Media24Media.com: ई-गिरदावरी

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भू-स्वामियों को मिलेगा भू-आधार कार्ड, छत्तीसगढ़ में होगी जियो-रिफ्रेसिंग से ई-गिरदावरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन में नई तकनीकों के माध्यम से नवाचार शुरू किया गया है। इसी तारतम्य में राजस्व प्रशासन को चुस्त-दुरूस्त करने जियो-रिफ्रेसिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस नई तकनीक के लिए राज्य सरकार ने 150 करोड़ रूपए का प्रावधान करने के साथ-साथ राजस्व से जुड़े अमलों की व्यवस्था और उनके प्रशिक्षण की रणनीति बनाई गई है। जियो-रिफ्रेसिंग से भू-स्वामियों को जमीन संबंधी विभिन्न विवादों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ राज्य में किसानों द्वारा लगाई गई फसल का डिजिटल क्रॉप सर्वे होने से ई-गिरदावरी में आसानी होगी। जियो रिफ्रेसिंग के माध्यम से भूमि के नक्शों के लिए खसरा के स्थान पर यू.एल. पिन नंबर दिया जाएगा। इसके साथ ही भूमिधारक को भू-आधार कार्ड भी मिलेगा।

          नई तकनीक से सुलझेंगे भूमि संबंधी विवाद

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में सुशासन के लिए पारदर्शी और बेहतर प्रशासन के लिए शासकीय काम-काज में अधिक से अधिक आईटी का उपयोग करने के निर्देश सभी विभागों को दिए हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने राजस्व अधिकारियों को भूमि के जियो-रिफ्रेसिंग का कार्य तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।

जियो रिफ्रेसिंग तकनीक में छोटी से छोटी भूमि का लांगीट्यूड और एटीट्यूड के माध्यम से वास्तविक भूमि का चिन्हांकन करना आसान हो जाएगा। जमीन सीमांकन के दौरान होने वाले विवाद को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के सभी ग्रामों के कैडेस्ट्रल मैप का जियो रिफ्रेसिंग कार्य मार्च 2024 प्रारंभ किया जा चुका है। राज्य के 33 जिलों के कुल 20,222 ग्रामों में से 19 जिलों के 10,243 ग्रामों का जियो रिफ्रेसिंग कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष ग्रामों का जियो रिफ्रेसिंग कार्य प्रगतिरत है।

राज्य में डिजिटल फसल सर्वेक्षण खरीफ वर्ष 2024 का कार्य सितंबर-2024 से प्रारंभ किया गया है। राज्य के 20,222 ग्रामों में से पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में 2700 ग्रामों के कुल 26,05,845 खसरों का डिजिटल फसल सर्वेक्षण का लक्ष्य रखा गया था। निर्धारित लक्ष्य में से 24,22,897 खसरा नंबरों का सर्वे पूर्ण किया जा चुका है एवं 23.96,793 खसरा नंबरों का सत्यापन कार्य किया जा चुका है। इस प्रकार निर्धारित लक्ष्य अनुसार 93 प्रतिशत खरीफ फसल का डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया गया है।

छत्तीसगढ़ में होगी जियो-रेफ्रेंसिंग से ई-गिरदावरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व प्रशासन को चुस्त-दुरूस्त करने का  काम शुरू कर दिया गया है। राज्य में अब डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए तैयारियां की जा रही हैं, इस सर्वे को अंजाम देने के लिए राजस्व विभाग द्वारा भूमि का जियो-रेफ्रेंसिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। एक ओर जियो-रेफ्रेंसिंग से भूमि विवादों में कमी आएगी। वहीं दूसरी ओर फसलों की ई-गिरदावरी का कार्य आसान हो जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में सुशासन के लिए पारदर्शी और बेहतर प्रशासन के लिए शासकीय काम-काज में अधिक से अधिक आईटी का उपयोग करने के निर्देश सभी विभागों को दिए हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में राजस्व अधिकारियों को भूमि के जियो-रेफ्रेंसिंग का कार्य तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।

भ्रष्टाचार की शिकायत पर होगी कार्यवाही

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बैठक में कहा कि ग्रामीणों और किसानों को नामांतरण, बटवारा, सीमांकन और व्यपवर्तन कार्य में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी जनता की दिक्कतों को पूरी संवदेनशीलता के साथ दूर करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की शिकायत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र को ध्यान रखते हुए सभी राजस्व अधिकारी सुनिश्चित करें कि बच्चों को आय और जाति प्रमाण पत्र के लिए भटकना न पड़ें।

भू-अभिलेख में त्रुटि सुधार के लिए अभियान चलेगा

राजस्व मंत्री वर्मा ने कहा कि अविवादित नामांतरण प्रकरणों के निराकरण में यह देखा गया है कि ऐसे प्रकरणों को बिना किसी कारण के अनावश्यक खारिज किया जा रहा है। ऐसे प्रकरणों पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के भू-अभिलेख में त्रुटि सुधार के लिए अभियान चलाया जाए, इसके लिए पंचायत स्तर पर आवेदन लेकर उसका निराकरण किया जाए। उन्होंने युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य के सभी जिलों में जिला स्तरीय खेल आयोजन के लिए मैदान का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए।

राजस्व प्राप्ति बढ़ाने पर जोर

राजस्व मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को विभिन्न स्त्रोतों से हो रही राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। राजस्व प्राप्तियां बढ़ाने के लिए पारदर्शिता और ईमानदारी से कार्य हो। डायवर्सन भूमि का लंबित शुल्क वसूली की जाए। अधिक राजस्व प्राप्तियों से ही विकास और जनकल्याणमूलक कार्यों को गति मिलेगी।

राजस्व मामलें के निराकरण के लिए ठोस रणनीति

समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने कहा कि राज्य में राजस्व संबंधी प्रकरणों के तेजी से निराकरण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। संचालक रमेश शर्मा ने बताया कि भुइँया सॉफ्टवेयर में राजस्व रिकार्ड अद्यतन है। साथ ही जमीनों के स्थायी चिन्हांकन के लिए चांदा-मुनारा निर्माण करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

 

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