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‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ का शुभारंभ 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर

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गरियाबंद। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना किसानों की निजी भूमि पर वृक्षारोपण कर ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में ग्रीन कवर बढ़ाने की एक महत्वकांक्षी योजना है। इस योजना अंतर्गत समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्द्ध शासकीय एवं शासन की स्वायत्त संस्थाऐं, निजी शिक्षण संस्थाऐं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाऐ, पंचायते तथा भूमि अनुबंध धारक इंस योजना का लाभ ले सकते है।

हितग्राही की निजी भूमि में 05 एकड़ तक रोपण हेतु 100 प्रतिशत तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र में रोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान शासन द्वारा हितग्राहियों को प्रदाय किया जावेगा। राज्य में इस योजना के माध्यम से प्रति वर्ष 36000 एकड़ के मान से कुल 05 वर्षों में 180000 एकड़ में 15 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। शासन द्वारा चयनित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी के लिए प्रतिवर्ष न्यूनतम क्रय मूल्य निर्धारित किया जावेगा, जिससे कृषकों को निश्चित आय प्राप्त हो सकें। वनक्षेत्र से बाहर लकड़ी के उत्पादन बढ़ने से काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी कृषकों को अतिरिक्त आय प्राप्त होने का संभावना है।

वन संरक्षक, सह प्रभारी वनमण्डलाधिकारी श्री मणिवासगन एस ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 21 मार्च 2023 को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर जिले में मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का शुभांरभ वन परिक्षेत्र, गरियाबंद के ग्राम दशपुर में किया जावेगा। उक्त कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों की सहभागिता से किया जावेगा। गरियाबंद वनमण्डल अंतर्गत उक्त योजना के तहत कुल 303 हितग्राहियों के 454.57 एकड़ भूमि में विभिन्न प्रजातियों के कुल 3 लाख 20 हजार 183 पौधों का रोपण किया जायेगा। जिसमें माह मार्च में सिंचित क्षेत्र में 47 एकड़ भूमि पर कुल 14 हजार 276 वाणिज्यिक प्रजाति के पौधा रोपण किया जायेगा।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना: 5 एकड़ में वृक्षारोपण करने पर मिलेगा शत् प्रतिशत अनुदान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में निजी भूमि पर व्यावसायिक उद्देश्य से वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना लागू की गई है। इससे राज्य में काष्ठ आधारित उद्योग लगेंगे। वहीं आय के साथ-साथ ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका के साधन भी मिलेंगे। इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए वन विभाग से जुड़े अधिकारियों के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में निजी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए इच्छुक एवं पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ भूमि में वृक्षारोपण करने के लिए शत् प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार 5 एकड़ से अधिक भूमि होने पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यशाला में यह भी जानकारी दी गई कि वृक्षों से अधिक मात्रा में काष्ठ की पैदावार को सुनिश्चित करने के लिए प्रति एकड़ 1000 एवं अधिकतम 5000 पौधे के रोपण करना उपयुक्त होगा। इससे निजी भूमि पर वृक्षारोपण करने वाले भूमिधारकों को प्रतिवर्ष 15 से 50 हजार रूपए प्रति एकड़ तक की आमदनी होगी।

संस्थाओं को मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायते भूमि अनुबंध धारक, गैर शासकीय संस्थाओं को अपने भूमि में रोपण कराने पर 50 प्रतिशत अनुदान की प्राथमिकता होगी। इन संस्थाओं को शेष राशि स्वयं वहन करना होगा। निजी भूमिधारकों, संस्थाएं वृक्षारोपण की तैयारी के लिए दिए जा रहे अनुदान राशि से क्षेत्र तैयारी, गड्डा खुदाई, रोपण निदाई गुडाई आदि करा सकेंगे। वृक्षारोपण उपरांत वृक्षों के काष्ठ विक्रय के लिए निजी भूमिधारकों, शासकीय अथवा निजी संस्थाओं को ट्रायो एग्रीमेंट करना होगा।

इन पौधों का होगा रोपण

योजना अंतर्गत रोपण किये जाने वाले टिशू कल्चर सागौन, चंदन, क्लोनल नीलगिरी, मिलिया डुबिया, टिशू कल्चर बांस व अन्य उपयोगी प्रजाति के पौधों के रोपण किया जाएगा। कार्यशाला में योजना के इच्छुक निजी भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को योजना के प्रावधानों सहित इस संबंध में उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कार्यशाला में वृक्षारोपण विशेषज्ञ प्रेमलाल जैन, उद्योगपति, टिम्बर मर्चेन्ट, भूमि-स्वामी कृषक, एन.जी.ओ. कलेक्टर रायपुर सहित नगर निगम और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यशाला में निजी भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों से अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षारोपण कर इस योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया गया। कार्यशाला में वृक्षारोपण के लिए इच्छुक भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी उपलब्ध भूमि में वृक्षारोपण किये जाने की इच्छा जतायी।

मंत्रिपरिषद की बैठक : प्रदेश में किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के लिए एक नई योजना ‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना‘

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कृषकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत कृषकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से एक नई योजना मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाको वित्तीय वर्ष 2023-24 से लागू करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनामें भाग लेने हेतु इच्छुक कृषक अथवा संस्था अपने क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय में सम्पर्क कर आगामी वर्ष में रोपण हेतु आवश्यक पौधों की जानकारी सहमति पत्र के साथ दे सकते हैं।


गौरतलब है कि इस योजना में कृषकों के निजी भूमि में प्रतिवर्ष 36 हजार एकड़ के मान से पांच वर्षों में एक लाख 80 हजार एकड़ वाणिज्यिक वृक्ष प्रजातियों (क्लोनल नीलगिरी, टिशू कल्चर बांस, टिशू कल्चर सागौन, मिलिया डूबिया एवं अन्य आर्थिक लाभकारी प्रजाति) का रोपण किया जाएगा। समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध-शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाएं, पंचायतें तथा भूमि अनुबंध धारक जो अपने भूमि में रोपण करना चाहते है, इस योजना के हितग्राही होंगे। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ तक भूमि पर (अधिकतम 5000 पौधे) पौधों का रोपण हेतु 100 प्रतिशत तथा 05 एकड़ से अधिक भूमि पर रोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाएगा।

इस योजना में सहयोगी संस्था अथवा निजी कम्पनियों के सहभागिता का प्रस्ताव है। उनके द्वारा वित्तीय सहभागिता के साथ शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर हितग्राहियों के वृक्षों की वापस खरीद का प्रस्ताव भी दिया गया है। सहयोगी संस्था अथवा निजी कम्पनियों की सहभागिता से कृषकों को उनके उत्पाद के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होगी तथा शासन पर वित्तीय भार भी कम होगा। टिशू कल्चर सागौन, टिशू कल्चर बांस एवं मिलिया डूबिया वृक्षों के परिपक्व होने के पश्चात् निर्धारित समर्थन मूल्य पर शासन द्वारा क्रय किया जाएगा।

 राज्य में इस योजना के अंतर्गत कुल पांच वर्षों में एक लाख 80 हजार एकड़ में रोपित 15 करोड़ पौधे परिपक्व होने के पश्चात् हितग्राहियों को लगभग 5000 करोड़ की आय प्राप्त होने की संभावना है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजनाके क्रियान्वयन से प्रति वर्ष लगभग 30 हजार किसान लाभान्वित होंगे। इस योजना के क्रियान्वयन से हितग्राहियों को प्रतिवर्ष प्रति एकड़ 15 से 50 हजार रूपए तक आय की प्राप्ति होगी। वाणिज्यिक वृक्षारोपण के रकबे में वृद्धि से काष्ठ आधारित उद्योगों जैसे पेपर मिल, प्लाईवुड, फर्नीचर, विनियर इत्यादि के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। नये उद्योगों की स्थापना से स्थानीय निवासियों के रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा विभिन्न करों के माध्यम से शासन को अधिक राजस्व की प्राप्ति होगी।

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