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आम की खेेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आम की खेती किसानों की आय बढ़ाने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। किसान जितने ज्यादा आम के पौधे लगाएंगे, उतना ज्यादा फायदा होगा। आम और उद्यानिकी फसलों की खेती से हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने में मदद मिलेेगी।

मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मण्डपम् में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐेसे उत्सवों से फलों और उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।

इस अवसर पर विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, कृषि वैज्ञानिक, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आये आम उत्पादक किसान और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के न्यूज लेटरका विमोचन किया। आयोजकों द्वारा अतिथियों का उन्नत किस्म के आम के ग्राफ्टेड पौधे देकर सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और विशेषकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में आम का विशेष महत्व है। छत्तीसगढ़ में सभी मांगलिक एवं धार्मिक कार्यां में आम के पत्तों, फलों एवं अन्य अंगों का उपयोग किया जाता है तथा आम के पेड़ को बहुत ही शुभ माना जाता है। साय ने कहा कि भारत में आम की समृद्ध जैवविविधता देखने को मिलती है और यहां आम की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती हैं जो अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध और गुणों के कारण दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय हैं। आम के इन्ही विशिष्ट गुणों के कारण इसे फलों का राजा भी कहा जाता है।

साय ने कहा कि इस भव्य और वृहद आम महोत्सव में छत्तीसगढ़ वासियों को आम की सैकड़ों विशिष्ट एवं दुर्लभ प्रजातियां देखने का अवसर प्राप्त हुआ। साय ने कहा कि आज यहां उन्हें स्वयं आम की अनेकों दुर्लभ किस्में देखने को मिली जो उन्होंने अपने जीवन में इससे पूर्व नहीं देखी थी। इनमें से एक प्रजाति बीजापुर की हाथीझुल किस्म है जिसका एक-एक फल दो किलो से लेकर चार किलो तक वजन का होता है। साय ने आशा व्यक्त की कि आगामी वर्षों में यहां आम महोत्सव और भी भव्य एवं वृहद स्तर पर आयोजित किया जाएगा जिससे रायपुर को एक नई पहचान मिलेगी।

 शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि आम महोत्सव में लगी आम प्रदर्शनी में 2 इंच से लेकर 15 इंच आकार तक के आम के फल देखने को मिल रहे हैं जो रायपुर वासियां के लिए एक सुखद एवं अनोखा अनुभव है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास करना होना चाहिए की रायपुर शहर से अधिक से अधिक लोग आम महोत्सव में पहुंच कर आम की इन किस्मों को देख सकें।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने राष्ट्रीय आम महोत्सव के बारे में मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों को जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 200 से अधिक किस्मों एवं आम से बने 56 व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आम महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों के 450 से अधिक किसानों द्वारा विभिन्न किस्मों के 1200 से अधिक आमों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके साथ ही आमों से बने 56 उत्पादों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए आम उत्पादकों द्वारा आम के विभिन्न किस्मों के फलों तथा पौधों का विक्रय भी किया जा रहा है।

डॉ. चंदेल ने मुख्यमंत्री साय को प्राकृतिक रूप से पके आमों की विभिन्न प्रजातियों से भरी टोकरी भेंट की। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मास मीडिया एवं पब्लिकेशन सेल द्वारा प्रकाशित न्यूज लेटर का विमोचन भी किया गया। कुलपति डॉ. चंदेल ने इस अवसर पर घोषणा की कि आम महोत्सव में नागरिकों के उत्साह एवं मांग को देखते हुए राष्ट्रीय आम महोत्सव की अवधि एक दिन और बढ़ायी जा रही है अब आम महोत्सव का समापन सोमवार 9 जून, 2025 को होगा। कार्यक्रम के अंत में कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी द्वारा अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन किया गया।


गांव की धरोहर बाड़ी से मिल रही लोगों को हरी साग-सब्जियां

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के अन्तर्गत उद्यान विभाग के माध्यम से संचालित पोषण बाड़ी योजना से लोगों तक हरी और ताजी साग सब्जी आसानी से मिल रही है। गांव की धरोहर  नरवा गरवा घुरूवा और बाडी को सहेजने का कार्य छत्तीसगढ़ शासन कर रही है। इसी क्रम में गरियाबंद जिले में ग्रामीण महिलाएं पोषण बाड़ी योजना का लाभ उठाकर अपनी बाडी में हरी सब्जियां की पैदावार कर रही हैं।
                   

महिलाएं ताजी सब्जियों को स्थानीय हाट बाजार में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इन्हीं महिलाओं में ग्राम देवरी की श्रीमती भगवन्तीन बाई भी है। अपनी बाड़ी में सब्जी उत्पादन से हर माह अच्छा मुनाफा कमा रही है। उन्होंने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारम्परिक तरीके से खेती किसानी करती थी। जिससे अधिक कमाई नहीं हो पाती थी। उन्होंने अपने बाड़ी में सब्जियों की खेती करने के विचार से उद्यानिकी विभाग द्वारा गांव में बाड़ी विकास के लिए कराये जा रहे सर्वे में अपना नाम दर्ज करवाया विभाग ने उन्हें विभिन्न सब्जियों के बीज सब्जियों का थरहा वरमी कम्पोस्ट खाद उपलब्ध कराये गये।

भगवन्तीन बाई ने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में अपने 0.20 हेक्टेयर रकबा के बाड़ी में अपनी मेहनत और लगन से सब्जी लगाई। उन्होंने बताया कि सब्जी की अच्छी पैदावार से स्थानीय हाट बाजार में  विक्रय से प्रतिमाह 25 से 30 हजार लाभ कमा रही है।इसके साथ अपनी बाड़ी से ही उन्हें साल भर के लिए सब्जी मिल जा रही है। साथ ही अपने परिवार के अन्य सदस्यों को रोजगार भी मिल गया है।

रबी के लिए किसानों को 415 करोड़ रूपए का ऋण वितरित, पहली बार उद्यानिकी फसलों के लिए ब्याज मुक्त ऋण

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रायपुर। प्रदेश में चालू रबी मौसम मे सहकारी बैंकों के माध्यम से एक लाख 85 हजार किसानों को अब तक 415 करोड़ रूपए का ऋण वितरित किया जा चुका है। वितरित ऋणों में गेंहू की फसल के लिए 110.50 करोड़ रूपए, चने की फसल के लिए 181.36 करोड़ रूपए, उद्यानिकी फसलों के लिए 14 करोड़ रूपए एवं अन्य फसलों के लिए 110 करोड़ रूपए के ऋण किसानों को दिए गए है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा निरंतर गेंहू, चना एवं उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करने हेतु चलाए गये अभियान के कारण ही इन फसलों के रकबे और ऋण वितरण में वृद्धि हुई है। कृषि के फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों के लिए भी राज्य शासन द्वारा ब्याज मुक्त (शून्य प्रतिशत) कृषि ऋण की व्यवस्था सहकारी समितियों के माध्यम से पहली बार की गई है। गतवर्ष इसी अवधि में एक लाख 9 हजार किसानों को 239 करोड़ रूपए के ऋण वितरित किये गये थे। चना एवं गेंहू की फसलों के लिए ऋणों में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है।

किसानों के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से 98 हजार 279 मिटरिक टन रासायनिक उर्वरकों का भण्डारण किया गया है और 36 हजार 794 मिटरिक टन का खाद वितरण किसानों को किया गया है। इसी अवधि में गतवर्ष समितियों के माध्यम से 14 हजार 855 मिटरिक टन रासायनिक खाद का वितरण किसानों किया गया था। इस वर्ष रबी मौसम में 80 हजार 609 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का वितरण किसानों को किया गया है।

गौरतलब है कि राज्य शासन की ब्याज अनुदान योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से इस वर्ष अब तक 15.88 लाख किसानों को 5978 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया जा चुका है। गत वर्ष इसी अवधि में 4986 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किसानों को किया गया था। सहकारी समितियों के माध्यम से इस वर्ष लगभग 1000 करोड़ रूपए से अधिक के ऋण वितरित किए गए है।

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