Media24Media.com: तीज-त्योहार

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label तीज-त्योहार. Show all posts
Showing posts with label तीज-त्योहार. Show all posts

आलेख : छत्तीसगढ़ में बोरे-बासी खाओ अभियान : मजदूर दिवस पर श्रमिकों के सम्मान के लिए अनूठी पहल

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार सरकारी तौर पर मनाने की शुरुआत करने के बाद राज्य सरकार ने आहार को भी छत्तीसगढ़िया गौरव से जोड़ दिया है। शुरुआत किसानों-मजदूरों का आहार कहे जाने वाले बोरे-बासी से हो रही है। मजदूर दिवस यानी एक मई को श्रम को सम्मान देने के लिए सभी से बोरे बासी खाने की अपील की है।

हर छत्तीसगढ़िया के आहार में बोरे बासी का कितना महत्व है। हमारे श्रमिक भाइयों, किसान भाइयों और हर काम में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली हमारी बहनों के पसीने की हर बूंद में बासी की महक है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, जब हम कहते हैं कि बटकी में बासी अउ चुटकी में नूनतो यह सिंगार हमें हमारी संस्कृति से जोड़ता है।

डॉ. खूबचंद बघेल ने भी खूब कहा है, ‘गजब विटामिन भरे हुए हे छत्तीसगढ़ के बासी मामुख्यमंत्री ने कहा, युवा पीढ़ी को हमारे आहार और संस्कृति के गौरव का एहसास कराना बहुत जरूरी है। एक मई को हम सब बोरे बासी के साथ आमा के अथान और गोंदली के साथ हर घर में बोरे बासी खाएं और अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व महसूस करें।

क्या है यह बोरे बासी

बोरे बासी छतीसगढ़ का प्रमुख और प्रचलित व्यंजन है। बोरे बासी का मतलब होता है रात के पके चावल को रात को भिगो कर या सुबह भिगो कर खाना या सुबह के पके चावल को दोपहर में खाना। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। फिर सब्जी, प्याज, आचार, पापड़, बिजौरी इत्यादि के साथ खाया जाता है। कई बार लोग केवल नमक और प्याज से बासी खाते हैं। बोरे का अर्थ है सुबह के चावल को पानी में भिगोए रखना और बासी का मतलब है रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर रात भर रखना उसे कहते हैं बासी इसका अर्थ हो जाता है बोरे बासी। गर्मी के दिनों में बोरे बासी शरीर को ठंडा रखता है। पाचन शक्ति बढ़ाता है। त्वचा की कोमलता और वजन संतुलित करने में भी यह रामबाण है। बोरे बासी में सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

बोरे बासी यानी बासी चावल जिसका स्वाद चावल से कई गुना बदल जाता है एवं स्वादिष्ट लगने लगता है बोरे बासी को तैयार करने के लिए सबसे पहले चावल पकाकर उसे रात को पानी में डालकर एवं छोड़ दिया जाता है तब उसे सुबह वह चावल बासी के रूप में प्राप्त होता है । और बासी एक छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्यंजन है जिसे गर्मी के समय में पेट पूजा के लिए एवं भोजन का मुख्य व्यंजन है, बोरे -बासी त्वचा को स्वस्थ एवं शरीर में किसी भी बीमारी को दूर करने में सहायक प्रदान करता है एवं विटामिंस सी विटामिन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है ,और इसमें बोरे बासी हमारे ही राज्य में नहीं अन्य राज्यों में एवं अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भी खाया जाता है।

 बोरे-बासी में विटामिन भरपूर

विटामिन बी-12 की प्रचूर मात्रा के साथ-साथ बोरे बासी में आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है। इसे खाने से पाचन क्रिया सही रहती है और शरीर में ठंडक रहती है। ब्लड और हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने का भी काम करती है। गर्मी के दिनों में बोरे-बासी शरीर को ठंडा रखती है। पाचन शक्ति बढ़ाती है। त्वचा की कोमलता और वजन संतुलित करने में भी यह रामबाण है। बोरे-बासी में सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

बासी खाने से लाभ

बासी खाने से होंठ नहीं फटते, पाचन तंत्र को सुधारता है। इसमें पानी भरपूर होता है, जिससे गर्मी के मौसम में ठंडक मिलती लू से बचाता है। पानी मूत्र विसर्जन क्रिया को बढ़ाता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। पथरी और मूत्र संस्थान की दूसरी बीमारियों से बचाता है। चेहरे के साथ पूरी त्वचा में चमक पैदा करता है। पानी और मांड के कारण ऐसा होता है। कब्ज, गैस और बवासीर से दूर रखता है। मोटापे से बचाता है। मांसपेशियों को ताकत देता है।

बोरे-बासी से जुड़ी रोचक बातें-

स्कूल में बच्चे गुरुजी से छुट्टी मांगने के लिए कहते हैं- बासी खाए बर जाहूं गुरुजी। छत्तीसगढ़ी कहावत है- बासी के नून नई हटे। यानी गई हुई इज्जत वापस नहीं आती।बासी का चावल अंगाकर, पान रोटी या फरा बनाने के भी काम आता है। बची हुई बासी खड़ा नमक मिलाकर पशुओं को दे दी जाती है।

बोरे बासी गीत

आ गे आ गे आ गे  बोरे बासी तिहार,

मानत ये ला छत्तीसगढ़ सरकार।

बोरे बासी म हय अबड़ गुन,

चटनी संग खाले डार के थोकीन नून।

खावत हे बोरे बासी मजदूर किसान संत्री मंत्री सरकार,

बोरे बासी के गुन ला बगरा दिस देश विदेश मे अपार।

छत्तीसगढ़ के बोरे बासी सबके मन ला भा गे,

सब बोरे बासी खाके मनाथन ये तिहार।

 छत्तीसगढ़ महतारी के महिमा दाऊ जी हा जगात हे,

छत्तीसगढ़ के गुन ला सब जगह गात हे,

छत्तीसगढ़ आदर मान ला बढ़हावत हे भूपेश सरकार।।

कल गौठानों में धूमधाम से मनाया जाएगा हरेली तिहार, पारंपरिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ राज्य का खेती-किसानी से जुड़ा हरेली पर्व 8 अगस्त को पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जाएगा। हरेली पर्व के दिन सुराजी गांव योजना के अंतर्गत निर्मित गौठानों में कृषि यंत्रों और गोधन की पूजा अर्चना के साथ ही पारंपरिक खेल-कूद और व्यंजन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी मंत्रियों, संसदीय सचिव, निगमों-मंडलों, आयोगों के पदाधिकारियों को गौठानों में आयोजित होने वाले हरेली पर्व के कार्यक्रम में शामिल होने और लोगों से बातचीत कर गौठान और गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन की स्थिति को बेहतर बनाने की पहल के निर्देश दिए हैं। 


बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य में गोधन न्याय योजना की शुरुआत बीते साल हरेली पर्व के दिन 20 जुलाई को किया गया था। गोधन न्याय योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसकी लोकप्रियता और चर्चा छत्तीसगढ़ राज्य ही नहीं बल्कि देश में हो रही है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से पशुपालकों, ग्रामीणों से 2 रुपए किलो की दर से गोबर क्रय किए जाने की शुरुआत की थी। गौठानों में क्रय गोबर से वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट प्लस खाद का निर्माण किए जाने के साथ ही महिला स्व-सहायता समूह द्वारा विविध उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। 

गोधन न्याय योजना 

बीते एक साल में गोधन न्याय योजना के जरिए पशुपालक ग्रामीणों से 97.55 करोड़ रूपए का गोबर बेचकर अब तक लगभग 10 लाख क्विंटल वर्मी खाद का निर्माण किया जा चुका है। इस योजना के जरिए गोबर की खरीदी होने से ग्रामीणों, पशुपालक-किसानों को सीधे लाभ प्राप्त होने लगे हैं। गौठान और गोधन न्याय योजना के माध्यम से ग्रामीण अंचल में शुरू हुई आयमूलक गतिविधियों ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक गति प्रदान की है। 

चर्चा-परिचर्चा का आयोजन 

गोधन न्याय योजना के राज्य नोडल अधिकारी और कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विशेष सचिव एस. भारतीदासन ने गौठानों में 8 अगस्त को हरेली पर्व के आयोजन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने राज्य के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगर निगमों के आयुक्तों सहित नगर पालिका परिषद के अधिकारियों को भेजे अपने पत्र में हरेली पर्व के पावन अवसर पर गौठानों में पारंपरिक खेल जैसे गेड़ी दौड़, कुर्सी दौड़, फुगड़ी, रस्सा-कस्सी, भौंरा, नारियल फेक प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन की प्रतियोगिताओं का आयोजन करने को कहा है। साथ ही गौठान प्रबंधन समिति, स्व-सहायता समूह और जनप्रतिनिधियों से गौठानों की गतिविधियों के संबंध में चर्चा-परिचर्चा का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं।

चारागाह विकास के निर्देश

हरेली पर्व के दिन गौठानों में पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेष रूप से पशु चिकित्सा शिविर लगाने के साथ ही ग्रामीणों-पशुपालकों को गौठानों में पशुओं को लाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने को भी कहा है। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित होने वाले वर्मी कंपोस्ट के सुरक्षा और रख-रखाव का प्रबंधन तथा स्थानीय स्तर पर कृषकों को वर्मी कंपोस्ट खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित करने को भी कहा गया है। गौठानों में फलदार, छायादार पौधों विशेषकर कदम का पौधा लगाए जाने और चारागाह विकास के भी निर्देश दिए गए हैं। 

गौठानों मे पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन

बेमेतरा कलेक्टर विलास भोसकर संदीपान ने एक परिपत्र जारी कर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व 08 अगस्त हरेली तिहार के अवसर पर गौठानों मे पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। उप वन मंडलाधिकारी, उप संचालक कृषि-पशुधन विकास विभाग बेमेतरा, नगरीय निकाय के CMO, सहायक संचालक उद्यान और जिले के जनपद पंचायत नवागढ़, बेरला, बेमेतरा, साजा के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जारी पत्र मे कहा गया है कि गौठान प्रबंधन समिति, स्व सहायता समूह, ग्राम जनप्रतिनिधियों से गौठान की गतिविधियों के संबंध में चर्चा कराई जाए। पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन कराया जाए। खरीफ फसलों के सुरक्षा के लिए पशुओं को गौठान में लाने प्रोत्साहित किया जाए। 

कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन

गौठान में बेचे जा रहे हैं गोबर, उत्पादित जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट प्लस के रख रखाव और सुरक्षा के समुचित प्रबंधन- छायादार चबूतरा, तिरपाल के माध्यम से बचाव के संबंध में जागरूक किया जाए। वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट प्लस का उत्पादन विक्रय और फसल में उपयोग-फायदे के संबंध में कृषकों को प्रेरित किया जाए। गौठान में फलदार छायादार वृक्षारोपण विशेषकर कदम के पौधेरोपण किया जाए। इस आयोजन  के लिए स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाकर कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित किया जाए।

रोका छेका अभियान 1 जुलाई से संचालित

गौठान की गतिविधियों का विस्तारण कर गौठान में गोबर क्रय करते हुए संग्रहित गोबर से वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट प्लस और अन्य उत्पादन तैयार किया जा रहा है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर, गौ पालन और गौ सुरक्षा को प्रोत्साहन के साथ-साथ गौठानों, जिले की महिला स्व सहायता समूह को स्वावलंबी बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ फसल को पशुओं खुली चराई से नियंत्रण के लिए रोका छेका अभियान 1 जुलाई से संचालित है। 

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.