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एसडीएम पटवारियों ने 46 को जारी किया नोटिस, डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही का मामला

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रायपुर। एसडीएम बैकुंठपुर एवं सोनहत ने 46 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें बैकुंठपुर तहसील के 16, पटना के 15, पोड़ी बचरा के 5 तथा सोनहत तहसील के 10 पटवारी शामिल है। कोरिया कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी के निर्देश पर पटवारियों के खिलाफ यह कार्रवाई डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री कार्य में लापरवाही बरतने के कारण की गई है।

गौरतलब है कि शासन के निर्देशानुसार डिजिटल क्रॉप सर्वे के अंतर्गत पटवारियों को सर्वेयर आईडी तैयार करने, सर्वेयर हेतु खसरा ऑनलाइन उपलब्ध कराने तथा सर्वेक्षित खसरों का अनुमोदन करने का दायित्व सौंपा गया है। संबंधित पटवारियों द्वारा इस कार्य में लापरवाही बरतने के कारण अपेक्षित प्रगति नहीं आई है। इस कारण शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं तथा धान खरीदी व्यवस्था में होने वाली दिक्कत को देखते हुए कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित पटवारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश एसडीएम को दिए। संबंधित पटवारियों को तीन दिवस के भीतर नोटिस का जवाब देने के निर्देश दिए है। कोरिया जिले के 161 ग्रामों में चल रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य को 30 सितम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


अब रियल स्टेट के विज्ञापनों में देना होगा नम्बर और क्यूआर कोड रेरा पंजीकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेरा द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि अब सभी प्रकार के रियल एस्टेट विज्ञापनों में रेरा पंजीकरण नंबर और रेरा वेबसाइट का पता स्पष्ट रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य होगा।

इन निर्देशों का पालन प्रिंट मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रोशर, पोस्टर, होर्डिंग, पंपलेट और अन्य सभी प्रचार माध्यमों पर करना होगा। रेरा ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण नंबर और वेबसाइट पते का फॉन्ट प्रकार और आकार वही होना चाहिए जो प्रमोटर के मोबाइल नंबर और पते के लिए उपयोग किया गया है, ताकि उपभोक्ता आसानी से इस जानकारी को पढ़ और समझ सकें।

क्यूआर कोड से सीधे परियोजना की जानकारी

रेरा द्वारा जारी निर्देश के तहत, प्रत्येक विज्ञापन में रेरा द्वारा जारी क्यूआर कोड भी शामिल करना होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन कर खरीदार सीधे संबंधित परियोजना की विस्तृत जानकारी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकेंगे।

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

रेरा ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वाले प्रमोटर्स या एजेंट्स के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छत्तीसगढ़ रेरा ने सभी प्रमोटर्स, एजेंट्स और विज्ञापन एजेंसियों से अपील की है कि वे उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इन दिशा-निर्देशों का पालन करें।


डिजिटल तकनीक का उपयोग करें लेकिन उस पर निर्भरता से बचें - राज्यपाल डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने युवाओं का आव्हान किया है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग नवाचार और रचनात्मकता के लिए करें लेकिन उस पर निर्भरता से बचें। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में सोमवार को डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि कोविड-19 के बाद डिजिटल माध्यम ने शिक्षा, कार्य और रिश्तों को आसान बनाया पर इससे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। योग ध्यान और संतुलित जीवन अपनाकार ही मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत रखा जा सकता है।

कार्यशाला में विभिन्न  के कुलपति, महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक शोधार्थी, सामाजिक संगठनो से जुड़े बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। प्रतिभागियों ने डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने के उपायो पर विचार विमर्श किया। राज्यपाल श्री डेका ने कार्यशाला में कहा कि 21 सदी में हमारी जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया लेकिन प्रकृति का स्वरूप आज भी वैसा ही है। सूर्य पूर्व में उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। धरती अब भी हरियाली का चादर ओढ़ कर हमे जीवन देती है, परंतु बदलाव हमारी सभ्यता व दिनचर्या में हुआ है। सतत् विकास की कमी और बदलते परिवेश ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।

राज्यपाल ने कहा कि एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति और परिवारजनों के बीच संवाद की कमी ने भी मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर किया है। आज अधिकांश लोग मोबाईल और इंटरनेट में व्यस्त रहते है और आपसी संवाद व भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है।

डेका ने विद्यार्थियों से कहा कि मानसिक दबाव न हो इसके लिए वे अपनी क्षमता के अनुरूप अपने कैरियर का चुनाव करें और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा से बचें। ओवरथिंकिंग और संदेह से दूर रह कर जीवन का आनंद लें। मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने में संकोच न करें और अंतरात्मा की आवाज सुनकर अपने लिए सही रास्ते का चुनाव करें। उन्होंने कहा कि प्रार्थना, योग, ध्यान, प्राणायाम और सात्विक जीवन शैली भारतीय परंपरा में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के मूल आधार रहे हैैं, यदि इन्हें दिनचर्या में शामिल किया जाए तो जीवन की कई चुनौतियों का समाधान स्वतः मिल सकता है।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक और मानसिक शक्ति फाउंडेशन मुंबई के संस्थापक डॉ. अमरेश श्रीवास्तव ने अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं है बल्कि समाज की चेतना और मानसिक शक्ति का भी प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव को गंभीर समस्या मानते हुए इस दिशा में अनुसंधान और गहन अध्ययन को आवश्यक बताया।

कार्यशाला में स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने दिया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर यह कार्यशाला आयोजित की गई है तथा डिजिटल युग में स्वास्थ्य पर गहन चर्चा समय की आवश्यकता है। आभार प्रदर्शन प्रोफेसर अंबर व्यास ने किया। इस अवसर पर एमसीए के छात्र शिवकुमार महोबिया और शोध छात्र अरूण कुमार पटेल को उत्कृष्ट इनोवेशन के लिए राज्यपाल ने सम्मानित किया।


बस्तर अब डर से नहीं, डिजिटल बदलाव से पहचाना जा रहा है : विष्णुदेव साय

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने बस्तर में शांति व्यवस्था, विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों पर चर्चा की। इसके साथ ही हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार की प्रधानमंत्री को जानकारी दी।

दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी उनके आवास पर मुलाकात की। जहां राज्य के विकास, नक्सल ऑपरेशन सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब बस्तर का चेहरा बदल रहा है, जो कभी बंदूक और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, आज वहाँ मोबाइल टावर खड़े हो रहे हैं, जो सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि विकास और विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सरकार द्वारा विगत डेढ़ वर्ष में 64 नए फॉरवर्ड सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है। इन सुरक्षा चौकियों के आसपास गांवों में न केवल पुलिस की उपस्थिति से सुरक्षा की भावना बनी है, बल्कि इन इलाकों में अब नेटवर्क भी पहुंच गया है। सरकार ने अब तक कुल 671 मोबाइल टावर चालू कर दिए हैं, जिनमें से 365 टावरों में 4G सेवा उपलब्ध है। यह न सिर्फ तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह संकेत है कि अब आदिवासी क्षेत्रों में संचार क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर में सिर्फ मोबाइल टावर नहीं लग रहे हैं, बल्कि ये टावर इस बात का सबूत हैं कि वहां के बच्चे और युवा भी अब डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। पहले जहां बच्चों को पढ़ाई या नौकरी की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता था, अब वही काम वे अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए ऑनलाइन कर पा रहे हैं। अब बस्तर का युवा भी स्मार्टफोन से अपनी दुनिया खुद बना रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया सुरक्षा कैंपों के इर्द-गिर्द बसते गांवों में अब बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुँच रही हैं। नियद नेल्लानार योजना के तहत चिन्हित 146 ग्रामों में 18 सामुदायिक सेवाएं और 25 तरह की सरकारी योजनाएं एक साथ क्रियान्वित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया सुशासन तिहार के तहत अब तक सैकड़ों समाधान शिविर आयोजित किए गए हैं, जहां सांसद से लेकर विधायक तक गांव गांव पहुंचकर जनता की शिकायतों का समाधान किया। इन शिविरों में ग्रामीणों को राशन कार्ड, आधार, पेंशन, स्वास्थ्य परीक्षण, स्कूल प्रवेश, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला गैस जैसी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर दिया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए की जा रही योजनाओं और नवाचारों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संकट से निपटने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है, और जनभागीदारी से लेकर तकनीकी उपायों तक, हर स्तर पर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में अब बारिश के दिन कम हो गए हैं पहले जहाँ लगभग 100 दिन बारिश होती थी, अब सिर्फ़ 65 दिन ही होती है। तकनीक के तहत गांव-गांव में पानी बचाने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। जहां पहले पानी बरसकर बह जाता था, अब उसे रोकने और जमा करने की कोशिश हो रही है। इस काम में आधुनिक तकनीक जैसे GIS मैपिंग और जलदूतनाम का मोबाइल ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यह पता चलता है कि कहां कितनी ज़रूरत है।

सबसे खास बात यह है कि इस अभियान में महिलाएं बड़ी भागीदारी निभा रही हैं। महिला समूह तालाबों की सफाई, गहराई बढ़ाने, और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करने में आगे आ रही हैं। इस साझेदारी से गांवों में पानी की कमी दूर हो रही है और लोगों को अपने इलाके में ही साफ और पर्याप्त पानी मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को नालंदा परिसर की जानकारी भी दी, जो देश की पहली 24x7 हाईब्रिड सार्वजनिक लाइब्रेरी है। 18 करोड़ की लागत से बनी इस सुविधा में ई-लाइब्रेरी, यूथ टॉवर, हेल्थ ज़ोन और सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था है। अब तक 11,000 से अधिक छात्र लाभांवित हो चुके हैं, जिनमें 300 से अधिक छात्र यूपीएससी और सीजी पीएससी में सफलता पाई है। साथ ही, मुख्यमंत्री ने प्रयासमॉडल की भी जानकारी दी, जिसमें वंचित व आदिवासी बच्चों को आईआईटी, नीट, क्लैट जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। अब तक 1508 छात्र चुनिंदा राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश पा चुके हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री साय के प्रयासों की सराहना की और छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

छत्तीसगढ़ का बजट: गाँव-गाँव तक पक्की सड़कें, मोबाइल टावर, शहरों में बढ़ेगी विकास की रफ्तार

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ का बजट प्रदेश को डिजिटल, सुरक्षित और विकसित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर, गांवों के विकास, शहरों में नई सुविधाओं और सुरक्षा तक हर क्षेत्र में सरकार ने कुछ नया किया है। आने वाले सालों में छत्तीसगढ़ और आगे बढ़ेगा और देश के सबसे उन्नत राज्यों में शामिल होगा!


1. सरकारी कर्मचारियों के लिए नया पेंशन फंड पहली बार
छत्तीसगढ़ सरकार ने “पेंशन फंड” बनाया है, ताकि सभी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सुरक्षित रहे। साथ ही, देश में पहली बार “छत्तीसगढ़ ग्रोथ एंड स्टेबिलिटी फंड” बनाया जा रहा है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

2. अब हर गांव में मोबाइल टॉवर और पब्लिक बसें 
गांवों में रहने वाले कई लोगों को फोन नेटवर्क नहीं मिलता। सरकार अब “मुख्यमंत्री मोबाइल टॉवर योजना” लेकर आई है, जिससे जंगलों और पहाड़ों में बसे गांवों में भी मोबाइल का नेटवर्क मिलेगा। इससे बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे और लोग अपने रिश्तेदारों से आसानी से बात कर सकेंगे।

इसके अलावा, कुछ गांवों में पब्लिक बसें नहीं चलतीं, क्योंकि वहाँ रहने वाले लोग कम होते हैं। अब सरकार “मुख्यमंत्री परिवहन योजना” के तहत ऐसी जगहों पर भी बसें चलाने जा रही है, ताकि गांव से ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक लोग आसानी से आ-जा सकें।

3. शहरों का मेकओवरः नए अस्पताल, कॉलेज और मेट्रो 
छत्तीसगढ़ के शहरों को और सुंदर और आधुनिक बनाने के लिए सरकार कई बड़े प्रोजेक्ट्स ला रही है:
- नवा रायपुर में “मेडिसिटी” एक ऐसा शहर जहाँ सबसे अच्छे अस्पताल होंगे।

- “एजुकेशन सिटी” यहाँ हर तरह की पढ़ाई के लिए बड़े कॉलेज और यूनिवर्सिटी बनाई जाएंगी।

- राष्ट्रीय फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान (NIFT) जो बच्चे फैशन डिजाइनिंग सीखना चाहते हैं, उनके लिए एक खास कॉलेज खुलेगा।

- रायपुर-दुर्ग मेट्रो- अब बड़े शहरों में मेट्रो ट्रेन का सर्वे किया जाएगा, ताकि भविष्य में मेट्रो सेवा शुरू हो सके।

4. सुरक्षा और पर्यटनः नई योजनाएँ
- NSG की तर्ज पर “स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप” (SOG) यह एक खास पुलिस टीम होगी, जो खतरनाक अपराधियों से निपटेगी।

- -अब राज्य में “राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (SISF)” का गठन होगा, जो CISF की तर्ज पर काम करेगा। इससे राज्य में उद्योगों और महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा मजबूत होगी।

- छत्तीसगढ़ का पहला “आइकॉनिक टूरिज्म डेस्टिनेशन” रही है, जहाँ जंगल, पानी और वाइल्डलाइफ का मज़ा मिलेगा! सरकार 200 करोड़ रुपये खर्च करके नया पर्यटन स्थल बनाने जा रही है।

5. पत्रकारों के लिए सरकार ने किया बड़ा फैसला
- पत्रकारों की एक्सपोजर विजिट के लिए बजट
- पत्रकार संघ के दफ्तरों के नवीनीकरण के लिए पैसे
- पत्रकार सम्मान निधि दोगुनी कर दी गई है!

6. गाँव-गाँव तक चमकेंगी पक्की सड़कें 
अब गाँवों की सड़कें और मजबूत और बेहतर होंगी। इसके लिए –
- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए ₹845 करोड़
- जनजातीय क्षेत्रों की सड़कें ₹500 करोड़
- मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना - ₹119 करोड़
- मुख्यमंत्री रिंग रोड योजना शुरू की जाएगी, इसके लिए 100 करोड़ का प्रावधान
- नई सड़कों के निर्माण के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान।

7. शहर और गाँव दोनों होंगे स्मार्ट 
- नगर पालिकाओं का विकास ₹750 करोड़ (हर शहर को और सुंदर बनाया जाएगा)
- नगर निगमों में सुनियोजित विकास के लिए मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना शुरू की जाएगी, 500 करोड़ का प्रावधान
- नई फायर स्टेशन्स के लिए ₹44 करोड़ (सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत)
- मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

8. बस्तर-सरगुजा में पर्यटन और एडवेंचर की दुनिया
अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं या घर से दूर प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं, तो सरकार ने आपके लिए बस्तर और सरगुजा में होमस्टे पॉलिसी लागू की है। अब यहां आने वाले पर्यटक गांवों में रहकर स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव ले सकेंगे। इसके अलावा, जशपुर में एडवेंचर टूरिज्म और टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा, जिससे वहां आने वाले लोगों को और भी मजा आएगा।

9. नालंदा लाइब्रेरी और विज्ञान पार्कः छात्रों के लिए नया तोहफा
छात्रों की पढ़ाई को और रोचक बनाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हेतु अनुकूल माहौल देने के लिए 17 और “नालंदा लाइब्रेरी” खोली जाएंगी। यही नहीं, विज्ञान में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए बस्तर और सरगुजा में मोबाइल साइंस लैब शुरू की जाएगी और साइंस पार्क की स्थापना सरगुजा, बस्तर, बलरामपुर, जशपुर और रायगढ़ में होगी। अब बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर विज्ञान को प्रयोगों के माध्यम से सीखने का मौका मिलेगा।

कृषि और डिजिटल तकनीक का संगम
अब किसानों को भी डिजिटल सुविधा मिलेगी! भूमि अभिलेखों (Land Records) के डिजिटलीकरण और डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए विशेष फंड दिया गया है। इससे किसानों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी तुरंत मोबाइल या कंप्यूटर पर मिल सकेगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार
राज्य के गरीब और निःसंतान दंपतियों के लिए रायपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ART सुविधा शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, सरकारी अस्पतालों में MRI और CT स्कैन मशीनों के लिए भी बजट रखा गया है, ताकि मरीजों को अच्छी चिकित्सा सुविधा मिल सके। सभी ब्लॉकों में सिकल सेल स्क्रीनिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा जशपुर व मनेंद्रगढ़ में फिजियोथेरेपी व नेचुरोपैथी के सेंटर स्थापित किए जाएंगे

बिना कागज के होगी प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन 
अब जमीन या मकान खरीदने-बेचने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी! सरकार ने फेसलेस और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।

चिकित्सा और खाद्य सुरक्षा में बड़ा कदम
रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की “इंटीग्रेटेड फूड एंड ड्रग लैबोरेटरी” बनाई जाएगी, जिसमें दवाओं और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच होगी। इस प्रोजेक्ट के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। नक़ली दवाओं और मिलावट करने वालों पर कार्रवाई के लिए सरकार का बड़ा क़दम है।

पेट्रोल के रेट में एक रुपए की कमी, कर्मचारियों का डीए बढ़ा
छत्तीसगढ़ सरकार ने बजट में जनता को राहत देने वाले कई अहम फैसले किए हैं। पेट्रोल की कीमत में ₹1 प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे आम लोगों, किसानों और उद्योगों को लाभ होगा। इसके पहले सरकार ने बल्क में डीजल खरीदी पर वैट घटाकर 17% कर दिया था, जिससे परिवहन और कृषि कार्यों की लागत में कमी आई है। वहीं, राज्य के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 3% की बढ़ोतरी की गई है, जो मार्च से लागू होगी।

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए नई योजना
छत्तीसगढ़ सरकार पहली बार सभी ग्राम पंचायतों में डिजिटल पेमेंट (UPI) को बढ़ावा देने के लिए विशेष बजट का प्रावधान कर रही है। इससे गाँवों में भी लोग आसानी से डिजिटल लेनदेन कर सकेंगे और नकद लेनदेन की जरूरत कम होगी।

पहली बार ‘आइकॉनिक डेस्टिनेशन’ और ‘वेलनेस-वाइल्डलाइफ-वॉटर टूरिज्म’ विकसित होगा

छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘आइकॉनिक डेस्टिनेशन’ और ‘वेलनेस-वाइल्डलाइफ-वॉटर टूरिज्म’ के लिए ₹200 करोड़ का बजट रखा गया है। इससे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यह एक बड़ा आकर्षण केंद्र बनेगा।

व्यवसायियों एवं आम आदमी को राहत
बजट में अचल संपत्ति के अंतरण पर मुद्रांक शुल्क के 12 प्रतिशत सेस को समाप्त किया गया है। इससे आम जनता को लाभ मिलेगा। वहीं, ई वे बिल जनरेट करने की मूल्य सीमा को 50 हजार रुपए से बढ़ा कर 1 लाख रुपए की गई है। छोटे व्यवसायियों को राहत देते हुए सरकार ने कई वर्षों से बकाया वैट की राशि माफ करने का निर्णय लिया है।

रचनात्मक डिजिटल मीडिया के लिए बड़ी संभावनाएं लेकिन इससे उपजी चुनौतियों से निपटने कारगर कदम उठाने भी जरूरी: के.जी. सुरेश

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 रायपुर : पूरा विश्व पैंडेमिक की तरह इंफोडेमिक से भी जूझ रहा है। कई बार डिजिटल मीडिया के माध्यम से त्रुटिपूर्ण सूचनाएं, गलत तथ्यों को लेकर फैलाई जा रही सूचनाएं और तोड़ मरोड़ कर पेश की जाने वाली सूचनाओं से जो भ्रम फैलता है उससे समाज को काफी नुकसान पहुंचता है। यद्यपि डिजिटल मीडिया में रचनात्मकता के लिए बहुत संभावनाएं हैं। इससे उपजी चुनौतियों से निपटने कारगर कदम उठाये जाएं, राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता अभियान चलाएं जाएं ताकि फेक न्यूज आदि से निपटा जा सके तो डिजिटल मीडिया हमारे समाज के लिए प्रभावी भूमिका निभा सकती है। यह बात नारद जयंती पर आयोजित देवऋषि नारद पत्रकारिता सम्मान के मौके पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति के.जी. सुरेश ने डिजिटल क्रांति के समय पत्रकारिता विषय पर अपने संबोधन में की। इस मौके पर जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मयंक श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।


 

इस अवसर पर देवर्षि नारद सम्मान से बीएस टीवी के ब्यूरो चीफ डॉ. अवधेश मिश्र, वरिष्ठ छायाकार भूपेश केशरवानी को स्वर्गीय रमेश नैयर सम्मान एवं वरिष्ठ पत्रकार भोलाराम सिन्हा को स्वर्गीय बबनप्रसाद मिश्र सम्मान से पुरस्कृत किया गया। 

सुरेश ने कहा कि जिस तरह वर्ष प्रतिपदा और गुरुपूर्णिमा को आयोजन होते हैं वैसे ही नारद जयंती के दिन भी आयोजन होना चाहिए। जब वर्ष प्रतिपदा कहते हैं तो वैसा ही सात्विक भाव मन में आता है जो न्यू ईयर के विचार में नहीं आता। हमें भारतीय परंपरा के अनुसार नारद जयंती के दिन पत्रकारों के लिए, पत्रकारों हेतु और पत्रकारों द्वारा आयोजन करना चाहिए। उपनिषद में जो निर्भीकता का भाव होता है, वैसा ही भाव देवर्षि नारद हमें सिखाए हैं। पत्रकार की सादगी उनसे सीख सकते हैं। उन्होंने लोककल्याण के लिए सूचना का संचार किया। त्रस्त प्रजा के समाचार देवताओं तक पहुंचाए इसलिए भगवत गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि मैं ऋषियों में देवऋषि नारद हूँ। 

डिजिटल मीडिया के सकारात्मक पक्षों के बारे में उन्होंने बताया कि पहले मीडिया सूचनाएं देता था, अब न्यू मीडिया फीडबैक भी देता है। मीडिया का लोकतांत्रिकीकरण हो गया है। इसके कारण डिजिटल मीडिया की ताकत बढ़ी है। सोशल मीडिया अब समाज को प्रभावित कर रहा है, दुनिया भर में कई बड़े आंदोलन खड़ा करने में डिजिटल मीडिया ने भूमिका निभाई। लेकिन डिजिटल मीडिया तभी प्रभावी है जब जमीन पर आंदोलन मजबूत हो। डिजिटल मीडिया के नाम पर कोई भी समाचार और विचार परोसा जा रहा है, लेकिन यह पत्रकारिता नहीं है। इस क्षेत्र में अनेक एक्टिविस्ट उतर आए हैं जबकि पत्रकार को फैक्टिविस्ट होना चाहिए, तथ्यों के आधार पर पत्रकारिता होना चाहिए। इन्हीं कारणों से डिजिटल मीडिया के नाम पर पत्रकारिता की विश्वसनीयता कम हुई है। पत्रकारिता में स्वतंत्रता जरूरी है लेकिन स्वच्छंदता नहीं होनी चाहिए। पत्रकारिता में परीक्षण आवश्यक है लेकिन अधिकांशतः डिजिटल मीडिया में कोई परीक्षण नहीं हो रहा है, गलत प्रसारित हो जाने के बाद उसे हटा लेना आसान है इसलिए उसकी विश्वसनीयता अच्छी नहीं होती। डिजिटल मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता है। दूसरी चुनौती फेक समाचारों का है, कहीं का फोटो या वीडियो लेकर कुछ भी समाचार परोसा जा रहा है। सामान्य जनता ऐसे गलत समाचारों पर भी विश्वास करते हैं, इससे समाज गुमराह हो रहा है। ऐसी समाचारों के कारण भारत में पढ़े लिखे लोग भी कोविड का टीका नहीं लगवा रहे थे। यह देश के लिए भी खतरा है। इस फेक न्यूज की पहचान करना जरूरी है। जरूरत है नागरिकों को इस खतरे के प्रति जागरूक करने की है, मीडिया साक्षरता अभियान शुरू करने की आवश्यकता हैं। डिजिटल मीडिया की ताकत का उपयोग करके सकारात्मक और रचनात्मक विषयों को जनता तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि मयंक श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि नारद ब्रह्मांड के पहले पत्रकार थे, वे रामायण और महाभारत जैसी रचना के प्रेरणास्त्रोत भी थे। भागवत पुराण में देवऋषि नारद के प्रसंग आते हैं, जिससे पता चलता है कि वे कितनी तेजी से सूचनाएं प्रस्तुत करते थे। नारद संवाददाता थे, केवल समस्या नहीं बताते थे बल्कि समस्याओं का समाधान भी देते थे। आयुक्त जनसंपर्क श्रीवास्तव ने बताया कि लोग बहुत जिज्ञासु होते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि संचार के माध्यम उन्हें समग्र तस्वीर से परिचित कराएं। समाज में बहुत कुछ बुरा घट रहा है तो बहुत कुछ अच्छा भी हो रहा है। इस सकारात्मकता से परिचित कराना बहुत जरूरी है, जिससे लोगों के मन में आशावादिता विकसित हो, वे बेहतर समाज के निर्माण में जुट पाएं। 

संबोधन के बाद अतिथियों को स्मृति चिन्ह आयोजन समिति के संयोजक आर. कृष्णा दास ने दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती प्रियंका कौशल ने किया और आभार प्रदर्शन आशुतोष मंडावी ने किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र के प्रचार प्रमुख कैलाश जी, प्रांत के प्रचार प्रमुख संजय तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडेय, जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 1 जून को करेंगे हाईटेक लाइब्रेरी का लोकार्पण

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रायगढ़। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वाई-फाई कैम्पस, डिजिटल क्लास रूम, ई-लाइब्रेरी, कैंटिन की सुविधा से युक्त रायगढ़ की हाईटेक जिला लाइब्रेरी का लोकार्पण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 1 जून को करेंगे। इस लाइब्रेरी में तैयार किए गए एयरकंडीशन स्टडी रूम में एक साथ 250 बच्चे पढ़ सकते है। जिला प्रशासन की पहल पर 68 साल पुरानी लाइब्रेरी को पूरी तरीके से रिनोवेट किया गया है। यहां छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ाई गई है। किताबे और फर्नीचर भी अपग्रेड किया गया है। यहां शहर के बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल जगह मिलेंगी।

उल्लेखनीय है कि रायगढ़ का पुस्तकालय 68 वर्ष पुराना है। जिला गजेटियर के मुताबिक सन 1955 में इसकी स्थापना की गई थी। सन् 1964-65 में शासकीय पुस्तकालय, रायगढ़ में लगभग 7,000 पुस्तकें थीं तथा इसके 281 सदस्य थे। आज लाइब्रेरी में 23 हजार से ज्यादा किताबें पढऩे के लिए उपलब्ध है। लाइब्रेरी को आधुनिक तकनीकों से अपग्रेड किया गया है। पूरा कैंपस वाईफाई युक्त है। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए 20 कंप्यूटर  लगाए गए हैं। लाइब्रेरी में स्टडी मेटेरियल प्रिंट करने की भी सुविधा छात्रों को मिलेगी। इसके अलावा यहां एक डिजिटल क्लासरूम बनाया गया है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर एक साथ 30 छात्र पढ़ाई कर सकेंगे। ग्रुप स्टडी के लिए भी कमरे बनाए गए हैं।

लाइब्रेरी के रेनोवेशन में खास बात यह है कि यहां बड़े शहरों की तर्ज पर स्टडी केबिन बनाया गया हैं। यह छात्रों के लिए व्यक्तिगत स्टडी टेबल की तरह होगा। जिससे छात्र लाइब्रेरी में एकाग्रचित होकर पढ़ाई कर सकें। यहां ऐसे लगभग 180 केबिन तैयार किए गए हैं। यह लाइब्रेरी सुबह 8 से 10 बजे तक छात्रों के लिए खुली रहेगी। इसके अलावा यहां ई-लाइब्रेरी की सुविधा भी छात्रों को मिलेगी। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर विशेष फोकस करते हुए उसके लिए जरूरी किताबें और मासिक मैगजीन भी यहां छात्रों को उपलब्ध होगी। 


छत्तीसगढ़ में अब न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जाएगा। यह अभियान 5 वर्ष तक चलेगा। इस कार्यक्रम में अशिक्षित व्यक्तियों को बुनियादी साक्षरता एवं अंक ज्ञान प्रदान करने के साथ उन्हें जीवन में आने वाले कुशलता के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसमें डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, चुनावी साक्षरता, कौशल विकास, बुनियादी शिक्षा, सतत शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य में स्वच्छता पर विशेष रुप से जागरूक करने का कार्य भी किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नवाचारी कार्यक्रमों की देश में लगातार सराहना की जा रही है। हमें प्रदेश की एक चौथाई असाक्षरों को साक्षर किए जाने की दिशा में निरंतर कार्य करना है। उन्होंने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुभकामनाएं दी। 
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रौढ़ शिक्षा और जीवन पर्यन्त शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है। 

उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता हेतु यह आवश्यक है कि शिक्षकों के साथ पालक भी बच्चों की शिक्षा में योगदान दें, अतः अशिक्षित पालकों को शिक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के सभी निकायों और शिक्षकों से अनुरोध किया कि स्वयंसेवी शिक्षक बनकर शिक्षा से वंचित व्यक्तियों को मुख्यधारा में लाने में अपना अमूल्य योगदान दें। साक्षरता दिवस पर आज आयोजित वेबीनार में सात हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा कि प्रदेश में साक्षरता कार्यक्रम को मिशन मोड में तथा नवाचारी तरीके से कार्य करने का गौरवशाली इतिहास रहा है।

उन्होंने समग्र शिक्षा एससीईआरटी और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण समन्वय के साथ कार्य की सफलता के लिए सक्रिय योगदान करने कहा। स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव एवं राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के डायरेक्टर राजेश सिंह राणा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय यूनेस्को द्वारा लिया गया। जिनके द्वारा इस वर्ष साक्षरता दिवस की थीम ज्तंदेवितउपदह स्पजमतंबल ैचंबमे है। उन्होंने कहा कि प्रौढ़ शिक्षा को अब सभी के लिए शिक्षा कहा गया है। उन्होंने कहा कि सशक्त देश की आधारशिला शिक्षा है।

 अतिरिक्त संचालक एससीईआरटी डॉ. योगेश शिवहरे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रौढ़ शिक्षा व जीवन पर्यन्त शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। राज्य पाठ्यचर्या में पहली बार प्रौढ़ शिक्षा के विषय को शामिल किया गया है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ का पहला राज्य हैं, जहां एससीआरटी में साक्षरता केंद्र स्थापित किया गया है। राज्य शिक्षा मिशन प्राधिकरण में असिस्टेंट डायरेक्टर एवं नोडल अधिकारी प्रशांत कुमार पांडेय ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता सप्ताह के बारे में एक प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्य गीत, नवभारत साक्षरता कार्यक्रम एवं गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ पर केंद्रित फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

ऑनलाइन मोबाइल गेम्स के माध्यम से एक मजेदार डिजिटल लर्निंग अनुभव : यादव

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रायपुर। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने जिन्गा इंडिया के साथ ऑनलाइन मोबाइल गेम्स के माध्यम से एक मजेदार डिजिटल लर्निंग अनुभव विकसित किया है। पत्र सूचना कार्यालय रायपुर के निदेशक कृपा शंकर यादव ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि आजादी क्वेस्ट ऑनलाइन मोबाइल गेम्स की एक मनोरंजक और शिक्षाप्रद सीरीज है, जिसका उद्देश्य एक मजेदार गेम प्ले के माध्यम से खिलाड़ियों को भारत की स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए एक मंच प्रदान करना है।



इस मौके पर पत्र सूचना कार्यालय रायपुर के उप निदेशक सुनील कुमार तिवारी ने बताया कि हिरोज ऑफ भारत ऐप को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में डाउनलोड किया जा सकता है। वहीं, केंद्रीय संचार ब्यूरो, प्रादेशिक कार्यालय, रायपुर के कार्यालय प्रमुख, शैलेष फाये ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह के तहत केंद्रीय संचार ब्यूरो रायपुर और क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर तथा जगदलपुर द्वारा विविध प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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