Media24Media.com: कृषि कानून के फायदे

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किसानों को दिग्भ्रमित कर रही कांग्रेस : भाजपा

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महासमुन्द। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा किसानों के हित में किसानों की आय दोगुना करने, किसानों को संबल बनाने के लिए लाये गए किसान सुधार बिल के समर्थन में भाजपा मंडल सराईपाली के जोगनीपाली , कनकेबा, केजुवां व सराईपाली सोसायटी में जनसंपर्क कर किसानों को किसान सुधार बिल के लाभ के बारे में बताया गया । किसानों को विरोधियों और विपक्षियों द्वारा भ्रमित किया जा रहा है। फैलाए जा रहे कथित झूठ का भाजपा भंडाफोड़ कर रही है। विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही है। दिल्ली के आसपास जमा हुए किसानों को साजिश के तहत गुमराह किया जा रहा है। उन्हें मोदी के खिलाफ भड़काया जा रहा है। सत्ता में रहते हुए जो लोग किसानों का भला नही कर सके, वे अब किसानों को गुमराह कर लाभ उठाने से रोकने के लिए भ्रमित कर रहे हैं।





किसान आंदोलन को दे रहे हवा






किसान आंदोलन का समर्थन कर रही विपक्षी पार्टियां जब केंद्र में सत्ता में थी तो कृषि क्षेत्र में इसी तरह के सुधारों का समर्थन करती थी।और 2014 और 2018 के लोकसभा चुनाव के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल भी की थी।परंतु अब इस बात से मुकर रही है। अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने और अपनी खोई हुई जमीन वापसी के लिए किसान बिल का विरोध किसानों से करवा रही है।





कांग्रेस की दोहरी नीति






कांग्रेस हमेशा से ही दोहरे चाल और चरित्र करती आई है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल किसानों को भ्रमित करने की साजिश चल रही है। उन्हें डराया जा रहा है कि नए कृषि बिल से किसानों की जमीन पर दूसरे कब्जा कर लेंगे। मंडी बंद हो जाएगी, समर्थन मूल्य खत्म हो जायेगा। अनेक तरह की भ्रम फैलाई जा रही है जबकि नए किसान बिल में साफ- साफ अंकित किया गया है और देश के प्रधानमंत्री ने भी इस बात को स्पष्ट किया है कि मंडी बंद नही होगी। पहले की तरह समर्थन मूल्य में खरीदी होती रहेगी। समर्थन मूल्य खत्म नही होगा हमेशा की तरह लागू रहेगी। इस बिल में यह भी बताया गया है कि किसान अपनी उपज को सोसायटी, मंडी के अलावा जहां जिस क्षेत्र में ज्यादा दाम मिलता है बिना रोक टोक के, बिना परिवहन शुल्क के किसान कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र है। किसानों को लगने वाले मंडी शुल्क, कमीशन और अन्य शुल्क से राहत मिलेगी जिससे किसान भाइयों को ज्यादा आमदनी होगी।





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किसान के हित में है बिल





किसानों के मुनाफ़े को बीच में जो बिचौलिए खा जाते थे। उन्हें अब बिचौलियों से भी राहत मिलेगी। इस तरह से प्रधानमंत्री द्वारा लाये गए किसान बिल किसान के हित में है। किसानों की आय को बढ़ाने वाली है। किसान को संबल प्रदान करने वाली है। जबकि अनेक लोक लुभावने घोषणा कर सत्ता में आई छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार 2500 रुपये क्विंटल देने का वादा कर सत्ता में आई। और सत्ता में आने के बाद जिस तरह से किसानों के साथ छल कर रही है। वह किसी से छुपा नहीं है।पिछले वर्ष का 2500 का बकाया राशि, धान खरीदी में एक माह की देरी, बारदाना की कमी, दो साल का बोनस, नकली खाद, नकली दवाई जैसे अनेक तरह से किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिससे किसान आत्महत्या करने मजबूर हो रहे हैं। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सरला कोसरिया, पूर्व विधायक द्वय त्रिलोचन पटेल, रामलाल चौहान, मंडल अध्यक्ष धनेश नायक, जिला उपाध्यक्ष विपिन उपावेजा, मंडल महामंत्री घासीराम अग्रवाल आदि भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।






जिसका हो रहा विरोध, जानिए क्या है वह 'कृषि कानून'

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कृषि कानून ( Indian farm reforms 2020) के खिलाफ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति ने सभी कृषि विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है।  आज देश के कई हिस्सों से इस बिल के विरोध (Farmer Law Protest) में प्रदर्शन हो रहे हैं।





राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह तीनों विधेयक अब एक्ट यानी की कानून बन गए हैं। कृषि विधेयकों के विरोध के बीच राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने तीनों विधेयकों पर हस्ताक्षर किए। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने की अपील की थी।





दूसरी ओर इन विधेयकों का विरोध राजग के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने भी किया है और उसने खुद को राजग से अलग कर लिया।





 जानिए क्या है कृषि कानून (What is Agriculture law)





  • किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 का उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है।
  • किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक का उद्देश्य अनुबंध खेती की इजाजत देना है।
  • आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण को विनियमित करता है।




विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच राज्यसभा ने दो प्रमुख कृषि विधेयकों को पारित कर दिया था। हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी के आसन की ओर रुख करते हुए उनकी ओर नियम पुस्तिका को उछाला, सरकारी कागजातों को फाड़ डाला और मत विभाजन की अपनी मांग को लेकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया था।





इस कानून के फायदे (Benefits of Farmer Laws)





  • सरकार का कहना है कि इस अध्यादेश से किसान अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी भी व्यक्ति या संस्था को बेच सकते हैं। कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी मंडियों) के बाहर भी कृषि उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है। इसके जरिये सरकार एक देश, एक बाजार की बात कर रही है।
  • सरकार किसानों से धान-गेहूं की खरीद पहले की ही तरह करती रहेगी और किसानों को एमएसपी का लाभ पहले की तरह देती रहेगी।
  • मंडियों में व्यापारियों की संख्या कम होती जा रही है, जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाती, नतीजतन किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पूर्व के नियम अनुसार किसान अपने उत्पाद बाहर खुले में नहीं बेच सकते थे, ऐसा नहीं कि यह सभी जगह हो लेकिन अधिकतर स्थान पर ऐसा ही है,  इसलिए वे मंडी के व्यापारियों के मोहताज बन जाते थे।अब किसान मंडी के साथ-साथ मंडी से बाहर भी अपनी उपज भेज सकते हैं।




कृषि कानून के नुकसान





  • विपक्ष का कहना है कि इससे मंडी की व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी. वे कहते हैं, ‘सरकार के इस फैसले से मंडी व्यवस्था ही खत्म हो जाएगी। इससे किसानों को नुकसान होगा और कॉरपोरेट और बिचौलियों को फायदा होगा।
  • 1950-60 के दशकों में अमेरिका एवं  यूरोप सहित कई देशों में इस प्रकार का कृषि मॉडल लागू किया गया लेकिन वह बुरी तरह असफल साबित हुआ। 70 सालों के बाद अमेरिका और यूरोप में किसानों की हालात बहुत बदतर है। किसानों की आत्महत्या की दर साधारण शहरों में रहने वाले व्यक्ति से 45% अधिक है। इसके अलावा वहां के किसान सरकारों के ऊपर निर्भर रहते हैं।
  • एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 के हट जाने के बाद अब व्यापारी इन फसलों की  जमाखोरी कर सकेंगे और जब चाहे महंगाई को नियंत्रित कर सकेंगे। एक तरीके से यह पूंजीपतियों के हाथ में अर्थव्यवस्था का नियंत्रित होना है। भारत में 80% से अधिक छोटे और मझोले किसान है, अर्थात इनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है. इससे उनका काफी नुकसान होगा। 

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