Media24Media.com: प्रभु श्री राम

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छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य, जहां भांजे को माना जाता है भगवान का स्वरूप : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : प्रभु श्री राम छत्तीसगढ़ के कण-कण में बसे हुए हैं, जन-जन में बसे हुए हैं। भगवान श्रीराम हमारे भांचा राम हैं। पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है, जहां भांजे को भगवान स्वरूप में पूजते हैं, उनका चरण पखारते हैं। उन्हें दंडवत होकर प्रणाम करते हैं। हमारी सरकार की श्रीराम लला दर्शन योजना से राज्य के 20 हजार से अधिक लोग अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के तीन दिवसीय तातापानी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उक्त बाते कही।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम लोग तातापानी संक्रांति परब में हर साल यहां आते हैं। पिछले साल जब हम लोग यहां आए थे, तब इस पावन स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। परिणाम आप सबके सामने है, आज तस्वीर बहुत कुछ बदली-बदली सी नजर आ रही है। यहां विकास के काम तेजी से हुए हैं और लगातार हो ही रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। खासकर सरगुजा और बस्तर जिले में अनेक ऐसे सुंदर स्थान हैं, जो पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। ऐसे स्थलों को चिन्हित कर पर्यटन स्थलों का विकास तेजी से कराया जा रहा है। तातापानी भी ऐसी ही जगहों में से एक है। हम इन सभी दर्शनीय स्थलों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करेंगे। इससे रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे। अभी हम लोगों ने 177 करोड़ रुपये के 198 विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया है। इनमें करीब 134 करोड़ रुपये की लागत के 140 कार्यों का भूमिपूजन और 43 करोड़ रुपये के 58 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा परिसर के निर्माण के लिए हम लोगों ने आज भूमिपूजन किया है, जिसके निर्माण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को विशेष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बलरामपुर कॉलेज में ऑडिटोरियम निर्माण की घोषणा की।


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत 300 बेटियों के हाथ पीले हुए हैं। उन्होंने सभी नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए सभी के सुखमय गृहस्थ जीवन की मंगल कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तातापानी संक्रांति परब बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का गौरव है। तातापानी दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहां गर्म-पानी के कुंड के रूप में प्रकृति की शक्ति को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि तातापानी संक्रांति परब का यह आयोजन समाज में एकता और सौहार्द का संदेश भी देता है। इस महोत्सव में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ ही पतंगबाजी और आरागाही हवाई पट्टी पर पैरासेलिंग का आनंद भी आप लोग उठा पाएंगे। यहां किसान संगोष्ठी और पंच-सरपंच सम्मेलन भी होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य सामने रखा है। इसी के अनुरूप हम भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ा रहे है। पिछले एक साल में हमारी सरकार ने मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया है। इस साल छत्तीसगढ़ में धान की फसल अच्छी हुई है। 3100 रुपए क्विंटल के दाम से प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान की खरीदी हो रही है। इस साल किसान भाइयों के घरों में रिकॉर्ड पैसा आने वाला है। अभी किसान भाइयों को धान के समर्थन मूल्य का भुगतान हो रहा है, शीघ्र ही उनके खातों में अंतर की राशि भी भेज दी जाएगी। हमारी सरकार राज्य के गरीब परिवारों को पांच साल तक निःशुल्क राशन उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर को हमने चार हजार रूपये से बढ़ाकर साढ़े 5 हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सभी आवासहीन पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। हमने सरकार के शपथ ग्रहण के दूसरे दिन प्रदेश के आवासहीनों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के लिए 3 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना की घोषणा की है। उन्होंने अगले वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ को 4 लाख नए आवास के लिए सहमति दी है। उन्होंने कहा नये सर्वे में अब हितग्राहियों की मासिक आय सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा जिनके पास ढाई एकड़ सिंचित भूमि या पांच एकड़ असिंचित भूमि है, वे भी अब इस योजना के तहत पात्र होंगे । हितग्राही अब स्वयं भी अपने आवास हेतु मोबाइल एप के जरिए आवेदन और सर्वेक्षण कर सकते हैं।

प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से प्रदेश के लाखों परिवारों में खुशी और समृद्धि आई है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने समाज के कमजोर वर्गों के जीवनस्तर में सुखद बदलाव लाने का काम किया है।

इस अवसर पर सामरी विधायक उद्धेश्‍वरी पैकरा, प्रतापपुर विधायक शंकुतला पोर्ते, सरगुजा विधायक  राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

   

15 साल सत्ता में रही भाजपा को न राम वन गमन पथ याद रहा न ही माता कौशल्या याद रही : डॉ रश्मि चंद्राकर

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महासमुंद। कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 साल भारतीय जनता पार्टी को अवसर दिया था लेकिन राम काज भूल गए। छत्तीसगढ़ के कण-कण में प्रभु श्री राम बसे हैं, पूर्व में छत्तीसगढ़ को कौशल प्रदेश और बस्तर को दंडकारण्य कहा जाता था। रामायण में अरण्यकांड का संदर्भ छत्तीसगढ़ से ही रहा है। 1 से 3 जून को रायगढ़ में होने वाले राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में विशेष तौर पर अरण्यकांड के प्रसंग का वाचन और गायन होगा। 


आयोजन में नामचीन हस्तियां, 12 राज्यों की रामायण मंडली और विदेशी मंडली भी छत्तीसगढ़ पहुंचेगी। छत्तीसगढ़ के उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हर चौका से लेकर दक्षिण में सुकमा जिले के रामाराम तक 75 स्थल राम वन गमन पथ के रूप में चिन्हित कर पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही है । चंदखुरी, शिवरीनारायण, सहित

आठ स्थलों पर तृतीय चरण का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। राम वन गमन पथ के 2260 किलोमीटर में सड़क के दोनों ओर फलदार वृक्षारोपण किया जा रहा है। माता कौशल्या का दुनिया का एकमात्र मंदिर राजधानी से मात्र 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है 15 साल रमन सिंह मुख्यमंत्री रहे तब उन्हें सुध नहीं आई। भूपेश सरकार ने ना केवल कौशल्या मंदिर की ख्याति को पुनर्स्थापित किया बल्कि प्रत्येक वर्ष माता कौशल्या उत्सव शिवरीनारायण, राजिम, चंदखुरी में रामायण महोत्सव की शुरुआत भी की। प्रदेशभर के रामायण मंडलियों को संरक्षण और सहायता देने का काम भी भूपेश सरकार में तेजी से जारी

कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा है कि धर्म के ठेकेदार होने का दंभ भरने वाले भाजपाइयों के लिए गाय, गोबर, प्रभु श्री राम और माता कौशल्या भी केवल चुनावी लाभ के लिये है। छत्तीसगढ़ में प्रभु श्री राम और माता कौशल्या ना केवल धार्मिक लिहाज से बल्कि संस्कृति में भी रचे बसे हैं। यहां जन्मोत्सव के छठी कार्यक्रमों में भी रामायण पाठ होता है। सुबह का अभिवादन भी राम-राम से, भेंट मुलाकात सीता राम से होता है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में जब किसान फसल की मिंजाई के बाद नपाई करता है तो नापने के पैमाने काठा में गिनती का पहला शब्द भी राम से ही शुरू होता है। यहां का किसान काठे से नपाई के दौरान एक नहीं कहता, पहला काठा प्रभु श्री राम के नाम से गिनती शुरू होती है। ना केवल श्रद्धा और आस्था बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रभु श्री राम रचे बसे हैं। पूर्व में कौशल प्रदेश के नाम से जाने जाना वाला छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका है, इसी कारण छत्तीसगढ़ में प्रभु श्री राम को भांजे के रूप में पूजने की परंपरा रही है।

भूपेश सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में स्थानीय प्रथा, और परंपरा, रीति-रिवाज, खानपान और तीज त्यौहारों के सरकारी आयोजन की शुरुआत हुई है। मातागुड़ी, देवगुड़ी, घोटुल के साथ-साथ रामलीला के आयोजन और मंचन को संस्कृति विभाग द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और आत्मसम्मान पुनर्स्थापित हुआ है तो सामंतवादी सोच के भाजपा नेताओं को पीड़ा हो रही है। रायगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के आयोजन का विरोध भाजपाइयों के  चरित्र को उजागर करता है।

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