Media24Media.com: दीक्षांत समारोह

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सीखने के लिए सदैव सतत् इच्छा होनी चाहिए : राज्यपाल रमेन डेका

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 रायपुर : जीवन में आगे बढ़ने के लिए सीखना जरूरी है और सीखने के लिए सदैव एक सतत् इच्छा होनी चाहिए। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अच्छे इंसान बनें क्योंकि अच्छे व्यक्ति ही बेहतर समाज का निर्माण करते हैं। यह उद्गार राज्यपाल रमेन डेका ने आज यह विचार आईसीएफएआई विश्वविद्यालय रायपुर के दूसरे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।


दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले 21 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 18 विद्यार्थियों को रजत पदक सहित 362 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई।


इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की अधिक संख्या है। यह देख कर उन्हें बहुत खुशी हो रही है कि महिला सशक्तिकरण दिन ब दिन बहुत बेहतर हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम करें तो सफलता निश्चित है। उज्जवल भविष्य के लिए इच्छा शक्ति और अपनी क्षमता के साथ आगे बढ़े। समाज आपकी ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है उसके लिए काम करें। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रहा है। आप लोगों की मेहनत और योग्यता से भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। निजी उच्च शिक्षा संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गाइडलाइन का पूर्णतः पालन करें और शिक्षा का स्तर बढाएं। शिक्षा एक ग्लोबल व्यवसाय है। केवल विशाल भवन बनाकर शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ाया जा सकता, बल्कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देना जरूरी है। शिक्षा केन्द्र को एक व्यवसाय का संस्थान न बनाया जाए।

राज्यपाल ने पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि हमेशा श्रेष्ठता की ओर बढ़ते रहें। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर. पी. कौशिक ने भी अपना संबोधन दिया। कुलपति डॉ. एस. पी. दुबे ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमेन श्री बृजेश चंद्र मिश्रा, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके पालकगण उपस्थित थे।

चिकित्सक हमेशा मानवीय मूल्यों के साथ कार्य करें : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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रायपुर। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने आज एम्स रायपुर के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संस्थान के 10 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं पदोपाधि तथा 514 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रोफेशनल का कार्य अत्यंत जिम्मेदारी भरा होता है, उनके निर्णय जीवन रक्षा से जुड़े होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां से उत्तीर्ण चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल छात्र इस जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व का निर्वहन पूरी तन्मयता और क्षमता के साथ करेंगे। उन्होंने उपाधि एवं पदोपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देेते हुए उनके स्वर्णिम भविष्य की कामना की। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. जॉर्ज ए डिसूजा, एम्स के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक कुमार जिंदल सहित एम्स रायपुर के चिकित्सक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि जब आप सबने मेडिकल को अपना कार्यक्षेत्र चुना होगा, तो आपके मन में दया और संवेदना का भाव रहा होगा। आपको यह हमेशा याद रखना होगा कि दया, करूणा, संवेदना मानवीय मूल्य को मजबूत बनाते हैं। इसलिए हमेशा अपने कार्य क्षेत्र में इन जीवन मूल्यों के साथ कार्य करें।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार देश के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है। पिछले एक दशक में देशवासियों को यूनिवर्सल हेल्थ कार्ड प्रदान करने के लिए अनेक कदम उठाए गए। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाई उपलब्ध हो रही है। पिछले 10 वर्षों में मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस और पीजी की सीटों में भी बढ़ोतरी हुई है। नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ-साथ कुपोषण को दूर करने तथा सिकलसेल क्लिनिक का संचालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाना चाहिए। एम्स रायपुर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चलित क्लीनिकल डिसीज और सपोर्ट सिस्टम पर भी कार्य कर रहा है। इससे दूर दराज के क्षेत्र के डॉक्टरों को आपातकालीन स्थितियों में रियल टाइम मदद तथा सामुदायिक स्वास्थ्य में सुधार होगा। हमने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। आपके कार्य विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर सभी स्नातक छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उनके सफल करियर की कामना की। उन्हांेने कहा कि आज से आप, लोगों के लिए आशा की किरण होंगे। उन्होंने एम्स रायपुर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे देश में स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त की है। एम्स रायपुर का 2024 में राष्ट्रीय रैंकिंग में 38वां स्थान प्राप्त करना इसकी एक मिसाल है। इस संस्थान ने छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का कार्य किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान यहां के मरीजों को मिले उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की भी उन्होंने प्रशंसा की। राज्यपाल ने आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की सराहना की और कहा कि इस योजना ने संस्थान की गरिमा को और बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि यह गौरव की बात है कि इस आदिवासी प्रदेश में स्थित मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थाओं की प्रतिभाएं आपकी उपस्थिति में दीक्षा पूरी कर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में देश की लगभग सभी ख्यातनाम संस्थाएं स्थित हैं। ये संस्थाएं राज्य के भविष्य को रास्ता दिखाने वाली मशालें हैं। इनमें से ज्यादातर संस्थाएं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की रूचि और पहल पर छत्तीसगढ़ को मिली हैं। एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र और ओडिशा के लोगों के लिए भी वरदान है। इस संस्थान ने अपनी व्यवस्था और विशेषज्ञता के लिए पूरे देश में नाम कमाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना हमारी प्राथमिकता है। राज्य में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भर्तियां बड़े पैमाने पर की जा रही हैं। अस्पताल भवनों को बेहतर बनाया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था भी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर और सिम्स बिलासपुर में भवन विस्तार तथा सुविधाओं का विकास शुरू कर दिया गया है। प्रदेश के 4 नये मेडिकल कॉलेजों के भवनों के निर्माण के लिए 1020 करोड़ 60 लाख रुपए का प्रावधान कर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस की पढ़ाई हिन्दी में भी कराने का निर्णय लिया है

इससे विशेष रूप ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का मेडिकल हब बनाने में अपना योगदान देने के लिए हमारे शासकीय अस्पताल भी पूरी तरह तैयार हैं। हम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं को दुर्गम क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. जॉर्ज ए डिसूजा ने स्वागत भाषण तथा कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक कुमार जिंदल ने एम्स रायपुर का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

जीवन के नये क्षेत्र में कदम रखने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का क्षण : राज्यपाल डेका

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 रायपुर : दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह कल राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की गरिमामय मौजूदगी में संपन्न हुआ। बीआईटी दुर्ग के सभागार में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में 68 विद्यार्थियों को शोध उपाधि एवं 48 विद्यार्थियों को विभिन्न कक्षाओं में प्रवीण्य सूची में प्रथम आने पर स्वर्ण मंडित पदक प्रदान किया गया।


समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग छत्तीसगढ़ के दूसरे दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनने के लिए आप सभी के बीच आना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। पीएचडी प्राप्त करने वाले सभी शोधार्थियों और अपनी-अपनी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देता हूं। मैं उन शिक्षकों, माता-पिता और अभिभावकों को भी बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने पढ़ाई के दौरान अपने बच्चों का समर्थन किया। राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू कर रही है। एनईपी 2020 शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास की आवश्यकता पर जोर देता है। इसका उद्देश्य छात्रों को उद्यमिता के लिए तैयार करना है, और उन्हें ’नौकरी चाहने वाले’ बनने के बजाय ’नौकरी निर्माता’ बनाना है। अब आप सभी अपने जीवन के नये क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। भविष्य में भारी चुनौतियाँ और अवसर आपका इंतज़ार कर रहे हैं। यह जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने का क्षण है। यह उत्सव का दिन है, एक ऐसा दिन जब आप उन कई चुनौतियों को याद करते हैं, जिन्हें आपने पार किया है और आगे आने वाली चुनौतियों का इंतजार करते हैं, यह जानते हुए कि आपके पास उनका सामना करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान है। आपके द्वारा चुने हुए पेशे या कैरियर में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि आप लगातार अधिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें और साथ ही अपने सॉफ्ट स्किल्स को विकसित करने और एक अच्छा इंसान बनने के अलावा क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान से खुद को अपडेट और लैस करें।

राज्यपाल डेका ने डॉ. नेल्सन मंडेला के कथन को उद्यत करते हुए कहा कि “शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं“ अब इसे साबित करना आपके ऊपर है। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी को सलाह देता हूं कि बड़े पैमाने पर समाज के लिए काम करने का प्रयास करें और नवाचार, उद्यमिता और स्टार्ट-अप में योगदान दें जो समय की मांग है। इस क्षण को एक संरक्षित वातावरण से ऐसे वातावरण में जाने के रूप में देखें, जहां आपको दुनिया से लगातार सीखना है।

राज्यपाल ने कहा कि दुनिया ऊपर से नीचे तक बदल सकती है, लेकिन कुछ मूल मूल्य कभी नहीं बदलते। वे हैं ईमानदारी, सच्चाई, स्वयं और दूसरों का सम्मान, कड़ी मेहनत, व्यक्तिगत ईमानदारी। आज आपका कर्तव्य है कि ये मूल मूल्य पराजित न हों। सामाजिक समता के बिना विकास को कायम नहीं रखा जा सकता। इस विश्वविद्यालय ने 2015 में अपनी स्थापना के बाद से एक अनुकरणीय प्रतिबद्धता दिखाई है। इस समय में जहां नवाचार, सामाजिक परिवर्तन के चालक बन रहे हैं, आप जैसे युवा विद्यार्थियों से उम्मीद की जाती है। हमेशा इतना अतिरिक्त प्रयास करें कि आपने समाज से जो हासिल किया है, उससे अधिक समाज को वापस लौटा सकें। सामाजिक समता के बिना विकास को कायम नहीं रखा जा सकता। यह विश्वविद्यालय, दुर्ग रिसर्च, एनएसएस, एनसीसी, यूथ रेडक्रॉस, खेल-कूद, सांस्कृतिक एवं पाठ्येतर गतिविधियों जैसे हर क्षेत्र में मजबूती से प्रगति कर रहा है। हाल ही में इस विश्वविद्यालय के छात्रों ने वर्ष 2023-24 में विभिन्न एनएसएस कार्यक्रमों, युवा महोत्सवों और खेलों में पुरस्कार जीते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ किये गये पांच एमओयू वास्तव में उल्लेखनीय हैं।

राज्यपाल ने कहा कि मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि इस विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों ने एनएएसी मान्यता प्रक्रिया के दौरान भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। राज्यपाल ने कहा कि अपनी शिक्षा का उपयोग समाज में बेजुबानों को आवाज देने के लिए, उत्पीड़ितों और कम भाग्यशाली लोगों के उत्थान के लिए काम करना चाहिए। राज्यपाल ने आज सम्मानित होने वाले सभी विद्यार्थियों को उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समारोह को सम्बोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति की मांग पर विश्वविद्यालय में यूटीडी और निर्माणाधीन भवन में ऑडिटोरियम निर्माण की घोषणा कीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शैक्षणिक सत्र 2024-25 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। इससे हमारे विद्यार्थियों को न केवल अपनी रूचि के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिलेगा बल्कि वे अपनी दक्षता के अनुसार अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकेंगे अथवा स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य में छत्तीसगढ़ अपनी भागीदारी बढ़-चढ़कर निभाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। विकसित भारत के निर्माण में हम सभी को अपनी दक्षता के अनुसार सहयोग देना है। छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु प्रयासरत् है। पीएम स्कूलों की स्थापना इसका बेहतरीन उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पीएम योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में पहले चरण में 193 प्राथमिक स्तर के स्कूल और 18 उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूल को विकसित किया जा रहा है। पीएम योजना के तहत तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ के 52 स्कूल स्वीकृत हुए है। मुख्यमंत्री साय ने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार एवं केन्द्र सरकार के आपसी सामंजस्य से हमारी सरकार छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की कतार में खड़ा कर देगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्थापना के 09 वर्ष की अवधि में ही हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग ने अनेक सफलताएं प्राप्त की है। पीएम-उषा योजना के माध्यम से प्रदान की गई 15 करोड़ रूपये की राशि से दुर्ग स्थित पोटियाकला में विश्वविद्यालय के नये भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। जल्द ही विश्वविद्यालय अपने नये भवन में संचालित होने लगेगा। प्रदेश सरकार छात्र-छात्राओं के हित में अनेक कदम उठा रही है। हाल ही में 21 जुलाई को पांच वर्ष के लंबे अंतराल के बाद हमने छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा 2024 सफलतापूर्वक आयोजित की है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त सहायक प्राध्यापकों के पद भरे जाएंगे। प्रदेश में व्यापम द्वारा प्रत्येक रविवार को कोई न कोई प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्ग के साइंस कॉलेज परिसर में ऑडिटोरियम निर्माण कार्य अधूरा है, इस संबंध में संबंधितों को इसे पूरा कराने निर्देशित किया गया है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से सम्बद्ध 158 महाविद्यालयों में से एक दुर्ग साइंस कॉलेज को नैक बंगलुरू द्वारा ’ए प्लस’ ग्रेड मिला है वहीं 04 अन्य निजी महाविद्यालयों को ’ए’ ग्रेड मिला है। इस विश्वविद्यालय के अधीन 09 महाविद्यालयों को ’बी डबल प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ है। यह गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दिया। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में लगभग एक हजार से अधिक पीएचडी हेतु शोधार्थी पंजीकृत है, जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है। यहां के छात्र-छात्राओं ने शोधकार्यों एवं शैक्षणिक गतिविधियों में राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षित युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए शासकीय सेवा के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 05 वर्ष की छूट की अवधि को पांच वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। युवाओं को इसका लाभ वर्ष 2028 तक मिलेगा। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मेरा मानना है कि इस प्रकार के दीक्षांत समारोहों की सार्थकता तभी है, जब उच्च शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात युवा एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपना उत्कृष्ट योगदान दे सके। मुख्यमंत्री साय ने दीक्षांत समारोह में सम्मिलित समस्त स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधि धारकों तथा स्वर्ण पदक प्राप्त छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावक तथा शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री साय ने विश्वविद्यालय के कुलपति की मांग पर विश्वविद्यालय में यूटीडी और निर्माणाधीन भवन में ऑडिटोरियम निर्माण की घोषणा किया।

समारोह में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास दिल्ली के सचिव शिक्षाविद डॉ. अतुल कोठारी ने दीक्षांत भाषण दिया। कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा ने स्वागत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और विद्यार्थियों को दीक्षा शपथ दिलाई। इस अवसर पर विधायक ललित चन्द्राकर, गजेन्द्र यादव एवं रिकेश सेन, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास दिल्ली के सचिव शिक्षाविद डॉ. अतुल कोठारी, विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा, कुलसचित भूपेन्द्र कुलदीप, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, अभिभावकगण, विद्यार्थीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थी।

चंद्रयान मिशन की तरह ही जीवन को भी देखें, कठिनाई का डटकर मुकाबला करें, सफलता कदम चूमेगी : राष्ट्रपति

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रायपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने तथा विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने पहुँची राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने चंद्रयान मिशन के माध्यम से जीवन की सफलताओं के सूत्र बताए। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के चंद्रयान ने चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की। इस पर बरसों से निष्ठापूर्वक काम होता रहा। मार्ग में रूकावटें आती रहीं लेकिन हम नहीं रूके। ऐसा व्यक्तिगत जीवन में भी होता है। निरंतर दक्षता के साथ परिश्रम करते रहें तात्कालिक सफलता से कभी हताश न हो, चुनौतियाँ हमारे जीवन में आती हैं तो नये मौके भी लाती हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ने इस अवसर पर 2946 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की। समारोह में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।

जय जोहार के साथ अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हमारा तिरंगा चाँद पर पहुँच चुका है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि का विषय है। इस उपलब्धि को किस तरह वैज्ञानिकों ने प्राप्त किया। इस संबंध में विश्वविद्यालय में आयोजन होने चाहिए ताकि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण यानी साइंटिफिक टेंपर का निर्माण हो सके। यह संविधान के मूल कर्तव्यों में शामिल है। मुझे खुशी है कि इस विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। यहाँ ऐक्सलरेटर आधारित रिसर्च सेंटर भी स्थापित की गई है। अपने अनुसंधान से यह विश्वविद्यालय दुनिया में अपनी पहचान बनाएं। जो देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाने में आगे रहेंगे, वे ज्यादा तरक्की करेंगे। हमारे स्पेस मिशन में हमें दुनिया से कुछ असहयोग का सामना भी करना पड़ा, फिर भी हम दृढ़ता से बढ़ते रहे।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस विश्वविद्यालय का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसका नाम गुरु घासीदास के नाम पर है। उन्होंने मनखे मनखे एक समान का संदेश दिया। गुरु घासीदास ने समानता का संदेश दिया। समानता के आदर्शों पर चलकर ही युवा सुख के रास्ते पर चल सकते हैं और सभ्य समाज का निर्माण कर सकते हैं।

इस मौके पर राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद को भी याद किया। उन्होंने कहा कि रायपुर का हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद के नाम पर है। वे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ खेलकूद को भी महत्व देते थे। स्वामी जी आत्मविश्वास की मूर्ति थे। स्वामी जी ने शिकागो में भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता का विश्वघोष किया था। उस समय भारत में गुलामी की मानसिकता अपने चरम पर थी। एशिया के लोग हीनता की भावना  से ग्रस्त थे। ऐसे वातावरण में विवेकानंद ने भारत का नाम बढ़ाया। युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेनी चाहिए।
                                    

राष्ट्रपति  ने कहा कि मुझे खुशी है कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 76 विद्यार्थियों में 45 छात्राएं हैं जो कुल संख्या का लगभग 60 प्रतिशत है। विश्वविद्यालय में 47 प्रतिशत छात्राएं पढ़ रही हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह बड़ा कदम है। देश की आधी आबादी महिलाओं की है। इन्हें सशक्त करने से देश और मजबूत होगा।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय काफी है। राज्य की एक तिहाई आबादी जनजातीय है। जनजातीय समुदाय के प्रति संवेदनशीलता और महिलाओं की भागीदारी जैसे विषय बहुत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय द्वारा इस संबंध में अच्छा कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रपति ने उपाधि समारोह के मौके पर उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि के लिए उनके अभिभावकों तथा विश्वविद्यालय के टीचिंग स्टाफ के योगदान को भी रेखांकित किया।

शिक्षा हमें संस्कारित और अनुशासित बनाती है : राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन

इस मौके पर अपने संबोधन में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह एक गरिमामय समारोह है जो आपकी कड़ी मेहनत को मान्यता देता है और साथ ही आपके लिए एक जिम्मेदारी भी लेकर आता है। आपको जीवन के विभिन्न पहलुओं का पता लगाने के साथ-साथ नई चीजें सीखने के कई अवसर मिलेंगे। इस चरण के दौरान आप मूल्यों को आत्मसात करेंगे और क्षमताओं का विकास करेंगे। शिक्षा हमें संस्कारित तो बनाती ही है, अनुशासित भी बनाती है। यह हमें समाज में पद, धन और प्रतिष्ठा दिलाने में भी मदद करती है। जब आप इन चीजों को हासिल करते हैं, तो इसके साथ ही यह एक इंसान के रूप में विकसित होने में भी मदद करती है। इस मौके पर राज्यपाल ने स्वतंत्रता संग्राम की विभूतियों के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध कठिन संघर्ष कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हमें आजादी दिलाई है। हमें कठोर परिश्रम कर अपना जीवन हाशिये पर पड़े लोगों के कल्याण के लिए काम करना है। यही सच्ची सेवा है।

कठोर परिश्रम के बल पर स्वयं को स्वर्ण पदकों हेतु योग्य सिद्ध किया है : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  

इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आप सभी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं ने अपने कठोर परिश्रम मेधा और अनुशासन के बल पर स्वयं को उपाधियों एवं स्वर्ण पदकों हेतु योग्य सिद्ध किया है। यह विश्वविद्यालय हमेशा ज्ञान का प्रकाश रहा है। हमारा प्रदेश हमेशा समृद्ध रहा है। यहां पुरखों के आशीर्वाद से उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों पर हमारा प्रदेश आगे बढ़ रहा है। हमारे यहां प्रचुर संसाधन हैं, समृद्ध जैव विविधता है, सघन वन हैं, सुंदर प्रकृति है, सुंदर जनजीवन है, उत्कृष्ट मानवीय मूल्य हैं। हम युवाओं को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। हमने 42 हजार पदों पर भर्ती की। रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए हमने रोजगार, स्व-रोजगार और उद्यम दिए हैं। हम बेरोजगारी भत्ता भी प्रदान कर रहे हैं, ताकि युवाओं को आर्थिक मजबूती मिल सके और वे अच्छे भविष्य की तैयारी कर सके। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गुरु घासीदास जी का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि मनखे मनखे एक समान का संदेश देकर उन्होंने समतामूलक समाज के लिए कार्य किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय की विविध उपलब्धियों का ब्योरा समारोह में रखा। समारोह में विशेष अतिथि के रूप में केंद्रीय जनजाति विकास राज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह मौजूद रहीं। साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, नगर निगम बिलासपुर के महापौर रामशरण यादव, बिलासपुर सांसद अरुण साव, दुर्ग सांसद विजय बघेल, बिलासपुर विधायक शैलेश पाण्डेय, तखतपुर विधायक श्रीमती रश्मि आशीष सिंह, बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, बेलतरा विधायक रजनीश सिंह, राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष नन्द कुमार साय, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।

 

 

शिक्षा का उपयोग समाज में शोषितों के उत्थान के लिए करना चाहिए : राज्यपाल हरिचंदन

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रायपुर। महात्मा गांधी द्वारा अहिंसा रूपी शक्ति शाली शस्त्र, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा आजाद हिन्द फौज के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया गया जिससे युवा भी आजादी के लड़ाई में कुद पड़े। इसी तरह आज के युवा भी देश व समाज के अधिकार के लिए लडे़ औैर बेजुबानों की आवाज बने। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा का उपयोग समाज में शोषितों के उत्थान के लिए करना चाहिए। ये उद्गार राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने आज हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग  के प्रथम दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए।


विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में 126 नेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न दान-दाताओं द्वारा प्रदत्त स्वर्ण पदक और विश्वविद्यालय द्वारा पांच हजार रूपये प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई साथ ही 13 विद्यार्थियों को पी.एच.डी. की उपाधि प्रदान की गई । दीक्षांत समारोह के मुख्यअतिथि भूपेश बघेल थे। बघेल एवं पदमश्री से सम्मानित कलाकार श्रीमती उषा बारले को पी.एच.डी. की मानद उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से उपस्थित राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिचंदन ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि शिक्षा सबसे बडा शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग दुनिया को बदलने में कर सकते हैं। उन्होने विद्यार्थियों से कहा कि नवाचारों, उद्यमिता और स्टार्ट-अप में योगदान दे, जो समय की मांग है। उन्होंने कहा कि एन.ई.पी. 2020 शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए कौशल विकास कि आवश्यकता पर जोर देता है। यह विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए तैयार करना चाहता है, और इसका उद्देश्य उन्हें नौकरी तलाशने वाले बनने के बजाय नौकरी देने वाला बनाना है।  

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के स्थापना की आठवीं वर्षगंाठ पर शुभकामनाएं एवं बधाई दी। साथ ही पी.एच.डी. डिग्री प्राप्त करने वाले और विभिन्न परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस समय में जहां नवाचार सामाजिक परिवर्तन के चालक बन रहे है, युवा विद्यार्थियों से बहुत उम्मीद की जाती है। उन्होंने समाज से जितना प्राप्त किया है उससे अधिक समाज को वापस देने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अनुसंधान एन.एस.एस., एन.सी.सी यूथ रेडक्रॉस, खेल, सांस्कृतिक और पाठ्येतर गतिविधियों जैसे हर क्षेत्र में मजबूती से प्रगति कर रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा इस वर्ष सात लघु अवधि मूल्य आधारित सर्टिफिकेट कोर्स आयोजित किए गए जो काफी सफल रहे। वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुल 740 शोधार्थी अपनी पीएचडी की डिग्री के लिए पंजीकृत है। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों ने नैक प्रत्यायन प्रक्रिया के दौरान भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस विश्वविद्यालय से एक सरकारी ए. ग्रेड कॉलेज और दो निजी ए ग्रेड कॉलेज और बी. ग्रेड वाले सात कॉलेज संबद्ध है।

कार्यक्रम में मुख्यअतिथि भूपेश बघेल ने अपने सम्बोधन में पदक और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्याथियों को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय में आधुनिक सुविधा युक्त ऑडोटोरियम और डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा शोध पीठ निर्माण की घोषणा की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमेश पटेल ने भी वर्चुअल रूप से उपस्थित होकर अपना सम्बोधन दिया। कुलपति श्रीमती अरूणा पल्टा ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में, विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, सांसद विजय बघेल, दुर्ग जिले के विधायक अरूण वोरा, राज्यपाल के  सचिव  अमृत खलखो, स्वामी विवेकानंद आश्रम राजकोट के अध्यक्ष स्वामी निखिलेश्वरानन्द, और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विश्वविद्यालय के कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य, प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं उनके पालक उपस्थित थे।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में चतुर्थ दीक्षांत समारोह 28 मार्च को , राज्यपाल होंगे शामिल..

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65 मेधावियों को दिया जाएगा गोल्ड मेडल...

बिलासपुर  :  अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के चतुर्थ दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कोनी स्थित नवीन परिसर के चतुर्थ तल सभागार में मंगलवार, 28 मार्च 2023 को आयोजित होगा । अटल यूनिवर्सिटी का यह प्रथम अवसर है कि विश्वविद्यालय का दी समारोह स्वयं विश्वविद्यालय के भवन में आयोजित किया जा रहा है।रविवार को प्रेस क्लब में पहुंचे अटल विहारी वाजपेयी विश्विद्यालय के कुलपति अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दीक्षात समारोह के अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति विश्वभूषण हरिचंदन करेंगे। इसके अलावा दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि फिजी गणराज्य के भारत में उच्चायुक्त कमलेश शशि प्रकाश होंगे तथा वे दीक्षांत भाषण देंगे। साथ ही दीक्षांत समारोह के अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल शामिल होंगे। अन्य विशिष्ट अतिथियों में अरुण साथ सांसद बिलासपुर लोकसभा, रश्मि आशिष सिंह, संसदीय सचिव एवं विधायक तखतपुर, शैलेष पाण्डेय, विधायक बिलासपुर एवं रजनीश सिंह विधायक, बेलतरा होंगे।

65 स्वर्ण पदक प्रदान किये जायेंगे...

विश्वविद्यालय के द्वारा 58 स्वर्ण पदक तथा 7 स्वर्ण पदक शहीद नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ को प्रदान किया जाना है। जिसमें 47 विद्यार्थियों द्वारा अब तक पंजीयन कराया गया है। विश्वविद्यालय में कुल 27 दानदाताओं के द्वारा मेडल प्रदान किया जाता है। विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में केवल स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को ही दीक्षांत समारोह में मेडल प्रदान किये जाते है लेकिन इस बार कुलपति के इच्छा को विद्यापरिषद एवं कार्यपरिषद् के अनुमोदन के पश्चात् प्रवीण्य सूची के 02 से 10 तक के विद्यार्थीयों को भी पहली बार उपाधि प्रदान की जा रही है।

विश्वविद्यालय के कुल 650 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान किया जाना था। जिसमें से अब तक 214 विद्यार्थियों ने उपाधि लेने हेतु पंजीयन कराया है।इसके साथ ही। विश्वविद्यालय के द्वारा 02 मानद उपाधि भी प्रदान की जा रही है। जिसमे

01. कमलेश शशि प्रकाश, फिजी गणराज्य के भारत में उच्चायुक्त, समाजविज्ञान संकाय में पीएच.डी. की उपाधि...

02. डॉ पुष्पा दीक्षित, सेवानिवृत्त प्राध्यापक कला संकाय में डी.लिट् की उपाधि...

विश्वविद्यालय के द्वारा विश्वविद्यालय में शोधकर्ता 02 विद्यार्थियों (गणित एवं अंग्रेजी में) को एच.डी. की उपाधि प्रथम बार प्रदान कर रही है।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत सामारोह 15 सितंबर 2016 को हुआ था। द्वितीय दीक्षांत समारोह के समय कुलपति जी. डी शर्मा ने यू. जी. सी. के चेयरमेन प्रो. वेदप्रकाश को आमंत्रित किया गया था। दूसरा दीक्षांत समारोह 19 सितंबर 2019 को हुआ था। जिसमें यू.जी.सी के अध्यक्ष प्रो. धिरेन्द्र पाल सिंह ने दीक्षांत उद्बोधन दिया था। विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह 21.04.2022 को नये कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी द्वारा हुआ। जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति एम. वैकेया नायडू ऑनलाईन मोड पे मुख्य अतिथि थे। तथा दीक्षांत उद्बोधन यूपी एस.सी. के पूर्व अध्यक्ष प्रो. पी. के जोशी ने दिया था।

इस चतुर्थ दीक्षांत समारोह में कुल 61 मेधावियों को स्वर्ण पदक से नवाजा जायेगा। इसमें 36 छात्राएं और 25 छात्र शामिल होंगे। चतुर्थ दीक्षांत समारोह को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए 20 अधिकारी 35 प्राध्यापक 50 कर्मचारी और 100 से अधिक एन.सी.सी. और एन.एस.एस. के विद्यार्थी कार्य कर रहें है।पत्रकार वार्ता के दौरान रजिस्ट्रार शैलेन्द्र दुबे,वेलफेयर डीन डॉ एच एस होता,पी आर ओ हर्ष पांडेय,मनीष सक्सेना मौजूद रहे।

उद्देश्यों और लक्ष्यों के बिना, जीवन में सफलता नहीं मिलती : राज्यपाल सुश्री उइके

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके कलिंगा विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। राज्यपाल ने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले समस्त विद्यार्थियों को, उनकी उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, राज्यपाल ने कहा कि उद्देश्यों और लक्ष्यों के बिना, जीवन में सफलता नहीं मिलती है। इसलिए उन्होंने जीवन में सफलता के लिए सभी विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर, अच्छे उद्देश्यों के साथ आगे बढ़नें को कहा।

राज्यपाल सुश्री उइके आज नवा रायपुर स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर, वर्ष 2020, 2021 एवं 2022 के विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक वितरित किए। इस अवसर पर 189 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 218 को पी.एच.डी उपाधि, 1745 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधि एवं 4562 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि सहित कुल 6,525 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बेहतर कार्यान्वयन से अगली पीढ़ी के शैक्षणिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। 



नई शिक्षा नीति के संबंध में उन्होंने कहा कि यह नीति समानता, गुणवत्ता, और जवाबदेही के मूलभूत सिद्धांतों पर बनाई गई है। इसका उद्देश्य स्कूल और कॉलेज शिक्षा दोनों को ही अधिक समग्र, लचीला, बहु-विषयक और 21 वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल क्षमताओं को सामने लाना है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से भारत को एक जीवंत ज्ञान समाज और वैश्विक ज्ञान महाशक्ति में बदलना है स्थानीय भाषा में शिक्षा देना भी नई शिक्षा नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा मेडिकल एवं अभियांत्रिकी की पढ़ाई हिंदी में कराए जाने को स्वागत योग्य बताया। 

उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व है कि इस शिक्षा नीति को धरातल पर उतारें तभी इसका लाभ हमारे छात्रों को मिल सकेगा। उन्होंने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए, उच्च शिक्षा में सुधार के लिए सभी विश्वविद्यालयों को बेहतर तरीके से कार्य करते हुए, अपनी नैक ग्रेडिंग के सुधार के लिए कार्य करना चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत समारोह का दिन जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। दीक्षांत समारोह को जीवन और सुनहरे भविष्य की एक शानदार सीढ़ी बताते हुए कहा कि जब आप संस्था से बाहर निकलेंगे तो जीवन आपको सीखने का भरपूर अवसर देगा।


उन्होंने समस्त विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए गौरव का क्षण है। उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी
वसुधैव कुटुम्बकमकी भावना के माध्यम से वैश्विक संस्कृति का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे वैश्विक परिवेश में युवाओं को अनेक आकर्षक अवसर तो प्राप्त हो रहे हैं किन्तु साथ ही वैश्विक चुनौतियाँ भी मिल रही हैं। इन चुनौतियों का सामना और उसका समाधान करके ही, विद्यार्थी अपने उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करें, विनम्र रहें, उदार बनें तथा निंरतर सीखते रहें। निश्चित रूप से जीवन में सफलता मिलेगी।

राज्यपाल ने शिक्षकों से आग्रह करते हुए कहा कि बदलती परिस्थितियों के मुताबिक, स्वयं को अपडेट करें और विद्यार्थियों को इसी के अनुरूप शिक्षा दें ताकि वे राष्ट्र और समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकें। राज्यपाल ने ज्ञान के विस्तार में अनुसंधान की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने अनुसंधान की सुविधाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बेहतर बनाने एवं विद्यार्थियों में अनुसंधान में रूचि के विकास की आवश्यकता बताई। अनुसंधान विकास के नए रास्ते खोलती है। इसलिए युवा प्रतिभाओं को नयी खोज के लिए प्रेरित करना होगा। राज्यपाल ने शिक्षा के सर्वांगीण विकास पर कहा कि हमारे गौरवशाली मूल्यों को आकार देने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 



ज्ञान और सूचना तकनीक में समन्वय से हम शैक्षिक विकास की राह को गति प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षण संस्थानों को, युवाओं की मूल्यपरक शिक्षा पर जोर देना होगा, जिससे उन्हें अध्यात्म तथा सांस्कृतिक विरासत की मूल्यों से परिचित कराया जा सके। विद्यार्थियों को भारतवर्ष की गौरवशाली संस्कृति-परंपरा एवं ज्ञान से समृध्द करना होगा ताकि युवाओं में मातृभूमि के प्रति प्रेम, बुजुर्गों एवं महिलाओं के प्रति सम्मान, जीवन में ईमानदारी, आत्मसंयम, सहनशीलता और अपने नैतिक दायित्वों को पूरा करने की भावना विकसित हो। साथ ही उन्हांेने कहा कि जीवन में व्यावहारिक ज्ञान, अच्छे आचार-विचार एवं संस्कार से ही व्यक्तित्व का विकास संभव है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि भारत विश्व का एक प्रमुख विकासशील राष्ट्र है। विकास के रास्ते में हमारे सामने ढेरों चुनौतियाँ है। उन चुनौतियों का समाधान हमें मिलजुल कर करना है। उन्होंने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक करना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा यह स्मरण रखना चाहिए कि उन्होंने अभी तक जो कुछ उपलब्धि अर्जित की है, उसमे समाज का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान रहा है। इसलिए समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और समाज व राष्ट्र के कल्याण में अपनी ऊर्जा समर्पित करें। 

विद्यार्थी, स्वयं को सामाजिक सरोकार से जोड़े, तभी उच्च शिक्षा का वास्तविक लाभ समाज और देश को मिलेगा। राज्यपाल सुश्री उइके ने राज्य में सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र एवं गरीब बच्चों के लिए अंग्रेजी विद्यालय खोलने एवं भविष्य में आत्मानंद महाविद्यालय खोलने के सरकार के निर्णय के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए ,बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि मानव मूल्यों के विकास के लिए बेहतर शिक्षा को आवश्यक बताया। 

उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाएं हमें एक ऐसा वातावरण देती हैं जिसमें हम विभिन्न समाज और संस्कृति के लोंगों से मिलते हैं। यह सांस्कृतिक आदान प्रदान का बेहतर अवसर उपलब्ध कराती है। इससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों का विकास होता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा, राज्य में बेहतर शिक्षा के लिए लिए जा रहे निर्णयों के संबंध में भी बताया।

इस अवसर पर राज्य निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. उमेश मिश्रा, कलिंगा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष राजीव कुमार, कुलाधिपति संदीप अरोरा, कुलपति आर. श्रीधर, उपकुलाधिपति सज्जन सिंह, कुलसचिव संदीप गांधी तथा कलिंगा विश्वविद्यालय के अध्यापकगण एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकगण उपस्थित थे।

लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच जरुरी : राज्यपाल सुश्री उइके

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके अपने एक दिवसीय रायगढ़ प्रवास के दौरान आज ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। यहां उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह आपके जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने का प्रतीक है। आप सभी ने अपने मूल विषय में ज्ञान और अंर्तदृष्टि प्राप्त करने तथा मूल्यों को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। इसी प्रकार जीवन में लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के फलस्वरूप ही आप सफलता के सोपान तय करेंगे।



दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सुश्री उइके ने 31 स्वर्ण, 28 रजत और 27 कांस्य पदक सहित कुल 738 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की और उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं की। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवाओं को प्रशिक्षित तथा प्रेरित करने के साथ-साथ उनमें उद्यमशीलता की भावना जगाने की जरूरत है। उन्हें अपना रास्ता तय करने के लिए मार्गदर्शित करने की आवश्यकता है। प्रत्येक विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि वह संकल्पना करें और राष्ट्र के विकास के लिए नई और उपयुक्त तकनीकों का निर्माण करें। 



राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि अनुसंधान के लिए, समस्या समाधान के लिए, विकास के लिए अपने विद्यार्थियों के बीच नए विचारों, नवाचारों और उद्यमिता की सोच को पल्लवित और पोषित करे। नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को कार्यशालाओं और उत्पादन तक लाकर दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब आप संकल्प लेंगे कि पूरा राष्ट्र आपका परिवार है तो पूरे देश को शक्ति मिलेगी और वास्तव में आपकी उपलब्धियों और क्षमता का राष्ट्र निर्माण में सदुपयोग हो पाएगा। 

मेरा आग्रह है कि आप जो भी कार्य करें, उसमें राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल से देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है जो समानता, गुणवत्ता और जवाबदेही के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। निश्चित ही 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल शिक्षा नीति अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाएगा। उन्होंने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने की विद्यार्थियों को सीख भी दी।



साथ ही राष्ट्र के विकास में बाधा डालने वाले बुराईयों को दूर करने में अपनी भूमिका निभाने को कहा।राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आप अपने आपको इतना योग्य बनायें कि आजीविका आपकी खोज करें न की आप आजीविका की। विश्वविद्यालय के परिसर से दीक्षित होकर निकलना, आपको समाज की उच्च अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी भी देता है। उन्होंने कहा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस विश्वविद्यालय में देश के 18 से अधिक राज्यों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 

यह परिसर विद्यार्थियों को एक बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय वातावरण उपलब्ध करा रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों का आपसी संवाद उन्हें एक व्यापक दृष्टि देता है और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है। इस मौके पर यूनिवर्सिटी की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल ने सभी पास आउट विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीे।

समारोह में स्वागत उद्बोधन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ आर डी पाटीदार ने दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी के एकेडमिक एक्टिविटी के साथ उपलब्धियों का ब्योरा साझा किया। इस अवसर पर डॉ उमेश मिश्रा, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, शहीद नंद कुमार पटेल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ ललित प्रकाश पटेरिया, एडीएम सुश्री संतन देवी जांगड़े सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, उनके परिजन व यूनिवर्सिटी के स्टाफ उपस्थित थे।

राज्यपाल इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हुईं शामिल

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राज्यपाल अनुसुईया उइके राजनांदगांव के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के 16वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। राज्यपाल सह अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर और राजकुमारी इंदिरा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुलगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद राज्यपाल उइके ने प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पद्मभूषण उमा शर्मा, पार्श्व गायिका पद्मश्री कविता कृष्णमूर्ति, प्रोफेसर पंडित विद्याधर व्यास, प्रसिद्ध नाट्यकर्मी और राष्ट्र नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक प्रोफेसर देवेंद्रराज अंकुर और छत्तीसगढ़ के लोक गायक दिलीप षडंगी को डी. लिट् की मानद उपाधि प्रदान प्रदान की।


राज्यपाल उइके ने  विद्यर्थियों को स्वर्ण पदक, स्नातक-स्नातकोत्तर की उपाधि और शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।

राज्यपाल उइके ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जिनका नाम सुना था, जिनके गाने सुने थे, आज उन्हें सम्मानित करके गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ। कला की लगभग सभी विधाओं के पारंगत कलाकार मंचासीन है, ऐसा विलक्षण अवसर विरले ही संभव होते हैं।


उन्होंने सभी कला प्रेमियों से कहा कि कलाकार की नैतिक जिम्मेदारी भी है कि वह कला के द्वारा शिक्षा भी दें। लेकिन समझने की आवश्यकता है कि कला का ज्ञान हमें केवल पुस्तकों सेे नहीं मिलता है। प्रत्येक कलाकार को इसके लिए साधना करनी होती है। भारतीय कला-चिंतन में भी कला को एक साधना माना गया है। किसी भी प्रकार के बंधन से मुक्त कलाकार, प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है। राज्यपाल उइके ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से कहा कि यदि आप दृढ़ संकल्पित हो जाएं तो आप भी डी. लिट् जैसी प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त कर सकते हैं।

राज्यपाल उइके ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक विकास में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती देवी ने यह अमूल्य भेंट भारतीय संस्कृति को समर्पित की है। यह विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। मुझे पूर्ण विश्वास है आप सभी इस सांस्कृतिक विरासत व परंपरा को सहेजेंगे। उन्होंने कहा कि दीक्षांत का मतलब सिर्फ विधिवत शिक्षा-सत्र की समाप्ति से है। अब आप जीवन के नए चरण में प्रवेश करेंगे। मैं चाहूंगी कि आपने यहाँ जो सीखा है, जो ज्ञान अर्जन किया है, जिस कला की साधना की है, उसका आगे जीवन में सदुपयोग करें। आप लोगों ने यहां जो शिक्षा प्राप्त की है, वह आपके भावी जीवन में काम आने वाली है।

भारतीय संस्कृति जितनी पुरानी है, उतनी ही प्रचीन उसकी कलाएं भी हैं। साहित्य, कला, संगीत एवं नृत्य आदि संस्कृति के अंग है और इन्हीं के द्वारा देश की संस्कृति समृद्ध बनती है। लोक जीवन और लोक कलाओं से निरन्तर संवाद के बिना किसी कला का समुचित विकास सम्भव नहीं है। जब भी यह संवाद किसी कारण से अवरुद्ध होता है तो इन कलाओं का विकास रूक जाता है। आप सभी जिस भी क्षेत्र में कार्य करें पूरी लगन और मेहनत से करें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी। आप भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं।

विश्वविद्यालय प्रबंधन को दिया धन्यवाद

ये गर्व की बात है और इसी गर्व और आत्मविश्वास से बाहर की दुनिया में कदम रखें। संगीत की दुनिया में सकारात्मक बदलाव लायें और अपनी समृद्धशाली संस्कृति को संरक्षित करें और आगे बढ़ायें। उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संगीत और कला के अध्ययन के लिए खैरागढ़ विश्वविद्यालय का विशिष्ट स्थान है। संगीत विश्वविद्यालय अपने प्रसिद्धि के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को भी धन्यवाद दिया।

सांसद संतोष पांडेय ने भी किया संबोधित

सांसद संतोष पांडेय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति मोक्षदा चंद्राकर ने स्वागत उद्बोधन के माध्यम से विश्वविद्यालय की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संभागायुक्त महादेव कांवरे, कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा, पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति अरूणा पल्टा, बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति एडीएन वाजपेयी, खैरागढ़ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आईडी तिवारी समेत अन्य जनप्रतिनिधि और  गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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