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राज्यपाल डेका ने बेमेतरा जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका आज दो दिवसीय दौरे पर बेमेतरा पहुँचे। उन्होंने सर्किट हाउस परिसर में एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत मौलश्री का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

राज्यपाल डेका ने सर्किट हाउस स्थित सभाकक्ष में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक लेकर विकास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने नवागढ़ विकासखंड के उनके द्वारा गोद लिए गए ग्राम टेमरी में संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। बैठक में उन्होंने शिक्षाए स्वास्थ्यए पेयजलए कृषिए उद्यानिकीए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की प्रगति की जानकारी की।

राज्यपाल ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि टेमरी गांव में जैविक भिण्डी की खेती की संभावनाएँ बेहतर हैं। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने बाड़ी में जैविक भिण्डी का उत्पादन करें। उद्यानिकी अधिकारी द्वारा यह बताया गया कि ग्राम टेमरी का वातावरण भिण्डी उत्पादन के लिए उपयुक्त है।

उन्होंने कहा कि गोद लिए गए ग्राम के प्रत्येक व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचेए यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनपद पंचायत के सी ई ओ को निर्देशित किया कि ग्राम विकास की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा मिशन मोड में कार्य कर ग्राम को आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाए।

बैठक के दौरान राज्यपाल को गांव में तीन तपेदिक ;टीण्बीण्द्ध रोगियों की जानकारी दी गईए जिस पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से छह माह की दवा हेतु आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्तए डेका ने आठ मेधावी विद्यार्थियों को 5.5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की।

राज्यपाल ने श्रीराम बुनकर सहकारी समिति देवरबीजा के सदस्यों से भेंट की और उनकी भवन मरम्मत व अन्य समस्याओं के समाधान हेतु कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगितादृ2025 में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों से भी मुलाकात कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समापन पर राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया।

समस्त शैक्षणिक एवं प्रशासकीय कार्यालयों में ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से होगी अवकाश प्राप्ति एवं स्वीकृति की प्रक्रिया

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रायपुर। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा 1 अगस्त 2024 से प्रदेश के समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में एवम 12 अगस्त 2024 से समस्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यालयों में अवकाश प्राप्ति एवं स्वीकृति की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। 

उक्त तिथि के पश्चात ऑफलाइन माध्यम से किया गया आवेदन स्वमेव निरस्त माना जायेगा। इस आशय का आदेश संचालक लोक शिक्षण संचालनालय नवा रायपुर द्वारा जारी कर दिया गया है।


बी.एड./एम.एड. (विभागीय) प्रशिक्षण सत्र 2024-26 में प्रवेश प्रारंभ

रायपुर। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, शंकर नगर, रायपुर ने सत्र 2024-26 के लिए एम.एड. और बी.एड. विभागीय परीक्षार्थियों की प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 01 अगस्त से प्रारंभ होगी। इच्छुक उम्मीदवार 1 अगस्त 2024 से 7 अगस्त 2024 तक एस.सी.ई.आर.टी. की आधिकारिक वेबसाइट http://scert.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी 14 अगस्त 2024 तक संबंधित महाविद्यालय में जमा करानी होगी।

शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय के प्राचार्य से मिली जानकारी के अनुसार एम.एड. में प्रवेश पूर्व परीक्षा के प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची के अनुसार होगा, जबकि बी.एड. में चयन स्नातक परीक्षा के अंकों की वरीयता के आधार पर किया जाएगा। शासकीय शिक्षण संस्थानों में कार्यरत अध्यापक अपने संस्थान प्रमुख के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया की अंतिम तिथि तक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन पत्र जमा करना अनिवार्य होगा। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय ने समस्त अभ्यर्थियों को निर्देशित किये हैं कि वे समय पर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण करें और विस्तृत जानकारी के लिए महाविद्यालय से संपर्क करें।

छत्तीसगढ़ में होने वाली जी-20 की बैठकों की व्यवस्था की तैयारियां शुरू

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आगामी 18-19 सितम्बर 2023 को जी-20 देशों के कार्यसमूह की बैठक का आयोजित होगी। बैठकों की तमाम व्यवस्थाओं की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय हेतु मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने संस्कृति, नगरीय प्रशासन, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से उनके द्वारा की जा रही कार्यवाही की जानकारी ली।
                  

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवा रायपुर में एयरपोर्ट से मेयफेयर रिसार्ट एवं नवा रायपुर के अन्य मार्गों की वर्तमान स्थिति एवं आयोजन हेतु निर्मित होने वाली व्यवस्थाओं को लेकर थ्री-3डी वॉक-थू्र के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने नवा रायपुर के विभिन्न मार्गों पर छत्तीसगढ़ प्रदेश की विशिष्टता को प्रदर्शित करने वाले स्थल, पुरातात्विक नगरी सिरपुर, चित्रकोट जलप्रपात, वन एवं खनिज संपदा और औद्योगिक विकास सहित छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी संबंधी होर्डिंग्स इत्यादि लगाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को एयरपोर्ट से मेफेयर रिसार्ट सड़क मार्ग, पुराना जी.ई. रोड, व्हीआईपी एवं अन्य मार्गों का सौन्दर्यीकरण और साज-सज्जा के एवं अन्य आवश्यक कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए है।

संस्कृति विभाग के अधिकारियों को जी-20 की बैठकों में आने वाले विदेशी डेलीगेट्स के लिए छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य, संगीत और संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन करने के लिए अभी से आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए है। उन्होंने आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल करने के निर्देश दिए है। अंतिम रिहर्सल मुख्य मंच स्थल पर करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है कि अंतिम रिहर्सल सुरक्षा अधिग्रहण के पूर्व कर ली जाए। इसी तरह से जी-20 वाटिका हेतु उपयुक्त स्थलों पर विदेशी आगन्तुकों द्वारा पौधारोपण कराए जाने की तैयारी करने के निर्देश दिए। बैठक में व्यवस्थाओं की विभिन्न तैयारियों के संबंध में नगर निगम रायपुर, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण और संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक विवेक आचार्य, आयुक्त नगर निगम रायपुर मयंक चतुर्वेदी, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री किरण कौशल सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

प्रशासनिक टीम की छापामार कार्यवाही, 16 हज़ार से ज्यादा बारदाना जप्त, शिकायत व गड़बड़ी मिलने पर त्वरित कड़ी कार्यवाही लगातार जारी

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कोरिया। धान खरीदी को व्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने प्रशासनिक दल द्वारा लगातार समितियों और उपार्जन केंद्रों की निगरानी की जा रही है और किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर त्वरित कार्यवाही भी की जा रही है। इसी कड़ी में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में बीते शनिवार को तहसीलदार बैकुंठपुर मनहरण सिंह राठिया और उनकी टीम ने छापामार कार्यवाही कर अलग अलग जगह से अवैध रूप से भंडारित बारदानों को जप्त किया।

गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर तहसीलदार बैकुंठपुर के साथ हल्का पटवारी गिरजापुर योगेश गुप्ता, संजय सूर्यवंशी, रानु कुर्रे, शकुंतला सिंह की टीम द्वारा गिरजापुर समिति के कर्मचारियों के अलग-अलग ठिकानों पर छापामार कार्यवाही की गई। जिसमें उमेश देवांगन, दिनेश कुशवाहा, ईश्वर साहू, उमेश कुशवाहा के घर से अवैध भंडारित बारदाने जप्त किये गए। इन सभी ठिकानों से 16 से अधिक बारदाना जप्त किया गया है। पंचनामा और प्रतिवेदन अगली कार्यवाही के लिए भेजा गया है। बता दें कि पूर्व में भी धान खरीदी से संबंधित शिकायतों पर त्वरित एक्शन लेते हुए प्रशासनिक दलों द्वारा उचित कार्यवाही की गई है। जिसमें धान के अवैध भंडारण और परिवहन जैसे मामले शामिल हैं। धान खरीदी को प्रभावित करने वालों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

विशेष लेख : प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण से लोगों को मिली राहत

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रायपुर। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ अंचल में रायपुर,  दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़,  बिलासपुर,  बस्तर और सरगुजा जिले ही अस्तित्व में थे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दो साल पहले वर्ष 1998 को बिलासपुर तथा राजनांदगांव जिले के कुछ हिस्से को अलग कर कबीरधाम जिला बनाया गया। बिलासपुर जिले के कुछ हिस्से को तोड़कर कोरबा जिला भी बनाया गया। इसी तरह रायपुर जिले से अलग होकर महासमुंद और धमतरी को नए जिले का दर्जा मिला। 



बस्तर जिले से कांकेर और दंतेवाड़ा तथा सरगुजा जिले से कोरिया और जशपुर को तत्कालीन सरकार द्वारा नया जिला बनाया गया। 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ। उस समय प्रदेश में मात्र 16 जिले बस्तरकांकेरदंतेवाड़ा, रायपुर, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कोरबा, सरगुजा, कोरिया और जशपुर ही था। वर्ष 2007 में जिला बस्तर से नारायणपुर जिला और दंतेवाड़ा से पृथक बीजापुर जिला बनाया गया। इस तरह 16 से बढ़कर 18 जिले वाला छत्तीसगढ़ राज्य कहलाया।

वर्ष 2012 में 9 जिलों का और गठन किया गया। इसमें बस्तर के कुछ भाग को जोड़ते हुए कोंडागांव और दंतेवाड़ा जिले के कुछ भाग को अलग कर सुकमा जिला बनाया गया। इसी तरह रायपुर जिले में आने वाले बलौदाबाजार-भाटापारा एवं गरियाबंद को दो स्वतंत्र जिला बनाया गया। बिलासपुर जिले के अंतर्गत मुंगेली को जिला बनाया गया। दुर्ग जिले से बालोद व बेमेतरा को भी नए जिले का दर्जा मिला। सरगुजा जिले से बलरामपुर-रामानुजगंज एवं सूरजपुर को जिला बनाया गया। इस तरह प्रदेश में जिलों की संख्या 18 से बढ़कर 27 हो गई।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण करते हुए आम लोगों को जो राहत दी है वह काबिल-ए-तारीफ है। मुख्यमंत्री बने महज 14 माह ही हुए थे कि अंचल की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाहीको फरवरी 2020 में जिला बनाकर एक इतिहास रच दिया। इस तरह जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) जिले बनने से करीब साढ़े तीन लाख लोगों को शासन-प्रशासन की विभिन्न योजनाओं,  कार्यों,  जरूरतों को पूरा करने के लिए समय की बचत,  शारीरिक,  मानसिक व आर्थिक परेशानियों से छुटकारा भी मिला।

सामान्य भाषा में विकेन्द्रीकरण का अर्थ है कि शासन-सत्ता को एक स्थान पर केन्द्रित करने की बजाय उसे स्थानीय स्तरों पर विभाजित किया जाए ताकि आम आदमी की सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित हो सके और वह अपने हितों व आवश्यकताओं के अनुरूप शासन-संचालन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके। यही सत्ता विकेन्द्रीकरण का मूल आधार है। अर्थात् आम जनता तक शासन-सत्ता की पहुंच को सुलभ बनाना ही विकेन्द्रीकरण है। इस तरह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण को और तवज्जो देते हुए 

गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही के अलावा मोहला-मानपुर-चौकीखैरागढ़-छुईखदान-गंडईसारंगढ़-बिलाईगढ़मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर तथा सक्ती को नए जिले बनाकर क्षेत्रवासियों को एक महत्वपूर्ण सौगात दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महज पौने चार वर्षों में 6 नए जिलों का निर्माण किया है। इन जिलों के गठन के पीछे उनकी सोच यह रही कि इस अंचल में निवासरत आदिवासीअनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्गों का सर्वांगीण विकास हो। 

साथ ही इस अंचल का सांस्कृतिकधार्मिकऐतिहासिकपुरातात्विक विकास हो। खनिज संसाधनों सहित सरकार की योजनाओं का लाभ भी लोगों को भरपूर मिल सके। सड़कबिजलीपानीअस्पतालस्कूलकॉलेजराशन दुकान जैसी अधोसंरचनाओं के साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो और स्थानीय युवाओं को रोजगार भी आसानी से मिल सके। निश्चय ही इन जिलों के निर्माण से विकास की रफ्तार तेजी पकड़ेगी और आम लोगों के विश्वास को बरकरार रखते हुए शासन-प्रशासन तेजी से जनहितकारी काम भी करेगा।

राज्यपाल सुश्री उइके से भारतीय प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से आज यहां राजभवन में छत्तीसगढ़ के भारतीय प्रशासनिक सेवा (वर्ष 2021) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी की महानिदेशक श्रीमती रेणु जी पिल्ले भी उपस्थित थीं। राज्यपाल सुश्री उइके ने अधिकारियों को आम जनता से संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करने एवं उनकीे समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से प्रयास करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अपने आचार व्यवहार और कार्य से ऐसी मिसाल पेश करें जिससे दूसरों को भी प्रेरणा मिले।



उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है यहां के अनेक क्षेत्र पांचवी अनुसूची के तहत आते हैं। आदिवासियों की समस्याओं को संवेदना के साथ सुलझाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि अपने कार्यक्षेत्र में युवाओं को कैरियर निर्माण एवं उद्यमी बनने के लिए भी प्रोत्साहित करें। सुश्री उइके ने अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर अकादमी के प्रशिक्षण संचालकद्वय प्रदीप शुक्ला, श्रीमती सीमा सिंह, जयंत नाहटा, सहायक कलेक्टर रायपुर, लक्ष्मण तिवारी, सहायक कलेक्टर दुर्ग, वासु जैन, सहायक कलेक्टर बिलासपुर उपस्थित थे।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती जिले का आगाज 9 सितम्बर को

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेशवासियों को पिछले सप्ताह 3 नए जिलों की सौगात देने के बाद 9 सितम्बर को 2 नए जिलों का शुभारम्भ करने जा रहे हैं। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 32वें और सक्ती 33वें जिला के रूप में अस्तित्व में आएंगे। इस तरह प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़ कर 33 हो जायेगी। दोनों नए जिलों के गठन से इन क्षेत्रों के वर्षों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। नए जिले के गठन से न केवल शासकीय कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन होगा बल्कि लोगों को कई प्रकार की सार्वजनिक सुविधाएं भी मिलेगी। लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।



मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कोरिया जिले से अलग होकर तथा जांजगीर-चांपा से अलग होकर सक्ती जिला नयी प्रशासनिक इकाई के रूप में अस्तित्व में आ रहा है। नये जिले के गठन को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में और सक्ती में अभूतपूर्व हर्ष व्याप्त है। नया जिला अस्तित्व में आने से क्षेत्र में विकास की नयी धारा बहेगी, विकास की गति और तेज होगी। पहुंचविहीन क्षेत्रों में विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न, इंटरनेट तथा रोड कनेक्टिविटी के लिए और बेहतर कार्य किए जाएंगे।

नए जिलों के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दोनों जिलों में 353 करोड़ 79 लाख 23 हजार रूपए के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इस दिन मनेंद्रगढ़ में 187 करोड़ 04 लाख 66 हजार रूपए के 09 कार्यों का भूमिपूजन तथा 13 करोड़ 68 लाख 57 हजार रूपए के 06 कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। वही सक्ती में 85 करोड़ 20 लाख रूपए के 296 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 67 करोड़ 85 लाख 99 हजार रूपए के 13 कार्यों का लोकर्पण होगा।



नवीन जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर सरगुजा संभाग के अंतर्गत होगा। जिले में कुल ग्रामों की संख्या 376 है। यहां 13 राजस्व निरीक्षक मण्डल तथा 87 पटवारी हल्का है।  यहां मनेन्द्रगढ़, भरतपुर और खड़गवां अनुविभाग और मनेन्द्रगढ़, केल्हारी, भरतपुर, खड़गवां, चिरमिरी और कोटाडोल तहसील होंगे। यहां 5 नगरीय निकाय जिनमें नगरपालिका निगम चिरमिरी, नगरपालिका परिषद मनेन्द्रगढ़, नगर पंचायत झगराखांड़, नगर पंचायत खोंगापानी और नगर पंचायत नई लेदरी सम्मिलित हैं। नवगठित जिले में अमृतधारा जलप्रपात, सिद्धबाबा मंदिर (मनेन्द्रगढ़) सीतामढ़ी-हरचौका (रामवनगमन पर्यटन परिपथ) भरतपुर, रमदहा जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थल भी शामिल हैं।

इसी प्रकार नया जिला सक्ती बिलासपुर संभाग के अंतर्गत होगा। जिला सक्ती में उपखंड सक्ती की तहसील सक्ती, मालखरौदा, जैजैपुर और उपखंड डभरा की तहसील डभरा सहित कुल 5 तहसीलें शामिल होंगी। सक्ती जिले में 18 राजस्व निरीक्षक मंडल शामिल होंगे। 2011 जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 6,47,254 है। सक्ती जिले में 319 ग्राम पंचायतें, 6 नगरीय निकाय शामिल होंगे। नवगठित जिले में चंद्रहासिनी माता मंदिर चंद्रपुर, अड़भार अष्टभुजी माता मंदिर, रेनखोल, दमऊदरहा जैसे पर्यटन स्थल भी शामिल हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों में फेरबदल

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रायपुर। राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों में फेरबदल किया है। वहीं, भारतीय पुलिस सेवा के चार अधिकारियों की नई पदस्थापना भी की है। जारी आदेश के अनुसार रेणु जी पिल्ले को खेल और युवा कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है। साथ ही उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अलावा धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव और छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।



वहीं, सुब्रत साहू को पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव तथा विकास आयुक्त के अलावा ठाकुर प्यारेलाल पंचायत और ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मनोज कुमार पिंगुआ को गृह और जेल विभाग के प्रमुख सचिव के साथ छत्तीसगढ़ भवन नई दिल्ली के प्रमुख प्रवासीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ए. कुलभूषण टोप्पो को सामान्य प्रशासन विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा धनंजय देवांगन, एस. भारतीदासन, हिमशिखर गुप्ता, सत्यनारायण राठौर, डॉक्टर तंबोली अय्याज फकीर भाई, सारांश मित्तर और चंदन संजय त्रिपाठी को नये प्रभार सौंपे गए हैं। वहीं, यशवंत कुमार रायपुर संभाग के नये आयुक्त होंगे।

इधर, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को दुर्ग के साथ रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, ओ.पी. पाल को नक्सल ऑपरेशन और एसआईबी के पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ किया गया है। रामगोपाल गर्ग को राजनांदगांव रेंज का उप पुलिस महानिरीक्षक और के.एल. धु्रव को उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद जिले के माओवाद विरोधी अभियान के पर्यवेक्षण का कार्य सौंपा गया है।

योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होता है तो आम जनता नहीं करेगी शिकायत

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रायपुर. शासकीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होता है तो जनता शिकायत नहीं करेगी। बस्तर और सरगुजा में भेंट मुलाकात के दौरान नागरिक सेवाओं की आपूर्ति को  लेकर बहुत कम शिकायतें आईं। इससे पता चलता है कि प्रशासनिक तंत्र अच्छा काम कर रहा है। आप सभी से अपेक्षा है कि इसी तरह जनसेवा के दायित्व को पूरे मनोयोग से निभाते रहें. यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांकेर में आयोजित समीक्षा बैठक में कही. उन्होंने कहा कि हमने प्रशासनिक तंत्र में जनसेवा के संकल्प को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम किया है इसके प्रभावी नतीजे सामने रहे हैं. 



मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों के लिए निरंतर बेहतर कार्य किये जाने की जरूरत है. इस दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे. वनवासी वनों के संरक्षक हैं. फारेस्ट नियमों के दायरे में जंगल में रहने वाले रहवासियों को हर तरह की सुविधा देना सुनिश्चित करें. 

यहां उनके लिए जंगल के संसाधनों को ही विकसित तथा प्रसंस्कृत कर आजीविकामूलक गतिविधियों के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े तीन साल पहले और आज के कांकेर में बड़ा बदलाव महसूस किया जा सकता है. क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। शांति कायम हुई है. पर्यटन गतिविधियों का विस्तार हो रहा है. वनोपजों के प्रसंस्करण की दिशा में बड़ा काम हो रहा है.

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांकेर को पूरे देश में अपने रैली ककून और मिलेट मिशन की वजह से पहचान मिलने लगी है. कोदो, कुटकी, रागी भी कांकेर की पहचान बन रही है. इनका वैल्यू एडीशन करना है और लोगों के लिए आर्थिक आय के बड़े अवसर उपलब्ध कराना है. अपने वनसंसाधनों से कांकेर की पहचान है। वनोपजों के प्रसंस्करण और क्रय को लेकर शासन की बेहतर नीति की वजह से संग्राहकों और व्यापारियों के लिए भरपूर संभावनाएं उभर कर आई हैं. इस दिशा में काम इसी तरह से निरंतर चलना चाहिए.

 मुख्यमंत्री ने पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कार्य करने अधिकारियों को निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि कांकेर बस्तर का प्रवेश द्वार है. प्रवेश द्वार से ही पर्यटकों का आकर्षण बनें, इसलिए पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने कार्य करना है. उन्होंने कहा कि टाटामारी, लीमदरहा जैसे रिसार्ट मैंने देखें. बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इसी तरह के प्रयासों से बस्तर तेजी से पर्यटन हाटस्पाट के रूप में विकसित होगा.

 मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं स्कूलों में भी गया. पढ़ाई की अधोसंरचना मजबूत हुई है. अभिभावकों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूकता बढ़ी है. अधिकारियों से अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई है कि पूरे भेंट मुलाकात अभियान में मैंने संतुष्टि और मुस्कान से भरे चेहरे देखे, कहीं तनाव की कोई झलक नहीं. ऐसा ही छत्तीसगढ़ गढ़ने की दिशा में हम काम कर रहे हैं और आप निरंतर इस लक्ष्य को लेकर कार्य करते रहें.

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