Media24Media.com: परिवहन मंत्री

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label परिवहन मंत्री. Show all posts
Showing posts with label परिवहन मंत्री. Show all posts

मुख्यमंत्री साय की पहल से छत्तीसगढ़ को मिली 600 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ की अधोसंरचना को रफ्तार देने के लिए आज एक अहम क़दम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही केन्द्रीय सड़क निधि (CRF) के तहत 600 करोड़ रुपये की मंज़ूरी। इसके ज़रिए छत्तीसगढ़ में कई सड़कों के निर्माण और उन्नयन का रास्ता साफ़ हुआ है।

इसके साथ ही स्टेट कैपिटल रीजन के अंतर्गत आने वाले दो लेन मार्ग को चार लेन में अपग्रेड करने की योजना को भी मंजूरी मिली है।

रायपुर शहर की भीड़भाड़ को कम करने के लिए चार बड़े ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनका भूमि पूजन शीघ्र ही होगा। वहीं, राजधानी रायपुर से अन्य ज़िलों तक की सड़कें दो लेन से चार लेन में बदली जाएंगी, जिससे आवागमन तेज़ और सुरक्षित हो जाएगा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य की सभी सड़क योजनाएं अब केंद्र के ‘गति शक्ति पोर्टल’ के ज़रिए भेजी जाएंगी, ताकि जल्द मंजूरी मिल सके। श्री गडकरी ने रायपुर (आरंग)-बिलासपुर (दर्री) के बीच करीब 95 किमी लंबी छह लेन सड़क के लिए डीपीआर भेजने को कहा, जो औद्योगिक, कृषि और शैक्षिक क्षेत्रों को जोड़ेगी। साथ ही, नागपुर से रायपुर तक प्रस्तावित 300 किमी लंबा समृद्धि एक्सप्रेसवे पर भी शीघ्र डीपीआर मांगा गया है।

इसके अलावा कुछ ज़रूरी योजनाओं को आज मंजूरी भी मिल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 ए में उन्नयन कार्य, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 में रेजिंग का कार्य एवं राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 में मजबूतीकरण के कुल 115.95 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली है।

इनमें बिलासपुर शहर के भीतर 15 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शामिल है, जिससे शहर में ट्रैफिक आसान होगा। कटनी-गुमला मार्ग के हिस्से में 11 किलोमीटर सड़क बनेगी जो गांवों को जोड़ने में मदद करेगी। वहीं, केशकाल के 4 किलोमीटर हिस्से की सड़क को मज़बूत किया जाएगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी।

वहीं, इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 7000 करोड़ से ऊपर के नियोजित कार्यो की वित्तीय स्वीकृति को भी शीघ्र करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़कें केवल यात्रा का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, रोज़गार और सामाजिक बदलाव का रास्ता हैं। अँजोर विजन 2047’ के तहत छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर नागरिक तक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन पहुंचे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।





छत्तीसगढ़ में 01 वर्ष में मोटरयानों के पंजीयन में लगभग एक तिहाई की वृद्धि

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में प्रदेश में परिवहन विभाग द्वारा सुगम यातायात व्यवस्था सहित जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए निरंतर नवाचारी पहल जारी है। इस तारतम्य में वाहनों की खरीद-बिक्री की सुविधा के फलस्वरूप प्रदेश में लगातार मोटरयानों के पंजीयन की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रदेश में अगस्त 2022 में 30,236 मोटरयानों का पंजीयन हुआ था, वहीं अगस्त 2023 तक 39,509 मोटरयानों का पंजीयन हो चुका है। वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2023 में मोटरयानों के पंजीयन में लगभग एक तिहाई अर्थात् 30.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

आयुक्त परिवहन दीपांशु काबरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में अगस्त 2022 से अगस्त 2023 तक रायपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंतर्गत सबसे ज्यादा 8,143 मोटरयानों का पंजीयन हुआ। इनमें सरगुजा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंतर्गत 1,710, बिलासपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंतर्गत 3,213, दुर्ग क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंतर्गत 3,515, जगदलपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अंतर्गत 1,169 मोटरयानों का पंजीयन हुआ है। इन वाहनों में ट्रैक्टर, एम्बुलेंस, बस, ई-रिक्शा, माल वाहक, हारवेस्टर, टैक्सी (कैब), मोटरसाइकिल, भारी वाहन आदि मोटरयान शामिल हैं।

इसी तरह जिला परिवहन कार्यालय अंतर्गत बैकुंठपुर में 637, बालोद में 724, बलोदाबाजार-भाटापारा में 1,178, बलरामपुर में 593, बेमेतरा में 641, बीजापुर में 264, दंतेवाड़ा में 389, धमतरी में 1,090, गरियाबंद में 479, गौरेला-पेंड्रा-मारवाही में 325, जांजगीर-चांपा में 1,917, जशपुर में 958, कांकेर में 1,147, कवर्धा में 961, कांेडागांव में 738, कोरबा में 2,084, महासमुंद में 1,409, मुंगेली में 660, नारायणपुर में 225, राजनांदगांव में 1,999, सुकमा में 245, सूरजपुर में 559 और रायगढ़ में 2,537 मोटरयानों का पंजीयन हुआ है।

छत्तीसगढ़ में अब ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित 06 सेवाओं के लिए आरटीओ कार्यालय आने की अनिवार्यता ख़त्म

No comments Document Thumbnail

रायपुर। परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशों के परिपालन में परिवहन विभाग ने छत्तीसगढ़ में अब ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराने, ड्राइविंग लाइसेंस में पता परिवर्तन कराने, ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड ख़राब हो जाने, ड्राइविंग लाइसेंस को सरेंडर करने के लिये परिवहन कार्यालय आने की अनिवार्यता ख़त्म कर दी है। तकनीकी रूप से समाधान निकालते हुए ऐसे सभी आवेदन जो आधार प्रमाणीकरण के साथ आवेदन कर रहे हैं, उन आवेदनों का सॉफ़्टवेयर के द्वारा स्वतः ही ऑटो अप्रूवल हो जायेगा। जिससे आरटीओ स्टाफ का वेरिफिकेशन और आरटीओ की अप्रूवल की आवश्यकता नहीं होगी। ऑटो अप्रूवल होते ही आवेदक के मोबाइल में एसएमएस आ जाएगा और अगले दिन ड्राइविंग लाइसेंस को स्पीड पोस्ट से आवेदक के दिए गए पते पर भेज दिया जाएगा।

परिवहन सचिव एस. प्रकाश ने राज्य में विभिन्न तरह के वाहनों पर ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराने, ड्राइविंग लाइसेंस में पता परिवर्तन कराने, ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड ख़राब हो जाने, ड्राइविंग लाइसेंस को सरेंडर करने के लिये परिवहन विभाग के नये फ़ॉर्मेट में फत् कोड आधारित ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए नवीन तकनीकी का उपयोग करते हुए आम जनता को सुविधा मुहैया कराने की पहल की गई है, जिसका लाभ लेकर ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित 06 सेवाओं के लिए आरटीओ कार्यालय आने की अनिवार्यता ख़त्म हो गई हैं। आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आम जनता घर बैठे या परिवहन सुविधा केंद्र के माध्यम से इन 06 सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।

परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा ने बताया कि परिवहन सुविधा केंद्रों के माध्यम से जनता को दी जा रही सुविधाआंे में विस्तार किया जा रहा है ताकि जनता को घर बैठे परिवहन विभाग की सुविधाएं -ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराने, ड्राइविंग लाइसेंस में पता परिवर्तन कराने, ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड ख़राब हो जाने, ड्राइविंग लाइसेंस को सरेंडर करने के लिए परिवहन कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि विधिक कार्यों हेतु ड्राइविंग लाइसेंस का एक्सट्रैक्ट प्राप्त करने, किसी क्लास ऑफ़ व्हीकल के ड्राइविंग लाइसेंस को सरेंडर करने के लिये परिवहन कार्यालय आने की अनिवार्यता ख़त्म कर दी गई है। अब ये सभी कार्य घर से या परिवहन सुविधा केंद्र से किए जा सकेंगे। बिना कार्यालय आये इन सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार प्रमाणीकरण करना होगा। वर्तमान में इन सुविधाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन कर सारे दस्तावेज अपलोड करना पड़ता था और ऑनलाइन फ़ीस का भुगतान कर आरटीओ कार्यालय में आना पड़ता था, कार्यालय में स्टाफ के द्वारा समस्त दस्तावेज का वेरिफ़िकेशन किया जाता था उसके बाद ही आरटीओ के द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस को अप्रूव किया जाता था।

परिवहन आयुक्त ने बताया कि पूर्व में आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा भी आवेदकों को प्रदान की गई थी, जिसके तहत आवेदन को आधार के माध्यम से प्रमाणीकरण कराया जाता है तो आरटीओ कार्यालय आने की अनिवार्यता नहीं थी। परंतु ऐसे आधार प्रमाणित प्रकरण में भी आरटीओ स्टाफ़ के द्वारा वेरिफिकेशन और आरटीओ के द्वारा अप्रूवल किया जाता था। इस प्रक्रिया में शासन की मंशा थी कि लोगों को घर पहुँच सुविधा मिले परंतु डेटा एनालिसिस करने में यह पता चला कि आधार ऑथेंटिकेशन करने के बाद भी, आरटीओ कार्यालय में पूर्ण रूप से आधार ऑथेंटिकेटेड आवेदनों को वेरिफिकेशन के नाम से रोक दिया जाता था और तब तक अप्रूवल नहीं किया जाता था जब तक आवेदक के द्वारा कार्यालय में संपर्क नहीं किया जाता है।

इन समस्यों का तकनीकी रूप से समाधान निकालते हुए ऐसे सभी आवेदन जो आधार प्रमाणीकरण के साथ आवेदन कर रहे हैं, उन आवेदनों का सॉफ़्टवेयर के द्वारा स्वतः ही ऑटो अप्रूवल हो जायेगा, जिससे आरटीओ स्टाफ का वेरिफिकेशन और आरटीओ के अप्रूवल की आवश्यकता नहीं होगी। ऑटो अप्रूवल के कार्य में कोई भी मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा और यह आवेदन करते ही तत्काल अप्रूव हो जाएगा। ऑटो अप्रूवल होते ही आवेदक के मोबाइल में एसएमएस आ जाएगा और अगले दिन ड्राइविंग लाइसेंस को स्पीड पोस्ट से आवेदक के दिये गये पते में स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिया जाएगा। आवेदक को एसएमएस और वाट्सऐप के माध्यम से सूचना दी जाएगी।

सूचना में ड्राइविंग लाइसेंस और स्पीड पोस्ट के ट्रैकिंग आईडी संबंधित विवरण होंगे, जिससे कि आवेदक पोस्ट ऑफिस में ड्राइविंग लाइसेंस पहुँचने की स्थिति पता कर सकेगा। परिवहन आयुक्त ने बताया कि आधार एथेंटेकेशन के द्वारा आवेदन कर ऑटो अप्रूवल की सुविधा का लाभ उठाने के लिये आवेदक के पास आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है। आधार की जानकारी को ड्राइविंग लाइसेंस से लिंक करने के लिए आधार प्रमाणीकरण करना होगा जो आवेदक स्वयं ओटीपी के माध्यम से कर सकता है या किसी भी निकट परिवहन सुविधा केंद्र में जाकर बायोमेट्रिक देकर भी कर सकता है।

आधार ऑथेंटिकेशन के तहत आवेदन करने से आवेदक को दस्तावेज अपलोड करने की भी आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि आधार से समस्त जानकारी प्राप्त हो जाएगी।यदि आवेदक का उम्र 40 वर्ष से अधिक है, तो ऐसे प्रकरण में आवेदक को परिवहन विभाग में पंजीकृत एमबीबीएस डॉक्टर से फॉर्म 1। में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाना होगा। मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने की पूर्ण प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी। इसमें डॉक्टर के द्वारा परिवहन विभाग के पोर्टल में सीधे एंट्री कर दी जाती है और किसी फिजिकल पेपर की आवश्यकता नहीं होती है।

राज्य सरकार खरीदती है किसानों का धान, ऋण लेकर करती है भुगतान

No comments Document Thumbnail

रायपुर। वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि धान खरीदी राज्य सरकार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी करती है और बैंको से ऋण लेकर भुगतान करती है। केन्द्र सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए कोई अनुदान, सहायता अथवा ऋण नहीं दी जाती। धान खरीदी का एक सिस्टम है, 

राज्य सरकार किसानों से धान खरीदी करती है फिर कस्टम मिलिंग के बाद सेन्ट्रल पूल में चावल जमा किया जाता है। उसके बाद केन्द्र सरकार द्वारा जमा चावल के एवज में निर्धारित दर पर भुगतान किया जाता है। वर्ष 2023-24 में 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है। उन्होंने बताया कि किसानों से अब तक 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जा रही थी, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का निर्णय लिया है।

मंत्री अकबर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बारे में बताया कि धान खरीदी राज्य सरकार की सबसे बड़ी योजना है। धान खरीदी के लिए राज्य सरकार प्रतिवर्ष 20 से 25 हजार करोड़ रूपए का ऋण लेती है। यह ऋण छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के माध्यम से बैंको एवं नाबार्ड इत्यादि से लिया जाता है। धान खरीदी के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को कोई सहायता नहीं दी जाती और न ही कोई अनुदान या ऋण दिया जाता है। बैंकों एवं नाबार्ड से ऋण राज्य सरकार की गारंटी पर दिया जाता है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जहां हमारी सरकार बनने के बाद से किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीद के साथ ही प्रतिपूर्ति के रूप में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् अतिरिक्त राशि प्रदान की जाती है। इस तरह किसानों को धान की कीमत 2500 रूपये प्रति क्विंटल मिल रही है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना में दी जाती है 9000 रूपये प्रति एकड़ अनुदान राशि

धान खरीदी के बारे में राज्य सरकार की ओर से जानकारी देते हुए मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार की नीति और फैसलों से छत्तीसगढ़ के किसानों का जीवन खुशहाल हो रहा है। हमने किसानों को 2500 रूपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य देने का जो वादा किया था, उसे निभाकर अपने वायदे के अनुरूप किसानों को राज्य सरकार राशि प्रदान कर रही है। सहकारी समितियों में धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य के अलावा 9000 रूपये प्रति एकड़ की दर से 04 किस्तों में प्रदान किया जा रहा है। किसानों को प्रथम किस्त के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई, उनकी जयंती 20 अगस्त पर द्वितीय किस्त तथा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 01 नवंबर को तृतीय किस्त और वित्तीय वर्ष की समाप्ति की तिथि 31 मार्च को किसानों को किसान न्याय योजना की चतुर्थ किस्त की राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि मिलाकर प्रति क्विटल 2640 रूपए की दर से भुगतान किया गया है।

किसानों को सोसायटियों के जरिए किया जाता है भुगतान

मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने धान उत्पादक किसानों की सुविधा के लिए सेवा सहकारी समितियों की संख्या 1333 से बढ़ाकर 2058 कर दी है। धान बेचने वाले किसानों को धान की राशि का चेक छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। धान बेचने वाले किसानों का पंजीयन छत्तीसगढ़ सरकार के छत्तीसगढ़ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाता है ।

किसान खुशहाल, लगातार बढ़ रही है धान की खरीदी

मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों को दिये जा रहे प्रोत्साहन के फलस्वरूप धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या तथा धान का रकबा लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों द्वारा बेचे जाने वाले धान की मात्रा भी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या 18.96 लाख से बढ़कर 29.97 लाख हो गई है। धान का रकबा 24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 32 लाख हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 92 लाख मीट्रिक टन् वर्ष 2022-23 में 107 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। वर्ष 2023-24 में 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है। मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि किसानों से अब तक 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जा रही थी जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार धान खरीदी के ऋण का करती है भुगतान

मंत्री अकबर ने बताया कि राज्य सरकार जो धान खरीदती है उसका परिवहन कराकर राईस मिलों के माध्यम से कस्टम मिलिंग का कार्य कराती है। कस्टम मिलिंग के बाद जो चावल प्राप्त होता है उसे भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के साथ साथ नागरिक आपूर्ति निगम में जमा कराती है। राज्य सरकार जो चावल एफ. सी. आई. व आपूर्ति निगम में जमा कराती है उसका ही भुगतान केन्द्र सरकार से प्राप्त होता है। धान खरीदने के लिए केन्द्र सरकार से कोई राशि प्राप्त नहीं होती।

इसी तरह राज्य सरकार धान खरीदते समय बैंकों एवं अन्य संस्थाओं से जो ऋण लेती है उसका मूलधन व ब्याज की राशि भी राज्य सरकार द्वारा ही जमा की जाती है। मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने कुल 19,209 करोड रुपये का ऋण धान खरीदी के लिए लिया था, जिसमें एन.सी.डी.सी. से 8500 करोड़, नाबार्ड से 4000 करोड़, इंडियन बैंक से 1599 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक से 1110 करोड़, बैंक आफ इंडिया से 2000 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा से 2000 करोड़ रूपये का लिया गया ऋण शामिल है।

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने वाहन के मूल्य का 10 प्रतिशत सब्सिडी : परिवहन मंत्री अकबर

No comments Document Thumbnail

रायपुर। परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने आज इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 के तहत राज्य भर के 404 हितग्राहियों को 80 लाख 37 हजार 128 रूपए की राशि के सब्सिडी का वितरण किया। उन्होंने इसका वितरण कर हितग्राहियों को बधाई दी और कहा कि छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप हर संभव पहल की जा रही है। परिवहन मंत्री अकबर ने इस अवसर पर बताया कि कोई भी व्यक्ति जो इलेक्ट्रिक व्हीकल ख़रीदता है, वह राज्य शासन से सब्सिडी प्राप्त कर सकता है। इसके लिए वाहन विक्रेता डीलर को अपना अकाउंट नंबर और आईएफ़एस कोड देना होगा।



वाहन के मूल्य का 10 प्रतिशत जो अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है इलेक्ट्रिक वाहन क्रेता के  खाते में परिवहन विभाग  द्वारा सीधे हस्तांतरित किए जाएँगे। इस अवसर पर सचिव परिवहन एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त दीपांशु काबरा, संयुक्त परिवहन आयुक्त वेदव्रत सिरमौर, आरटीओ रायपुर शैलाभ साहू तथा साइंटिस्ट अमित देवांगन उपस्थित थे। परिवहन मंत्री अकबर ने कहा कि वर्तमान में वायु प्रदूषण की वैश्विक समस्या के मद्देनजर अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है।

इसके मद्देनजर छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधी मिशन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है। इस तारतम्य में ग्राहकों को इलेक्ट्रिक वाहन की ओर आकर्षित करने के लिए सब्सिडी का वितरण किया जा रहा है, जो निरंतर जारी रहेगा। परिवहन मंत्री अकबर ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ में वाहनों के संचालन हेतु पेट्रोल तथा डीजल का उपयोग किया जा रहा है। जिसकी पूर्ति के लिए अन्य देशों पर निर्भरता बनी हुई है तथा समय के साथ लगातार इनके मूल्यों में भी वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति में इलेक्ट्रिक वाहन एक अच्छे विकल्प के रूप में उभर कर आया है। इसे हमें अधिक से अधिक अपनाने की जरूरत है।



उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए लोगों को विभिन्न सुविधाएं तथा आवश्यक मदद पहुंचाई जा रही है। इस दौरान ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन के पदाधिकारी के द्वारा सरकार के  पहल की तारीफ़ की गई और बताया गया की पूरे देश में हाइब्रिड वाहनो में भी सब्सिडी देने वाला छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है। परिवहन मंत्री अकबर ने कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़े अध्यक्ष चेम्बर ऑफ कामर्स अमर परवानी, अध्यक्ष एफ.ए.डी.ए. मनीष सिंघानिया, अध्यक्ष आर.ए.डी.ए विवेक गर्ग तथा अनिल अग्रवाल एवं अन्य ऑटोमोबाइल डीलर और हितग्राहियों से भी चर्चा की।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.