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पर्यटकों के लिए मनमोहक है मयाली का मनोरम दृश्य

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रायपुर। नैसर्गिक सुंदरताओं को समेटे जशपुर की खूबसूरती को भला कौन निहारना नहीं चाहेगा। सिन्दूरी सुबह और गुलाबी ठण्ड के दस्तक के बीच नीले आकाश, पक्षियों के चहचहाहट, कलरव के साथ हरे-भरे वातावरण और स्वच्छ पानी में पहाड़ों के प्रतिबिम्ब के बीच मयाली की पहचान एक खूबसूरत पर्यटन स्थल होने लगी है।

मयाली जशपुर जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर कुनकुरी विकासखण्ड के अंतर्गत स्थित है। मयाली में एक ओर खूबसूरत पहाड़ियों की वादी और इसकी तलहटी में अथाह जल राशि समेटे मयाली बांध और इसके चारो ओर हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पेड़ मयाली को मनमोहक बनाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप मयाली में पर्यटकों की सुविधा और विकास के कार्य भी कराए जा रहे हैं।

मयाली के नेचर कैम्प में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 22 अक्टूबर को सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक होगी। इसका उद्देश्य मयाली स्थित नेचर कैम्प को पर्यटन स्थल के रूप में एक नई पहचान दिलाना है। इस बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधिगण ग्राम पंचायत खण्डसा से मयाली नेचर कैम्प तक जलविहार करते हुए नाव से पहुँचेंगे। इस दौरान वे यहाँ के मनोरम दृश्यों को बहुत ही करीब से देख पाएंगे।

मयाली में गेंदे सहित आसपास खिलने वाले अन्य पीले फूलों और जवाफूल, बासमती धान की बालियों, पीले मक्के के साथ मनमोहक स्वागत द्वार तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री साय के गृह जिले जशपुर के मयाली में सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक के लिए खास तैयारी की गई है। यहाँ ग्रामीण महिलाओं ने मुख्यमंत्री सहित अन्य सभी अतिथियों के लिए खुद स्वागत द्वार तैयार किए हैं।

यहाँ की संस्कृति के अनुरूप जवाफूल, बासमती धान के बालियों, मक्के और फूलों से सजाया गया है। ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं का कहना है कि मयाली में सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का आयोजन हम सभी के लिए खुशी और गौरवान्वित करने का क्षण है। उनकी ग्राम पंचायत  खण्डसा के मयाली में सरगुजा क्षेत्र के विकास की गाथा लिखी जाएगी और हमारे मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री, सांसद, जनप्रतिनिधि, बड़े अधिकारी भी यहाँ आएंगे।

मयाली नेचर कैम्प स्थल पर जिला प्रशासन द्वारा भी व्यापक तैयारी की गई है। पत्थरों में उकेरे गए खूबसूरत दृश्य, रंगीन लाइट में आकर्षित करते पानी के फव्वारे, जुगनुओं की तरह टिमटिमाते झिलमिलाते रोशनी मयाली बांध में भरे हुए पानी के बीच बहुत दूर से ही सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। अपनी खूबसूरती से मयाली बांध और आसपास का सुंदर नैसर्गिक नजारा पर्यटन स्थल के रूप में मयाली को एक नई पहचान देने के लिए तैयार है।


17 एवं 18 जनवरी को जिले की संस्कृति, पर्यटन और खूबसूरती को प्रदर्शित करता पहला झुमका जल महोत्सव

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कोरिया। जिले की संस्कृति, पर्यटन और खूबसूरती को प्रदर्शित करने जिला प्रसाशन द्वारा झुमका जल महोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम का आगाज़ 17 जनवरी को होगा। महोत्सव का समापन 18 जनवरी को होगा। महोत्सव में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ विभागीय प्रदर्शनी के द्वारा जिले की उपलब्धियों से लोग अवगत होंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ 17 जनवरी को छत्तीसगढ़ शासन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना, आर्थिक सांख्यिकीय एवं संस्कृति विभाग मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। 18 जनवरी को छत्तीसगढ़ शासन लोक निर्माण, गृह, जेल, पर्यटन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।

जिला प्रशासन द्वारा तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की पूरी टीम कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए तैयारियों में जुटी है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री लंगेह ने आज कार्यक्रम स्थल का जायज़ा लिया तथा सभी अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन करने सम्बन्धी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

महोत्सव में इन कलाकारों द्वारा दी जाएंगी प्रस्तुतियां-

दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन 17 जनवरी को महोत्सव के शुभारंभ पर दोपहर 1रू00 बजे अतिथियों के स्वागत तथा उद्बोधन पश्चात विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया जाएगा। जिसके पश्चात अतिथियों द्वारा झुमका आइलैण्ड में काइट फेस्टिवल एवं पेंटिंग एग्जीबिशन का अवलोकन किया जाएगा। दोपहर 2:50 बजे छत्तीसगढ़ी कलाकार सुश्री आरु साहू द्वारा सुमधुर गीतों की प्रस्तुति, 3:40 बजे स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। शाम 5:00 बजे छत्तीसगढ़ी कलाकार सुनील मानिकपुरी द्वारा तथा 6:00 बजे ओडिसी नृत्यांगना श्रीमती पूर्णाश्री राउत द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। वहीं छतीसगढ़ी कलाकार अनुज शर्मा द्वारा शाम  7:00 बजे तथा बॉलीवुड कलाकार विनोद राठौर की शाम 8:00 बजे मनमोहक प्रस्तुतियां होंगी।

झुमका जल महोत्सव के दूसरे दिन 18 जनवरी को दोपहर 1:00 बजे अतिथियों के स्वागत तथा उद्बोधन के पश्चात दोपहर 2:00 बजे स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति, 4:00 बजे छत्तीसगढ़ी कलाकार संजय सुरीला द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। शाम 5:30 बजे सूफी कलाकार नासिर निन्दर द्वारा तथा 6:45 बजे अन्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। शाम 6:55 बजे छत्तीसगढ़ी कलाकर सुनील सोनी तथा बॉलीवुड कलाकार सुखबीर सिंह द्वारा महोत्सव में प्रस्तुतियों से समां बंधेगा।

आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है उसके सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने किया राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन

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रायपुर। आदिम संस्कृति सभी को जोड़ने का कार्य करती है। इसे सहेज कर और इसकी खूबसूरती को बड़े फलक पर दिखाने के उद्देश्य से हमने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया है। मुझे इस बात की खुशी है कि इस आयोजन में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। रात बारह बजे तक लोग इस सुंदर आयोजन को देखने बड़ी संख्या में जुटते रहे। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन के अवसर पर कही। उन्होंने इस मौके पर अपने संदेश में कहा कि हमने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस आयोजन के लिए आमंत्रित किया। साथ ही 22 देश के आदिवासी कलाकार इस आयोजन में शिरकत करने के इच्छुक थे लेकिन समय सीमा को देखते हुए हमने केवल 10 देशों को स्वीकृति दी।



इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने जाना कि हमारी आदिवासी संस्कृति कितनी समृद्ध है। इनके नृत्यों के माध्यम से प्रकृति और लोकजीवन को सहेजने के सुंदर मूल्य जो सीखने को मिलते हैं वो सीख हमारे लिए अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने शिल्प कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टाल भी लगाए। इनमें बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी, उससे पता लगता है कि हमारी आदिवासी कला को जानने के लिए लोग कितने उत्सुक हैं और यह कितनी समृद्ध लोककला है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हम 22 साल से स्थापना दिवस मना रहे हैं। अब राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव भी मना रहे हैं। इससे हमारी खुशी दोगुनी हो गई है।



मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शिरकत करने पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति भी विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महोत्सव के आयोजन के साथ ही हम प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन भी कर रहे हैं। इसमें 20 लाख प्रतिभागियों ने अब तक हिस्सा लिया है। इसमें बच्चे और बुजुर्ग सब शामिल हैं। 70 साल की बुजुर्ग महिलाएं भी फुगड़ी खेल रही हैं। सबको बचपन की यादें ताजा हो गई हैं। इन खेलों से मोबाइल से ध्यान हटा, यह भी बड़ी बात है। इस मौके पर अपने संबोधन में झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल छत्तीसगढ़ में ऐसे वर्ग को आगे बढ़ा रहे हैं जिनका सदियों से शोषण हुआ है।



उनकी सरकार आदिवासी, दलित और पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाने के साथ ही सबके विकास के लिए कार्य कर रही है। मुझे इस मंच में आकर गौरव महसूस हो रहा है। इस मौके पर गृह एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के माध्यम से हमारी आदिवासी संस्कृति को सहेजने का बड़ा काम राज्य शासन द्वारा हुआ है। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने इस मौके पर कहा कि लोगों ने महोत्सव का भरपूर आनंद लिया और इससे हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक एक बड़े मंच में दिख रही है। इस मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।



समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, संसदीय सचिव कुंवरसिंह निषाद, विधायक धनेन्द्र साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, पीसीसीएफ संजय शुक्ला, पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी. एवं संचालक संस्कृति विवेक आचार्य मौजूद थे।



फसल कटाई की श्रेणी में पहला स्थान छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य को- राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के पुरस्कार भी इस अवसर पर दिये गये। फसल कटाई की श्रेणी में प्रथम स्थान पर छत्तीसगढ़ के करमा नृत्य को, दूसरे स्थान पर ओडिशा के ढेंगसा नृत्य को और तीसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश के गद्दी नृत्य को पुरस्कृत  किया गया।

विवाह संस्कार में पहला स्थान सिक्किम को- विवाह संस्कार एवं अन्य श्रेणी में पहला स्थान सिक्किम को, दूसरा स्थान ओडिशा को और तीसरा स्थान झारखंड को मिला। विशेष ज्यूरी सांत्वना सम्मान असम को और गुजरात को मिला। इसके अलावा विदेश से आये कलाकारों का भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सम्मान किया।

कृषि विभाग की प्रदर्शनी को पहला स्थान- इस मौके पर विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी पुरस्कृत की गई। पहला स्थान कृषि विभाग को, दूसरा स्थान ऊर्जा विभाग को और तीसरा स्थान वन विभाग को मिला। सार्वजनिक उपक्रमों की श्रेणी में पहला पुरस्कार बाल्को, दूसरा पुरस्कार एनएमडीसी तथा तीसरा पुरस्कार एनटीपीसी को मिला।

 


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