Media24Media.com: गेंदा फूल

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फूलों की खेती से महका महिलाओं का जीवन

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रायपुर। परम्परागत् खेती की जगह आधुनिक खेती फायदे का सौदा साबित हो रही हैं। इससे कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत तुड़गे के गौठान में काम कर रही महिलाओें की जिन्दगी भी अब महकने लगी है। शीतला स्व-सहायता समूह की इन महिलाओं ने तुड़गे के गौठान की महज 04 डिसमिल भूमि में कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग से पहली बार गेंदा फूल के टेनिस बॉल किस्म की खेती शुरू की है।

पहली बार में ही महिलाओं को अच्छा मुनाफा हो रहा है। समूह की महिलाएं औसतन 100 रुपए प्रति किलो की दर से गेंदा फूल की बिक्री कर रही हैं। उन्होंने अब तक 150 किलोग्राम फूल बेच कर 15 हजार रुपए कमाए हैं। महिलाओं ने बताया कि करीब 300 किलोग्राम से अधिक फूलों का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे समूह को अच्छी आमदनी मिलेगी। इस सफलता से इन महिलाओं के चेहरे की खुशी दोगुनी हो गई है।

महिला समूह की सक्रिय सदस्य सुलोचना रावटे, शांति नेताम, मालती नरेटी, मंगतीन नेताम, बृजबत्ती, गिरजा बाई और विमला ने बताया कि गौठान में वर्मी खाद उत्पादन के अलावा पहली बार ट्रायल के रूप में गेंदा फूल की खेती  की जा रही है। खेती के लिए टेनिस बॉल नाम के गेंदा फूल की हाइब्रिड वैरायटी के बीज को मंगवाया गया है। इसके लिए पहले नर्सरी तैयार की गई तथा रोपाई के बाद फूलों की हार्वेस्टिंग की गई। उन्होंने बताया कि फूलों की खेती में खास बात यह है कि इससे कम पानी, कम लागत और कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। गेंदा फूल की मांग भी वर्षभर बनी रहती है। उन्होंने अपने नए रोजगार एवं हो रही आमदनी के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया गया कि टेनिस बॉल गेंदा फूल पौधे की हाइट 3 से 4 फुट की होती है। तीन माह में फूल आना शुरू हो जाता है और पैदावार भी अधिक होती है। गेंदा फूल की खेती में अधिक मुनाफा है, इसकी डिमांड भी अच्छी है। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजना के तहत बनाए गए गौठानों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों के महिलाओं को आजीविका गतिविधियों एवं स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। महिला समूह भी वर्मी-कम्पोस्ट खाद उत्पादन के साथ गेंदा फूल की खेती में काफी रूचि ले रही हैं।

मेरीगोल्ड की खेती से महक रही तुड़गे का गौठान

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उत्तर बस्तर कांकेर। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत तुड़गे के गौठान में शीतला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मेरीगोल्ड गेंदा फूल की खेती की जा रही हैं। गेंदा फूल के महक से गौठान के साथ समूह की महिलाओं की जिंदगी भी महकने लगी है। गौठान में गेंदा फूल की खेती से उनके चेहरे की खुशी बढ़ रही है, तुड़गे गौठान के महिला समूह की सक्रिय सदस्य सुलोचना रावटे, शांति नेताम, मालती नरेटी, मंगतीन नेताम,

बृजबत्ती, गिरजा बाई और विमला ने बताया कि हमारे समूह के सदस्यों द्वारा गौठान में वर्मी खाद उत्पादन के अलावा कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग से गौठान की महज 03 से 04 डिसमिल भूमि में पहली बार ड्रायल के रूप में इंडस मेरीगोल्ड सीड्स कंपनी से संकर किस्म का गेंदा फूल टेनिस बाल नाम की वैरायटी के बीज को मंगवाया गया। गेंदा फूल का बीज मिलने के बाद नर्सरी तैयार किया गया तथा रोपाई के बाद फस्ट हार्वेस्टिंग की गई। समूह की महिलाओं ने बताया 100 रुपए प्रति किलो की दर से अब तक 150 किलोग्राम फूल 15 हजार रुपए में बेच चुकी हैं। समूह की महिलाओं का कहना है कि अभी टेनिस बाल गेंदा फूल के किस्म से तीन सौ किलोग्राम से अधिक फूल का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे समूह को अच्छी आमदनी मिलेगी। फूलों की खेती में खास बात यह है कि इसे कम पानी, कम लागत और कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है, गेंदा फूल की मांग बारहमासी रहती है।

कृषि विभाग द्वारा बताया गया कि टेनिस बाल गेंदा फूल पौधे की हाइट 3 से 4 फुट की होती है। तीन माह में फूल आना शुरू हो जाता है और पैदावार भी अधिक होती है। गेंदा फूल की खेती में अधिक मुनाफा है, इसकी डिमांड भी अच्छी है। तुड़गे गौठान की महिला समूह वर्मी-कम्पोस्ट खाद उत्पादन के कार्य में जुड़ी हैं, महिलाओं द्वारा नवाचार के रूप में गेंदा फूल की खेती करने में अच्छी रूचि ले रही है तथा इस कार्य से मिल रहे लाभ से महिलाएं काफी खुश है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना के तहत बनाए गए गौठानों के माध्यम से स्थानीय स्व-सहायता समूहों के महिलाओं को आजीविका गतिविधियों एवं स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका गतिविधियों एवं स्वरोजगार से जोड़कर लाभान्वित कराने के लिए शीतला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने राज्य सरकार को आभार व्यक्त किये हैं।


पलाश के फूलों से महकेगी बस्तर की होली, दरभा की महिलाएं बना रही हैं प्राकृतिक गुलाल

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जगदलपुर। दरभा के अल्वा गांव में पटेलपारा की महिलाएं पलाश के फूलों से होली के लिए गुलाल तैयार कर रही हैं। इनके समूह का नाम गेंदा फूल स्व-सहायता समूह है। लगभग 12 महिलाओं के इस समूह ने अब तक 50 किलो के आस-पास गुलाल तैयार कर लिया है। जिन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से सीमार्ट तक पहुंचाया जा रहा है जहां से आम नागरिक केमिकल फ्री गुलाल खरीद सकेंगे।

इन रंगों को तैयार करने के लिए पलाश के फूलों को सुखाकर पाउडर बनाया गया, जिसके बाद इसमें मक्के का आटा मिलाकर चिकना किया गया। इन्हें रंगीन बनाने के लिए भी प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल किया गया है। जैसे लाल रंग के लिए लाल भाजी, पीला रंग के लिए हल्दी और हरे रंग के लिए मेथी और हरे रंग की भाजियों का इस्तेमाल किया गया है। समूह की सदस्य सावित्री मंडावी का कहना है कि उन्हें 1 क्विंटल गुलाल बनाने का ऑर्डर मिला था, जिसे उनके समूह की महिलाएं बड़ी मेहनत से तैयार कर रही हैं। सावित्री बताती हैं कि उनका यह गुलाल केमिकल फ्री होने की वजह से स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक नहीं है।

इसे बच्चे-बूढ़े सभी उपयोग कर सकते हैं। स्थानीय बाजारों में भी ये महिलाएं अपने प्राकृतिक गुलाल को बेचेंगी। प्राकृतिक गुलाल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पलाश के फूल के कई नाम हैं। इसे टेसू, ढाक, परसा, केशुक, और केसू भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऋतुराज वसंत की सुंदरता पलाश के बिना पूरी नहीं होती है। पलाश के फूल को वसंत का श्रृंगार माना जाता है।

स्किन और हेल्थ के लिए अच्छा है प्राकृतिक गुलाल

होली के लिए आजकल बाजारों में मिलने वाल चटक और आकर्षक रंग केमिकलयुक्त होते हैं। जिससे स्किन को नुकसान पहुंचता है। यही नहीं बाजार में मिलने वाले ये रंग बच्चों के स्किन के लिए भी नुकसानदायक होते हैं। सांस के माध्यम से भी केमिकलयुक्त रंग हमारे शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं इसीलिए विशेषज्ञ ये सलाह देते हैं कि होली के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंग केमिकल फ्री होने चाहिए। बिहान की इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे प्राकृतिक गुलाल पूरी तरह से केमिकल फ्री हैं इसीलिए ये गुलाल बाजार में मिलने वाले रंगों की जगह अच्छा विकल्प साबित होंगे।

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