Media24Media.com: कृषि विभाग

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छत्तीसगढ़ में कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने केंद्र-राज्य की साझा पहल

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रायपुर. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि विभाग के कार्यों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में राज्य और केंद्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई और भावी विकास रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता और प्रशासनिक कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए उन्नत गांव और खुशहाल किसान की अवधारणा को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने की उच्चस्तरीय समीक्षा 

ग्रामीण विकास और कृषि राज्य की रीढ़

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण विकास और कृषि को राज्य की रीढ़ मानती है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि गांवों की समग्र समृद्धि सुनिश्चित करना है। किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के सुदूर और वंचित क्षेत्रों तक विकास की पहुंच बनाना एक साझी ज़िम्मेदारी है, जिसको पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार दृढ़ संकल्पित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना, डिजिटल सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाना और युवाओं को कौशल आधारित रोजगार देना ही वास्तविक सुशासन है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीति योजनाओं को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रखने की जगह जन-जीवन में बदलाव लाने की है। 

‘अमृत सरोवर’ योजना को स्थानीय आजीविका से जोड़ने की है आवश्यकता


बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने ‘अमृत सरोवर’ योजना को स्थानीय आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और जलसंरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे। राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत श्रमिक बजट के पुनरीक्षण का आश्वासन दिया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्वीकृत आवासों के शीघ्र निर्माण और हो रहे नये सर्वे के भौतिक सत्यापन पर बल दिया। 

केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सराहना करते हुए विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेलानार योजना के अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना विकास को राज्य के सुदूर और चुनौतीपूर्ण भूभागों तक पहुंचा रही है। केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में शुरू किए गए ‘अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों’ की सराहना की और इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस नवाचार का अध्ययन कर इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जाए।

कृषि क्षेत्र की समीक्षा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि किसानों की आय वृद्धि के लिए केवल पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन जैसे एलाइड क्षेत्रों में भी प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, उन्नत बीजों, जैविक खेती और फसल चक्र अपनाने को प्रोत्साहित किया। केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र शुरू की जा रही विशेष पहल की जानकारी देते हुए श्री चौहान ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम राज्य के विभिन्न जिलों का भ्रमण कर किसानों को व्यावहारिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देगी। उन्होंने राज्य सरकार से इस पहल में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

छत्तीसगढ़ को विकास के नए शिखर पर पहुंचाने हरसंभव कदम 

बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अभिनव प्रयोगों और प्रतिबद्धता के साथ छत्तीसगढ़ को विकास के नए शिखर पर पहुंचाएंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार इस साझा संकल्प को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव पंचायत विभाग श्रीमती निहारिका बारिक, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के अपर सचिव आर. आनंद, ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला, कृषि मंत्रालय के सलाहकार  नवीन कुमार विद्यार्थी, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य में खाद-बीज और कीटनाशक औषधियों की गुणवत्ता की जांच जारी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा राज्य में रासायनिक उर्वरकों, बीज एवं पौध संरक्षण औषधियों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कृषि विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी अपने-अपने इलाकों में लगातार दबिश देकर बीज, खाद और कीटनाशक औषधियों के सेम्पल ले रहे हैं, जिसकी जांच गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में की जा रही है। खरीफ सीजन 2024 में अब तक राज्य में बीज के 71 नमूने तथा रासायनिक उर्वरक के 18 नमूने तथा पौध संरक्षण औषधियों के 19 नमूने जांच में अमानक पाए गए हैं, जिनके लाट के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के साथ ही संबंधित फर्मों को कृषि विभाग ने नोटिस जारी किया गया है।

अपर संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन 2024 में बीज के 5000, उर्वरक के 3700 तथा पौध संरक्षण औषधि के 777 नमूने लिए जाने का लक्ष्य है। विभागीय अधिकारियों की टीम द्वारा अब तक बीज के 4631 नमूने लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला भेजकर परीक्षण कराया गया है। परीक्षण में 4119 नमूने मानक स्तर के तथा 71 अमानक स्तर के पाए गए हैं, जबकि 441 नमूने अभी परीक्षण की प्रक्रिया में हैं।

इसी तरह रासायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच-पड़ताल के लिए कृषि विभाग के उर्वरक निरीक्षकों द्वारा 2638 नमूने विभिन्न संस्थानों से एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अभी तक प्राप्त रिपोर्ट में 896 नमूने मानक स्तर के तथा 18 नमूने अमानक स्तर के मिले हैं। 1664 नमूने अभी जांच की प्रक्रिया में हैं, जबकि 60 नमूने कतिपय कारणों से निरस्त कर दिए गए हैं। अमानक बीज एवं खाद के लाट के विक्रय को विभाग द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के साथ संबंधित संस्थाओं को कारण बताओं नोटिस भी जारी किया गया है। कृषि विभाग की टीम कीटनाशक औषधियों के गुणवत्ता की भी लगातार जांच कर रही है। जांच पड़ताल टीम ने अब तक कुल 286 सेम्पल विभिन्न फर्मों से लिए हैं, जिसमें से 167 सैम्पल मानक स्तर के और 3 अमानक पाए गए हैं। 86 सैंपल अभी जांच की प्रक्रिया में हैं, जबकि 14 सैंपल कतिपय कारणों से निरस्त हुए हैं।

किसानों और भूमिहीन मजदूरों को मिलेगी इसी माह न्याय योजना की तीसरी किश्त

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के किसानों राजीव गांधी किसान न्याय योजना और भूमिहीन मजदूरों को राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि का भुगतान सितम्बर माह की आखिर तक कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बात आज दुर्ग जिले के भिलाई नगर स्थित जयंती स्टेडियम में आयोजित महिला समृद्धि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने यह फैसला अगले माह अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के परिप्रेक्ष्य में लिया है। गौरतलब है कि उक्त दोनों योजनाओं की तीसरी किश्त का भुगतान अब तक राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर को किया जाता रहा है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के धान सहित अन्य प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ के मान से 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी 4 किश्तों में दी जाती है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के लगभग 24.43 लाख किसानों को दो किश्तों में 3704 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। किसानों को प्रथम किश्त की राशि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर 21 मई 2023 को 1894.93 करोड़ रूपए तथा द्वितीय किश्त की राशि राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर 20 अगस्त 2023 को 1810 करोड़ रूपए प्रदान की गई थी। तीसरी किश्त की राशि लगभग 1890 करोड़ रूपए किसानों के बैंक खातों में इस माह के आखिर तक जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में कृषि विभाग द्वारा इसको लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य दिलाना तथा फसल उत्पादकता एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 21 मई 2020 से राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की गई और इसका लाभ खरीफ वर्ष 2019 के धान उत्पादक किसानों को देने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2020 में इस योजना के तहत किसानों को 5627 करोड़ रूपए, वर्ष 2021 में 5553 करोड़ रूपए, वर्ष 2022 में 7028 करोड़ रूपए तथा वर्ष 2023 की दो किश्तों में अब तक 3704 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। राज्य के किसानों को इस योजना के तहत अब तक 21913 करोड़ रूपए का भुगतान हो चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना के अंतर्गत किसानों को इनपुट सब्सिडी देने के लिए वर्ष 2023-24 के बजट में 6800 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाओं में शामिल राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत राज्य में 5 लाख 63 हजार से अधिक भूमिहीन परिवारों को प्रतिवर्ष 7000 रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक भूमिहीन कृषि मजदूरों को 758 करोड़ रूपए की आर्थिक सहायता इस योजना के तहत दी जा चुकी है। गौरतलब है कि प्रथम चरण में यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों में लागू की गई थी। इस योजना को वित्तीय वर्ष 2023-24 से नगर पंचायत क्षेत्रों में भी विस्तारित किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष की दो किश्तों में भूमिहीन परिवारों के साथ-साथ बैगा, गुनिया, हाट पहरिया, गायता पुजारी, मोहरिया आदि को 281 करोड़ 44 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है। तीसरी किश्त के रूप में योजना के हितग्राहियों को लगभग 170 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जाएगा।

कृषि विभाग ने प्रति बूंद अधिक फसल विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

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देश में सूक्ष्म सिंचाई की पैठ बढ़ाने के लिए हितधारकों के साथ विभिन्न दृष्टिकोण पर चर्चा हेतु कृषि और किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफ डब्ल्यू), कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 31 मई, 2023 को द अशोक, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में "प्रति बूंद अधिक फसल (पी डी एम सी)" पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिभागी, सिंचाई उद्योग, जल प्रबंधन क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप और किसान उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


मनोज आहूजा, सचिव, कृषि और किसान कल्याण विभाग (डी ए एंड एफ डब्ल्यू) ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कार्यक्रम के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकियों को अपनाने और सूक्ष्म सिंचाई कवरेज को बढ़ाने पर जोर दिया ताकि इसके द्वारा देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कृषि और विशेष रूप से वर्षा सिंचित क्षेत्रों में जल उत्पादकता में वृद्धि की जा सके। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डी ए आर ई) के सचिव डॉ. हिमांशु पाठक ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे कृषि क्षेत्र में जल के उपयोग को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सूक्ष्म सिंचाई को अपनाने के लिए प्रयास करें।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव फ्रेंकलिन एल खोबंग ने प्रतिबूंद अधिक फसल (पी डी एम सी) योजना में अब तक हुई प्रगति के बारे में विस्तार से बताया। यह बताया गया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफ डब्ल्यू) देश के सभी राज्यों में 2015-16 से प्रति बूंद अधिक फसल (पी डी एम सी) की केंद्र प्रायोजित योजना लागू कर रहा है, जो सूक्ष्म सिंचाई अर्थात ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। 2015-16 से अब तक सूक्ष्म सिंचाई के तहत 78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है, जो कि (पी डी एम सी) पूर्व के 8  वर्षों के दौरान कवर किए गए क्षेत्र से लगभग 81% अधिक है। सरकार कृषि में जल उत्पादकता बढ़ाने और इस प्रकार टिकाऊ कृषि और किसानों की आय पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वर्ष 2018-19 के दौरान नाबार्ड के साथ 5000 करोड़ रुपये के कोष के साथ एक सूक्ष्म सिंचाई कोष (एम आई एफ) बनाया गया, जिसका प्रमुख उद्देश्य प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत उपलब्ध प्रावधानों के अलावा सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को टॉप अप/अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने हेतु संसाधनों को जुटाने मे राज्यों को सुविधा प्रदान की जा सके और साथ ही सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) में परियोजनाओं सहित नवाचारी एकीकृत परियोजनाओं को शामिल किया जा सके। सूक्ष्म सिंचाई कोष के प्रारंभिक कोष को 5,000 करोड़ से अतिरिक्त बढा कर दो गुना करने के लिए एक बजट घोषणा की गई है।

कार्यक्रम के दौरान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्यों की पांच ग्राम पंचायतों को उच्च सूक्ष्म सिंचाई अपनाने और जल प्रबंधन क्षेत्र में उत्तम प्रयासों हेतु सम्मानित किया गया। इसके अलावा, सूक्ष्म सिंचाई में अग्रणी राज्यों ने सूक्ष्म सिंचाई कवरेज और किसानों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए अपने राज्यों में अपनाई जा रही परिपाटियों और नवीन तरीकों को साझा किया। जलशक्ति मंत्रालय के विशेषज्ञों ने सिंचित कमांड में सूक्ष्म सिंचाई को शामिल करने की आवश्यकता और रणनीतियों के साथ-साथ भू जल प्रबंधन और चिरन्तरता में इस की प्रभावशीलता पर जोर दिया। नाबार्ड के प्रतिनिधि ने देश में सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तपोषण विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया। सूक्ष्म सिंचाई उद्योग के सदस्यों ने इस राष्ट्रीय प्राथमिकता कार्यक्रम में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के लिए अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।

फ्रैंकलिन एल खोबंग, संयुक्त सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने पी डी एम सी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संशोधित दिशानिर्देशों के मसौदे पर हितधारकों के साथ चर्चा की। चर्चा के दौरान, उन्होंने योजना के सफल कार्यान्वयन में विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यान्वयन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सूक्ष्म सिंचाई उद्योगों की भूमिका और राज्य/संघराज्य क्षेत्र की सरकारों द्वारा कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।


Job Alert: कृषि विभाग में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई

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Job Alert:  कार्यालय उप संचालक कृषि कोण्डागांव द्वारा जारी विज्ञप्ति अनुसार छत्तीसगढ़ शासन कृषि विकास एवं कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग मंत्रालय रायपुर द्वारा प्राप्त निर्देशों के परिपालन में डब्लूडीसी-पीएमकेएसवाय 2.0 परियोजना के सफल संचालन हेतु विभिन्न संविदा पदों पर भर्ती हेतु आवेदन 31 मई 2023 को कार्यालयीन समय सायं 05 बजे तक आमंत्रित किये गये हैं।


जिसमें तकनिकी विशेषज्ञ (अभियांत्रिकी) के 01 पद, प्रबंध विशेषज्ञ के 01 पद तथा लेखापाल सह डाटा एंट्री ऑपरेटर के 01 पद पर भर्ती की जानी है। इस हेतु आवेदन कार्यालय उप संचालक कृषि जिला कोण्डागांव छ0ग0 में जमा किये जायेंगे। इस संबंध में अधिक जानकारी हेतु आवेदक जिले की वेबसाइट https://kondagaon.gov.in/ पर जाकर अवलोकन एवं विस्तृत विज्ञापन प्राप्त कर सकते है।



किसानों से मिलने खेतों में पहुंचे कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा

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रायगढ़। कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा आज पुसौर विकासखण्ड के दौरे पर रहे। यहां वे कृषि विभाग के कार्यों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को देखने के साथ ही किसानों से मिलने सीधे उनके खेतों तक पहुंचे। यहां किसान ललित पटेल ने चार एकड़ में सरसों की खेती की है। कलेक्टर सिन्हा ने किसान से मुलाकात कर फसल उत्पादन के बारे में जानकारी ली। किसान पटेल ने बताया कि वे यहां पहली बार सरसों की फसल ले रहे है। 

कलेक्टर सिन्हा ने इस पर कहा कि शासन ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना में दलहन-तिलहन फसलों को भी शामिल किया है और यह देखकर खुशी हो रही है कि किसान उसका लाभ ले रहे है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसान काफी प्रोगेसिव है तथा फसल चक्र का महत्व समझते हुए बदल-बदल कर फसलें ले रहे है। सीईओ जिला पंचायत अबिनाश मिश्रा ने बताया कि पुसौर क्षेत्र के किसान इस बार करीब 136 एकड़ में सरसों की खेती कर रहे है। जिसके लिए कृषि विभाग की ओर से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। कलेक्टर सिन्हा ने किसानों की फसल बिक्री लागत व आय के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि एफपीओ गठन कर ऐसे किसानों के फसलों में वेल्यू एडिशन करने में जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले तथा वेल्यू एडिशन पश्चात तैयार उत्पादों को अच्छा मार्केट भी मुहैय्या हो सके।

15 मार्च तक पूर्ण करें रीपा का कार्य

कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने सूपा गौठान का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने चल रहे ग्रामीण औद्योगिक पार्क के  निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि काम की गति धीमी है, इसे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने 15 मार्च तक काम पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने गौठान में गोबर खरीदी व वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के बारे में जानकारी ली। गौठान समिति के सदस्यों ने बताया कि यहां से 755 क्विंटल से अधिक कम्पोस्ट बेचा जा चुका है। महिला समूहों को साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक का लाभांश मिला है। इसके साथ ही यहां बाड़ी भी लगायी गयी है, जिसमें टमाटर, केला, तरबूज आदि उगाये जा रहे है। कलेक्टर सिन्हा ने ग्रामीण औद्योगिक पार्क में शुरू होने वाले गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली। समिति सदस्यों ने बताया कि यहां हल्दी प्रोसेगिंग यूनिट, फर्नीचर तथा कोसा का काम किया जाएगा। उन्होंने गौठान में नियमित रूप से गोबर खरीदी करने के निर्देश दिए। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत अबिनाश मिश्रा, एसडीएम गगन शर्मा भी उपस्थित रहे।

गांव-गांव जाकर मैदानी अमला किसानों की समस्याओं का करें निराकरण : रविन्द्र चौबे

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रायपुर। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में गांव-गांव में कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी जाकर किसानों की समस्याओं का निराकरण करेंगे। मैदानी अधिकारी गांवों में भ्रमण के दौरान सप्ताह में कम से कम 5 गौठानों का अवलोकन करेंगे। अवलोकन के दौरान गौठानों के संचालन और वहां चल रही आर्थिक गतिविधियों का जायजा लेंगे। वे आज यहां महानदी भवन मंत्रालय में कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

कृषि मंत्री चौबे ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य फोकस किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप मैदानी अमले कृषि और उससे जुड़े विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें। किसानों से जुड़ी समस्याओं और उनके निराकरण के लिए पहल करें। किसानों को समय पर आदान सहायता के साथ ही अन्य जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने गोधन न्याय योजनांतर्गत 5 हजार गौठानों को स्वावलंबी बनाने का आव्हान करते हुए प्रत्येक जिले के 50 प्रतिशत गौठानों को स्वावलंबी बनाने को कहा। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग के लिए किसानों को प्रशिक्षित करें। चौबे ने कहा कि जहां-जहां ग्रीष्मकालीन धान बोया जा रहा है, उसकी जगह लघु धान्य रागी बोने के लिए प्रोत्साहित किया जाए औा इसके लिए जो कार्ययोजना बनाई गई उसे क्रियान्वित करें।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी निरतंर फील्ड में रहकर भ्रमण करें किसानों के सम्पर्क में रहकर उनकी मदद करें, उन्हें किसान चौपाल के माध्यम से अच्छी किस्म के बीज, खाद और फसलों की किस्मों की जानकारी प्रदान करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि मजदूरों की कई बार अनुपलब्धता के कारण कृषि यंत्रों की मांग बढ़ी है, अतः विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक कृषकों तक पहुंचाने हेतु पर्याप्त आंकलन करना सुनिश्चित करें, जिससे कि कृषि लागत में कमी, उत्पादन एवं वृद्धि का किसान अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने कहा कि गन्ना की नई किस्मों का अधिक से अधिक प्रचार करें इससे किसान उनका उपयोग करेंगे, जिससे शक्कर उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी।

चौबे ने कहा कि किसान समृद्धि योजना और शाकम्भरी योजना से किसानों को सिंचाई का लाभ दिलाये इसके लिए प्राथमिकता से परंपरागत माली मरार पटेल समाज को लाभ दिलाये। चौबे ने कहा कृषि विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे प्रदर्शनों की जानकरी हेतु प्रदर्शन बोर्ड लगाए जाए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाए और साथ ही इसका प्रमाणीकरण भी करें। उन्होंने कहा कि बीज और खाद की माग निरंतर बढते जा रही है। यहां अच्छी बात है विभाग इसकी पूर्ति बेहतर ढंग कर रही है। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का ही परिणाम है कि सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में धान खरीदी के लक्ष्य 110 लाख मे.टन के विरूद्ध अद्यतन 100 लाख मे.टन धान की खरीदी कर सका है।

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मैदानी अधिकारी समस्त केन्द्रीय एवं राज्य पोषित योजनाओं तथा कृषि से संबंद्ध अन्य विभागों की समन्वित योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु मैदानी अधिकारियों को सक्रिय कर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति करने के निर्देश दिए। डॉ. कमलप्रीत ने कहा कि जो किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत लाभ ले रहे हैं उन्हीं कृषकों का लगभग 50 प्रतिशत कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बना है। अतः बैंक एंव कृषि विभाग द्वारा विशेष कैंप लगाकर किसान क्रेडिट कार्ड बनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने उद्यानिकी फसलों में दिए जाने वाले शून्य प्रतिशत ऋण योजना को प्रचार करने के निर्देश दिए।

समीक्षा में कृषि विभाग के संचालक अयाज तम्बोली, बीज निगम के प्रबंध संचालक माथेश्वरन व्ही., मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पी.एस. एल्मा, संयुक्त सचिव के.सी. पैकरा, कृषि विभाग के उप सचिव श्रीमती तुलिका प्रजापति, अपर संचालक एस.सी. पदम, जी.के. पीढ़िया, सी.बी. लोढ़ेकर, आर.के. चन्द्रवंशी सहित राज्य के सभी जिलों के कृषि विभाग के संभागीय एवं जिला अधिकारी शामिल हुए।

गौठानों द्वारा खुद की जमा पूंजी से गोबर खरीदना, गोधन न्याय योजना की सफलता: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गौठानों द्वारा खुद की जमा पूंजी से गोबर खरीदना गोधन न्याय योजना की बड़ी सफलता है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के आधे से अधिक गौठान स्वयं के संसाधनों से गोबर की खरीदी कर रहे हैं। राज्य शासन को इन गौठानों को गोबर खरीदने के लिए राशि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। गोबर विक्रेताओं को आज भुगतान की गई 4.62 करोड़ रुपए की राशि में से 4270 स्वावलंबी गौठानों द्वारा 2.88 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया तथा कृषि विभाग द्वारा 1.74 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। पिछले पखवाड़े में गोबर खरीदी के लिए प्रदेश के स्वावलंबी गौठनों ने कृषि विभाग की तुलना में अधिक राशि का भुगतान किया है। स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक अपने संसाधनों से 29.61 करोड़ रूपए की राशि से गोबर की खरीदी की गई है।



मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि के अंतरण के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हितग्राहियों को 7 करोड़ 83 लाख रूपए का ऑनलाईन भुगतान किया। इस राशि में 16 नवम्बर से 30 नवम्बर तक गौठानों में गोबर विक्रेता पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए गोबर के एवज में उनके खाते में 4 करोड़ 62 लाख रूपए की राशि ऑन लाईन अंतरित की।

इसी प्रकार गौठान समितियों को एक करोड़ 28 लाख रुपए तथा महिला समूहों के खाते में एक करोड़ 93 लाख रूपए की लाभांश राशि अंतरित की गई। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ.कमलप्रीत सिंह, गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक अवनीश शरण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव गौरव कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

अधिक से अधिक गौठानों को उपलब्ध कराएं बेलर मशीन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ’गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ में प्रदेश के युवाओं और महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गौठानों में विकसित किए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की गतिविधियों में युवाओं और महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे युवाओं और महिलाओं को रोजगार और आमदनी का अच्छा जरिया मिलेगा। बघेल  ने कहा कि गौठानों में किसान स्वयं पैरादान कर रहे हैं। पैरादान के लिए किसानों को और अधिक प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जब गौठानों में पशुओं के लिए चारा और पानी की व्यवस्था होगी, तो पशु खेती और सड़कों के बजाय गौठानों में रहेंगे। उन्होंने प्रदेश के अधिक से अधिक गौठानों में पैरा के बंडल बनाने के लिए बेलर मशीन उपलब्ध कराने के प्रयास करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में ऐसे उत्पाद प्राथमिकता के आधार पर तैयार किए जाएं, जिनकी शासन को जरूरत है या जिनके मार्केट में अच्छी मांग है।

मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में बताया कि राजिम विधानसभा क्षेत्र में भेंट-मुलाकात के दौरान एक महिला ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट के लिए उपयोग में आने वाली बोरियों में उन्होंने प्रिंटिंग का काम कर 4 लाख रूपए की कमाई की है। उन्होंने कहा कि अच्छे उत्पादों को तैयार करने के लिए युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में एक मजबूत अर्थव्यवस्था खड़ी होगी, जो देश और दुनिया के लिए उदाहरण होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी के एवज में भुगतान की जा रही राशि लगातार बढ़ रही है। लोग गौठानों से जुड़ रहे हैं, गोबर और वर्मी कम्पोस्ट का महत्व समझ रहे हैं। भेंट मुलाकात के दौरान कुछ गौठान समितियांें ने स्वयं की राशि से आर्थिक गतिविधियों के लिए शेड बनाने की मांग की।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि प्रदेश में 11 हजार 252 गौठानों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 9 हजार 619 गौठान निर्मित किए गए हैं, इनमें से ग्रामीण क्षेत्रो में 8440 गौठान निर्मित किए गए हैं। इन गौठानों में से 4270 गौठान स्वावलंबी हो गए हैं। गोबर खरीदी, वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन और वितरण का काम विभिन्न विभागों के समन्वय से किया जा रहा है। आने वाले समय में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन छत्तीसगढ़ में एक बड़ा अभियान बनेगा। उन्होंने कहा कि रीपा की गतिविधियां को युवाओं को जोड़कर और अधिक बढ़ाया जाएगा।

गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि गोबर खरीदी के एवज में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद से अब तक 188.45 करोड़ रूपए तथा गौठान समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को लाभांश की राशि के रूप में 170.05 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक गौठानों में 19.82 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया गया है। इसमें से 16.24 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। डॉ. तम्बोली ने बताया कि गौठानों में अब तक पैरादान से 2.25 लाख क्विंटल पैरा मिला है।

कृषि विभाग के अधिकारियों को जिला पंचायत सीईओ ने लगाई कड़ी फटकार

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बलौदाबाजार। कलेक्टर रजत बंसल के निर्देश में जिला पंचायत सीईओ गोपाल वर्मा ने आज जिला मुख्यालय स्थित सहकारी नोडल बैंक कार्यालय के सभागार में कृषि विभाग के कामकाज विस्तृत समीक्षा की है। इस दौरान फील्ड में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के नहीं पहुँचने, गौठानों में गोबर खरीदी कार्य नही करने एवं धान खरीदी केंद्रों में सतत निरीक्षण नहीं करने पर जिला पंचायत सीईओ ने कृषि विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कार्य मे सुधार लाने की नसीहत दी है।



उन्होंने कहा कि सभी गौठानो में नियमित गोबर खरीदी कर उन्हें वर्मी कंपोस्ट के प्रक्रिया में डालना ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी का कार्य है। वह इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता से करें। इसके साथ ही धान खरीदी प्रारंभ हो गया है। जहाँ जहाँ आप लोगो की ड्यूटी लगाई गयी हैं वहां उपस्थित होकर कार्य करे। इस दोनों कार्य मे जरा भी लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी। यह सरकार की सबसे उच्च प्राथमिकता के कार्य है। वर्मा ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को गौधन न्याय योजना के क्रियान्वयन में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

उन्होंने आगें कहा कि गौधन न्याय योजना अंतर्गत गौठानों शत प्रतिशत में गोबर खरीदी,गुणवत्तापूर्ण वर्मी कंपोस्ट उत्पादन,गौठान प्रबंधन समिति के कार्य एंव पंचायत सचिवों से बेहतर समन्वय स्थापित कर उत्कृष्ट  परिणाम देने के निर्देश दिए गए। इस दौरान बैठक में आरईओ ने भी कुछ समन्वय संबंधित समस्याओं के बारे में जानकारी दी जिस पर जिला पंचायत सीईओ ने शीघ्र ही निराकरण करनें का आश्वासन दिया।उक्त बैठक में अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ हरिशंकर चौहान,उपसंचालक कृषि जोसेफ टोप्पो, नोडल बैक अधिकारी शर्मा,डीईआरसीएस सुरेन्द्र गौड़ सहित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी,सहकारिता निरीक्षक सहित समस्त मैदानी अमला उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि, अपात्र कृषकों से की जायेगी वसूली

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बलरामपुर। कृषि विभाग के उप संचालक ने जानकारी दी है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनांतर्गत जिले में ई-केवाईसी का कार्य शत्-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। सर्वे रिर्पोट के अनुसार जिले में 40 हजार 875 कृषकों को अपात्र किया गया है, अपात्र कृषकों में अधिकतम जिले के बाहर के कृषक हैं, जिनका कोई भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है तथा 649 ऐसे कृषक हैं जो आयकर दाता धारी हैं, जिन्होंने विभाग को धोखे में रखकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि प्राप्त कर ली है।



कलेक्टर विजय दयाराम के. ने इन 649 कृषको से कुल लगभग 47 लाख की वसूली करने के निर्देश कृषि एवं राजस्व विभाग को दिये हैं। कृषि विभाग ने जिन 649 कृषकों से वसूली की कार्यवाही की जानी है उन्हें नोटिस जारी कर 6 दिवस में राशि जमा करने को कहा है तथा जो कृषक राशि जमा करते हैं उनके विरूद्ध राजस्व प्रकरण दर्ज कर वसूली की कार्यवाही की जायेगी।

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