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राज्यपाल हरिचंदन ने ‘नृत्य रहस्य‘ पुस्तक का किया विमोचन

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रायपुर। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने आज प्रसिद्ध ओडिशी नृत्यांगना श्रीमती पूर्णश्री राऊत द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘नृत्य रहस्य द सेक्रेड मिस्टिक्स ऑफ डांस‘‘ का आज राजभवन में विमोचन किया। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित यह नृत्य विधा पर श्रीमती राउत द्वारा लिखी गई चौथी पुस्तक है। 

इस पुस्तक के माध्यम से बताया गया है कि नृत्य के माध्यम से स्वस्थ रहा जा सकता है और बड़ी-बड़ी से बिमारियों को दूर किया जा सकता है। नृत्य प्राचीनतम योग कला का एक स्वरूप है। यह शारीरिक तंत्र क्रिया, कुंडलिनी जागरण, आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक माध्यम है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य एक ऐसी विधा है जिससे शरीर के अंग में हल-चल होती है और ऊर्जा जागृत होती है तथा आध्यात्मिक अनुभूति का भाव पैदा करती है। 

इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा तक के ऐतिहासिक मंदिरों में अंकित नृत्य मुद्राओं का उल्लेख किया गया है। राज्यपाल हरिचंदन ने पुस्तक प्रकाशन के लिए श्रीमती राऊत को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पुस्तक विमोचन के अवसर पर राज्यपाल के सचिव अमृत खलखो, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी, संचालक विवेक आचार्य, रेडक्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के सीईओ एम. के. राऊत, रेडक्रॉस छत्तीसगढ़ सोसाइटी के अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल उपस्थित थे।

 


विश्व धरोहर सप्ताह पर अभिलेखों की चित्र प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी सहित होंगे कई आयोजन

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रायपुर। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा विश्व धरोहर सप्ताह पर अभिलेखों की चित्र प्रदर्शनी और प्रश्नोत्तरी सहित कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। विश्व धरोहर सप्ताह 19 से 25 नवंबर 2022 तक मनाया जा रहा है। इस दौरान विभाग द्वारा अपनी विरासतों के प्रति जनजागरूकता के प्रसार और धरोहरों के प्रति जनसामान्य के उत्तरदायित्व एवं कर्तव्य का बोध कराने के लिये विविध कार्यक्रम होंगे।संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया,  



कि 19 नवंबर को सुबह 11 बजे महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय स्थित आर्ट गैलरी में शैलचित्रों एवं अभिलेखागार के ऐतिहासिक अभिलेखों की चित्र प्रदर्शनी लगायी जाएगी। वरिष्ठ पुराविद् पद्मश्री ए.के. शर्मा और संचालक विवेक आचार्य प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। प्रदर्शनी का अवलोकन पूरे सप्ताह तक कार्यालयीन दिवस एवं समय में किया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि विश्व धरोहर सप्ताह की इस कड़ी में 21 नवंबर को सुबह 11 बजे कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्र- छात्राओं के लिये लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

22 और 23 नवंबर को 11 बजे से क्रमशः 6वीं से 8वीं और 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिये चित्रकला प्रतियोगिता रखी गई है। 24 नवंबर को दोपहर 3 बजे से पुरातत्त्व विभाग द्वारा कराये गए ग्रामवार सर्वेक्षणों की पावर प्वाईंट प्रस्तुतियाँ होंगी। अंतिम दिन 25 नवंबर को दोपहर 2 बजे प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किये जायेंगे और प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आकर्षक पुरस्कार एवं सभी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किये जायेंगे। इस अवसर पर धरोहरों पर केन्द्रित विशेषज्ञों के व्याख्यान भी होंगे। विश्व धरोहर सप्ताह के दौरान (सोमवार को छोड़कर) स्कूली विद्यार्थियों को निःशुल्क संग्रहालय दर्शन की सुविधा रहेगी।

आरंग के रीवा और पाटन के तरीघाट में मिले ढाई हजार साल पुराने मानव बस्ती के अवशेष

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रायपुर: संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा हाल ही में उत्खन्न के दौरान जिले के आरंग तहसील अंतर्गत रीवा और दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत तरीघाट में ढाई हजार साल पुराने मानव बस्ती के अवशेष मिले हैं। साथ ही उत्खन्न में आरंभिक ऐतिहासिक काल के आभूषण, प्रस्तर मूर्ति और चांदी-तांबे के सिक्के समेत अन्य पुरातत्विक महत्व के सामग्रियां प्राप्त हुई हैं।

बता दें कि राज्य गठन के बाद प्रदेश के पुरास्थलों की खोज, सर्वेक्षण और उत्खन्न की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस साल (सत्र 2021-22)  में पाटन तहसील के तरीघाट और आरंग तहसील रीवा में उत्खन्न के लिए राज्य सरकार द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को प्रस्ताव भेजा गया था। भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति मिलने के बाद रीवा में बंधवा तालाब किनारे स्थित चंडी मंदिर के पास विस्तृत क्षेत्र में फैले टीले पर उत्खन्न का काम जारी है।

कालखंड का इतिहास प्रकाश में आने की पूरी संभावना

छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्खन्न से आरंभिक ऐतिहासिक काल के लगभग दो से ढाई हजार साल पुराने मानव बस्ती के अवशेष मिल रहे हैं। साथ ही उस काल के लोगों द्वारा प्रयुक्त टेराकोटा और धातु निर्मित आभूषण जैसे मनके, चूडिंयां, छल्ले, मृणमूर्तियां, गणेश और लज्जा देवी की प्रस्तर मूर्ति, उत्तरी कृष्ण मार्जित मृत्पात्र सहित, चांदी के आहत सिक्के, कलचुरी राजा रत्नदेव का स्वर्ण सिक्का, टेराकोटा और धातु के मुहर और मुद्राएं मिल रहे हैं, जिससे प्राचीन छत्तीसगढ़ के एक अल्पज्ञात कालखंड का इतिहास प्रकाश में आने की पूरी संभावना है।

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