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गौठानों में पहुँचेंगे मोबाईल मेडिकल यूनिट, पशु रोगों की जांच और उपचार की होगी व्यवस्था

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रायपुर। प्रदेश के गौठानों में पशु चिकित्सा और रोगों की जांच की सुविधा और सुदृढ़ होगी। मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से गौठानों मे पशु चिकित्सा की सुविधा मिलेगी। इसका जल्द शुभारंभ किया जाएगा। पशुधन विकास मंत्री रविन्द्र चौबे ने आज अपने निवास में मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई (मोबाईल वैटेनरी यूनिट) मोबाईल मेडिकल यूनिट का अवलोकन किया।

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने भी इस मोबाईल यूनिट के संबंध मे जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। पशुधन विकास विभाग द्वारा 1962 टोल-फ्री नंबर की जल्द शुरूआत की जाएगी। जिसमें पशुपालक सुबह 8 से शाम 4 बजे तक पशुओं की बीमारी के संबंध सलाह ले सकेंगे। इस नंबर पर उन्हे पशु चिकित्सक द्वारा सलाह और समीप के पशु चिकित्सालय के संबंध में जानकारी दी जाएगी।

मोबाईल मेडिकल यूनिट प्रदेश के विकासखण्ड स्तर पर जल्द उपलब्ध होगी। छोटे विकासखण्ड पर एक और बड़े विकासखण्ड स्तर पर दो मोबाईल मेडिकल यूनिट होंगे। राज्य में मोबाईल मेडिकल यूनिट की संख्या 163 होगी। यह प्रतिदिन दो और महीने में 50 गौठान एवं ग्राम में पहुंचेगी। इसमें एक पशु चिकित्सक और वैटेनरी असिस्टेंट होगा। इस मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से पशुओं की चिकित्सा और पशु रोगों का जांच, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, शल्य चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस मोबाईल मेडिकल यूनिट एक बड़ी एलईडी टीव्ही लगी हुई है, जिसमें पशुधन विकास की योजनाओं की सम्पूर्ण जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर पशुधन विकास विभाग के संचालक श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, ओएसडी डॉ. मौसम मेहरा, अपर संचालक डॉ. के.के. ध्रुव और डॉ. महावीर सरसीहा उपस्थित थे ।

मुख्यमंत्री बघेल ने हरेली तिहार के मौके पर पशुपालक किसानों और गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 16.29 करोड़ रूपए की दी सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज 17 जुलाई को हरेली तिहार के अवसर पर गौठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीण पशुपालक किसानों सहित गौठान समितियों और महिला समूहों को 16 करोड़ 29 लाख रूपए की राशि का अंतरण सीधे उनके बैंक खातों में किया। गोधन न्याय योजना के तहत ऑनलाईन राशि अंतरण का यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हरेली तिहार उत्सव के अवसर पर आज शाम आयोजित हुआ।
                     

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इनमें जुलाई माह की प्रथम पखवाड़े में गौठानों में गोबर विक्रय करने वाले 59,729 किसानों को 3 करोड़ 96 लाख रूपए तथा गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 12 करोड़ 33 लाख रूपए की राशि जारी किया। गौठानों में जुलाई माह के प्रथम पखवाड़े में एक लाख 98 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी गोधन न्याय योजना के तहत की गई है। गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना अंतर्गत आज 17 जुलाई को 16.29 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद हितग्राहियों को अब तक 526.37 करोड़ रूपए का भुगतान हो चुका है।
                   

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हरेली तिहार को रोजगार और आय से जोड़ते हुए गोधन न्याय योजना की शुरूआत हरेली के ही दिन 20 जुलाई 2020 को हुई थी। आय यह योजना अपनी सफलता के लिए एक नजीर बन चुकी है।  छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना जिसने 2 रूपए किलों में गोबर खरीदकर उससे जैविक खाद का निर्माण किया, बिजली बनाई, प्राकृतिक पेंट का निर्माण किया। इस सब कामों के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने देश को महिला सशक्तिकरण की नई राह दिखाई। देश के अनेक राज्य हमारी गोधन न्याय योजना का लगातार विस्तार किया है। गोबर से जैविक खाद बनाने के साथ-साथ गोमूत्र से जैविक वृद्धिवर्धक और जैविक कीटनाशक भी बना रहें है।
                   

उन्होंने अवगत कराया कि अब अपने गौठानों को हम रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में उन्नत कर रहें है। प्रदेश में रीपा योजना शुरू की गई है। इस योजना में 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्कों की स्थापना की गई है। गोधन न्याय योजना से 03 लाख 58 हजार से ज्यादा किसानों को लाभ हो रहा है। 17 हजार 834 स्व-सहायता समूहों के 02 लाख 09 हजार 750 सदस्यों कों इस योजना से आजीविका मिल रही है। इस योजना ने हमारी माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाकर उनका आत्मविश्वास मजबूत किया है। प्रदेश में 10 हजार 327 गौठान स्वीकृत किए गए है, जिनमें से 10 हजार 263 गौठानों को निर्माण पूरा हो चुका है। याने 99.38 प्रतिशत गौठानों का निर्माण हमने कर लिया है। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह हैै कि हमारे गौठान तेजी से स्वावलंबी भी हो रहे है।
                    

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस गौठानों द्वारा स्वयं की राशि से गोबर की खरीदी की जा रही है अभी तक 5 हजार 960 स्वावलंबी गौठानों द्वारा 66 करोड़ 96 लाख रूपए के गोबर की खरीदी की जा चुकी है। गोधन न्याय योजना मे अभी तक कुल 125.54 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। इसकी एवज में 251 करोड़ रूपए का भुगतान गोबर विक्रेताओं को किया जा चुका है। इसी तरह गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को 257 करोड़ 29 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, संचालक पशुधन श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी आदि उपस्थित थें। 

मुख्यमंत्री हरेली तिहार के मौके पर पशुपालक किसानों और गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों देंगे 16.29 करोड़ रूपए की सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 17 जुलाई को हरेली तिहार के मौके पर गौठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीण पशुपालक किसानों सहित गौठान समितियों और महिला समूहों को 16 करोड़ 29 लाख रूपए की राशि का अंतरण सीधे उनके बैंक खातों में करेंगे। गोधन न्याय योजना के तहत ऑनलाईन राशि अंतरण का यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हरेली तिहार उत्सव के दौरान होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जुलाई माह की प्रथम पखवाड़े में गौठानों में गोबर विक्रय करने वाले 59,729 किसानों को 3 करोड़ 96 लाख रूपए तथा गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 12 करोड़ 33 लाख रूपए की राशि जारी करेंगेेे। 

गौठानों में जुलाई माह के प्रथम पखवाड़े में एक लाख 98 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी गोधन न्याय योजना के तहत की गई है। इस योजना के तहत गोबर खरीदी में स्वावलंबी गोठानों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। गोबर विक्रेताओं को होने वाले 3.96 करोड़ रूपए के भुगतान में से मात्र 1.61 करोड़ रूपए का भुगतान शासन की ओर से किया जाएगा, जबकि 2.35 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठान स्वयं की राशि से करेंगे। राज्य में 10,263 गौठान निर्मित एवं संचालित हैं, जिसमें से 5960 गौठान पूरी तरह से स्वावलंबी हो चुके हैं। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 67 करोड़ रूपए का गोबर पशुपालक किसानों से स्वयं की राशि से किया है। 

गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को अब तक 510.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 17 जुलाई को 16.29 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 526.37 करोड़ रूपए हो जाएगा, जिसमें महिला समूहों को जारी 18 करोड़ रूपए की बोनस राशि भी शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में अब 125.54 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसमें से 123.56 लाख क्विंटल गोबर खरीदी की एवज में गोबर विक्रेताओं को 247.12 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 17 जुलाई को 2.96 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह राशि 251.08 करोड़ रूपए हो जाएगी। गौठानों समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 244.96 करोड़ रूपए के भुगतान किया जा चुका है। हरेली पर्व पर 12.33 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 257.29 करोड़ रूपए हो जाएगा।

वाई-फाई सुविधा से लैस होंगे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क को वाई-फाई सुविधा से लैस किया जाएगा, ताकि ये पार्क आर्थिक गतिविधियों के सक्रिय केन्द्र के रूप में विकसित हो सकें। मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में गौठानों में बनाए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण-2023 की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में गोबर पेंट निर्माण की कम से कम एक इकाई की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य करें। 

उन्होंने रीपा में उत्पादित सामग्रियों के संस्थागत बिक्री केन्द्रों का बड़े व्यावसायिक संस्थानों के साथ मार्केट लिंकेज कराने के निर्देश दिए। बघेल ने कहा कि रीपा से जुड़े हुए गौठानों को मल्टी एक्टिविटी केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। आर्थिक गतिविधियों में पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े परिवारों के साथ ही पुरूषों की भी सहभागिता बढ़ाई जाए। ऐसा प्रयास किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। इसी तरह उन्होंने रीपा के स्तर पर समूहों को विभिन्न व्यवसायों में कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र पूर्ण करने तथा बरसात के मौसम में सभी गौठानों में छायादार और फलदार वृक्षों का रोपण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण-2023 की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण का कार्य एक अप्रैल से प्रारंभ किया गया है। सर्वे का कार्य 30 अप्रैल तक किया गया। एक से 5 मई तक अद्यतनीकरण का कार्य किया जा रहा है। 5 मई से 15 मई तक गांवों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर दावा-आपत्ति लिया जाएगा तथा 15 मई से 18 मई तक दावा-आपत्ति वाले प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। 18 मई से 25 मई तक दावा-आपत्ति वाले प्रकरणों में किए गए निराकरणों का पुनः ग्रामसभा में अनुमोदन किया जाएगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर., संचालक पंचायत कार्तिकेय गोयल, रीपा के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा भी उपस्थित थीं।

गौठानों में पशुओं के लिए चारा, पानी और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के 10 हजार से अधिक गौठानों में गर्मी को देखते हुए पशुओं के लिए चारा पानी और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के सभी कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गौठानों का भ्रमण कर वहां पैरा के साथ ही हरे चारे, शेड और पानी की व्यवस्था कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों के आश्रित गांवों में भी मांग अनुसार गौठान की स्वीकृति दी जाए।

मुख्यमंत्री बघेल ने आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में गोधन न्याय योजना के तहत् से पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 4 करोड़ 40 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गौठान में होने वाली आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए अनिवार्य रूप से गौठान समितियों की बैठक करायी जाए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता जाहिर कि राज्य के आधे से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। उन्होंने गर्मी के मौसम को देखते हुए कहा कि नहरों से तलाबों में पानी भरने का काम त्वरित गति से करें, जिससे पानी की उपलब्धता रहेगी और जल स्तर बढ़ेगा। कार्यक्रम को कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने भी संबोधित किया।

गौरतलब है कि प्रदेश की 11 हजार पंचायतों में 10 हजार 6 सौ नब्बे गौठान स्वीकृत हुए हैं। जिसमें से 10 हजार से अधिक गौठान पूर्ण हो गये हैं। इन गौठानों में 5 हजार 3 सौ 98 गौठान स्वावलंबी हो गये हैं, जिनके द्वारा गोबर खरीदने के लिए 50 करोड़ 82 लाख रूपये की सहायता दी गई है। एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक गौठानों में कुल 1.30 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है। जिसके एवज में गोबर विक्रेताओं को अंतरित की जाने वाली 2.59 करोड़ रूपए की राशि में से 1.24 करोड़ की राशि कृषि विभाग द्वारा तथा 1.67 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया गया है।

प्रदेश के 49 गौठानों में गोबर से पेंट तैयार करने की इकाई स्वीकृत की गई है जिसमें से 34 इकाईयां की स्थापना की जा चुकी है। 32 इकाई मेें पेंट का उत्पादन किया जा रहा है। इन इकाईयों से 87 हजार 8 सौ 27 लीटर पेंट की उत्पादन किया गया है तथा 47 हजार 5 सौ 47 लीटर पेंट के बिक्री से 97.08 लाख रूपये की आय अर्जित की गई है। राज्य के 33 जिलों के गौठानों में 20.20 लाख क्विंटल पैरा और 7 हजार 8 सौ 59 गौठानों में पानी की व्यवस्था की गई है। गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में हितग्राहियों को अब तक लगभग 439 करोड़ 73 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 

राज्य में 15 अप्रैल 2023 तक गौठानों में 112.34 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। गोबर विक्रेताओं से आज की राशि अंतरण के पश्चात क्रय किए गए गोबर के एवज में 224 करोड़ 68 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। वहीं गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को आज किये गये 1.81 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद 192.65 करोड़ रूपए की राशि दी जा चुकी है। इस अवसर पर वर्चुअल रूप से वन मंत्री अहमद अकबर, स्कूल शिक्षा प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा एवम विनोद वर्मा, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त कमलप्रीत सिंह अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के तहत 5 करोड़ 32 लाख रूपए का किया भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहाँ अपने निवास कार्यालय से गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 5 करोड़ 32 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी किया। इसके अंतर्गत 16 मार्च से 31 मार्च तक खरीदे गए 1 लाख 45 हजार क्विंटल गोबर के एवज में 2 करोड़ 91 लाख रूपए का भुगतान किए जाने के साथ ही गौठान समितियों को 1.43 करोड़ रूपए और महिला समूहों को 98 लाख रूपए की लाभांश राशि शामिल है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित हैं तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा और राज्य नोडल अधिकारी RIPA गौरव सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना में हम लोगों ने निरंतर उपलब्धियां हासिल की है, लेकिन स्वावलंबी गौठानों की संख्या में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है, वह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ही अपने गांवों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। गोबर विक्रेताओं को दी जा रही राशि में से 01 करोड़ 67 लाख रुपए की राशि स्वावलंबी गौठानों की ओर से स्वयं भुगतान की जा रही है। जबकि विभाग की ओर से 01 करोड़ 24 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है।

गौठान समितियों को स्वावलंबन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हम लोगों ने स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्षों को 750 रुपए और सदस्यों को 500 रुपए हर महीने प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। किसान भाइयों को यह खुशखबरी तो पहले ही मिल चुकी होगी कि आने वाले नवंबर महीने से अब 20 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जाएगी। इसकी मांग किसान भाइयों द्वारा बहुत लंबे समय से की जा रही थी। निश्चित रूप से इसका लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा

इसी तरह राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का भी अब विस्तार कर दिया गया है। अब नगर पंचायतों और अनुसूचित क्षेत्र की नगर पालिकाओं के भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए भूमिहीन कृषि मजदूर 15 अप्रैल तक अवश्य आवदेन कर दें। 01 अप्रैल से गांवों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी शुरू किया गया है, क्योंकि 2011 के बाद से जनगणना ही नहीं हो पाई है। इस सर्वेक्षण से नये हितग्राही भी चिन्हित होंगे। उन्हें भी आवास, गैस सिलेंडर, शौचालय जैसी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा।

01 अप्रैल से ही शिक्षित बेरोजगारों से बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है। इसके लिए उन्हें ऑन लाइन आवेदन की सुविधा दी गई है। पहले ही दिन 6000 से ज्यादा बेरोजगारों के आवेदन मिले, जिसे उसी दिन मंजूर भी कर लिया गया। आज इस कार्यक्रम के माध्यम से जिन किसानों, गोबर विक्रेताओं, पशुपालकों, गौठान समितियों और स्व सहायता समूहों के खाते में राशि का अंतरण हो रहा है, उन सभी को बहुत बधाई।

सीएम आज करेेंगें गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 7 करोड़ 4 लाख रूपए का करेंगे भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 15 मार्च को गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 7 करोड़ 4 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे, जिसमें 16 फरवरी से 28 फरवरी तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय 2.13 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4 करोड़ 25 लाख रूपए, गौठान समितियों को 1.65 करोड़ रूपए और महिला समूहों को   1.14 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी में स्वावलंबी गौठान न सिर्फ अपनी सहभागिता निभा रहे हैं बल्कि निरंतर बढ़त बनाए हुए हैं। बीते कई पखवाड़ों से गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि में स्वावलंबी गौठानों की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत तक रहने लगी है। आज की स्थिति में 50 फीसद से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की राशि से गोबर एवं गौमूत्र की खरीदी के साथ-साथ गौठान के अन्य गतिविधियों को स्वयं की राशि से पूरा कर रहे हैं। 16 फरवरी से 28 फरवरी तक गौठानों में कुल 2.13 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हुई है, जिसके एवज में गोबर विक्रेताओं को अंतरित की जाने वाली 4.25 करोड़ रूपए की राशि में से 1.92 करोड़ की राशि कृषि विभाग द्वारा तथा 2.33 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया जाएगा। स्वावलंबी गौठानों द्वारा गोबर खरीदी के एवज में अब तक 45.52 करोड़ रूपए का भुगतान स्वयं की राशि से किया गया है।

गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में हितग्राहियों को 412 करोड़ 21 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 15 मार्च को 7.04 करोड़ के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 419 करोड़ 25 लाख रूपए हो जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य में 20 जुलाई 2020 से गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। राज्य में 28 फरवरी 2023 तक गौठानों में 107.75 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। गोबर विक्रेताओं से क्रय किए गए गोबर के एवज में 211 करोड़ 25 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 15 मार्च को गोबर विक्रेताओं को 4.25 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 215 करोड़ 50 लाख रूपए हो जाएगा। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 182 करोड़ 98 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 2.79 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 185.77 करोड़ रूपए हो जाएगा।

राज्य के सभी रीपा में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के सहयोग से स्थापित होंगे ग्रामीण तकनीकी केन्द्र

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के गौठानों में स्थापित ग्रामीण औद्योगिक केन्द्रों में काम करने वाले ग्रामीण युवा उद्यमियों के सपनों को एक नया आयाम मिलने वाला है। ग्रामीण औद्योगिक केन्द्रों यानि रीपा में अब भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) मुम्बई के सहयोग से छत्तीसगढ़ के सभी रीपा सेंटरों में ग्रामीण तकनीक का प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण देने के लिए ग्रामीण तकनीकी केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों में 72 से ज्यादा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित उद्यम तकनीक का प्रशिक्षण युवाओं को दिया जाएगा। बार्क द्वारा यहां मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए जाएंगे।

 

बार्क के अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और रीपा में ग्रामीण तकनीकी केन्द्रों की स्थापना में सहयोग दिए जाने की सहमति दी। यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य के 300 गौठानों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा 300 करोड़ रूपए की मंजूरी दी गई है। कई रीपा का निर्माण पूरा हो चुका है और वहां विभिन्न ग्रामीण उद्यम संचालित किए जा रहे हैं। 

ग्रामीण तकनीकी केन्द्रों में युवाओं को विभिन्न रोजगार-व्यवसाय का प्रशिक्षण, फल सब्ज्यिों और लघु वनोपजों के विभिन्न उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह की अध्यक्षता में हुई योजना आयोग की बैठक में रीपा में ग्रामीण तकनीकी केन्द्रों की स्थापना तथा गोबर से विद्युत उत्पादन की आधुनिकतम तकनीक व इकाईयों के विस्तार को लेकर सार्थक चर्चा हुई। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में मुख्य ग्रामीण तकनीकी केन्द्र स्थापित किया जाएगा।

बैठक में बार्क के अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण तकनीकी केंद्र में युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जुड़ने का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इन केन्द्रों में फल-सब्जी और वनोपजों से विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री बनाने की विधि एवं अन्य विधाओं के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव श्रीमती सुषमा ताईषेते ने राज्य में गोबर से विद्युत उत्पादन और खाद्य विकिरण तकनीक के संबंध में राज्य की दूरदृष्टि और राज्य की पहल की सराहना की। उन्होंने राज्य में स्थापित सभी ग्रामीण औद्योगिक पार्क में ग्रामीण तकनीकी केन्द्र स्थापना में सहयोग का आश्वासन दिया। बार्क के वैज्ञानिकों डॉ. एस. गौतम, डॉ. एस.टी. मेहेत्रे ने खाद्य पदार्थो के लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के संबंध में आधुनिक विकरण तकनीक की जानकारी दी।

बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने राज्य में गोबर से बिजली उत्पादन के विषय में बताया कि छत्तीसगढ़, देश में सबसे बड़ा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक राज्य है। उन्होंने राज्य में खाद्य विकिरण तकनीक की संभावनाओं और इससे आजीविका सृजन के बारे में जानकारी दी। शर्मा ने राज्य में महुआ, इमली, टमाटर आदि व लघु वनोपजों तथा अन्य उत्पादों को सुरक्षित रखने एवं उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी देते हुए बार्क से तकनीक सहयोग की अपेक्षा की।

बैठक में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह ने इस चर्चा को सार्थक बताया। उन्होंने राज्य में वन संसाधनों की बहुलता के बारे में बताते हुए धान और लघु वनोपजों, वनौषधियों की वृहद् उपलब्धता के विषय में ध्यान आकर्षित करते हुए इसके संबंध में बार्क से अपनी तकनीकों को साझा करने कहा। उन्होंने राज्य में 65 लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य में भी सरकार द्वारा खरीदी की जानकारी दी और इस संबंध में विभागों के प्रतिनिधियों को बार्क और भारत सरकार से चर्चा कर आगामी कार्यवाही शुरू करने की बात कही।

इंदिरा गांधी कृृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंदेल, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेवलपमेंट आथोरिटी के सीईओ सुमित सरकार ने अपने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में जैवऊर्जा उत्पादन व खाद्य विकिरण के संबंध में किए जा रहे कार्यों के विषय में अवगत कराया। ऊर्जा विभाग के सचिव अंकित आनंद ने इस संबंध में स्वच्छ भारत मिशन की गोवर्धन योजना के लाभ लेने की जरुरत बताई।

बैठक में परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव श्रीमती सुशमा ताईषेते, भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. एस. गौतम, डॉ. एस.टी. मेहेत्रे, राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव अनूप कुमार श्रीवास्तव, ऊर्जा विभाग के सचिव अंकित आनंद, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंदेल, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेवलपमेंट आथोरिटी के सीईओ सुमित सरकार सहित ग्रामीण औद्योगिक पार्क के नोडल गौरव सिंह, वन विभाग के सचिव प्रेम कुमार, लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक आनंद बाबू एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री 6 फरवरी को गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 8 करोड़ 23 लाख रूपए का करेंगे भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 6 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम हितग्राहियों को 8.23 करोड़ रूपए की राशि जारी करेंगे। इसमें गौठानों में 15-31 जनवरी तक क्रय 2.38 लाख क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को 4 करोड़ 76 लाख रूपए, गौठान समितियों को 2.04 करोड़ रूपए और महिला समूहों को 1.43 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी के एवज में विक्रेताओं को अंतरित की जाने वाली 4.76 करोड़ रूपए की राशि में से मात्र 1.98 करोड़ की राशि कृषि विभाग द्वारा तथा 2.78 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य में अब तक 4927 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की जमा पूंजी से गोबर क्रय करने लगे हैं। स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक 40.49 करोड़ रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय कर भुगतान किया गया है।

हितग्राहियों को 403.58 करोड़ का भुगतान-

गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में हितग्राहियों को 395 करोड़ 35 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 5 फरवरी को 8.23 करोड़ के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 403 करोड़ 58 लाख रूपए हो जाएगा। यह यहां उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 20 जुलाई 2020 से गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। राज्य में 31 जनवरी 2023 तक 103.25 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। गोबर विक्रेताओं से 15 जनवरी तक क्रय किए गए गोबर के एवज में 201.73 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 5 फरवरी को गोबर विक्रेताओं को 4.76 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 206 करोड़ 49 लाख रूपए हो जाएगा। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 175 करोड़ 64 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 5 फरवरी को 3.47 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 179.11करोड़ रूपए हो जाएगा।

साग-सब्जियां सुखाने गौठानों में दिए जाएंगे सोलर ड्रायर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गौठानों में सोलर ड्रायर उपलब्ध कराए जाएंगे। धमधा और पत्थलगांव में टमाटर के बड़े पैमाने पर उत्पादन को देखते हुए इन क्षेत्रों के गौठानों में टमाटर को सूखा कर विक्रय का काम प्रारंभ किया जा सकता है। इसी तरह अन्य स्थानों में छत्तीसगढ़ की भाजियों को सूखा कर उनके विक्रय की शुरूआत की जा सकती है। इस नये कार्य से भी किसानों और समूहों की आय बढ़ेगी। मुख्यमंत्री आज यहां अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि के ऑनलाईन अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में गौपालकों, गोबर विक्रेताओं, गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को 7 करोड़ 05 लाख रूपए की राशि का अंतरण किया। उन्होंने 16 दिसम्बर से 31 दिसम्बर तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय 2.29 लाख क्विंटल गोबर के एवज में उनके खाते में 4 करोड़ 59 लाख रूपए, गौठान समितियों को 1.46 करोड़ रुपए और महिला समूहों के खाते में 01 करोड़ रूपए की लाभांश राशि अंतरित की। इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना और रूरल इंडस्ट्रियल पार्क ग्रामीणों को आय और रोजगार उपलब्ध कराने की एक सफल योजना के रूप में जल्द ही देश और दुनिया के सामने होगी। लोगों से इन योजनाओं के प्रति भारी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण नये-नये उद्यम स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप ग्रामीणों और स्व-सहायता समूहों को उपयोगी और लाभप्रद लघु और कुटीर उद्योग स्थापित करने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रीपा के कार्य में और अधिक तेजी लाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन और उनके विक्रय में मिली सफलता के साथ महिला समूहों द्वारा गोबर से प्राकृतिक पेंट तैयार करने की यूनिट लगाने की काफी मांग कर रहे हैं। कई गौठानों में गोबर से बिजली बनाने का काम भी शुरू हो रहा है। सुकमा और जगदलपुर में गोबर से बिजली के संयंत्र की स्थापना का कार्य इस माह में पूरा हो जाएगा। गोबर से गौ-काष्ठ और गमले जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी अच्छी खपत हो रही है। गोबर हमारे लिए अब मूल्यवान बन गया है। गांवों में कुटीर उद्योग प्रारंभ होने की परिकल्पना अब साकार हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10,894 स्वीकृत गौठानों में से 9,591 गौठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। हमारे लगभग 50 प्रतिशत गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, 4,564 स्वावलंबी गौठानों ने अपनी स्वयं की राशि से अब तक 35.19 करोड़ रुपए के गोबर की खरीदी की है।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस अवसर पर कहा कि हमारे गौठानों में अब गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना साकार होती दिख रही है। उन्होंने कहा कि गौठानों में अब तक 98.73 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है, जिसके एवज में गोबर विक्रेताओं को   197.45 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। इसी तरह इस योजना के माध्यम से गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 171.87 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। गौठानों में कार्यरत स्व-सहायता समूहों को आयमूलक गतिविधियों से अब तक   105.18 करोड़ रूपए की आय हो चुकी है। अब तक गौठानों से 16 लाख 68 हजार 715 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है।

37 गौठानों में शुरू होगी गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट

कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 25 जिलों के 37 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की 37 यूनिटें इस माह के अंत तक स्थापित हो जाएंगी। वर्तमान में रायपुर और दुर्ग जिले में 2-2 और कांकेर में 01 प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट में उत्पादन शुरू हो गया है, 8997 लीटर उत्पादित प्रकृतिक पेंट में से 3307 लीटर की बिक्री से स्व-सहायता समूहों को 7 लाख 2 हजार 30 रुपए की आमदनी हुई।

ब्रम्हास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत के विक्रय से महिला समूहों को 22.43 लाख रूपए की आय

96 गौठनों में 4 रुपए लीटर में 1 लाख 15 हजार 423 लीटर गौमूत्र की खरीदी की गई है। जिससे बनाए गये कीटनाशक ब्रम्हास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत की बिक्री से महिला स्व- सहायता समूहों को 22.43 लाख रूपए की आय हुई है। मुख्यमंत्री की पैरा दान की अपील पर किसानों ने गौठनों में 10.32 लाख क्विंटल पैरा दान किया है।

स्वावलंबी गौठान कृषि विभाग की तुलना में खरीद रहे हैं ज्यादा गोबर

पिछले पखवाड़े में खरीदे गए गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को आज भुगतान की गई 4.59 करोड़ रुपए की राशि में से 1.76 करोड़ रुपए का भुगतान कृषि विभाग द्वारा किया गया, जबकि 4564 स्वावलंबी गौठानों ने अपने संसाधनों से गोबर खरीदी के एवज में 2.83 करोड़ रूपए का भुगतान किया है।

गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट से होगी शासकीय भवनों की पुताई

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में लोक निर्माण विभाग ने गौठानों में गोबर से उत्पादित प्राकृतिक पेंट को विभागीय निर्माण कार्यों के एसओआर में शामिल कर लिया है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने विभागीय अधिकारियों को सभी शासकीय भवनों के रंग-रोगन में केमिकल पेंट के बदले गोबर से बनने वाले प्राकृतिक पेंट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए है। प्रमुख अभियंता ने इस संबंध में जारी आदेश में कहा है कि गोबर पेंट का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण पहल है।

लोक निर्माण विभाग द्वारा नव निर्मित भवनों के दो या दो से अधिक कोट्स की वॉशेबल डिस्टेम्पर से पुताई के लिए प्रति वर्ग मीटर 53 रूपए तथा पुराने भवनों के लिए 30 रूपए प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है। इसी तरह गोबर से निर्मित प्रीमियम ईमलशन पेंट से नवनिर्मित वॉल पेंटिंग की दर 69 रूपए प्रति वर्ग मीटर तथा पुराने भवन के लिए प्रति वर्ग मीटर 41 रूपए की दर निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि राज्य में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए 9619 गांवों में गौठानों की स्थापना की गई है। इन गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी और 4 रूपए लीटर की दर से गौमूत्र की खरीदी की जा रही हैं। 

गोबर से कम्पोस्ट खाद के साथ-साथ अन्य सामग्री का निर्माण महिला समूहों द्वारा किया जा रहा हैं। गौमूत्र से फसल कीटनाशक और जीवामृत तैयार किये जा रहे है। हाल ही में राज्य में गोबर से प्राकृतिक पेंट के उत्पादन की शुरूआत रायपुर के समीप स्थित हीरापुर जरवाय गौठान से हुई है। गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट कांकेर जिले के चारामा में भी लग चुकी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप राज्य के 75 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुट्टी निर्माण की इकाईयां तेजी से स्थापित की जा रही है। इन इकाईयों के पूर्ण होने पर प्रतिदिन 50 हजार लीटर तथा साल भर में 37 लाख 50 हजार लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होगा।

गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बाेक्सी मिथाईल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है। सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी तैयार होता है। कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा सीएमसी की होती है। छत्तीसगढ़ में गोबर से प्राकृतिक पेंट और पुट्टी निर्मित किए जाने की केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सराहना की है। छत्तीसगढ़ राज्य की इस पहल को उन्होंने ग्रामीणों को रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कहा है। 

राजधानी रायपुर के समीप स्थित हीरापुर जरवाय गौठान में महिला समूह ने गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुट्टी तैयार करने के काम में 22 महिलाएं जुड़ी है। यहां तैयार किए गए जा रहे गोबर पेंट का उपयोग शासकीय भवनों की रंगाई पोताई के लिए उपयोग हो रहा है। गोबर से तैयार प्राकृतिक पेंट की कीमत 230 रूपए प्रति लीटर रखी गई है, जो मार्केट में कम्पनियों के पेंट के मूल्य से लगभग आधी है। इसकी क्वालिटी ब्रांडेड कम्पनी के जैसी है। हीरापुर जरवाय गौठान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 25 लाख रूपए की मशीनें लगाई गई हैं। समूह की अध्यक्ष श्रीमती धनेश्वरी रात्रे ने बताया कि गाय के गोबर पहले डी वाटर कर्लिंग मशीन में डाला जाता है और पानी मिलाकर घोल तैयार कर उसमें कई अन्य सामग्री मिलाई जाती है,

फिर इन सब को हाई स्पीड डिस्पेंसर मशीन में मिक्स किया जाता है। इसके बाद पेंट और पुट्टी तैयार होती है। जरवाय गौठान में लगी मशीन से आठ घंटे में एक हजार लीटर पेंट तैयार किया जा सकता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण के लिए 21 नवम्बर 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय नयी दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के मध्य हुआ है।

गौठानों द्वारा खुद की जमा पूंजी से गोबर खरीदना, गोधन न्याय योजना की सफलता: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गौठानों द्वारा खुद की जमा पूंजी से गोबर खरीदना गोधन न्याय योजना की बड़ी सफलता है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के आधे से अधिक गौठान स्वयं के संसाधनों से गोबर की खरीदी कर रहे हैं। राज्य शासन को इन गौठानों को गोबर खरीदने के लिए राशि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। गोबर विक्रेताओं को आज भुगतान की गई 4.62 करोड़ रुपए की राशि में से 4270 स्वावलंबी गौठानों द्वारा 2.88 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया तथा कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। पिछले पखवाड़े में गोबर खरीदी के लिए प्रदेश के स्वावलंबी गौठनों ने कृषि विभाग की तुलना में अधिक राशि का भुगतान किया है। स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक अपने संसाधनों से 29.61 करोड़ रूपए की राशि से गोबर की खरीदी की गई है।



मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि के अंतरण के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हितग्राहियों को 7 करोड़ 83 लाख रूपए का ऑनलाईन भुगतान किया। इस राशि में 16 नवम्बर से 30 नवम्बर तक गौठानों में गोबर विक्रेता पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए गोबर के एवज में उनके खाते में 4 करोड़ 62 लाख रूपए की राशि ऑन लाईन अंतरित की।

इसी प्रकार गौठान समितियों को एक करोड़ 28 लाख रुपए तथा महिला समूहों के खाते में एक करोड़ 93 लाख रूपए की लाभांश राशि अंतरित की गई। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.कमलप्रीत सिंह, गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक अवनीश शरण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव गौरव कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

अधिक से अधिक गौठानों को उपलब्ध कराएं बेलर मशीन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़में प्रदेश के युवाओं और महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गौठानों में विकसित किए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की गतिविधियों में युवाओं और महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे युवाओं और महिलाओं को रोजगार और आमदनी का अच्छा जरिया मिलेगा। बघेल  ने कहा कि गौठानों में किसान स्वयं पैरादान कर रहे हैं। पैरादान के लिए किसानों को और अधिक प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जब गौठानों में पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था होगी, तो पशु खेती और सड़कों के बजाय गौठानों में रहेंगे। उन्होंने प्रदेश के अधिक से अधिक गौठानों में पैरा के बंडल बनाने के लिए बेलर मशीन उपलब्ध कराने के प्रयास करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में ऐसे उत्पाद प्राथमिकता के आधार पर तैयार किए जाएं, जिनकी शासन को जरूरत है या जिनके मार्केट में अच्छी मांग है।

मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में बताया कि राजिम विधानसभा क्षेत्र में भेंट-मुलाकात के दौरान एक महिला ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट के लिए उपयोग में आने वाली बोरियों में उन्होंने प्रिंटिंग का काम कर 4 लाख रूपए की कमाई की है। उन्होंने कहा कि अच्छे उत्पादों को तैयार करने के लिए युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में एक मजबूत अर्थव्यवस्था खड़ी होगी, जो देश और दुनिया के लिए उदाहरण होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि लगातार बढ़ रही है। लोग गौठानों से जुड़ रहे हैं, गोबर और वर्मी कम्पोस्ट का महत्व समझ रहे हैं। भेंट मुलाकात के दौरान कुछ गौठान समितियांें ने स्वयं की राशि से आर्थिक गतिविधियों के लिए शेड बनाने की मांग की।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि प्रदेश में 11 हजार 252 गौठानों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 9 हजार 619 गौठान निर्मित किए गए हैं, इनमें से ग्रामीण क्षेत्रो में 8440 गौठान निर्मित किए गए हैं। इन गौठानों में से 4270 गौठान स्वावलंबी हो गए हैं। गोबर खरीदी, वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन और वितरण का काम विभिन्न विभागों के समन्वय से किया जा रहा है। आने वाले समय में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन छत्तीसगढ़ में एक बड़ा अभियान बनेगा। उन्होंने कहा कि रीपा की गतिविधियां को युवाओं को जोड़कर और अधिक बढ़ाया जाएगा।

गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि गोबर खरीदी के एवज में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद से अब तक 188.45 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को लाभांश की राशि के रूप में 170.05 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक गौठानों में 19.82 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है। इसमें से 16.24 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। डॉ. तम्बोली ने बताया कि गौठानों में अब तक पैरादान से 2.25 लाख क्विंटल पैरा मिला है।

गोबर खरीदी में अब स्वावलंबी गौठान निभाने लगे हैं बराबर की भागीदारी

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रायपुर राज्य में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ग्रामीण पशुपालक किसानों से गोबर क्रय करने में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ-साथ अब स्वावलंबी गौठान भी बराबर की भागीदारी निभाने लगे हैं। राज्य में औसत रूप से प्रत्येक पखवाड़े 4 से 5 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी गौठानों में हो रही है, जिसमें से दो से ढ़ाई करोड़ रूपए का गोबर स्वावलंबी गौठान समितियां स्वयं की राशि से कर रही है। बीते कुछ पखवाड़े से यह स्थिति बन गई है कि गोधन न्याय योजना के तहत हो रही गोबर खरीदी की राशि का लगभग 50 फीसद भुगतान ही सरकार के जिम्मे आ रहा है।



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप गौठानों को स्वावलंबी और गौठान समितियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में आज की स्थिति में 3 हजार से अधिक गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं। गौठान समितियों के बैंक खाते में 102 करोड़ रूपए से अधिक की राशि लाभांश पूंजी के रूप में जमा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि गौठानों में निर्मित वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय के उपरांत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निर्धारित राशि गौठान समितियों को दी जाती है, जिसके चलते गौठान समितियों की जमा पूंजी में लगातार वृद्धि हो रही है।

स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक अपनी जमा पूंजी से 24 करोड़ 15 लाख रूपए का गोबर क्रय किया जा चुका है। 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक गौठानों में क्रय किए गए 2.35 लाख क्विंटल गोबर में से 1.16 लाख क्विंटल गोबर स्वावलंबी गौठानों में स्वयं की राशि से क्रय किया है, जिसका मूल्य 2.32 करोड़ रूपए हैं। अक्टूबर के द्वितीय पखवाड़े में क्रय गोबर के एवज में ग्रामीण पशुपालक किसानों को 4.69 करोड़ का भुगतान किया जाएगा, जिसमें मात्र 2.37 करोड़ रूपए का भुगतान शासन की ओर से होगा, शेष 2.32 करोड़ रूपए का भुगतान गौठान समितियों स्वयं की राशि से करेंगी।   

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