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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों इंजीनियरिंग के होनहार विद्यार्थियों को मिला स्वर्ण पदक

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रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर के लिए आज 25 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक रहा। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज संस्थान के 14वें दीक्षांत समारोह में अपनी गरिमामय मौजूदगी दी और 12 होनहार विद्यार्थियों को उनकी बेहतरीन शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए अपने हाथों से स्वर्ण पदक प्रदान किया। राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आज आयोजित एनआईटी के दीक्षांत समारोह में वर्ष 2023-24 में संस्थान से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी किए 1439 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें बी.टेक. और बी.आर्क. प्रोग्राम के 1044, एमसीए और एम.टेक. प्रोग्राम के 225 और पीएचडी के 170 विद्यार्थी शामिल थे।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों को एनआईटी जैसे उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर डिग्री प्राप्त करने पर हृदय से बधाई दी। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि आज आप अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा कर दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे हैं। आप लोगों ने अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर विशिष्ट मान्यता प्राप्त की है। विद्यार्थियों की सफलता में परिवार के प्रोत्साहन तथा प्राध्यापकों के मार्गदर्शन की निर्णायक भूमिका होती है। मैं सभी विद्यार्थियों के परिवार-जनों तथा प्राध्यापकों को भी बधाई देती हूं।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक का विकास विज्ञान पर निर्भर होता है। इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के बारे में जानकारी बनाए रखना आप सब के लिए सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल इनक्लुजन (Digital Inclusion) के क्षेत्र में भारत की सफलता ने पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया है। हमारे देश में ऐसे अन्य उदाहरण प्रस्तुत करने की संभावनाएं और क्षमताएं विद्यमान हैं। एनआईटी रायपुर जैसे उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों और आप जैसे युवाओं में यह उत्साह होना चाहिए कि ऐसी संभावनाओं को समझें और उन्हें कार्यरूप प्रदान करें। आप अपने योगदान का दायरा जितना अधिक विस्तृत करेंगे, उतना ही अधिक आपका व्यक्तिगत विकास होगा। बड़ी सोच, बड़ी आकांक्षाओं को जन्म देती है। बड़ी आकांक्षाएं ही प्रभावशाली यथार्थ का रूप लेती हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपना काम पूरी निष्ठा, नैतिकता और कुशलता के साथ निरंतर करते रहते हैं, उन्हें सहज ही लोगों का सम्मान प्राप्त होता है। आप सभी लगन के साथ कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहिए। सफलता और प्रतिष्ठा आपका अनुसरण करेंगी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करना व्यक्तिगत जीवन को सार्थक और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने विज्ञान और तकनीक का देश की सुरक्षा और समाज कल्याण के लिए उपयोग करते हुए अपार यश अर्जित किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत सरकार ने देश को ग्लोबल सेमीकंडक्टर मेनुफैक्चरिंग हब बनाने तीन वर्ष पहले इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का शुभारंभ किया है। आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और टेक्नोलॉजिकल सेल्फ-रिलायंस (Technological Self-reliance) की दृष्टि से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बहुत महत्वपूर्ण है। इस उद्योलग में युवा इंजीनियरों को रोजगार तथा स्टार्ट-अप्स के अनेक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश के प्रतिभाशाली इंजीनियर्स ने ऐसे अनोखे उद्यम स्थापित किए हैं, जिनके बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। आप जैसे इंजीनियरिंग टैलेंट पूल (Engineering Talent Pool) के बल पर देश में महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई जा रही हैं, उनको कार्यरूप दिया जा रहा है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि युवा विकसित भारत का निर्माण करेंगे। युवाओं के प्रयासों से भारत विश्व में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

राज्यपाल रमेन डेका ने दीक्षांत समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक अवसर का जश्न मना रहे हैं जो कि विद्यार्थियों की सालों की कड़ी मेहनत, धैर्य और लगन का नतीजा है। यहाँ उपस्थित हर विद्यार्थी ने शैक्षिक चुनौतियों का सामना किया, सहपाठियों से मित्रता की और साथ मिलकर बेहतरीन अनुभव के दौर से गुज़रे, जिसने उन्हें आज इस मुक़ाम पर पहुँचाया है। उन्होंने आज डिग्री हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने कहा कि आज यहाँ विद्यार्थी सिर्फ़ ज्ञान लेकर नहीं जा रहे, बल्कि आपसी समन्वय, संघर्ष करने और डटे रहने का कौशल भी लेकर जा रहे हैं। ये गुण उन्हें संस्थान की चार दीवारी से बाहर की दुनिया में मार्गदर्शन देंगे। विद्यार्थी एक ऐसी अनोखी दुनिया में प्रवेश करेंगे जो अभूतपूर्व परिवर्तन का समय है, जहाँ उनकी रचनात्मकता और जुनून महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। पूरा विश्व इन विद्यार्थियों की तरफ़ टकटकी लगाए देख रहा होगा कि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कौशल का उपयोग करके जलवायु परिवर्तन, ग़रीबी, वैश्विक भूखमरी, लिंग भेद, असमान आय, बेरोज़गारी जैसी अनसुलझी वैश्विक समस्याओं का हल निकाल सकें। 

राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सफलता के लिए नैतिक और शैक्षिक मूल्यों को अपनाएं और नई ऊँचाइयों को छुएँ। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र और राज्य की सरकार ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतरीन प्रयास किए हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कुशल नेतृत्व वाली सरकार ने शैक्षणिक अधोसंरचना को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी कार्य किए हैं। साथ ही तकनीकी संस्थाओं में शोध और नवाचार को भी छत्तीसगढ़ में बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की मौजूदा साय सरकार ने विभिन्न प्रयास किए हैं जिससे कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिले। साथ ही कार्य बल को उद्योगों की ज़रूरत के हिसाब से ढाला जा सके। तकनीकी क्षेत्र में विकास और अनुसंधान के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे कि क्षेत्रीय समस्याओं का स्थानीय हल भी ढूंढा जा सके।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रथम आगमन पर इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन बताया। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रति आभार जताया कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं और नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने अपने क़ीमती समय में दो दिनों का बहुमूल्य समय प्रदेश को दिया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले सभी ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, पीएचडी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल डिग्री हासिल करने का दिन नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए अपने ज्ञान व कौशल को भविष्य में योगदान देने के लिए भी तैयार होने का दिन है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की बड़ी आबादी गांवों और जंगलों में निवास करती है। ये वर्ग आज भी कई तरह के अभावों का सामना कर रही है। सुविधा और संपन्नता की दृष्टि से पीछे रह गए इन लोगों के जीवन में आपका ज्ञान और कौशल बदलाव ला सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहाँ पर औद्योगिक विकास के लिए बहुत संभावना है। इस क्षेत्र में भी आपका ज्ञान और कौशल राज्य के लिए बहु उपयोगी है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसी के अनुरूप हम लोगों ने भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लिया है। यह संकल्प आप लोगों के योगदान के बिना पूरा नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा देश दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हुए हम लोग भी इसमें बड़े बूस्ट की तैयारी कर रहे हैं। देश और प्रदेश को आप जैसे युवा प्रतिभाओं से बहुत उम्मीद है। आज प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। यह छात्र-छात्राओं में ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास पर भी ज़ोर देती है। हमारी आने वाली पीढ़ी तकनीकी रूप से कुशल और उद्यमिता से भरपूर पीढ़ी होगी। प्रदेश के 160 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का भी हम आधुनिकीकरण कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल, हवाई और संचार नेटवर्क का विस्तार बहुत तेज़ी से किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हमारे पास युवाओं की बहुत बड़ी टीम होगी जो इस प्रदेश को अपने ज्ञान, कल्पनाशीलता और प्रतिभा से विकास की नई उंचाईयों पर स्थापित करने में सक्षम होगी। रायपुर एनआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हवारे और निदेशक डॉ. एन.वी. रमना राव ने भी दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। एनआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, सीनेट सदस्य, रजिस्ट्रार, डीन, विभागाध्यक्ष और संस्थान के संकाय सदस्य भी समारोह में मौजूद थे।  

 राष्ट्रपति ने इन टॉपर्स को अपने हाथों से दिया स्वर्ण पदक

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एनआईटी के वर्ष 2023 के विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं के 11 टॉपर्स को स्वर्ण पदक प्रदान किया। उन्होंने कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियिरिंग तथा एनआईटी के ओवर-ऑल टॉपर यश बंसल को दो स्वर्ण पदक प्रदान किए। राष्ट्रपति ने बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर के टॉपर अंकित महोबिया, बायो मेडिकल इंजीनियरिंग की टॉपर ईशिका जैन, बायो टेक्नोलॉजी के टॉपर सिब्बू कुमार सिंह, केमिकल इंजीनियरिंग की टॉपर शिखा राय, सिविल इंजीनियरिंग की टॉपर मुस्कान अग्रवाल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के टॉपर शुभम अग्रवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के टॉपर अभिषेक कुमार, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की टॉपर दिशा जैन, मेटा एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग के टॉपर प्रखर जाधव और माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉपर प्रियांशु कुमार को स्वर्ण पदक प्रदान किया।     

मुख्यमंत्री बघेल 3 अक्टूबर को करेंगे ’स्वामी आत्मानंद कोचिंग’ योजना का शुभारंभ

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इंजीनियरिंग एवं मेडिकल के प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की नवाचारी ’स्वामी आत्मानंद कोचिंग’ योजना का 3 अक्टूबर को प्रातः 11 बजे अपने निवास कार्यालय से ऑनलाइन शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री रविंद्र चौबे एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस योजना में ख्याति प्राप्त एलन कैरियर इंस्टिट्यूट ने सीएसआर के तहत निःशुल्क कोचिंग देने सहमति दी है।

प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्यनरत 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और एलन इंस्टिट्यूट के मध्य एम ओ यू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे। गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शासकीय स्कूलों में कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग तथा मेडिकल पाठ्यक्रम की प्रवेश परीक्षा की ऑनलाइन कोचिंग योजना की घोषणा की थी।

स्कूल शिक्षा विभाग की स्वामी आत्मानंद कोचिंग योजना के अनुसार प्रदेश के कक्षा दसवीं में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा कक्षा 12वीं में अध्यनरत विद्यार्थियों को कोचिंग दी जाएगी। प्रदेश के 146 विकासखंड मुख्यालयों तथा चार शहर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं कोरबा सहित 150 कोचिंग सेंटर के माध्यम से राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा प्री-मेडिकल नीट तथा प्री-इंजीनियरिंग आईआईटी की बेहतर रूप से तैयारी हेतु ऑनलाइन कोचिंग प्रदान की जाएगी। कोचिंग राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के माध्यम से प्रदान की जाएगी। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से कोचिंग सेंटर की स्थापना की तैयारी कर प्रवेश प्रारंभ कर दिया गया है।

स्वामी आत्मानंद कोचिंग योजना में मेरिट क्रम अनुसार विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। विद्यार्थी को संबंधित विकासखंड, शहर के शासकीय स्कूलों में कक्षा 12 वीं का नियमित विद्यार्थी होना अनिवार्य होगा। विकासखंड मुख्यालय की स्कूलों में कक्षा 12 वीं में जीव विज्ञान तथा गणित संकाय में अध्ययनरत विद्यार्थी ही पात्र होंगे। प्रत्येक कोचिंग सेंटर में 75 से 100 विद्यार्थियों का प्रवेश दिया जाना है। इसमें प्री-मेडिकल तथा प्री-इंजीनियरिंग के लिए अधिकतम 50-50 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएगी। यह कक्षाएं शाम 3 बजे से 6.30 बजे तक संचालित होंगी। इस संबंध में विषय विशेषज्ञ नोडल अधिकारी एवं प्राचार्य को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों का नियमित आकलन तथा शिक्षकों की कक्षाओं के अध्यापन का भी अवलोकन किया जाएगा।

योजना के संबंध में पालकों का फीडबैक भी लिया जाएगा। ऑनलाइन कक्षाओं की यह विशेषता रहेगी कि यह टू-वे संवाद रहेगा अर्थात विद्यार्थी विषय विशेषज्ञों से प्रश्न पूछ सकेंगे। जेईई एवं नीट के लिए अलग-अलग कक्षाएं प्रदेश में संचालित आत्मानंद विद्यालय एवं अन्य विद्यालय में संचालित होंगी। प्रत्येक कोचिंग केंद्र में भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान एवं गणित विषय के लिए नोडल शिक्षक तथा एक मुख्य नोडल अधिकारी प्रिंसिपल अथवा सीनियर लेक्चरर स्टाफ के नियुक्त किए गए हैं। ऑनलाइन कोचिंग प्रदाता संस्थान विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड का विश्लेषण विद्यार्थियों का फीडबैक पालकों का फीडबैक इत्यादि इस कार्यक्रम की सघन मॉनिटरिंग हेतु मॉनिटरिंग अधिकारी भी नियुक्त किया जा रहे हैं।


हमें इंजीनियर्स से नवाचार को लेकर काफी उम्मीदें

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रायपुर। लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू तथा जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने आज दुर्ग में इंजीनियर्स डे पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने राजेंद्र पार्क चौक में जल संसाधन विभाग कार्यालय के सामने भारत रत्न स्वर्गीय सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की मूर्ति का अनावरण किया और अभियंताओं को बधाई और शुभकामनाएं दी। लोक निर्माण मंत्री साहू ने कहा कि हमारे इंजीनियर बहुत प्रतिभाशाली हैं। उनसे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार को लेकर काफी उम्मीदें हैं। 



उन्होंने कहा कि अभी भिलाई स्टील प्लांट से देश भर में हमारी पहचान है। हमारे अभियंताओं को दुर्ग शहर में भी ऐसा कुछ मॉडल वर्क तैयार करना चाहिए, जिससे दुर्ग शहर को भी इंजीनियरिंग नवाचार के लिए याद किया जाए। साहू ने कहा कि हमने इंजीनियर को काम देने के लिए उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में लगाया है। 5 हजार इंजीनियर विभिन्न प्रोजेक्ट में लगाए गए हैं। लगभग 16 हजार करोड़ रूपए के निर्माण प्रोजेक्ट प्रदेश में चल रहे हैं। जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि स्वर्गीय विश्वेश्वरैया का योगदान न केवल देश के लिए अहम है अपितु उन्होंने भारतीय प्रतिभा की धाक दुनिया भर में जमाई।

चौबे ने कहा कि जिस समय कावेरी नदी में कृष्णराज सागर बांध बनना था और अंग्रेज विशेषज्ञों ने कह दिया था कि यह बांध नहीं बन पाएगा, तब विश्वेश्वरीय ने यह चुनौती स्वीकार की और बांध का निर्माण कर दिखाया, जो इंजीनियरिंग का अपने समय का अद्भुत नमूना था। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी जल संसाधन संरचनाओं को देखते हैं, जो 100 साल तक भी पुरानी है, तो हमें लगता है कि कितनी मजबूती से हमारे इंजीनियर्स ने इन्हें बनाया होगा और तब हमें अपने अभियंताओं के ऊपर गर्व और भी बढ़ जाता है। 



मुझे यह भी लगता है कि यह संरचनाएं अगले 100 साल तक और चलेंगी। उन्होंने भारत रत्न स्वर्गीय सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या मूर्ति स्थापना के लिए जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता सुरेश पांडे को तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता अशोक श्रीवास और उनकी टीम को बधाई दी। इस मौके पर विधायक अरुण वोरा ने भी इंजीनियर्स डे की बधाई अभियंताओं को दी। महापौर धीरज बाकलीवाल ने भी इंजीनियर्स डे पर जिले के अभियंताओं को बधाई दी। इस मौके पर पूर्व विधायक श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर राजेंद्र साहू एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

जेईई एडवांस में प्रयास एवं एकलव्य के छात्रों का शानदार प्रदर्शन

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रायपुर। आईआईटी-एनआईटी एवं केन्द्र सरकार से वित्तपोषित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश हेतु प्रतिष्ठित जेईई परीक्षा के रविवार को घोषित परिणामों में आदिम जाति विभाग द्वारा संचालित प्रयास एवं एकलव्य के छात्रों के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ष जईई एडवांस 2021-22 हेतु प्रयास एवं एकलव्य आवासीय विद्यालयों के परीक्षा में बैठे कुल 217 विद्यार्थियों में से 54 ने जेईई क्वालीफाई किया है, जबकि 34 विद्यार्थियों को उनके रैंक के आधार पर आईआईटी, एनआईटी और समकक्ष इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश संभावित है।



प्राप्त जानकारी के अनुसार दस विद्यार्थियों को प्राप्त रैंक के आधार पर देश के किसी प्रतिष्ठित आईआईटी कॉलेज में आसानी से प्रवेश होगा। इसके अलावा ड्रॉपर्स बैच के परीक्षा में बैठे कुल 12 विद्यार्थियों में से 07 न क्वालीफाई किया है तथा 01 विद्यार्थी को रैंक के आधार पर आईआईटी में प्रवेश हो जाएगा। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विभागीय मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, सचिव आदिम जाति विभाग डी.डी. सिंह एवं आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

गौरतलब है कि प्रयास एवं एकलव्य विद्यालयों में अध्ययनरत् अधिकांश बच्चे ग्रामीण एवं जनजातीय परिवेश से आते हैं। ऐसे में देश की प्रतिष्ठित जेईई एडवासं परीक्षा में इनका चयन होना निश्चित ही बहुत गर्व की बात है। रायपुर के प्रयास, बालक एवं कन्या आवासीय विद्यालय के सर्वाधिक छात्रों ने क्वालीफाई किया है। घोषित परीक्षा परिणामों में प्रयास बालक आवासीय विद्यालय, रायपुर के सर्वाधिक 18 छात्रों ने क्वालीफाई किया, जबकि 14 विद्यार्थियों को उनके रैंक के आधार पर आईआईटी, एनआईटी और समकक्ष इजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश संभावित है, साथ ही 04 विद्यार्थियों का प्राप्त रैंक के आधार पर आईआईटी में प्रवेश हो जाएगा।

इसी प्रकार प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय, रायपुर की 13 छात्राओं ने क्वालीफाई किया है, जबकि 05 विद्यार्थियों को उनके रैंक के आधार पर आईआईटी, एनआईटी और समकक्ष इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश संभावित है एवं 01 छात्रा का आईआईटी में आसानी से एडमिशन हो जाएगा। इसके अलावा प्रयास, बिलासपुर के 04 प्रयास, अंबिकापुर के 04, प्रयास, दुर्ग के 03, प्रयास, कांकेर के 02, प्रयास, जगदलपुर कोरबा एवं जशपुर के 01-01 छात्र ने जेईई एडवांस में क्वालीफाई किया है। इसी प्रकार प्रदेश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के परीक्षा में सम्मिलित कुल 25 छात्रों में से 07 ने क्वालीफाई किया है, जबकि 06 विद्यार्थियों का उनके रैंक के आधार पर आईआईटी, एनआईटी और समकक्ष इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश संभावित है एवं 01 छात्र का आईआईटी में प्रवेश हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि प्रयास आवासीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से चयन होता है तथा इसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट शिक्षा की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश करने हेतु सक्षम बनाना है। इन विद्यालयों से अब तक 97 विद्यार्थी भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान, 261 विद्यार्थी राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान एवं 44 विद्यार्थियों ने राज्य के मेडिकल कॉलेजो में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त कर विशेष उपलब्धि हासिल की है।

इसके अलावा सी. ए. सी.एस., सी.एम.ए. में 29 तथा क्लेट में 03 विद्यार्थी प्रवेश प्राप्त करने में सफल रहे हैं। साथ ही राज्य के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब तक 833 विद्यार्थी प्रवेश प्राप्त करने में सफल रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के रायपुर में 02, दुर्ग, बिलासपुर अंबिकापुर कोरबा, जशपुर कांकेर तथा जगदलपुर में 1-1 इस तरह कुल 9 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज अब ‘‘झाड़ा सिरहा‘‘ के नाम से जाना जाएगा

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जगदलपुर। शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर अब ‘‘झाड़ा सिरहा के नाम से जाना जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इस महाविद्यालय का नामकरण ‘झाड़ा सिरहा शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर‘ किया गया है। 



उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर प्रवास के दौरान जनप्रतिनिधियों की मांग पर शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय का नामकरण झाड़ा सिरहा के नाम पर करने की घोषणा की थी। जिसके परिपालन में इस आशय का आदेश कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर द्वारा जारी किया गया है।

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