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‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ में लगाए जाएंगे 2.75 करोड़ पौधे

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रायपुर। एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश में करीब दो करोड़ 75 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधों की उपलब्धता वन विभाग के नर्सरियों और विभागीय स्त्रोतों से सुनिश्चित की जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज मंत्रालय में आयोजित बैठक में एक पेड़ मां के नामअभियान की गहन समीक्षा की। बैठक में अभियान के तहत शासकीय विभागों द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वृक्षारोपण के निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में अधिकारियों से एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पौधरोपण करने वालों को उस पौधे के ग्रोथ की निगरानी से जोड़ें, जिससे वृक्षारोपण के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य महाविद्यालयों से अनेक लोग निकलकर आज कामयाबी के शिखर पर हैं। इन सभी संस्थाओं को ऐसे लोगों को संस्था में वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान अवश्य आमंत्रित करना चाहिए। नगरीय निकायों में शहरों के बड़े व्यवसाईयों, उद्योगपतियों और अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में वृक्षारोपण कराया जाना चाहिए। उप मुख्यमंत्री साव ने स्कूलों में वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने वालों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सभी को वृक्षारोपण के दौरान रोपे गए पौधों के ग्रोथ की भी जानकारी देना सुनिश्चित करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वृक्षारोपण में महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले लोगों को 15 अगस्त और वानिकी दिवस पर सम्मानित किए जाने की बात कही। उन्होंने आगामी पर्यावरण दिवस 5 जून को होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रमों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने वृक्षारोपण अभियान के दौरान कलेक्ट्रेट परिसरों, राष्ट्रीय राजमार्गों, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, माइनिंग परिसरों, जल स्त्रोतों के आसपास, स्कूल परिसरों तथा अन्य संस्थाओं एवं स्थानों को चिन्हित कर व्यापक कार्ययोजना के तहत कार्य करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने वृक्षारोपण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी विभागों के अधिकारियों को समन्वय एवं सहयोग से कार्य करने को कहा। उन्होंने  अधिकारियों को एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण, आवास एवं पर्यावरण, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खनिज, पर्यटन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया। पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय ने वृक्षारोपण अभियान में किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारतीदासन सहित वन विभाग, वन विकास निगम, आवास एवं पर्यावरण, पर्यटन, वाणिज्य एवं उद्योग, संस्कृति, स्कूल शिक्षा, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा में है पर्यटन की अपार संभावनाएं : वनमंत्री कश्यप

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रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा को भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से अकुत खनिज संपदा और प्राकृतिक सौन्दर्य का उपहार मिला है। दोनों ही राज्यों में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप दोनों ही राज्यों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वनमंत्री कश्यप आज आज ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम चलो देखें अपना देशटूरिज्म कॉन्क्लेव को सम्बोधित कर रहे थे।

वनमंत्री कश्यप ने कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक रिश्तों को भी रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है। दोनों ही राज्यों में अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल हैं और दोनों राज्यों के बीच रोटी-बेटीका रिश्ता है। कश्यप ने कहा कि जगन्नाथपुरी में वर्षो से बस्तर बाड़ा है। जहां छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते है और वहां ठहरते है। उन्होंने कहा कि देश में बहुत से आकर्षक पर्यटन स्थल हैं। 

इन क्षेत्रों में दोनों की राज्यों में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने का काम किया जा रहा है। ओडिशा में देश का सबसे खूबसूरत समुद्र तट है, तो छत्तीसगढ़ में बस्तर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है। इन दोनों ही राज्यों के पर्यटन प्रेमी इन स्थानों पर आकर पर्यटन का आनंद ले सकते हैं। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम ओडिशा में पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय स्थलों के महत्व को उजागर करने के उद्देश्य से इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में ओडिशा की उपमुख्यमंत्री श्रीमती प्रावति परिदा, विधायक पुरंदर मिश्रा, पद्मश्री उत्सव चरण दास और जे.के. मोहंती सहित ओडिशा राज्य के पर्यटन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

प्रदेश के पर्यटन को मिली नई पहचान : मधेश्वर पहाड़ को मिला शिवलिंग की विश्व की सबसे बड़ी प्राकृतिक प्रतिकृति शिवलिंग होने का गौरव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित मधेश्वर पहाड़ को शिवलिंग की विश्व की सबसे बड़ी प्राकृतिक प्रतिकृति के रूप में मान्यता मिली है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। रिकॉर्ड बुक में लार्जेस्ट नेचुरल फैक्सिमिली ऑफ शिवलिंगके रूप में मधेश्वर पहाड़ को दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के पर्यटन की उपलब्धियों में एक नया आयाम बताया।

गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रतिनिधि श्रीमती हेमल शर्मा और अमित सोनी ने मुख्यमंत्री साय से आज मंत्रालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें वर्ल्ड रिकार्ड का सर्टिफिकेट सौंपा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, वन मंत्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पर्यटन वेबसाईट https://www.easemytrip.com में जशपुर जिले को शामिल किया गया है। इसके बाद जिले के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है। इस वेबसाइट में शामिल होने वाला जशपुर छत्तीसगढ़ का पहला जिला है, इससे पर्यटन प्रेमियों को जशपुर के नैसर्गिक स्थलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी तथा पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

मधेश्वर पहाड़ : प्रकृति और आस्था का संगम

जशपुर जिले के कुनकुरी ब्लॉक में मयाली गांव से 35 किलोमीटर दूर स्थित मधेश्वर पहाड़, शिवलिंग के आकार की अपनी अद्भुत प्राकृतिक संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र है, जहाँ स्थानीय ग्रामीण इसे विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के रूप में पूजते हैं।

पर्यटन और रोमांच का केंद्र

मधेश्वर पहाड़ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए भी लोकप्रिय होता जा रहा है। यहाँ हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं और प्रकृति के साथ जुड़ने का अनुभव करते हैं। जशपुर जिले में पर्यटन और रोमांचक खेलों के विकास की असीम संभावनाएँ मौजूद हैं।

छत्तीसगढ़ में पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने हुआ विचार मंथन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ को पूरे देश में पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने तथा राज्य की संस्कृति को संरक्षित करने आज राज्य नीति आयोग में गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ के विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार करने के लिए वर्किंग ग्रुप के सदस्यों ने अपने विचार रखे। अटल नगर, नया रायपुर स्थित राज्य नीति आयोग के सभाकक्ष में समिति के सदस्यों ने इस विषय पर लघु, मध्यम एवं दीर्घकालिक लक्ष्यों पर सुझाव दिए।

बैठक में सदस्यों ने राज्य के पर्यटन स्थलों में अधोसंरचना विकास के लिए तथा पर्यटन की आवश्यकताओं के अनुसार नई योजना बनाने, नए पर्यटन सूचना केन्द्र स्थापित करने, ट्राइबल टूरिज्म सर्किट, ट्राइबल थीम को लेते हुए टूरिज्म डेस्टिनेशन का विकास करने पर विस्तृत चर्चा की। इसी प्रकार पर्यटन स्थलों में एडवेंचर गतिविधियों के विकास तथा निजी निवेशकों को आमंत्रित करने, बस्तर दशहरा, भोरमदेव महोत्सव, सिरपुर महोत्सव, लोक मड़ई मेलों के आयोजन सहित अन्य स्थानीय महोत्सवों को बढ़ावा देने विचार विमर्श किया गया।

इसी तरह हस्तशिल्पियों को आकर्षक बाजार उपलब्ध कराने, संगीत और नृत्य के कलाकारों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित करने, स्थानीय तीज-त्योहारों, स्थानीय साहित्य, लोक कथाओं और ज्ञान को संरक्षित करने पर गहन विचार किया गया। स्थानीय खान-पान और तकनीकों के संरक्षण तथा नवाचार के लिए प्रोत्साहन, रचनात्मकता और कला कौशल के विकास सहित अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

गौरतलब है कि विजन डाक्यूमेंट तैयार करने का उत्तरदायित्व राज्य नीति आयोग को सौंपा गया है। सितंबर 2024 तक विजन डॉक्यूमेंट का अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की अपेक्षा की गई है, इसके लिए अलग-अलग विषयों पर आठ वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं। बैठक में राज्य नीति आयोग के सदस्य के. सुब्रमण्यम, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य सदस्यों ने विभागों द्वारा बनाए गए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालिक विजन एवं रणनीतियों पर सुझाव दिए।    

बैठक में सदस्य के. सुब्रमण्यम ने छत्तीसगढ़ में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों की संख्या बढ़ाने, पर्यटन से राज्य की जीडीपी में योगदान बढ़ाने, बुनियादी ढांचे के विकास में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने, पर्यटन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विकास तथा मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग अभियान को नीति दस्तावेज में शामिल करने सुझाव दिए।

बैठक में राज्य की जनजातिय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने, राज्य में उपलब्ध वनस्पतियों और जीवों से युक्त विशाल वन क्षेत्र को पर्यावरण पर्यटन के रूप में विकसित करने, वैलनेस टूरिज्म, कृषि पर्यटन एवं मनोरंजन पार्क विकसित करने, टिकाऊ, समावेशी और जिम्मेदार पर्यटन, छत्तीसगढ़ को प्रमुख पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने, पर्यटन केन्द्रो को संचालित करने स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए रोजगार उपलब्ध कराने तथा छत्तीसगढ़ को एक सुरक्षित राज्य के रूप में प्रचार-प्रसार करने सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में उद्योग विभाग, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, वन, पर्यटन, जनसंपर्क, राज्य नगरीय विकास प्राधिकरण, परिवहन एवं विमानन सहित अन्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के बजट पर हुई चर्चा

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रायपुर। शिक्षा, पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति बृजमोहन अग्रवाल की उपस्थिति में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज यहां महानदी भवन मंत्रालय में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पर्यटन
                                           

धर्मस्व एवं संस्कृति विभाग के बजट सत्र को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। मंत्रीद्वय द्वारा बैठक में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

सैलानियों को जल्द मिलेगी ’तांदुला इको फ्रेंडली टूरिज्म पार्क’ की सौगात

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रायपुर। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विकास के लिए तेजी से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। यहां सैलानियों के लिए सुविधाओं सहित सुगम पहुंच का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसी कड़ी में जल्द ही सैलानियों को तांदुला इको फ्रेंडली टूरिज्म पार्ककी सौगात मिलने वाली है।

बालोद जिले की प्रमुख एवं जीवनदायिनी तांदुला नदी में निर्मित तांदुला जलाशय के तट स्थित मनोरम प्राकृतिक वादियों को सैलानियों के लिए विकसित किया जा रहा है। संयुक्त जिला कार्यालय बालोद के समीप आदमाबाद में निर्माणाधीन तांदुला इको फ्रेंडली टूरिज्म पार्कका निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। उल्लेखनीय है कि आदमाबाद के समीप स्थित तांदुला जलाशय का तट जंगल एवं हरे-भरे वृक्षेों से आच्छादित होने तथा बेहतरीन प्राकृतिक परिवेश और जरूरी सुविधाओं से युक्त होने के कारण सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है।

इस पर्यटन स्थल के विकसित हो जाने से बड़ी संख्या में सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। पार्क के सामने आकर्षक मुख्य द्वार का निर्माण किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के रूकने के लिए कार्टेज, मचान, टेंट हाउस के अतिरिक्त रेस्टोरेंट, वाटर बॉडी, बुद्धा स्टेच्यू, गार्डन आदि निर्माण कार्य किया जा रहा है।

यहां चम्पा के फूलों के अलावा फलदार पौधों का रोपण भी कराया जा रहा है। तांदुला जलाशय पर्यटन स्थल को आकर्षक एवं सुसज्जित बनाया जा रहा है, जिससे कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अन्य राज्यांे से भी पर्यटक यहां आएं। पर्यटन स्थल में विभिन्न स्टॉल भी स्थापित किया जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकंेगे।

भोरमदेव पदयात्रा 10 जुलाई को : कवर्धा से भोरमदेव मंदिर तक 16 किलोमीटर की पदयात्रा

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कवर्धा। कबीरधाम जिले में प्रतिवर्ष श्रावण मास के प्रथम सोमवार को आयोजित होने वाली भोरमदेव पदयात्रा की तैयारियां शुरू हो गई है। इस वर्ष श्रावण माह के प्रथम सोमवार 10 जुलाई को यह पदयात्रा होगी। 10 जुलाई सोमवार को सुबह 7 बजे कवर्धा स्थित बुढ़ा महादेव मंदिर से पदयात्रा रवाना होगी। छत्तीसगढ़ के पुरात्तव, धार्मिक, पर्यटन स्थल और जन आस्था के केन्द्र के रूप से विख्यात ऐतिहासिक महत्व के स्थल भोरमदेव मंदिर तक यह पदयात्रा सदियों से चली आ रही है। हालांकि प्रशासनिक तौर पर आमजनों के सहयोग से कवर्धा के बुढ़ामहादेव मंदिर से यह पदयात्रा 2008 से अनवरत जारी है। 
                 

इस पदयात्रा में शामिल होने वाले भक्तों के लिए स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर जिला प्रशासन की पूरी टीम और भोरमदेव सनातन तीर्थ ट्रस्ट तैयांरियों में लगा हुआ है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर जनमेजय महोबे की अध्यक्षता में विगत दिनों भोरमदेव पदयात्रा की तैयारियों के संबंध में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, समाजसेवी संगठनों, मीडिया के प्रतिनिधियों  की संयुक्त बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में पदयात्रा के संबंध में आवश्यक सुझाव भी आए थे। सुझावों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां भी की जा रही है।

कलेक्टर महोबे के निर्देश पर कवर्धा के बुढ़ामहादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक लगभग 16 किलोमीटर तक की इस पदयात्रा में शामिल गणमान्य नागरिक, स्कूली बच्चों, समाजसेवी संगठनों सहित आमजनों के लिए हर एक से दो किलोमीटर की अंतराल में पानी पाउच, शीतल पेय, नीबू-शरबत, चाय नास्ता की व्यवस्था की जाएगी। यह व्यवस्था अलग-अलग गांव व स्थानों पर रहेगी। इसके साथ स्वास्थ्य शिविर भी लगाई जाएगी। पदयात्रियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। पदयात्रा के साथ-साथ एम्बूलेंस भी चलेगी। साथ ही चिकित्सक सहित उपचार की पूरी व्यवस्था और इलेक्ट्रॉल पावडर व ग्लूकोज इत्यादि की व्यवस्था रहेगी। पदयात्रा के साथ-साथ उस दिन आमजनों व रहगीरों को सुगम यातायात में कोई परेशानी ना हो इसके लिए यातायात, पेट्रोलिंग वाहन व आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक वर्ष की भांति पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए प्रत्येक सोमवार को  ज्वाईन  हैंडस परिवार के सहयोग से भोरमदेव मंदिर के समीप निःशुल्क खीर-पुड़ी सहित भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

चमकते चट्टान, ले सकती हैं जान.. इसलिए रहें सावधान

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जांजगीर-चांपा। उगते सूरज के समय बिखरती सूरज की किरणे हो या फिर अस्त होने के समय सुनहरी रोशनी और बादलों के बीच झिलमिलाती किरणे। हदसेव नदी के बहते पानी में आधा बाहर तो आधा भीतर की ओर डूबा चट्टान जब बाहर से चमकता हुआ दिखाई देता है तो यह देखने वालों को बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है। पानी की धार से तराशे गए इन चट्टानों में सूरज निकलने से लेकर सूरज के डूबने तक चमक ही नहीं होती, नुकीले और धारदार चट्टान कई स्थानों पर किसी को काटने, खरोंच पहुचाने से लेकर उन्हें अपनी गुफानुमा जगहों में कैद करने की क्षमता भी रखती है। बेशक यह देवरी का पिकनिक स्पॉट ही है, जो जांजगीर-चाम्पा जिले के बलौदा ब्लॉक में है और अपनी खूबसूरती तथा मनोरम दृश्य के लिए सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है।


पर्यटन और सैर सपाटे के इस मौसम में मनोरम दृश्य हमें मजबूर करते हैं कि हम भी मस्ती और मनोरंजन के लिए परिवार तथा दोस्तों के साथ इन जगहों में जाएं। चूल्हा बनाकर आग जलाये, पसंद का खाना बनाये और आसपास के खूबसूरत सा नजारों को देखकर हमेशा के लिए अपनी यादगार तस्वीर कैमरों में कैद करें। मस्ती और मनोरंजन की यह ख्वाहिश यादगार लम्हों में तब तक कैद होती है, जब तक हम ऐसे स्थानों पर सुरक्षित जाये और सुरक्षित लौट आए, वर्ना जरा सी असावधानी और लापरवाही हमें कभी न भूल पाने वाली वह गम दे जाती है, जो किसी के मस्ती और मनोरंजन के समय बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए।

कुछ ऐसा ही हादसा जिले के इस देवरी पिकनिक स्पॉट पर मंगलवार को हुआ। आपस में तय कर 8 नाबालिग छात्र यहां चले तो आए, किसी अनहोनी या हादसों की परवाह किए बगैर पानी में उतरकर नहाने लगे। दूर-दूर तक फैले हुए खतरनाक चट्टानों में पानी कितना है और खतरा कितना है ? इसकी परवाह किए बिना एक के बाद एक दो छात्र पानी में बह गए। देखते ही देखते पानी में समाहित होकर लापता हुए दोनों छात्रों को उनके दोस्त भी बचा नहीं पाए, क्योंकि ऐसे हादसों के वक्त डरना, सहमना लाजमी है और सूझबूझ के साथ कोई उपाय भी दिमाग में नहीं आ पाता। इस हादसे की सूचना पर अलर्ट हुई प्रशासन और पुलिस, नगर सेना, एसडीआरएफ तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर पूरी कोशिश की। दोनों छात्रों को बचाने ढूंढा गया, लेकिन चट्टानों के रेस्क्यू में रोड़ा बनने के बाद भी दो दिनों तक खोजबीन बदस्तूर जारी रहा।

आखिरकार जिंदगी और मौत के उम्मीदों के बीच नदी के पानी और चमकते चट्टानों के खोह से 26 और 40 घण्टे बाद दोनों की लाशे ही निकली। इस हादसे में एक परिवार का एकलौता चिराग बुझ गया, वहीं एक परिवार में सबसे बड़ी उम्मीदें भी बिखर गई। अब जो होना था सो हो गया। इसे लापरवाही कहें, हादसा या चूक कहें, लेकिन आगे किसी के साथ ऐसे हादसे न हों, इस दिशा में सतर्क होना भी जरूरी है। जिले में कई ऐसे पिकनिक स्पॉट है और इन पिकनिक स्पॉट के खूबसूरत नजारे आपको आकर्षित जरूर करेंगे। देवरी का पिकनिक स्पॉट हसदेव नदी के तट पर है और यहां खतरा सिर्फ नदी में उतरकर चट्टानों में जाने और फंसकर फिसल जाने का है। जगह-जगह मौजूद चट्टानें आपको कभी भी हादसों का शिकार बना सकते हैं, इसलिए कोशिश करिये कि आपके बच्चे ऐसी जगहों में न जाए, उसके लिए सचेत रहे। 

ऐसी जगहों में कुछ सुरक्षा के इंतजाम व सावधानी और सतर्कता आपके खतरे को टालने में बहुत हद तक मददगार बन सकते हैं। खूबसूरती के अनगिनत और दूर-दूर तक फैले सभी स्थलों तक शासन-प्रशासन किसी को तैनात कर पाए, यह भी संभव नहीं है। आप जहां भी जाए तो आसपास के मनोरम दृश्य को देखे। शांत वातावरण में कलकल, झर-झर बहती पानी की आवाज तो उनकी तरंगों को सुने, बादलों के साथ नीले आसमानों की पानी में बनती तस्वीरों को देखे, चमकते चट्टानों को हीरे के चमक के रूप में दूर से देखे। पक्षियों की चहचहाहट, कलरव को सुने। दूर तक फैले रेत में नंगे पांव चले। गुनगुनी धूप का आंनद लें और कभी धूप लगने पर पेड़ों की छांव में बैठकर देखे। कुछ देर खुद को यहां चलती हवाओं के साथ महसूस करके देखेंगे तो निःसंदेह प्रकृति का अनुपम दृश्य आपकों भावविभोर कर देंगे। प्रकृति ने नदी व पहाड़, झरने, जंगल का मनोरम दृश्य आपके हृदय में खूबसूरती और सुकून का भाव उत्पन्न करने के लिए दिए हैं, न कि ऐसे जगहों में जाकर जोखिम लेने और जिंदगी गंवा देने के लिए दिए हैं।

एथनिक रिसॉर्ट शुरू होने से मैनपाट में होम स्टे को मिलेगा बढ़ावा- पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन, लोक निर्माण, गृह, जेल एवं धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू के मुख्य आतिथ्य एवं खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में शुक्रवार को मैनपाट के कमलेश्वरपुर में आयोजित समारोह में करमा एथनिक रिसॉर्ट व जोहर मोटल सोनतराई का लोकार्पण हुआ। समारोह का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा राजगीत के साथ किया गया। 


स्वदेश दर्शन योजना अंतर्गत 21 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित करमा एथनिक रिसॉर्ट में पर्यटकों को ठहरने की सुविधा के साथ यहां की जनजातीय परंपरा, स्थानीय एवं तिब्बती संस्कृति को करीब से जानने समझने का मौका मिलेगा। इस अवसर पर अतिथियों ने एथनिक रिसॉर्ट का भ्रमण कर अवलोकन भी किया। समारोह को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि करमा एथनिक रिसॉर्ट के लोकार्पण से मैनपाट में पर्यटकों की सुविधाओं के विस्तार में एक और कड़ी जुड़ गई जो पर्यटन विकास में एक अच्छा आयाम साबित होगा।

इस रिसॉर्ट के शुरू होने से पर्यटक यहां रुकेंगे जिससे मैनपाट में होम स्टे को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। यहाँ के हस्तशिल्प को मार्केट मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम इस रिसॉर्ट के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति को नजदीक से देखने का मौका देना चाहते हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल प्रदेश में पर्यटन सुविधा बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। अब तो प्रदेश में पर्यटन नीति भी बन चुकी है जिससे पर्यटन एक उद्योग के रूप में स्थापित हो सकती है। जो भी इस क्षेत्र में काम करना चाहेंगे उन्हें सुविधा दी जाएगी।

इस मौके पर खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा की आज मैनपाट के विकास और सुविधा में एक और अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सोच के अनुसार प्रदेश में पर्यटन को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैनपाट की खूबसूरती इतनी है कि मैनपाट का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। यहाँ की खूबसूरती, हरियाली, संस्कृति एक धरोहर है जिसे बचा कर रखना है। उन्होंने कहा कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता तथा पर्यटन स्थलों का विकास होगा तो पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। सभी पर्यटन पॉइंट तक पहुंच मार्ग दुरुस्त करना होगा।

संसदीय सचिव एवं रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि  मैनपाट की अपनी प्राकृतिक छटा के कारण अलग पहचान है। छत्तीसगढ़ में कुदरत की अपार आशीर्वाद है। प्राकृतिक संसाधन भरपूर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सोच के अनुसार प्रदेश को सुंदर बनाने का काम जारी है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव ने कहा कि मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। मैनपाट प्रदेश के अन्य हिल स्टेशन से अलग है। यहां की जलजली और उल्टा पानी देश दुनिया मे अनूठा है। प्रदेश में पर्यटन सर्किट बनाया जाएगा रायपुर से उत्तर की ओर सतरेंगा, मैनपाट और जशपुर को जोड़ा जाएगा जो पर्यटको के लिए 3 रात व 4 दिन का पूरा पैकेज होगा।

इस अवसर पर सीजीएमएससी के अध्यक्ष व लुण्ड्रा विधायक डॉ प्रीतम राम, खाद्य आयोग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बाबरा, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष शफी अहमद,  बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वन समिति के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, तेल घानी बोर्ड के सदस्य लक्ष्मी गुप्ता, पर्यटन मंडल की उपाध्यक्ष श्रीमती चित्ररेखा साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

सरायपाली के शिशुपाल पहाड़ को मिलेगी नई पहचान: पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा

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रायपुर। मुख्यमंत्री बघेल की एक मंज़ूरी से जल्द ही सरायपाली को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलने वाली है।आज सरायपाली वासियों से भेंट मुलाक़ात करने पहुँचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिशुपाल पर्वत को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने की घोषणा की। उनके घोषणा करते ही उपस्थित स्थानीय ज़नो ने ज़ोरदार तालियाँ बजाकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। अब इस पहाड़ पर ट्रैकिंग, पर्यटकों के लिए कई मूल भूत सुविधाओं को स्थापित करने का रास्ता खुल गया है। अंग्रेजो के जमाने से इलाक़े की पहचान रहे इस पहाड़ को पर्यटन के लिए विकसित करने से सरायपाली को नई पहचान मिलेगी। छतीसगढ़ में पर्यटन से स्थानीय स्तर पर रोज़गार को बढ़ावा देने की नीति से यहाँ के युवाओं के लिए आमदनी के नए अवसर बनेंगे। राज्य ही नहीं दूसरे प्रदेशों से भी पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों को भी अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों से लोगों को अवगत कराने का मौक़ा मिलेगा।



अभी भी सरायपाली का शिशुपाल पर्वत ट्रैकिंग का नया प्वाइंट बना हुआ है। शनिवार और रविवार को यहां पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। बताया जाता है कि इसी पहाड़ के ऊपर किसी समय राजा शिशुपाल का महल हुआ करता था। जब राजा को अंग्रेजो ने घेर लिया तब राजा ने अपने घोड़े की आंख पर पट्टी बांधकर पहाड़ से छलांग लगा दी थी। इसी कारण इस पहाड़ को शिशुपाल पर्वत और यहां के झरने को घोड़ाधार जलप्रपात कहा जाता है। ये राजधानी रायपुर से करीब 157 किमी की दूरी पर और सरायपाली से 30 किमी की दूरी पर स्थित पर्यटन स्थल शिशुपाल पर्वत स्थित है। समुद्र तल से शिशुपाल पर्वत की ऊंचाई करीब 900 फीट है। शिशुपाल पर्वत के ऊपर पहुंचने पर बड़ा सा मैदान है, जहां से बारिश के दिनों में पानी घोड़ाधार जलप्रपात के रूप में करीब 1100 फीट नीचे गिरता है।

विशेष लेख : विश्व पर्यटन दिवस : देश के पर्यटन नक्शे में तेजी से उभर रहा है छत्तीसगढ़

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रायपुर। पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। छत्तीसगढ़ की धरती वन और खनिज संपदा से भरपूर तो है ही इसके साथ ही यहां की कला, संस्कृति और पर्यटन स्थल भी आकर्षण के केन्द्र है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू के मार्गनिर्देशन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास एवं पर्यटकों की गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि कोविड महामारी के दौर से उबरने के बाद छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 



वर्ष 2021 में भारतीय और विदेशी मिलाकर 1 करोड़ 15 लाख 32 हजार सैलानियों ने छत्तीसगढ़ का भ्रमण किया है। छत्तीसगढ़ एक ऐसी पवित्र भूमि है, जहां वनवास काल में भगवान राम के चरण उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से दक्षिण में सुकमा जिले के कोंटा तक पड़े। उत्तर से दक्षिण तक सात सौ किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला  विविध प्रकार के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे हुए हैं। यहां की धरती वन, वन्यजीव, नदी, पर्वत-पहाड़ और झरनों जैसी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

उत्तर के पाट क्षेत्र से दक्षिण की पहाडियों तक प्रकृति द्वारा उकेरे अनेक रमणीय प्राकृतिक स्थल और अनुपम सौंदर्य इस राज्य को प्रकृति का वरदान है। भौगोलिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत को धारण किये इस छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं, यहां के प्राचीन विरासत ,धार्मिक स्थल और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को सुखद अनूभूति देते हैं। छत्तीसगढ़ में सिरपुर, भोरमदेव जैसे कई ऐसे पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व के स्थल है जो वास्तुकौशल की कला का अनुपम उदाहरण है। यहां के वास्तु सौंदर्य अपनी अद्भुत रचनात्मकता के कारण घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं।



छत्तीसगढ़ में अनगिनत ऐसे रमणीय प्राकृतिक स्थल विद्यमान हैं जो पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा बीते कुछ समय में राज्य के दुर्गम ईलाकों में कुछ नये प्राकृतिक स्थलों की पहचान भी की गई है जिनके विकास के प्रयास किये जा रहे हैं।इन पर्यटन स्थलों में पर्यटन की दृष्टि से नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दिशा निर्देश पर राज्य भर के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास किया जा रहा है। 

यहां के पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने बहुआयामी विकास की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। जनजातीय अंचल की प्राकृतिक एवं कला-संस्कृति कों विश्वपटल पर लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा से ग्रामीण पर्यटन का  विकास किया जा रहा है। इन स्थलों में खान-पान एवं आवास की सुविधा युक्त होटल, मोटल ,रिसार्ट एवं रेस्टोरेंट की सुविधा विकसित की जा रही है। भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़, राम नाम की महिमा यहां की संस्कृति में रची बसी हुई है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जब किसी से मिला जाता है तो राम नाम से संबोधन किया जाता है। यहां के कण-कण में राम का नाम बसा है। यहीं भगवान राम की माता ‘‘ माता कौशल्या‘‘ का पूरे विश्व का एकमात्र मंदिर स्थित है। राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी स्थान पर यह मंदिर स्थित है। इस स्थान की महिमा और जनमानस में बसी भगवान राम की आस्था को देखकर राज्य सरकार द्वारा चंदखुरी का विकास पौराणिक कथाओं में दर्शाए गए वातावरण के अनुसार किया जा रहा है। वनवास के दौरान भगवान का राम के चरण जिस-जिस स्थान पर पड़े उन राममय क्षेत्र का विकास ‘‘ राम वनगमन पर्यटन परिपथ विकास परियोजना‘‘ के माध्यम से किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया  है। प्रथम चरण में 9 स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया)रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) में राम वनगमन पर्यटन परिपथके रूप में नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पूरे परिसर का सैांदर्यीकरण भी किया जा रहा है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है जिसका  निर्माण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, पानी, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा कार्य किया जा रहा है।

राज्य के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर माता बम्लेश्वरी देवी विराजमान है। यह पहाड़ी राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ नगर में स्थित है। माँ बम्लेश्वरी की इस नगरी डोंगरगढ़ को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत् डोंगरगढ़ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में व्यवस्थित विकास का काम हाथ में लिया गया है। यहां श्राद्धालुओं के लिए ‘‘श्रीयंत्र‘‘ के बनावट के अनुरूप पिलग्रिम एक्टिविटी सेंटर (श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केन्द्र) का निर्माण  किया जा रहा है।स्वदेश दर्शन योजना के तहत् छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर ट्राइबल टूरिज्म सर्किट' विकसित की जा रही है। 

इस परियोजना के तहत् जशपुर ,कुनकुरी ,मैनपाट, कमलेश्वरपुर, महेशपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथियानवागांव, कोण्डागांव, जगदलपुर, चित्रकोट और तीरथगढ़ को विकसित किया जा रहा है। इनमें से कुरदर हिल ईको रिसॉर्ट कुरदर (बिलासपुर), बैगा एथनिक रिसॉर्ट सरोधादादर (कबीरधाम), धनकुल एथनिक रिसॉर्ट (कोण्डागांव), सरना एथनिक रिसॉर्ट बालाछापर (जशपुर), कोईनार हाइवे ट्रीट कुनकुरी (जशपुर), हिल मैना हाईवे ट्रीट नथियानवागांव (कांकेर), सतरेंगा बोट क्लब एंड रिसॉर्ट सतरेंगा (कोरबा) और वे साइड अमेनिटी महेशपुर (सरगुजा) में पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं।

पर्यटकों की सुविधा के लिए उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थानों पर एथनिक रिसॉर्ट, कॉटेज,वॉटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य प्राणी अभ्यारण्यों के साथ-साथ गौरवशाली लोक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण भी है। बस्तर क्षेत्र में कुटुमसर गुफा एवं कांगेर घाटी, राष्ट्रीय उद्यान, चित्रकोट जलप्रपात महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो अपनी अद्भुत छटा के कारण पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के बारे में पर्यटकों को सुलभ जानकारी उपलब्घ कराने तथा पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए व्यक्तिगत एवं टूर पैकेज के अन्तर्गत आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा नई दिल्ली, गुजरात मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रदेश में 11 स्थानों पर पर्यटन सूचना केन्द्र स्थापित किया गया है।

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