Media24Media.com: जाति प्रमाण पत्र

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गरियाबंद : जिले के कमार बसाहट गांवों में जनमन शिविर का हो रहा आयोजन, 27 अगस्त को 21 गांवों में लगेगी शिविर

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गरियाबंद : प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम- जनमन) के अंतर्गत जिले में विशेष पिछड़ी शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर जिले के 199 विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों में किया जा रहा है। शिविर के माध्यम से पीवीटीजी कमार सदस्यों को मूलभूत सुविधाओं राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, पीएम आवास, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वन अधकार पट्टा एवं पीएम किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। गांवों में शिविर लगाकर कमार सदस्यों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही मौके पर ही लोगों को विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं से लाभान्वित किया जा रहा है।


इसी कड़ी में 27 अगस्त को जिले के 21 कमार बसाहट गांवों में शिविर का आयोजन किया जायेगा। इनमें जनपद पंचायत गरियाबंद अंतर्गत दांतबाय, डुमरबाहरा, फुलकर्रा, गुजरा, हरदी, हाथबाय, जंगल धवलपुर में शिविर आयोजित की जोयेगी। इसी प्रकार जनपद पंचायत छुरा के ग्राम घटकर्रा, गोंदलाबाहरा, जामली, जरगांव, कनेसर एवं केंवटीझर में शिविर लगेगी। जनपद पंचायत फिंगेश्वर अंतर्गत ग्राम गनियारी एवं गुंडरदेही तथा जनपद पंचायत मैनपुर अंतर्गत ग्राम गोना, इंदागांव, जाड़ापदर, जांगड़ा, घुमरापदर एवं खरीपथरा

में शिविर का आयोजन किया जायेगा। कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने शिविरों के सुचारू आयोजन के लिए नोडल अधिकारियों को शिविर स्थलों के निरीक्षण के निर्देश दिए है। विभिन्न विभागों के जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी- कर्मचारियों को
शिविर स्थलों में जाकर पीएम जनमन के तहत लोगों को लाभान्वित करने में आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग करने के निर्देश दिए है। पीएम जनमन के तहत आयोजित किये जाने वाले यह शिविर विभिन्न तिथियों में जिले के विभिन्न गांवों में आयोजित की जा रही है।

स्कूल खुलते ही छात्रों के बनेंगे जाति-निवास प्रमाण पत्र

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जांजगीर-चांपा जिले में स्कूल खुलते ही उन छात्रों और पालकों को बड़ी राहत मिलेगी, जो जाति, निवास और आमदनी प्रमाण पत्र के लिए पटवारी, तहसील और चॉइस सेंटर का चक्कर काटकर परेशान होते हैं। कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए न सिर्फ इन्हें शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं से लाभान्वित करने का प्रयास किया है, लेकिन उन्होंने इन वर्ग के विद्यार्थियों और पालकों को जाति, निवास तथा आमदनी प्रमाण पत्र बनवाने में होने वाली परेशानियों को दूर करने का निर्णय लिया है।

कलेक्टर ने स्कूल खुलते ही सप्ताह भर के भीतर आवेदन भरने की प्रक्रिया प्रारंभ करने और विद्यार्थियों को जाति, निवास और आमदनी प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।  कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि स्कूल खुलते ही एडमिशन की प्रक्रिया प्रारंभ होने के साथ प्रमाण पत्र बनाने की कार्यवाही शुरू करें।  जैसे ही एडमिशन प्रारंभ होगी, विद्यार्थियों से जाति, निवास और आमदनी प्रमाण पत्र हेतु आवश्यक दस्तावेज भी संकलित की जाएगी। 

तहसीलदार ने जारी करेंगे आदेश 

यह प्रक्रिया स्कूल स्तर पर प्राचार्यों की जिम्मेदारी होगी। दस्तावेज संकलन के बाद संबंधित क्षेत्रों के पटवारी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद संबंधित तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रमाणपत्र जारी करेंगे।  कलेक्टर ने ये भी सुनिश्चित करने कहा है कि जाति, निवास और आमदनी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन वितरण और संकलन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्कूल की होगी। उन्होंने तहसीलदारों और एसडीएम को भी आवश्यक निर्देश देते हुए इसका गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।  उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि स्कूलों में दाखिला लेने वाले समस्त पात्र और आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों का दस्तावेज पूराकर प्रमाणपत्र जारी किया जाए। इन वर्ग के छात्रों या पालकों को तहसील या चॉइस सेंटर में जाने की आवश्यकता न पड़े यह भी पूरी तरह से सुनिश्चित की जाए।

शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना हमारी प्राथमिकता: कलेक्टर

कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने जिले के सभी स्कूलों में जाति, निवास और आमदनी प्रमाणपत्र बनाने के निर्देश देते हुए कहा है कि शासन की योजनाओं का लाभ उठाने में इन प्रमाणपत्रों की आवश्यकता होती है। कई बार पालक या विद्यार्थियों को अनावश्यक पैसे खर्च करने पड़ते हैं और कार्यालयों के चक्कर भी काटने पड़ते हैं। शासन द्वारा जाति, निवास और अन्य प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया आसान बनाई गई है।  हमारी भी कोशिश है कि जिले के किसी भी पात्र या आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रमाणपत्र के लिए भटकना न पड़े, इसलिए स्कूल स्तर पर ही प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाने से उन्हें छात्रवृत्ति प्राप्त करने के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और अन्य योजनाओं में भी आसानी से लाभ होगा। कलेक्टर ने सभी पालकों और विद्यार्थियों को इस पहल का लाभ उठाने की अपील की है।

आश्रम-छात्रावास में हो पर्याप्त व्यवस्था

कलेक्टर ने स्कूल संचालन के साथ ही जिले के सभी आश्रम और छात्रावासों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ समय पर मीनू के अनुसार भोजन वितरण, पेयजल की व्यवस्था और साफ सफाई के साथ शौचालय को ठीक करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्रम, छात्रावासों में पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

SC-ST वर्ग के लिए राहत, अब जाति प्रमाण पत्रों में 'अंग्रेजी' में अधिसूचित जाति होगा मान्य

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छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को जारी किए जाने वाले जाति प्रमाण पत्रों में 'अंग्रेजी' में अधिसूचित जाति को मान्य किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 1 मई को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को मात्रात्मक त्रुटि के कारण जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में हो रही कठिनाईयों को दूर करने के उद्देश्य से निर्णय लिया गया था, जिसके मुताबिक अंग्रेजी में अधिसूचित जाति को मान्य करने तथा जाति प्रमाण पत्रों में अंग्रेजी में ही अधिसूचित जाति का उल्लेख किया जाए। इसे लेकर शासन द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णय के परिपालन में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर दिया गया है। 

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 के अधीन बने नियमों के तहत निर्धारित प्रारूप में सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र (जाति प्रमाण पत्र) जारी किए जाते हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के विभिन्न समुदायों द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में आ रही कठिनाईयों के संबंध में शासन के ध्यान में लाया गया कि, विभिन्न जातियों, समुदायों में हिन्दी में उच्चारणगत विभेद के कारण कतिपय जातियों के जाति प्रमाण जारी नहीं हो पा रहे हैं।

जिला कलेक्टरों को पत्र जारी 

जिला कलेक्टरों को जारी पत्र में कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के 24 सितंबर 2013 के संदर्भित परिपत्र   में कहा गया है कि विशेष परिस्थिति में किसी आवेदक को अंग्रेजी में जारी सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में सक्षम अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि आवेदक द्वारा अगर भारत सरकार के द्वारा निर्धारित प्रारूप अनुसार या अंग्रेजी में सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की जाती है तो समुचित जांच और प्रक्रिया अपनाने के बाद उसे इस प्रारूप में स्थाई सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। 

प्रमाण पत्रों में 'अंग्रेजी' में अधिसूचित जाति का उल्लेख

इस परिपत्र में दिए गए निर्देश के अनुक्रम में स्पष्ट किया जाता है कि भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए हिन्दी, अंग्रेजी में अधिसूचित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की जाति नामों की सूची प्रकाशित की गई है। इस प्रकाशित सूची में अंग्रेजी उच्चरण में किसी भी प्रकार का भ्रांति या विवाद नहीं है। ऐसे में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों को जारी किए जाने वाले जाति प्रमाण पत्रों में 'अंग्रेजी' में अधिसूचित जाति का उल्लेख किया जाए। 

जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अब और आसान, ग्रामसभा का संकल्प और नगरीय निकायों की उद्घोषणा को माना जाएगा साक्ष्य

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लोगों को जाति प्रमाण पत्र (सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र) जारी करने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। इससे अब जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करना आसान हो गया है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर्स को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) नियम 2013 के प्रावधानों के तहत जहां जाति को प्रमाणित करने के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं हो तो ग्राम सभा द्वारा आवेदक की जाति के संबंध में पारित संकल्प को मान्य करते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।


कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि इसी तरह से नगर पंचायत या नगरपालिका परिषद या सामान्य सभा द्वारा की गई उद्घोषणा को जाति और मूल निवासी के संबंध में साक्ष्य के रूप में मान्य करते हुए नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ सक्षम प्राधिकारियों को निर्देशित करें कि राज्य शासन द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और प्रावधानों के तहत नियमानुसर (सामाजिक प्रास्थिति प्रमाण पत्र) जाति प्रमाण पत्र जारी करें।

बच्चों को घर पर ही प्रदान किए जा रहे जाति प्रमाण पत्र

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सुकमा जिले के बच्चों को जाति प्रमाण पत्र के अभाव में शासन की किसी भी योजना से वंचित न हों, इसलिए सुकमा जिला प्रशासन द्वारा जाति प्रमाण पत्र की घर पहुंच सेवा लगभग दो साल पहले शुरु की गई और अब तक 26 हजार से अधिक बच्चों को जाति प्रमाण पत्र दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जाति प्रमाण पत्र के अभाव में होने वाली परेशानी को देखते हुए जाति और निवास प्रमाण पत्रों की घर-पहुंच सेवा शुरू करने की घोषणा के फलस्वरुप आज स्कूली बच्चों को घर बैठे ही जाति प्रमाण पत्र मिल रहा है।

अब तक 26 हजार से ज्यादा जाति प्रमाण पत्र जारी

प्रशासन द्वारा जाति प्रमाण पत्रों के अभाव में बच्चों को होने वाली परेशानी के साथ ही इसे बनाने के लिए छात्रों की मशक्कत को देखते हुए घर-पहुंच जाति प्रमाण पत्र देने की योजना शुरू की गई और पहले चरण में शैक्षणिक सत्र 2019 के मध्य तक लगभग आठ हजार जाति प्रमाण पत्र बनाने के साथ ही छठवीं से बारहवीं तक अध्ययनरत सभी अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को जाति प्रमाण पत्र देने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इसके बाद पांचवीं कक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र देने का नया लक्ष्य निर्धारित कर मार्च 2020 से कार्य शुरू किया गया, ताकि छठवीं कक्षा में प्रवेश के साथ इन्हें आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ तत्काल मिल सके। 

9260 विद्यार्थियों को मिला जाति प्रमाण पत्र  

इसी प्रकार कक्षा दूसरी और आगे की कक्षाओं के छात्रों को भी जाति प्रमाण पत्र वितरण का फैसला लिया गया। सुकमा जिला प्रशासन द्वारा इस अभियान की शुरुआत से अब तक कक्षा दूसरी से बारहवीं तक के 26 हजार से अधिक बच्चों को जाति प्रमाण पत्र बनाया जा चुका है। जिसमें सुकमा विकासखण्ड के 5056, विकासंड छिंदगढ़ से 12 हजार 5 छात्र और कोंटा विकासखंड के 9260 विद्यार्थियों को उनके घर पर ही जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया निरंतर रुप से प्रगतिशील है ताकि जिले के सभी छात्रों को विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी ना हो।

कक्षा दूसरी में प्रवेश करते ही बनाए जा रहे जाति प्रमाण पत्र

इस योजना का लाभ उन विद्यार्थियों और पालकों को खासतौर पर मिला है, जो दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं और जिन्हें जाति प्रमाण पत्र के लिए आवागमन के सीमित संसाधनों के बीच दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ता था। जाति प्रमाण पत्र बनाने के कार्य ऑनलाइन एन्ट्री के माध्यम से किया जा रहा है।  इस नए शिक्षा सत्र से हर साल कक्षा दूसरी में प्रवेश करने वाले छात्रों का जाति प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। इस साल कक्षा दूसरी में नव प्रवेशित 4 हजार 978 छात्रों के जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे।

जाति प्रमाण पत्र के लिए जरूरी दस्तावेजों का प्रबंध

सुकमा जिला प्रशासन द्वारा की गई खास पहल के कारण विद्यार्थियों को और उनके पालकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना पड़ा, बल्कि शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के मैदानी अमलों ने जाति प्रमाण पत्र के लिए जरूरी दस्तावेजों का प्रबंध किया और इन दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन माध्यम से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए गए। तहसीलदार और अनुविभागीय दण्डाधिकारियों द्वारा इन आवेदनों पर कार्रवाई करते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिन्हें  फिर अध्यापकों के माध्यम से बच्चों को वितरित किया जा रहा है।

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