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नरवा संवर्धन हमारी पहली प्राथमिकता : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सुराजी गांव योजना में नरवा संवर्धन को पहली प्राथमिकता में रखा गया है. नरवा संवर्धन से वाटर रिचार्ज होगा और भू-जल स्रोत पुनर्जीवित होंगे. स्थानीय लोगों की निस्तारी की समस्या का समाधान होगा, साथ ही सिंचित रकबे में भी वृद्धि होगी. इसके अलावा सिंचाई रकबा बढ़ाने और निस्तारी पानी की व्यवस्था के लिए सोलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जाए. मुख्यमंत्री ने यह बात आज गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम गौरेला में आयोजित जिला अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कही.


मुख्यमंत्री
ने अधिकारियों से कहा गया कि बड़े पैमाने पर मनरेगा के तहत कुएं का निर्माण करें. इससे निस्तारी एवं सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा और गांव में ही रोजगार उपलब्ध होगा. उन्होंने कहा कि सभी पंचायतों में गौठान बनाया जा रहा है. इन गौठानों को रूरल इंडस्ट्रीज पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा. जहां लाख, वन औषधि सहित अन्य स्थानीय उत्पादों का प्रसंस्करण होगा. इसके लिए गौठान में बड़े पैमाने पर तेल मिल और हालर मिल उपलब्ध कराया जाए. 

इससे किसानों की आय बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि आम जनता की आय बढ़ाने के लिए कार्ययोजना बनाकर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजें. मुख्यमंत्री ने गौठान में चारा उत्पादन को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक संख्या में स्व-सहायता समूह को स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों का अधिक से अधिक संख्या में जाति प्रमाण पत्र स्कूल से ही जारी किया जाए. 



इसके लिए शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें. विशेष रूप से 9वीं और 10वीं कक्षा के बच्चों का जाति प्रमाण पत्र अवश्य बनाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रकरणों को प्राथमिकता के साथ समय पर निराकरण करें. अविवादित नामांतरण, बंटवारा के निस्तारण में निश्चित प्रक्रिया का पालन करते हुए भुइयां पोर्टल में दर्ज अवश्य करें, साथ ही 170 ’ख’ के राजस्व प्रकरणों का त्वरित निराकरण भी करें. इससे राजस्व रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि नए जिले में काम का अवसर अधिक है, सभी अधिकारी मिलकर कार्य करें. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध जिला है. यहां अन्य जिलों की तुलना में पर्यटन की संभावना अधिक है, उन्होंने राजमेरगढ़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश कलेक्टर को दिए. मुख्यमंत्री ने वनाधिकार पट्टा, बिजली कटौती सहित अन्य स्थानीय समस्याओं के निराकरण के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया. बैठक में विधायक डॉ. के.के. ध्रुव, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सचिव ऊर्जा अंकित आनंद सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम भूपेश बघेल के निर्देश पर प्रदेश में ‘नरवा मिशन’ गठित

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर प्रदेश में नरवा कार्यक्रम के सुचारू संचालन, अनुश्रवण एवं नरवा विकास के कार्यों को गति प्रदान करने तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा नरवा विकास के किए जा रहे कार्यों में समन्वय स्थापित करने के लिए वन एवं जलावायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू की अध्यक्षता में सात सदस्यीय ‘नरवा मिशन’ का गठन किया गया हैण्



पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव आर. प्रसन्ना, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा व्ही. श्रीनिवास राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संयुक्त वन प्रबंधन) अरूण कुमार पाण्डेय, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन के आयुक्त मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी एवं छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना के नोडल अधिकारी डॉ. तंबोली अय्याज फकीर भाई और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन के मुख्य अभियंता नारायण निमजे नरवा मिशन के सदस्य होंगे.

गौरतलब है कि प्रदेश में ‘नरवा कार्यक्रम’ मुख्यतः पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है. ‘नरवा कार्यक्रम’ में छोटे-छोटे भूमिगत डाइक जैसे संरचनाओं की मदद से नालों को निरंतर बहने वाला सदानीरा नाला बनाते हुए नालों के जल द्वारा भूमिगत जल को रिचार्ज करने का लक्ष्य रखा गया है. इस कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ में सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और अधिकांश जगह कृषि के लिए जल उपलब्ध होगा, 

निस्तार के लिए भी पानी की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। साथ ही जैव विविधता (बायो डायवर्सिटी) का संवर्धन होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अपने विभागाध्यक्ष कार्यालय के माध्यम से संचालित ‘नरवा कार्यक्रम’ की अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मॉनिटरिंग-समीक्षा करेंगे तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से किए जा रहे नरवा विकास के कार्यों की समीक्षा एवं कार्यक्रम का क्रियान्वयन पूर्ववत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख द्वारा ही किया जाएगा.

नरवा विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश के लगभग 30 हजार नालों को रिचार्ज करने के लिए चयनित किया गया है। प्रथम चरण में 9541 नरवा के उपचार की स्वीकृति दी गई है। नालों का उपचार करने के लिए नरवा विकास कार्यक्रम के तहत नालों में वर्षा के जल को रोकने हेतु लूज बोल्डर चेक, चेकडेम, गली प्लग, कंटूर ट्रेंच, स्टाप डेम सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. उपचारित नालो में अब गर्मी के दिनों में भी पानी रहता है। इससे निस्तार, पेयजल और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ी है और क्षेत्र में भू-जल स्तर में भी बढ़ोत्तरी हो रही है.

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