Media24Media.com: प्रणब मुखर्जी

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जानिए प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक 'द प्रेसिडेंसियल ईयर्स, 2012-2017' में मोदी के लिए किन बातों का किया जिक्र

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्मरण 'द प्रेसिडेंसियल ईयर्स, 2012-2017'(The Presidential Years) में कई बातों का जिक्र किया है। उन्होंने यह पुस्तक पिछले साल अपने निधन से पहले लिखी थी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का मानना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को असहमति की आवाज सुननी चाहिए। उनका कहना था कि पीएम मोदी को विपक्ष को समझाने और देश को तमाम मसलों से परिचित कराने के लिए संसद को एक मंच के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए और सदन में अक्सर बोलना चाहिए। प्रणब मुखर्जी का मानना था कि संसद में प्रधानमंत्री की उपस्थिति मात्र से इस संस्था के कामकाज पर काफी फर्क पड़ता है।





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प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्मरण 'द प्रेसिडेंसियल ईयर्स, 2012-2017' (The Presidential Years)में इन बातों का जिक्र किया है। उन्होंने यह पुस्तक पिछले साल अपने निधन से पहले लिखी थी। यह पुस्तक मंगलवार को प्रकाशित होकर आई। किताब में प्रणब मुखर्जी ने लिखा, 'चाहे जवाहरलाल नेहरू हों, या फिर इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी अथवा मनमोहन सिंह, इन सभी ने सदन के पटल पर अपनी उपस्थिति का अहसास कराया।'





पीएम मोदी को लेनी चाहिए प्रेरणा(The Presidential Years)





एक समाचार एजेंसी के मुताबिक दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने लिखा है, 'अपने दूसरे कार्यकाल में अब पीएम मोदी को अपने पूर्ववर्तियों से प्रेरणा लेनी चाहिए और उन परिस्थितियों से बचने के लिए संसद में अपनी मौजूदगी के जरिये, जो संसदीय संकट हम पहले कार्यकाल में देख चुके थे, से बचने के लिए अपनी मौजूदगी रखनी चाहिए।'





असंतुष्ट आवाजों को सुनें





प्रणब मुखर्जी ने लिखा है, 'पीएम मोदी को असंतुष्ट आवाजों को सुनना चाहिए और संसद में अधिक बार बोलना चाहिए। उन्हें विपक्ष को समझाने और देश को अवगत कराने के लिए अपने विचारों को रखने के लिए संसद का एक मंच के रूप में उपयोग करना चाहिए।'





एनडीए के कार्यकाल पर निशाना





प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक (The Presidential Years)में एनडीए के 2014-19 के कार्यकाल पर भी निशाना साधा है. उन्होंने एनडीए को संसद के सुचारू और उचित कामकाज को सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी में नाकाम बताया है. प्रणब मुखर्जी ने लिखा है, 'मैं विपक्ष और सरकार पक्ष में तीखे तकरार के लिए सरकार के अहंकार और स्थिति को न संभाल पाने को जिम्मेदार मानता हूं. हालांकि विपक्ष भी कम जिम्मेदार नहीं है. विपक्ष ने भी गैर जिम्मेदराना रवैया दिखाया था.'


पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती आज , लोकसभा अध्यक्ष सहित कई दिग्गज नेताओं ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

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देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee birth anniversary) की आज जयंती है। प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मिरती गांव में 11 दिसंबर 1935 को हुआ था। वहीं इसी साल के 31 अगस्त को दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में 84 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, जहां उनके मस्तिष्क में थक्का हटाने के लिए सर्जरी के बाद उन्हें भर्ती कराया गया था।





2012 से 2017 के बीच संभाला था 13वें राष्ट्रपति का दायित्व





बता दें कि प्रणब मुखर्जी ने 2012 से 2017 के बीच देश के 13वें राष्ट्रपति का दायित्व संभाला था। जो इस देश के सबसे ज्यादा सम्मानित राजनेताओं में शामिल है।









प्रणब मुखर्जी की जयंती के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद किया है।लोकसभा अध्यक्ष ने ट्वीट किया है कि 'भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। समर्पण भाव से संविधान प्रदत्त जिम्मेदारियां निभाते हुए देशहित में किये गए कार्यों के लिए मुखर्जी जी का जीवन हम सब के लिए सदैव अनुकरणीय रहेगा।'






https://twitter.com/ombirlakota/status/1337221732915036163




वहीं मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सहित केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी (Union Minister Nitin Gadkari), गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) और कई नेताओं ने ट्वीट कर उन्हें याद किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का ट्वीट-





शिवराज सिंह चौहान का ट्वीट-






https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1337244862022750215?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1337244862022750215%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.latestly.com%2Findia%2Fpolitics%2Fpranab-mukherjee-birth-anniversary-union-minister-nitin-gadkari-cm-shivraj-singh-chouhan-and-others-leaders-remembered-738218.html




केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी का ट्वीट-






https://twitter.com/nitin_gadkari/status/1337228679965863936?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1337228679965863936%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.latestly.com%2Findia%2Fpolitics%2Fpranab-mukherjee-birth-anniversary-union-minister-nitin-gadkari-cm-shivraj-singh-chouhan-and-others-leaders-remembered-738218.html




छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का ट्वीट-






https://twitter.com/TS_SinghDeo/status/1337245326269280259




राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का ट्वीट-






https://twitter.com/ashokgehlot51/status/1337242986883801091?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1337242986883801091%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.latestly.com%2Findia%2Fpolitics%2Fpranab-mukherjee-birth-anniversary-union-minister-nitin-gadkari-cm-shivraj-singh-chouhan-and-others-leaders-remembered-738218.html




सचिन पायलट का ट्वीट-






https://twitter.com/SachinPilot/status/1337241365059612673?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1337241365059612673%7Ctwgr%5E%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.latestly.com%2Findia%2Fpolitics%2Fpranab-mukherjee-birth-anniversary-union-minister-nitin-gadkari-cm-shivraj-singh-chouhan-and-others-leaders-remembered-738218.html








बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को रातनीतिक गलियारे में प्रणब दा (Pranab Mukherjee birth anniversary) के नाम से जाना जाता हैं। राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। कांग्रेस सरकार में प्रणब मुखर्जी के पास वित्त मंत्रालय संभालने के अलावा कई अहम जिम्मेदारियां थी।





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प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस के 'संकटमोचक' की संज्ञा दी गई। वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इतिहास विषय में एमए, राजनीतिक विज्ञान में एमए किया था. इसके साथ एमएलबी भी किया था. उन्होंने अपनी पढाई विद्यासागर कॉलेज सूरी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल से पूरी की थी।





1969 से की थी रातनीतिक सफर की शुरुआत





प्रणब मुखर्जी ने अपने राजनीति की शुरुआत बांग्ला कांग्रेस से की थी। जुलाई 1969 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद प्रणब मुखर्जी साल 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के सदस्य रहे। इसके अलावा 1980 से 1985 तक राज्य में सदन के नेता भी रहे। मई 2004 में वे चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे और 2012 तक सदन के नेता रहे।





प्रणब मुखर्जी 1986 में हो गए थे कांग्रेस से अलग





प्रणब मुखर्जी को 1986 में कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे। राजीव के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रणब मुखर्जी को पार्टी में किनारे कर दिया गया था। वे कैबिनेट से बाहर कर दिए गए थे। इस सब से नाराज होकर आखिरकार प्रणब मुखर्जी ने 1986 में कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया और राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस बनाई।





प्रणब मुखर्जी ने साल 1988 में फिर से की थी कांग्रेस में वापसी





प्रणब मुखर्जी की पार्टी ने 1987 में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उनकी पार्टी को पहले ही चुनाव में बुरी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद प्रणब मुखर्जी ने 1988 में कांग्रेस में दोबारा वापसी कर ली थी। प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस में दोबारा वापसी के बाद नरसिम्हा राव की सरकार में साल 1991 में योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था।





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2012 में बने थे देश के 13वें राष्ट्रपति





वहीं 2004 में सोनिया गांधी ने जब प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया था, तो प्रणब मुखर्जी का नाम भी प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हुआ था। प्रणब मुखर्जी को मनमोहन सिंह की सरकार में रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद मिले। 2012 में प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया, जिसमें प्रणब मुखर्जी एनडीए समर्थित संगमा को हराकर देश के 13वें राष्ट्रपति बने।









प्रणब मुखर्जी के पांच दशक के राजनीतिक करियर पर किताब लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि स्वभाव से वे शिक्षक थे। पत्रकार लाहिड़ी का कहना है कि प्रणव मुखर्जी जीवित 'गूगल सर्च' की तरह थे और हमेशा उनके पास जवाब तैयार रहता था. लाहिड़ी ने मुखर्जी से आखिरी बार बातचीत इस साल की शुरुआत में की थी, जब पूर्व राष्ट्रपति बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के पैतृक घरों की यात्रा करने के लिए बांग्लादेश जाने की योजना बना रहे थे।


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