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छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम : मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर-अंबिकापुर-बिलासपुर हवाई सेवा का स्वामी विवेकानंद विमानतल पर आज शुभारंभ किया।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि आज छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रायपुर-अंबिकापुर-बिलासपुर विमान सेवा का शुभारंभ हमारे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के विस्तार का प्रतीक है। इस सेवा का आरंभिक किराया मात्र 999 रुपये है, जो यह सुनिश्चित करता है कि आम जनता भी हवाई यात्रा का लाभ उठा सके।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में जो परिवर्तन आया है, उसका यह एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा था कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज की सवारी करेगा और आज वह सपना साकार हो रहा है। सरगुजा और बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों की एयर कनेक्टिविटी से न केवल नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि इन क्षेत्रों में टूरिज्म और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। राज्य सरकार ने 80 करोड़ की लागत  से अंबिकापुर के एयरपोर्ट का विकास किया हैl माँ महामाया एयरपोर्ट, अंबिकापुर को थ्री सी वीएफआर श्रेणी का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। यह एयरपोर्ट 72-सीटर एटीआर-72 विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अंबिकापुर को वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, दिल्ली और कोलकाता से जोड़ने की योजना पर भी काम जारी है।हमारे छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरें, और इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व, रामगढ़ की पहाड़ियां, और एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात जैसे स्थलों तक अब देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही, एयर कनेक्टिविटी के विस्तार से निवेश का माहौल भी बेहतर होगा। हमारी सरकार ने नई उद्योग नीति में होम स्टे और रिसॉर्ट्स जैसे उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। हमारी कोशिश है कि अगले चार वर्षों में छत्तीसगढ़ को विमानन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नया साल आने वाला है, और मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इस नई विमान सेवा का लाभ उठाएं और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें। फ्लाई बिग चार्टर कंपनी 19-सीटर ट्विन औटर विमानों के माध्यम से इन शहरों के लिए सेवाएं देगी।  

विमान टेकऑफ़ को वाटर सेल्यूट दिया गया। आज प्रारंभ हुई विमान सेवा के पहले यात्री के रूप में सांसद चिंतामणि महाराज सपत्नीक सवार हुए, जिनको मुख्यमंत्री साय ने बोर्डिंग पास देकर कहा कि आज आपने इतिहास बना दिया। आप इस रूट के पहले यात्री है, आपको शुभकामनाएं।  इस अवसर विधायक राजेश अग्रवाल, प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो, मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजु, संचालक विमानन विभाग संजीव झा, फ्लाई बिग कंपनी के सीएमडी संजय मांडविया उपस्थित थे।

वन भूमि को बेजा कब्जा से मुक्त कराने कार्रवाई जारी

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रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर राज्य में वन भूमि से बेजा कब्जा खाली कराने तथा वन्य अपराध की रोकथाम के लिए वन विभाग की उड़नदस्ता टीमों के साथ-साथ विभागीय अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रहे है।

जगदलपुर के अंतर्गत वन परिक्षेत्र भानपुरी में वन भूमि में बेजा कब्जा कर खेती करने के मामले में 23 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला दर्ज करने के साथ ही 26 एकड़ 29 डिसमिल वन भूमि में विभिन्न प्रकार की खड़ी फसलों सहित चैनलिंक, फेंसिंग खुटा, बारवेेड वायर आदि जब्त किया गया है। उड़नदस्ता टीम द्वारा यह कार्रवाई भानपुरी परिक्षेत्र में वन भूमि पर बेजा खेती किए जाने की शिकायत मिलने पर जगदलपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक आर.सी. दुग्गा एवं वनमण्डलाधिकारी बस्तर उत्तम गुप्ता के मार्गदर्शन में उड़नदस्ता टीमों ने दबिश दी और वन भूमि पर बेजा खेती करने का मामला सामने आने पर 23 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला कायम कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की कार्रवाई की है।

राज्य स्तरीय उड़न दस्ता टीम ने भानपुरी वन परिक्षेत्र के चपका कक्ष में तीन व्यक्तियों द्वारा 1.81 एकड़ भूमि पर बेजा कब्जा कर मिर्ची एवं धान की खेती किए जाने का मामला पकड़ में आने पर फसल की जब्ती के साथ ही विकास देवांगन पिता अनिल देवांगन, राजू पिता सोमारू, तुलसी पिता मीठू के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया है। उड़नदस्ता टीम ने यहां से 8 बंडल चैनलिंक एवं 73 नग बांस का फेंसिंग खुंटा भी जब्त किया है।

वृत्त स्तरीय उड़न दस्ता टीम जगदलपुर ने ग्राम मुरकुची में 20 अतिक्रमणकारी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुये 24.47 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण कर मक्का और उड़द की खड़ी करने वाले 20 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला दर्ज करने के साथ ही उनके पास से 10 बंडल फेंसिंग तार एवं 300 नग फेंसिंग खूंटा जब्त किया। वन भूमि पर बेजा कब्जा कर खेती करने के मामले में जिनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया गया हैं, उनमें ग्राम मुरूकुची निवासी डमरू, फूलसिंग एवं पांच अन्य, सुरेश एवं तीन अन्य, केलूराम एवं पांच अन्य तथा रूपनाथ एवं तीन अन्य व्यक्ति शामिल है।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने हेतु नवीन कृषि अनुसंधानों की जरूरत : डॉ. चंदेल

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रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की समक्ष एक बहुत बडी चुनौती है जिसका पर्यावरण, पारिस्थितिकीतंत्र तथा सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था पर गहन प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानव सहित जीव-जन्तुओं की सभी प्रजातियां प्रभावित हो रही है तथा पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। बढ़ते तापमान, घटती वर्षा तथा मौसमचक्र में परिवर्तन से फसलों का उत्पादन कम होने की आशंका है। 

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को नये अनुसंधान कर विभिन्न फसलों की जलवायु लचीली नवीन किस्मों का विकास करना होगा। डॉ. चंदेल आज कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभा कक्ष में आयोजित 6 दिवसीय कैरियर काउंसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम के समापन दिवस पर ‘‘जलवायु परिवर्तन के दौर में स्थायी विकास’’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञ के रूप में त्रिशांत देव तथा पुष्कर प्रसून ने विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, इनसे पडने वाले दुष्प्रभाओं तथा जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण हेतु वैश्विक स्तर पर किये जा रहे प्रसायों के बारे में जानकारी दी।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता त्रिशांत देव ने छात्रों को बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया को आने वाले वर्षाें में गंभिर समस्याओं का सामना करना पडेगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में बहुत ज्यादा गर्मी और कुछ हिस्सों में बहुत ज्यादा ठंड पडने की संभावना है, इसी प्रकार कहीं अत्यधिक वर्षा के काराण बाढ़ तो कहीं कम वर्षा के कारण सूखा पडने की आशंका है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मीथेन, कार्बन डाईऑक्साईड तथा सल्फर डाईऔक्साईड जैसी गैंसों का उत्सर्जन बढ़ेगा। ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ने से कई तटवर्तीय शहरों के डूबने की आशंका है। बढ़ते तापमान एवं लू चलने से फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उत्तर भारत के कुछ राज्यों में फरवरी में ही तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड पहुुंचने से गेहूं के उत्पादन में 10 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका वैज्ञानिकों द्वारा व्यक्त की गई है।

सूखा पडने से पीने के पानी की कमी होगी तथा अनेक खतरनाक बैक्टिरिया एवं वायरसजनित रोगों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दुनियाभर के वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री तथा समाजशास्त्री चिंतित हैं तथा इस संबंध में वैश्विक स्तर पर अनेक प्रयास किये जा रहे हैं, जिनमें क्योटो प्रोटोकॉल, पैरिस प्रोटोकॉल, नगोया प्रोटोकॉल आदि शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को रोकने में विभिन्न देशों की सरकारें, अन्तर्राष्ट्रीय संगठन, वैज्ञानिकों के साथ ही आम जनता को भी अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. जी.के. दास थे और अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा ने की।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में संचालित कैरियर डेव्हलपमेंट सेन्टर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (छ।भ्म्च्), भारतीय कृषि प्रबंधन अकादमी (छ।।त्ड), के सहयोग से कृषि विद्यार्थियों के लिए ‘‘कैरियर काउंसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास’’ के तहत छह दिवसीय परिसंवाद श्रृंखला का आयोजन किया गया। इस छह दिवसीय परिसंवाद श्रृंखला के तहत 16 से 23 फरवरी, 2023 तक कैरियर काउंसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिया गया। परिसंवाद श्रृंखला के अंतर्गत प्रथम दिवस खेलकूद से स्वस्थ समाज का निर्माणविषय पर डॉ. चन्द्रकांत आगाशे द्वारा विद्यार्थियों को व्याख्यान दिया गया। द्वितीय दिवस रोजगार के भावी स्वरूप पर आधारित कौशल विकासविषय पर अरविंद अग्रवाल द्वारा विशेष व्याख्यान दिया गया था। परिसंवाद श्रृंखला के तृतीय दिवस स्थायी विकास में विश्वशांति की भूमिकाविषय पर डॉ. आर.के. पुरोहित द्वारा व्याख्यान दिया गया। 

चतुर्थ दिवस छबिराम साहू द्वारा योग एवं आयुर्वेद आधारित युवा विकासविषय पर व्याख्यान दिया गया। परिसंवाद श्रृंखला के पांचवे दिन डॉ. सुभाष चन्द्राकर ने लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारीविषय पर व्याख्यान दिया गया। गूगल फॉम के तहत पंजीकृत प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस परिसंवाद श्रृंखला का यूट्यूब पर भी लाईव टेलीकास्ट भी किया गया। इस 6 दिवसीय परिसंवाद श्रृखला के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आर.आर. सक्सेना, डॉ. अकरम खान, डॉ. जितेन्द्र सिन्हा, डॉ. रामा मोहन सावू, डॉ. शुभा बैनर्जी, डॉ. दीप्ति झा, डॉ. दीपक गौरहा, डॉ. हर्ष पौराणिक, डॉ. रवि श्रेय, डॉ. आर.के. ठाकुर, सुश्री कल्पना बैनर्जी थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभा बैनर्जी ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, वैज्ञानिकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


भारतमाला निर्माण मार्ग में जे.सी.बी. मशीन द्वारा अवैध रूप से वनोपज परिवहन का मामला

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रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार राज्य में वन विभाग द्वारा वन अपराधों की रोकथाम के लिए अभियान लगातार जारी है। इस तारतम्य में वनमंडल धमतरी अंतर्गत कुरूद क्षेत्र में गत दिवस 03 फरवरी को भारतमाला निर्माण मार्ग में जे.सी.बी. मशीन द्वारा अवैध रूप से वनोपज परिवहन करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की गई है। इसके तहत जे.सी.बी. वाहन चालक पुष्पेन्द्र द्विवेदी निवासी  मरियादपुरी जिला सतना के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जे.सी.बी. को जब्त करते हुए राजसात की कार्रवाई जारी है।




इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार वनमंडलाधिकारी धमतरी मयंक पाण्डेय के निर्देशन में गठित टीम द्वारा 03 फरवरी को गश्ती के दौरान कुरूद क्षेत्र में भारतमाला निर्माण मार्ग में एक जे.सी.बी. मशीन को अवैध रूप से वनोपज परिवहन करते पाया गया। इसमें कल समय करीब दोपहर 2.00 बजे 01 नग जे.सी.बी. मशीन क्रमांक यूपी-32-आरएन-6138 रंग पीला के द्वारा कुरूद क्षेत्र में भारतमाला निर्माण मार्ग में अवैध रूप से अर्जुन एवं अन्य मिश्रित वनोपज को जड़ से उखाड़कर अवैध रूप से अन्यत्र स्थान पर हटाया जा रहा था।

जिसे मौके पर सहायक परिक्षेत्र अधिकारी कुरूद एरावत सिंह मधुकर द्वारा पकड़ा गया। जिस पर वाहन चालक द्विवेदी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम के तहत् कार्यवाही की गई। 01 नग जप्त जे.सी.बी. मशीन क्रमांक यूपी-32-आरएन-6138 रंग पीला को प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उप वनमंडलाधिकारी एवं प्राधिकृत अधिकारी धमतरी टी. आर. वर्मा को राजसात करने हेतु भेजा गया। इस पूरे प्रकरण की कार्यवाही में वन परिक्षेत्र अधिकारियों सहित विभागीय अमले का सराहनीय योगदान रहा। 


छत्तीसगढ़ सरकार पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रही - मंत्री मोहम्मद अकबर

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कवर्धा। प्रदेश के वन, परिवहन, आवास, पर्यावरण, विधि विधायी तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री व कवर्धा विधायक मोहम्मद अकबर ने आज ग्राम छिरबांधा और छोटूपारा में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति से जुड़े मड़ई कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की ओर कार्यक्रम की शुरुआत की। केबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर का कार्यक्रम में पहुंचने पर यादव समाज द्वारा पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। मंत्री अकबर ने सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में इस दौरान क्रेडा के सदस्य कन्हैया अग्रवाल, नीलकंठ चंद्रवंशी, मंडी अध्यक्ष नीलकंठ साहू, चोवाराम राम साहू, कंशाराम साहू सहित जनप्रतिनिधि एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 केबिनेट मंत्री अकबर ने गांववासियो को मकर संक्रांति की बधाई और शुभकामना देते हुए कहा कि मड़ई गांव की पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा हुआ है। गांव की सुख समृद्धि के लिए इसका आयोजन किया जाता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में शासन द्वारा पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रही है। मड़ई कार्यक्रम पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा है। समाज द्वारा अभी भी जीवंत रखा गया है। इस पारंपरिक संस्कृति को सहेज के रखते हुए आगे बढ़ाना है। पारंपरिक संस्कृति के विकास के लिए भी शासन द्वारा लगातार कार्य किए जा रहा है। मंत्री अकबर ने कहा कि हमने सरकार बनाने से पहले जनता से जो वायदा किए थे। उन सभी वादों को प्राथमिकता में रखते हुए पूरा कर रहे है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के अल्पकालीन ऋण माफ किया गया। जिले के 75 हजार 450 किसानों का 455 करोड़ 65 लाख रूपए ऋण माफी स्वीकृत किया गया है। प्रदेश के 65 लाख परिवारों के लिए राशन कार्ड बना कर दिया। आने वाले इस तीन वर्षों में समय के साथ परिवार का विभाजन हो रहा है, अब फिर से उन परिवारों द्वारा नया राशन कार्ड अथवा वर्तमान राशन कार्ड का विभाजन करने की समस्या संज्ञान में लाई गई। राज्य सरकार ने ऐसे सभी परिवारों को अब राशन कार्ड बना कर दे रहे है। प्रदेश के भूमिहीन श्रमिकों के आर्थिक विकास के लिए राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना बनाई गई है।

राज्य सरकार द्वारा वनोपज संग्रहण से जुड़े प्रदेश के लाखों परिवारों के विकास के लिए 7 प्रकार के वनोपज बढ़ाकर 65 प्रकार की वनोपज की खरीदी की जा रही है। तेंदूपत्ता प्रतिमानक बोरा 2500 से बढ़ाकर 4000 रूपए किया गया है। मंत्री श्री अकबर ने ग्रामीणों को बताया कि प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्लम योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान चलाकर सुपोषण से मुक्ति के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। प्रदेश के युवाओ के लिए गांव-गांव में राजीव युवा मितान क्लब बनाकर युवाओं को शासन और प्रशासन से जोड़ा जा रहा है। धनवंतरी मेडिकल खोलकर सस्ती दवाई उपलब्ध कराई जा रही है। हॉट बाजारों के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री हॉट बाजर क्लीनिक योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा है कि शासन के विभिन्न योजनाओं के अलावा भी क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोगों की मांगों और समस्याओं से रूबरू होकर उनके समस्याओं का समाधान करने का प्रयास भी कर रहे है।

महापुरुषों के दिखाए पथ पर चल रही हमारी सरकार : सीएम भूपेश बघेल

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"छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में हम लोग निकले हैं। आज डॉ. खूबचंद बघेल की जयंती के अवसर पर मैं कह रहा हूं कि हमारी सरकार महापुरूषों के दिखाए पथ पर चल रही है और जनहित में काम कर रही है। हमारी सरकार ने किसानों, श्रमिकों, गरीबों, गौपालकों के आर्थिक समृद्धि के लिए काम किया है। हम आदिवासी संस्कृति को बचाने और सहेजने का काम कर रहे हैं। हमारी नीतियों ने प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में आज स्कूल और बैंक की मांग हो रही है, यही परिवर्तन है।" यह बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज एक निजी न्यूज चैनल के लॉन्चिंग अवसर पर कहीं।



मुख्यमंत्री बघेल स्वदेश न्यूज के लॉन्चिंग मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, संसदीय सचिव डॉ. विनय जायसवाल, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा विशेष रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से "हमर स्वदेश-हमर प्रदेश" थीम पर स्वदेश न्यूज के प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा एवं समूह संपादक अभय किशोर ने चर्चा की। इस दौरान सबसे पहले उनसे रोका-छेका अभियान की जरूरत पर सवाल हुआ।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून गया है। अब खेतों में रोपाई-निंदाई के काम शुरू हो चुके हैं। रोका-छेका अभियान मवेशियों के खेतों में जाने से रोकने के लिए है, ताकि मवेशी फसल को नुकसान पहुंचाएं और किसानों की मेहनत बर्बाद हो। ऐसे में रोका-छेका जरूरी है। बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, हमारी सरकार महापुरुषों के दिखाए पथ पर चलते हुए काम कर रही है। किसानों, श्रमिकों, गरीबों, गौपालकों के आर्थिक मजबूती देने के लिए काम किया जा रहा है। आज स्वास्थ्य, शिक्षा बहुत महंगी हो चुकी हैं। 

बीमारियां बताकर नहीं आतीं, और मध्यमवर्गीय या निम्न वर्गीय परिवार ऐसे परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं होता। ऐसे में डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के जरिए 5 लाख और मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना में 20 लाख रुपये तक की सहायता राज्य सरकार मुहैया करा रही है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हम आदिवासी संस्कृति को बचाने और सहेजने का काम कर रहे हैं। देवगुड़ियों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। आदिवासी सभ्यता में गहराई से जुड़े घोटूल की सभ्यता को भी सहेजा जा रहा है। आदिवासी संस्कृति अपनी परम्पराओं के लिए जानी जाती है, लेकिन पूर्व में इनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया। 

हमारी सरकार उस संस्कृति के संवर्धन के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि, वर्तमान राज्य सरकार गायों की सच्ची सेवा में लगी है। गायों के गोबर खरीदने की पहल के बाद अब आने वाले हरेली तिहार के मौके से गौमूत्र खरीदी की भी शुरुआत राज्य में की जाएगी। गोधन न्याय योजना शुरू करने के बाद आवारा मवेशियों की समस्या को दूर करने में मदद मिली है। वहीं बुढ़े मवेशियों को जहां लोग पहले खुले में छोड़ देते थे, और उन मवेशियों को चारा तक नसीब नहीं होता था, आज गोधन न्याय योजना के बाद गौपालक इन मवेशियों के लिए रहवास और चारा की व्यवस्था कर रहे हैं।

वहीं मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के तहत खरीदे वाले गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने और उसका जैविक खाद के रूप में उपयोग पर बात करते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग पहले ही पर्यावरण के लिए खतरा है। ऐसे में रासायनिक खाद का उपयोग भूमि को नुकसान पहुंचाने के साथ ही पर्यावरण के लिए खतरनाक है। इस स्थिति में वर्मी कम्पोस्ट के रूप जैविक खाद का उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ पर्यावरण को बचाने के लिए लाभप्रद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि माटी पूजन का कार्यक्रम का उद्देश्य भी यही है कि हम धरती से इतना कुछ ले रहे हैं तो उसे थोड़ा लौटाएं भी। कृष्ण कुंज की अवधारणा को इससे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम कृष्ण कुंज बनेगा।

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था। इससे बड़ा आर्थिक परिवर्तन देश में हुआ। उन्होंने कहा कि, शासन का काम सोशल वेलफेयर का होना चाहिए। मंच से मुख्यमंत्री ने बताया कि भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान बस्तर के सुदूर इलाकों में भी आदिवासी और वनवासी अब स्कूल और बैंक की मांग कर रहे हैं। अब आदिवासी-वनवासी भी शिक्षा के महत्व को समझ रहे हैं। वहीं राज्य सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना

राजीव गांधी भूमिहीन ग्रामीण कृषि मजदूर न्याय योजना, लघुवनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और मूल्य संवर्धन करने के काम किए, उन्हें बाजार उपलब्ध कराया। इससे अब वनवासी क्षेत्रों के लोगों के जेब में भी पैसा है। अब वे अपना पैसा बैंकों में रखना चाहते हैं। इसलिए बैंकों की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में बेरोजगार दर न्यूनतम होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ शासकीय नौकरी देकर ही बेरोजगारी कम नहीं की जा सकती। हालांकि 1998 के बाद प्रदेश में पहली बार हमारी सरकार आने के बाद बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती की गई

सहायक प्राध्यापकों की भर्ती हुई। पुलिस विभाग में भर्तियां हुई और एसआई समेत अनेक भर्तियां प्रक्रिया में है लेकिन शासकीय नौकरी में भर्ती की एक सीमा है। इसके लिए हमने अन्य विकल्प पर विचार किया और ऐसी योजनाएं तैयार कीं, जिससे लोगों को आर्थिक लाभ हो सके। राज्य सरकार की पॉलिसी के बाद आज कृषि की ओर रुझान बढ़ा है। पिछले 15 साल में जहां हर साल कृषि का रकबा कम हो रहा था, बीते तीन साल में कृषि का रकबा पहले से बढ़ा है।उन्होंने कहा, प्रदेश में 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है। यहां पर्याप्त मात्रा में वनोपज होता है

लेकिन इनकी खरीदी नहीं होने पर संग्रहण नहीं हो रहा था। हमने कोरोना काल में जब सारे काम और व्यापार बंद थे, मनरेगा और लघुवनोजपों की खरीदी को जारी रखा। राज्य सरकार अभी 65 प्रकार के लघुवनोजपों की खरीदी कर रही है। मूल्य संवर्धन किया जा रहा है। आज बस्तर का तिखूर विदेशों तक जा रहा है। गौठानों को रुरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमने गांवों में ही रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। हमारी नीतियों से हर हाथ को काम मिला। आज गौठानों में स्थित रुरल इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए 600 तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं।

सी-मार्ट के जरिए इनके विक्रय की व्यवस्था की जा रही है। इस तरह से रोजगार सुनिश्चित किया जा रहा है। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि, पुराने अनुभव काम रहे हैं। अनुभवों को मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। अनुभव का एक छटाक, साहित्य के एक टन से ज्यादा वजनी होता है। उन्होंने कहा, हम सभी को छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करना है। यहां के लोगों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार का ध्यान रखना है। पुरखों के सपनों को साकार करना है। हम सबको मिलकर ये काम करना है तभी ये संभव हो सकेगा।

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