Media24Media.com: दृष्टिहीन

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मोतियाबिंद की वजह से दृष्टिहीन 50 हजार लोगों का सफल ऑपरेशन

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कबीरधाम। छत्तीसगढ़ का कबीरधाम देश का पहला जिला बन गया है, जहां मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीन हो चुके चिन्हांकित सभी लोगों की आंखों की रौशनी लौटाई जा चुकी है। सितंबर दो हजार इक्कीस में कबीरधाम जिले में दोनों आंखों में मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीन एक हजार एक सौ अट्ठाईस और एक आंख में मोतियाबिंद दृष्टिहीनता वाले दो हजार एक सौ चौबीस व्यक्ति चिन्हांकित किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने बीते अगस्त माह में इन सभी लोगों के ऑपरेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है।



वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान की समीक्षा बैठक में केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ राज्य की प्रशंसा की है। राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉक्टर सुभाष मिश्रा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष दो हजार बाईस-तेईस में प्रदेश में अब तक मोतियाबिंद की वजह से दृष्टिहीन उनचास हजार तीन सौ उनयासी लोगों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है।

दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर दृष्टिहीन छात्रा बनी हिदायतुल्ला नेशनल लॉ युनिवर्सिटी की टॉपर

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रायपुर। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता , हौंसलों से उड़ान होती है। ये कविता हम हमेशा ही सुनते आए हैं, लेकिन इसे चरितार्थ करके दिखाया है दिल्ली की रहने वाली एक दृष्टिहीन छात्रा यवनिका ने। यवनिका रायपुर के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बीएएलएलबी (आनर्स) 2021 बैच की टापर हैं और इन्होंने प्रोफेशनल एथिक्स में गोल्ड मेडल हासिल किया है। यवनिका को ये गोल्ड मेडल यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस आफ इंडिया की मौजूदगी में प्रदान किया गया।



यवनिका दृष्टिहीन छात्रा हैं, लेकिन उन्होंने इसे कभी भी अपनी कमजोरी नहीं समझा, बल्कि उनके हौंसले उन्हें उड़ान भरने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे। दिल्ली की रहने वाली यवनिका के पिता भारतीय रेल सेवा में अधिकारी हैं तथा मां स्पेशल एजुकेटर के तौर पर काम कर रही थीं। यवनिका ने फैसला लिया कि वो लॉ की पढ़ाई करेंगी। यवनिका ने रायपुर के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। यवनिका को कोई परेशानी ना हो इसके लिए उनकी मां ने अपनी नौकरी छोड़ दी और यवनिका के साथ ही रायपुर में पांच वर्ष तक रहीं।



अपने मंजिल को पाने मे यवनिका ने अपनी पूरी जान लगा दी और आखिरकार वो इसमें कामयाब भी हुईं। इतना ही नहीं यवनिका ने खुद के लिए नई मंजिल तय की है और इसे पाने के लिए वो नेशनल ला कालेज बंगलौर में एलएलएम कोर्स में एडमिशन लेकर पढ़ाई भी कर रही हैं। यवनिका का कहना है कि रायपुर की पांच साल की जर्नी में कालेज, फैकल्टी और साथी स्टूडेंट्स ने उसका बहुत सपोर्ट किया जिसके लिए वो हमेशा उनका आभारी रहेगी।

यवनिका का कहना है कि माता पिता धरती पर भगवान का रूप हैं और उनका आशीर्वाद है तो जीवन में किसी भी लक्ष्य को पाना नामुमकिन नहीं है। यवनिका ने हमेशा ही अपनी मेहनत और काबीलियत पर भरोसा रखा और अपने लक्ष्य को हासिल किया। यवनिका के जुझारू पन के सम्मान में उसे गोल्ड मेडल देते वक्त जीफ जस्टिस एन वी रमणा तथा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत सभी अतिथि अपनी जगह पर खड़े होकर उनका उत्साह बढ़ाया।

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