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मुख्यमंत्री साय ने जापान पहुंचने के बाद सबसे पहले टोक्यो स्थित ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर में की पूजा-अर्चना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जापान पहुंचने के बाद सबसे पहले जापान की राजधानी टोक्यो में स्थित ऐतिहासिक असाकुसा मंदिर के दर्शन किए। टोक्यो का यह सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर शांति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता. की खुशहाली, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। उन्होंने कहा कि यह मंदिर मानवता को शांति और शक्ति का संदेश देता है और यही भाव छत्तीसगढ़ की जनता की आकांक्षाओं में भी झलकता है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO), भारत सरकार के आमंत्रण पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जापान और दक्षिण कोरिया के दौरे पर है। इस ग्लोबल आउटरीच मिशन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों को तलाशना है।


हर-हर महादेव से गूंज उठा भोरमदेव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर हजारों कांवड़ियों का किया भव्य स्वागत

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रायपुर। सावन मास के तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ के प्राचीन, धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के तीर्थ स्थल बाबा भोरमदेव मंदिर में भक्ति और श्रद्धा की गूंज उस समय चरम पर पहुँच गई जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हजारों कांवड़ियों और शिवभक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत और अभिनंदन किया। इस शुभ अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्रीद्वय विजय शर्मा और अरुण साव उपस्थित थे।

यह लगातार दूसरा वर्ष है जब मुख्यमंत्री स्वयं श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पुष्पवर्षा कर रहे हैं। पुष्पवर्षा के पश्चात् मुख्यमंत्री साय ने बाबा भोरमदेव मंदिर पहुंचकर मंत्रोच्चारण, विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया तथा प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में उपस्थित कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका हालचाल जाना और पूरे आत्मीय भाव से अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सावन मास के तीसरे सोमवार को बाबा भोरमदेव की पावन धरती पर शिवभक्तों के साथ जुड़ना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है। हजारों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन हेतु यहां पहुंचे हैं—यह हमारी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अमरकंटक से 151 किलोमीटर पदयात्रा कर भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाली पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा को भगवा वस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत भोरमदेव कॉरिडोर विकास के लिए 146 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना न केवल मंदिर परिसर का कायाकल्प करेगी, बल्कि मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा से लेकर सरोदा जलाशय तक एक समग्र धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से अमरकंटक जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मध्यप्रदेश के अनूपपुर में 5 एकड़ भूमि आबंटन की प्रक्रिया जारी है, जहाँ एक भव्य श्रद्धालु भवन का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं को सावन मास की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा इस पुण्य अवसर की महत्ता को और भी अभूतपूर्व बना गई है।

पौराणिक परंपरा का गौरव: भक्ति से सराबोर हुआ बाबा भोरमदेव परिसर

सावन मास में भगवान शिव—देवों के देव—के जलाभिषेक की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर ग्राम चौरा में स्थित 11वीं शताब्दी का यह भोरमदेव मंदिर ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। श्रावण मास में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, मुंगेली, बेमेतरा, खैरागढ़, राजनांदगांव सहित मध्यप्रदेश के अमरकंटक से हजारों श्रद्धालु पदयात्रा कर बाबा भोरमदेव, बूढ़ा महादेव और डोंगरिया के प्राचीन जलेश्वर शिवलिंग में जलाभिषेक करने आते हैं। श्रद्धालु माँ नर्मदा से जल भरकर नंगे पाँव और भगवा वस्त्रों में 150 किलोमीटर से अधिक की दुर्गम यात्रा कर “बोल बम” के जयघोष और भजनों के साथ भोरमदेव, जलेश्वर महादेव और पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर पहुँचते हैं।


छत्तीसगढ़ में जनविश्वास विधेयक पारित: अब आपराधिक मुकदमा नहीं, लगेगा जुर्माना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जनविश्वास विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ। यह विधेयक राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस ऐतिहासिक विधेयक का उद्देश्य अंग्रेजों के समय से चले आ रहे कई ऐसे कानूनों को संशोधित करना है, जो नागरिकों और कारोबारियों द्वारा की गई छोटी-मोटी त्रुटियों को भी आपराधिक कृत्य की श्रेणी मेें शामिल थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस विधेयक को विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंश्रीने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए भारतीय न्याय संहिता की तर्ज पर, छत्तीसगढ़ अब मध्य प्रदेश के बाद दूसरा राज्य बन गया है, जिसने जनविश्वास विधेयक पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में रोजगार व्यवसाय को आसान बनाने के साथ-साथ गैर अपराधिक श्रेणी के मामलों में व्यापारियों एवं आम नागरिकों न्यायालयीन मुकदमे से संरक्षित करना और एक सुगम व्यावसायिक एवं जिम्मेदारी पूर्ण वातावरण तैयार करना है। यह विधेयक दंड देने के बजाय व्यवसाय को दिशा देने और ऐसी नीति बनाने में सहायक है, जो व्यावहारिक और संवेदनशील हों।

इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह आम नागरिकों और कारोबारियों द्वारा किए गए छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से हटाकर जुर्माने (शास्ति) के दायरे में लाता है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी और अदालतों पर बोझ कम होगा, साथ ही नागरिकों को छोटी गलतियों के लिए आपराधिक मामलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस विधेयक में छत्तीसगढ़ राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम, और छत्तीसगढ़ सहकारिता सोसायटी अधिनियम से संबंधित 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

विधेयक का लक्ष्य उद्यमियों को नियामकीय सूचनाओं से संबंधित देरी के लिए आपराधिक मुकदमे के डर से मुक्ति दिलाना है। अब ऐसे मामलों में केवल प्रशासकीय जुर्माना लगेगा, जिससे व्यापार व्यवसाय में आसानी होगी। विधेयक में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 के प्रावधान में भी संशोधन किया गया है। सार्वजनिक स्थल पर शराब के उपभोग के मामले में पहली बार सिर्फ जुर्माना और इसकी पुनरावृत्ति के मामले में जुर्माना और कारावास का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह नगरीय प्रशासन विभाग के अधिनियम के तहत मकान मालिक द्वारा किराया वृद्धि की सूचना नहीं दिए जाने के मामले में आपराधिक मामला दर्ज किए जाने के प्रावधान को संशोधित कर अब अधिकतम 1,000 रुपये की शास्ति का प्रावधान किया गया है। इसी तरह किसी सोसायटी द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन दाखिल करने के मामले में विलंब की स्थिति में आपराधिक कार्रवाई के प्रावधान को संशोधित कर नाममात्र के आर्थिक दंड में बदल दिया गया है। विशेषकर महिला समूहों के मामलों में इसे और भी न्यूनतम रखा गया है। यदि कोई संस्था गलती से सहकारी शब्द का उपयोग कर लेती थी, तो उसे आपराधिक मुकदमे और दंड के प्रावधान के स्थान पर अब केवल प्रशासनिक आर्थिक दंड का प्रावधान है


भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के विश्रामपुर नगर में आज आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान श्रीजगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। इस ऐतिहासिक पर्व पर राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वयं रथ की रस्सी खींचकर पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं के बीच शामिल होकर पर्व की गरिमा को बढ़ाया।

रथ यात्रा की शुरुआत विश्रामपुर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर परिसर से हुई, जहां मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन के साथ रथ को रवाना किया गया। श्रीमती राजवाड़े ने भगवान श्रीजगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को नमन करते हुए नगरवासियों के साथ रथ खींचा और धार्मिक उत्सव का हिस्सा बनीं।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह पर्व समर्पण, सेवा और सामाजिक एकता का संदेश देता है। मैं कामना करती हूं कि भगवान जगन्नाथ समस्त प्रदेशवासियों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करें।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया सूर्योदय: अब कोई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक नया आयाम स्थापित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी नीति के चलते आज प्रदेश का प्राथमिक से लेकर हायर सेकण्डरी तक कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं रह गया है। राज्य की एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आई है।

यह परिवर्तन युक्तियुक्तकरण के माध्यम से संभव हो सका है, जिसका उद्देश्य राज्य के शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग, शिक्षकों की तर्कसंगत पदस्थापना और शिक्षा के अधिकार अधिनियम व नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप शालाओं में आवश्यकता के अनुरुप शिक्षकों की पदस्थापना रहा है।

गौरतलब है कि युक्ति -युक्त करण से पर्व प्रदेश में 453 विद्यालय शिक्षक विहीन  और 5936 विद्यालयों में मात्र एक ही शिक्षक पदस्थ था। विशेषकर सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिलों में यह समस्या अधिक थी।

इस विसंगति को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जिला, संभाग और राज्य स्तर पर तीन चरणों में शिक्षकों की  काउंसलिंग की प्रक्रिया चलाई। इसके परिणामस्वरूप, आज प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है और सभी हाई स्कूलों में न्यूनतम आवश्यक शिक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युक्ति- युक्तकरण के जरिये स्कूलों में शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास की सराहना करते हुए  कहा कि हमने यह ठान लिया था कि छत्तीसगढ़ में अब कोई बच्चा शिक्षक के बिना नहीं पढ़ेगा। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से हम न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन कर रहे हैं, बल्कि एक मजबूत और समान शिक्षा प्रणाली की नींव भी रख रहे हैं। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, यह शिक्षा में न्याय की पुनर्स्थापना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि एकल शिक्षकीय शालाओं की स्थिति में सुधार सरकार की प्राथमिकताओं में है और आगामी महीनों में पदोन्नति और नई नियुक्तियों के माध्यम से इन विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षक भेजे जाएंगे।

राज्य सरकार अब उन 1207 प्राथमिक विद्यालयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां अभी भी एक शिक्षक है। इसके समाधान हेतु प्राथमिक शाला प्रधान पाठकों की पदोन्नति, शिक्षकों की पदस्थापना तथा भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है।

राज्य में एकल शिक्षक वाले प्राथमिक विद्यालयों में बस्तर जिले में  283, बीजापुर 250,सुकमा 186,मोहला -मानपुर - चौकी 124,कोरबा 89, बलरामपुर 94,नारायणपुर 64,धमतरी 37,सूरजपुर 47,दंतेवाड़ा 11,अन्य जिले में मात्र 22 शालाएं है। इन शालाओं में जल्द ही आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास शिक्षा को समावेशी बनाने और हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर उपलब्ध कराना है। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित किया है कि युक्तियुक्तकरण केवल प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक न्याय आधारित शिक्षा सुधार है, जिसके केंद्र में हर बच्चा, हर गांव, हर स्कूल है।

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने यूनिसेफ, डबल्यूएचओ,एम्स सहित 05 संस्थाओं के साथ ऐतिहासिक एमओयू

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रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन  में स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में  ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 05 प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन  पर हस्ताक्षर किया है।  नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के साथ साझा दायित्वों और लक्ष्यों पर सहमति बनी। कार्यक्रम के दौरान सचिव, लोक स्वास्थ्य अमित कटारिया, आयुक्त सह संचालक डॉ प्रियंका शुक्ला, संचालक महामारी नियंत्रण डॉ एस. के. पामभोई, संबंधित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के नोडल/उपसंचालक व सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
               

विदित हो कि प्रदेश में स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाने एवं योजनाओं तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन ने एक संगठित एवं समन्वित तंत्र के रूप में "छत्तीसगढ़ साथी" पहल को प्रारंभ किया है। इसके सुचारू संचालन के लिए शासन द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत विविध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना है।यह समिति एक ऐसा संस्थागत मंच प्रदान करती है, जिसके माध्यम से साझेदार संगठन अपनी विशेषज्ञता, अनुभव और तकनीकी सुझाव सीधे विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में संरचनात्मक सुधार, तकनीकी उन्नयन, जनसहभागिता और सेवा की पहुंच में व्यापक विस्तार सुनिश्चित करना है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर, सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज, बीवीएचए  सहित 05 संस्थाएं इस समझौते की साझेदार बनीं इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन व यूनिसेफ के वार्षिक एक्शन प्लान पर विस्तृत चर्चा की गई ।

इस ऐतिहासिक एमओयू में शामिल संस्थाएं अपने-अपने विशिष्ट क्षेत्रों में राज्य सरकार के साथ मिलकर समन्वित रूप से कार्य करेंगी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहयोग करेगा, वहीं यूनिसेफ पोषण, बाल स्वास्थ्य और मातृ सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) राज्य की संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की रोकथाम तथा रोग निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान देगा। यूएनडीपी द्वारा टीकाकरण कार्यक्रमों को तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग मिलेगा, जबकि इविडेंस एक्शन राज्य में शिशु स्वास्थ्य और कृमि मुक्ति अभियान को सशक्त करेगा। सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से किशोरों के स्वास्थ्य और जागरूकता में सहयोग प्रदान करेगा, बीवीएचए लक्षित समुदायों के लिए विशेष स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के क्रियान्वयन में भागीदारी करेगा और निमहांस  मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार व सुदृढ़ीकरण में तकनीकी मार्गदर्शन देगा।

ये सभी संस्थाएं मिलकर छत्तीसगढ़ में बहुआयामी स्वास्थ्य सुधारों की एक समेकित और टिकाऊ रूपरेखा विकसित करने में राज्य सरकार की भागीदार बनेंगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार "स्वस्थ छत्तीसगढ़" की अवधारणा को धरातल पर साकार करने के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है, जिसमें इन संस्थाओं का सहयोग राज्य के लिए एक नई दिशा तय करेगा। इस समझौते के जरिए न सिर्फ़ दूरस्थ और अंतिम छोर में बसे व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ होंगी, बल्कि मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता में भी महत्वपूर्ण सुधार संभव होगा। यह समझौता मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता लाने की दिशा में भी कारगर सिद्ध होगा। सरकार और साझेदार संस्थाओं ने इस अवसर पर यह विश्वास जताया कि यह सामूहिक पहल छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों में अग्रणी राज्य बनाने में सहायक होगी और एक सशक्त, सुलभ तथा संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा तंत्र की नींव रखेगी।


बस्तर के हर कोने तक पहुंचाएंगे विकास का उजाला: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। बस्तर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजते हुए विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब बस्तर के कोने कोने का विकास होगा और विकास के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार अंतर्गत सुकमा जिले के तोंगपाल में आयोजित समाधान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान सुकमा जिले में 500 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की घोषणा की और 16 करोड़ से अधिक की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज सस्थाओं के जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ.बसव राजु एस. भी उपस्थित थे।

                             

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतिम चरण में आप लोगों के बीच पहुंचकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। यहां का वातावरण बड़ा सुंदर है और महुआ की सुंदर छांव शीतलता दे रही है। उन्होंने परंपरागत रूप से स्वागत करने पर सभी का आभार जताया। साय ने कहा कि बस्तर से बदलाव की बुलंद आवाज ने माओवादियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। बस्तर में माओवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है। नक्सलगढ़ के रूप जाना जाने वाले सुकमा में स्कूलों की घंटियां बज रही हैं, बच्चे निर्भीक होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। साय ने कहा कि प्रदेशव्यापी इस अभियान का उद्देश्य योजनाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना है। आज देखने आया हूं कि प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य आपके गांव में सुचारू रूप से चल रहा है या नहीं, महतारी वंदन योजना की राशि माताओं-बहनों को समय पर मिल रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वे मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष रूप जानकारी ले रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन चरण में आयोजित सुशासन तिहार अपने उद्देश्य में सफल हुआ है। प्रशासन ने कड़ी मेहनत कर आपकी समस्याओं का समाधान किया है। साय ने कहा कि ऐसा काम वही सरकार कर सकती है जिसकी नीति और नियत साफ है। हमने ईमानदारी से काम किया है, इसीलिए जनता के बीच जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। हमने पूरे प्रदेश में पीएम आवास के माध्यम से लोगों के लिए पक्का मकान स्वीकृत कर उनके गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया है। पहले ही कैबिनेट में हमने 18 लाख आवास स्वीकृत किया था, यह काम लगातार जारी है।

                             

उन्होंने कहा कि हम किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान, 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मूल्य पर खरीद रहे हैं। धान के दो वर्षों के बकाया बोनस की राशि भी किसानों को दी जा चुकी है।  रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेशवासियों को धार्मिक स्थलों की यात्रा करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेंदूपता संग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए परिश्रमिक की दर प्रति मानक बोरा 5000 रुपए की दर स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाएं पंचायत भवन में ही मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ किया गया है। अगले एक वर्ष में यह सुविधा सभी पंचायतों में शुरू होगी। 

योजनाओं की जानी हकीकत

मुख्यमंत्री साय ने तोंगपाल समाधान शिविर में पहुंचे ग्रामीणों से संवाद कर योजनाओं का फीडबैक लिया। तोंगपाल की त्रिवेणी रावटे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें प्रति माह महतारी वंदन योजना की राशि मिल रही है। बच्चों के पालन पोषण में इस राशि के उपयोग की उन्होंने जानकारी दी। इसी तरह श्रीमती वेदमती कश्यप ने बताया कि हमारी समूह की दीदियां गणवेश सिलाई का काम करती हैं। तीन एकलव्य स्कूल के बच्चों की गणवेश सिलाई से उन्हें सालाना डेढ़ लाख रूपए से अधिक की कमाई हो रही है। शिविर में पहुंचे अन्य लोगों ने भी अपनी मांगे रखी और योजनाओं से मिल रहे लाभ की जानकारी दी। 

किस्टाराम- कोंटा मार्ग पर दौड़ेगी ‘‘प्रतिज्ञा हक्कुम मेल‘‘

बस्तर अंचल के कभी संवेदनशील क्षेत्र रहे किस्टाराम- कोंटा मार्ग पर अब ‘‘प्रतिज्ञा हक्कुम मेल‘‘ बस दौड़ेगी। दुरस्थ क्षेत्रों में बेहतर आवगमन सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तोंगापाल के समाधान शिविर में मरईगुड़ा के प्रतिज्ञा महिला क्लस्टर संगठन को हुक्कुम मेल बस की चाबी सौंपी। इससे अंचल के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी।

पीएम आवास हितग्राहियों को सौंपी खुशियों की चाबी

मुख्यमंत्री साय ने तोंगपाल के समाधान शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को खुशियों की चाबी देकर उनके सपनों के घर की सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 4 हितग्राहियों को आवास के पहली किस्त के चेक भी बांटे।  साथ ही पूरे हो चुके आवास के 4 हितग्राहियों को उनके नए घर की चाबी सौंपी।

खेलो इंडिया पहल के 10 खिलाड़ियों को मिले खेल किट

शिविर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 10 खिलाड़ियों को खेल सामग्री (किट) प्रदान किए। इनमें 8 महिला फुटबॉल खिलाड़ी और 2 हाकी खिलाड़ी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि खेलो इंडिया एकेडमी रायपुर और सुकमा में जिले की 8 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों का चयन हुआ है।

मुख्यमंत्री ने सुशासन शिविर में की बड़ी घोषणाएं

सुकमा दंतेवाड़ा मार्ग हेतु 230 करोड़ रूपए, .झीरम व्यापवर्तन योजना हेतु 32 करोड़ 50 लाख, कावराकोपा में पुलिया निर्माण हेतु 35 लाख, जैमर में पुलिया निर्माण 35 लाख, हमीरगढ़ में सामाजिक भवन 30 लाख, टहकवाडा में एक पुल- पुलिया 35 लाख, तोंगपाल में समूह के लिए प्रशिक्षण केंद्र 25 लाख, मारेंगा में सी सी सड़क हेतु 16 लाख, एलेननार में पंचायत भवन 25 लाख और पुलिया हेतु 3.50 लाख, धोबनपाल देवगुड़ी में बाउंड्री वाल हेतु 10 लाख, सीतापाल के स्कूल में बाउंड्री वाल हेतु 8 लाख, वारदेरास  में पुलिया हेतु 16 लाख रूपए की घोषणा की।

धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम का शानदार आयोजन

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रायपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आदिवासी जननायक, धरती आबा बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर पूरे देश और प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। सरगुजा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बिहार राज्य के जमुई से वर्चुअली जुड़कर देशवासियों को संबोधित किया गया। उन्होंने बिरसा मुंडा के स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका और उनकी प्रेरणादायक विरासत का उल्लेख किया और धरती आबा बिरसा मुंडा के सम्मान में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। इस अवसर पर जिले की आदिवासी संस्कृति का सुंदर नजारा देखने को मिला जब लोक नृत्य दलों के साथ मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने भी कदम से कदम मिलाए और खुशी जाहिर की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएं देते हुए धरती आबा बिरसा मुंडा को नमन किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को पूरे देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव आदिवासी समाज के साथ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में आदिवासी विभूतियों का अतुलनीय योगदान रहा है। आदिवासी समाज अपनी शालीनता और साहस के लिए जाना जाता है। हमें इस पहचान को बनाए रखना होगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय ग्राम उत्कर्ष जैसी क्रांतिकारी योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य द्रुत गति से हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने विभिन्न योजनाएं बनाई हैं।

जिसमें पीएम जनमन भी शामिल है। केंद्र एवं राज्य सरकार का समन्वित प्रयास है कि माताएं एवं बहनें आत्मनिर्भर बने और उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिले। शासन का प्रयास है कि आदिवासी समाज की संस्कृति और मूल्यों का संरक्षण किया जा सके। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर सरगुजा क्षेत्र में आदिवासी समाज के हित में महत्वपूर्ण योगदान हेतु माता राजमोहिनी देवी एवं संत गाहिरा गुरु का विशेष स्मरण करते हुए नमन किया। कार्यक्रम में स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा असमिया लोक नृत्य बिहू, सहित छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोक नृत्यों पर प्रस्तुति दी गई।

इस अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए जिनका श्रीमती राजवाड़े द्वारा अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से योजनाओं और कार्यक्रमों पर जानकारी भी ली। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनजातीय समाज प्रमुखों, कलाकारों और खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ पुलिस को मिला राष्ट्रपति का पुलिस ध्वज सम्मान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है, जब उन्हें ‘राष्ट्रपति का पुलिस ध्वज’ प्रदान किए जाने की स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह विशेष ध्वज देश के चुनिंदा राज्यों की पुलिस इकाइयों को दिया जाता है, जो 25 वर्षों की अनुकरणीय सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सल मोर्चे पर साहस और दृढ़ता के साथ कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए यह सम्मान अर्जित किया है, जो उनकी उत्कृष्ट सेवा का प्रमाण है।

इस सम्मान के साथ, पुलिस बल के जवान इस ध्वज की प्रतिकृति को अपनी वर्दी पर प्रतीक चिन्ह के रूप में धारण करेंगे, जो उनके शौर्य और सेवा का प्रतीक होगा। राष्ट्रपति ध्वज किसी भी पुलिस या सैन्य बल के लिए सर्वोच्च मान्यता मानी जाती है और यह छत्तीसगढ़ पुलिस की निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और परिश्रम की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “यह सम्मान छत्तीसगढ़ पुलिस के साहस, अनुशासन और देशभक्ति का प्रमाण है। हमारे जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी नक्सलियों के खिलाफ सफलता प्राप्त की है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। यह ध्वज हमारे पुलिस बल के हौसले को और भी ऊंचा करेगा , उन्हें राज्य की सुरक्षा और सेवा के लिए और प्रेरित करेगा।” मुख्यमंत्री साय ने पुलिस बल को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि उन बहादुर जवानों के प्रति एक आदर है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना राज्य की शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ की जनता को भी गर्व का अवसर प्रदान किया है, जो राज्य की पुलिस की सेवा और समर्पण का सम्मान करती है।

देश की न्याय प्रणाली के लिए आज ऐतिहासिक दिन – अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा विधि एवं विधाई कार्य मंत्री अरुण साव ने कहा कि आज देश की न्याय प्रणाली के लिए ऐतिहासिक दिन है। पुराने कानून को समाप्त करके नया कानून लागू किया गया है। जब कोई कानून बनाया जाता है, तो उसमें कानून बनाने वाले की सोच क्या है, उद्देश्य क्या है, ये बड़ा महत्व रखता है। कोई पीड़ित दंड नहीं, न्याय चाहता है। आज से प्रभावी हो रहे तीनों नए कानूनों को समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। इनके जरिए नागरिकों को पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर न्याय मिल सकेगा।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मुंगेली जिला मुख्यालय के थाना सिटी कोतवाली में नए कानूनों के लागू होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नए स्वरूप में आज अस्तित्व में आने पर लोगों को बधाई दी। उन्होंने इन कानूनों को बनाने की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में मुंगेली के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि नए कानून के अनुसार अब लोग घर बैठे ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

इसमें कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं जिससे लोगों को अब त्वरित न्याय मिल सकेगा। उन्होंने इन नए कानूनों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित किया। मोहले ने पुलिस विभाग को समाज को न्याय दिलाने में ज्यादा से ज्यादा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुंगेली के कलेक्टर राहुल देव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गिरिजाशंकर जायसवाल ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को नए कानूनों की उपयोगिता और उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वनमंडलाधिकारी संजय यादव, मुंगेली नगर पालिका के अध्यक्ष हेमेन्द्र गोस्वामी, उपाध्यक्ष मोहन मल्लाह, मुंगेली जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष पवन पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और अधिवक्ता संघ मुंगेली के अध्यक्ष टीकम चंद्राकर सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद थे।

आज का दिन ऐतिहासिक, दंड के स्थान पर न्याय को प्राथमिकता देने वाले कानून देशभर में लागू : सीएम विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आज 1 जुलाई 2024 हमारे देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। आज से देश भर में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो रहे हैं। ये सभी कानून डेढ़ सौ वर्ष पहले अंग्रेजों द्वारा लागू कानूनों के स्थान पर प्रभावशील होंगे। यह परिवर्तन हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्पों को दर्शाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अपने निवास कार्यालय रायपुर में गृह विभाग द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित पुस्तिका के विमोचन के मौके पर यह बातें कही। 

मुख्यमंत्री साय ने गृह विभाग के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने जागरूकता और प्रशिक्षण की दृष्टि से बहुत अच्छा प्रयास किया है। ये तीनों कानून सभी नागरिकों को न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं और प्रदेश में इसका बेहतर क्रियान्वयन हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के नाम में ही इनके उद्देश्य भी समाहित हैं। इनमें दंड के स्थान पर न्याय को प्राथमिकता दी गई है। ये कानून भारत सरकार की न्याय और सुरक्षा की गारंटी को पूरा करने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर पूरे प्रदेश के पुलिस थानों में आज के दिन को उत्सव की तरह मनाया जा रहा है। इन कानूनों की जानकारी देने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर लोगों को जागरूक करने की दिशा में पहल की जा रही है। 

विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ और पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा ने नए कानूनों के प्रदेश स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। न्याय दिलाने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए अंतर्विभागीय समन्वय के साथ विवेचना और कार्यवाही पर जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि नए कानूनों के अंतर्गत दो एफआईआर और एक मर्ग दर्ज हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव द्वय राहुल भगत, बसव राजू एस. एवं गृह विभाग के अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि नवीन कानून में मुख्यतः औपनिवेशिक कानूनों में बदलाव, महिला सुरक्षा एवं न्याय, आतंकवाद, संगठित अपराध एवं भारत की सम्प्रभुता, एकता एवं अखण्डता के विरूद्ध अपराध, पीड़ित केन्द्रित कानूनी प्रावधान, अनुसंधान में वैज्ञानिक तकनीक, डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के प्रावधान, न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। भारतीय दंड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता 2023 को अधिसूचित किया गया। भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 को अधिसूचित किया गया है और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को अधिसूचित किया गया है।

श्रीराम के आदर्शों पर चलकर संवारेंगे छत्तीसगढ़ : विष्णु देव साय

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रायपुर। पूरे राष्ट्र और दुनिया के सबसे ऐतिहासिक समारोह रामलला के प्राणप्रतिष्ठा के अवसर का अवलोकन करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ की पवित्र भूमि में से एक शिवरीनारायण पहुँचे जहां भगवान श्रीराम ने माता शबरी के जूठे बेर खाये थे। इस जगह पर उन्होंने प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम का अवलोकन किया और अभिभूत हुए। शिवरीनारायण के नागरिकों के लिए अभिभूत करने वाले दो क्षण आये।

पहला तो तब जब रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। दूसरा क्षण तब आया जब माता शबरी का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सुदूर कुटिया में जीवन गुजारने वाली मेरी आदिवासी माँ शबरी का ध्यान आते ही अप्रतिम विश्वास जागृत होता है। माँ शबरी तो कब से कहती थी राम आयेंगे। प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास सक्षम भव्य भारत का आधार बनेगा। यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि श्रीराम के आदर्शाें पर चलकर हम छत्तीसगढ़ संवारेंगे। उल्लेखनीय है कि श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का उल्लास पूरे प्रदेश में नजर आया, शिवरीनारायण में भी नागरिक इस पवित्र क्षण में बहुत उत्साहित दिखे।

इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह हम सबके लिए यह ऐतिहासिक क्षण है कि हम अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सुंदर संबोधन भी दिया है और माता शबरी के धैर्य के माध्यम से हमें सीख दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमने श्री रामलला की प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम की संपूर्ण प्रक्रिया को विस्तार से देखा। भगवान श्रीराम की अलौकिक बाल प्रतिमा का दर्शन हुआ। हम सब अभिभूत हुए। यह खुशी का क्षण इसलिए भी है कि हमने यह सब माता शबरी के पवित्र धाम शिवरीनारायण की पावन भूमि में देखा। एक पावन भूमि में हमने एक और पवित्र भूमि में होने वाले अद्भुत प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखा।

हमारे लिए यह सौभाग्य इसलिए भी बहुत बड़ा है कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। माता कौशल्या की जन्मभूमि है। आज केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया राममय हो गई है। दुनिया भर में सब अलग-अलग तरह से खुशियों की अभिव्यक्ति कर रहे हैं।हमारा सौभाग्य है कि हमने अपने धान के कटोरे से भगवान के भोग के लिए सुगंधित चावल भेजा है। छत्तीसगढ़ के राईस मिलर्स ने यह चावल भेजा है। बहुत खुशी की बात है कि ननिहाल के चावल से रामलला का भोग तैयार हुआ है।

हमारे सेवाभावी डाक्टरों की टीम अयोध्या गई हुई है जो रामभक्तों के इलाज के सेवाकार्य में लगी हुई है। कल ही एक समूह और रवाना होगा जो अयोध्या धाम में 60 दिनों तक भंडारा चलाएगा। छत्तीसगढ़ में हम लोगों के लिए आज की घड़ी बहुत शुभ घड़ी है। हम श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ को संवारने का काम करेंगे।

इस मौके पर छत्तीसगढ़ प्रभारी ओम माथुर ने भी उपस्थित नागरिकों को संबोधित किया। माथुर ने कहा कि आज जय श्री राम का जयघोष अयोध्या तक जाना चाहिए। शबरी माता की भूमि पर आयोजित इस पावन कार्यक्रम में उपस्थित सभी को अभिनंदन करता हूँ। हम सबका सौभाग्य है कि 500 वर्षों के त्याग, बलिदान का फल आज हमें मिला है। हमारा समाज समतापूर्ण रहा है। प्रभु राम ने कभी किसी के बीच भेद भाव नहीं किया। उन्होंने वनवासियों का आतिथ्य स्वीकार किया। यही हमारी संस्कृति है। आज हमारे लिए गौरव का दिन है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जनसंपर्क विभाग की ओर से तैयार की गई कॉफी टेबल बुक ‘‘हम सबके राम‘‘ और कैलेंडर ‘‘रामो विग्रहवान धर्मः‘‘ का विमोचन भी किया। यह संग्रह श्रीराम के अयोध्या धाम से छत्तीसगढ़ में वनवास के दौरान की कथाओं पर आधारित है। इस दौरान महंत राजेश्री रामसुंदर दास, सांसद गुहाराम अजगल्ले, पामगढ़ विधायक श्रीमती शेषराज हरवंश, जनसम्पर्क आयुक्त मयंक श्रीवास्तव, संभागायुक्त बिलासपुर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, आईजी अजय यादव, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी विजय अग्रवाल भी मौजूद रहे।

रामनामियों ने अपना मोर मुकुट पहनाकर किया अभिनंदन- रामनाम को अपने अंग-अंग में हृदय में तथा चेतना में बसाने वाले रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपना परंपरागत मोर मुकुट पहनाकर अभिनंदन किया। उनके मोर मुकुट में राम नाम लिखा होता है। मुख्यमंत्री के साथ ही उन्होंने ओम माथुर को भी मोर मुकुट पहनाया।

चम्पारण्य भगवान वल्लभाचार्य का प्राकट्य स्थल, पर्यटन स्थल के रूप में इसका होगा विकास

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल चम्पारण में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया और यहां आयोजित चम्पारण्य रामायण महोत्सव में शामिल हुए।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ: चम्पारण्य

लोकार्पण कार्यक्रम चंपेश्वर महादेव मंदिर परिसर में तथा रामायण महोत्सव शासकीय स्कूल ग्राम डगनिया चम्पारण्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति हई, जिसमें जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त विजेता मानस मंडली की प्रस्तुति, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, प्रभंजय चतुर्वेदी भिलाई का राम भजन एवं सुश्री शन्मुख प्रिया मुम्बई की प्रस्तुति भी हुई।

चंपारण्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि आप सभी जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ का निर्माण कार्य चल रहा है, इसकी शुरूआत चंदखुरी से हुई, शिवरीनारायण के बाद तीसरा राजीव लोचन मंदिर और अब चम्पारण्य में भी भगवान राम की भव्य मूर्ति का अनावरण हुआ है, चम्पेश्वर महादेव यहां विराजे हैं और आज मुझे भी उनकी पूजा करने का अवसर प्राप्त हुआ। 

देश और दुनिया को हम अपनी संस्कृति से अवगत करा रहे हैं: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने आज लोकार्पित कैफेटेरिया को नो लास नो प्राफिट पर चम्पेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के द्वारा संचालित करने की घोषणा की। बघेल ने कहा कि चम्पारण्य भगवान वल्लभाचार्य का प्राकट्य स्थल है, देश विदेश के लोग यहां आते हैं, पर्यटन स्थल के अनुरूप यहां अधोसंरचना का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिम परंपरा और संस्कृति को सुरक्षित और संरक्षित करने का काम हमारी सरकार कर रही है जिसके लिए हमने बादल नाम की संस्था बनाई, घोटुल का नव निर्माण करा रहे हैं, आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है, जिसमें शामिल होने विदेशों से भी लोग यहां आते हैं और यहां की गौरवशाली और समृद्ध संस्कृति देखकर हतप्रभ रह जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में कहीं भी रामायण महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ, हमने देश में पहली बार रामायण महोत्सव का आयोजन कराया, हम मानते हैं कि ईश्वर कण-कण में हैं, हर जगह व्याप्त हैं। हम अपने अन्नदाता की सेवा कर रहे हैं, कभी उनके ऊपर परेशानी नहीं आने दी, कोरोना में भी हमने अपने अन्नदाता की सेवा की। उन्होंने इस मौके पर प्रदेश वासियों को राखी तिहार की बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ महतारी के हर  बेटा-बेटी की सेवा कर रही है, ये सेवा का मौका आपने दिया है जिसके लिए आपको प्रणाम करता हूं।

 


भोरमदेव पदयात्रा श्रावण के प्रथम सोमवार 10 जुलाई को

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कवर्धा। ऐतिहासिक, पुरात्तव, धार्मिक, जनआस्था का प्रतीक भोरमदेव मंदिर में कंवरियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा पदयात्रा कर भगवान शिव में जलाभिषेक करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कबीरधाम जिले में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष श्रावण मास के प्रथम सोमवार को भोरमदेव पदयात्रा की तैयारी पूरी कर ली गई है। कलेक्टर जनमेजय महोबे ने आज कवर्धा के प्रचीन बूढा महादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक होने वाले पदयात्रा की तैयारियों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व , पुलिस और जनपद पंचायत के मुख कार्य पालन अधिकारियों को स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए है।

                                      

छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर में  सोमवार 10 जुलाई को बुढ़ा महादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक 18 किलोमीटर की पदयात्रा सुबह 7 बजे से प्रारंभ होगी। सदियों से चली आ रही यह पदयात्रा प्रशासनिक तौर पर आमजनों के सहयोग से कवर्धा के बुढ़ामहादेव मंदिर से 2008 से अनवरत जारी है। श्रद्धालुओं एवं पदयात्रियों के जन स्वास्थ्य सुविधा एवं विश्राम के लिए अन्य व्यवस्था भी जिला प्रशासन द्वारा की गई है।

केबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर के मंशानुरूप कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा इस पदयात्रा और पदयात्रा में शामिल होने वाले भक्तों के लिए स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाएं की तैयारियां पूरी कर ली गई है। साथ ही जिले से बाहर से आने वाले पदयात्रियों के लिए रोड़ मैप भी तैयार किया गया है। सम्पूर्ण पदयात्रा के लिए डीजे साउंड बाक्स तथा स्वास्थ्य विभाग का चलित एम्बुलेंस रहेंगा। श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था किया गया है। वन विभाग द्वारा ग्राम छपरी (गौशाला) एवं भोरमदेव मंदिर परिसर के अंदर वृक्षारोपण कराया जाएगा।

पदयात्रा मार्ग में प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर शीतल पेयजल और नास्ता की व्यवस्था रखी गई है

1. सकरी नदी विद्युत केन्द्र के पास 2. ग्राम समनापुर 3. ग्राम बरपेलाटोला 4. ग्राम रेंगाखारखुर्द 5. ग्राम कोडार 6. ग्राम राजानवागांव 7.  ग्राम बाघुटोला 8. ग्राम छपरी(गौशाला) 9. भोरमदेव मंदिर परिसर में व्यवस्था की गई है।

भोरमदेव मंदिर परिसर के आस-पास कंवरियों के ठहरने के लिए भवन की व्यवस्था

1. कंवरिया भवन 2. ग्राम पंचायत के पास बैगा भवन 3. आदिवासी भवन 4. शांकम्भरी भवन 5. ग्राम पंचायत भवन में वाटर प्रुफ टेंट की व्यवस्था 6. मड़वा महल मोड़ के पास धर्मशाला भवन में टेंट में ठहरने की और शौचालय  की व्यवस्था की गई है।

भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के लिए की गई विशेष व्यवस्था

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गर्भगृह से भगवान के लाईव दर्शन के लिए एलईडी की व्यवस्था की गई है। जिस प्रवेश द्वार पर महिला एवं पुरूष का स्थान रखा गया है। उस द्वार का उपयोग कर भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए किया जाएगा।

पदयात्रा के सफल आयोजन के लिए श्रद्धालुओं से की गई अपील

भोरमदेव मंदिर के आस-पास पॉलीथीन एवं प्लास्टिक युक्त सामग्री का उपयोग नही करने की अपील की गई है। कंवरिया एवं श्रद्धालुओं से प्लास्टिक, चावल, फुल किसी भी मुर्ति में नहीं डालने कहा गया है। आने वाले कंवरियों एवं श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई शौचालय का निर्माण किया गया है। बेनर पोस्टर से चिन्हांकित किया गया है। सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि सभी जगह स्वच्छता से उपयोग करें ताकि गंदगी एवं पर्यावरण प्रदुषण को रोका जा सके। सभी श्रद्धालुओं से भोरमदेव सनातन तीर्थ शांति सद्भाव के साथ प्रशासन को सहयोग करने के अपील की है।

पूछताछ केन्द्र एवं हेल्प लाइन नंबर किया गया जारी

स्थल में अप्रिय घटना एवं बच्चों का गुम हो जाने पर मंदिर प्रांगण के पुछताछ केन्द्र की स्थापना की गई है। इसके लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया गया है।

एस.डी.एम. बोड़ला -  +91-75877 05154,  तहसीलदार बोड़ला - +91-9165961970,  ना.तहसीलदार बोड़ला - +91-98937 10385,  थाना प्रभारी भोरमदेव - +91-94242 95795,  (पुलिस वाहन) - 112,  पटवारी - +91-91310 11498

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