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वित्त मंत्री ओपी चौधरी के मुख्य आतिथ्य में रामगढ़ महोत्सव का भव्य समापन

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रायपुर। दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का भव्य समापन गुरुवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। सरगुजा और बस्तर जैसे अंचलों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा अपने पहले बजट में मैंने इन क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए हैं और भविष्य में भी इन क्षेत्रों को हरसंभव सहायता दी जाएगी। 

उन्होंने कहा कि रामगढ़ की ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस महोत्सव को बजट में शामिल कर एक नियमित वार्षिक आयोजन के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा यहीं मेघदूतमकी रचना की गई थी, यह स्थल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। अपने उद्बोधन की शुरुआत मंत्री चौधरी ने भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी, रामगढ़ और महाकवि कालिदास के जयकारों के साथ की। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं रामगढ़ महोत्सव में सम्मिलित हुआ। सोलह वर्ष पूर्व जब मैं सरगुजा जिला पंचायत में सीईओ था, तब रामगढ़ आना हुआ था।

आज फिर वही आत्मीयता और अपनापन अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी सरकार ने बीते डेढ़ वर्षों में जनहित के कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं, 70 लाख बहनों को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर माह 1000 रूपए की सहायता राशि दी जा रही है और किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा रहा है।

विभागीय स्टॉलों का अवलोकन, हितग्राहियों को मिला लाभ

इस अवसर पर अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उद्यानिकी विभाग ने 5 हितग्राहियों को लीची पौधे वितरण, कृषि विभाग ने 10 हितग्राहियों को कोदो की मिनी किट बीज व 10 को मिट्टी परीक्षण कार्ड, मछली पालन विभाग ने 5 मछुआरों को जाल एवं 1 हितग्राही को आइस बॉक्स प्रदान किया। अन्य विभागों द्वारा भी लाभकारी सामग्रियों का वितरण किया गया। साथ ही आमजनों को योजनाओं की जानकारी दी गई।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

रामगढ़ महोत्सव के समापन अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूली छात्र-छात्राओं एवं कलाकारों ने लोकनृत्य, नाटक व गीत-संगीत की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। खैरागढ़ संगीत विद्यालय के मोक्षम ग्रुप ने श्रीराम स्तुति पर मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी। श्रीराम और केवट संवाद पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। देर शाम तक चले इन कार्यक्रमों ने दर्शकों को उत्सव स्थल पर बांधे रखा।

समारोह में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरुपा सिंह, नगर निगम महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित जनप्रतिनिधि और कलेक्टर विलास भोसकर, पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


गौवंश व दुधारु पशुओं तस्करी, वध व मांस की बिक्री पर होगी कार्रवाई

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर गृह विभाग द्वारा गौवंश व दुधारु पशुओं के अनाधिकृत परिवहन (तस्करी), वध व मांस की बिक्री आदि घटनाओं की रोकथाम तथा संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साय सरकार गौवंश के अवैध परिवहन पर सख्ती से निपट रही है। हमने सजा और जुर्माने का प्रावधान करके यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी इस कानून का उल्लंघन न कर सके। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में अब गौ तस्करी संभव नहीं और इसके लिए हमने प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय की है। उन्होंने कहा कि अवैध परिवहन पर सात साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह सिद्ध करना कि तस्करी नहीं हो रही है, अभियुक्त पर होगा। अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सक्षम अधिकारी के अनुमति के बिना गौवंश का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। परिवहन के दौरान वाहन में फ्लेक्स आदि लगाना होगा। तस्करी करने पर वाहन राजसात किया जाएगा और वाहन मालिक पर भी कार्यवाही होगी। इससे अर्जित संपत्ति को चिन्हित कर कुर्क किया जाएगा।

शर्मा ने कहा कि राजपत्रित अधिकारी को उक्त घटनाओं की रोकथाम और पर्यवेक्षण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। पुलिस के अधिकारी शिथिल या संलिप्त होने पर उन पर कठोर कार्यवाही होगी। आसूचना एकत्रित करना, जिले के सभी प्रकारों का अध्ययन करना और सभी आरोपियों की पुनः समीक्षा व सतत निगरानी आवश्यक होगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नियम विरुद्ध परिवहन होना पाया जाता है तो जहां से परिवहन शुरू हुआ और जहां वाहन जब्त किया गया है, उस बीच के समस्त पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारियों के सर्विस बुक में नकारात्मक टीप अंकित की जाएगी और पांच से अधिक बार नकारात्मक टीप अंकित होने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जाएगी। यदि किसी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी की गौवंश के वध तथा गौवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी (अवैध परिवहन) की कार्यवाही में किसी प्रकार की शिथिलता व संलिप्तता पायी जाती है, तो उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक और विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

देश की न्याय प्रणाली के लिए आज ऐतिहासिक दिन – अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा विधि एवं विधाई कार्य मंत्री अरुण साव ने कहा कि आज देश की न्याय प्रणाली के लिए ऐतिहासिक दिन है। पुराने कानून को समाप्त करके नया कानून लागू किया गया है। जब कोई कानून बनाया जाता है, तो उसमें कानून बनाने वाले की सोच क्या है, उद्देश्य क्या है, ये बड़ा महत्व रखता है। कोई पीड़ित दंड नहीं, न्याय चाहता है। आज से प्रभावी हो रहे तीनों नए कानूनों को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। इनके जरिए नागरिकों को पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर न्याय मिल सकेगा।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मुंगेली जिला मुख्यालय के थाना सिटी कोतवाली में नए कानूनों के लागू होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नए स्वरूप में आज अस्तित्व में आने पर लोगों को बधाई दी। उन्होंने इन कानूनों को बनाने की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में मुंगेली के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि नए कानून के अनुसार अब लोग घर बैठे ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

इसमें कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं जिससे लोगों को अब त्वरित न्याय मिल सकेगा। उन्होंने इन नए कानूनों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित किया। मोहले ने पुलिस विभाग को समाज को न्याय दिलाने में ज्यादा से ज्यादा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुंगेली के कलेक्टर राहुल देव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गिरिजाशंकर जायसवाल ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को नए कानूनों की उपयोगिता और उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वनमंडलाधिकारी संजय यादव, मुंगेली नगर पालिका के अध्यक्ष हेमेन्द्र गोस्वामी, उपाध्यक्ष मोहन मल्लाह, मुंगेली जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष पवन पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और अधिवक्ता संघ मुंगेली के अध्यक्ष टीकम चंद्राकर सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद थे।

ए.ए.एफ.टी.के कुलपति नियुक्ति हेतु खोजबीन समिति गठित

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रायपुर। राज्यपाल सह कुलाध्यक्ष विश्वभूषण हरिचंदन ने ए.ए.एफ.टी.यूनिवर्सिटी ऑफ मीडिया एण्ड आर्ट्स, माठ, रायपुर में कुलपति नियुक्ति हेतु पेेनल अनुशंसित करने हेतु खोजबीन समिति का गठन किया है।

राजभवन सचिवालय से जारी अधिसूचना के अनुसार प्रो. अरविंद कुमार प्रोफेसर एंड हेड डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिस के.के जैन (पी.जी.) कॉलेज यूपी. समिति के अध्यक्ष होंगे एवं प्रो. विवेक कुमार प्रोफेसर सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली एवं डॉ. किरण गजपााल प्राचार्य शासकीय दू.ब. महिला महाविद्यालय, रायपुर, उच्च शिक्षा विभाग, समिति के सदस्य रहेंगे। यह समिति अधिसूचना प्रसारित होने की तिथि से छः सप्ताह के अंदर न्यूनतम तीन व्यक्तियों का पेनल कुलाध्यक्ष को प्रस्तुत करेगी। इस संबंध में 27 सितम्बर 2023 को राजभवन सचिवालय से अधिसूचना जारी की गई है। समिति का गठन छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2005 (क्रमांक 13 सन् 2005) की धारा-17 के उप धारा (2) में निहित प्रावधान के तहत किया गया है।

छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 10 सिंतबर से संभाग स्तर पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए चल रही छत्तीसगढ़िया ओलंपिक प्रतियोगिता अब 10 सितंबर से संभाग स्तर में प्रवेश करने जा रही है। संभाग स्तर में यह प्रतियोगिता 20 सितंबर तक चलेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल के मार्गदर्शन में चल रही छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को इस वर्ष भी अभूतपूर्व लोकप्रियता मिल रही है।

छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में युवाओं के साथ ही बूढ़े, बच्चें एवं महिलाएं भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में लंबी कूद, 100 मीटर दौड़ एवं कुश्ती के खेल में 18 से 40 वर्ष की आयु वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने की घोषणा की है। यह प्रावधान इसी सत्र से लागू होगा। संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के समापन के पश्चात अंतिम चरण में राज्य स्तरीय छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन राजधानी रायपुर में 25 सितंबर से 27 सितंबर तक होगा।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में राज्य के 16 पारम्परिक खेल प्रतियोगिताएं दलीय व एकल श्रेणी में आयोजित की जा रही है। दलीय श्रेणी में गिल्ली डंडा, पिट्टूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी (कंचा) जैसी खेल विधाएं शामिल की गई हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा, 100 मीटर दौड़, लम्बी कूद, रस्सी कूद एवं कुश्ती शामिल हैं।

पंजीकृति भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर आर्थिक सहायता का जोड़ा गया नया प्रावधान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में भारत सरकार के संशोधन के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4 में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार प्राकृतिक आपदा के विरूद्ध प्रभावित व्यक्तियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता की राशि में बढ़ोतरी की गई है। केबिनेट की बैठक में अनुमोदित संशोधन प्रस्ताव के अनुसार कृषि भूमि से गाद/मलबा निकालने हेतु वर्तमान में 12,200 रूपए प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। 



नवीन प्रावधान में इसे बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है। भू-स्खलन/नदी से भूमि हानि के लिए वर्तमान प्रावधान 37,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को नवीन प्रावधान में बढ़ाकर 47,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, असिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 6,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 8,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में कृषि बागानी फसल हानि पर वर्तमान में 13,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 17,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, बारहमासी फसल हानि पर वर्तमान में 18,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 22,500 रूपए प्रति हेक्टेयर किया गया है।

इसी प्रकार रेशम ( ऐरी, मलबरी, टसर) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 4,800 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर, रेशम (मूगा) की हानि पर वर्तमान प्रावधान 6,000 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 7,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, टिड्डी नियंत्रण हेतु रसायन स्प्रे पर नवीन प्रावधान राज्य के अंश की सीमा तक प्रावधान किया गया है। बड़े दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 30,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 37,500 रूपए, छोटे दुधारू पशु की हानि पर वर्तमान में 3,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4,000 रूपए, बड़े सूखे पशु की हानि पर वर्तमान प्रावधान 25,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 32,000 रूपए

छोटे सूखे पशु की हानि पर वर्तमान में 16,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 20,000 रूपएपोल्ट्री के लिए वर्तमान प्रावधान 5,000 रूपए प्रति परिवार, 50 रूपए प्रति पक्षी को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10,000 रूपए प्रति परिवार, 100 रूपए प्रति पक्षी किया गया है। इसी प्रकार गौशाला में पशु चारा के लिए वर्तमान प्रावधान 70 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़े पशु, 35 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 80 रूपए प्रतिदिन प्रति बड़ेपशु, 45 रूपए प्रतिदिन प्रति छोटेपशु, पशुगृह क्षति में 1500 रूपए प्रति शेड को बढ़ाकर नवीन प्रावधान में 3000 रूपए प्रति शेड, सामान्य क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 95,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,20,000 रूपए, पहाड़ी क्षेत्र में मकान क्षति (पूर्ण) वर्तमान प्रावधान 1,01,900 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 1,30,000 रूपए

पक्का मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 5200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6500 रूपए, कच्चा मकान क्षति (आंशिक) वर्तमान प्रावधान 3200 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, झोपड़ी क्षति वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 8000 रूपए, कपड़ा क्षति वर्तमान प्रावधान 1800 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, बर्तन क्षति वर्तमान प्रावधान 2000 रूपए प्रति परिवार को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2500 रूपए प्रति परिवार, जनहानि पर वर्तमान प्रावधान 4,00,000 रूपए को नवीन प्रावधान में यथावत रखा गया है। इसी प्रकार अंग हानि (40 से 60 प्रतिशत) पर वर्तमान प्रावधान 59,100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 74,000 रूपए, अंग हानि (60 प्रतिशत से अधिक) पर 2,00,000 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 2,50,000 रूपए, अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से कम) वर्तमान प्रावधान 4300 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5400 रूपए

अस्पताल में भर्ती (1 सप्ताह से ज्यादा) वर्तमान प्रावधान 12700 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 16000 रूपए, हथकरघा बुनकर को क्षति पर वर्तमान प्रावधान 4100 रूपए प्रति कारीगर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 5000 रूपए प्रति कारीगर, मछुवारों के नाव की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 9600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 15000 रूपए, मछुवारों के नाव की आंशिक क्षति पर 4100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 6000 रूपए, मछुवारों के जाल की पूर्ण क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2600 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 4000 रूपए, मछुवारों के जाल की आंशिक क्षति पर वर्तमान प्रावधान 2100 रूपए को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 3000 रूपए, मछली चारे हेतु इनपुट सब्सिडी पर वर्तमान प्रावधान 8200 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर नवीन प्रावधान 10000 रूपए प्रति हेक्टेयर, पंजीकृत भूमिहीन श्रमिक की आजीविका क्षति पर नवीन प्रावधान आपदा की अवधि (30 दिन) तक 02 सदस्य को मनरेगा दर पर आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।  

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