Media24Media.com: छेरछेरा

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वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने मंत्री रामविचार नेताम से मांगा छेरछेरा

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 रायपुर : छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेर हेरा… धान के कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में आज धूमधाम से पारंपरिक त्योहार छेरछेरा पर्व मनाया जा रहा है. सुबह से ही बच्चों की टोलीयां छेरछेरा मांगने निकल पड़ी है.


बच्चे तो बच्चे प्रदेश के मंत्री ने भी आज छेरछेरा मांगा.वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने आज कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निवास पर जाकर छेरछेरा पर्व मनाया. ओपी चौधरी ने रामविचार नेताम से छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेर हेरा… कहते हुए छेरछेरा मांगा. 


जिसके बाद रामविचार नेताम ने धान निकालकर टुकनी में डालकर अन्न का दान किया. मौके पर मौजूद अन्य लोगों को भी कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने अन्न का दान दिया.

छेरछेरा पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गली-गली घूमकर मांगा दान

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रायपुर। रायपुर के मठपारा की सड़कों पर शुक्रवार को अलग नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हाथ में झोला लिए गली-गली दान मांगते नजर आए, मौका था छेरछेरा त्यौहार का। मुख्यमंत्री ने करीब आधे घंटे तक गलियों में घूम-घूम कर सभी से दान लिया। मुख्यमंत्री बघेल को देखकर मठपारा के निवासी घरों से निकलकर बाहर आए और उनके झोले में अनाज, सब्जी आदि दान स्वरूप डाली। दान देने वालों में छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग बड़े उत्साह से शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भी वहां मौजूद बच्चों को दान स्वरूप राशि भेंट की।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को छेरछेरा पर्व के अवसर पर दूधाधारी मठ पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए सुख समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बघेल ने सभी को छेरछेरा की बधाई देते हुए कहा कि छेरछेरा का पर्व हमें बड़ा संदेश देता है क्योंकि इस दिन दान दिया जाता है और दान लिया भी जाता है। दान देना उदारता और दान लेना अहंकार को नष्ट करने का प्रतीक है। छेरछेरा में दान की राशि जनकल्याण में खर्च की जाती है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने सभी तीज त्योहारों पर छुट्टी दी। हम मुख्यमंत्री निवास में सभी त्योहारों को मनाते हैं, जैसे तीजा, पोरा, हरेली और छत्तीसगढ़ के अन्य तीज-त्यौहारों को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि किसान खेत में फसल की पैदावार और सभी के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं। अन्नदाता किसान समेत सभी वर्ग अनाज को दान करते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बालाजी की कृपा से इस साल बहुत अच्छी पैदावार हुई है,

अब तक 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका, और एक भी किसान की शिकायत नहीं आयी। सभी किसानों को तत्काल भुगतान भी हुआ। कार्यक्रम के पहले मुख्यमंत्री को धान से तौला भी गया। उल्लेखनीय है कि हर साल की तरह इस बार भी दूधाधारी मठ परिसर में छेरछेरा, पुन्नी मेला का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में लोग दान देने और लेने के लिए उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गौसेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश्री महंत रामसुंदर दास, विधानसभा के उपाध्यक्ष संतराम नेताम, विधायक बृहस्पत सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मेयर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री 6 जनवरी को छेरछेरा, शाकम्भरी महोत्सव सहित विभिन्न कार्यक्रमों में होंगे शामिल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 06 जनवरी को छेरछेरा, शाकम्भरी महोत्सव सहित राजधानी में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सवेरे 10.50 बजे मुख्यमंत्री निवास से दूधाधारी मठ के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां 11 बजे आयोजित छेरछेरा कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद सुबह 11.45 बजे मुख्यमंत्री निवास में मरार पटेल समाज द्वारा आयोजित शाकम्भरी महोत्सव में भी शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री शाम 7 बजे मुख्यमंत्री निवास से होटल वी. डब्ल्यू. कैन्यान के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां शाम 7.10 बजे टीव्ही-24 द्वारा आयोजित हमर संस्कृति हमर चिन्हारी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके पश्चात रात 8 बजे होटल कोर्टयार्ड मैरिएट में बंसल न्यूज द्वारा आयोजित उन्नति के चार साल कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कार्यक्रम पश्चात रात 8.50 बजे मुख्यमंत्री निवास आएंगे।

छत्तीसगढ़ के लोक तिहार : दान की महान संस्कृति का परिचायक ‘छेरछेरा’

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डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक

रायपुर। छेरछेरा पर्व पौष पूर्णिमा के दिन छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम, हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार  भी कहते हैं। इसे दान लेने-देने पर्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती। इस दिन छत्तीसगढ़ में बच्चे और बड़े, सभी घर-घर जाकर अन्न का दान ग्रहण करते हैं। युवा डंडा नृत्य करते हैं।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन द्वारा बीते चार वर्षों के दौरान उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के क्रम में स्थानीय तीज-त्यौहारों पर भी अब सार्वजनिक अवकाश दिए जाते हैं। इनमें छेरछेरा (मां शाकंभरी जयंती) तिहार भी शामिल है। जिन अन्य लोक पर्वों पर सार्वजनिक अवकाश दिए जाते हैं वे हैं हरेली, तीजा, मां कर्मा जयंती, विश्व आदिवासी दिवस और छठ। अब राज्य में इन तीज-त्यौहारों को व्यापक स्तर पर मनाया जाता है, जिसमें शासन की भी भागीदारी होती है। इन पर्वों के दौरान महत्वपूर्ण शासकीय आयोजन होते है तथा महत्वपूर्ण शासकीय घोषणाएं भी की जाती है। छेरछेरा पुन्नी के दिन स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी परम्परा का निर्वाह करते हुए छेरछेरा मांगते हैं।

छत्तीसगढ़ का लोक जीवन प्राचीन काल से ही दान परम्परा का पोषक रहा है। कृषि यहाँ का जीवनाधार है और धान मुख्य फसल। किसान धान की बोनी से लेकर कटाई और मिंजाई के बाद कोठी में रखते तक दान परम्परा का निर्वाह करता है। छेर छेरा के दिन शाकंभरी देवी की जयंती मनाई जाती है। ऐसी लोक मान्यता है कि प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ में सर्वत्र घोर अकाल पड़ने के कारण हाकाकार मच गया। लोग भूख और प्यास से अकाल मौत के मुँह में समाने लगे। काले बादल भी निष्ठुर हो गए। नभ मंडल में छाते जरूर पर बरसते नहीं। तब दुखीजनों की पूजा-प्रार्थना से प्रसन्न होकर अन्न, फूल-फल व औषधि की देवी शाकम्भरी प्रकट हुई और अकाल को सुकाल में बदल दिया। सर्वत्र खुशी का माहौल निर्मित हो गया। छेरछेरा पुन्नी के दिन इन्हीं शाकंभरी देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह भी लोक मान्यता है कि भगवान शंकर ने इसी दिन नट का रूप धारण कर पार्वती (अन्नपूर्णा) से अन्नदान प्राप्त किया था। छेरछेरा पर्व इतिहास की ओर भी इंगित करता है।

माई कोठी के धान ला हेर हेरा

छेरछेरा पर बच्चे गली-मोहल्लों, घरों में जाकर छेरछेरा (दान) मांगते हैं। दान लेते समय बच्चे छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेर हेराकहते हैं और जब तक गृहस्वामिनी अन्न दान नहीं देंगी तब तक वे कहते रहेंगे- अरन बरन कोदो दरन, जब्भे देबे तब्भे टरन। इसका मतलब ये होता है कि बच्चे कह रहे हैं, मां दान दो, जब तक दान नहीं दोगे तब तक हम नहीं जाएंगे।

छेरछेरा पर्व में अमीर गरीब के बीच दूरी कम करने और आर्थिक विषमता को दूर करने का संदेश छिपा है। इस पर्व में अहंकार के त्याग की भावना है, जो हमारी परम्परा से जुड़ी है। सामाजिक समरसता सुदृढ़ करने में भी इस लोक पर्व को छत्तीसगढ़ के गांव और शहरों में लोग उत्साह से मनाते हैं।

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