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कभी हार न मानते हुए लक्ष्य को करें पूरा : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। आत्मविश्वास मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में होती है। शारीरिक रूप से कमजोर होने से मनुष्य परेशान होता है और मानसिक रूप कमजोर होने से उसके आगे बढ़ने का हौसला टूट जाता है। दोनों ही क्षमता को प्रभावित करते है, लेकिन हमें अपने प्रयासों में कमी नहीं करनी चाहिए और हार नहीं माननी है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर में निजी टी.व्ही. चैनल द्वारा आयोजित पंख- खेल उपलब्धि पुरस्कारकार्यक्रम में युवाओं को सम्बोधित कर उनका हौसला आफजाई किया। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि जो लक्ष्य तय किया है, उसे पाने के लिए रास्ता तय करना पड़ेगा। हमें विचलित नहीं होना है, बल्कि एक लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत करते हुए आगे बढ़ना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें युवाओं के नजरिए और उनके पक्ष को समझना होगा। बच्चों और पालकों में मधुर संबंध होने चाहिए, बात होनी चाहिए, दोनों को एक-दूसरे की बात मनानी चाहिए।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि युवा मन की चंचलता और कैरियर को लेकर उधेड़बुन के दिनों में हमें उनके साथ खड़े होने और अवसर देने की आवश्यकता है। प्रदेश की युवा ऊर्जा का सद्उपयोग कर उन्हें संस्कृति, खेलकूद, तीज-त्यौहार, से जोड़ने के लिए राजीव युवा मितान क्लब के गठन पर भी मुख्यमंत्री ने अपने विचार व्यक्त किए। इससे प्रदेश सहित वहां पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल का निर्माण हो रहा है। इस अवसर पर सांसद दीपक बैज, सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं खिलाड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए अच्छा माहौल – मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश में खेलों के लिए अच्छा माहौल तैयार करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नई-नई खेल अकादमियां शुरू हो रही हैं। खिलाड़ियों के खेल कौशल को बढ़ाने के लिए विश्व स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर आज अपने निवास में आयोजित खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में इस आशय के विचार व्यक्त किए।

उन्होंने समारोह में गुजरात में आयोजित 36वें राष्ट्रीय खेल में पदक जीतने वाले राज्य के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में इन खेलों मे भाग लेने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और टीम प्रबंधकों को भी सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव देवेन्द्र यादव, रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर गजराज पगारिया और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी भी समारोह में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि खेलों के माध्यम से जहां खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, वहीं हम सब भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। आप सब ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही हम लोगों को गौरवान्वित भी किया है। मैं गुजरात में हुए 36वें राष्ट्रीय खेल में राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ ही सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को बधाई देता हूं। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत एवं टीम स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले 64 खिलाड़ियों, विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले 89 अन्य खिलाड़ियों तथा 38 प्रशिक्षकों-प्रबंधकों को सम्मानित किया। 

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्य में खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए अच्छा वातावरण तैयार किया जा रहा है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए संगठित प्रयास और अनुकूल वातावरण की जरूरत होती है। प्रदेश में अभी 21 अकादमी संचालित हैं जिनमें दो आवासीय अकादमी भी हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जब नारायणपुर के बच्चे मलखम्ब में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा सकते हैं, तो कुछ भी असंभव नहीं है। एशियन गेम्स, ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी लगातार हिस्सा लेते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव देवेन्द्र यादव ने कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों में बहुत प्रतिभा और ऊर्जा है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में यहां के खिलाड़ी लगातार अपना दमखम दिखाते रहे हैं। राज्य की खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए हमें संगठित रूप से अच्छी अधोसंरचना तैयार करनी होगी। 14-15 वर्ष की उम्र में खिलाड़ियों की पहचान कर योजनाबद्ध रूप से उनके कौशल को निखारना होगा। राज्य के सभी संभाग मुख्यालयों में उपलब्ध खेल सुविधाओं को दूरस्थ अंचल के बच्चों तक भी पहुंचाना होगा। यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 36वें राष्ट्रीय खेल के पदक विजेता खिलाड़ियों, इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए कुल 16 लाख 35 हजार रूपए के पुरस्कार की घोषणा की है।

राजधानी रायपुर में बिछी शतरंज की बिसात, कोई जीता तो किसी को मिली मात

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रायपुर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने वातावरण बना रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री बघेल की विशेष पहल पर यहां 19 सितम्बर से राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है। यह टूर्नामेंट आगामी 28 सितम्बर तक चलेगा। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों समेत 15 देशों के 500 से अधिक शतरंज खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें 5 साल के बच्चे से लेकर 60 साल तक के बुजुर्ग खिलाड़ी शतरंज में अपने बुद्धि कौशल को दिखाने शतरंज की बिसात में शामिल हो रहे हैं। 



18 सितम्बर को छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट के औपचारिक शुभारंभ के बाद आज 19 सितम्बर को पहले व दूसरे राउंड का खेल हुआ। मास्टर्स कैटेगरी की स्पर्धा होटल ग्रेंड इम्पीरिया में और चैलेंजर्स कैटेगरी की स्पर्धा शगुन फॉर्म वीआईपी रोड रायपुर में खेली जा रही है। पहले दिन के खेल में किसी ने प्यादे की चाल पर ही राजा को घेर लिया तो किसी को अपनी ही एक चाल भारी पड़ी और मात मिली। पहले दिन के खेल के बाद कुछ खिलाड़ियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।



गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और खेल मंत्री उमेश पटेल के निर्देश पर अखिल भारतीय शतरंज महासंघ, खेल एवं युवा कल्याण एवं छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के मार्गदर्शन व संरक्षण में छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ द्वारा छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारत, रूस, यूक्रेन, जॉर्जिया, यूएसए, कज़ाकिस्तान, मंगोलिया, पोलैंड, वियतनाम, कोलंबिया, ईरान, श्रीलंका, बांग्लादेश, जिम्बाब्वे व नेपाल से शतरंज के महारथी और खिलाड़ी अपनी चाल से परिचित कराने और प्रतिद्वंदी खिलाड़ियों को मात देकर अपनी रैंकिंग सुधारने पहुंचे हैं। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुंचे खिलाड़ियों में 16 ग्रैंड मास्टर, 27 इंटरनेशनल मास्टर, 03 वीमेन ग्रैंड मास्टर, 11 वीमेन इंटरनेशनल मास्टर, 14 फीडे मास्टर, 375 इंटरनेशनल रेटेड प्लेयर्स समेत अन्य वर्गों के खिलाड़ी शामिल हैं।

 चैलेंजर्स केटेगरी के पहला राउंड सम्पन्न 

छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट के तहत बीकैटेगरी यानी चैलेंजर्स का पहला राउंड सम्पन्न हुआ। इस कैटेगरी की स्पर्धा में 300 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। रायपुर की दृष्टिबाधित राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी सुश्री नेहा जैन भी शतरंज की बिसात पर दांव-पेंच अपना रही हैं। आज के खेले गए मैच में पहले टेबल पर शानदार मुकाबला मध्यप्रदेश के हर्षित (1351) और उत्तरप्रदेश के  ऋषभ निषाद (1975) के बीच हुआ। निमज़ो इंडियन डिफेंस से खेली गई इस बाजी में ऋषभ ने काले मोहरे से खेलते हुए 35वीं चाल में बाजी जीत ली। वहीं दूसरे टेबल पर महाराष्ट्र के सिराज भोंसले (1974) और तमिलनाडु के आर. संतोष (1341) के बीच हुए मुकाबले में सिराज ने जीत हासिल की।



तीसरे टेबल पर महाराष्ट्र की सुश्री आरती ठाकुर (1340) और छत्तीसगढ़ के श्री आशुतोष बेनर्जी (1946) के बीच एक्सचेंज वेरिएशन से बाजी खेली गई। धीमी गति से चल रही इस बाजी में अंततः 75वीं चाल में आशुतोष अपनी प्रतिद्वंदी को मात देने में कामयाब रहे। चौथे टेबल पर आंध्रप्रदेश के ए. जी. एम. मालानुका राजू (1938) और तेलंगाना के अनमोल माथुर (1337) ने सिसिलियन डिफेंस अपनाते हुए बाजी की शुरुआत की। मालानुका राजू ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए  22 चालों में बाजी अपने पक्ष में कर ली। पांचवें टेबल पर गुजरात के समर्थ श्रेणी वारियर (1331) और गुजरात के ही जानी कुशाल (1921) के बीच शह और मात का खेल बराबरी पर छूटा, जिससे दोनों खिलाड़ियों को आधे-आधे अंक से संतुष्ट होना पड़ा।

छत्तीसगढ़ की व्यवस्थाओं ने दिया खेल का अनुकूल माहौल :

छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट के लिए पहुंचे खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में उन्हें मिली व्यवस्था ने खेल को लेकर अनुकूल माहौल बनाया है। चर्चा के दौरान खिलाड़ियों का कहना था कि, शतरंज जैसे बौद्धिक कौशल के खेल के लिए वातावरण का महत्व काफी होता है। कुछ खिलाड़ियों के अनुभव इस तरह रहे



•   पौलेंड से चेस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुंचे ग्रैंड मास्टर माइको क्रासेन्को ने कहा अब तक दूसरे देशों के अलावा भारत के भी कई राज्यों में वे खेलने के लिए आ चुके हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में हो रहा यह पूरा आयोजन बेहद शानदार है। उन्होंने कहा, मुझे पता चला है कि छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय और व्यापक स्तर पर चेस टूर्नामेंट का पहली बार आयोजन किया जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ सरकार का बेहद सराहनीय प्रयास है। 

अभी यह शुरुआत है और उम्मीद है कि शतरंज के ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ में परम्परा बनेगी। उन्होंने कहा, यहां सबकुछ बहुत ही सहज तरीके से आयोजित किया जा रहा है। इस उन्होंने कहा कि, निश्चित तौर पर यहां खेलकर उनके खेल कौशल में विकास होगा, हालांकि पहले दिन पहले राउंड के लिए उन्हें प्रतिद्वंदी के तौर पर मिले खिलाड़ी अपनी ही चाल में फंस गए और इससे ग्रैंड मास्टर माइको को जीत मिली।



 •    तमिलनाडु से पहुंचे 17 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी अविनाश रमेश ने बताया कि उन्हें टूर्नामेंट में 37वीं रैंक प्राप्त है। ऐसे में पहले दिन उनके लिए अपने खेल का बेहतर प्रदर्शन जरूरी था। उनके टेबल पर 3 घंटा 15 मिनट का पहला राउंड चला, जिसमें उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को मात देने में सफलता हासिल की। वहीं आयोजन को लेकर अविनाश ने कहा कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में उनके रुकने, वाहन, भोजन समेत खेल के लिए व्यवस्था की गई है, वह अब तक का बेहतरीन अनुभव है। छत्तीसगढ़ शासन की पहल और व्यवस्थाओं को लेकर युवा शतरंज खिलाड़ी अविनाश ने संतुष्टि के भाव जाहिर किए।

    मध्यप्रदेश के शहडोल से अपनी चैलेंजर्स कैटेगरी में बौद्धिक कौशल का प्रदर्शन करने पहुंचे 20 वर्षीय अतुल कुमार साकेत ने बताया कि वे 14 साल के थे, तब से उन्हें शतरंज को लेकर रुझान बढ़ा। वे स्कूल में अपने सीनियर्स को खेलते हुए देखते थे, और उन्हीं से शुरुआती जानकारी मिली। यहां आयोजन को लेकर अतुल ने कहा कि छत्तीसगढ़ चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर्स चेस टूर्नामेंट में पहुंचे माहिर खिलाड़ियों के बीच बहुत नया जानने-सीखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार की पहल पर शतरंज के इस आयोजन से शतरंज खिलाड़ियों को नई ऊर्जा देने वाला तो है, साथ ही नए खिलाड़ियों भी इससे प्रोत्साहित होंगे।

 •    आंध्रप्रदेश से रायपुर पहुंचे 10 वर्षीय श्रीखल प्रसाद ने बताया कि वे पांच साल के थे, तब से चेस खेल रहे हैं। आज पहले दिन उन्होंने दो राउंड खेले जिसमें से एक में उन्हें जीत मिली तो दूसरा राउंड ड्रा रहा। श्रीखल इस टूर्नामेंट में 6 प्वॉइंट स्कोर करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य सुपर ग्रैंड मास्टर बनने का है।

•    महाराष्ट्र के तसीन तड़वी ने बताता कि वे जब पांच साल के थे, तब अपने पापा को खेलते हुए देखकर उनका रुझान बढ़ा और उन्होंने पापा से ही शतरंज के दांव-पेंच सीखे हैं। अभी 10 साल के तसीन शतरंज में ही अपना करियर बनाना चाहते हैं।

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