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गोधन न्याय योजना से किसानों की जेब में आया पैसा और बढ़ा आत्मविश्वास : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। गोधन न्याय योजना से किसानों की जेब में पैसा आया है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले किसान खेती से विमुख होकर मजदूरी या अन्य काम करने लगते थे। लेकिन अब किसानों के साथ युवा भी खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में राशि अंतरित करते समय कहीं। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल कार्यक्रम में पशुपालक ग्रामीणों

गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 7 करोड़ 4 लाख रूपए का किया भुगतान

गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 7 करोड़ 4 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी की। जिसमें 1 सितंबर से 15 सितंबर तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए 2.03 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4.06 करोड़ रूपए भुगतान, गौठान समितियों को 1.77 करोड़ और महिला समूहों को 1.21 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं। गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में अब तक हितग्राहियों को 335 करोड़ 36 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 18 करोड़ रूपए की बोनस राशि भी शामिल है। 


गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 335.36 करोड़ का हो चुका है भुगतान

5 सितंबर को 7.04 करोड़ के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 352 करोड़ 40 लाख रूपए हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में प्रदेश भर में ये देखने में आया है कि इस साल फसल अच्छी हुई है। समय पर बारिश होने से किसान खुश हैं। सरकार 1 नवम्बर से धान खरीदी करने जा रही है। बघेल ने कहा कि जो गौठान समितियां अच्छा काम कर रही हैं और वर्मी कम्पोस्ट बना रही हैं वहां शेड बनाये जाएंगे। गोधन न्याय योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के गौठानों में 2 रूपए किलो की दर से गोबर तथा 4 रूपए लीटर की दर से गौमूत्र की खरीदी की जा रही है।



गौठानों में 31 अगस्त तक खरीदे गए 79.12 लाख क्विंटल गोबर के एवज में ग्रामीणों को 160.94 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। 21 सितंबर को गोबर विक्रेताओं को 4.06 करोड़ रूपए का भुगतान होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 165 करोड़ रूपए हो जाएगा। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 156.42 करोड़ रूपए राशि की भुगतान किया जा चुका हैं। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को बुधवार को 2.98 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 159.41 करोड़ रूपए हो गया।

गौठानों में अब तक 35,346 लीटर गौमूत्र की खरीदी

स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक 19.12 करोड़ रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय किया गया है। राज्य के 81 गौठानों में गौमूत्र की खरीदी की जा रही है। अब तक गौठानों में 35 हजार 346 लीटर क्रय किए गए गौमूत्र से 16,500 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत तैयार किया गया है, जिसमें से 8400 लीटर ब्रम्हास्त्र और जीवमृत की बिक्री से 3.85 लाख रूपए की आय हुई है।  गौठानों में महिला समूहों द्वारा 17.80 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 5.30 लाख क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट एवं 18,924 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा चुका है,

8000 लीटर ब्रम्हास्त्र और जीवामृत के विक्रय से 3.85 लाख की आय

जिसे सोसायटियों के माध्यम से क्रमशः 10 रूपए, 6 रूपए तथा 6.50 रूपए प्रतिकिलो की दर पर विक्रय किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 81.84 करोड़ रूपए की आय हो चुकी हैं। 

राज्य में गौठानों से 11,187 महिला स्व-सहायता समूह सीधे जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 83,874 है। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत उत्पादन की शुरुआत की जा चुकी है। राज्य में गोधन के संरक्षण और संर्वधन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। गौठानों में पशुधन देख-रेख, उपचार एवं चारे-पानी का निःशुल्क बेहतर प्रबंध है। राज्य में अब तक 10,624 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 8408 गौठान निर्मित एवं 1758 गौठान निर्माणाधीन है। गोधन न्याय योजना से 2 लाख 78 हजार से अधिक ग्रामीण, पशुपालक किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

गोबर बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने वालों में 46 प्रतिशत महिलाएं है। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अयाज तंबोली, उद्यानिकी संचालक माथेश्वरन व्ही. सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

गोधन न्याय योजना लक्ष्मणी राठिया के लिए बनी वरदान

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रायपुर गोधन न्याय योजना लोगों के जीवन को किस तरह से बदल रही है इसकी एक झलक रायगढ़ के खरसिया में दिखी. गौठानों के माध्यम से गोबर खरीदकर महिला स्वसहायता समूह वर्मी कंपोस्ट खाद बनाते हैं और उसकी बिक्री करते हैं. खरसिया के जोबी गांव की रहने वाली लक्ष्मणी राठिया भी इस योजना से जुड़ी और उजाला महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से खुद को  गोधन न्याय योजना से जोड़ा. इस समूह ने लगभग 600 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट की बिक्री की और 2 लाख 15 हजार रूपए का लाभांश अर्जित किया. 



लक्ष्मणी राठिया ने इस पैसे से बच्चों के लिए कंप्यूटर खरीदा ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिले. लक्ष्मणी ने 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले यतिन्द्र और 12वी में पढ़ रही भावना की राह में संसाधनों के रोड़े को गोधन न्याय योजना सॆ दूर किया और वो इसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का धन्यवाद करती हैं. लक्ष्मणी का कहना है कि भूपेश बघेल सरकार की योजनाओं ने गरीबों, मजदूरों, किसानों एवं महिलाओं के लिए जो योजनाएं शुरू की हैं वो अब छत्तीसगढ़ में आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं और इससे लाभांवित होने वाली वो भी एक हितग्राही हैं.

छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई को हरेली से होगी गौ-मूत्र खरीदी की शुरूआत: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि 28 जुलाई को हरेली तिहार से गोधन न्याय योजना का विस्तार करते हुए गोबर के साथ-साथ गौ-मूत्र की खरीदी की शुरूआत की जाएगी। गौ-मूत्र की खरीदी के लिए 4 रुपए प्रति लीटर की दर प्रस्तावित की गई है। खरीदे गए गौ-मूत्र का उपयोग जीवामृत कीटनाशकों और खाद के निर्माण के लिए किया जाएगा। इससे राज्य में जैविक खेती को और मजबूती मिलेगी तथा पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।



मुख्यमंत्री ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय कक्ष मेंगोधन न्याय योजनाकी दूसरी सालगिरह पर गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 48वीं किश्त की राशि के रूप में 7 करोड़ 48 लाख रूपए की राशि का ऑनलाइन भुगतान करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों तथा सहकारी समितियों को वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय पर बोनस दिया जाएगा। 

इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। महिला समूहों को प्रति किलो वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय पर 01 रुपए तथा सहकारी समितियों को 10 पैसे का बोनस मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 07 जुलाई 2022 तक बिक चुके कम्पोस्ट के लिए महिला समूहों को बोनस के रूप में 17 करोड़ 64 लाख रुपए तथा सहकारी समितियों को 01 करोड़ 76 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री बघेल द्वारा आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में अंतरित की गई राशि में एक जुलाई से 15 जुलाई तक राज्य के गौठानों में पशुपालकों, ग्रामीणों

किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए गोबर के एवज में 2.69 करोड़ रूपए भुगतान, गौठान समितियों को 2.88 करोड़ और महिला समूहों को 1.91 करोड़ रूपए की लाभांश राशि का भुगतान शामिल है। गोबर खरीदी के एवज में आज किए गए भुगतान की राशि को मिलाकर अब तक 153.44 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह योजना के तहत अब तक गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 147.99 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार द्वय विनोद वर्मा और रूचिर गर्ग, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के दो वर्ष पूर्ण होने पर योजना के सभी हितग्राहियों और प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि 20 जुलाई 2020 को हरेली तिहार के दिन से हम लोगों ने छत्तीसगढ़ में गोबर खरीदी की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक राज्य में लगातार गोबर की खरीदी और वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। केवल 02 वर्षों में इस योजना ने जो सफलताएं अर्जित की हैं, उसे पूरे देश में इस योजना को सराहा जा रहा है। देश के अनेक राज्यों ने हमारा अनुसरण करके अपने यहां भी इसी तरह की योजनाएं लागू की हैं। 

हम गोबर खरीद कर केवल वर्मी कंपोस्ट बना रहे हैं, बल्कि गोबर से बिजली उत्पादन करने, प्राकृतिक पेंट बनाने, तरह-तरह की सामग्री बनाने का काम भी हम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना ने स्व सहायता समूहों की हमारी बहनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का एक बड़ा अवसर दिया है। गोबर विक्रेताओं और गोठान समितियों ने भी इन दो वर्षों में अच्छी आय अर्जित की है। किसान भाईयों में पशुपालन को लेकर रुचि बढ़ी है। गौठानों में संचालित विभिन्न् आजीविका गतिविधियों से 13 हजार 969 स्व सहायता समूहों को अब तक 74 करोड़ 68 लाख रुपए की आय हो चुकी है। 

गोधन न्याय योजना के अंतर्गत ही गौठानों में तेल मिल और दाल मिल जैसी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जा रही है। राज्य के गौठानों 227 तेल मिलों और 251 दाल मिलों की स्थापना की जा रही है। इनमें से 86 तेल मिल और 134 दाल मिल स्थापित की जा चुकी हैं। आने वाले समय में गोधन न्याय योजना सफलता के और नये आयाम स्थापित करेगी। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज गोधन न्याय योजना को दो वर्ष हो गए हैं

योजना के प्रारंभ होने से अब तक गोधन न्याय योजना का काफी विस्तार किया गया है। योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इस योजना से ग्रामीणों, पशुपालकों, महिला समूहों को आय और रोजगार का नया साधन मिला है। योजना के तहत अब तक 8 हजार 408 गौठान निर्मित किए गए हैं, लगभग 1456 गौठान एसे है, जहां 30 क्विंटल से अधिक गोबर की खरीदी 01 से 15 जुलाई तक की गई है। ग्रामीणों और किसानों का विश्वास योजना के प्रति जगा है। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने योजना की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।

कभी गोबर से घर को पोतकर दीवारों को मजबूत बनाते थे, आज गोबर बेचकर मजबूत घर बना रहे हैं

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बैकुण्ठपुर के भर्रा की रहने वाली मीनल का एक सपना था कि उनका खुद का एक घर हो, लेकिन ये सपना लंबे समय से सपना ही बना हुआ था। मीनल के पास पैसे नहीं थे कि वो अपने लिए घर बनाए। मीनल ने गांव में दूसरे की घरों की दीवारों को मजबूत करने के लिए अक्सर उनपर गोबर की पुताई करती थी, लेकिन आज इसी गोबर को बेचकर मीनल ने अपने लिए मजबूत घर बना लिया है। गोधन न्याय योजना की मदद से मीनल ने 140 क्विंटल गोबर बेचकर 28 हजार रूपए कमाए और गोबर से 500 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर बेचने से 5 लाख रूपए की आय अर्जित की। 


गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को मिल रही है खुशियां, 

मीनल
का ये कारवां अभी थमा नहीं है और वो इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहती है,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा शुरू की गयी गोधन न्याय योजना की ये कहानी सिर्फ मीनल की ही नही है, छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के शुरू होने के बाद से ऐसे कई जीवंत उदाहरण सामने आए हैं जिसमें गोबर बेचकर लोगों ने अपने सपनों को साकार किया है। किसी ने गोबर बेचकर मोबाइल खरीदा, किसी ने मोटरसायकिल, किसी ने गहने तो किसी ने अपने बेटी की शादी की है।

मुख्यमंत्री के द्वारा इस योजना के शुरू करने के पीछे का उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि, पशुधन की खुली चराई में रोक लगाकर फसलों की सुरक्षा, द्विफसली क्षेत्र का विस्तार करना, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना, भूमि की उर्वरता में सुधार करना और सुपोषण को बढ़ावा देना है।छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना पूरे देश में लोकप्रिय योजना का रूप ले चुकी है जिसकी प्रशंसा भारत सरकार ने भी की है। इस योजना से ग्रामीण और शहरी इलाकों में गौ पालकों को आमदनी का अतिरिक्त जरिया मिला है।

अब पैसों की नहीं सताती है चिंता, 

गोधन न्याय योजना देश दुनिया की इकलौती ऐसी योजना है जिसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य के गौठानों में 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। गौठानों में 15 जून तक खरीदे गए गोबर के एवज में गोबर बेचने वाले ग्रामीणों को 147.06 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। गौठान समितियों एवं महिला स्व सहायता समूहों को अब तक 136.04 करोड़ रूपए की  राशि का  भुगतान किया जा चुका है।

गोबर बेच कर रहे हैं सपनों को साकार

गौठानों में महिला समूहों द्वारा गोधन न्याय योजना के अंतर्गत क्रय गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट एवं सुपर कंपोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा रहा है। गौठानों में महिला स्वसहायता समूहों अन्य आयमूलक गतिविधियों का भी संचालन किया जा रहा है जिससे महिला समूहों को अब तक 72.19 करोड़ रूपए की आय हो चुकी है। राज्य में अब तक गौठानों से 13,969 महिला स्वसहायता समूह सीधे जुड़ चुके हैं जिनकी सदस्य संख्या 82,874 है

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