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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति : मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन परिसर में पंजाब नेशनल बैंक की नई शाखा, एटीएम और डिपॉजिट मशीन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने विभागाध्यक्ष कार्यालय इंद्रावती भवन के कर्मचारियों, नवा रायपुर के आसपास निवासरत नागरिकों तथा बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पहले योजनाओं की राशि का वितरण नगद रूप में किया जाता था, जिससे लीकेज की समस्या बनी रहती थी, लेकिन अब बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हितग्राहियों तक राशि सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुँच रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना के साथ-साथ बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी तीव्र गति से हो रहा है। सरगुजा और बस्तर अंचल के दूरस्थ गाँवों में बैंक शाखाओं की स्थापना से सरकार का “अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुँचाने” का संकल्प साकार हो रहा है।

वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में गुड गवर्नेंस की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में प्रदेश के बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था के लिए अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और उन्होंने बैंकों से भी इस दिशा में अपनी सक्रिय व प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल और पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक अशोक चंद्र सहित अन्य अधिकारीगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का आगाज़ – संस्कृति और गौरव का होगा भव्य उत्सव: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ किया। यह महोत्सव 15 अगस्त से लेकर आगामी 6 फरवरी 2026 तक पूरे 25 सप्ताह तक प्रदेशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ सरकार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसमें राज्य के हर वर्ग, समाज और उम्र के लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने जन सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा – "सपने लेकर आगे बढ़िए, मंजिल जरूर मिलेगी"।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल जी के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ का गठन हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों में प्रदेश ने उल्लेखनीय विकास किया है और लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हो।

उन्होंने कहा कि इस रजत महोत्सव के दौरान प्रदेश के लोकप्रिय ‘बस्तर ओलिंपिक’ और बस्तर पनडुम जैसे पारंपरिक आयोजन भी किए जाएंगे, जो स्थानीय खेल और लोक-संस्कृति को प्रोत्साहित करेंगे। जनभागीदारी, सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और विकास की भावना के साथ मनाया जाने वाला यह रजत महोत्सव राज्य के इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज होगा।

कृषि और खाद्य सुरक्षा में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन से पहले किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता था और कई इलाकों में भूखमरी की स्थिति थी। सरकार ने पीडीएस का एक आदर्श मॉडल विकसित किया, जिससे आज लाखो परिवार निःशुल्क खाद्यान्न का लाभ ले रहे हैं और कोई भी भूखा नहीं सोता। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से, 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदा जा रहा है और पिछले दो वर्षों में किसानों के खातों में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्थानांतरित की गई है।

शिक्षा और उद्योग में बड़ी उपलब्धियां

साय ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं प्रदेश में स्थापित हुईं।

आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की जीएसडीपी 21 हजार करोड़ से बढ़कर 5 लाख करोड़ हो गई है, जिसे अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि नये जमाने के उद्योगों जैसे फार्मा, सेमीकंडक्टर, टैक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में अब तक 6 लाख 65 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हमारी सरकार को नई औद्योगिक नीति लागू करने के पश्चात मिल चुके हैं।

25 सप्ताह तक रहेगा रजत महोत्सव

महोत्सव के दौरान आगामी 25 सप्ताह तक राज्य के विभिन्न विभागों, सामाजिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक संगठनों की भागीदारी से विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे उत्साहपूर्वक इसमें शामिल हों।

विशेषांक, लोगो और वेब पोर्टल का लोकार्पण

शुभारंभ कार्यक्रम में रजत महोत्सव विशेषांक पुस्तक का विमोचन, लोगो एवं वेब पोर्टल का अनावरण भी किया गया।

संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह अवसर हमारे इतिहास को दोबारा याद करने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महोत्सव में गरीब, युवा, आम नागरिक और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने सभी विभागों को एक-एक सप्ताह का समय आवंटित किया है, जिसके दौरान वे विभागीय गतिविधियों का आयोजन कर जनता को अवगत कराएंगे। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि महोत्सव की छटा गांव-गांव तक पहुंचे।

इस अवसर पर विधायक सर्व मोती लाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब एवं पुरंदर मिश्रा, राज्य खाद्य नागरिक एवं आपूर्ति के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ,केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन,अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, संस्कृति विभाग के डायरेक्टर विवेक आचार्य, कलेक्टर गौरव कुमार ,संस्कृति विभाग के अधिकारी कर्मचारी, गणमान्य नागरिक एवं स्कूली छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात, 375.71 करोड़ की सड़कों को केंद्र की मंजूरी

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रायपुर। भारत सरकार द्वारा आदिवासी और दूरस्थ अंचलों के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित जनजातीय बहुल विकासखंडों में 2449.108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। इस परियोजना की कुल लागत 375.71 करोड़ रुपये होगी, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।


केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस मंजूरी की जानकारी दी और इसे "पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों)" के जीवन में परिवर्तन लाने वाली पहल बताया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह योजना अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़कों के निर्माण से इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंग

पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत 2449.108 किलोमीटर लंबी नई सड़कें और 100 पुल की स्वीकृति दी गई है। मंत्री  चौहान ने राज्य सरकार से इन कार्यों की त्वरित स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।

चौहान ने यह भी अनुरोध किया है कि राज्य सरकार इन सड़कों के निर्माण कार्यों को शीघ्र शुरू कर फास्ट ट्रैक मोड पर पूरा कराए ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।

उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल और अधिक सफल होगी।

मुख्य बिंदु-:

- पीएमजीएसवाई के तहत 375.71 करोड़ रुपये की सड़कों को मंजूरी

- 2449.108 किलोमीटर नई सड़कें, 100 पुल की स्वीकृति

- जनजातीय बहुल ब्लॉकों में होगा कार्यान्वयन

- पीवीटीजी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

- केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से शीघ्र क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई

यह निर्णय राज्य के आदिवासी समुदायों के लिए न केवल एक विकास की राह खोलेगा बल्कि सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।


मंत्रिपरिषद के निर्णय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

1) मंत्रिपरिषद द्वारा भारत सरकार के खान मंत्रालय के नवीन दिशा-निर्देश और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY)-2024 के संशोधित गाईडलाईन्स के अनुसार छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2015 में आवश्यक संशोधन किये जाने का निर्णय लिया गया है।

इससे न्यास के पास उपलब्ध राशि का न्यूनतम 70 प्रतिशत राशि का व्यय उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र जैसे पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं निःशक्तजन के कल्याण के साथ ही कौशल विकास एवं रोजगार, स्वच्छता, आवास, पशुपालन के समग्र विकास पर किया जाएगा।

2) मंत्रिपरिषद द्वारा साधारण रेत के उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण तथा रेत के उत्खनन एवं नियमन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2019 एवं छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत उत्खनन एवं व्यवसाय (अनुसूचित क्षेत्र हेतु) नियम 2023 को निरसित करते हुए नवीन नियम ‘‘छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम-2025‘‘ का अनुमोदन किया गया।

इससे रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे, जिससे आम जनता को उचित दरों पर रेत उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही रेत उत्खनन में पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रस्तावित नियमों में रेत खदान आवंटन की कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के माध्यम से की जाएगी। इससे राजस्व में भी वृद्धि होगी।

3) कृषि भूमि के बाजार मूल्य दरों के निर्धारण के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य कर पंजीयन विभाग से प्राप्त प्रस्ताव का मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया, जिसके तहत ग्रामीण कृषि भूमि के बाजार मूल्य की गणना के लिए 500 वर्गमीटर तक के भू-खण्ड की दर को समाप्त करते हुए सम्पूर्ण रकबा की गणना हेक्टेयर दर से की जाएगी। भारतमाला परियोजना और बिलासपुर के अरपा भैंसाझार में जिस तरह की अनियमितताएँ सामने आई थीं, उनसे बचने के लिए यह व्यवस्था मददगार होगी। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र की परिवर्तित भूमि का मूल्यांकन सिंचित भूमि के ढाई गुना करने के प्रावधान को विलोपित करने के साथ ही शहरी सीमा से लगे ग्रामों की भूमियों और निवेश क्षेत्र की भूमियों के लिए वर्गमीटर में दरों का निर्धारण किया जाएगा।

4) मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (cscs) को नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-3, ग्राम परसदा में क्रिकेट अकादमी की स्थापना के लिए 7.96 एकड़ भूमि आबंटित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

नवा रायपुर में अत्याधुनिक क्रिकेट अकादमी की स्थापना से राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनके कौशल और प्रतिभा को निखारने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेगी।

छत्तीसगढ़ राज्य में क्रिकेट के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य के कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता अर्जित की है। क्रिकेट अकादमी की स्थापना से राज्य के खिलाड़ियों को क्रिकेट के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा वहीं छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी।


विशेष लेख : सरकार के नीतिगत फैसलों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ के किसानों का मान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के नीतिगत फैसलों एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। राज्य सरकार ने बीते 18 महीने में विभिन्न योजनाओं के तहत् लगभग सवा लाख करोड़ रूपए किसानों के खाते में अंतरित की है। इन कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

बता दें कि देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री साथ के नेतृत्त्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल की अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीति गत फैसलों से खेती-किसानी की नया सम्बल मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 24.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी कर एक नया रिकार्ड कायम किया है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 32 हजार करोड रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। इसी तरह खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के किसानों से रिकार्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई और धान खरीदी के एवज में किसानों को 34,500 करोड़ रूपए का तत्काल भुगतान किया गया तथा 12 हजार करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त सीधे किसानों के खातों में अंतरित किया गया।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। किसानों को 11 जुलाई की स्थिति में 5124 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित किए गए हैं। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई है। सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है।

कृषि विभाग के बजट में बीते वर्ष की तुलना में वर्ष 2024-25 में 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय है। पिछले वर्ष 149.25 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर राज्य के 25 लाख 48 हजार 798 किसानों से खरीदी की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।


आलेख : सरकार के नीतिगत फैसलों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ के किसानों का मान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के नीतिगत फैसलों एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। राज्य सरकार ने बीते 18 महीने में विभिन्न योजनाओं के तहत् लगभग सवा लाख करोड़ रूपए किसानों के खाते में अंतरित की है। इन कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

साल दर साल बढ़ रहा है किसानों की संख्या, रकबा और उत्पादन

बता दें कि देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री साथ के नेतृत्त्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल की अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीति गत फैसलों से खेती-किसानी की नया सम्बल मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 24.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी कर एक नया रिकार्ड कायम किया है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 32 हजार करोड रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। इसी तरह खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के किसानों से रिकार्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई और धान खरीदी के एवज में किसानों को 34,500 करोड़ रूपए का तत्काल भुगतान किया गया तथा 12 हजार करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त सीधे किसानों के खातों में अंतरित किया गया।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। किसानों को 11 जुलाई की स्थिति में 5124 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित किए गए हैं। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई है। सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है।

कृषि विभाग के बजट में बीते वर्ष की तुलना में वर्ष 2024-25 में 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय है। पिछले वर्ष 149.25 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर राज्य के 25 लाख 48 हजार 798 किसानों से खरीदी की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।



रायगढ़ ने पीएम आवास निर्माण में रचा कीर्तिमान, प्रदेश में सबसे पहले पूरे किए 25 हजार मकान

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रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत रायगढ़ जिले ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले ने वर्ष 2024-25 में स्वीकृत पीएम आवासों में से प्रदेश में सबसे पहले 25 हजार मकानों के निर्माण को पूर्ण कर इतिहास रच दिया है। आज की स्थिति में जिले में 25,041 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

गरीब परिवारों के लिए पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह संभव हुआ है जिले में योजनाबद्ध और मिशन मोड में किए गए कार्यों के चलते। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व में और जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में जिले से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक मिशन मोड में कार्य किया गया। आवास निर्माण की प्रक्रिया को समय-सीमा में पूरा करने के लिए योजनाबद्ध रणनीति अपनाई गई। आवास स्वीकृति के बाद किश्तों का समय पर भुगतान, हितग्राहियों को निर्माण के लिए प्रेरित करना, रॉ-मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा मैदानी अमले की सक्रियता ने इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरंतर निरीक्षण, समस्या समाधान, और ग्राम पंचायतवार प्रगति की समीक्षा की जाती रही। कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में तुरंत सुधार के निर्देश दिए गए और आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई। विशेष रूप से गर्मी के महीनों में तेज गति से निर्माण कार्य कर बारिश शुरू होने से पहले अधिकतम आवास पूरे करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बड़ी कुशलता से पूरा किया गया। यह सफलता केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि हजारों गरीब परिवारों के पक्के मकान में रहने के सपने का साकार होना है। 


सोलर रूफटॉप से रोशन हो रहे महासमुंद के घर, प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से पाई राहत, अब बिजली बिल हुआ शून्य

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रायपुर। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अब महासमुंद जिले के आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुंचने लगा है। यह योजना न केवल लोगों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ी पहल साबित हो रही है।इस योजना के तहत जिले के विभिन्न विकासखंडों में बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने अपने घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए हैं। इन सौर ऊर्जा संयंत्रों की सहायता से लाभार्थी अपने घरेलू उपयोग की बिजली स्वयं उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे उनके बिजली बिलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

महासमुंद शहर के क्लबपारा निवासी एवं बिजली विभाग से सेवानिवृत्त लाइन इंस्पेक्टर तुलसीराम साहू ने अपने घर की छत पर कुछ माह पूर्व 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया है। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की कुल लागत लगभग 2 लाख रुपये आई, जिसमें से 78,000 रुपए की सब्सिडी उन्हें सरकार की ओर से प्राप्त हुई। इससे यह प्लांट काफी सस्ता और किफायती हो गया।श्री साहू ने बताया कि, उनके घर में फ्रिज, कूलर, एसी, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरण नियमित रूप से चलते हैं, जिनके कारण पहले हर महीने उन्हें 2000 से 2500 रुपए बिजली बिल भरना पड़ता था। लेकिन सोलर प्लांट लगने के बाद से न केवल उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है, बल्कि अब वे अपनी घरेलू जरूरतों के लिए पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर हो चुके हैं।

उन्होंने इस योजना को पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि सोलर सिस्टम का रखरखाव बेहद सरल है और इसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता। उन्होंने इसे हर नागरिक के लिए अपनाने योग्य और टिकाऊ समाधान बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस योजना से जुड़ने को कहा।प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना न केवल बिजली बचत और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भी एक मजबूत और दूरदर्शी कदम है, जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।

गर्मी में पहले आता था 8 हजार रुपए का भारी भरकम बिल, इस बार एक भी रुपए नहीं चुकाना पड़ा अतुल को

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आज आम नागरिकों की जिंदगी में उजाला ही नहीं, सुकून भी भर रही है। यह योजना सिर्फ बिजली संकट का समाधान नहीं, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की और बढ़ाया ठोस कदम है।

इस योजना के एक सफल लाभार्थी में से एक रायपुर के डॉ. दीनदयाल उपाध्याय नगर निवासी अतुल तिवारी भी है। तिवारी ने बीते वर्ष अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल लगवाया। उन्हें सरकार की ओर से 78,000 रुपए की सब्सिडी मिली, जिससे लागत बेहद कम हो गई और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो गई।

तिवारी ने बताया कि पहले हर गर्मी में बिजली का बिल 7,000 से 8,000 रुपए तक आता था। लेकिन इस बार मेरा पूरा बिल ‘शून्य’ आया है। अब उनके घर में बिजली निरंतर और मुफ्त मिल रही है। सिर्फ उनका बिजली खर्च ही नहीं घटा है, बल्कि अब उन्होंने ग्रीन एनर्जी की ओर कदम भी बढ़ाया है। वे कहते हैं, “यह योजना गर्मी के मौसम में किसी वरदान से कम नहीं है।” बिजली की निर्बाध आपूर्ति से उनका परिवार न केवल आरामदायक जीवन जी रहा है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा बचत में भी भागीदार बन चुका है। अब अन्य लोग भी अपने छतों में सोलर पैनल लगा रहे है और योजना का लाभ उठा रहे हैं।

तिवारी ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हृदय से आभार जताया। उन्होंने कहा “यह योजना केवल आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार है।”

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत शासन द्वारा उपभोक्ताओं को अपने घरों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिससे उपभोक्ता द्वारा अपनी खपत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में सप्लाई हो जाती है। इससे उपभोक्ता के घर का बिजली बिल शून्य हो जाता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा भी कैबिनेट की बैठक में हितग्राहियों को 30 हजार तक की सब्सिडी दिए जाने का निर्णय लिया है। इसमें 1 किलो वॉट पर केंद्र से 30 हजार और राज्य से 15 हजार कुल 45 हजार, 2 किलो वॉट पर केंद्र से 60 हजार और राज्य से 30 हजार कुल 90 हजार, 3 किलो वॉट पर केंद्र से 78 हजार और राज्य से 30 हजार कुल 1 लाख 08 हजार की सब्सिडी दी जा रही है। 3 किलो वॉट उससे अधिक क्षमता पर 1 लाख 08 हजार की सब्सिडी स्थिर रहेगी।

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता पीएम सूर्यघर डॉट जीओव्ही डॉट इन वेब पोर्टल अथवा पीएम सूर्यघर एप्प में पंजीयन करा सकता है।

कदाचरण पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, रोजगार सहायक बर्खास्त

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रायपुर। कदाचरण और कार्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध बलौदाबाजार जिला प्रशासन द्वारा कठोर करवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना  के हितग्राहियो से जिओ टैगिंग व मस्टऱ रोल प्रस्तुत करने के एवज में राशि लेने की शिकायत जांच में पुष्टि होने पर रोजगार सहायक क़ो बर्खास्त कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलारी (क) में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक गौरीशंकर पैकरा के विरुद्ध प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से जिओ टैगिंग व मस्टऱ रोल प्रस्तुत करने के एवज में राशि लेने एवं अभद्र व्यवहार करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कसडोल द्वारा शिकायत जांच कराई गई। जांच में रोजगार सहायक गौरीशंकर पैकरा के विरुद्ध शिकायत सही पाए जाने तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के अनुमोदन उपरांत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कसडोल द्वारा ग्राम पंचायत बिलारी (क) के रोजगार सहायक गौरीशंकर पैकरा को संविदा पद से पृथक कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री जनमन योजना से फुलेश्वर के पक्के मकान का सपना हुआ सच

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रायपुर।  विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना वरदान साबित हो रहा है। इस योजना से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ धमतरी जिले के कमार समुदाय के लोगों को सीधा-सीधा मिल रहा है। पीएम जनमन योजना के तहत धमतरी जिले के दूरस्थ वनांचल नगरी के कल्लेमेटा के विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय कमार वर्ग के हितग्राही फुलेश्वर के खुद के पक्के आशियाने का सपना साकार हुआ है।

फुलेश्वर ने आवास पूरा होने पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना ने उनकी दशा और दिशा बदल दी है। योजना के तहत वर्ष 2023-24 में उन्हें आवास की मंजूरी मिली। पंचायत स्तर पर दस्तावेजों की पूर्ति होने के साथ ही घर बनाने का काम शुरू किया गया। इसमें पहली किश्त के तौर पर 40 हजार रुपये मिलते ही उनका मकान बनने की उम्मीद पक्की होने लगी। फुलेश्वर कमार ने तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर आवास निर्माण काम शुरू किया। मकान निर्माण आगे बढ़ने के साथ ही प्रगति के आधार पर क्रमशः दूसरी किश्त 60 हजार रूपये, तीसरी किश्त 80 हजार रूपये और चौथी किश्त 20 हजार रूपये की राशि मिलती गई और देखते ही देखते उनके सपनों का आशियाना पूरा होकर तैयार हो गया। फुलेश्वर कमार ने बताया कि घर बनाने में कार्य करने पर मनरेगा के तहत उन्हें 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान भी किया गया।


 फुलेश्वर कमार अपने पुराने दिनों की कठिनाई याद करते हुए बताते हैं कि वह एक राजमिस्त्री हैं। रोजी-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका परिवार कच्ची झोपड़ीनुमा घर में निवास करते थे। जहां जीवन व्यतीत करना बहुत कठिन था। मौसम के अनुसार अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकना, दीवारों में सीलन आना, साथ ही सर्दी के समय रात में ठण्ड के कारण नींद नहीं आती थी। साथ ही साल भर जहरीले कीड़े, सांप, बिच्छू इत्यादि का डर बना रहता था। अब पक्का मकान के बन जाने से उनकी ये समस्याएं दूर हो गई हैं। अब वे अपने परिवार के साथ पक्के मकान में चौन की नींद सो रहे हैं। पक्की छत वाली घर होने से उनकी समाज में प्रतिष्ठा बढ़ी है।

नए आवास में परिवार के साथ हंसी-खुशी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। फुलेश्वर कमार ने बताया कि शासन की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उनके परिवार को मिल रहा है। इसके तहत महतारी वंदन योजना के तहत उनकी पत्नी को प्रतिमाह एक हजार रूपए की राशि मिल रही है। इसी तरह रोजगार गारंटी योजना मनरेगा में कार्य, तेंदूपूत्ता संग्रहण, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड जैसी अन्य योजनाओं से भी लाभान्वित हो रहे हैं,  जिससे उनके परिवार की आय बढ़ रही है। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के आशियाने के सपने को पूरा करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर - मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दैनिक नवप्रदेश के 14वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 'राष्ट्रीय परिदृश्य में उभरता छत्तीसगढ़' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2014 में भारत जहाँ आर्थिक दृष्टि से विश्व में 10वें स्थान पर था, वहीं आज चौथे स्थान पर पहुँच चुका है, और शीघ्र ही हम तीसरे स्थान पर पहुँचने की ओर अग्रसर हैं। प्रधानमंत्री के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ हेतु विजन डॉक्यूमेंट और नई औद्योगिक नीति तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने दैनिक नवप्रदेश की 14वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि हम छत्तीसगढ़ की रजत जयंती मना रहे हैं। मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मैंने संसद में एक सांसद के रूप में छत्तीसगढ़ निर्माण संबंधी विधेयक पर हुई ऐतिहासिक चर्चा को प्रत्यक्ष रूप से देखा और अनुभव किया। एक आदिवासी परिवार से आने के नाते मैंने प्रदेश में भुखमरी की समस्याएँ देखी हैं। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में 2003 में लागू की गई पीडीएस व्यवस्था ने छत्तीसगढ़ को इस गंभीर समस्या से मुक्ति दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आईआईटी, आईआईएम तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित हो चुके हैं। प्रदेश में समृद्धि बढ़ी है और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक पहुँची हैं।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति को उद्यमियों का सकारात्मक प्रतिसाद मिला है। राज्य को लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सेमीकंडक्टर चिप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ हो चुका है। एनर्जी सेक्टर में भी राज्य को भारी निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर युवाओं को सरकारी नौकरियाँ प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्किलिंग के माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने पर भी बल दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति में बिस्पोक पॉलिसी का प्रावधान रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई रकबा में निरंतर वृद्धि हुई है। हाल ही में दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बोधघाट परियोजना पर चर्चा की गई। इस परियोजना से बस्तर अंचल के किसानों को भरपूर सिंचाई जल मिलेगा। साथ ही इंद्रावती और महानदी की इंटरलिंकिंग परियोजना पर भी कार्य प्रारंभ किया गया है, जिससे सिंचाई रकबा बढ़कर 7 लाख हेक्टेयर तक पहुँच जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में है। जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ सुनाई देती थी, वहाँ अब स्कूलों की घंटियाँ गूंज रही हैं। धूड़मारास को संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यटन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बीते 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल क्षेत्रफल या जनसंख्या से नहीं, बल्कि संसाधनों के सदुपयोग और इच्छाशक्ति से होता है। आज राज्य की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हुई है। प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में उद्घाटित चिनाब पुल में छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र का लोहा प्रयोग किया गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज स्टील, सीमेंट, ऊर्जा जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश के पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वालों में पद्मश्री श्रीमती शमशाद बेगम, कार्टून वॉच के सम्पादक त्रयंबक शर्मा, खेल पत्रकार नितेश छाबड़ा, वरिष्ठ पत्रकार जीवन एस साहू (गरियाबंद) एवं यशवंत राजवाड़े (नवप्रदेश ब्यूरो चीफ, कोरिया) शामिल हैं।

उन्होंने नवप्रदेश छात्रवृत्ति योजना 2025-26 के अंतर्गत हॉकर परिवार के बच्चों को छात्रवृत्ति भी प्रदान की। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने वीडियो संदेश के माध्यम से नवप्रदेश को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। नवप्रदेश के सम्पादक यशवंत धोटे ने कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, हरिभूमि के प्रधान सम्पादक हिमांशु द्विवेदी, रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

आम की खेेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आम की खेती किसानों की आय बढ़ाने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। किसान जितने ज्यादा आम के पौधे लगाएंगे, उतना ज्यादा फायदा होगा। आम और उद्यानिकी फसलों की खेती से हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने में मदद मिलेेगी।

मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मण्डपम् में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐेसे उत्सवों से फलों और उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।

इस अवसर पर विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, कृषि वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आये आम उत्पादक किसान और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के ‘न्यूज लेटर‘ का विमोचन किया। आयोजकों द्वारा अतिथियों का उन्नत किस्म के आम के ग्राफ्टेड पौधे देकर सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और विशेषकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में आम का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में सभी मांगलिक एवं धार्मिक कार्यां में आम के पत्तों, फलों एवं अन्य अंगों का उपयोग किया जाता है तथा आम के पेड़ को बहुत ही शुभ माना जाता है। साय ने कहा कि भारत में आम की समृद्ध जैवविविधता देखने को मिलती है और यहां आम की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं जो अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध और गुणों के कारण दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय हैं। आम के इन्ही विशिष्ट गुणों के कारण इसे फलों का राजा भी कहा जाता है।

साय ने कहा कि इस भव्य और वृहद आम महोत्सव में छत्तीसगढ़ वासियों को आम की सैकड़ों विशिष्ट एवं दुर्लभ प्रजातियां देखने का अवसर प्राप्त हुआ। साय ने कहा कि आज यहां उन्हें स्वयं आम की अनेकों दुर्लभ किस्में देखने को मिली जो उन्होंने अपने जीवन में इससे पूर्व नहीं देखी थी। इनमें से एक प्रजाति बीजापुर की हाथीझुल किस्म है जिसका एक-एक फल दो किलो से लेकर चार किलो तक वजन का होता है। साय ने आशा व्यक्त की कि आगामी वर्षों में यहां आम महोत्सव और भी भव्य एवं वृहद स्तर पर आयोजित किया जाएगा जिससे रायपुर को एक नई पहचान मिलेगी।

 शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि आम महोत्सव में लगी आम प्रदर्शनी में 2 इंच से लेकर 15 इंच आकार तक के आम के फल देखने को मिल रहे हैं जो रायपुर वासियां के लिए एक सुखद एवं अनोखा अनुभव है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास करना होना चाहिए की रायपुर शहर से अधिक से अधिक लोग आम महोत्सव में पहुंच कर आम की इन किस्मों को देख सकें।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने राष्ट्रीय आम महोत्सव के बारे में मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों को जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 200 से अधिक किस्मों एवं आम से बने 56 व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आम महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों के 450 से अधिक किसानों द्वारा विभिन्न किस्मों के 1200 से अधिक आमों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके साथ ही आमों से बने 56 उत्पादों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए आम उत्पादकों द्वारा आम के विभिन्न किस्मों के फलों तथा पौधों का विक्रय भी किया जा रहा है।

डॉ. चंदेल ने मुख्यमंत्री साय को प्राकृतिक रूप से पके आमों की विभिन्न प्रजातियों से भरी टोकरी भेंट की। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मास मीडिया एवं पब्लिकेशन सेल द्वारा प्रकाशित न्यूज लेटर का विमोचन भी किया गया। कुलपति डॉ. चंदेल ने इस अवसर पर घोषणा की कि आम महोत्सव में नागरिकों के उत्साह एवं मांग को देखते हुए राष्ट्रीय आम महोत्सव की अवधि एक दिन और बढ़ायी जा रही है अब आम महोत्सव का समापन सोमवार 9 जून, 2025 को होगा। कार्यक्रम के अंत में कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी द्वारा अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन किया गया।


सीएम विष्णु देव साय ने पीएम नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के संबंध में की चर्चा

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की है।

उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, इसी वजह से संभाग सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है,  संभाग में सिंचाई साधनों की समस्या को दूर करने और चहुमुखी विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए बोधघाट बहुउद्देशीय बांध परियोजना निर्णायक परियोजना साबित होगी। यह परियोजना, लंबे समय से इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। इंद्रावती, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक नदी है। गोदावरी जल विवाद अभिकरण के वर्ष 1980 के अवॉर्ड में भी अन्य योजनाओं के साथ इस परियोजना का उल्लेख है। इस अवॉर्ड में उल्लेखित अन्य परियोजनाओं का क्रियान्वयन दूसरे राज्यों द्वारा किया जा चुका है परंतु दूरस्थ अंचल में होने एवं नक्सल समस्या के कारण इस परियोजना को प्रारंभ नहीं किया जा सका।

बस्तर के विकास की रफ्तार होगी डबल

बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से संभाग में सिंचाई साधनों का दायरा बढ़ने के साथ ही बस्तर के विकास को डबल रफ्तार मिलेगी। इस परियोजना से 125 मेगावाट का विद्युत् उत्पादन, 4824 टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन जैसे अतिरिक्त रोजगार, खरीफ एवं रबी मिलाकर 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार एवं 49 मि.घ.मी पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगा। वही इंद्रावती- महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले की भी 50,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सहित कुल 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बस्तर को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

क्या है बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना ?

बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। राज्य में इन्द्रावती नदी कुल 264 कि. मी. में प्रवाहित होती है। यह परियोजना दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड एवं तहसील गीदम के ग्राम बारसूर से लगभग 8 कि.मी. एवं जगदलपुर शहर से लगभग 100 कि. मी. दूरी पर प्रस्तावित है।

परियोजना की विशेषताएं

दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 49000 करोड़ रूपए है। जिसमें इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना की लागत लगभग 20 हजार करोड़ रूपए एवं बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना में लगभग 29 हजार करोड़ रुपए की लागत संभावित है। जिसमें हाइड्रोपावर इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य, सिविल कार्य (सिंचाई) भी शामिल हैं। इस परियोजना में उपयोगी जल भराव क्षमता 2009 मि.घ.मी, कुल जल भराव क्षमता 2727 मि.घ.मी, पूर्ण जल भराव स्तर पर सतह का क्षेत्रफल 10440 हेक्टेयर सम्भावित है।

इन जिलों का होगा लाभ

बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से दंतेवाड़ा,  बीजापुर, सुकमा जिले के 269 गांवों को बड़ा लाभ होगा। जबकि इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले के अनेकों गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो सकेगा। बस्तर संभाग को विकसित, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

बस्तर अब डर से नहीं, डिजिटल बदलाव से पहचाना जा रहा है : विष्णुदेव साय

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने बस्तर में शांति व्यवस्था, विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों पर चर्चा की। इसके साथ ही हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार की प्रधानमंत्री को जानकारी दी।

दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी उनके आवास पर मुलाकात की। जहां राज्य के विकास, नक्सल ऑपरेशन सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब बस्तर का चेहरा बदल रहा है, जो कभी बंदूक और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, आज वहाँ मोबाइल टावर खड़े हो रहे हैं, जो सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि विकास और विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सरकार द्वारा विगत डेढ़ वर्ष में 64 नए फॉरवर्ड सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है। इन सुरक्षा चौकियों के आसपास गांवों में न केवल पुलिस की उपस्थिति से सुरक्षा की भावना बनी है, बल्कि इन इलाकों में अब नेटवर्क भी पहुंच गया है। सरकार ने अब तक कुल 671 मोबाइल टावर चालू कर दिए हैं, जिनमें से 365 टावरों में 4G सेवा उपलब्ध है। यह न सिर्फ तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह संकेत है कि अब आदिवासी क्षेत्रों में संचार क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर में सिर्फ मोबाइल टावर नहीं लग रहे हैं, बल्कि ये टावर इस बात का सबूत हैं कि वहां के बच्चे और युवा भी अब डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। पहले जहां बच्चों को पढ़ाई या नौकरी की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता था, अब वही काम वे अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए ऑनलाइन कर पा रहे हैं। अब बस्तर का युवा भी स्मार्टफोन से अपनी दुनिया खुद बना रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया सुरक्षा कैंपों के इर्द-गिर्द बसते गांवों में अब बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुँच रही हैं। नियद नेल्लानार योजना के तहत चिन्हित 146 ग्रामों में 18 सामुदायिक सेवाएं और 25 तरह की सरकारी योजनाएं एक साथ क्रियान्वित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया सुशासन तिहार के तहत अब तक सैकड़ों समाधान शिविर आयोजित किए गए हैं, जहां सांसद से लेकर विधायक तक गांव गांव पहुंचकर जनता की शिकायतों का समाधान किया। इन शिविरों में ग्रामीणों को राशन कार्ड, आधार, पेंशन, स्वास्थ्य परीक्षण, स्कूल प्रवेश, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला गैस जैसी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर दिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए की जा रही योजनाओं और नवाचारों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संकट से निपटने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है, और जनभागीदारी से लेकर तकनीकी उपायों तक, हर स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में अब बारिश के दिन कम हो गए हैं — पहले जहाँ लगभग 100 दिन बारिश होती थी, अब सिर्फ़ 65 दिन ही होती है। तकनीक के तहत गांव-गांव में पानी बचाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। जहां पहले पानी बरसकर बह जाता था, अब उसे रोकने और जमा करने की कोशिश हो रही है। इस काम में आधुनिक तकनीक जैसे GIS मैपिंग और ‘जलदूत’ नाम का मोबाइल ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यह पता चलता है कि कहां कितनी ज़रूरत है।

सबसे खास बात यह है कि इस अभियान में महिलाएं बड़ी भागीदारी निभा रही हैं। महिला समूह तालाबों की सफाई, गहराई बढ़ाने, और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने में आगे आ रही हैं। इस साझेदारी से गांवों में पानी की कमी दूर हो रही है और लोगों को अपने इलाके में ही साफ और पर्याप्त पानी मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को नालंदा परिसर की जानकारी भी दी, जो देश की पहली 24x7 हाईब्रिड सार्वजनिक लाइब्रेरी है। 18 करोड़ की लागत से बनी इस सुविधा में ई-लाइब्रेरी, यूथ टॉवर, हेल्थ ज़ोन और सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था है। अब तक 11,000 से अधिक छात्र लाभांवित हो चुके हैं, जिनमें 300 से अधिक छात्र यूपीएससी और सीजी पीएससी में सफलता पाई है। साथ ही, मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ मॉडल की भी जानकारी दी, जिसमें वंचित व आदिवासी बच्चों को आईआईटी, नीट, क्लैट जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। अब तक 1508 छात्र चुनिंदा राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश पा चुके हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री साय के प्रयासों की सराहना की और छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

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