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दूरस्थ क्षेत्रों और विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास की सबसे ज्यादा जरूरत – विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संपूर्णता अभियान में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आकांक्षी जिलों और विकासखंडों को पुरस्कृत किया। उन्होंने आज राजधानी रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित कार्यक्रम में जुलाई-2024 से सितम्बर-2024 तक राज्य के आकांक्षी जिलों और आकांक्षी विकासखंडों में तीन महीनों तक संचालित संपूर्णता अभियान में निर्धारित संकेतकों को संतृप्त करने और लक्ष्यों को हासिल करने वाले जिलों और विकासखंडों को पुरस्कार प्रदान किए। 

उन्होंने इन जिलों और विकासखंडों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को भी पुरस्कृत किया। संपूर्णता अभियान के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले आकांक्षी जिलों बस्तर और कोंडागांव तथा आकांक्षी विकासखंडों शंकरगढ़, मैनपुर, माकड़ी, कोयलीबेड़ा, ओरछा और प्रतापपुर को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल तथा विधायक सर्वश्री सुनील सोनी, मोतीलाल साहू और गुरू खुशवंत साहेब भी सम्मान समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना में सभी वर्गों का विकास समाहित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वालों और विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) को विकास की सबसे ज्यादा जरूरत है। भारत सरकार ने इसे गहराई से समझकर प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ की है। इस योजना से सुदूर वनांचलों में आवास, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों से जिसमें छत्तीसगढ़ के भी 6661 गांव शामिल हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच के अनुरूप विकास की रोशनी सुदूर गांवों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में केंद्र सरकार की आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में शामिल गांव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में वर्ष 2018 से आकांक्षी जिलों में काम शुरू हुआ है। विकास की दौड़ में पिछड़े जिलों और विकासखंडों को आगे लाने का काम इसमें हो रहा है। इसके अंतर्गत शामिल गांवों में अलग-अलग सेक्टर में काम कर मानव सूचकांकों को सुधारा जा रहा है। उन्हें संतृप्ति के स्तर पर लाया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-एक व्यक्ति के विकास और कल्याण से विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने समारोह में कहा कि आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में भौतिक प्रगति से अलग मानव सूचकांकों को बेहतर करने के लिए काम किए जा रहे हैं। लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें संतृप्त करने अहम इंडीकेटर्स पर काम हो रहे हैं जिनकी तरफ सामान्यतः ज्यादा ध्यान नहीं जाता है। राज्य के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में और भी बेहतर काम हो, इसके लिए मैं सभी जिलों व विकासखंडों को शुभकामनाएं देता हूं। मुख्य सचिव अमिताभ जैन और योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने समारोह में संपूर्णता अभियान के दौरान किए गए कार्यों तथा उपलब्धियों की जानकारी दी। नीति आयोग के सदस्य-सचिव आशीष भट्ट, सदस्य के. सुब्रमण्यम और योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। 

छह सूचकांकों पर अच्छा काम करने वाले जिलों और विकासखंडों को किया गया पुरस्कृत

आकांक्षी जिला कार्यक्रम के 49 संकेतकों में से छह और आकांक्षी विकासखंडों के 40 संकेतकों में से छह संकेतकों को चिन्हित कर इन्हें संतृप्त करने संपूर्णता अभियान संचालित किया गया था। इनमें एएनसी पंजीकरण, पूरक पोषण ले रही गर्भवती महिलाओं, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पूर्ण टीकाकरण वाले बच्चे, बिजली वाले स्कूल, शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने वाले स्कूल, मधुमेह जांच, उच्च रक्तचाप जांच, परिक्रामी निधि प्राप्त करने वाले स्वसहायता समूहों की संख्या जैसे संकेतक शामिल थे।

संपूर्णता अभियान के दौरान सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले आकांक्षी जिलों व विकासखंडों को आज स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। पांच संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले जिलों व विकासखंडों को रजत पदक, चार संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वालों को कांस्य पदक तथा तीन संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले जिलों और विकासखंडों को ताम्र पदक से सम्मानित किया गया।  

बस्तर और कोंडागांव जिले को स्वर्ण पदक

संपूर्णता अभियान के दौरान सभी छह संकेतकों में पूर्ण संतृप्ति हासिल करने वाले आकांक्षी जिलों बस्तर और कोंडागांव तथा आकांक्षी विकासखंडों शंकरगढ़, मैनपुर, माकड़ी, कोयलीबेड़ा, ओरछा और प्रतापपुर को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। आकांक्षी जिलों दंतेवाड़ा, कोरबा, कांकेर, नारायणपुर तथा आकांक्षी विकासखंडों लखनपुर, बैकुंठपुर, दुर्गकोंदूल, गौरेला-2, कोरबा और पिथौरा को रजत पदक प्रदान किया गया। आकांक्षी जिला बीजापुर और आकांक्षी विकासखंडों गरियाबंद, उसूर, पोड़ी उपरोड़ा, बोड़ला, तोकापाल एवं कुआंकोंडा को कांस्य पदक तथा आकांक्षी जिलों मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी, महासमुंद, सुकमा एवं आंकांक्षी विकासखंड अंबागढ़ चौकी को ताम्र पदक से सम्मानित किया गया। संबंधित जिलों के वर्तमान और तत्कालीन कलेक्टरों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए।

छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़ी उपलब्धि

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन में छत्तीसगढ़ राज्य ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी ने छत्तीसगढ़ को आवास निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये पुरस्कृत किया है। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हडको), नई दिल्ली के 53वें स्थापना दिवस के अवसर पर आवास निर्माण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य शहरी विकास अभिकरण छत्तीसगढ़ (State Urban Development Agency (SUDA) को सम्मानित तथा पुरस्कृत किया गया।

दिल्ली में आयोजित इस समारोह में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ को दिया गया है, जिसे सूडा के सीईओ सौमिल रंजन चौबे द्वारा ग्रहण किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सभी हितग्राहियों को आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए तत्त्पर है।उल्लेखनीय है कि नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिव कुमार डहरिया के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत सभी नगरीय निकायों में सभी के लिये आवास उपलब्ध कराने का कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है।

वर्तमान में राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा )द्वारा राज्य के समस्त 33 जिलों के सभी 170 नगरीय निकायों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सबके लिए आवास मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है योजना अन्तर्गत अब तक 2 लाख 62 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति प्राप्त है, जिसमें अब तक 1 लाख 40 हजार घरों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, एवं शेष आवासों का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सबके लिए आवास मिशन के क्रियान्वयन में अद्यतन लगभग 42 सौ  करोड़ का व्यय किया जा चुका है। छ.ग. शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग योजना अन्तर्गत समस्त स्वीकृत हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराये जाने हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस हेतु योजना अन्तर्गत निरंतर कार्यरत है।

छत्तीसगढ़ की इन उपलब्धियों ने केंद्र सरकार से कराया पुरस्कृत

1. आबादी भूमि पर निवासरत परिवारों को आवास निर्माण हेतु अधिकार प्रमाण-पत्र का वितरण एवं आवासीय पट्टों का नवीनीकरण।

2. योजना में बन रहे समूह आवासों को शासन द्वारा रेरा पंजीयन में छूट प्रदान की गई। 

3. शासन द्वारा निर्माणाधीन आवासों के पर्यवेक्षण हेतु ख्याति प्राप्त सलाहकार संस्थाओं एवं वास्तुविदों की नियुक्ति की गई।

4. मोर मकान-मोर आस -  योजना में समूह आवासों के माध्यम से किराये में निवासरत शहरी गरीबों को योजना में शामिल करने का अभूतपूर्व निर्णय शासन द्वारा लिया गया। इससे शहरी क्षेत्रों के लगभग 25 से 30 हज़ार आवासहीन किरायेदारों को आवास प्रदान किया जा रहा है।

5. नक्सलीय गतिविधियों से प्रभावित परिवारों को लाभ - राज्य द्वारा नगर पंचायत, अंतागढ़ में नक्सलीय गतिविधियों से प्रभावित 80 परिवारों के हितग्राहियों को सर्वसुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराया गया।

सबके लिए आवास (शहरी) अन्तर्गत पूर्व में प्राप्त पुरस्कार -

1. भारत सरकार द्वारा PMAY Awards 2019 अन्तर्गत Best State for Convergence with Other Missions में न.नि राजनांदगांव, नगर पंचायत अन्तागढ़ एवं नगर पंचायत गण्डई, को पुरस्कार प्रदान किया गया।

2. भारत सरकार द्वारा PMAY Awards  2019 अन्तर्गत नगर पालिका परिषद, डोंगरगढ़ को बेस्ट परफॉर्मिंग म्युनिसिपल काउंसिल श्रेणी का पुरस्कार प्रदान किया गया।

3. HUDCO Award  2019-2020 में न.नि. राजनांदगांव को हाउसिंग, अरबन पॉवर्टी एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर की श्रेणी पुरस्कार प्रदान किया गया।

4. भारत सरकार द्वारा Indian Urban Housing Conclave (IUHC) 2022 में PMAY Award, 2021 में छत्तीसगढ़ राज्य को बेस्ट कम्यूनिटी ओरिएन्टेड प्रोजेक्ट्स की श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन का पुरस्कार प्रदान किया गया।

5. भारत सरकार द्वारा Indian Urban Housing Conclave (IUHC), 2022 में PMAY Awards, 2021 में नगर पंचायत पाटन को बेस्ट परफॉर्मिंग नगर पंचायत की श्रेणी में पूरे भारत में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

आयुष्मान कार्ड पंजीयन में उत्कृष्ट कार्य करने पर कांकेर जिला पुरस्कृत

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उत्तर बस्तर कांकेर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डा खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना अंतर्गत कांकेर जिले में आयुष्मान कार्ड पंजीयन कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कांकेर जिले को पुरस्कृत किया गया है। राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में आज प्रदेश के  स्वास्थ्य  एवं  परिवार कल्याण मंत्री टी.एस. सिंहदेव द्वारा कांकेर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे एवं जिला परियोजना समन्वयक आयुष्मान भारत कांकेर सनत पटेल को आज मोमेन्टों एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत कांकेर जिले में 7,36,886 हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन किया जाना है, जिसके विरूद्ध 6,32,540 हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 86.09 प्रतिशत तथा छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वाधिक है। आयुष्मान कार्ड पंजीयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर कांकेर जिले को आज राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पुरूस्कृत किया गया। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे और जिला परियोजना समन्वयक आयुष्मान भारत कांकेर सनत पटेल ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। 

कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला ने उन्हें अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं में भी बेहतर प्रदर्शन किया जावे। गौरतलब है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत सामाजिक, आर्थिक एवं जातीय जनगणना  (SECC)-2011  की चयनित श्रेणियों में सूचीबद्ध परिवारों तथा डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना अंतर्गत अन्त्योदय एवं प्राथमिकता राशन कार्डधारी परिवारों को 05 लाख रुपये तक एवं शेष ए.पी.एल. परिवारों को 50 हजार रूपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है। इस योजनांतर्गत कांकेर जिले में अब तक 6,32,540 हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन किया जा चुका है।

विकासखंड चारामा में 99,962 हितग्राही, नरहरपुर में 97,811 हितग्राही, कांकेर विकासखण्ड में 1,03,781 हितग्राही, भानुप्रतापपुर में 80,576 हितग्राही, कोयलीबेड़ा में 1,41,389 हितग्राही, दुर्गूकोंदल में 51,673 एवं अंतागढ़ विकासखण्ड में 57,348 हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं तथा पंजीयन के कार्य जारी है। जिले में पंजीयन से छूटे हुये पात्र हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन के लिए आपके द्वार आयुष्मान अभियान एवं आयुष्मान भारत पखवाड़ा जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर आयुष्मान कार्ड पंजीयन किये जा रहे हैं। आयुष्मान कार्ड बनाने हेतु शिविर स्थल एवं तिथि की जानकारी के लिए मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जा रहा है, इसके साथ ही बैनर पोस्टर लगाये गये हैं। नगरीय क्षेत्रों में वाहनों के माध्यम से माकिंग कराया जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जा रही है।

पंजीकृत अस्पतालों में 5536.68 लाख रुपये से 78 हजार 165 मरीजों का निःशुल्क उपचार

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत पंजीकृत 45 अस्पतालों जिसमें 36 शासकीय अस्पताल एवं 09 निजी अस्पतालों द्वारा वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक 78 हजार 165 मरीजों को 5536.68 लाख रूपये से निःशुल्क उपचार कर लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2020-21 में 18177 मरीजों को  1214.79 लाख रुपये, वर्ष 2021-22 में 26,052 मरीजों को 1828.56 लाख रुपये तथा वर्ष 2022-23 में 33,936 मरीजों को 2493.33 लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान किया गया है।

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने 31 शिक्षिकों को किया सम्मानित

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रायपुर। मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार प्रतिवर्ष विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर पर मुख्यमंत्री गौरव अंलकरण योजना के अंतर्गत शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाता है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज माध्यमिक शिक्षा मण्डल परिसर स्थित संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा कार्यालय के सभागार में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के अंतर्गत रायपुर संभाग के 31 शिक्षकों को सम्मानित किया।

इनमें शिक्षा दूत सम्मान से 12 शिक्षक, ज्ञानदीप से 03 शिक्षक, शिक्षा से 03 व्याख्याता, उत्कृष्ट प्राचार्य 05 और 08 उत्कृष्ट प्राधान पाठक सम्मानित हुए। यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों को बच्चों के अध्ययन-अध्यापन के साथ कौशल विकास, बौद्धिक, शारीरिक एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति उत्तरदायित्व के लिए प्रेरणादायक कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गुरू आदि काल से समाज के पथ प्रदर्शक रहे हैं इसलिए वह हमेशा सम्मान के पात्र रहे हैं।

5 सितंबर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस मनाकर शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। यह सम्मान राज्य स्तरीय होता है। विकासखण्ड स्तर पर शिक्षक दूत, जिला स्तर पर ज्ञानदीप और संभाग स्तर पर शिक्षा श्री सम्मान से मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरणयोजना के तहत् शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी की अवधि में शिक्षकों ने शिक्षा की ज्योति को जलाए रखा और बहुत सारे नवाचार किए। राज्य के शिक्षकोें द्वारा उस दौरान किए नवाचारों का अनुकरण अन्य राज्यों ने भी किया। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि शिक्षक आदर्श हों तो उनके व्यवहार का अनुकरण सभी करते हैं।

यह भी सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने विद्यार्थी काल में किसी न किसी शिक्षक से प्रभावित होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए आग्रह किया कि वे निरंतर छात्र हित में अच्छा कार्य करते रहें। साथ ही अपने साथी शिक्षिकों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करें। डॉ. टेकाम ने कहा कि शिक्षिकों को अपने सामाजिक दायित्वों को नहीं भूलना चाहिए। बच्चों को बौद्धिक, नैतिक और कौशल विकास के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी परीक्षा का समय निकट है तो सभी तन-मन से तैयारी में जुट जाएं और संकल्प लें कि इस वर्ष स्कूल का बेहतर परिणाम आए।

मंत्री डॉ. टेकाम ने समारोह में विकासखण्ड स्तर पर कक्षा पहली से पांचवी तक अध्यापन कराने वाले शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार में 5 हजार रूपए, जिला स्तर पूर्व माध्यमिक शाला के कक्षा छठवीं से आठवीं तक अध्यापन कराने वालों शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार में 7 हजार रूपए, संभाग स्तर पर कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक अध्यापन कराने वाले शिक्षकों को शिक्षा श्री पुरस्कार में 10 हजार रूपए की सम्मान राशि के साथ ही प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने इसके साथ ही जिला अंतर्गत अपने विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राचार्याें को 2 हजार रूपए, विकासखण्ड स्तर पर प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रधान पाठकों को एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि प्रदान की। सभी सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, शॉल, श्रीफल से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा रायपुर संभाग के. कुमार जिला शिक्षा अधिकारी आर.एल. ठाकुर सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे।

श्रेष्ठ कार्य के लिए राज्य और जिला स्तर पर पुरस्कृत होंगी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ : मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हम सब मिल कर यह चुनौती स्वीकार करें कि आगामी एक साल में प्रदेश में कोई बच्चा कम वजन का नहीं रहेगा। प्रत्येक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका अपने क्षेत्र के हर बच्चे और महिला को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने को केवल शासकीय कार्य नहीं अपितु अपना व्यक्तिगत कर्त्तव्य मानें। महिला-बाल विकास मात्र विभाग नहीं, मेरा अपना परिवार है। महिलाओं - बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार तथा महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे इस विभाग के मैदानी अमले की मेहनत और विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों की सजगता एवं जागरूकता की समाज और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है।



आज का यह कार्यक्रम, प्रदेश की जनता की ओर से विभाग की सेवाओं का सम्मान तथा प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का कार्यक्रम है। राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और पर्यवेक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही प्रतिवर्ष जिला स्तर पर भी श्रेष्ठ कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान महिला-बाल विकास के मैदानी अमले के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं उत्प्रेरणा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और पर्यवेक्षकों को पुरस्कृत किया

मुख्यमंत्री ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। बाल भवन के बच्चों द्वारा मध्यप्रदेश गान की प्रस्तुति दी गई, जिसके सम्मान में सभी खड़े हुए। मुख्यमंत्री चौहान ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक और अधिकारियों को पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिला कार्यालय वर्चुअली जुड़े तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने भी वर्चुअल सहभागिता की।

राज्‍य सरकार बेटियों को बोझ मानने के सभी कारणों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि माँ-बहन और बेटी को उनका अधिकार दिलाना मेरे जीवन का उद्देश्य है। प्रदेश में लिंगानुपात बराबर करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। बेटे की चाह ने बेटियों के साथ बहुत अन्याय किया है। हमारी सरकार बेटियों को बोझ समझने के सब कारणों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2011 की जनगणना के समय प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 919 था। एनएचएफएस-5 के अनुसार जन्म के समय लिंग अनुपात 927 से बढ़ कर 956 हो गया। महिला-बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में समाज का हरसंभव सहयोग लिया जाएगा। अडाप्ट एन आँगनवाड़ी में जन-सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समाज भी आँगनवाड़ियों के लिए अधिक से अधिक सहयोग करने के लिए तत्पर है। भोपाल में आँगनवाड़ियों के लिए लोगों ने भरपूर सामग्री दी और इन्दौर से आर्थिक रूप से हरसंभव सहयोग मिला है।

उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बेटियों की फीस राज्य शासन भरेगी

मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना-2 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, क्लैट की पढ़ाई तथा अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बेटियों की फीस राज्य शासन द्वारा भरवाई जाएगी। बेटियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए हरसंभव सहायता और अवसर उपलब्ध होंगे।

महिलाओं को अधिकार के साथ सुरक्षा भी

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहाँ नगरीय निकायों और पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसी का परिणाम है कि अब, घर की दहलीज पार नहीं करने वाली महिलाओं के आधार पर परिवार के पुरूषों को पहचान मिल रही है। उन्हें सरपंच पति, पार्षद पति के रूप में जाना जा रहा है। महिला पुलिस के रूप में कानून-व्यवस्था संभालती बहन-बेटियों को देख कर मन प्रसन्नता से भर जाता है और लगता है कि महिला सशक्तिकरण का भाव वास्तविक स्वरूप में क्रियान्वित हो रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बहन-बेटियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। कई प्रकरणों में प्रदेश में बेटियों को गलत नजर से देखने वालों को फाँसी की सजा सुनाई गई है। दुराचारी किसी भी स्थिति में बख्शे नहीं जाएंगे।

अनाथ बच्चों की देख-रेख सरकार की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोविड जैसी महामारी के दौरान प्रदेश में बच्चों की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने ली। जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया उनके लिए मुख्यमंत्री कोविड सहायता योजना लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य था।

विभागीय गतिविधियों में गड़बड़ियों की संभावनाओं को निर्मूल करें

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महिला-बाल विकास बहुत संवेदनशील विभाग है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ, बहनों की प्रसव पूर्व जाँच कराने में मदद और उन्हें सभी टीके लगवाने के लिए प्रेरित कर जीवन सहजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए 16 हजार रूपये की व्यवस्था की गई है। हमें विभागीय गतिविधियों में गड़बड़ियों की संभावनाओं को निर्मूल करने की ओर आगे बढ़ना है। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग व्यवस्थित और सजग रूप से हो।

मुख्यमंत्री हर त्रैमाह में करेंगे आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं से संवाद

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से मिलने, उनसे बातचीत करने और उनसे सुझाव लेने के लिए हर 3-4 माह में कार्यक्रम किए जाएंगे। साथ ही विभागीय गतिविधियों के बारे में सुझाव आमंत्रित कर व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

संचालक, महिला-बाल विकास डॉ. रामराव भोंसले ने बताया कि प्रदेश में 92 हजार 153 आँगनवाड़ी तथा 453 परियोजनाएँ संचालित हैं। विभाग में कार्यरत 1 लाख 90 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस कार्यक्रम से वेबकास्ट एवं अन्य वर्चुअल माध्यमों से जुड़े हैं। अपर मुख्य सचिव महिला-बाल विकास अशोक शाह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया

मुख्यमंत्री चौहान ने जिला कार्यक्रम अधिकारी अलीराजपुर श्रीमती शिवकली वरबडे, गुना के धीरेन्द्र सिंह जादौन और दतिया के अरविंद कुमार उपाध्याय को क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय रैंक का प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। परियोजना अधिकारी स्तर पर जावरा-रतलाम की श्रीमती अंकिता पाटीदार को प्रथम, भाबरा-अलीराजपुर के मुकेश भूरिया को द्वितीय और आष्टा-2 सीहोर के संदीप रूहल को तृतीय रैंक के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। 

पर्यवेक्षक स्तर पर सीधी के सेक्टर चंदवाही की श्रीमती अनुसुईया वाजपेई को प्रथम, अलीराजपुर सेक्टर तेमाजी की सुश्री संगीता मावी को द्वितीय और भिंड के खितौली सेक्टर की सुश्री प्रीति यादव को तृतीय रैंक का प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। दस आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और दस साहिकाओं को भी प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। इन्दौर के वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक श्रीमती वंदना सिंह परिहार को भी मुख्यमंत्री चौहान प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया।


पारंपरिक खेलों में विजयी प्रतिभागियों को संसदीय सचिव ने किया पुरस्कृत

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महासमुंद। संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने खेल मड़ई के तहत ग्राम खट्टी में आयोजित जिला स्तरीय पारंपरिक खेल प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ ही खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने जोर दिया। ग्राम खट्टी में खेल मड़ई के तहत जिला स्तरीय पारंपरिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। आज रविवार को खेल प्रतियोगिता का समापन के साथ ही पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर थे।



अध्यक्षता जनपद अध्यक्ष यतेंद्र साहू ने की। विशेष अतिथि के रूप में कृषि उपज मंडी अध्यक्ष हीरा बंजारे, सरपंच संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चंद्राकर, जनपद सदस्य कुणाल चंद्राकर, हेमंत डडसेना, सचिन गायकवाड़, रहीम चौहान मौजूद थे। कार्यक्रम में पहुंचने पर संसदीय सचिव चंद्राकर का आत्मीय स्वागत किया गया। बाद इसके उन्होंने गेड़ी का लुत्फ उठाया। अपने संबोधन में संसदीय सचिव चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश सरकार खेलों के प्रति रूझान बढ़ाने हरसंभव प्रयास कर रही है। विभिन्न खेलों के विकास व सुविधाओं की बढ़ोत्तरी के लिए छग खेल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। भूपेश सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।



इसी तारतम्य में आज यहां पारंपरिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। प्रदेश सरकार की पहल से बच्चों व युवाओं में खेलों के प्रति झुकाव हो रहा है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ ही खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन करने का आव्हान किया। बाद इसके उन्होंने प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारी मनोज धृतलहरे ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि प्रतियोगिता में जिलेभर से बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शशि कुमार साहू, राधेलाल कमार, अश्वनी मंडावी, रेवाराम साहू, तोरण कन्नौजे, पवन साहू, मोहन साहू, सोहन साहू, महेंद्र टंडन, रामचरण पटेल सहित शिक्षकगण मौजूद थे।

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