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वनभूमि कब्ज़ाधारी किसान ने कब्जा छोड़कर पेश की अनूठी मिशाल

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रायपुर। वनमंत्री केदार कश्यप आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान बेसोली में आयोजित वन महोत्सव में सम्मिलित हुए। जहाँ उन्होंने पीपलवांड ग्राम पंचायत में वन विभाग के जमीन पर गांव के निवासी सोन सिंह पिता पदम से वन भूमि पर किया गया कब्जा छोड़ने का आग्रह किया। इस पर किसान ने अपनी कब्जे वाली वनभूमि को ग्रामवासियों के समक्ष लिखित में वापस की और भविष्य में ऐसा कार्य नहीं करने की प्रतिज्ञा भी ली।

वनमंत्री केदार कश्यप ने किसान सोनसिंह के इस निर्णय को अनुकरणीय बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी पहल है। सोनसिंह के इस कार्य से अन्य लोग भी प्रभावित होकर समाज हित में वनभूमि से कब्जा छोड़ने का निर्णय लेंगे। पीपलवांड के सरपंच केशव और ग्रामीणों ने उनकी इस मिसाल का स्वागत कर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया। 

वन विभाग के उच्च अधिकारी मुख्य वन संरक्षक आर सी दुग्गा एवं वन वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता के नेतृत्व में यह कार्य बहुत ही अच्छे ढंग से चल रहा है जिसका परिणाम है कि आज लोग स्वयं से आकर वन भूमि पर किए कब्जे की जमीन को वापसी कर रहे हैं।

सोन सिंह के इस प्रयास के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी एवं अन्य अतिक्रमणकारियों से भी आग्रह किया है कि जो भी लोग इस प्रकार से कब्जा किए हैं स्वयं से आकर अपनी कब्जे की जमीन वन विभाग को वापिस कर दें।


विशेष लेख : छत्तीसगढ़ की पहली पारम्परिक लोक पर्व हरेली

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रायपुर। भारत विविधताओं का देश है। भारत देश में एक नीले आसमान के नीचे कई समृद्ध संस्कृति फल-फूल रही हैं। भारत की अनेकताओं में कुछ त्यौहार ऐसे हैं ,जो सारे देश को एक साथ जोड़ते हैं। छत्तीसगढ़ संस्कृति में त्यौहारों, पर्वो का विशेष महत्व है। इन त्यौहारों के क्रम में पहला त्यौहार हरेली का है।

इसलिये कहा गया छत्तीसगढ़ संस्कृति परम्परा का त्यौहार हरेली। हरेली त्यौहार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली त्यौहार किसान और सभी छत्तीसगढ़वासियो का त्यौहार है। हरेली मतलब प्रकृति के चारों तरफ हरियाली से है । किसान खेत में जुताई-बोआई, रोपाई, बियासी के कार्य पूर्ण करके इस त्यौहार का मनाता है।

हरेली त्योहार की जड़ें छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि विरासत में हैं, जहाँ इसे लंबे समय से कृषि देवताओं के प्रति सम्मान के रूप में मनाया जाता रहा है। मानसून की शुरुआत में मनाया जाने वाला हरेली, बुवाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है और लोगों और उनकी ज़मीन के बीच गहरे बंधन को दर्शाता है। पीढ़ियों से चला आ रहा यह त्यौहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को कायम रखता है और इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है।

प्रकृति की पूजा का विधान

हरेली मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है, जो ज़मीन और जीवन को सहारा देने वाले औज़ारों के प्रति कृतज्ञता की भावना को उजागर करता है। परंपरागत रूप से इस त्योहार को सांप्रदायिक संबंधों को मज़बूत करने और कृषि एवं प्राकृतिक दुनिया की देखरेख करने वाली दिव्य शक्तियों का सम्मान करने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है। सावन माह की अमावस्या पर होने वाली हरेली त्यौहार को साल की पहली त्यौहार के रूप में मनाते हैं। लगातार बारिश से खेतों की शुरुआती जुताई-रोपाई का काम होने पर खेतों में हरियाली बरकरार रहने के लिए, इस त्यौहार को मनाया जाता है।

कृषि औजारों की पूजा

छत्तीसगढ़ के किसान हरेली त्यौहार के दिन गाय बैल भैंस को भी साफ सुथरा कर नहलाते हैं। अपनी खेती में काम आने वाले औजारों को हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को धोकर और घर के बीच आंगन में रख दिया जाता है या आंगन के किसी कोने में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं और उसकी पूजा की जाती है साथ ही अपने कुलदेवता की भी पूजा की जाती है ।

घर-घर बनते पकवान

माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं और कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। हरेली के बच्चे गेंड़ी का आनंद लेते हैं। इस अवसर पर सभी के घरों में विशेष प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं। चावल के आटे से बनी चीला रोटी को इस दिन लोग खूब चाव से खाते हैं। कोई इसे नमकीन बनाता है, तो कोई इसे मीठा भी बनाते हैं। यह खाने वालों की पसंद के ऊपर होता है। इस तरह से यह त्यौहार परम्पराओं से भरी हुई है। हरेली तिहार के दिन सभी लोग अपने–अपने दरवाजा पर नीम टहनी तोड़ कर टांग देते है और इसी बहुत गेंड़ी खेल का आयोजन शुरु हो जाता है. हरेली तिहार के दिन सुबह से ही बच्चे से लेकर युवा तक 20 या 25 फिट तक गेंडी बनाया जाता है। उसी दिन सभी युवा एवं बच्चे गेंडी चढ़ते है गावं में घूमते है. बच्चों और युवाओं के बीच गेंड़ी दौड़ प्रतियोगिता भी की जाती है।

अनिष्ट की रक्षा का पर्व

हरेली तिहार के दिन पूजा करने से पर्यावरण शुद्ध और सुरक्षित रहता है और फसल उगती है तो किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं लगती है। हरेली तिहार मनाने से फसल को हानिकारक किट तथा अनेको बीमारिया नही होती है इसलिए हरेली तिहार मनाया जाता है। हरेली त्यौहार के दौरान छत्तीसगढ़ के लोग अपने-अपने खेतों में भेलवा पेड़ की शाखाएँ लगाते हैं। वे अपने घरों के प्रवेश द्वार पर नीम के पेड़ की शाखाएँ भी लगाते हैं। नीम में औषधीय गुण होते हैं जो बीमारियों के साथ-साथ कीड़ों को भी रोकते हैं। लोहार हर घर के मुख्य द्वार पर नीम की पत्ती लगाकर और चौखट में कील ठोंककर आशीष देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उस घर में रहने वालों की अनिष्ट से रक्षा होती है। हरेली पर्व में, गांव और शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद, गांव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली एकत्रित होती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता खेली जाती है। इस प्रतियोगिता में, लोग नारियल को फेंककर दूरी का मापन करते हैं। नारियल हारने और जीतने का सिलसिला रात के देर तक चलता है, और यह एक रंगीन और आनंदमय गतिविधि होती है।

हरेली त्योहार लिखी गई कविता 

हरेली के रंग, छत्तीसगढ़ के संग

हरे-भरे खेत, हरियाली छाई, आज हरेली, खुशियाँ लाई।

किसानों का त्यौहार, प्रकृति का उपहार।

नांगर, गैंती, कुदाली, सबकी पूजा, आज निराली।

पशुधन भी पूजे जाते, गौ माता को भोग लगाते।

गुड़ का चीला, ठेठरी-खुरमी, मिठाई का स्वाद, घर-घर घूमी। 

खुशियों से आंगन महके, मन में उमंग सब।

जड़ी-बूटी का लेप, बीमारी भागे, मिले सुख-चैन।

हरेली के रंग, छत्तीसगढ़ के संग।


विशेष लेख : सरकार के नीतिगत फैसलों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ के किसानों का मान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के नीतिगत फैसलों एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। राज्य सरकार ने बीते 18 महीने में विभिन्न योजनाओं के तहत् लगभग सवा लाख करोड़ रूपए किसानों के खाते में अंतरित की है। इन कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

बता दें कि देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री साथ के नेतृत्त्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल की अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीति गत फैसलों से खेती-किसानी की नया सम्बल मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 24.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी कर एक नया रिकार्ड कायम किया है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 32 हजार करोड रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। इसी तरह खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के किसानों से रिकार्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई और धान खरीदी के एवज में किसानों को 34,500 करोड़ रूपए का तत्काल भुगतान किया गया तथा 12 हजार करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त सीधे किसानों के खातों में अंतरित किया गया।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। किसानों को 11 जुलाई की स्थिति में 5124 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित किए गए हैं। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई है। सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है।

कृषि विभाग के बजट में बीते वर्ष की तुलना में वर्ष 2024-25 में 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय है। पिछले वर्ष 149.25 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर राज्य के 25 लाख 48 हजार 798 किसानों से खरीदी की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।


आलेख : सरकार के नीतिगत फैसलों ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ के किसानों का मान

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के नीतिगत फैसलों एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। राज्य सरकार ने बीते 18 महीने में विभिन्न योजनाओं के तहत् लगभग सवा लाख करोड़ रूपए किसानों के खाते में अंतरित की है। इन कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

साल दर साल बढ़ रहा है किसानों की संख्या, रकबा और उत्पादन

बता दें कि देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री साथ के नेतृत्त्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल की अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीति गत फैसलों से खेती-किसानी की नया सम्बल मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 24.75 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी कर एक नया रिकार्ड कायम किया है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 32 हजार करोड रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया था। इसी तरह खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में प्रदेश के किसानों से रिकार्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी गई और धान खरीदी के एवज में किसानों को 34,500 करोड़ रूपए का तत्काल भुगतान किया गया तथा 12 हजार करोड़ रूपए की अंतर की राशि एकमुश्त सीधे किसानों के खातों में अंतरित किया गया।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। किसानों को 11 जुलाई की स्थिति में 5124 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित किए गए हैं। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की गई है। सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है।

कृषि विभाग के बजट में बीते वर्ष की तुलना में वर्ष 2024-25 में 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य के बजट में भी कृषि के साथ-साथ ग्रामीण विकास को फोकस किया गया है। यहां धान और किसान एक-दूसरे के पर्याय है। पिछले वर्ष 149.25 लाख मीट्रिक टन धान समर्थन मूल्य पर राज्य के 25 लाख 48 हजार 798 किसानों से खरीदी की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 26 लाख से ज्यादा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना में किसानों को तीन किश्तों में साल में 6 हजार रूपए की राशि केन्द्र सरकार के द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में दी जा रही है। केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में धान के विपुल उत्पादन को देखते हुए केन्द्रीय पूल में 78 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य दिया है।



धान नहीं, अब चना की खेती से मिल रहा मुनाफा

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रायपुर। किसान अब परंपरागत धान की खेती के बजाय चना, मूंग और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों की खेती को अपनाने लगे हैं। धमतरी जिले के किसानों ने इस बार गर्मी के मौसम में फसल विविधिकरण की जो नई राह अपनाई है, इसका फायदा उन्हें सीधे तौर पर मिल रहा है। कम लागत, कम पानी में अधिक मुनाफा।

भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण जिला प्रशासन ने किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। गांव-गांव में जल संरक्षण के लिए जल-जगार महोत्सव और फसल चक्र परिवर्तन शिविर आयोजित किए गए। इन प्रयासों का असर यह हुआ कि किसानों ने इस बार धान की जगह चने की खेती की, जो कम पानी में अच्छी पैदावार देती है।

किसानों को उनकी मेहनत का फल भी मिल रहा है। सरकार द्वारा पहली बार चना की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है। 1 मार्च से 31 मई तक 5650 रूपए प्रति क्विंटल की दर से चना खरीदी हो रही है। धमतरी जिले में 8 समितियों के माध्यम से 2144 किसानों ने अब तक 19 हजार 850 क्विंटल चना बेचा है, जिसकी कुल राशि 11 करोड़ 21 लाख 53 हजार रूपए है। भुगतान भी सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है।

अमलडीह के किसान भुनेश्वर साहू बताते हैं कि धान की तुलना में चना की खेती से पानी भी बचा और मुनाफा भी मिला। पैसा भी समय पर मिल गया है। वहीं किसान घुरसिंह साहू ने कहा, मुझे 56 हजार रुपये से ज्यादा की राशि सीधे खाते में मिली है। पहली बार शासन ने चना खरीदी की है, जिससे हम किसानों को बहुत लाभ हुआ है।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि फसल चक्र परिवर्तन से भूजल स्तर को बचाने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल रही है। धान की जगह चना, मूंग, सरसों जैसी फसलें लगाने के लिए किसानों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही इन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी और अन्य सरकारी सहायता भी दी जा रही है। धमतरी में किसानों का यह बदलाव अब एक सफलता की कहानी बन चुकी है। इससे यह साबित होता है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत एक साथ मिल जाएं, तो खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।

सुशासन तिहार 2025 : सुशासन तिहार में वनांचल के किसान गोवर्धन को मिला किसान किताब की द्वितीय प्रति सुशासन तिहार में अपने आवेदन पर शीघ्रता से काम होने पर

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बालोद। सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर कोटागांव में किसान किताब की द्वितीय प्रति मिलने पर किसान गोवर्धन ने प्रसन्नता व्यक्त की है। सुशासन तिहार 2025 के अंतर्गत आज डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम कोटागांव में आयोजित समाधान शिविर का आयोजन किया गया। समाधान शिविर में पहुंचे ग्राम धोतिमटोला के किसान गोवर्धन हल्बा ने बताया कि उनका पहले जो किसान किताब था, वह बहुत पुराना होने के कारण उसे उपयोग में नहीं ला पा रहे थेजिससे बहुत कठिनायों का सामना करना पड़ रहा था। 

नया किसान किताब बनाने के लिए काफी समय से सोंच रहे थे, लेकिन नहीं बनवा पा रहा था। गोवर्धन ने बताया कि सुशासन तिहार की जानकारी गांव में मुनादी द्वारा मिलने पर उन्होने पंचायत में जाकर नया किसान किताब बनाने के लिए आवेदन किया और आज उन्हें समाधान शिविर में निःशुल्क नया किसान किताब मिल गया।

नया किसान किताब के लिए किसी प्रकार की राशि भी नहीं लगा है। गोवर्धन ने कहा कि सुशासन तिहार बहुत मददगार साबित हुआ है। उन्होंने सुशासन तिहार आयोजन करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। किसान गोवर्धन ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर सभी किसानों के लिए बहुत अच्छा है। उनके आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से बहुत सारी योजनाओं की जानकारी मिली है।

पिछले साल के धान खरीदी का टूटा रिकार्ड, धान खरीदी का आंकड़ा 145 लाख मीट्रिक टन से पार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 14 नवम्बर से शुरू हुए धान खरीदी का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। अब तक के धान खरीदी में पिछले साल का रिकार्ड टूट गया है। पिछले वर्ष 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इस वर्ष आज दिनांक तक हुई धान खरीदी का आंकड़ा 145 लाख मीट्रिक टन से पार हो गया है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 25 लाख 13 हजार किसान धान बेच चुके हैं। धान खरीदी के एवज में बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत अभी तक किसानों को 29 हजार 599 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है।

धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मीलिंग के लिए तेजी के साथ धान का उठाव किया जा रहा है। अभी तक 110 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ और टीओ जारी कर दिया गया है। जिसके विरूद्ध 87 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठाव हो चुका है। धान खरीदी  31 जनवरी 2025 तक चलेगी।

प्रदेश के समस्त पंजीकृत कृषकों को खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान विक्रय हेतु टोकन की सुविधा ऑनलाईन एप्प (टोकन तुंहर हांथ) एवं उपार्जन केन्द्रों में 25 जनवरी 2025 तक के लिए उपलब्ध कराया गया है। किसान सुविधा अनुसार तिथि का चयन कर नियमानुसार धान विक्रय कर सकते है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा इस खरीफ वर्ष के लिए 27.78 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.59 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है।

राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य की तहत 24 जनवरी को 30 हजार 762 किसानों से 1.41 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। इसके लिए 58 हजार 997 टोकन जारी किए गए थे।

किसान बोले सरकार खुले दिल से ले रही उनका धान

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बेमेतरा। आज गुरुवार से जिले में खरीफ सीजन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत हो गयी। कलेक्टर सहित जिला नोडल अधिकारियों ने सौंपे गये धान उपार्जन केन्द्रों में पहुंचकर किसानों का फूल मालाओं से स्वागत किया और इलेक्ट्रॉनिक  तोल मशीन (काँटबांटे) की पूजा कर धान खरीदी का शुभारम्भ किया। कलेक्टर रणबीर शर्मा ने खरीदी केंद्र में किसान रामाधर तिवारी का शाल-श्रीफल से स्वागत किया। किसानों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक तोल मशीन पर उनका धान तौल कर शुरुआत की।

जिले की लोलेसरा में कृषक सहकारी समिति में अपनी उपज धान बेचने आये ग्राम चारभाठा के किसान रामाधर तिवारी ने बताया कि वे 108 कट्टा धान बेचने आए है। कलेक्टर के हाथों स्वागत व सम्मान पाकर बहुत खुश और प्रसन्न है। उन्होंने कहा की उनका धान विष्णुदेव सरकार खुले दिल से ले रही है। केंद्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य के ऊपर रुपये प्रति एकड़ धान के अंतर की राशि से खरीदी से अब छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी और सुधार आयेगा। एक और किसान सेवकराम ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि में धान की फसल लगाई थी।जिसका धान समिति द्वारा आसानी से ले लिया गया। बहरहाल आज से शुरू हुई धान खरीदी केंद्रों में इस बार किसानों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय द्वारा धान खरीदी के अपने वायदे को पूरा निभाया इसकी ज्यादा चर्चा है।

वही कृषक हेमन वर्मा ने ग्राम बैजी ने बताया कि अब सरकार की नीतियों से कृषि भी लाभ का व्यवसाय होता जा रहा है। एक और किसान अजय साहू ग्राम गर्रा ने बताया कि अब किसानों की धान खरीदी का कार्य पूर्व से बेहतर तरीके से हो रहा है।खरीदी केंद्र की संख्या बढ़ाने से अब केंद्रों में भीड़भाड़ वाली स्थिति नही है।किसान आसानी से अपनी साल भर की मेहनत की उपज धान बेचकर उसका उचित मूल्य प्राप्त करेगा।

एक कृषक सेवक राम वर्मा ने बताया कि अब सहकारी समिति में धान बेचना अच्छा लग रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान का मूल्य बढ़ाने का अपना वायदा पूरा करते हुए किसानों की सुविधाओं की ओर भी विशेष ध्यान दिया जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। धान बिक्री पर उन्हें समर्थन मूल्य की राशि भी जल्दी मिल जाएगी। इससे उनकी आर्थिक स्थित में सुधार भी पहले से ठीक आ रहा है।

रबी फसल में धान की खेती पर लगाई रोक तो होगा चक्काजाम - संजय चौधरी

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सरायपाली। युवा नेता संजय चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रबी फसल में धान की खेती न करने महासमुंद कलेक्टर के द्वारा मुनादी कराने के आदेश पर विरोध जताया एवं आदेश को निशर्त वापस लेने की मांग की है महासमुंद कलेक्टर द्वारा 28-10-2024 फसल विविधीकरण एवं जल संरक्षण का कारण बताते हुए रबी फसल में धान न लगाने के जिले के सभी अनुविभागीय, अधिकारियों, तहसीलदारों, जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मुनादी कराने के लिए आदेश जारी किया है।

चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार हमेशा से ही किसान विरोधी सरकार रही है किसान गांजा या अफीम की खेती नहीं करते हैं कि उन्हें अब खेती के लिये भी अनुमति लेनी पड़े धान उगाने पर भी सरकार अगर प्रतिबंध लगायेगी तो किसान कहां जायेंगे।

सरकार के फ़ैसले से बिफरे हुये हैं

उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में पहले ही किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. ऐसे में सरकार का यह निर्णय किसानों को मौत के मुंह में धकेलने की तरह है। सरकार औद्योगिक घरानों को तो हज़ार-हज़ार फीट गहरे बोरवेल करके भूजल दे रही है लेकिन किसानों के नाम पर सरकार को पानी की कमी का रोना आने लगता है।

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान की पैदावार सबसे अधिक होती है जमीन में दलहन, तिलहन और गेंहू जैसे अन्य फसल लगाने से फसलों में उत्पादन कम होता है. साथ ही इससे मजदूरों की समस्या और आर्थिक रूप से किसानों पर भार बढ़ेगा।

कोटवार गांवों में रबी फसल में धान की खेती नहीं करने की मुनादी कर रहे हैं और धान की फसल लगाने पर कृषि विभाग के अधिकारी धान की खेती नहीं करने एवं बिजली विभाग के अधिकारी बिजली काटने की धमकी देते घूम रहे हैं. इन सबके बीच सरकार को पानी पी-पीकर कोसते किसान फिलहाल सड़कों पर उतरने की तैयारी में है।

जोंक परियोजना को लेकर शासन प्रशासन काम करें तो पिथौरा बसना सरायपाली जल संकट की समस्या लगभग खत्म जाएगी। जलस्तर को बढ़ाने के लिए सभी बैराज, एनीकट, जलाशयों एवं अन्य अधोसंरचना का सर्वे कराकर मरम्मत योग्य कार्यों को शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की जिससे कि जलस्तर बढ़ सके।

इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कलेक्टर महोदय से निवेदन करते है कि निशर्त वापस लेने की मांग करते हैंकिसानों को रवि फसल में धान की फसल लेने से रोका गया तो उग्र आंदोलन NH 53 पर चक्काजाम किया जाएगा जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।



जैविक खेती से करें मिट्टी का श्रृंगार,फसल चक्रण से उत्पादन होगा भरमार

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रायपुर। जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले धमतरी जिले के ग्राम गाड़ाडीह के किसान रमन लाल साहू का सम्मान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विगत दिनों किया था। साहू जैविक खेती कर मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने में महती भूमिका निभा रहे है,वही फसल चक्रण करके जल संरक्षण का काम भी कर रहे है।

आज के आधुनिक दौर में  खेती किसानी के काम को उतना महत्व नहीं दिया जाता है, जितना की सरकारी या किसी अन्य नौकरी को दिया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने लोगों को खेती किसानी की ओर मुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रगतिशील किसान रमनलाल साहू ने परम्परागत खेती को पीछे छोड़ आधुनिक खेती को अपनाया है। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए मृदा, जल एवं पर्यवरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय काम किया है। साहू बताते हैं कि विगत 8 सालों से वह 3 एकड़ से अधिक जमीन पर धान की जैविक खेती कर रहे हैं। जल संरक्षण की दिशा में रबी फसल में दलहन-तिलहन की  खेती कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरकता बढ़ने के साथ ही फसल का उत्पादन भी बढ़ा है।

साहू बताते है कि किसान होने के साथ-साथ वह पशु मित्र भी है, उन्होंने गली-मोहल्लों में आवारा घूमने वाले गौवंश  के लिए अपने खेत के समीप लगभग 25 डिस्मिल क्षेत्र में गौठान तैयार कर उनका संरक्षण कर रहे है। इन गौवंशो से प्राप्त होने वाले गोबर का उपयोग जैविक खेती करने में कर रहे हैं। वहीं दूध बेचकर हर माह 9 हजार रूपये की शुद्ध आमदनी भी प्राप्त कर रहे हैं। साहू ने यह भी बताया कि उन्होंने खेत में छोटा सा तालाब बनाया है, जिससे गौवंश के लिए पानी की व्यवस्था की है, वहीं क्रेडा की ओर से सोलर पैनल भी लगवाया है। इसके साथ ही गोबर गैस संयंत्र लगाकर गौवंश के लिए चारा की व्यवस्था करते  हैं।

रमनलाल साहू रासायनिक खेती के दुष्परिणामों के बारे में अन्य किसानों को अवगत कराते हुए जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही अपने गौशाला से उत्पादित गोबर, गौ मूत्र को अपने खेतों में उपयोग करते हुए जहरमुक्त अन्न की पैदावार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं।

लघु सिंचाई तालाब निर्माण योजना से ग्राम टिभुपाली और अरण्ड में पहली बार सूखे खेत हुए तर

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महासमुंद। राज्य शासन की लघुत्तम सिंचाई तालाब निर्माण योजना से सूखे खेतों में पहली बार पानी पहुंचा है। जिससे सैकड़ों एकड़ सूखे और दरार पड़े खेतों में हरियाली छायी है। किसान अब यहां धान की फसल लेकर अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहें हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन की झलक सरायपाली अंतर्गत ग्राम टिभुपाली में वर्ष 2023-24 में कृषि विभाग द्वारा खोदे गए लघु तालाब से किसानों की जिंदगी में खुशी झलक रही है। ग्राम टिभुपाली में वर्ष 2023-24 में लघुत्तम सिंचाई तालाब निर्माण योजना अंतर्गत 43.79 लाख रुपए की लागत से तालाब खोदा गया। यहां पहली बरसात में तालाब लबालब हो गया। इससे तालाब के नीचे खेतों में हरियाली बिखर गई। अब यहां के किसान खरीफ में पहली बार धान की फसल ले रहें हैं। तालाब से लगभग 56 किसानों को 39.50 हेक्टेयर क्षेत्र में लाभ होगा।

ग्राम टिभुपाली के किसान विपिल पटेल, रीतु पटेल, शोभित धु्रव, मोनू बरिहा ने बताया कि उनके खेत पहले भर्री किस्म के थे। जिसमें कभी-कभी कुछ फसल लगा दिया करते थे। लेकिन पूरी तरह बरसात के पानी पर और भगवान भरोसे निर्भर रहना पड़ता था। किसान विपिल पटेल जिनकी 6 एकड़ की खेती है ने बताया कि वे पहली बार अपने खेत में धान की फसल लिए है और इस सीजन में भी अच्छी फसल की उम्मीद है। इसी तरह रीतु पटेल के 2 एकड़ खेत, शोभित ध्रुव के 1.50 एकड़ खेत एवं मोनू ध्रवु के 3 एकड़ खेत में धान की फसल लहलहा रही है। ग्राम के सरपंच मोती पटेल ने भी बताया कि इससे फिरहाल 35 एकड़ में सिंचाई हो रही है। 10 किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस सफल योजना के लिए धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।

इसी तरह पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम अरण्ड में इसी वर्ष तालाब खनन का कार्य किया गया है। यहां के किसानों ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग फसल नहीं हो पाती थी और अंतिम सिंचाई के लिए नाले के पानी पर निर्भर रहना पड़ता था। तालाब खनन से करीब 30 एकड़ खेतों में सिंचाई हो रही है। अरण्ड के सरपंच देवराज सिंह ठाकुर ने बताया कि तालाब खनन से दोहरा फायदा हुआ है एक तो आसपास के क्षेत्र में भू जल का स्तर बढ़ा है वहीं दूसरी ओर फसल पकने के पूर्व अंतिम सिंचाई के लिए किसान निश्चिंत है। उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया है।

जनदर्शन : किसान ने कहा, पटवारी से हूं हलाकान, मुख्यमंत्री ने दिए कार्रवाई के निर्देश

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 रायपुर : जनदर्शन में आज नवागढ़ ब्लाक के ग्राम पौंसरी के किसान अशोक रजक आए। उन्होंने कहा कि मेरे गांव के पटवारी के पास एक काम के लिए आवेदन दिया। कई दिनों तक संपर्क के बावजूद काम नहीं हो पा रहा इससे मैं हलाकान हो गया हूं।


मुख्यमंत्री ने मौके पर ही बेमेतरा कलेक्टर को किसान के आवेदन की प्रगति के संबंध में जांच कर राहत देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह भी देखें कि मामले में विलंब क्यों हुआ, यदि लापरवाही हुई है तो संबंधित पटवारी पर कार्रवाई की जाए।

उल्लेखनीय है कि जनदर्शन में जो भी राजस्व संबंधी प्रकरण आ रहे हैं। उनके निराकरण के लिए मौके पर ही संबंधित कलेक्टर को आवेदन फॉरवर्ड किया जा रहा है ताकि आवेदनों पर अविलंब कार्रवाई की जा सके।

विशेष लेख : विष्णु सरकार की सुध से खेती-किसानी को नया सम्बल

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रायपुर। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और यह धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अल्पावधि में राज्य के किसानों के हित में कई फैसले लिए हैं, इससे राज्य में खेती-किसानी को नया सम्बल मिला है। किसान बेहद खुश है। उनके मन में एक नई उम्मीद जगी है।

छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी तथा दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड़ रूपए का भुगतान करके एक ओर जहां अपना संकल्प पूरा किया है, वहीं दूसरी ओर किसानों से बीते खरीफ विपणन वर्ष में 144.92 लाख मेट्रिक टन धान की रिकार्ड खरीदी की है। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 31,914 करोड़ रूपए का भुगतान एवं किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मूल्य की अंतर की राशि 13,320 करोड़ का भुगतान करके यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। 

किसानों का मानना है कि राज्य सरकार के अब तक के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि यह सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए छत्तीेसगढ़ सरकार ने इस साल कृषि के बजट में 33 प्रतिशत की वृद्धि की है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने संकल्प के मुताबिक समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान में प्रति क्विंटल 917 रूपए के मान से अंतर की राशि भी दे दी है। किसानों को प्रति क्विंटल के मान से 3100 रूपए के भुगतान की यह राशि देश में सर्वाधिक है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस साल के बजट में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई अभिनव पहल की जा रही है। जशपुर जिले के कुनकुरी में कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र तथा बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर में पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट एवं प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी महाविद्यालय, सूरजपुर जिले के सिलफिली एवं रायगढ़ में शासकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, तथा मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खडगंवा में कृषि महाविद्यालय खोलने की व्यवस्था बजट में की है। 

कृषि में आधुनिक उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय की स्थापना एवं राज्य स्तरीय नवीन कृषि यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला के भवन का निर्माण, दुर्ग एवं सरगुजा जिले में कृषि यंत्री कार्यालय तथा रासायनिक उर्वरकों की जांच के लिए सरगुजा जिले में गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी।

राज्य के किसानों को सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए 8 हजार 500 करोड़ का लक्ष्य तथा भूमिहीन कृषि मजदूरों की सहायता हेतु दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत भूमिहीन परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये की आर्थिक सहायता देने के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, सौर सुजला योेजना के माध्यम से सिंचित रकबे में बढ़ोत्तरी का प्रयास किया जा रहा है। नवीन सिंचाई योजना के लिए 300 करोड़ रूपए, लघु सिंचाई की चालू परियोजनाओं के लिए 692 करोड़ रूपए, नाबार्ड पोषित सिंचाई परियोजनाओं के लिए 433 करोड़ रूपए एवं एनीकट तथा स्टाप डेम निर्माण के लिए 262 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान छत्तीसगढ़ सरकार ने किया है।

छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है। चालू वित्तीय वर्ष कृषि बजट 33 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 13 हजार 435 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। किसानों को सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए 8500 करोड़ रूपए की साख सीमा छत्तीसगढ़़ सरकार ने तय की है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्तमान खरीफ सीजन को देखते हुए राज्यभर की सहकारी समितियों में सोसायटियो में गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज भंडारण एवं उठाव की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को खाद-बीज के लिए किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसलिए पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने खेती-किसानी के दीर्घ अनुभव के आधार पर कहा है कि खरीफ सीजन में किसान भाईयों द्वारा डी.ए.पी. खाद की मांग ज्यादा की जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए डी.ए.पी. खाद की मांग और सप्लाई पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। खाद-बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सेंम्पलिंग एवं प्रयोगशाला के माध्यम से जांच का विशेष अभियान संचालित किया जाए।

खरीफ सीजन 2024-25 के लिए राज्य में 13.68 लाख मैट्रिक टन उर्वरकों की मांग के विरूद्ध अब तक 9.13 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गयी है, जो मांग का 67 प्रतिशत है। सोसायटियों में विभिन्न खरीफ फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। खरीफ सीजन 2024-25 में 5 लाख 59 हजार 203 क्ंिवटल बीज की मांग के विरूद्ध 6 लाख 39 हजार 4 क्विंटल  बीज उपलब्ध है, जो कि मांग का 114 प्रतिशत है। सोसायटियों से किसान लगातार बीज का उठाव कर रहे है। अब तक 03 लाख 75 हजार क्विंटल बीज का उठाव किसानों ने किया है, जो कि बीज की डिमांड का 67 प्रतिशत है।

खेती-बाड़ी के लिए किसानों को सही समय पर मिली बोनस की राशि

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रायपुर। दूरस्थ अंचल के किसान दंतेवाड़ा जिले के गीदम निवासी पूरनचंद सोनी दो साल का बकाया बोनस राशि 64 हजार 480 रूपए खाते में आने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि बोनस की राशि का उपयोग कृषि कार्य में करेंगे। अच्छी खेती-बाड़ी करने के लिए भूमि की मरम्मत भी कराने की बात कही।

गांव चितालंका निवासी राजेन्द्र सेठिया ने बताया कि 27 क्विंटल का धान बेचने पर उन्हें दो साल की बोनस राशि 64 हजार 640 रूपए मिली है। पैसे का उपयोग बच्चे की अच्छी पढ़ाई-लिखाई और उनकी स्कूल फीस भरने के लिए करेंगे। गांव कवलनार की महिला कृषक श्रीमती गीता और ग्राम भोगाम के किसान नतरूराम ने भी बोनस राशि मिलने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 के धान का दो साल का बकाया बोनस राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई है। राशि मिलने पर किसानों के चेहरे पर प्रसन्नता के साथ चिंता की लकीर भी मिट गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर बोनस राशि किसानों के खातों में दिया गया है। किसानों ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सही समय पर बोनस राशि देकर खेती-बाड़ी की चिंता दूर कर दी है।



किसानों के हित में लिया बड़ा फैसला 4 फरवरी तक होगी समर्थन मूल्य और लिंकिंग पर धान खरीदी

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रायपुर। राज्य के किसानों के हित में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए समर्थन मूल्य पर नगद और लिंकिंग के आधार पर धान खरीदी अब 4 फरवरी रविवार तक की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य में रिकार्ड धान खरीदी के बावजूद किसानों को धान बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो इसको ध्यान में रखते हुए यह संवेदनशील निर्णय लिया है।


ज्ञातव्य है कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान बेचने से शेष रह गये किसान भी आसानी से अपना धान सोसायटी के धान उपार्जन केन्द्रों में बेच सकें, इसको ध्यान में रखते हुए समर्थन मूल्य पर नगद और लिंकिंग के आधार पर धान खरीदी 4 फरवरी तक किए जाने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में शनिवार 03 फरवरी एवं रविवार 04 फरवरी को भी उपार्जन केन्द्रों में धान की खरीदी सामान्य दिनों की तरह करने को कहा है। 

यहां यह उल्लेखनीय है ऐसा पहली बार होगा कि 03 फरवरी शनिवार और 04 फरवरी रविवार को भी किसान उपार्जन केन्द्रों में अपना धान बेच सकेंगे। राज्य के किसान प्रतिनिधियों एवं किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि किसानों के हित में मुख्यमंत्री साय का यह संवेदनशील निर्णय से किसान उत्साहित हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राज्य में 31 जनवरी तक 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। धान खरीदी के एवज में उन्हें 29 हजार 318 करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर धान खरीदी एवं बोनस वितरण के संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों की ली बैठक

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां राजधानी रायपुर स्थित चिप्स कार्यालय में अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक ली। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की गारंटी के परिपालन में राज्य के किसान भाईयों के बकाया धान बोनस की राशि के भुगतान की तैयारियों के संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों और जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने के लिए आयोजित हुई।

मुख्य सचिव ने राज्य में समर्थन मूल्य पर जारी धान खरीदी के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने आगामी 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सुशासन दिवस की तैयारियां और घोषणा पत्र के परिपालन में दो वर्ष के बकाया धान बोनस राशि वितरण के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को इस संबंध में आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को विशेष अभियान चलाकर लाभान्वित करने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू सहित सभी विभागीय सचिव व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने सक्ति जिले के डभरा में विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को किया सामग्री वितरण, किसानों को बांटे कृषि यंत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सक्ती जिले के डभरा तहसील में आज विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को राशि एवं सामग्रियों का वितरण किया। डभरा तहसील के ग्राम पंचायत नवापारा, बिनौधा, भजपुर, भेड़ीकोना, रामभाठा, साराडीह, फरसवानी एवं सकराली के 25 ग्रामीणों को ग्रामीण आवास न्याय योजना के तहत आवास निर्माण संबंधी मंजूरी दी गयी। छत्तीसगढ़ अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 6 हितग्राहियों को 17 लाख 50 हजार रूपये की राशि स्वीकृत की गई है।

कार्यक्रम में 10 किसान हितग्राहियों को बैटरी स्प्रेयर, 5 हितग्राहियों को स्प्रिंकलर, 5 हितग्राहियों को मसूर मिनीकीट एवं 2 हितग्राही को सिंचाई पंप का वितरण किया गया। साराडीह बैराज के डूबान में आने वाले नवापारा ड के ग्रामीणों देवनारायण एवं 150 अन्य लोगों को 2 करोड़ 57 लाख रुपए का  एवं उपनी गांव के देखाऊ एवं 21 अन्य लोगों को 18 लाख 18 हजार रुपए का मुआवजा वितरण किया गया।

जनपद पंचायत डभरा अंतर्गत हितग्राहियों को बीपीएल कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र एवं विवाह प्रमाण पत्र  वितरित किये गये। इसी प्रकार 4 हितग्राहियों को मत्स्य जाल का भी वितरण किया गया। मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम में एनडीए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे 10 बच्चों को किया पुस्तकों का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा 50 बच्चों को वर्ष 2023-44 की एनडीए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग दी जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तीजा-पोरा तिहार पर संबोधन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हर साल की तरह पोरा तिहार के अवसर पर हम अपनी बहनों को अपने निवास में आमंत्रित करते हैं। आप सभी बड़े उत्साह के साथ आए, आप सभी को तीजा पोरा तिहार की बहुत शुभकामनाएं।

प्रदेश में जो भी अतिथि आते हैं, महिलाओं को लेकर उनकी धारणाएं बदली है, छत्तीसगढ़ की महिलाएं जागरूक है और वह सक्रियता के साथ सभी गतिविधियों में भाग लेती हैं। इसलिए जब आप प्रदेश की सारी योजनाएं देखेंगे तो पाएंगे कि इन्हें महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसान न्याय योजना, श्रमिक हितैषी योजना, गोधन न्याय योजना जैसी योजनाएं से लगभग 1 लाख 75 हज़ार करोड़ सीधे प्रदेशवासियों के खाते में भेजी गई है।

उन्होंने कहा कि तीजा के अवसर पर ऐसा मानते है कि जब महिलाएं मायके जाती है तब बारिश होती है। आप देख रहे हैं कि पिछले दो-तीन दिन से अच्छी बारिश हो रही है।  पिछले 5 सालों में हमारे प्रदेशवासियों और आप बहनों के अकाल-दुकाल नहीं पड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। हमने प्रदेश में महिलाओं का मान बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहली बार शासकीय अंग्रेजी स्कूल खोला है, जहां गरीब परिवार के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने का मौका मिला है। हमारा लगातार प्रयास है कि हम सब लोगों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाएं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं घर ही नहीं संभाल रही है बल्कि मोर्चा भी संभाल रही हैं। महिलाएं सर्च ऑपरेशन में जाती है। ऐसा ट्रूप बना है जो इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है।

मालीडीह के फूलों से महक रहे हैं मुम्बई, बेंगलुरु और नागपुर

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महासमुंद। जेहन में किसी फूल का ख्याल आते ही उसकी महक से मन भर जाता है। लेकिन उसकी महक से यदि धन भी मिलने लगे तो समझिए जिंदगी ही महकने लग जाती है। महासमुंद अंतर्गत ग्राम मालीडीह एक छोटा सा गांव है। यहां के किसान अरूण चंद्रकार वैसे तो एक परम्परागत किसान है, लेकिन कुछ साल पहले प्रायोगिक तौर पर कुछ अलग करने की सोची और फूलों की खेती की तरफ हाथ अजमाया। उद्यान विभाग के अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर गुलाब की खेती करना प्रारम्भ किया। शुरुआत में 400×400 वर्ग मीटर क्षेत्र में गुलाब के पौधे लगाए।

 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवा किसान अमर चंद्राकर कर रहे हैं फूलों की व्यावसायिक खेती

इसके लिए उद्यानिकी विभाग से पॉली हाऊस योजना का लाभ भी लिया। उनके पुत्र अमर चंद्राकर ने भी पिताजी के कार्य को आगे बढ़ाते हुए आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण लेकर इस खेती को व्यावसायिक रूप देकर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत पैक हाऊस निर्माण का लाभ भी लिया। साथ ही समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन लेते रहे। फूलों में आमदनी को देखते हुए युवा किसान अमर चंद्राकर ने एक-एक एकड़ क्षेत्र के दो स्थानों पर झरबेरा फूल की खेती 2020-21 में प्रारम्भ किया। आज झरबेरा की खेती से वे प्रति माह लगभग एक लाख रुपए की बचत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 6 एकड़ क्षेत्र में फूलों की खेती की योजना है। 

 
महासमुंद के मालीडीह में हो रही है गुलाब, झरबेरा व सेवंती की खेती

आज 35 मजदूर उनके पॉली हाऊस में काम कर रहें हैं। जो प्रतिदिन कटाई-छटाई और दवाई देने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके फूल प्रति नग कम से कम ढाई रुपए से लेकर 17 रुपए तक की दर से रायपुर, मुम्बई, नागपुर, कोलकाता, बेंगलुरु आदि महानगरों में विक्रय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी एक क्षेत्र में सेवंती फूल लगाया गया है, जिसका नवम्बर माह से उत्पादन शुरू हो जाएगा। अमर चंद्राकर वैसे तो बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग है, लेकिन नौकरी का मोह त्याग कर मुनाफे की इस खेती को ही नौकरी मानकर कार्य कर रहे है। साथ में सामाजिक कार्यां में भी हाथ बटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में रहकर ही गांव की सेवा कर एवं फूलों की खेती से मैं संतुष्ट हूं। उन्होंने राज्य शासन को इस अवसर के लिए धन्यवाद भी दिया है।

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