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Odisha Train Accident: : एक महीने बाद भी 52 शवों की अभी तक नहीं हुई शिनाख्त

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Odisha Train Accident: ओडिशा के बालासोर में एक महीने पहले हुई ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना का दर्द लोग अभी तक नहीं भुला पाए हैं। पिछले तीन दशकों में भारत की सबसे भीषण ट्रेन दुर्घटना में कम से कम 293 लोग मारे गए, और 1000 से अधिक घायल हो गए थे। मगर आज भी कुछ लोग अपनों की तलाश में जुटे हैं। ट्रेन दुर्घटना होने के बाद यात्रियों के परिवार वालों ने अपनों की तलाश शुरू कर दी थी। 210 से अधिक लोग अपने परिवार के सदस्यों के शवों की पहचान कर पाए। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को घायल अवस्था में अस्पतालों में पाया, वे भाग्यशाली थे।


मगर, घटना के एक महीना बीत जाने के बावजूद कई परिवार अभी भी अपने परिजनों का इंतजार कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के अशोक रबीदास उनमें से एक हैं। वह अधिकारियों द्वारा अपने छोटे भाई कृष्णा रबीदास (22) के शव को ले जाने की अनुमति दिए जाने का इंतजार कर रहे हैं। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने के बाद अशोक रबिदास एम्स भुवनेश्वर पहुंचे जहां अज्ञात व्यक्तियों के शवों को संरक्षित किया गया है।

उनके भाई कृष्णा के शव की पहचान करने के लिए एम्स प्राधिकरण ने संबंधित शव के डीएनए के नमूने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को भेजे हैं। इस बीच एम्स भुवनेश्वर को अन्‍य दावेदारों से मेल खाने वाले 29 शवों की डीएनए रिपोर्ट मिल गई है। हालांकि,पी‍डि़त अशोक ने कहा कि कृष्णा की डीएनए रिपोर्ट नहीं आई है।

पश्चिम बंगाल के मालदा के हरिश्चंद्रपुर ट्रिपलतला गांव के मूल निवासी अशोक यहां रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए गए एक गेस्ट हाउस में रह रहे थे। चूंकि इंतजार खत्म नहीं हुआ है और उन्हें अपने काम पर लौटना है, इसलिए अशोक चार दिन पहले अपने गांव के लिए रवाना हो गए। अब उनके भाई सिबचरण रबीदास कृष्णा के शव के लिए भुवनेश्वर में इंतजार कर रहे हैं।

अपनी कहानी साझा करते हुए अशोक ने कहा कि कृष्णा जुलाई 2022 से बेंगलुरु में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता था। दो जून को वह अपनी छोटी बहन की शादी के लिए यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस से घर लौट रहा था। उन्‍होंने कहा कि मेरी बहन की शादी 12 जून को होने वाली थी। अब इसे रद्द कर दिया गया है। अपनी बहन की शादी के बाद, हमने कृष्णा की शादी करने की योजना बनाई थी। अशोक ने कहा, लेकिन हादसे ने सब कुछ खराब कर दिया।उन्‍होंने कहा कि घटना के बाद मेरे पिता और मां पूरी तरह से टूट गए हैं। चिंता की बात यह है कि हमें अभी तक हमारे भाई का शव नहीं मिला है, जिसके कारण हमारे घर में कुछ भी सामान्य नहीं है।

Odisha Train Tragedy: जिस स्कूल को बनाया 'मुर्दाघर', वहां जाने से डर रहे छात्र, इमारत को गिराने की मांग

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 Odisha Train Tragedy: ओडिशा के बालासोर में दो जून को हुए रेल हादसे में 288 यात्रियों की मौत हुई थी। इस दुर्घटना के तुरंत बाद, 65 साल पुराने इस स्कूल भवन में कफन में लिपटे शवों को रखा गया था।छात्र अब इस स्कूल में आने से कतरा रहे हैं और स्कूल प्रबंधन समिति ने राज्य सरकार से इमारत को गिराने की गुहार लगाई है क्योंकि यह बहुत पुरानी है। बहनागा उच्च विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रमिला स्वैन ने स्वीकार किया, 'छात्र डरे हुए हैं।' उन्होंने कहा कि स्कूल ने 'धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने और कुछ अनुष्ठान करने की योजना बनाई है।


उन्होंने कहा कि स्कूल के कुछ वरिष्ठ छात्र और एनसीसी कैडेट भी बचाव कार्य में शामिल हुए थे।स्कूल और जन शिक्षा विभाग के निर्देश पर बृहस्पतिवार को स्कूल का दौरा करने वाले बालासोर के जिलाधिकारी दत्तात्रय भाऊसाहेब शिंदे ने कहा, 'मैंने स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों, प्रधानाध्यापिका, अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की है। वे पुरानी इमारत को तोड़कर उसका जीर्णोद्धार करना चाहते हैं ताकि बच्चों को कक्षाओं में जाने में कोई डर या आशंका न हो।'

'शवों को टेलीविजन चैनलों पर देखने के बाद, 'बच्चे प्रभावित हुए हैं'

एसएमसी के एक सदस्य ने जिलाधिकारी को बताया कि स्कूल की इमारत में पड़े शवों को टेलीविजन चैनलों पर देखने के बाद, 'बच्चे प्रभावित हुए हैं और 16 जून को फिर से स्कूल खुलने पर वे आने से कतरा रहे हैं।' हालांकि शवों को भुवनेश्वर ले जाया गया है और स्कूल परिसर को साफ कर दिया गया है लेकिन छात्र और अभिभावक डरे हुए हैं।एक छात्र ने कहा, 'यह भूलना मुश्किल है कि हमारे स्कूल की इमारत में इतने सारे शव रखे गए थे।'

शवों को रखने के लिए स्कूल के हॉल का इस्तेमाल किया था

एसएमसी ने शुरू में शव रखने के लिए केवल तीन कक्षाओं की अनुमति दी थी। बाद में जिला प्रशासन ने पहचान के लिए शवों को रखने के लिए स्कूल के हॉल का इस्तेमाल किया था।एक अभिभावक सुजीत साहू ने कहा, 'हमारे बच्चे स्कूल जाने से इनकार कर रहे हैं और उनकी माताएं उन्हें अब शिक्षण संस्थान भेजने की इच्छुक नहीं हैं।' कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बहनागा विद्यालय में भेजने के बजाय शिक्षण संस्थान बदलने की भी सोच रहे हैं।

इमारत गिराने संबंधी मांग

इस बीच बालासोर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बिष्णु चरण सुतार ने छात्रों और अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए बुधवार को एसएमसी और पूर्व छात्र सदस्यों के साथ बैठक की ताकि वे किसी भी नकारात्मक विचारों को बढ़ावा न दें।उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी छात्र इस वजह से स्कूल नहीं छोड़े।' डीईओ ने कहा कि स्कूल और स्थानीय लोगों ने रेल दुर्घटना के दौरान बचाव और राहत अभियान में बहुत योगदान दिया है। जिलाधिकारी ने कहा कि उन्होंने एसएमसी से इमारत गिराने संबंधी उनकी मांग के बारे में एक प्रस्ताव पारित करने और इसे सरकार को सौंपने को कहा है।

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