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छत्तीसगढ़ पवेलियन को 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में मिला 'स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल'

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रायपुर। छत्तीसगढ़ ने 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ के पवेलियन को उत्कृष्ट थीमैटिक प्रस्तुति और डिस्प्ले के लिए प्रतिष्ठित “स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” प्रदान किया गया। यह पुरस्कार नई दिल्ली के भारत मंडपम में दिया गया, जहाँ आईआईटीएफ 14 से 27 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ।

छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूरे होने पर मिला यह सम्मान

यह उपलब्धि ऐसे समय मिली है जब छत्तीसगढ़ वर्ष 2025 में अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की यात्रा को बेहद रोचक और अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया—जिसमें सांस्कृतिक परंपराएँ, जनजातीय विरासत, आजीविका आधारित पहल, सुशासन, औद्योगिक विकास, पर्यटन और सतत विकास जैसे सभी पहलुओं को प्रदर्शित किया गया।

छत्तीसगढ़ का पवेलियन क्यों रहा खास

पवेलियन ने राज्य की 25 वर्ष की यात्रा, उसकी उपलब्धियों, आगामी लक्ष्य और “नवा छत्तीसगढ़” की अवधारणा को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया। इसमें बस्तर में हो रहे परिवर्तन को भी प्रमुखता से रखा गया—जहाँ हाल के वर्षों में बेहतर À№⅝_सड़क संपर्क, पर्यटन विकास, जनजातीय आजीविका में वृद्धि और शांति आधारित विकास ने नए अवसर खोले हैं।

पारंपरिक कारीगरी, जनजातीय कला, स्थानीय उत्पाद, व्यंजन और पर्यटन ने छत्तीसगढ़ की आत्मा को आधुनिक अंदाज़ और प्रामाणिकता के साथ पेश किया।

पवेलियन में छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024–30 को प्रमुखता के साथ दर्शाया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और उच्च स्तरीय निवेश आकर्षित करना है।

प्रदर्शनी में दो बड़े आगामी प्रोजेक्ट्स भारत का पहला AI डेटा सेंटर पार्क और छत्तीसगढ़ का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट को भी प्रदर्शित किया गया। ये दोनों परियोजनाएँ राज्य के युवाओं के लिए हजारों उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार अवसर तैयार करेंगी और छत्तीसगढ़ को तकनीकी रूप से उन्नत, निवेश-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार राज्य के रूप में वैश्विक मानचित्र पर प्रमुख स्थान देंगी।

मेले के दौरान पवेलियन में उल्लेखनीय संख्या में दर्शक पहुंचे। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और जीआई-टैग्ड ढोकरा कला, आकर्षक कोसा सिल्क और अन्य पारंपरिक उत्पादों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। संस्कृति, कारीगरी और कहानी कहने के प्रभावी मिश्रण ने इसे IITF 2025 के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल किया।

“स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल” राज्य के बढ़ते आत्मविश्वास, नवाचार-आधारित विकास और मज़बूत आर्थिक भविष्य की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर, जिसे हर साल इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) आयोजित करती है, देश के सबसे बड़े और विविधतम आयोजनों में से एक है। इसमें राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, पीएसयू, एमएसएमई, शिल्पकारों, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की भागीदारी रहती है, जिससे भारत मंडपम भारत की संस्कृति, व्यापार, नवाचार और उद्यमिता का जीवंत मंच बन जाता है। 

"स्पेशल एप्रिसिएशन मेडल”

सम्मान ने न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत किया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास मॉडल—दोनों के साथ आगे बढ़ रहा है। पवेलियन की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की प्रगति, उसके उद्योगों और उसके युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रेरक कदम के रूप में देखी जा रही है। यह सम्मान राज्य को और बेहतर प्रदर्शन, नवाचार और जनहितकारी विकास के लिए प्रोत्साहित करता है तथा आने वाले समय में ऐसे और भी गौरवपूर्ण अध्याय लिखे जाने की उम्मीद जगाता है।



उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रापर्टी एक्सपो का किया शुभारंभ, 40 डेवलपर्स 300 से अधिक प्रोजेक्ट्स के साथ एक्सपो में कर रहे हिस्सेदारी

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में प्रापर्टी एक्सपो का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्सपो में विभिन्न डेवलपर्स द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का भ्रमण भी किया। क्रेडाई छत्तीसगढ़ द्वारा 22 अगस्त से 24 अगस्त तक इस तीन दिवसीय एक्सपो का आयोजन किया गया है। इसमें 40 डेवलपर्स 300 से अधिक प्रोजेक्ट्स के साथ हिस्सेदारी कर रहे हैं। विधायक पुरंदर मिश्रा और महापौर श्रीमती मीनल चौबे भी शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एक्सपो का शुभारंभ करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में रायपुर की दशा और दिशा काफी बदली है। शहर का नक्शा बदल गया है। रायपुर वर्ल्ड क्लास सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मना रही है। इस दौरान यहां अधोसंरचना विकास के महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए लगातार पहल कर रहे हैं। राज्य शासन ने प्रभावी नई औद्योगिक नीति बनाई है जो यहां निवेश को लगातार आकर्षित कर रही है। राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं रायपुर आ रही हैं। साव ने क्रेडाई द्वारा आयोजित प्रापर्टी एक्सपो की सराहना करते हुए कहा कि यहां एक ही छत के नीचे अलग-अलग परिवारों की जरूरतों के मुताबिक प्रापर्टी उपलब्ध हैं। लोगों की सहूलियत के लिए डेवलपर्स के बैंकिंग पार्टनर और रेरा की टीम भी यहां मौजूद है।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने एक्सपो के लिए आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप लोग लोगों की जरूरतों के मुताबिक मकानों की व्यवस्था कर सम्मानजनक ढंग से रहने की व्यवस्था करते हैं। इसी कड़ी में यह आयोजन भी उपयोगी है। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण रायपुर की बड़ी समस्या है। यह एक्सपो लोगों को रेरा अप्रूव्ड वैध प्रापर्टी खरीदने का अच्छा प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है। राजधानी के अनुरूप रायपुर का चौतरफा विकास हो रहा है। इसे हम हर लिहाज से रहने के लिए अच्छा शहर बनाने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रहे हैं।

क्रेडाई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष पंकज लाहोटी ने एक्सपो के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि इस एक्सपो में आने वाले छत्तीसगढ़ की झलक है। निकट भविष्य में राज्य की तस्वीर तेजी से बदलने वाली है। इस एक्सपो में लोग सुलभता से प्रापर्टी खरीद सके, इसके लिए डेवलपर्स के बैंकिंग पार्टनर्स और रेरा को भी शामिल किया गया है। क्रेडाई के सचिव अभिषेक बछावल ने रायपुर को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने के लिए नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर की जा रही कार्रवाईयों की भी तारीफ की। उन्होंने कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा के अनुरोध पर 51 गरीब कन्याओं के विवाह में क्रेडाई के सहभागी बनने की घोषणा की। कार्यक्रम में क्रेडाई छत्तीसगढ़ के सर्वश्री संजय रहेजा, मृणाल गोलछा, नवनीत अग्रवाल, निखिल भगत, विजय नत्थानी, अमरजीत गांधी और संजना बघेल सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।


मुख्यमंत्री साय ने जापान पहुंचने के बाद सबसे पहले टोक्यो स्थित ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर में की पूजा-अर्चना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जापान पहुंचने के बाद सबसे पहले जापान की राजधानी टोक्यो में स्थित ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर के दर्शन किए। टोक्यो का यह सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर शांति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता. की खुशहाली, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। उन्होंने कहा कि यह मंदिर मानवता को शांति और शक्ति का संदेश देता है और यही भाव छत्तीसगढ़ की जनता की आकांक्षाओं में भी झलकता है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO), भारत सरकार के आमंत्रण पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया के दौरे पर है। इस ग्लोबल आउटरीच मिशन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों को तलाशना है।


छत्तीसगढ़ की गौरव गाथा और स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी संपन्न

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रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित “छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों” पर आधारित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का आज समापन हुआ। यह प्रदर्शनी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा शुभारंभ की गई थी।

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के वीर क्रांतिकारियों की गाथाओं, उनके संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं को आकर्षक छायाचित्रों, दस्तावेजों और जीवन प्रसंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। साथ ही, राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, रामलला दर्शन योजना, पीएम जनमन योजना, महिला सशक्तीकरण एवं जनदर्शन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की झलक भी आगंतुकों को देखने को मिली।

विद्यार्थियों में रहा खास उत्साह

सात दिनों तक आयोजित “खेलो छत्तीसगढ़ ज्ञान प्रतियोगिता” और वर्चुअल रियलिटी गेम्स प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहे। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के राजकीय वृक्ष, पुष्प, राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर कला शैली, बस्तर क्राफ्ट, जशपुर के जलप्रपात और सरगुजा के खनिजों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। परी मानिकपुरी (संत कंवर राम विद्यालय) ने सभी प्रश्नों के सही उत्तर देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, दुर्ग की श्रीमती पायल शर्मा और रायपुर की श्रीमती गीता गुप्ता ने वर्चुअल रियलिटी गेम्स में सक्रिय भागीदारी कर प्रदर्शनी को और जीवंत बनाया।

जन-जन ने की सराहना

प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा, समाज के विभिन्न वर्गों के लोग तथा इतिहास प्रेमी शामिल हुए। छात्रा गायत्री धीवर और खुशबू साहू ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों को समझने का अनूठा अवसर बताया। रायपुर निवासी कावेश रघुवंशी ने कहा कि ऐसे आयोजन समय-समय पर होते रहना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ सके।

ज्ञान और संस्कृति का संगम

समापन अवसर पर आगंतुकों को राज्य सरकार की योजनाओं पर आधारित पुस्तकों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। साथ ही, प्रदेश की उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा।

यह प्रदर्शनी न केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष और योगदान को उजागर करने में सफल रही, बल्कि नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपराओं, संस्कृति और उपलब्धियों से भी परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम बनी।


आदि कर्मयोगी अभियान: केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित होंगे जनजातीय परिवार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनजाति समुदाय के लिए संचालित केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों तक पहुंचानें के लिए आदिकर्मयोगी अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आदि कर्मयोगी अभियान को 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 के मध्य जोर-शोर के साथ सेवा पर्व के रूप में संचालित करने का आह्वान किया है।

छत्तीसगढ़ में आजादी के अमृतकाल में वर्ष 2047 तक विकसित भारत की संकल्प को पूरा करने में सबकी सहभागिता से यह अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान के लिए राज्य के 28 जिलों के 138 विकासखंडो में 1 लाख 33 हजार वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। आदिकर्मयोगी अभियान में विभिन्न विभागों के समन्वय से जनजातीय परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। स्थानीय जन प्रतिनिधि भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी देंगे।

आदिकर्मयोगी अभियान अंतर्गत जनजातीय बाहुल्य गांवों में बुनियादी अधोसंरचना और सुविधाओं में जो भी ‘क्रिटिकल गैप’ हैं, उनकी पहचान की जाएगी। स्थानीय प्रशासन के माध्यम से इन कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इससे हर ग्राम बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त होगा। आदिकर्मयोगी अभियान संचालित करने के लिए राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय उन्नमुखीकरण एवं जिला मास्टर टेªनर्स के द्वितीय चरण के चार दिवसीय प्रशिक्षण का पूर्ण कर लिया गया है। इसके बाद विकासखण्डों और गांवों में चिन्हांकित आदिकर्मयोगी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने आदिकर्मयोगी अभियान के संबंध में 6 अगस्त को आयोजित बैठक में इस कार्यक्रम को प्राथमिकता देते हुए इस कार्य को जमीनी स्तर क्रियान्वित करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि केन्द्रीय मंत्री  उइके ने आदिकर्मयोगीयों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए जनजातीय संस्कृति और परंपरा को कायम रखते हुए इन वर्गों के कल्याण के लिए हम सबको पावन और पवित्र भाव से कार्य करने पर जोर दिया।

आदिम जाति, विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में जनजातीय वर्गों के विकास में भागीदारी बनने की जरूरत है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने कहा कि आदि कर्मयोगी जनजातियों से सहज-सरल एवं उनकी ही भाषा व बोलचाल में मित्रवत जुड़ाव आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य पूरा होगा। 

प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास सोनमणि बोरा ने बताया कि इस अभियान के तहत ग्रामों में ‘आदि सेवा केंद्र’ स्थापित होंगे। ये केंद्र न केवल मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता में सहायक होंगे, बल्कि योजनाओं एवं कार्यक्रमों के सतत क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समापन समारोह में मास्टर ट्रेनर्स सहित बस्तर और सरगुजा संभाग के आदि कर्मयोगी उपस्थित थे। 

छत्तीसगढ़ के धान ने आकर्षित किया उज्बेकिस्तान के वैज्ञानिकों को

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के धान की विलक्षण जैव विविधता एवं उत्पादन तकनीक ने उज्बेकिस्तान के डेनाऊ इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडागॉजी के रेक्टर प्रो. ओयबेक आब्दीमुमीनोविच रोज़िव को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उनके संस्थान ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के साथ कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान सहयोग हेतु समझौता किया है।

प्रो. रोज़िव आज रायपुर में आयोजित “कृषि में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा एवं अनुसंधान सहयोग” विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के मध्य शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग हेतु समझौता पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। समझौते के तहत कृषि, पर्यावरण, जल संरक्षण, सगंध एवं औषधीय पौधों का उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, जैव प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान कार्य किए जाएंगे। इससे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे।

संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। कार्यक्रम को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर.सी. अग्रवाल, सहायक महानिदेश डॉ. सीमा जग्गी एवं डॉ. रवि प्रकाश दानी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उज्बेकिस्तान के वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध अधोसंरचनाओं, अनुसंधान प्रक्षेत्रों एवं प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया। गौरतलब है कि 17 अप्रैल 2025 को हुए समझौते के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध स्तर पर अध्ययन कर सकेंगे तथा प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक संयुक्त अनुसंधान करेंगे।

प्रो. रोज़िव ने बताया कि उनके संस्थान में 4 संकाय, 14 विभाग एवं 34 पाठ्यक्रम संचालित होते हैं जिनमें लगभग 8 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 7 देशों के साथ अनुसंधान सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों को उज्बेकिस्तान आने का आमंत्रण भी दिया। संगोष्ठी में कृषि शिक्षा सुधार, अनुसंधान सहयोग और कृषि व्यवसाय से जुड़े विविध विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।


सीजी-रेरा ने लागू की वॉलन्टरी कॉम्प्लायंस स्कीम, सितंबर तक मिलेगी अधिकतम 90 प्रतिशत तक की छूट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (सीजी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए वॉलन्टरी कॉम्प्लायंस स्कीम लागू की है। यह योजना सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगी।

इस योजना के अंतर्गत 31 मार्च 2024 तक पंजीकृत सभी प्रोजेक्ट्स को लंबित तिमाही प्रगति रिपोर्ट और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट एक साथ जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। लंबित रिपोर्ट जमा करने पर विलंब शुल्क में 70 प्रतिशत तक छूट मिलेगी, वहीं जिन प्रोजेक्ट्स के पास मान्य कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र है, उन्हें 90 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी।

सीजी-रेरा ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का उद्देश्य प्रमोटरों को नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत हो सके। प्राधिकरण ने सभी प्रमोटरों से अपील की है कि वे योजना अवधि में अनुपालन सुनिश्चित करें और निर्धारित समयसीमा में अपनी रिपोर्ट्स प्रस्तुत करें।

विस्तृत जानकारी सीजी-रेरा की आधिकारिक वेबसाइट https://rera.cgstate.gov.in/ तथा परिपत्र संख्या 115, 116 और 119 में उपलब्ध है। यह योजना रियल एस्टेट सेक्टर में अनुपालन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में विभागों का नया बंटवारा, देखें किसे मिला कौन सा जिम्मा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रियों के बीच विभागों का नया बंटवारा कर दिया है। इस फेरबदल के साथ ही अब मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास सामान्य प्रशासन, खनिज साधन, ऊर्जा, जनसंपर्क, जल संसाधन, विमानन, सुशासन एवं अभिनवकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, जन शिकायत एवं निवारण सहित वे विभाग रहेंगे जो किसी अन्य मंत्री को आबंटित नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों को मिले विभाग इस प्रकार हैं –

1. विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री – सामान्य प्रशासन, खनिज साधन, ऊर्जा, जनसंपर्क, जल संसाधन, विमानन, सुशासन एवं अभिनवकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, जन शिकायत एवं निवारण तथा अन्य अप्रावर्तित विभाग।

2. अरुण साव, उप मुख्यमंत्री – लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खेल एवं युवा कल्याण।

3. विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री – गृह, जल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी।

4. राम विचार नेताम, मंत्री – आदिवासी विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, मछली पालन, पशुधन विकास।

5. दयाल दास बघेल, मंत्री – खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण।

6. केदार कश्यप, मंत्री – वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य।

7. लखन लाल देवांगन, मंत्री – वाणिज्य एवं उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी), श्रम।

8. श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्री – लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास, 20 सूत्रीय कार्यक्रम।

9. ओ.पी. चौधरी, मंत्री – वित्त, वाणिज्यिक कर (आबकारी को छोड़कर), आवास एवं पर्यावरण, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी।

10. लक्ष्मी राजवाड़े, मंत्री – महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण।

11. टंकराम वर्मा, मंत्री – राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास, उच्च शिक्षा।

12. गजेन्द्र यादव, मंत्री – स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य।

13. गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री – कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास।

14. राजेश अग्रवाल, मंत्री – पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व।


भारत दिवस परेड 2025 में छत्तीसगढ़ की भव्य प्रस्तुति

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रायपुर। भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तर अमेरिका में आयोजित भारत दिवस परेड 2025 में छत्तीसगढ़ ने अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक, औद्योगिक और जनजातीय धरोहर का भव्य प्रदर्शन किया। नाचा (North America Chhattisgarh Association) के नेतृत्व में सिएटल (वॉशिंगटन), टोरंटो (कनाडा) और कैलिफोर्निया बे एरिया (अमेरिका) में प्रवासी छत्तीसगढ़ी परिवारों ने परंपराओं को जीवंत करते हुए भारत के राष्ट्रीय गौरव को साझा किया।

सिएटल में नमिता खंडेलवाल (अध्यक्ष, नाचा वॉशिंगटन चैप्टर) के नेतृत्व में परेड का आयोजन हुआ। यहाँ छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान भिलाई इस्पात संयंत्र और कृषि शक्ति धान का कटोरा झांकी का मुख्य आकर्षण रहे। करमा नृत्य, ढोकरा शिल्प, कोसा सिल्क, तथा पारंपरिक व्यंजन जैसे चावल पापड़ और एरसा ने सभी का मन मोह लिया। नमिता खंडेलवाल ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र से लेकर करमा नृत्य और कोसा सिल्क तक, छत्तीसगढ़ के हर पहलू को प्रस्तुत करना गर्व का क्षण था।

टोरंटो में आयोजित परेड का संचालन पंकज अग्रवाल (अध्यक्ष, नाचा कनाडा चैप्टर) ने किया। यहाँ जनजातीय परंपरा मुख्य थीम रही। पुरुषों ने धोती, कुर्ता, गमछा और गौर मुकुट पहनकर बस्तर की परंपराओं को जीवंत किया, वहीं महिलाओं ने लुगड़ा और पारंपरिक आभूषणों से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की 30 से अधिक जनजातीय आबादी और एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का वैश्विक मंच पर शानदार प्रदर्शन किया गया।

कैलिफोर्निया बे एरिया में पूजा महतो (अध्यक्ष, नाचा बे एरिया) के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रवासी परिवारों ने गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी परंपराओं को सजीव किया। महिलाओं ने लुगड़ा और आभूषण पहनकर पारंपरिक झलक प्रस्तुत की। पूजा महतो ने कहा कि कैलिफोर्निया में परिवारों के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ की परंपराओं को प्रस्तुत करना गर्व का क्षण था। यह दिखाता है कि हजारों मील दूर रहकर भी हमारी जड़ें कितनी गहरी हैं।

भारत दिवस परेड 2025 ने नाचा की उस वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाया, जिसमें वह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक, औद्योगिक और पारिवारिक धरोहर को विश्व स्तर पर जीवित रखता है।

नाचा एक गैर-लाभकारी संगठन है जो अमेरिका और कनाडा में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करता है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामुदायिक सेवा और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की परंपराओं को बढ़ावा देता है और भारतीय प्रवासी समुदाय से गहरे संबंध स्थापित करता है।


राजभवन के दरबार हॉल का नाम परिवर्तन कर छत्तीसगढ़ मण्डपम किया गया

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रायपुर। राजभवन के दरबार हॉल का नाम परिवर्तन कर ‘छत्तीसगढ़ मण्डपम‘ किया गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दरबार हॉल का नाम परिवर्तन कर छत्तीसगढ़ मण्डपम करने की घोषणा की एवं इसका विधिवत अनावरण किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, खेलकूद एवं युवक कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी अरूण देव गौतम तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का आगाज़ – संस्कृति और गौरव का होगा भव्य उत्सव: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को मुक्ताकाशी मंच से छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ किया। यह महोत्सव 15 अगस्त से लेकर आगामी 6 फरवरी 2026 तक पूरे 25 सप्ताह तक प्रदेशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ सरकार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसमें राज्य के हर वर्ग, समाज और उम्र के लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने जन सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा – "सपने लेकर आगे बढ़िए, मंजिल जरूर मिलेगी"।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल जी के प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ का गठन हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों में प्रदेश ने उल्लेखनीय विकास किया है और लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हो।

उन्होंने कहा कि इस रजत महोत्सव के दौरान प्रदेश के लोकप्रिय ‘बस्तर ओलिंपिक’ और बस्तर पनडुम जैसे पारंपरिक आयोजन भी किए जाएंगे, जो स्थानीय खेल और लोक-संस्कृति को प्रोत्साहित करेंगे। जनभागीदारी, सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और विकास की भावना के साथ मनाया जाने वाला यह रजत महोत्सव राज्य के इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज होगा।

कृषि और खाद्य सुरक्षा में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन से पहले किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता था और कई इलाकों में भूखमरी की स्थिति थी। सरकार ने पीडीएस का एक आदर्श मॉडल विकसित किया, जिससे आज लाखो परिवार निःशुल्क खाद्यान्न का लाभ ले रहे हैं और कोई भी भूखा नहीं सोता। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से, 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदा जा रहा है और पिछले दो वर्षों में किसानों के खातों में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्थानांतरित की गई है।

शिक्षा और उद्योग में बड़ी उपलब्धियां

साय ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं प्रदेश में स्थापित हुईं।

आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की जीएसडीपी 21 हजार करोड़ से बढ़कर 5 लाख करोड़ हो गई है, जिसे अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि नये जमाने के उद्योगों जैसे फार्मा, सेमीकंडक्टर, टैक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में अब तक 6 लाख 65 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हमारी सरकार को नई औद्योगिक नीति लागू करने के पश्चात मिल चुके हैं।

25 सप्ताह तक रहेगा रजत महोत्सव

महोत्सव के दौरान आगामी 25 सप्ताह तक राज्य के विभिन्न विभागों, सामाजिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक संगठनों की भागीदारी से विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे उत्साहपूर्वक इसमें शामिल हों।

विशेषांक, लोगो और वेब पोर्टल का लोकार्पण

शुभारंभ कार्यक्रम में रजत महोत्सव विशेषांक पुस्तक का विमोचन, लोगो एवं वेब पोर्टल का अनावरण भी किया गया।

संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह अवसर हमारे इतिहास को दोबारा याद करने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महोत्सव में गरीब, युवा, आम नागरिक और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने जानकारी दी कि सरकार ने सभी विभागों को एक-एक सप्ताह का समय आवंटित किया है, जिसके दौरान वे विभागीय गतिविधियों का आयोजन कर जनता को अवगत कराएंगे। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर तक लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि महोत्सव की छटा गांव-गांव तक पहुंचे।

इस अवसर पर विधायक सर्व मोती लाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब एवं पुरंदर मिश्रा, राज्य खाद्य नागरिक एवं आपूर्ति के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ,केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन,अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, संस्कृति विभाग के डायरेक्टर विवेक आचार्य, कलेक्टर गौरव कुमार ,संस्कृति विभाग के अधिकारी कर्मचारी, गणमान्य नागरिक एवं स्कूली छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


अब रियल स्टेट के विज्ञापनों में देना होगा नम्बर और क्यूआर कोड रेरा पंजीकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेरा द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि अब सभी प्रकार के रियल एस्टेट विज्ञापनों में रेरा पंजीकरण नंबर और रेरा वेबसाइट का पता स्पष्ट रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य होगा।

इन निर्देशों का पालन प्रिंट मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रोशर, पोस्टर, होर्डिंग, पंपलेट और अन्य सभी प्रचार माध्यमों पर करना होगा। रेरा ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण नंबर और वेबसाइट पते का फॉन्ट प्रकार और आकार वही होना चाहिए जो प्रमोटर के मोबाइल नंबर और पते के लिए उपयोग किया गया है, ताकि उपभोक्ता आसानी से इस जानकारी को पढ़ और समझ सकें।

क्यूआर कोड से सीधे परियोजना की जानकारी

रेरा द्वारा जारी निर्देश के तहत, प्रत्येक विज्ञापन में रेरा द्वारा जारी क्यूआर कोड भी शामिल करना होगा। इस क्यूआर कोड को स्कैन कर खरीदार सीधे संबंधित परियोजना की विस्तृत जानकारी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकेंगे।

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

रेरा ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वाले प्रमोटर्स या एजेंट्स के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छत्तीसगढ़ रेरा ने सभी प्रमोटर्स, एजेंट्स और विज्ञापन एजेंसियों से अपील की है कि वे उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इन दिशा-निर्देशों का पालन करें।


उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और स्वेच्छाचारिता पड़े भारी, शिक्षक निलंबित

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रायपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला तेन्दूपारा में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) संजय नायक को उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 03 के उल्लंघन तथा कदाचरण की श्रेणी में पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि 4 जून 2025 को शासकीय प्राथमिक शाला तेन्दूपारा संकुल लुड़ेग में श्रीमती शालेन कुजूर की पदस्थापना की गई थी। इसके बावजूद सहायक शिक्षक संजय नायक द्वारा उन्हें विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया।

इस विषय में विकासखंड शिक्षा अधिकारी पत्थलगांव द्वारा 11 जून 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब संजय नायक द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया। 10 जुलाई 2025 को प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, शिक्षक संजय नायक के इस व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने जानबूझकर आदेशों का पालन नहीं किया और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न की।

उक्त कृत्य शासन के सेवा आचरण नियमों के सर्वथा विपरीत पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बगीचा नियत किया गया है तथा वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र होंगे।


छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात, 375.71 करोड़ की सड़कों को केंद्र की मंजूरी

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रायपुर। भारत सरकार द्वारा आदिवासी और दूरस्थ अंचलों के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित जनजातीय बहुल विकासखंडों में 2449.108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। इस परियोजना की कुल लागत 375.71 करोड़ रुपये होगी, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।


केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस मंजूरी की जानकारी दी और इसे "पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों)" के जीवन में परिवर्तन लाने वाली पहल बताया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह योजना अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़कों के निर्माण से इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंग

पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत 2449.108 किलोमीटर लंबी नई सड़कें और 100 पुल की स्वीकृति दी गई है। मंत्री  चौहान ने राज्य सरकार से इन कार्यों की त्वरित स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।

चौहान ने यह भी अनुरोध किया है कि राज्य सरकार इन सड़कों के निर्माण कार्यों को शीघ्र शुरू कर फास्ट ट्रैक मोड पर पूरा कराए ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।

उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल और अधिक सफल होगी।

मुख्य बिंदु-:

- पीएमजीएसवाई के तहत 375.71 करोड़ रुपये की सड़कों को मंजूरी

- 2449.108 किलोमीटर नई सड़कें, 100 पुल की स्वीकृति

- जनजातीय बहुल ब्लॉकों में होगा कार्यान्वयन

- पीवीटीजी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

- केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से शीघ्र क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई

यह निर्णय राज्य के आदिवासी समुदायों के लिए न केवल एक विकास की राह खोलेगा बल्कि सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।


इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा राज्य, युवाओं को मिलेगा नवाचार और रोजगार का नया मंच

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है। अब राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स टेस्टिंग या प्रोटोटाइपिंग के लिए बेंगलुरु, पुणे या नोएडा जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नवा रायपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि और आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में तैयार इस परियोजना से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, स्टार्टअप और युवाओं के लिए नया युग प्रारंभ होगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति के अनुरूप निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन भी प्रदान करेगी।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में 3.23 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 108.43 करोड़ रुपये है, जिसमें से 75.00 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भारत सरकार के MeitY मंत्रालय द्वारा EMC 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। शेष 33.43 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे तथा भूमि की उपलब्धता नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा सुनिश्चित की जा रही है।

यह कॉमन फैसिलिटी सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देने हेतु एक साझा एवं अनुकूल वातावरण निर्मित करेगा, जहां प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग, EMC परीक्षण और वुड वर्कशॉप जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र अर्धचालक (सेमीकंडक्टर), माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एलईडी लैंप, सोलर चार्ज कंट्रोलर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) समाधान, ऑटोमेशन समाधान और SCADA पैनल जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उत्पादन इकाइयों को विशेष लैब और परीक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा।

यह सेंटर क्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उदाहरण के तौर पर, एक छोटी एलईडी लाइट निर्माण इकाई अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए CFC की परीक्षण लैब का उपयोग कर सकेगी। इसी प्रकार, एक स्टार्टअप जो सोलर चार्ज कंट्रोलर डिज़ाइन कर रहा है, वह बड़े पैमाने पर उत्पादन से पूर्व अपने डिज़ाइन को इस केंद्र की प्रोटोटाइपिंग सुविधा में परख सकेगा। एक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) घटक निर्माता अपने उत्पादों की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता (EMC) का परीक्षण कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रणालियाँ सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। साथ ही, 3D प्रिंटिंग सुविधा कंपनियों को विशेष जिग्स या कस्टम एन्क्लोज़र बनाने में सहायता करेगी, जबकि PCB प्रोटोटाइपिंग सेवा सर्किट बोर्डों के त्वरित विकास और परीक्षण में मदद करेगी, जिससे उत्पाद निर्माण की गति तेज होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पहले से ही कई आकर्षक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना को राज्य की उद्योग नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों से और भी बल मिलेगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बाहरी और स्थानीय निवेश को गति मिलेगी।

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा संचालित यह परियोजना राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण एवं निवेश को प्रोत्साहित करेगी। इसके माध्यम से राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उद्योगों को विश्वस्तरीय परीक्षण और प्रोटोटाइपिंग सुविधाएं भी सुलभ होंगी, जिससे छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक पावरहाउस बनकर उभरेगा।

आवास और पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स, युवाओं और उद्यमियों को अत्याधुनिक संसाधन मिलेंगे, जो पहले बड़े शहरों तक ही सीमित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी बनाएगी।

मुख्यमंत्री साय की पहल से छत्तीसगढ़ को मिली 600 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की अधोसंरचना को रफ्तार देने के लिए आज एक अहम क़दम उठाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली।

बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही केन्द्रीय सड़क निधि (CRF) के तहत 600 करोड़ रुपये की मंज़ूरी। इसके ज़रिए छत्तीसगढ़ में कई सड़कों के निर्माण और उन्नयन का रास्ता साफ़ हुआ है।

इसके साथ ही स्टेट कैपिटल रीजन के अंतर्गत आने वाले दो लेन मार्ग को चार लेन में अपग्रेड करने की योजना को भी मंजूरी मिली है।

रायपुर शहर की भीड़भाड़ को कम करने के लिए चार बड़े ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनका भूमि पूजन शीघ्र ही होगा। वहीं, राजधानी रायपुर से अन्य ज़िलों तक की सड़कें दो लेन से चार लेन में बदली जाएंगी, जिससे आवागमन तेज़ और सुरक्षित हो जाएगा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य की सभी सड़क योजनाएं अब केंद्र के ‘गति शक्ति पोर्टल’ के ज़रिए भेजी जाएंगी, ताकि जल्द मंजूरी मिल सके। श्री गडकरी ने रायपुर (आरंग)-बिलासपुर (दर्री) के बीच करीब 95 किमी लंबी छह लेन सड़क के लिए डीपीआर भेजने को कहा, जो औद्योगिक, कृषि और शैक्षिक क्षेत्रों को जोड़ेगी। साथ ही, नागपुर से रायपुर तक प्रस्तावित 300 किमी लंबा समृद्धि एक्सप्रेसवे पर भी शीघ्र डीपीआर मांगा गया है।

इसके अलावा कुछ ज़रूरी योजनाओं को आज मंजूरी भी मिल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 ए में उन्नयन कार्य, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 में रेजिंग का कार्य एवं राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 में मजबूतीकरण के कुल 115.95 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली है।

इनमें बिलासपुर शहर के भीतर 15 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शामिल है, जिससे शहर में ट्रैफिक आसान होगा। कटनी-गुमला मार्ग के हिस्से में 11 किलोमीटर सड़क बनेगी जो गांवों को जोड़ने में मदद करेगी। वहीं, केशकाल के 4 किलोमीटर हिस्से की सड़क को मज़बूत किया जाएगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी।

वहीं, इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 7000 करोड़ से ऊपर के नियोजित कार्यो की वित्तीय स्वीकृति को भी शीघ्र करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़कें केवल यात्रा का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, रोज़गार और सामाजिक बदलाव का रास्ता हैं। अँजोर विजन 2047’ के तहत छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव, हर नागरिक तक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन पहुंचे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।





हर-हर महादेव से गूंज उठा भोरमदेव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर हजारों कांवड़ियों का किया भव्य स्वागत

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रायपुर। सावन मास के तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ के प्राचीन, धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के तीर्थ स्थल बाबा भोरमदेव मंदिर में भक्ति और श्रद्धा की गूंज उस समय चरम पर पहुँच गई जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हजारों कांवड़ियों और शिवभक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस शुभ अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्रीद्वय विजय शर्मा और अरुण साव उपस्थित थे।

यह लगातार दूसरा वर्ष है जब मुख्यमंत्री स्वयं श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पुष्पवर्षा कर रहे हैं। पुष्पवर्षा के पश्चात् मुख्यमंत्री साय ने बाबा भोरमदेव मंदिर पहुंचकर मंत्रोच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया तथा प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में उपस्थित कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका हालचाल जाना और पूरे आत्मीय भाव से अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सावन मास के तीसरे सोमवार को बाबा भोरमदेव की पावन धरती पर शिवभक्तों के साथ जुड़ना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है। हजारों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु यहां पहुंचे हैं—यह हमारी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अमरकंटक से 151 किलोमीटर पदयात्रा कर भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाली पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा को भगवा वस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत भोरमदेव कॉरिडोर विकास के लिए 146 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना न केवल मंदिर परिसर का कायाकल्प करेगी, बल्कि मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा से लेकर सरोदा जलाशय तक एक समग्र धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश के अनूपपुर में 5 एकड़ भूमि आबंटन की प्रक्रिया जारी है, जहाँ एक भव्य श्रद्धालु भवन का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं को सावन मास की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा इस पुण्य अवसर की महत्ता को और भी अभूतपूर्व बना गई है।

पौराणिक परंपरा का गौरव: भक्ति से सराबोर हुआ बाबा भोरमदेव परिसर

सावन मास में भगवान शिव—देवों के देव—के जलाभिषेक की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर ग्राम चौरा में स्थित 11वीं शताब्दी का यह भोरमदेव मंदिर ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। श्रावण मास में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, मुंगेली, बेमेतरा, खैरागढ़, राजनांदगांव सहित मध्यप्रदेश के अमरकंटक से हजारों श्रद्धालु पदयात्रा कर बाबा भोरमदेव, बूढ़ा महादेव और डोंगरिया के प्राचीन जलेश्वर शिवलिंग में जलाभिषेक करने आते हैं। श्रद्धालु माँ नर्मदा से जल भरकर नंगे पाँव और भगवा वस्त्रों में 150 किलोमीटर से अधिक की दुर्गम यात्रा कर “बोल बम” के जयघोष और भजनों के साथ भोरमदेव, जलेश्वर महादेव और पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर पहुँचते हैं।


छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगेंगे 400 नए बीएसएनएल टावर

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रायपुर। केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में डिजिटल संचार को सशक्त बनाने हेतु 400 नए बीएसएनएल टावर लगाने की योजना पर कार्य कर रही है। यह जानकारी ग्रामीण विकास और दूरसंचार राज्यमंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आज रायपुर में दी।

डॉ. शेखर ने कहा कि इन टावरों की स्थापना के लिए सुरक्षा बलों और वन विभाग से आवश्यक मंज़ूरी मिलने के बाद चरणबद्ध कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया, “बीएसएनएल आज देश में उच्च गुणवत्ता की 4जी सेवाएं दे रहा है, और इस विस्तार के साथ हम देश के अंतिम गांव तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुँचाने के मिशन को साकार कर रहे हैं।”

योजनाओं के क्रियान्वयन पर संतोष

डॉ. शेखर ने रायपुर में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग, डाक विभाग, दूरसंचार विभाग और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) जैसी योजनाओं के तेज़ और प्रभावशाली क्रियान्वयन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं ग्रामीण आधारभूत संरचना और आवास क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन ला रही हैं।

महिला सशक्तिकरण के लिए नवाचार

राज्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘पिंक ऑटो’ जैसे नवोन्मेषी प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत महिलाओं को स्वामित्व वाले पिंक ऑटो प्रदान किए जा रहे हैं। यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है। उन्होंने कहा की स्वसहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है।

डॉ. शेखर ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को “मिशन मोड” में लागू किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में सेवाएं घर-घर तक पहुँचाने की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि “इन क्षेत्रों में विद्यालयों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे छात्रों को अब JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिल रही है। इसके साथ ही, दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं, जो एक संवेदनशील और समावेशी पहल है।”

अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही हैं सरकारी योजनाएं

अपने संबोधन के अंत में डॉ. शेखर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब समाज के अंतिम पंक्ति के नागरिक तक पहुँच रही हैं। वंचित, आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में भी अब तेज़ विकास और परिवर्तन देखा जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि डिजिटल, भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत रूप से मजबूत कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ को धरातल पर उतारा जाए।


छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है— मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की कार्यकारिणी बैठक में शामिल हुए। इस अवसर पर वर्ष 2025-26 के वार्षिक बजट का अनुमोदन किया गया। साथ ही, मुख्यमंत्री साय ने स्टेडियम परिसर में संघ के अध्यक्ष के नवीन कार्यालय कक्ष का विधिवत उद्घाटन भी किया।

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की कार्यकारिणी बैठक सम्पन्न

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु हमारी सरकार ने खेल अलंकरण समारोहों का पुनः शुभारंभ किया है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया शीघ्र ही पूर्ण की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया कि संघ के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के विकास के लिए वृहद स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेताओं को ₹3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को ₹2 करोड़ तथा कांस्य पदक विजेताओं को ₹1 करोड़ की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ओलंपिक खेलों में केवल प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की दिशा में आवश्यक पहल की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि वे स्वयं राज्य तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष हैं और बचपन से उन्हें तीरंदाजी का शौक रहा है। उन्होंने कहा कि जशपुर में एनटीपीसी के सहयोग से तीरंदाजी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ एक उद्योग प्रधान और खनिज संसाधनों से भरपूर राज्य है। सरकार का प्रयास रहेगा कि सीएसआर मद के माध्यम से खेलों के लिए आधारभूत ढांचे का विकास किया जाए।

बैठक को संबोधित करते हुए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में वर्षों से बंद खेल अलंकरण समारोह पुनः आरंभ किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची भी घोषित की जाएगी। वर्मा ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर देने की है।

उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ युवा रत्न पुरस्कार की भी घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत खेल, कला, संगीत, साहित्य, उद्योग, व्यापार आदि क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत प्रत्येक जिले में खेलों को बढ़ावा देने के कार्य किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इस आयोजन की प्रधानमंत्री ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी प्रशंसा की है।

इस अवसर पर सांसद एवं ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष विजय बघेल ने भी बैठक को संबोधित किया और प्रदेश में खेलों के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए संगठनात्मक सुदृढ़ता और संसाधनों की उपलब्धता पर बल दिया।

बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिंह सिसोदिया ने वर्ष 2024-25 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार से मिल रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए लिए गए निर्णयों और सहयोग से प्रदेश में एक सकारात्मक खेल वातावरण निर्मित हो रहा है। इस अवसर पर संघ के अनेक पदाधिकारीगण उपस्थित थे।


विशेष लेख : छत्तीसगढ़ की पहली पारम्परिक लोक पर्व हरेली

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रायपुर। भारत विविधताओं का देश है। भारत देश में एक नीले आसमान के नीचे कई समृद्ध संस्कृति फल-फूल रही हैं। भारत की अनेकताओं में कुछ त्यौहार ऐसे हैं ,जो सारे देश को एक साथ जोड़ते हैं। छत्तीसगढ़ संस्कृति में त्यौहारों, पर्वो का विशेष महत्व है। इन त्यौहारों के क्रम में पहला त्यौहार हरेली का है।

इसलिये कहा गया छत्तीसगढ़ संस्कृति परम्परा का त्यौहार हरेली। हरेली त्यौहार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली त्यौहार किसान और सभी छत्तीसगढ़वासियो का त्यौहार है। हरेली मतलब प्रकृति के चारों तरफ हरियाली से है । किसान खेत में जुताई-बोआई, रोपाई, बियासी के कार्य पूर्ण करके इस त्यौहार का मनाता है।

हरेली त्योहार की जड़ें छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि विरासत में हैं, जहाँ इसे लंबे समय से कृषि देवताओं के प्रति सम्मान के रूप में मनाया जाता रहा है। मानसून की शुरुआत में मनाया जाने वाला हरेली, बुवाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है और लोगों और उनकी ज़मीन के बीच गहरे बंधन को दर्शाता है। पीढ़ियों से चला आ रहा यह त्यौहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को कायम रखता है और इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है।

प्रकृति की पूजा का विधान

हरेली मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है, जो ज़मीन और जीवन को सहारा देने वाले औज़ारों के प्रति कृतज्ञता की भावना को उजागर करता है। परंपरागत रूप से इस त्योहार को सांप्रदायिक संबंधों को मज़बूत करने और कृषि एवं प्राकृतिक दुनिया की देखरेख करने वाली दिव्य शक्तियों का सम्मान करने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है। सावन माह की अमावस्या पर होने वाली हरेली त्यौहार को साल की पहली त्यौहार के रूप में मनाते हैं। लगातार बारिश से खेतों की शुरुआती जुताई-रोपाई का काम होने पर खेतों में हरियाली बरकरार रहने के लिए, इस त्यौहार को मनाया जाता है।

कृषि औजारों की पूजा

छत्तीसगढ़ के किसान हरेली त्यौहार के दिन गाय बैल भैंस को भी साफ सुथरा कर नहलाते हैं। अपनी खेती में काम आने वाले औजारों को हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को धोकर और घर के बीच आंगन में रख दिया जाता है या आंगन के किसी कोने में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं और उसकी पूजा की जाती है साथ ही अपने कुलदेवता की भी पूजा की जाती है ।

घर-घर बनते पकवान

माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं और कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। हरेली के बच्चे गेंड़ी का आनंद लेते हैं। इस अवसर पर सभी के घरों में विशेष प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं। चावल के आटे से बनी चीला रोटी को इस दिन लोग खूब चाव से खाते हैं। कोई इसे नमकीन बनाता है, तो कोई इसे मीठा भी बनाते हैं। यह खाने वालों की पसंद के ऊपर होता है। इस तरह से यह त्यौहार परम्पराओं से भरी हुई है। हरेली तिहार के दिन सभी लोग अपने–अपने दरवाजा पर नीम टहनी तोड़ कर टांग देते है और इसी बहुत गेंड़ी खेल का आयोजन शुरु हो जाता है. हरेली तिहार के दिन सुबह से ही बच्चे से लेकर युवा तक 20 या 25 फिट तक गेंडी बनाया जाता है। उसी दिन सभी युवा एवं बच्चे गेंडी चढ़ते है गावं में घूमते है. बच्चों और युवाओं के बीच गेंड़ी दौड़ प्रतियोगिता भी की जाती है।

अनिष्ट की रक्षा का पर्व

हरेली तिहार के दिन पूजा करने से पर्यावरण शुद्ध और सुरक्षित रहता है और फसल उगती है तो किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं लगती है। हरेली तिहार मनाने से फसल को हानिकारक किट तथा अनेको बीमारिया नही होती है इसलिए हरेली तिहार मनाया जाता है। हरेली त्यौहार के दौरान छत्तीसगढ़ के लोग अपने-अपने खेतों में भेलवा पेड़ की शाखाएँ लगाते हैं। वे अपने घरों के प्रवेश द्वार पर नीम के पेड़ की शाखाएँ भी लगाते हैं। नीम में औषधीय गुण होते हैं जो बीमारियों के साथ-साथ कीड़ों को भी रोकते हैं। लोहार हर घर के मुख्य द्वार पर नीम की पत्ती लगाकर और चौखट में कील ठोंककर आशीष देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उस घर में रहने वालों की अनिष्ट से रक्षा होती है। हरेली पर्व में, गांव और शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद, गांव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली एकत्रित होती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता खेली जाती है। इस प्रतियोगिता में, लोग नारियल को फेंककर दूरी का मापन करते हैं। नारियल हारने और जीतने का सिलसिला रात के देर तक चलता है, और यह एक रंगीन और आनंदमय गतिविधि होती है।

हरेली त्योहार लिखी गई कविता 

हरेली के रंग, छत्तीसगढ़ के संग

हरे-भरे खेत, हरियाली छाई, आज हरेली, खुशियाँ लाई।

किसानों का त्यौहार, प्रकृति का उपहार।

नांगर, गैंती, कुदाली, सबकी पूजा, आज निराली।

पशुधन भी पूजे जाते, गौ माता को भोग लगाते।

गुड़ का चीला, ठेठरी-खुरमी, मिठाई का स्वाद, घर-घर घूमी। 

खुशियों से आंगन महके, मन में उमंग सब।

जड़ी-बूटी का लेप, बीमारी भागे, मिले सुख-चैन।

हरेली के रंग, छत्तीसगढ़ के संग।


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