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छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात, 375.71 करोड़ की सड़कों को केंद्र की मंजूरी

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रायपुर। भारत सरकार द्वारा आदिवासी और दूरस्थ अंचलों के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चयनित जनजातीय बहुल विकासखंडों में 2449.108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। इस परियोजना की कुल लागत 375.71 करोड़ रुपये होगी, जिसे भारत सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।


केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर इस मंजूरी की जानकारी दी और इसे "पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों)" के जीवन में परिवर्तन लाने वाली पहल बताया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह योजना अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़कों के निर्माण से इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंग

पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत 2449.108 किलोमीटर लंबी नई सड़कें और 100 पुल की स्वीकृति दी गई है। मंत्री  चौहान ने राज्य सरकार से इन कार्यों की त्वरित स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।

चौहान ने यह भी अनुरोध किया है कि राज्य सरकार इन सड़कों के निर्माण कार्यों को शीघ्र शुरू कर फास्ट ट्रैक मोड पर पूरा कराए ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।

उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल और अधिक सफल होगी।

मुख्य बिंदु-:

- पीएमजीएसवाई के तहत 375.71 करोड़ रुपये की सड़कों को मंजूरी

- 2449.108 किलोमीटर नई सड़कें, 100 पुल की स्वीकृति

- जनजातीय बहुल ब्लॉकों में होगा कार्यान्वयन

- पीवीटीजी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

- केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से शीघ्र क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई

यह निर्णय राज्य के आदिवासी समुदायों के लिए न केवल एक विकास की राह खोलेगा बल्कि सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।


आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में बन रहा है नया रायपुर में संग्राहलय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो की स्मृति को चिर स्थाई बनाने और देश की आजादी में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में बन रहे शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय तैयार किया जा रहा है। यह संग्राहलय लगभग 50 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। संग्राहलय के निर्माण का अंतिम चरण में है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने इस संग्रहालय के निर्माण कार्यो की समीक्षा की और इसे 30 सिंतबर तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर भी उपस्थित थें।

प्रमुख सचिव बोरा ने राज्य में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्यों सहित सभी निर्माण कार्यो को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्हांेने इंजिनियरो को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी निर्माण कार्य को वर्षा ऋतु से पूर्ण कराए। जिन एकलव्य विद्यालयों तक अच्छे एप्रोच रोड़ नहीं है उनके संबंध में शीघ्र प्रस्ताव बनाकर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि एकलव्य विद्यालय के संचालन में यदि कोई भी समस्या आती है तो उन्हें शीघ्र अवगत कराया जाए ताकि यथाशीघ्र समस्या का निराकरण किया जा सके।   

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 14 मई को जनजातीय जीनवशैली से संबंधित ट्राईबल म्यूजियम का लोकार्पण किया है। इसे आम जनता के लिए भी खोल दिया गया है, जिसे देखने प्रतिदिन बड़ी संख्यां में लोगों का आगमन हो़ रहा है। बता दें कि ट्राईबल आर्टिफैक्टस का एआई तकनीक के माध्यम से इतने वृहद रूप में प्रदर्शन करने वाला संभवतः प्रदेश का पहला म्यूजियम है। इसके निर्माण से प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। इसी कड़ी में अब आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के नवंबर माह में लोकार्पण की तैयारी चल रही है।

बैठक में उपसचिव बी.एस.राजपूत, अपर संचालक आर एस भोई, उपायुक्त श्रीमती गायत्री नेताम, श्रीमती मेनका चंद्राकर, डॉ. रेशमा खान, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, रायपुर विजय सिंह कंवर, कार्यपालन अभियंता त्रिदीप चक्रवर्ती एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

जनजातीय गौरव यात्रा से मिली युवाओं और समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा : केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया

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रायपुर। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती से दो दिन पूर्व उनके स्मृति में जशपुर में आयोजित जनजातीय गौरव यात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय श्रम, युवा एवं रोजगार मामले तथा खेल मंत्री मनसुख मंडाविया, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित प्रदेश के मंत्रीगण शामिल हुए। स्थानीय रणजीता स्टेडियम में यात्रा के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मांडविया ने माई भारत वॉलिंटियर्स द्वारा आयोजित इस यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा में शामिल होकर यहाँ की आदिवासी संस्कृति, विरासत, यहाँ की रहन-सहन, वेशभूषा को देखने और जानने का अवसर मिला।

इस यात्रा से युवाओं को एकजुट होने और समाज को देश के प्रति जागरूक बनाते हुए उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी से प्रेरणा लेकर समाज आगे बढ़े और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा विकसित भारत बनाने के संकल्प से जुड़कर देश को विकास के साथ जुड़कर काम करें। केंद्रीय मंत्री मांडविया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के विकास के लिए जो योजनाएं बनाई है, उसमें आप सभी को जुड़ना है। माई भारत एप्लिकेशन में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन भी कराना है। केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि सुबह से पदयात्रा करते हुए यहाँ के लोक जीवन का परिचय हुआ। जनजाति समाज सहित अन्य समाज के लोग भी इसमें शामिल नजर आए और जगह-जगह अलग-अलग तरीके से स्वागत, अभिनन्दन करते रहे। 

जगह-जगह स्टॉल लगाकर पानी पिलाना, फल सहित अन्य खाद्य सामग्री बाटना और यात्रा में शामिल सभी लोगों को प्रोत्साहित करते हुए देखकर खुशी हुई। इस यात्रा के दौरान मैंने भी कुछ लोगों से बात की। मुझे देश का उज्ज्वल भविष्य नजर आया। मैं जान पाया कि हमारा देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जनजातीय गौरव यात्रा के सफल आयोजन के लिए सभी के प्रति आभार भी जताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आदिवासियों का गौरव लगातार बढ़ रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती 15 नवंबर को आज पूरे देश में आदिवासी स्वाभिमान और गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। सर्वाेच्च पद पर आज आदिवासी समाज की महिला द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति के रूप में सुशोभित हैं। 

अति पिछड़े आदिवासियों के विकास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्च प्राथमिकता दी है। पीएम जनमन योजना से जनजातीय समुदाय की तस्वीर बदल रही है। धरती आबा आदिवासी ग्राम उत्कर्ष योजना लॉन्च की गई है और इसके लिए 80 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को भी याद किया। आदिवासियों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने  भारत सरकार में पृथक आदिवासी विकास मंत्रालय का गठन किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजधानी रायपुर में 14 और 15 नवंबर को देश भर के आदिवासियों की संस्कृतियों का प्रदर्शन होगा। मुख्यमंत्री साय ने माटी के वीर पदयात्रा समारोह में शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री मांडविया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पदयात्रा बेहद सफल रही। उम्मीद से ज्यादा युवा पदयात्रा में शामिल हुए। लोगों को आदिवासी संस्कृति और जनजीवन को निकट से देखने का मौका मिला। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जय, जयकार से पूरा स्टेडियम गुंज उठा। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अन्याय के खिलाफ अंग्रेजों से लोहा लिया। लोगों को उनका हक दिलाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। युवाओं को भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर देश को विकसित बनाने के अभियान सहभागी बनना चाहिए।

आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज की पदयात्रा में 15 हजार से अधिक नौजवान शामिल हुए। सभी शुरू से अंत तक पैदल चलकर एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को गौरव दिवस के रूप में स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने पीएम जनमन सहित धरती आबा उत्कर्ष योजना से आ रहे बदलाव के बारे में बताया। वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने समारोह के अंत में आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद राधेश्याम राठिया एवं चिंतामणी महराज, विधायक श्रीमती गोमती साय, श्रीमती रायमुनि भगत, राम कुमार टोप्पो, सुशांत शुक्ला, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियम्बदा सिंह जूदेव सहित प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, रणविजय सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में युवा और नागरिकगण उपस्थित थे।

आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशुपर जिले के मयाली में सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक ली। प्राधिकरण के सदस्यगणों तथा प्रमुख विभागों के सचिवों के उपस्थित में मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण अंतर्गत् स्वीकृत कार्यो की समीक्षा की और निर्देशित किया कि अप्रारंभ कार्यो को निरस्त कर प्रगतिरत् कार्यो को शीघ्र पूर्ण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण के सदस्यों से वन-टू-वन चर्चा कर उनके क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और मांगों की जानकारी लेते हुए प्रस्ताव देने की अपील की। उन्होंने बैठक में सदस्यों द्वारा बताई गई समस्याओं का संबंधित विभाग के माध्यम से निराकरण के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने विधायक श्रीमती रेणुका सिंह की मांग पर सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बजट राशि को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ करने की घोषणा की। उन्होंने मयाली में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ की राशि देने की घोषणा भी की।

प्राधिकरण की बैठक संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के समय से ही प्रदेश का चहुमुखी विकास किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्र में विकास के लिए प्राधिकरण का गठन कर संसाधन उपलब्ध कराए। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में पांच प्राधिकरण है। हमारी सरकार चाहती है कि बस्तर से लेकर सरगुजा क्षेत्र तक का विकास हो। इसके लिए बजट में राशि नहीं होने पर प्राधिकरण के माध्यम से आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। भारत सरकार और राज्य सरकार चाहती है कि प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सहित सभी वर्गो का विकास हो। प्राधिकरण के माध्यम से इन क्षेत्रों में संसाधन की व्यवस्था कर विकास की गति को और आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने पीएम जनमन और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य और आदिवासी क्षेत्रों में विकास हेतु बजट का प्रावधान किया है। उनकी इन योजनाओं से राज्य के सभी क्षेत्रों में विकास कार्यो को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि उनकी सरकार ने बजट में आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए फोकस किया है। हमारी सरकार बस्तर और सरगुजा संभाग क्षेत्र के विकास के लिए वचनवद्ध होकर कार्य करेगी। मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के मयाली में प्राधिकरण की बैठक को लेकर जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारी की सरहाना की और कहा कि जशपुर जिले में खनिज संसाधनों का भण्डार होने के साथ ही वन एवं वनोपज की उपलब्धता है। यहॉ के वनोपज, महत्वपूर्ण उत्पादों का वैल्यू एडिशन कर ग्रामीणों एवं किसानों को आगे बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री साय ने प्राधिकरण की बैठक अपने गृह जिले तथा मयाली में करने के पीछे यहॉ के पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कहते हुए राजधानी रायपुर से बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की कि वे यहॉ के उत्पादों को देखे, इसका उपयोग करे और इन्हें बढ़ावा देने के साथ ही जशपुर जिले के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल को भी बढ़ावा दे।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में प्राधिकरण के सदस्यों द्वारा बताए गए समस्याओं को निराकरण करने की बात कही। उन्होंने लुण्ड्रा-बतौली क्षेत्र में गन्ना खरीदी केन्द्र को प्रारंभ करने की मांग का परीक्षण करने, विद्युत विहीन क्षेत्रों में विद्युत पहुंचाने की दिशा में कार्य करने, हाथी से जनहानि रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने, क्षति की राशि को बढ़ाने की दिशा में विचार करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने एकल बत्ती कनेक्शन सहित अन्य लोगों को अधिक बिजली बिल मिलने की शिकायत पर ऊर्जा सचिव रोहित यादव को निर्देशित किया कि बिजली बिल संबंधी शिकायतों का परीक्षण कर निराकरण कराए। उन्होंने खाद्य विभाग के सचिव को जशपुर जिले के कुछ स्थानों पर राशन की कमी संबंधित शिकायतों का निराकरण करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुनकुरी में जल संसाधन संभाग के संभागीय कार्यालय का लोकार्पण रिमोट का बंटन दबाकर किया।

बैठक में उपस्थित उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि सरगुजा और बस्तर क्षेत्र का विकास हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। प्राधिकरण अंतर्गत् आज की बैठक में शामिल होकर मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की विकास की प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्राधिकरण के माध्यम से सरगुजा संभाग के लोगों की जीवन में परिवर्तन लाकर उनके जीवन को सुलभ बनाने का काम हमारी सरकार करेगी। उप मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि उन्होंने अपने अधीनस्थ  लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, लोक निर्माण विभाग और नगरी प्रशासन विकास विभाग बैठक लेकर महत्वपूर्ण कार्यो को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने एवं अन्य कार्यो के लिए राशि जारी की है। पीडब्ल्यूडी अंतर्गत् सड़कों के मरम्मत के आदेश दिए गए हैं और तेज गति से कार्य करते हुए नवम्बर माह तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन अंतर्गत् कार्यो की समीक्षा कर घर-घर नल और जल पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस योजना में दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ‘‘हमने बनाया है हम ही संवारेगें‘‘ की दिशा में कार्य कर रही है।

प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने जशपुर जिले में पर्यटन की अपार संभावना होने की बात कहते हुए प्राधिकरण की बैठक मयाली में होना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के माध्यम से उत्तर क्षेत्र सरगुजा संभाग से विकास कार्यो की शुरूआत छत्तीसगढ़ को विकास की ओर ले जाएगा।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्राधिकरण का बैठक मयाली में आयोजित करने का उददेश्य इस क्षेत्र की समस्याओं को चिन्हित कर निराकृत करना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि गांव को ईकाई बनाकर विकास कार्यो की शुरूआत कर प्रदेश का विकास किया जा सकता है। उन्होंने सरगुजा संभाग के महत्वपूर्ण उत्पादों की जानकारी देते हुए इसे बढ़ावा देने पर जोर दिया। मंत्री नेताम ने प्राधिकरण के सदस्यों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र के आश्रम-छात्रावासों की समस्याओं से भी अवगत करावें, ताकि उन समस्याओं का समाधान किया जा सके।

बैठक में उद्योग, वाणिज्य एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्राधिकरण की पहली बैठक आयोजित करने पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि बैठक के माध्यम से सरगुजा संभाग में महत्वपूर्ण कार्य आसानी से हो पाएंगे।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रायगढ़ राधेश्याम राठिया, सांसद सरगुजा चिन्तामणी महराज, विधायक जशपुर श्रीमती रायमुनी भगत, विधायक लुण्ड्रा प्रमोद मिंज, विधायक प्रतापपुर श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्त, विधायक अंबिकापुर राजेश अग्रवाल, विधायक भरतपुर सोहत श्रीमती रेणुका सिंह, भैया लाल राजवाड़े तथा जिला पंचायत अध्यक्षों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित समस्याओं की जानकारी देकर निराकरण की मांग की गई। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों की समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

 

 

मुंबई में जशप्योर ब्रांड की भारी डिमांड, मुंबई के विभिन्न स्थानों में जशप्योर ब्रांड के उत्पादों की लगाई गई स्टॉल

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जशपुर के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सार्थक प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय आदिवासी स्व-सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार उत्पादों को मुम्बई में भी पसंद किया जा रहा है। प्रदर्शनी का अवलोकन करके बड़ी मात्रा में खरीदी भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के मार्गदर्शन में जशप्योर ब्रांड का मुंबई के विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाई गई है। जहॉ जशपुर जिले के स्थानीय कच्चे माल से बने उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। जशपुर की आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद अपनी शुद्धता और स्वास्थ्य लाभ के कारण उच्च मांग में हैं, क्योंकि इनमें कोई रसायन नहीं होते हैं, जिससे वे बाजार के अन्य उत्पादों की तुलना में स्वस्थ विकल्प बन जाती हैं।

इन स्टॉल गतिविधियों को महाराष्ट्र के जवाहर जिले के स्थानीय आदिवासी किसानों द्वारा निष्पादित किया जाता है। जिला प्रशासन की इस पहल से जशपुर जिले के आदिवासियों के साथ-साथ जवाहर जिले के आदिवासियों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

खाद्य प्रसंस्करण सलाहकार एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने कहा कि महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के उत्पाद, जैसे महुआ सिरप (शहद का महुआ आधारित विकल्प), महुआ आधारित चीनी मुक्त च्यवनप्राश विकल्प फॉरेस्टगोल्ड वन्यप्राश और बाजरा पास्ता के नियमित ग्राहक खरीदी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त छिन्द घास के हाथ से बने टोकरियॉ त्यौहारी मौसम के दौरान मांग बढ़ी हुई हैं। 

जशप्योर ब्रांड का स्टॉल डीसीबी बैंक मुख्यालय, मुंबई कैफे लीप लॉजिस्टिक्स, कांदिवली पश्चिम, गेब्स कैफेटेरिया, साकी नाका, अंधेरी वेस्ट, आदित्य बिड़ला अहुरा सेंटर वेस्ट, आईआईटी-मुंबई, पवई, सेंट्रल सबर्ब, गोरेगांव वेस्ट, वीवर्क-एक्सप्रेस टावर्स, नरीमन पॉइंट, दक्षिण, आनंद मेला, विक्रोली, सेंट्रल सबन,  पवई, केंद्र,  लोअर परेल, मुंबई, लीप लॉजिस्टिक्स, कांदिवली मुंबई, गेब्स-अंधेरी, साकी नाका, वीवर्क-स्पेक्ट्रम टावर्स, वेस्ट सबअर्ब मुंबई, वीवर्क-जेनिया बिल्डिंग ठाणे मुंबई सहित अन्य जगहों में लगाए गए हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और जशपुर और जवाहर जिले के दोनों के आदिवासियों को स्थायी रोजगार प्रदान करने में जिला प्रशासन के प्रयास सराहनीय हैं। यह पहल न केवल आदिवासी समुदायों को सशक्त बना रही है बल्कि इन अद्वितीय, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के माध्यम से उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री साय की पहल पर आदिवासी क्षेत्र में युवाओं का संवर रहा भविष्य

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में युवाओं का भविष्य संवर रहा है। मुख्यमंत्री साय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन की ओर से रोजगार एवं कौशल विकास को लेकर अनेक कार्य हो रहे है। जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए सार्थक पहल किया जा रहा है। इसी कड़ी में जशपुर जिला प्रशासन ने अभिनव पहल की है, इससे युवाओं का जीवन बदल रहा है। यहां युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए जशपुर में आवासीय नवसंकल्प शिक्षण संस्थान संचालित है। जहां आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई जा रही है। विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा दूरस्थ अंचल के बच्चों को वर्तमान में राज्य सेवा परीक्षा, उप पुलिस निरीक्षक, आरक्षक, शिक्षक भर्ती एवं नेट, सेेट, व्यापमं द्वारा आयोजित की जाने वाली भर्ती परीक्षाएं, बैकिंग, अग्निवीर और एसएससी सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है।

जिला प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री निःशुल्क दी जाती है, ताकि अधिक से अधिक बच्चे प्रतियोगी परीक्षा की तैयार करके अपना भविष्य संवार सके। नवसंकल्प शिक्षण संस्थान में रहकर तैयारी कर एसएससी जीडी उत्तीर्ण कर चुके जशपुर बेलडीपा के युवा नेहरूलाल ने बताया कि पहले क्षेत्रवासियों को सेंट्रल लेवल परीक्षा की तैयारी के लिए दूर जाना पड़ता था। अब जशपुर में ही उन्हें निःशुल्क पढ़ाई की सुविधा मिलने लगी है।

सोगड़ा के सोनकश्यप प्रधान ने कहा कि मेरे घर वाले इतना फीस नही दे पाते थे कि कही और जाकर एसएससी जीडी की तैयारी कर सकू। नवसंकल्प शिक्षण संस्थान द्वारा हमें प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के साथ-साथ हॉस्टल और मेस की सुविधा प्रदान की जाती है। एसएससी जीडी उत्तीर्ण शेखरपुर की अमीना ने कहा कि वे नवसंकल्प शिक्षण संस्थान जशपुर में रहकर तैयारी करते हुए उन्हें एसएससी जीडी में सफलता मिली है।

नवसंकल्प शिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह संस्था आवासीय है। जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की बच्चों को तैयारी कराई जाती है और अब तक इसमें से करीब 150 बच्चें विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए सेलेक्ट हो चुके हैं। उन्होंने ने कहा कि संस्था में युवाओं का परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ सर्वांगीण विकास हो रहा है। विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा की तैयार कर रहे युवाओं ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार जताते हुए धन्यवाद दिए।

बैगा बाहुल्य गांवों में डायरिया, मलेरिया और मौसमी बीमारियों रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

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रायपुर। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा कल शुक्रवार को कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखण्ड के सुदूर वनांचल ग्राम सोनवाही पहुंचकर ग्रामीणों सहित पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात की। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने ग्राम सोनवाही में 10 जुलाई को हुई दो ग्रामीणों की आकस्मिक मृत्यु पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की।

उन्होंने ग्राम सोनवाही के आदिवासी बालक छात्रावास में बनाए गए अस्थाई स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया और उपचार कराने आए मरीजों से चर्चा की। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर उपचार करने के निर्देश दिए। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशानुरूप एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जिस तरह से प्रधानमंत्री जनमन योजना पर जिस तरह से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उस पर तेजी से कारवाई करते हुए योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

उपमुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देशित करते हुए कहा कि वनांचल सहित मैदानी क्षेत्रों में मौसमी बीमारी, डायरिया, उल्टी दस्त और जलजनित बीमारियों का संक्रमण न हो इसके लिए प्रभावी कार्य योजना बनाने की जरूरत है। उन्हांने कलेक्टर को वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने और और मलेरिया, डायरिया सहित मौसमी बीमारियों के बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सुदूर वनांचल क्षेत्र चिल्फी, झलमला और तरेगांव जंगल के शासकीय अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन डीएमएफ से शीघ्र क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने वनांचल सभी गांवों में स्वास्थ्य शिविर, जल स्त्रोतो का क्लोनिशेन कराने के निर्देश दिए।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से पूरे घटना की विस्तृत जानकारी भी ली। कलेक्टर महोबे ने बताया कि ग्राम सोनवाही में 10 जुलाई को दो ग्रामीणों की मौत हुई है। पांच ग्रामीणों की मृत्यु होने की बात सामने आई थी। इस विषय पर बोड़ला एसडीएम और सीएमएचओ को जांच और घर-घर पहुंच कर सर्वें करने के निर्देश दिए गए थे। सोनवाही में जो पांच ग्रामीणों की मौत की खबर थी, वह अलग-अलग कारणों से और अलग-अलग जगह में हुई है। सभी का मृत्यु का कारण डायरिया या उल्टी-दस्त नहीं हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बीएल राज ने बताया कि 10 जलाई को गांव में दो ग्रामीणों की मृत्यु होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पास के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र झलमला के चिकित्सक और स्वास्थ्य अमला 10 जुलाई को पहुंचकर गांव के आदिवासी बालक आश्रम छात्रावास में अस्थायी रूप से अस्पताल बनाया गया और वहां ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण का काम शुरू किया गया। दूसरे दिन 11 जुलाई को कलेक्टर के निर्देश पर जिला स्तर और चिल्फी के और अतिरिक्त स्वास्थ्य टीम को भेजकर ग्राम सोनवाही में तैनात किया गया।

सीएमएचओ डॉ राज ने बताया कि 10 जुलाई को गांव के सोनसिंह  पिता ईतवारी उम्र लगभग 45 वर्ष और एक महिला श्रीमती फूलबाई पति मंगल सिंह उम्र लगभग 35 वर्ष की मृत्यु की सूचना मिली। ग्रामीणों के मुताबिक सोनसिंह अपने खेत से काम कर घर लौटा था, उन्होंने अपने तबियत खराब होने की जानकारी अपने घर वालों को दी। इसके बाद उन्होने उल्टियां शुरू हुई और तीन से चार घंटे के दौरान उनकी घर पर ही हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक इसी प्रकार महिला फूलबाई की मृत्यु भी उल्टी से हुई। दो ग्रामीणों की अकास्मिक मृत्यु के बारे में ग्रामीणों से चर्चा की गई। जांच और पूछताछ के प्रथम दृष्टयता में जहरीले मशरूम से फूड पायजिनिंग की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, रिपोर्ट आने के बाद कारण स्पष्ट हो जाएगी। ग्रामीणों से पूछताछ और चर्चा के दौरान तीन और ग्रामीणों की मौत की जानकारी दी गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक 8 जुलाई को सुरेश कुमार की मृत्यु अज्ञात करणों से हुई है। इसी प्रकार 8 जुलाई लिलेश्वरी पति पुसु राम की मृत्यु मध्यप्रदेश के ग्राम लालखार में हुई है। ग्राम सोनवाही मृतक का ससुराल था। जचकी होने के बाद उनके परिवार के लोग अपने घर लालखार ले गए, वहां उनकी मृत्यु हुई है। 4 जुलाई को शांति बाई पति राजकुमार की मृत्यु सहसपुर लोहारा के पड़की पारा में हुई है। मृतक महिला का ससुराल ग्राम सोनवाही था। ग्रामीणों द्वारा इन सभी की मौत को उल्टी-दस्त या डायरिया से बताई जा रही थी। सभी मृतकों की मृत्यु की वजह अलग-अलग है। 

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने अस्थाई स्वास्थ्य केन्द्र का किया निरीक्षण, उप स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती मरीजों का बेहतर स्वास्थ्य उपचार करने के दिए निर्देश

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अस्थाई स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया और उपचार कराने आए मरीजों से चर्चा की। कलेक्टर जनमेजय महोबे ने बताया कि ग्राम सोनवाही में 194 घर है, जिसकी कुल आबादी 580 है। इस गांव में 12 कुंआ और 02 हैंडपंप है। एक मितानिन भी कार्यरत है। उन्होंने बताया कि बिमारी के लक्षण मिलने पर गांव में लोगों का लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। 11 जुलाई को 194 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था, जिसमें 08 लोगों का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उप स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती किया गया। इनमें 07 लोगों को मौसमी बुखार के लक्षण और 01 को उल्टी हो रही थी। जांच के दौरान 19 मलेरिया पॉजिटीव पाए गए। इसी प्रकार 12 जुलाई को 144 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया जिसमें 12 को मौसमी, सर्दी बुखार के लक्षण पाए गए है, जिनक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र झलमला में भर्ती कराया गया है। जांच के दौरान 10 मलेरिया पॉजिटीव पाएं गए। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने सभी मरीजों का बेहतर स्वास्थ्य उपचार करने के निर्देश दिए।

संघर्षों में बीता विष्णु देव साय का जीवन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को जनसंघ की विरासत अपने दादा स्वर्गीय बुधनाथ साय से मिली। उनके दादा स्वतंत्रता के पश्चात सन् 1947 से 1952 तक तत्कालीन सीपी एंड बरार विधानसभा में मनोनीत विधायक भी रहे। साय का परिवार शुरू से ही जनसंघ से जुड़ा रहा। उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय वर्ष 1977-79 तक जनता पार्टी सरकार में संचार राज्य मंत्री रहे।
                
जिला मुख्यालय जशपुर से 57 किलोमीटर दूर छोटे से आदिवासी बहुल गांव बगिया के निवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किसान परिवार से आते हैं। बगिया की प्राथमिक शाला में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने कुनकुरी के लोयोला मिशनरी स्कूल में एडमिशन लिया। कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह अंबिकापुर गए। जब वह प्रथम वर्ष में थे, तभी उनके पिता रामप्रसाद साय का निधन हो गया। घर परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए वह पढ़ाई छोड़कर गांव वापस आ गए। बगिया में मैनी नदी के तट पर साय परिवार का आवास है। विष्णु देव साय मंत्री, सांसद, विधायक रहे लेकिन वह अपने पैतृक गांव को नहीं छोड़ा। अपने दो भाईयों को पढ़ाकर-लिखाकर उन्होंने काबिल बनाया। उनके एक भाई जयप्रकाश साय भारत हैवी इलेक्ट्रिकल में इंजीनियर हैं। एक भाई ओमप्रकाश साय सरपंच थे। अभी चार माह पूर्व ही उनका असामयिक निधन हुआ।

साय की मां श्रीमती जसमनी देवी ने कहा मेरे बेटे बाबू (विष्णु देव का निकनेम) ने सबसे पहले परिवार की सेवा की, फिर गांव की सेवा की, विधायक, सांसद, मंत्री रहकर क्षेत्र की सेवा की, अब मुख्यमंत्री बनकर राज्य की सेवा करेगा। भावुक होकर उन्होंने कहा कि आज ओमप्रकाश रहता, तो यह खुशी दोगुनी हो जाती।

विष्णु देव साय पढ़ाई के लिए किए गए अपने संघर्ष को अक्सर याद करते हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में स्कूलों के विकास पर सदैव ध्यान दिया। अपने गांव में जिस सरकारी स्कूल में उन्होंने प्राइमरी की पढ़ाई की थी वह अब हाईस्कूल बन गया है।

खेती-बाड़ी में रुचि रखते हैं सीएम-

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खेती किसानी में बहुत रुचि रखते हैं। नदी के तट पर अपने घर में वह सब्जियां उगाते हैं। कोरोना काल में वह गांव में सब्जी उगाते रहे और अन्य किसानों को भी प्रेरित करते रहे। उन्होंने मैनी नदी पर पुल बनवाया। नदी की रेत में खीरा, ककड़ी, मूंगफली आदि की खेती के लिए गांव के किसानों को प्रेरित किया। उनके प्रयासों से गांव में कृषि के क्षेत्र में उन्नति हुई है।

जड़ी-बूटियों का है ज्ञान-

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जंगली जड़ी-बूटियों के अच्छे जानकार हैं। वह पथरी की अचूक दवा देते हैं। उनके कई लाभार्थी उनकी दवा की प्रशंसा करते हैं। साय ने जनजाति समाज के विकास के लिए काम किया। कंवरधाम के विकास का श्रेय उन्हें दिया जाता है। जनजाति समाज के आयोजनों में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या अग्रणी भूमिका में रहती हैं। साय की दो पुत्रियों में से बड़ी बेटी निवृत्ति की शादी धमतरी में हुई है। दूसरी पुत्री स्मृति अभी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनके पुत्र तोशेंद्र ने पत्रकारिता व लिट्रेचर की पढ़ाई की है और वर्तमान में रायपुर में फिटनेस इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं।

बचपन से ही ऐसे ही विनम्र, मिलनसार और सबसे अच्छे व्यवहार करने वाले रहे हैं विष्णु देव साय - माताश्री जसमनी देवी

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रायपुर। नवनियुक्त मुख्यमंत्री विष्णु देव साय चार भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनका स्वभाव बेहद विनम्र, मिलनसार और सादगी पूर्ण रहा है। बचपन में भी उनकी बाल अवस्था बिल्कुल ऐसी ही था। तब भी वह उतने ही शांत स्वभाव और अच्छे व्यवहार के थे। घर में खाने पर जो मिल जाए, उसे उतने ही चाव से खा लेते थे, खाने पीने को लेकर भी कभी कोई विशेष रुचि नहीं थी।

प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ग्राम बगिया स्थित आवास पर उनकी माताश्री जसमनी देवी ने बताया कि विष्णु देव साय का स्वभाव बचपन से ही बेहद विनम्र था। हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के बाद ही उनकी रुचि राजनीति के माध्यम से लोगों की सेवा करने की ओर ऐसा मुडी की फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। गांव के पंच और फिर सरपंच से उन्होंने क्षेत्र के जन प्रतिनिधित्व करने की शुरुआत की। उन्होंने अपना दायरा बढ़ाते हुए पहले विधायक फिर संसद फिर केंद्रीय मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहते हुए क्षेत्र और लोगों की समस्याओं के निराकरण का जो बीड़ा उठाया उसको लेकर घर में हमेशा लोगों का मेला लगा रहता था।

चार भाइयों में सबसे बड़े विष्णुदेव साय

प्रदेश के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की माताश्री बताती हैं कि उनके चार बेटों में सबसे बड़े विष्णु देव साय उसके बाद विनोद कुमार साय, ओम प्रकाश साय और जयप्रकाश साय हैं। इनमें से विनोद कुमार साय रायपुर में बिजली विभाग में अधिकारी है। जयप्रकाश मुंबई में भेल में नौकरी करते हैं। श्रीमती जसमनी देवी ने बताया कि उनके एक बेटे ओमप्रकाश साय का पिछले वर्ष ही देहांत हो गया और उनकी धर्म पत्नी अब हमारे बगिया पंचायत की सरपंच है। बचपन से क्षेत्र और लोगों की समस्या को आसान करने का काम किया। अब छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करेंगे।

जशपुर जिले के छोटे से गांव बगिया में किसान परिवार में जन्मे विष्णु देव साय को अब, पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के रूप में मिलने पर अब उन्हें कैसा महसूस हो रहा है और वह इस क्षेत्र में किस तरह का विकास होता देखना चाहेंगे। इस पर मुख्यमंत्री की माताश्री ने कहा कि उनके घर में जमाने से दीन दुखियों और अपनी समस्या से परेशान लोगों की हमेशा एक भीड़ सी रही है अब उनका बेटा मुख्यमंत्री है तो वह और व्यापक रूप में क्षेत्र और प्रदेश की जनता की समस्याओं का निराकरण करने व्यापक स्तर में काम करेंगे। 

इसको लेकर एक आनंद की अनुभूति है अब उनका बेटा छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करेगा। इससे अच्छा और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा की क्षेत्र में बिजली, शिक्षा, सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर और अच्छा काम हो ऐसी उन्हें उम्मीद है।

बस्तर अंचल के विकास में प्राधिकरण ने नए आयाम किए स्थापित- बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण अध्यक्ष लखेश्वर बघेल

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रायपुर। बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने कहा कि संभाग के सभी जिलों में मुख्यमंत्री की घोषणाओं, वनाधिकार मान्यता पत्र देवगुड़ियों को सामुदायिक वनाधिकार मान्यता पत्र देने में बहुत अच्छा कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्राधिकरण के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका के फलस्वरूप बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण ने विगत साढ़े 4 वर्षों के दौरान बस्तर के विकास में नये आयाम स्थापित किया है।

बविप्रा अध्यक्ष बघेल सोमवार को नारायणपुर जिले के जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि सभी जिलों के कलेक्टर ने प्राधिकरण के अनुशंसित कार्यों को बेहतर ढंग से सम्पादित कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने देवगुड़ी, घोटुल निर्माण सहित उचित मूल्य दुकान, आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण, सामाजिक भवन निर्माण कार्यों को जल्द पूर्ण करने पर बल देते हुए कहा कि बस्तर की जनता के हित में शासन की प्राथमिकता वाली सभी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल में स्पष्ट परिलक्षित होनी चाहिए।

इस दौरान आदिम जाति कल्याण मंत्री मोहन मरकाम ने कहा कि प्राधिकरण के निर्णयों और कार्यों को समय पर क्रियान्वयन करने के साथ ही राज्य सरकार की योजनाओं से समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभान्वित किये जाने के लिए संवेदनशीलता के साथ प्रयास किया जाये। उन्होंने बारिश के बाद सड़क निर्माण तथा सड़क मरम्मत कार्यो को प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किये जाने कहा। बैठक को बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी और संतराम नेताम ने भी संबोधित कर विकास कार्यों में गति देने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया। इस दौरान विधायक नारायणपुर चंदन कश्यप ने नारायणपुर जिले की सड़कों की मरम्मत शीघ्र करने पर बल दिया।

बैठक में आयुक्त एवं सदस्य सचिव बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण श्याम धावड़े ने बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के माध्यम से अब तक किए गये विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए बस्तर की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में पुरखती कागजात एवं सामाजिक ताना-बाना पुस्तकों के प्रकाशन की जानकारी दी। संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचन्द जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष व विधायक नारायणपुर चंदन कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक श्रीमती देवती कर्मा,चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम,अंतागढ़ विधायक अनूप नाग, भानुप्रतापपुर विधायक श्रीमती सावित्री मंडावी, सभी जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष, प्राधिकरण के मनोनीत सदस्य, कमिश्नर और बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के सदस्य सचिव श्याम धावड़े, आई जी सुंदरराज पी.,कांकेर, बस्तर, सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों के कलेक्टर, सभी सातों जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, वन मंडलाधिकारी, संभाग स्तरीय अधिकारी और एनएमडीसी के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान विगत बैठक के निर्णयों के क्रियान्वयन स्थिति की समीक्षा की गई। वहीं बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में अंत्यावसायी प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में सभी जिलों से ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के दौरान आने वाले देव विग्रहों सहित लोगों के ठहरने हेतु पृथक-पृथक विश्रामगृह बनाने का निर्णय लिया गया। वहीं नगरीय निकायों के अंतर्गत स्थित देवगुड़ी एवं मातागुड़ी का सामुदायिक वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदाय करने की सहमति व्यक्त की गई। इसके साथ ही विधायकों तथा सदस्यों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार कर स्वीकृति प्रदान करने की सहमति जताई गई।

एजेंडानुसार आदिवासी संग्रहालय के लिए गीदम रोड में स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग के रिक्त जमीन को विकसित करने पर चर्चा किया गया। दन्तेवाड़ा जिले के लाल पानी प्रभावित ग्रामों में जलप्रदाय कार्य की आगामी बैठक से पूर्व निराकरण करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी को राष्ट्रीय राजमार्ग के मरम्मत सहित राजमार्ग में स्थित शहरों में लाईटिंग की व्यवस्था को दूरूस्त करवाने और अंतागढ़ से नारायणपुर राज्यमार्ग निर्माण के लिए आवश्यक निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए गए। सदस्यों ने बैगा, सिरहा, गुनिया, मांझी, पुजारी लोगों का राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्रदाय स्थिति की जानकारी पंचायत सचिव एवं सरपंच-कोटवारों के जरिये दिये जाने कहा। वहीं स्कूलों में दर्ज संख्या के अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना किये जाने पर बल दिया। एजेंडावार समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने संबोधन की शुरुआत की, कका अभी जिंदा है कहकर अपनी बात की आरम्भ

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रायपुर। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल 4 मई से हमने भेंट मुलाकात कार्यक्रम आरम्भ किया। सबसे भेंट की। समाज प्रमुखों से मिले। उस समय मन में आया कि युवाओं के साथ पृथक से संवाद हुआ।

मुख्यमंत्री ने पूछा कि किन युवाओं ने रायपुर और बिलासपुर का प्रोग्राम यूट्यूब से देखा। युवाओं ने आवाज लगाई हमने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ युवाओं ने अपनी आकांक्षा बताई। उनका जो सपना है। वही हमारे पुरखों का भी सपना था। सरकार का भी यही सपना है। पौने 2 लाख करोड़ रुपये पैसा डालने का काम हमारी सरकार ने किया। इससे मंदी नहीं आई। यूनिवर्सिटी खोले, 4 मेडिकल कॉलेज खोले।

जहां -जहां भेंट मुलाकात के लिए गए, दो मांग आती है स्वामी आत्मानंद स्कूल खोल दें और बैंक खोल दें। इतने साल हो गए इंग्लिश माध्यम के कॉलेज नहीं थे। हमने 10 कॉलेज खोले। आगे भी खोलेंगे।

अब छत्तीसगढ़ की पहचान हमारी विशिष्ट संस्कृति से है। चाहे आदिवासी परम्परा हो, राम वन पथ गमन हो, कबीर सरोवर हो या बाबा घासीदास के पुण्यस्थलों से जुड़े स्थलों का विकास।

1 मई को जब हम बोरे बासी खाये तो सभी ने खाया। अब शिक्षा और संस्कृति से सम्पन्न भविष्य नई पीढ़ी का होगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि पिछले साल 4 मई से हमने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरुआत की।

शहर और गांव क्षेत्र में सभी वर्गों के लोगों से मुलाकात की। उस समय से ही मन में था कि युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात करना है।

इस क्रम में पहले रायपुर फिर बिलासपुर में भेंट-मुलाकात किए और आज दुर्ग संभाग में भेंट-मुलाकत कर रहे हैं।

अभी कुछ युवाओं ने मंच में आकर विभिन्न प्रस्तुतियां दी।

पेशाबकांड के आरोपी के घर पर चलेगा बुलडोजर, गृहमंत्री का ऐलान

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शख्स के पर पेशाब करने के मामले में सरकार हरकत में आ गई है. आरोपी प्रवेश शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद अब सरकार एनएसए की कार्रवाई करने के साथ ही आरोपी के खिलाफ बुलडोजर एक्शन लेगी. मध्य प्रदेश के सीधी में एक आदिवासी शख़्स पर प्रवेश शुक्ला नाम के व्यक्ति ने बेहद निंदनीय कृत्य किया. उस पर पेशाब कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने सरकार को जमकर घेरा.


वहीं मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही. आरोपी पर NSA लगाने को लेकर भी कहा गया. बता दें कि आरोपी को रात के दो बजे गिरफ़्तार किया गया.

सीधी मामले पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि,ये बहुत ही निंदनीय कृत्य है. मुख्य मंत्री ने आदेश दिए थे कि इस मामले में NSA के तहत कार्यवाही की जाये और वही हो रही है.

बुलडोज़र एक्शन पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, जहां अतिक्रमण होगा वहां बुलडोज़र चलेगा. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक बयान में कहा कि,अतिक्रमण के बारे में जानकारी मिली है. बुलडोज़र भी चलाया जाएगा. हाल ही में भोपाल में एक शख़्स को कुत्ता बनाया गया था उसके बाद महज़ 6 घंटे के भीतर बुलडोज़र की कार्यवाई हुई थी. आज भी उसी तरह की तस्वीर नज़र आएगी.

बीजेपी ने कहा हमारा कार्यकर्ता नहीं

प्रवेश शुक्ला की बीजेपी सदस्याता परगृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि, हमारे वहां के विधायक का बयान आ गया है उन्होंने बता दिया है. ऐसी घटना क्यू हुई ? ये देखने में ही बहुत घृणित लग रहा है . इस मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ये शख़्स बीजेपी का है. मगर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा स्थानीय विधायक केदार शुक्ला कह चुके हैं कि उनका कोई लेना देना नहीं है.

छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहारों के आयोजन से हमारी नई पीढ़ी अपनी परंपरा और प्रकृति से जुड़ेगी : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में राज्य के गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाका शुभारंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों के तीज-त्यौहारों, संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से यह योजना मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना की तर्ज पर शुरू की गई है।
                     

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाराज्य के गैर अनुसूचित क्षेत्रों के सामुदायिक क्षेत्रों के 61 विकासखंड की 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों में लागू होगी। इस योजना की इकाई ग्राम पंचायत होगी। तीज-त्यौहार मनाने के लिए इस योजना में भी हर ग्राम पंचायत को दो किश्तों में 10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने योजना के शुभारंभ के अवसर पर योजना की पहली किश्त के रूप में सभी 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों को 05-05 हजार रुपए के मान से कुल 03 करोड़ 05 लाख 55 हजार रुपए की राशि जारी की।

मुख्यमंत्री बघेल ने इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री आदिवासी परव सम्मान निधिके अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र के सरगुजा संभाग सहित अन्य अनुसूचित क्षेत्रों के शेष 14 जिलों की 03 हजार 793 ग्राम पंचायतों को आज प्रथम किश्त के रुप मे 05-05 हजार रुपए के मान से कुल 01 करोड़ 89 लाख 65 हजार रुपए की राशि भी जारी की। इसके साथ ही यह योजना पूरे प्रदेश में लागू हो गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बघेल ने 13 अप्रैल को बस्तर में आयोजित भरोसा सम्मेलन में मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजनाका शुभारंभ करते हुए बस्तर संभाग की 1840 ग्राम पंचायतों को योजना की पहली किश्त के रूप में 5-5 हजार रुपए के मान से अनुदान राशि जारी की थी।

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में यहां की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का काम अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में तीजा, हरेली, भक्तिन महतारी कर्मा जयंती, मां शाकंभरी जयंती (छेरछेरा), छठ और विश्व आदिवासी दिवस जैसे पर्वाे पर सार्वजनिक अवकाश दिया जा रहा है। साथ ही इन पर्वों पर भव्य आयोजन भी किया जा रहा है। राज्य शासन की यह भावना है कि तीज-त्यौहारों के माध्यम से हमारी नयी पीढ़ी अपने पारंपरिक मूल्यों से जुड़कर संस्कारित हो और अपनी संस्कृति पर गौरव का अनुभव करे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव, युवा महोत्सव, छत्तीसगढ़िया ओलंपिक जैसे आयोजनों के पीछे भी हमारा यही उद्देश्य है। देवगुड़ियाँ और घोटुलों के विकास का काम भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारे लोक पर्व और हमारी लोक संस्कृति प्रकृति से जुड़ी है। हमारे पुरखों ने अपने अनुभव के आधार पर तीज-त्योहारों को संजोया है। हमारे तीज-त्यौहार हरेली से शुरू होते हैं और फागुन में होली तक चलते हैं। सावन और भादों में ज्यादा त्यौहार मनाए जाते हैं, क्योंकि यही वह समय रहता है जब हमारे किसान और मजदूर खूब मेहनत करते हैं, शरीर में थकान रहती है और आर्थिक परेशानियां भी रहती हैं। इस समय त्यौहारों का आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है कि सब मिलजुल कर इकट्ठा होकर त्यौहार मनाते हैं ताकि तनाव को भूल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम तीज त्यौहारों का संरक्षण और संवर्धन करेंगे तो प्रकृति से भी जुड़ेंगे। आज हमारे सामने जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोक परब सम्मान निधि के अंतर्गत हालांकि 10 हजार रूपए की राशि दी जा रही है, यह कोई बड़ी राशि नहीं है लेकिन पंचायतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहारों का आयोजन होने से लोग अपनी परंपरा से, हमारी नई पीढ़ी अपनी परंपरा और प्रकृति से जुड़ेगी।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों को मनाने की केवल रस्म अदायगी होती थी। लोग इन त्यौहारों से विलग होते जा रहे थे। यही कारण है कि राज्य सरकार ने तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए इनका आयोजन प्रारंभ किया है। आज बालोद जिले की भेंड़िया नवागांव की सरपंच श्रीमती आर्य ने बताया कि वे हर तीज में वे मुख्यमंत्री निवास आती हैं। पहले मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों का आयोजन नहीं होता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन इस वर्ष किया गया, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के 26 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ी ओलंपिक के लिए बजट में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। भेंट-मुलाकात के दौरान अनेक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे मायके में खेलों में हिस्सा लिया करती थीं, ससुराल में उनका खेलना छूट गया था। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में उन्हें फिर से खेलने का मौका मिला।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में खूब काम किया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों और गैर अनुसूचित क्षेत्रों में अपने तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री परब निधि सम्मान योजना काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी तीज-त्यौहारों की परम्परा को आगामी पीढ़ी को हस्तांतरित करने और अपनी संस्कृति को उभारने की दृष्टि से यह अच्छी योजना है। मुख्यमंत्री ने बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत बसंतपुर के सरपंच रामवृक्ष जगते, रायगढ़ जिले की ग्राम सरपंच लोइंग के सरपंच सूरज पटेल और बालोद के भेड़िया नवा गांव की सरपंच श्रीमती चिदाकाश आर्य से वीडियो कांफ्रेंस से चर्चा की। सरपंचों ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा मिला है। परब सम्मान निधि योजना प्रारंभ करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।  

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाकी विस्तार से जानकारी दी।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अनुसूचित जाति विभाग के सचिव डी.डी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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