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सिम्स के पूर्व डीन डॉ. केके सहारे का निलंबन हुआ रद्द, कोरबा मेडिकल कॉलेज के बने नए डीन, आदेश जारी

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सिम्स के पूर्व डीन डॉ. केके सहारे के निलंबन को रद्द कर उन्हें बहाल कर दिया है। उनकी पदस्थापना कोरबा मेडिकल कॉलेज में डीन के पद पर की गई है।


23 सितंबर को डॉ. सहारे को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के पीछे प्रशासनिक अनियमितताओं और अन्य आरोपों का हवाला दिया गया था। इसके खिलाफ डॉ. सहारे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 21 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए डॉ. सहारे को राहत दी और उनके निलंबन पर रोक लगा दी थी। तब से यहां कुर्सी का खेल शुरू हो गया था।


प्रभारी डीन डॉ. रमणेश मूर्ति और डॉ. सहारे में वर्चस्व की अंदरूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। 26 नवंबर को डॉ. सहारे को दिए गए स्टे को समाप्त कर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। सरकार के ताजा आदेश में स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय के आदेश के मद्देनजर डॉ. सहारे को तत्काल प्रभाव से सिम्स में बहाल किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें आगामी आदेश तक सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय कोरबा के अधिष्ठाता के पद पर पदस्थ किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी बैठक के दौरान निलंबन का दिया था आदेश
23 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल अधिशाषी समिति की बैठक लेने सिम्स आए थे। इस दौरान अनियमितताओं पर डॉक्टर केके सहारे को निलंबित कर दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने स्टे ले लिया था। हाईकोर्ट से जैसे ही स्टे वेकेंट हुआ तब शासन का आदेश लागू होता और वे निलंबित होते। पर 25 नवंबर को स्ट वेकेंट के आदेश के अगले ही दिन 26 नवंबर को शासन ने उन्हें निलंबन से लेकर बहाली करते हुए कोरबा मेडिकल कॉलेज का डीन बना दिया।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल बिलासपुर का किया निरीक्षण, 200 करोड़ में बन रहा 10 मंजिला अत्याधुनिक अस्पताल

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 रायपुर : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने आज बिलासपुर में सिम्स के विस्तार के रूप में कोनी में बन रहे मल्टी स्पेश्यालिटी हास्पिटल भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने 31 अक्टूबर 2024 तक तमाम निर्माण, खरीदी एवं भर्ती के कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए ताकि राज्य स्थापना सप्ताह के दौरान इसका लोकार्पण किया जा सके। उन्होंने अस्पताल भवन एवं अब तक उपलब्ध की गई सुविधाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन किया।


उल्लेखनीय है कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त वित्तीय भागीदारी से लगभग 200 करोड़ रूपये की लागत से इस अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। छह गंभीर रोगों के मरीजों के इलाज के लिए इसमें 240 बेड की सुविधा है। नया मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ग्राउण्ड फ्लोर सहित 10 मंजिलों में बना है। मंत्री ने सभी मंजिलों में बने सुविधाओं और मशीन उपकरणों का निरीक्षण किया। सिम्स के इस विस्तारित अस्पताल भवन में छह विशेषज्ञ वाले विभाग- नेफोलॉजी, यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सीटीव्हीएस, न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी शामिल हैं। भवन का निर्माण केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग और उपकरणों की खरीदी केन्द्र सरकार की एजेन्सी हाईट्स द्वारा की जा रही है।


जायसवाल ने अस्पताल शुरू करने के पहले फॉयर ऑडिट और लिफ्ट की ऑडिट कराने लेने के निर्देश दिए। मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के ग्राउण्ड फ्लोर में रेडियोलॉजी एवं केजुअल्टी की व्यवस्था है। पहले और दूसरे मंजिल में ओपीडी, तीसरी मंजिल में प्रशासनिक भवन, चौथी मंजिल में ऑपरेशन थियेटर और कैथलैब, पांचवी मंजिल में सर्विसेस के साथ छठवें से दसवें तक मेडिकल वार्ड होंगे। उन्होंने अस्पताल में ट्रायल शुरू करने के निर्देश दिए ताकि जो कमियां सामने आएंगी उन्हें समय रहते सुधारा जा सके। उन्होंने समीप में ही बन रहे कैंसर इंस्टीट्यूट भवन की भी जानकारी ली और मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सिम्स का नया भवन भी इसी परिसर में बनेगा। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए 700 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस अवसर पर विधायक सुशांत शुक्ला, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ , कमिश्नर चिकित्सा शिक्षा श्रीमती किरण कौशल, संचालक स्वास्थ्य ऋतुराज रघुवंशी, एमडी सीजीएमएससी पद्मिनी भोई, एनएचएम के एमडी जगदीश सोनकर , संयुक्त सचिव अभिजीत सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘कुष्ठ के विरुद्ध युद्ध‘ अभियान, मु्ख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ली स्वास्थ्य विभाग की बैठक

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज यहां मंत्रालय, महानदी भवन में स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक ली। उन्होंने बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और एंबुलेंस सेवा-108 को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य को कुष्ठमुक्त बनाने जल्दी ही कुष्ठ के विरुद्ध युद्धअभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने डॉक्टरों को मरीजों के लिए जेनेरिक दवाईयां ही प्रिस्क्राइब करने को कहा। उन्होंने सभी अस्पतालों में जेनेरिक दवाईयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जगदलपुर और बिलासपुर में निर्माणाधीन सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का काम आगामी फरवरी माह तक हर हाल में पूर्ण करने को कहा, ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों मार्च में इनका लोकार्पण कराया जा सके। उप मुख्यमंत्री अरूण साव और विजय शर्मा तथा मुख्य सचिव अमिताभ जैन भी बैठक में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा है कि हर जरूरतमंद मरीज के पास एंबुलेंस तत्काल पहुंचे। मरीजों तक एम्बुलेंस आधा घंटे में पहुंच जाना चाहिए। उन्होंने सड़कों पर विचरण करने वाले मानसिक रोगियों के इलाज एवं कल्याण के लिए तुरंत कदम उठाने और उनके त्वरित इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्लै ने मुख्यमंत्री को राज्य के मेडिकल कॉलेजों, संबद्ध अस्पतालों, नर्सिंग कॉलेजों तथा डेंटल कॉलेजों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।

उन्होंने बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रमों, एनीमिया मुक्त भारत, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, राष्ट्रीय सिकलसेल उन्मूलन मिशन, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिर, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वित्त विभाग के सचिव अंकित आनंद, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव पी. दयानंद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक भोसकर विलास संदिपान, आयुष विभाग की संचालक सुश्री नम्रता गांधी और सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक चंद्रकांत वर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

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