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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कैंसर अस्पताल का होगा उन्नयन, जनता को मिलेगी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ नई ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर हैं। इसी क्रम में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित कैंसर अस्पताल की जी प्लस टू (ग्राउंड फ्लोर प्लस दो मंजिल) बिल्डिंग का विस्तार होकर जी प्लस सिक्स (ग्राउंड फ्लोर प्लस छः मंजिल) में उन्नयन होने जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने बताया कि इन परियोजना के लिए लगभग 39.36 करोड़ रूपए की पुनरीक्षित राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने एक बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कार्य को जल्द गति दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यह बिल्डिंग सिर्फ किसी भवन या निर्माण कार्य का विस्तार नहीं बल्कि प्रदेश की जनता के लिए उम्मीद की नई किरण है। कैंसर अस्पताल के जी प्लस सिक्स के विस्तार के साथ राज्य की जनता को भी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए कहा है कि यह कदम छत्तीसगढ़ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में अग्रसर होगा।


कोतबा के स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन के लिए 4.37 करोड़ रूपए की स्वीकृति

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल से जशपुर जिले के कोतबा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अब 50 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन और वहाँ आवश्यक अधोसंरचना निर्माण के लिए 4 करोड़ 37 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इस राशि से भवन निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा


कोतबा क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी सौगात है। इससे पूर्व जशपुर जिले को 220 बिस्तर वाले आधुनिक अस्पताल की स्वीकृति मिल चुकी है, जो जिले की स्वास्थ्य सुविधा को एक नई मजबूती देगा। वहीं कुनकुरी विकास खंड के ग्राम गिना बहार में 8 करोड़ की लागत से 50 बिस्तरीय मातृत्व और शिशु अस्पताल बनाने की भी स्वीकृत दी जा चुकी है। जिससे मां और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कोतबा समेत आस-पास के ग्रामीण अंचलों के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा की इससे कोतबा क्षेत्र के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सौगातें मिल रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।



छत्तीसगढ़ में अब तक 50 कोविड-19 मरीजों की पुष्टि सभी मरीजों में सामान्य लक्षण, घबराने की नहीं है आवश्यकता

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कोविड-19 के जो भी मामले सामने आए हैं, उनमें अधिकतर मरीजों में सामान्य इंफ्लूएंजा जैसे लक्षण ही देखे जा रहे हैं, जैसे हल्का बुखार, सर्दी-खांसी या गले में खराश। विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्षणों के चलते अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और मरीजों की स्थिति स्थिर बनी हुई है।


अब तक राज्य में कुल 1183 लोगों की जांच की गई है, जिनमें से 50 व्यक्तियों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि सभी संक्रमितों में सिर्फ सामान्य सर्दी-खांसी जैसे हल्के लक्षण पाए गए हैं और केवल गंभीर लक्षण वाले व्यक्तियांे को चिकित्सालय में उपचार हेतु संदर्भित करने के लिए निर्देश दिये गये है।

सतर्कता के साथ संपर्क जांच और निगरानी का कार्य जारी

आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए हैं। जिन व्यक्तियों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर जांच की जा रही है। साथ ही, उनके निवास क्षेत्रों में स्वास्थ्य दल भेजकर सर्वेक्षण किया गया है। यदि किसी में लक्षण पाए जा रहे हैं तो उसकी जांच कराई जा रही है, और गंभीर लक्षण होने की स्थिति में उपचार के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है।

राज्य भर में मॉक ड्रिल, सभी अस्पताल तैयार

5 जून 2025 को पूरे राज्य के अस्पतालों में कोविड-19 की रोकथाम एवं उपचार की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान सभी जिलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संक्रमण से निपटने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जनों और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल  कोविड-19 के संदिग्ध मामलों की निगरानी करें, आवश्यक जांच कराएं, और समय पर सैंपल परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

घबराएं नहीं, सतर्क रहें: विशेषज्ञों की सलाह

भारत सरकार के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में कोविड-19 के लक्षण सामान्य फ्लू की तरह ही हैं, जिससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार ने मौसमी बीमारियों और कोविड-19 दोनों से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी में हल्के सर्दी-जुकाम, बुखार या गले में खराश जैसे लक्षण दिखें, तो वह निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें। सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे सजग रहें, लेकिन भयभीत न हों। राज्य सरकार ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोविड-19 एवं मौसमी बीमारियों के संभावित मरीजों के उपचार की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की है। अस्पतालों में दवाएं, परीक्षण सुविधा एवं चिकित्सकीय संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

डीएमफ मद से बलरामपुर में स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार डीएमफ मद का स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में बेहतरी के लिए उपयोग किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा बलरामपुर में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए इस मद से जिला चिकित्सालय बलरामपुर में स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई है। 

गौरतलब है कि जिला अस्पताल बलरामपुर में लम्बे समय से स्त्री रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्त्री रोग विशेषज्ञ के अभाव में गर्भवती माताओं को सुरक्षित प्रसव और चिकित्सीय सलाह और इलाज के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता था, परन्तु अब यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति होने से गर्भवती माताओं को अपने जिले में ही इलाज की बेहतर सुविधा प्राप्त हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला खनिज न्यास मद से स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम मित्रा (डीएनबी) की नियुक्ति हुई है, जिन्होंने अस्पताल में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया है। अस्पताल में लम्बे समय से बंद पड़े सर्जरी विभाग फिर से शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं होने से जिले के गर्भवती माता जिन्हें ऑपरेशन की जरुरत पड़ती थी उन्हें अंबिकापुर जिला अस्पताल भेजा जाता था, लेकिन अब यह सुविधा जिला अस्पताल बलरामपुर में ही शुरू हो गयी है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम मित्रा के द्वारा जिला चिकित्सालय बलरामपुर के प्रसूति वार्ड में भर्ती 25 वर्षीय श्रीमती नीलम मिंज का मेजर सर्जरी किया गया, जो सफल रहा। माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, बच्चे का वजन लगभग 3.2 किलोग्राम है जोे चिकित्सकों के निगरानी में है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शशांक गुप्ता ने कहा कि जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति होना जिले के लिए उपलब्धि है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के आ जाने से जिले के सभी गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और उपचार की बेहतर सुविधा मिल रही है।

बीमार हुई दुल्हन तो दूल्‍हा बरात लेकर पहुंचा अस्पताल , मरीजों के बीच लिए सात फेरे

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जांजगीर-चांपा। छत्‍तीसगढ़ में अनोखी शादी सुर्खियों में हैं, जहां दुल्‍हन बीमार हुई तो दूल्‍हा बरात लेकर अस्‍पताल पहुंच गया और वहीं डाक्‍टरों और मरीजों के बीच फेरे लिए। दरअसल जांजगीर-चांपा जिला का है। यहां एक निजी अस्पताल में बाजे गाजे के साथ बरात पहुंची तो लोग अचरज में पड़ गए। बरात तय समय पर पहुंची और अस्पताल में भर्ती कन्या का विवाह भी हुआ। घर के बजाय अस्पताल से ही कन्या की विदाई हुई। अस्पताल स्टाफ भी इस विवाह का साक्षी बना। आमतौर पर विवाह मंगल भवन या शादी हाल में होता है मगर 20 अप्रैल को श्री नर्सिंग होम में बाजे गाजे के साथ बरात पहुंची और अस्पताल परिसर में ही विवाह हुआ।


दरअसल, इसके पीछे की कहानी यह है कि ग्राम बैजलपुर निवासी रश्मि उर्फ लक्ष्मी पिता अगरदास महंत, माता मुन्नाी बाई का विवाह सक्‍ती जिले के परसाडीह निवासी राज उर्फ बंटी पिता सुकालू दास, माता कौशिल्या देवी के साथ तय हुआ था। 18 अप्रैल को मंडपाच्छादन होना था। दोनों परिवार में खुशी का माहौल था। धूमधाम से शादी करने के लिए सभी रिश्तेदारों के यहां निमंत्रण दिया जा चुका था। इस बीच सप्ताह भर पहले अचानक रश्मि के पेट में दर्द होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। जांच में पता चला कि उसकी बड़ी आंत में छेद है।

वर पक्ष बरात लेकर पहुंचा अस्पताल, रीति रिवाज से हुई शादी

डॉक्टरों ने बताया कि रश्मि का इलाज जल्द से जल्द नहीं करने पर यह घातक हो सकता है। इस बात की जानकारी वर पक्ष को हुआ तो राज के परिवार ने रश्मि के इलाज को महत्व देते हुए अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय किया। साथ ही तय मुहूर्त में शादी भी करने का निर्णय लिया, क्योंकि दोनों परिवार के लिए यह शादी की तिथि बढ़ाया जाना संभव नहीं था, क्योंकि निमंत्रण कार्ड बट चुका था और वर के बड़े भाई की शादी भी होनी थी। रिश्तेदार भी पहुंचने लगे थे। रश्मि के शादी के 5 दिन पहले आपरेशन हुआ और वह स्वस्थ हो गई। ऐसे में वर पक्ष बरात लेकर सीधा अस्पताल पहुंचा और अस्पताल परिसर में ही रीति रिवाज से शादी हुई। अस्पताल परिसर में उपस्थित सभी स्टाफ व अन्य मरीजों के स्वजन भी इस विवाह के साक्षी बने।

सभी ने दोनों के दांपत्य जीवन के सफल होने के साथ बहू के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। रिश्तेदारों ने बताया कि दोनों परिवार की माली हालत ठीक नहीं है इसलिए विवाह की तिथि भी बढ़ाना संभव नहीं था। क्योंकि खर्च हो चुके थे। वहीं लड़की पक्ष के लोगों ने बताया कि जो पैसा विवाह के लिए जमा किया था वह इलाज में खर्च हो गए मगर वर पक्ष ने पूरा सहयोग किया और कन्या का अस्पाल में सफल उपचार व मंत्रोच्चार के साथ विवाह हुआ।

 

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