसीआईसी बैंक में खाता संख्या 251501000259, आईएफएसआई संख्या ICICI0002515 का संचालन किया जा रहा है। इस कोष में किसी व्यक्ति, समूह, संस्था (जिसमें स्वयंसेवी संस्था, संगठन, गैर-सरकारी संस्था, ट्रस्ट आदि, कॉर्पाेरेट्स (निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) द्वारा स्वैच्छिक रूप से दान, अंशदान, अनुदान दिया जा सकता है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ बाल कोष में उद्योगपति, प्रबुद्ध व्यक्ति, सरकारी, गैर-सरकारी कर्मचारी और व्यापारी भी स्वैच्छिक दान, अंशदान, अनुदान कर सहयोग कर सकते हैं।


पीसीपीएनडीटी एक्ट के राज्य सलाहकार समिति की हुई बैठक

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रायपुर। पीसीपीएनडीटी एक्ट (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) के अंतर्गत गठित राज्य सलाहकार समिति की बैठक आज डीकेएस भवन परिसर स्थित राज्य नोडल एजेंसी कार्यालय में हुई। पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य में इस एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन एवं इसके विभिन्न प्रावधानों के परिपालन पर चर्चा हुई।

राज्य सलाहकार समिति की बैठक में सोनोग्राफी मशीन में एक्टिव ट्रेकर लगाने संबंधी भारत सरकार से प्राप्त रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया गया। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत एमबीबीएस डॉक्टरों के सोनोग्राफी प्रशिक्षण के अगले बैच के लिए नियमावली तैयार करने पर भी चर्चा की गई। विगत 31 मार्च को हुई समिति की पिछली बैठक के पालन प्रतिवेदन की जानकारी भी बैठक में दी गई।

पीसीपीएनडीटी एक्ट के संयुक्त संचालक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, पंडित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में रेडियो डायग्नोसिस के प्राध्यापक डॉ. विवेक पात्रे, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओंकार प्रसाद खंडवाल, मेडिसीन विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ.आर.के. पटेल, स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. महेन्द्र सिंह, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी धवल सिन्हा और पीसीपीएनडीटी कन्सल्टेंट सुश्री वर्षा राजपूत भी बैठक में उपस्थित थीं।

महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही : अनिला भेंड़िया

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया बुधवार को मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी जिले के जिला मुख्यालय मोहला में आयोजित शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में क्रियान्वयन, चुनौतियां एवं समाधान विषय पर आधारित कार्यशाला में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बाल सरंक्षण, पोषण और बाल शिक्षा के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले सरपंचगणों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि नवगठित मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी जिला बनने से तेजी से विकास के कार्य हो रहे हैं। महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें गरीब और किसान के बच्चे भी पढ़ने जा रहे हैं। राज्य सरकार की अच्छी नीति के चलते अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कम आय वर्ग वाले लोगों के बच्चों के पढ़ने का सपना आज साकार हो रहा है। समाज के लोग भी आगे आएं और बच्चों के कल्याण और संवर्धन में अपनी सहभागिता दें।

श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा एवं संवर्धन के लगातार काम किया जा रहा है। बचपन को सुदृढ़ बनाकर बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में कार्य हो रहा है। महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक मजबूती देने के लिए विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने और समाज में अग्रणी भूमिका निभाएं, इसके लिए राज्य सरकार संकल्पित है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के पास हुनर की कोई कमी नहीं है, उन्हें केवल मंच और अवसर देने की जरूरत है।

संसदीय सचिव व क्षेत्रीय विधायक श्री इंद्रशाह मंडावी ने कहा कि मजबूत बचपन से  बच्चे का पूरा भविष्य मजबूती के साथ आगे बढ़ता है। इसे समझते हुए बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर राज्य सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अवसर पर खुज्जी विधायक श्रीमती छन्नी चंदू साहू, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम, जिला पंचायत राजनांदगांव की अध्यक्ष श्रीमती गीता साहू, सहित कलेक्टर एस जयवर्धन उपस्थित थे। 

दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने वाले जल संसाधन विभाग के एसडीओ निलंबित

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रायपुर। जल संसाधन छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कांकेर जिले के कापसी उपसंभाग में पदस्थ प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी आर.एल. धीवर को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण, तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें मुख्यालय अधीक्षण अभियंता इन्द्रावती परियोजना मंडल, जगदलपुर में संबंद्ध किया गया है।

गौरतलब है कि जल संसाधन विभाग के कांकेर संभाग अंतर्गत परलकोट जलाशय के वेस्ट वियर से स्केल वॉय के बीच 21 मई 2023 से लगातार चार दिनों तक 4 हजार 104 क्यूबिक मीटर पानी अनाधिकृत रूप से बहा दिया गया था। निलंबन आदेश में जल संसधान विभाग के उप संभाग कापसी के अनुविभागीय अधिकारी आर.एल. धीवर के द्वारा उक्त मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने तथा जलाशयों के नियमित पर्यवेक्षण न करने को पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही माना गया है।

केन्द्रीय संसदीय समिति ने छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के कल्याण के कार्याे के लिए की राज्य शासन की सराहना

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहाँ अपने निवास कार्यालय में डॉ. (प्रो.) किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय प्रवास पर आए केन्द्रीय संसदीय समिति के सदस्यों से मुलाकात के दौरान उनसे कोल माईंस की खाली खदानों की जमीन राज्य सरकार को वापस कराने, बस्तर अंचल में सुगम यातायात की दृष्टि से रावघाट होते हुए जगदलपुर तक रेल लाईन विस्तार, वन क्षेत्रों में विकास कार्य कराने वन अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन और मुंबई-कोलकाता रूट की बंद ट्रेने पुनः प्रारंभ कराने का आग्रह किया।

केन्द्रीय संसदीय समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री बघेल से आज उनके निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। केन्द्रीय संसदीय समिति ने इस दौरान छत्तीसगढ़ में राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए किए जा रहे कार्याे की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रवास के अपने अनुभवों को मुख्यमंत्री के साथ साझा किया और प्रवास विद्यालयों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री बघेल ने सदस्यों को राजकीय गमछा और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव डी.डी. सिंह भी उपस्थित थे। गौरतलब है कि केन्द्रीय संसदीय समिति छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए दो दिवसीय दौरे पर रायपुर आयी हुई है।

मुख्यमंत्री बघेल ने केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्यों को छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंनेे कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा के साथ-साथ अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का फोकस इस बात पर है कि योजनाओं से अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आए, उनकी आय बढ़े।

मुख्यमंत्री ने संसदीय समिति से प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में कोल माईंस में उत्खन्न के बाद खाली खदानों की जमीन राज्य सरकार को वापस कराने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य सरकार इन क्षेत्रों में वाटर बॉडी बनाकर टूरिज्म की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकास कार्य करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में लोगों को सुगम यातायात की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रावघाट-जगदलपुर तक रेल लाईन के विस्तार कराने का आग्रह किया। इसी तरह उन्होंने मुंबई-कोलकाता रेल रूट सहित विभिन्न रेल मार्गाे में छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनों जिनका परिचालन बंद कर दिया गया था,

उन्हें फिर से प्रारंभ कराने के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय संसदीय समिति के सदस्यों को बताया कि छत्तीसगढ़ के लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग पर वन हैं। इनमें अनुसूचित क्षेत्रों में सघन वन हैं, इस कारण यहां विभिन्न विकास कार्याे में दिक्कत आती है। बघेल ने इस संदर्भ में वन अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता बताते हुए वन अधिनियम के प्रावधानों में आवश्यक संशोधन के लिए पहल का आग्रह समिति से किया। 

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान केन्दीय संसदीय समिति के जगन्नाथ सरकार, नीरज डांगी, डॉ. व्ही. शिवदासन, कामाख्या प्रसाद, वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित थे। डॉ. (प्रो.) किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय संसदीय दल की छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसके अलावा संसदीय दल विभिन्न संस्थानों के साथ बैठक कर अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रतिनिधित्व और उनके लिए किए जा रहे कल्याणकारी उपायों के संबंध में चर्चा करेगी।

वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जीएसटी संग्रहण के लंबित मामलों पर त्वरित कार्यवाही के दिए निर्देश

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रायपुर। वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज सिविल लाइन स्थित वाणिज्यिक कर कार्यालय में विभागीय काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में जीएसटी संग्रहण के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष जताया और कहा कि इस साल भी हम कर संग्रहण का लक्ष्य पूर्ण करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर संग्रहण से राज्य का विकास जुड़ा हुआ है। अत: लक्ष्य के अनुरूप जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसका संग्रहण करें।

वाणिज्यिक कर मंत्री सिंहदेव ने बैठक में जीएसटी संग्रहण के लंबित मामलों पर अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने जीएसटी जमा नहीं करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। सिंहदेव ने बैठक में रिटर्न फाइलिंग, लंबित करों की वसूली, सेक्टरवाइज राजस्व वसूली, जीएसटी अधिनियम के तहत कर निर्धारण और विलंब के प्रकरणों में ब्याज वसूली की कार्यवाही तथा ऑडिट की प्रगति की भी समीक्षा की। वाणिज्यिक कर विभाग के विशेष सचिव हिमशिखर गुप्ता, आयुक्त भीम सिंह और विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।

वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त भीम सिंह ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 में 18 हजार 500 करोड़ रूपए कर संग्रहण का संशोधित लक्ष्य रखा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर-2022 तक 12 हजार 580 करोड़ रूपए का कर संग्रहण किया जा चुका है जो कि कुल लक्ष्य का 68 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष राज्य को इसी अवधि में मिले राजस्व से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। इस वर्ष 26 प्रतिशत अधिक जीएसटी और 22 प्रतिशत अधिक वेट (VAT) मिला है। इस साल अब तक 8241 करोड़ रूपए जीएसटी के रूप में और 4339 करोड़ रूपए वेट के रूप में प्राप्त हुए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल 15 हजार करोड़ रूपए के कर संग्रहण के लक्ष्य के विरूद्ध अप्रैल-2021 से दिसम्बर-2021 के बीच दस हजार 092 करोड़ रूपए का कर संग्रह हुआ था।   

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इस साल पिछले वर्ष की तुलना में डीजल की खपत में दो लाख 30 हजार किलोलीटर और पेट्रोल की खपत में 53 हजार किलोलीटर की बढ़ोतरी हुई है। तदनुरूप इनसे मिलने वाले टैक्स में भी 791 करोड़ 14 लाख रूपए की वृद्धि हुई है। अप्रैल-2021 से दिसम्बर-2021 के बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री से प्रदेश को 3546 करोड़ 90 लाख रूपए का राजस्व मिला था जो इस वर्ष बढ़कर 4338 करोड़ चार लाख रूपए हो गया है। समीक्षा बैठक में वाणिज्यिक कर विभाग के अपर आयुक्त टी.आर. धुरवे, एच.एल. हिड़को और श्रीमती नीलिमा तिग्गा सहित सभी डिवीजन और सर्किल के अधिकारी मौजूद थे।

बिलासपुर : नियमों के उल्लंघन पर 9 कोल डीपो निरस्त

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बिलासपुर। जिला बिलासपुर अंर्तगत कोयला भंडारण अनुज्ञप्तियों की जांच खनिज विभाग की राज्य एवं जिला स्तरीय टीम द्वारा विगत कुछ माह पहले की गई थी जिसमें कोयला भंडारण अनुज्ञप्तिधारियों के द्वारा भंडारण अनुज्ञप्ति की शर्ताे के उल्लंघन किया जाना पाया गया। छ.ग. खनिज खनन, परिवहन तथा भंडारण नियम 2009 में उल्लेखित प्रावधानों के तहत 66 कोयला भंडारण अनुज्ञप्तिधारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण करने उपरांत अनुज्ञप्तिधारियों के द्वारा लंबे समय तक संचालन बंद रखने, तौल कांटा नहीं लगाने, ऑनलाईन अभिवहन पास जारी करने अनुज्ञप्तिस्थल पर कम्प्यूटर सिस्टम की व्यवस्था नहीं करने मासिक पत्रक जमा नहीं करने इत्यादि शर्तों का गंभीर उल्लंघन करने का दोषी पाये जाने से मे.वाची सेल्स-अमसेना, मे.छत्तीसगढ़ पावर एण्ड कोल बेनिफिकेशन लि. लोखंडी, आकाश ट्रेडर्स-धौराभाठा, जगदीश लक्ष्मी साहू-चंगोरी, लक्ष्मी ऐसोसियेट-हरदी, राहुल इंटरप्राइजेस-हरदी, खाटू कोल सेल्स-अमसेना, मे. शुभम कोल ट्रेडर्स-भोजपुरी, कुल 09 कोयला भंडारण अनुज्ञप्ति निरस्त कर दिया गया है।



11 कोल वाशरियों को स्वीकृत भंडारण अनुज्ञप्ति में भी संचालन में मासिक पत्रक में विस्तृत जानकारी नहीं देने, समय से जानकारी उपलब्ध नहीं कराने इत्यादि अनियमितता के कारण 5 करोड़ 90 लाख अर्थदण्ड जमा कराया गया है और 15 अनुज्ञप्तिधारियों से अनियमित अनुज्ञप्ति संचालन के कारण 53 लाख को मिलाते हुए अब तक कुल 6 करोड़ 43 लाख रुपय जमा कराया जा चुका है। शेष अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा प्रस्तुत जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है तथा अर्थदण्ड वसूली की कार्यवाही जारी है। जिन अनुज्ञप्तिधारियों के द्वारा मांग पत्र जारी करने के उपरांत भी राशि जमा नहीं कराया गया है उन अनुज्ञप्तिधारियों को ऑन लाईन पोर्टल से खनिज परिवहन पर रोक लगाने की भी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

उल्लेखनीय है कि एसईसीएल के कोयला खदानों से कोयला विभिन्न डीओ के माध्यम से संबंधित कंपनियों को जारी किया जाता है और डीओ का कोयला संबंधित कंपनियों के द्वारा रॉयल्टी एवं अन्य टेक्स जमा करने उपरांत 45 दिवस के भीतर खदानों से परिवहित करना अनिवार्य होता है। यदि किसी कारणवश कोई पार्टी समयावधि में कोयला खदान से नहीं उठा नहीं पाती तो उक्त कोयला मात्रा हेतु हर्जाना जमा करना होता है। कठिनाई के समाधान हेतु ही खनिज भण्डारण नियमों में कोयला भंडारण अनुज्ञप्ति स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है ताकि संबंधित कंपनियों समयावधि में कोयला उठा कर अस्थायी रूप से भंडारण अनुज्ञप्ति क्षेत्र में डंप कर सके तथा बाद व्यवस्था अनुरुप कोयला का परिवहन निर्धारित गंतव्य स्थान को कर सके।

एसईसीएल की कोयला खदानो से विभिन्न कंपनियों का कोयला अनुज्ञप्ति क्षेत्रों में लाया जाता है और उसकी रायल्टी एसईसीएल द्वारा खनिज विभाग को जमा करा दी जाती है अतः अनुज्ञप्तिधारी को इस सभी कंपनियों के कोयला का आवक-जावक का स्पष्ट लेखा रखना होता है और प्रतिमाह खनिज विभाग को मासिक पत्रक के माध्यम से जानकारी देनी होती है।

समय -समय पर खनिज विभाग कोयला भंडारण अनुज्ञप्ति क्षेत्रों का निरीक्षण करता तथा आगे भी करता रहेगा तथा जिन अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा अनुज्ञप्ति क्षेत्र के अंदर तौल कांटा स्थापित नहीं करने, ऑन लाईन पोर्टल के माध्यम से अभिवहन पास जारी करने मौका स्थल पर ही कम्प्यूटर सिस्टम की व्यवस्था नहीं करने, मासिक पत्रक सही समय पर जमा नहीं करने, मौका जांच के समय खनिज की वैद्यता प्रमाणित करने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करने को गंभीर उल्लंघन मानते हुए भंडारण अनुज्ञप्ति निरस्ती की कार्यवाही की जायेगी।

आरक्षण प्रावधानों के अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ के अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दल जाएगा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य से अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का संयुक्त दल आरक्षण प्रावधानों के अध्ययन के लिए शीघ्र ही महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं कर्नाटक जाएगा। यह अध्ययन दल उक्त राज्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण प्रावधानों के संबंध में सुसंगत एवं उपयुक्त जानकारी, विधिक स्थिति, पिछड़ेपन संबंधी, क्वांटिफिएबल डाटा या समकक्ष आयोग/प्रतिवेदन की जानकारी संबंधी राज्य के आरक्षण संबंधी न्यायालयीन प्रकरण एवं वस्तुस्थिति का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ शासन को रिपोर्ट सौंपेगा।



छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा उक्त राज्यों में आरक्षण के प्रावधानों के अध्ययन के लिए 5-5 सदस्यीय अध्ययन दल के गठन का आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के तहत महाराष्ट्र राज्य में आरक्षण के प्रावधानों के अध्ययन के लिए आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग श्रीमती शम्मी आबिदी, अवर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग एस.के. सिंह, उपायुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग प्रज्ञान सेठ, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व सामाजिक कार्यकर्ता आर. वी. सिंह और सेवानिवृत्त आईपीएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता भारत सिंह जाएंगे।

इसी तरह जल संसाधन विभाग के सचिव पी. अनबलगन, अवर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग श्रीमती अंशिका पाण्डेय, अपर संचालक आदिम जाति संजय गौर, सेवानिवृत्त आईएएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता बी.एल. ठाकुर एवं जी.एस. धनंजय का दल तमिलनाडु राज्य में अध्ययन के लिए जाएगा। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह, अवर सचिव सामान्य प्रशासन पुलक भट्टाचार्य, अपर संचालक आदिम जाति ए.आर. नवरंग, सेवानिवृत्त आईएएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता एच.एल. नायक तथा सेवानिवृत्त आईएफएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम लकड़ा का संयुक्त दल कर्नाटक में अध्ययन के लिए जाएगा।

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