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हमने किसानों, मजदूरों और आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजधानी रायपुर स्थित एक निजी होटल में जनसत्ता मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित मंथनकार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के किसानों, गरीबों और आदिवासियों सहित सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है। किसानों को ऋण मुक्त करने के लिए सर्वप्रथम लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया इसके साथ ही सिंचाई कर माफ कर किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री बघेल नेे कहा कि देश में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां हमने किसानों से सबसे ज्यादा दाम पर धान की खरीदी कर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया। प्रदेश में 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है। पहले मात्र 7 प्रकार के वनोपजों की खरीदी होता था। अब हम 67 प्रकार के वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीद रहे हैं। तेन्दूपत्ता प्रति मानक बोरा 2500 से बढ़ाकर 4000 रूपए किया। उन्होंने कहा कि लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की अधिग्रहित जमीन वापस की। वनाधिकार पट्टा, वन संसाधन अधिकार, पेसा कानून को लागू किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम हुए हैं। कुपोषण को दूर करने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान लागू किया। वनांचल क्षेत्रों में पहले छोटी-छोटी बीमारियों के कारण भी लोगों की जान चली जाती थी। ऐसे में दूरस्थ वनांचल के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हाट-बाजार क्लीनिक योजना शुरू की। हाट बाजार क्लीनिक व्यवस्था का एक करोड़ से अधिक लोग लाभ ले चुके हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार में प्रदेश के युवाओं के लिए बेहतर कार्य हुए हैं। प्रदेश में 750 से अधिक स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिन्दी माध्यम स्कूल खोले गए है। इन स्कूलों के माध्यम से उन परिवारों को राहत मिली है जो अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाना चाहते हैं। राज्य में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ी संख्या में शासकीय नौकरी के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। 40 हजार से अधिक शासकीय पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के युवा, विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोटा, राजस्थान जाते है।

वहां के सरकार से हमने कोटा में दो एकड़ जमीन की मांग की है, ताकि सुसज्जित और सुविधायुक्त छात्रावास तैयार कर यहां के विद्यार्थी को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए बजट में प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराये जा रहे है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के जरिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 13 हजार से अधिक राजीव युवा मितान क्लब बनाये गए है। इनके माध्यम से सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के जरिए गौपालकों और किसानों से गोबर खरीदी कर उन्हें समृद्ध करने का काम कर रहे हैं। अब तक गोधन न्याय योजना के तहत 265 करोड़ रूपए का गोबर खरीद चुके हैं। पारदर्शिता के लिए राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। मजदूरों, बेरोजगारों और किसानों को भी सीधे उनके खाते में राशि ट्रांसफर किए जा रहे हैं। प्रदेश के लोगों के आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ कला संस्कृति को भी संजोने और संवर्धन का कार्य हमारी सरकार कर रही है। इन पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा को संजोने, संवारने के साथ ही उन्हें पुनःस्थापित करने का काम किया। बस्तर में बादल नामक संस्था के माध्यम से यहां की आदिवासियों की कला-संस्कृति और परम्परा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा सहित गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

शहीद वीर नारायण सिंह गरीबों के मसीहा और सच्चे देशभक्त थे : मंत्री कवासी लखमा

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रायपुर। उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने आज बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय गुरूर में शहीद वीरनारायण सिंह की प्रतिमा का लोकार्पण किया और आदिवासी सामाजिक भवन का भूमिपूजन किया। मंत्री लखमा ने कहा कि शहीद वीरनारायण सिंह का राष्ट्र तथा समाज के प्रति योगदान अतुलनीय है। वे गरीबों के मसीहा थे और एक सच्चे देशभक्त थे। शहीद वीरनारायण सिंह में अदम्य वीरता तथा राष्ट्र भक्ति कूट-कूट कर भरी थी, उनकी प्रजा वात्सल्य अपने आप में अद्भूत एवं बेमिसाल थी। उन्होंने कहा कि नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के सच्चे स्वाधीनता संग्राम सेनानी होने के साथ-साथ जनता के हितैषी एवं परोपकारी शासक थे।

मंत्री लखमा ने विकासखंड मुख्यालय गुरुर में शहीद वीरनारायण सिंह के आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण कर 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाली आदिवासी सामुदायिक भवन का भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा अनुरूप आज सामाजिक भवन का भूमिपूजन किया जा रहा है, जिसका लाभ गुरूर एवं अंचल के समाज के लोगों को मिलेगा।  इस अवसर पर संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, गोंडवाना समाज की तहसील अध्यक्ष श्रीमती उत्तरा मरकाम, जनपद अध्यक्ष गुरुर प्रभात धुर्वे सहित अन्य गणमान्य नागरिक और सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे।

गरीबों के चावल की गड़बड़ी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गरीबों के चावल की गड़बड़ी करने वालों को बक्शा नहीं जाएगा। राशन की हेराफेरी में शामिल लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य विभाग के अधिकारियों को प्रथम दृष्टया में राशन के बचत स्टॉक की कमी पाए जाने वाले उचित मूल्य दुकानों की विस्तृत जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सितम्बर 2022 में जिन उचित मूल्य दुकानों में बचत स्टॉक में कमी पायी गई है, उन दुकानों में स्टॉक में कमी के वास्तविक कारणों का परीक्षण किया जाए। अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए तथा इसकी रिपोर्ट खाद्य विभाग को भेजी जाए।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि उचित मूल्य दुकानों में सितम्बर 2022 में राशन सामग्री के बचत स्टॉक के सत्यापन के सिलसिले में 13 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज किया गया है। 161 उचित मूल्य दुकानों का आबंटन निलंबित किया गया है तथा 140 दुकानों का आबंटन निरस्त किया गया है।

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में किसानों की समृद्धि और बढ़ता उत्पादन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के मेहनतकश किसानों, मजदूरों और गरीबों का मर्म समझकर जनसरोकार से जुड़े अनेक फैसले लिए। छोटे-बड़े सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदने और राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। उन्होंने ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूरों के बारे में सोचा और राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना लाकर गरीबों-मजदूरों के जेब में पैसे डालने का काम किया। इन नीतियों का परिणाम है कि साल दर साल धान खरीदी का नया रिकार्ड बनता जा रहा है। यही नहीं साल दर साल पंजीकृत किसानों की संख्या और रकबे में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।



समर्थन मूल्य में धान खरीदी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने राज्य के किसानों का हौसला बढ़ाया। जो किसान खेती-किसानी छोड़ चुके थे। उन किसानों ने भी खेती-किसानी की ओर रूख किया और कठिन चुनौतियों के बावजूद पिछले वर्ष लगभग 21.77 लाख किसानों से 98 लाख मीट्रिक टन रिकार्ड धान खरीदी की। किसानों  का उत्साह और सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री बघेल द्वारा इस खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में एक नवम्बर से धान खरीदी करने के निर्णय किसानों के उत्साह को दुगुना कर दिया है।

राज्य में वर्ष 2018-19 में पंजीकृत धान का रकबा जो 25.60 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 30.44 लाख हेक्टेयर हो गया है। इन चार वर्षो में पंजीकृत किसानों की संख्या 16.92 लाख से बढ़कर 25.12 लाख के पार जा पहुची है। खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में 80.30 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2019-20 में 83.94 लाख मीट्रिक टन, 2020-21 में 92.06 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2021-22 में रिकार्ड 98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इस वर्ष किसानों से 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का अनुमान है।

राज्य सरकार द्वारा किसानों से न केवल खरीदी की सुनिश्चित व्यवस्था की है, बल्कि उन्हें तत्काल भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। किसानों को उनके बैंक खातों के जरिये ऑनलाईन भुगतान किया जाएगा। किसानों को पिछला खरीफ सीजन में धान खरीदी के एवज में 19,084 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया है। किसानों-ग्रामीणों की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए नवीन धान खरीदी केन्द्र प्रारंभ किए गए। इस वर्ष 2 हजार 497 से अधिक धान उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी व्यवस्था की गई।

छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों की माली हालत सुधारने के लिए वर्ष 2018 में लगभग 18 लाख 82 हजार किसानों पर चढ़ा अल्पकालीन कृषि ऋण लगभग 10 हजार करोड़ रूपए माफ किया, वहीं 244.18 करोड़ रूपए के सिंचाई कर की माफी ने भी खेती-किसानी और किसानों के दिन बहुराने में महत्वपूर्ण रोल अदा किया। पिछले चार सालों में विभिन्न माध्यमों से किसानों-मजदूरों और गरीबों की जेब में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि डाली गई है। इसका परिणाम यह रहा कि कोरोना संकट काल में जहां देश में आर्थिक मंदी रही, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर खेती-किसानी के लिए सहकारी समिति से ऋण और समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी देने का फैसला क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। खेती-किसानी से जुड़े पर्वाें को अब महत्व दिया जा रहा है। विलुप्त हो चुकी रोका-छेका परंपरा को फिर से पुनर्जीवित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ में ऐसे किसान जिनके पास सिंचाई सुविधा थी, उन्हें दोहरी फसल लेने का अवसर मिल रहा है।

कृषि पंपों के ऊर्जीकरण के लिए प्रति पम्प एक लाख अनुदान राशि दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा कृषकों को वित्तीय राहत प्रदाय किये जाने के उद्देश्य से कृषक जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत कृषकों को 3 अश्वशक्ति तक कृषि पम्प के बिजली बिल में 6000 यूनिट प्रति वर्ष एवं 3 से 5 अश्वशक्ति के कृषि पम्प के बिजली बिल में 7500 यूनिट प्रति वर्ष छूट दी जा रही है। इस छूट के अलावा कृषकों को फ्लेट रेट दर पर बिजली प्राप्त करने का विकल्प भी दिया गया है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए विद्युत खपत की कोई सीमा नहीं रखी गई है।

बस्तर जिले का लोहण्डीगुड़ा इलाके में इस्पात संयंत्र के लिए पूर्व में किसानों से अधिग्रहित की गई भूमि उन्हें लौटाई गई। किसानों को उनकी जमीन उन्हें फिर से सौंपकर जमीन का मालिक बना दिया है। किसान अब बेफिक्र होकर खेती किसानी का काम अपनी जमीन में करने लगे हैं। लोहण्डीगुड़ा क्षेत्र में निजी इस्पात संयंत्र के लिए 1700 से अधिक किसानों की लगभग 5 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना से राज्य में समृद्ध होती खेती-किसानी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें खरीफ और उद्यानिकी की सभी प्रमुख फसलों को शामिल कर लिया है। कोदो, कुटकी और रागी के उत्पादक किसानों को भी इस योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से 9 हजार रूपए की सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। धान के बदले अन्य फसलों की खेती या वृक्षारोपण करने वाले किसानों को 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से इनपुट सब्सिडी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गांव, मजदूर और किसान को फोकस में रखकर काम रही है। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 356.14 करोड़ रूपए से अधिक की गोबर खरीदी की जा चुकी है। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिला। इस कड़ी में 3 फरवरी 2022 को लोकसभा सांसद राहुल गांधी के हाथों राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजनाकी भी शुरूआत की गई है। 4 लाख 66 हजार ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को प्रति वर्ष 7 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जा रही है।

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