Media24Media.com: कमार जनजाति

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कमार बस्ती के दिन अब बहुरने लगे, विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय जुड़ रहे विकास की मुख्य धारा से

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 महासमुंद : सदियों से घने जंगल और बस्ती से दूर रहने वाले कमार जनजाति समुदाय के दिन अब बहुरने वाले हैं । आदिकाल से कमार जनजाति जंगली कंदमूल, वनों पर आश्रित होकर, जंगलों के बीच ही अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं थे। उन्हें विकास की किसी तरह की उम्मीद नहीं थी लेकिन अब उनके दिन फिरने वाले हैं ।अब वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री जन मन योजना अंतर्गत हर कमार और विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों में उनकी मूलभूत सुविधाओं के लिए विशेष पहल की गई है ।जिसमें आवास, स्वच्छ पेयजल, बसाहटो तक जाने के लिए पक्की सड़कें, विद्युत, शौचालय, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।


जिले के महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम झालखमरिया एक ऐसे ही गांव है जहां कमार समुदाय सैकड़ो वर्ष तक मुख्य बस्ती से अलग रहते हुए एक विशेष टोला में निवास कर रही है ।यहां 16 कमार परिवार रहते हैं जिनमें 55 सदस्य हैं। जबकि गांव की कुल जनसंख्या 2152 है। इन परिवारों के पास कुछ वर्ष पहले तक ना तो उनके पास पक्का आवास था और न शुद्ध पेयजल की उपलब्धता थी। खद्दर और घास फूस से बने झोपड़ी में रहकर अपनी जिंदगी बसर करने वाले राम सिंह कमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कारण आज यह पक्का छत नसीब हुआ है, नहीं तो यह केवल हमारा सपना ही था। आज हम एक पक्के और सुंदर घर में खुशहाली पूर्वक जीवन बिता रहे हैं।राम सिंह के अलावा यहां की मनीषा बाई कमार, फुलेश्वरी कमार बताती है कि एक समय हम झरिया का पानी पीने के लिए मजबूर थे। पास में ही तालाब है जहां हम गढ्ढा खोदकर पानी रिसने का इंतजार करते थे,सुबह और शाम बूंद बूंद पानी के लिए तरसते थे। आज हमारे घर में नल है हमें शुद्ध पानी पीने को मिल रहा है। वही लक्ष्मी कमार बताती है कि हम लोग सुबह से उठकर जंगल जाते थे लकड़ी लाने के लिए और वहीं से कुछ तेंदू ,चार व कंदमूल लाकर बमुश्किल से अपना जीवन यापन करते थे। लेकिन आज हम सभी परिवारों के पास उज्जवला गैस अंतर्गत गैस मिला हुआ है ।अब हम लकड़ी पर आश्रित ना होकर गैस में खाना बना रहे हैं। समूह से जुड़कर अब काम भी करने लगे हैं।मनरेगा से काम भी मिलता है।

आज कमार बस्ती अपने सांस्कृतिक परंपरा और विरासत को सहेजते हुए भी विकास की ओर अग्रसर हैं ।अब उनके बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि हम लोग बांस से बने सूपा और टोकरी बना कर और उसे बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे।अब महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अंतर्गत अब हमे गांव में ही रोजगार भी मिला है।


ऐसे ही गांव के प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही हीरालाल कमार, मुन्नीबाई, सोनवती ने बताया कि अब हमें जंगली जानवरों से डर नहीं लगता क्योंकि पहले कच्ची दीवार होने के कारण हमेशा डर बना रहता था लेकिन अब प्रधानमंत्री आवास योजना से यह डर खत्म हो गया है। अब बिना डर और भय के हम अपना जीवन जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में सभी के पास राशन कार्ड ,आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड बन गया है। जन्म प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र भी बनाया जा रहा है ।

ज्ञातव्य है कि महासमुंद जिले में महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा विकासखंड में 894 परिवार के 3240 विशेष पिछड़ी जनजाति कमार निवासरत है।

इन सभी गांव के पारो और टोलों में शिविर लगाकर योजना की पहुंच और लाभ सुनिश्चित की गई है। योजना से कमार बस्ती को अब पक्की सड़क से जोड़ने की योजना भी है। कलेक्टर से श्री प्रभात मलिक ने जिन बसाहट में 100 से अधिक सदस्य हैं उन बसाहट को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए प्रस्ताव मंगाए हैं। इसी तरह केंद्र और राज्य सरकार की अन्य जनकल्याण कारी योजनाओं के क्रियान्वयन से भी इन बस्तियों की तस्वीर बदलने लगी है ।गौरतलब है कि विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों के समन्वय से पेयजल, आवास, सड़क, मोबाईल मेडिकल यूनिट, छात्रावास निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण, वनधन केंद्र की स्थापना, आधर कार्ड,आयुष्मान कार्ड , पक्का आवास, नल जल योजना,इंटरनेट एवं मोबाईल सर्विस की उपलब्धता तथा आजीविका संवर्धन हेतु कौशल विकास सहित महत्वपूर्ण गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

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