Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में पर्यटन

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मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा: छत्तीसगढ़ में पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रतिवर्ष राज्योत्सव में मिलेगा पुरस्कार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कल नवा रायपुर के एक निजी होटल में विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने आगामी वर्ष से राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष राज्योत्सव के अवसर पर पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की। सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ टूरिस्म बोर्ड और छत्तीसगढ़ ट्रेवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के पर्यटन विभाग का सूत्रवाक्य अतिथि देवो भवः है। इस कार्यक्रम में जुटे सभी अतिथियों का मैं इसी भाव से अभिनंदन करता हूँ। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर आज छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन द्वारा सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केट प्लस कार्यक्रम का सुंदर आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी ने इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने सुंदर विचार रखे। छत्तीसगढ़ में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आए आपके उपयोगी सुझावों पर विचार कर हम इन्हें अमल में लाएंगे।यह हमारे लिए बहुत गौरव की बात है कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने इस साल देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटक गांवों की सूची में हमारे बस्तर के डूडमारास गांव को एडवेंचर टूरिज्म तथा चित्रकोट गांव को कम्युनिटी बेस्ट गांव की सूची में पहला स्थान दिया। सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव की सूची में सरोधादादर को जगह मिली है।

विश्व पर्यटन संगठन द्वारा इस वर्ष की थीम, पर्यटन एवं शांति निर्धारित की गई है। वैश्विक स्तर पर संघर्ष और विभाजन के माहौल में इस थीम की बहुत प्रासंगिकता है। शांति के साथ सतत विकास की दिशा में सामाजिक और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में पर्यटन की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

पूरी दुनिया में सतत एवं रिस्पांसिबल टूरिज्म पर जोर दिया जा रहा है ताकि हम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी निरंतर ठोस कदम बढ़ा सकें। बस्तर में टूरिज्म बढ़ेगा तो प्राकृतिक सुंदरता को भी सहेजने में मदद मिलेगी। इनसे हजारों लोगों के आजीविका का अवसर भी पैदा होगा।

हमारा राज्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों के साथ गौरवशाली प्राचीन लोक संस्कृति का भी अद्वितीय उदाहरण है। देश के ऐसे बहुत कम राज्य हैं जो कि प्रकृति द्वारा इतने समृद्ध हैं जितना कि हमारा छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ राज्य का एक बड़ा भाग सघन वनों से घिरा हुआ है। शानदार जलप्रपातों से लेकर मुग्ध कर देने वाले वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान तक आप जिस भी आकर्षण के बारे में सोचेंगे वह सब आपको छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगा।

राज्य में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय समुदाय को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। हमारी कोशिश है कि पर्यटन को स्थानीय गतिविधियों और अनुभव के साथ जोड़कर रोजगार के अवसरों को और अधिक विस्तारित किया जाए। छत्तीसगढ़ राज्य में प्राकृतिक रुप से वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, एग्री टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म, रुरल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वॉटर टूरिज्म आदि की अपार संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में तीर्थ स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं अधोसंरचना विकास के लिए लाई गई प्रसाद योजना के माध्यम से मां बम्लेश्वरी का तीर्थ डोंगरगढ़ नये सिरे से सज संवर रहा है।

ट्राइबल टूरिज्म सर्किट के अंतर्गत तेरह टूरिस्ट डेस्टिनेशन में ईको एथनिक पर्यटन की थीम पर पर्यटन सुविधा विकसित की गई है।छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के द्वारा चित्रकोट बस्तर में वन विभाग के सहयोग से नेचर ट्रेल का विकास किया गया है। इसका संचालन स्थानीय महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है। इससे उन्हें आजीविका भी मिल रही है।

हम राज्य में पांच शक्तिपीठ को जोड़ते हुए सर्किट विकसित कर रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत बिलासपुर और जगदलपुर डेस्टिनेशन के पर्यटन स्थलों का विकास होगा।

केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना से पर्यटन स्थलों में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी। इस योजना के तहत देश के चयनित मुख्य स्थलों में जशपुर जिले के मयाली लोकेशन का भी चयन किया गया है।मुझे पूरा विश्वास है कि इस आयोजन में आप सबकी सहभागिता से छत्तीसगढ़ राज्य के पर्यटन विकास की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ेगा और हमारा राज्य वैश्विक पर्यटन के मानचित्र में अपना विशेष स्थान दर्ज करेगा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिस्म बोर्ड द्वारा हिंदी भाषा में प्रकाशित कॉफी टेबल का विमोचन किया गया।छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने आईआरसीटीसी और छत्तीसगढ़ टूरिस्म बोर्ड के मध्य एमओयू भी संपादित किया गया तथा डाक विभाग द्वारा पोस्ट कार्ड का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री साय ने कलिंगा यूनिवर्सिटी में आयोजित फोटोग्राफी, लेखन, क्विज और रील्स प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया।

सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, निदेशक डाक सेवाएं छत्तीसगढ़ सर्कल दिनेश मिस्त्री, छत्तीसगढ़ ट्रेवल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल जैन सहित मध्य भारत के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

आकार लेने लगी छत्तीसगढ़ में पर्यटन तीर्थों की नई श्रृंखला

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छत्तीसगढ़ से जुड़ी भगवान श्रीराम के वनवास काल की स्मृतियों को सहेजने और संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में चयनित 9 पर्यटन तीर्थों का तेजी से कायाकल्प कराया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत इन सभी पर्यटन तीर्थों की आकर्षक लैण्ड स्कैपिंग के साथ-साथ पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है। 

139 करोड़ रूपए की इस परियोजना में उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले तक भगवान राम के वनवास काल से जुड़े स्थलों का संरक्षण एवं विकास किया जा रहा है। चंदखुरी के बाद अब शिवरीनारायण में भी विकास कार्य पूरा हो चुका है, जिसका लोकार्पण 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे।  इसके लिए तीन दिवसीय भव्य समारोह की शुरुआत 08 अप्रैल से हो जाएगी।


10 अप्रैल को लोकार्पित करेंगे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में वर्ष 2019 में भूमिपूजन कर राम वनगमन पर्यटन परिपथ के निर्माण की शुरूआत की थी। इस परिपथ में आने वाले स्थानों को रामायणकालीन थीम के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की इस महात्वाकांक्षी योजना से भावी पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति से परिचित होने के अवसर के साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं भी प्राप्त होगी। 07 अक्टूबर 2021 को तीन दिवसीय भव्य राष्ट्रीय आयोजन के साथ माता कौशल्या मंदिर, चंदखुरी के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णाेद्धार कार्याे का लोकार्पण मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है, जिसके बाद पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जो कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ निर्माण की सफलता का परिचायक है।

 

छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परम्परा में प्रभु श्री राम रचे-बसे है। जय सिया राम के उद्घोष के साथ यहां दिन की शुरूआत होती है। इसका मुख्य कारण है कि छत्तीसगढ़ वासियों के लिए श्री राम केवल आस्था ही नहीं है बल्कि वे जीवन की एक अवस्था और आदर्श व्यवस्था भी हैं। छत्तीसगढ़ में उनकी पूजा भांजे के रूप में होती है। रायपुर से महज 27 कि.मी. की दूरी पर स्थित चंदखुरी, आरंग को माता कौशल्या की जन्मभूमि और श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कोसल है।

रघुकुल शिरोमणि श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या है लेकिन छत्तीसगढ़ उनकी कर्मभूमि है। वनवास काल के दौरान अयोध्या से प्रयागराज, चित्रकूट सतना गमन करते हुए श्रीराम ने दक्षिण कोसल याने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के भरतपुर पहुंचकर मवई नदी को पार कर दण्डकारण्य में प्रवेश किया। मवई नदी के तट पर बने प्राकृतिक गुफा मंदिर, सीतामढ़ी-हरचौका में पहुंचकर उन्होनें विश्राम किया। इस तरह रामचंद्र जी के वनवास काल का छत्तीसगढ़ में पहला पड़ाव भरतपुर के पास सीतामढ़ी-हरचौका को माना जाता है।

रामायण काल की कई घटनाएं घटित 

छत्तीसगढ़ की पावन धरा में रामायण काल की कई घटनाएं घटित हुई हैं जिसका प्रमाण यहां की लोक संस्कृति, लोक कला, दंत कथा और लोकोक्तियां हैं। राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत प्रथम चरण में सीतामढ़ी-हरचौका (जिला कोरिया), रामगढ़ (जिला सरगुजा), शिवरीनारायण (जिला जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (जिला बलौदाबाजार), चंदखुरी (जिला रायपुर), राजिम (जिला गरियाबंद), सप्तऋषि आश्रम सिहावा (जिला धमतरी), जगदलपुर और रामाराम (जिला सुकमा) को विकसित किया जा रहा है।  

पड़ाव के नाम से भी प्रसिद्ध

कोरिया जिले का सीतामढ़ी रामचन्द्र जी के वनवास काल के पहले पड़ाव के नाम से भी प्रसिद्ध है। पौराणिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में रामगिरि पर्वत का उल्लेख आता है। सरगुजा जिले का यही रामगिरी-रामगढ़ पर्वत है। यहां स्थित सीताबेंगरा- जोगीमारा गुफा की रंगशाला को विश्व की सबसे प्राचीन रंगशाला माना जाता है। मान्यता है कि वन गमन काल में रामचंद्र जी के साथ सीता जी ने यहां कुछ समय व्यतीत किया था, इसीलिए इस गुफा का नाम सीताबेंगरा पड़ा।

जांजगीर-चांपा जिले में प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण शिवनाथ, जोंक और महानदी का त्रिवेणी संगम स्थल शिवरीनारायण है। इस विष्णुकांक्षी तीर्थ का संबंध शबरी और नारायण होने के कारण इसे शबरी नारायण या शिवरीनारायण कहा जाता है। ये मान्यता है कि इसी स्थान पर माता शबरी ने वात्सल्य वश बेर चखकर मीठे बेर रामचंद्र जी को खिलाए थे। यहां नर-नारायण और माता शबरी का मंदिर है जिसके पास एक ऐसा वट वृक्ष है, जिसके पत्ते दोने के आकार के हैं। चंदखुरी के बाद अब शिवरीनारायण में भी विकास कार्य पूरा हो जाने से राज्य में पर्यटन तीर्थों की नयी श्रृंखला आकार लेने लगी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 10 अप्रैल को शिवरीनारायण के विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। इसके लिए 08 अप्रैल से समारोह की शुरुआत हो जाएगी।

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