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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने लहराया राष्ट्रीय स्तर पर परचम

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रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए ‘‘स्पेशल जूरी रिकगनिशन अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को यह सम्मान फे़डरेशन ऑफ़ इंडियन चौंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (एफ.आई.सी.सी.आई.) द्वारा अम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में 18 से 19 अक्टूबर 2024 तक आयोजित ‘‘19वीं उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन’’ में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिटेन की उच्चायुक्त सुश्री लिण्डी केमरान के करकमलों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल को प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के कुशल मार्गदशन में विगत दो वर्षाें में धान जनन द्रव्य संरक्षण, जैव विविधता एवं संबंधित उत्पादों पर अनुसंधान हेतु एवं उत्पादों के उपभोग के प्रति आमजनों तक जागरूकता लाने के संबंध में किये गये उल्लेखनीय कार्याें को दृष्टिगत रखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया है। एफ.आई.सी.सी.आई. द्वारा आयोजित 19वीं उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिसमें आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, स्पेन तथा अफ्रिकी देश घाना के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ब्रिटेन की उच्चायुक्त सुश्री लिण्डी केमरान थीं। जो स्वयं भी एक शिक्षाविद हैं तथा समाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्राख्यात हैं।

गौरतलब है कि इस अवार्ड हेतु देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षकिण संस्थाओं द्वारा एफ.आई.सी.सी.आई. के जूरी के समक्ष किये गये कार्याें का प्रदर्शन किया गया था, जिसमें जूरी ने अपना निर्णय देते हुये इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर को शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं उद्यमिता विकास के क्षेत्र में स्पेशल जूरी रिकगनिशन अवार्डप्रदान किया गया। यह अवार्ड मिलने से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुई है।

छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग को मिला राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड

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रायपुर। उच्च शिक्षा विभाग को छत्तीसगढ़ के ‘‘प्रोजेक्ट असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन‘‘ को देश की प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्रदान किया गया है। विभाग को यह अवार्ड देश के कई बड़े एवं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के साथ प्रतियोगिता करते हुए कई चरणों की प्रस्तुतिकरण, वोटिंग एवं उपलब्धियों के कारण प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने विभाग के अधिकारियों को कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है।

उच्च शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नैक के द्वारा निर्धारित विभिन्न मापदण्डों के अनुरूप शैक्षणिक अधोसंरचना एवं अकादमिक स्तर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड पर नैक से संबद्धता प्राप्त करने का अभियान प्रारंभ किया गया है। कुल 211 अहर्ता प्राप्त शासकीय महाविद्यालयों में से 197 शासकीय महाविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन कराकर छत्तीसगढ़ देश में सर्वाेच्च स्थान पर है।

सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि कॉलेज में प्रवेश लेने वालों छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां 2018-19 में करीब 2 लाख 26 हजार 373 छात्रों ने कॉलेज में प्रवेश लिया वहीं यह संख्या वर्ष 2022-23 में 48 प्रतिशत बढ़कर 3 लाख 35 हजार 139 हो गई है। जो कि 2018-19 की तुलना में एक लाख 8 हजार 766 अधिक है। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विगत 4 वर्षों में कुल 33 नवीन शासकीय एवं 76 अशासकीय महाविद्यालय की स्थापना की गई है।

उच्च शिक्षा में लड़कियों को प्रोत्साहन देने के लिए 26 कन्या महाविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। अन्य महाविद्यालय में सह-अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2018-19 में जहां 91,982 छात्रों की तुलना में 1,34,391 छात्राओं ने कॉलेज में एडमिशन लिया वहीं 2022-23 में यह बढ़कर छात्रों की संख्या 1,28,310 एवं छात्राओं की संख्या 2,06,829 हो गई है। जो की छात्रों की तुलना में छात्राओं का संख्या 61 प्रतिशत अधिक है।

छत्तीसगढ़ : स्कूल शिक्षा विभाग को मिला एमबिलियंथ अवार्ड

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में निकलर एप्पद्वारा पढ़ाई कराने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को एमबिलियंथ पुरस्कार से नवाजा गया है है। छत्तीसगढ़ को यह अवार्ड 6 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शिक्षा के क्षेत्र में इस उपलब्धि के लिए प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक लोक शिक्षण सुनील जैन, महाप्रबंधक समग्र शिक्षा नरेन्द्र दुग्गा, एन.आई.सी. रायपुर के वैज्ञानिक सोमशेखर और स्कूल शिक्षा विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 14 नवंबर 2022 को लांच किए गए सुघ्घर पढ़वैया कार्यक्रम में भी स्कूलों का आंकलन निकलर एप्प के माध्यम से बहुत कम समय में किया जा सकेगा। इसके लिए भी शिक्षकों को तैयार किया जा रहा है।  गौरतलब है कि साउथ एशिया में एमबिलियंथ अवार्ड मोबाइल के माध्यम से आम जनता तक तकनीकी का उपयोग कर जीवन सुगम बनाने की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को सम्मानित करता है। जिसकी शुरुआत 2010 से की गई थी, सम्मान देने की यह 12 वीं श्रृंखला है।

निकलर एप्प

कक्षा में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में बच्चे सीख रहे हैं अथवा नहीं, यह देखने के लिए आंकलन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, पर हमारी कक्षाओं में बच्चों के कार्यों का आंकलन बहुत समय लेने वाली प्रक्रिया है। कभी शिक्षक को अपने कक्षा में एक एक बच्चे को बुला कर उनके कार्यों को ध्यान से देखना पड़ता है। कभी बच्चों की कापी एकत्र कर स्कूल में या फिर घर में समय निकलकर कॉपी जांचनी पड़ती है। आजकल पालक जागरूक हैं इसलिए कॉपी जांचते समय काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। इस टेक्नोलॉजी का उपयोग शिक्षकों के कार्यों को आसान करने हेतु किया जाता है। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग और एन आई सी ने भी शिक्षकों के आंकलन संबंधी कार्य को आसान करने के लिए लंबी रिसर्च करते हुए निकलर एप्प का निर्माण किया है। 

एप्प के उपयोग के लिए सबसे पहले हमें गूगल प्ले स्टोर में जाकर निकलर एप्प को डाउनलोड करना होता है। स्कूल के यू-डाइस के आधार पर पोर्टल से विद्यार्थियों के लिए क्यू आर कोड वाले कार्ड डाउनलोड कर उसे एक पुठ्ठे में चिपकाना पड़ता है। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए इस प्रकार से एक यूनिक कार्ड उनके नाम से देना होता है। इसे आपस में बदलना नहीं चाहिए। यह उस बच्चे के नाम से उसके पास पूरे सत्र में रहना चाहिए। किसी टॉपिक को पढ़ाने के बाद प्रश्न पूछना हो तो आप निकलर एप्प में उस पाठ से संबंधित उपलब्ध प्रश्न निकालकर पूछ सकते हैं या फिर स्वयं अपने प्रश्न दे सकते हैं। पूछे जाने वाले प्रश्न के चार विकल्प होने चाहिए। बच्चों को सही विकल्प के आधार पर कैसे कार्ड को पकड़ना है यह सिखाना होगा।

 निकलर एप्प का उपयोग कर बच्चों की उपस्थिति भी ली जा सकती है। इस एप्प के माध्यम से पूछे जाने वाले विभिन्न प्रश्नों के ऑडियो भी बनाकर प्रश्न पूछ सकते हैं। एप्प के उपयोग में कुछ भी दिक्कत आई है तो शिक्षकों के बीच से ही तकनीकी रूप से विशेषज्ञ शिक्षक साथियों ने उनके हेल्प वीडियो बनाकर हमारी सहायता करते हैं। जिससे कक्षा में इसका क्रियान्वित करना आसान हो गया है।समग्र शिक्षा की ओर से इस एप्प के उपयोग हेतु निरन्तर आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस वर्ष सभी स्कूलों को इंटरनेट के लिए बजट भी उपलब्ध करवाया गया है। शिक्षकों को निकलर एप्प के उपयोग के लिए प्रशिक्षित भी किया गया है।


हेमचंद साहू हैं छत्तीसगढ़ के एकमात्र रेत कलाकार , मूर्तिकला के साथ-साथ रेत कलाकृति में भी हैं पारंगत

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अब तक बना चुके हैं 200 से अधिक  कलाकृति ,  हेमचंद को मिल चुके हैं कई अवसरों पर अवार्ड

रेत की तरह फिसलते समय चक्र को मुट्ठी में कर लेने की अदभुत कला। जीवन यात्रा को सफल कर लेने की हसरत ने गांव के नौजवान हेमचंद को रेत कलाकार बना दिया। हेमचंद साहू छत्तीसगढ़ के सुदर्शन पटनायक कहलाने लगे हैं। ओडिशा के प्रख्यात सेंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक की रेत कलाकृतियों से प्रभावित होकर कुछ कर गुजरने की चाहत में शुरू की गई कलाकारी ने हेमचंद को सफलता के मुकाम पर ला खड़ा किया है। अब तो बड़े समारोह और विभिन्न अवसरों पर हेमचंद को लोग रेत कलाकृति बनाने के लिए आमंत्रित करने लगे हैं। 


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप स्थित है गांव तामासिवनी। यहां किसान परिवार में पैदा हुए हेमचंद। जिस स्कूल में पढ़े वहीं पहली रेत कलाकृति महज 22 साल की उम्र में बनाया। अब तो हेमचंद साहू ने स्वयं की योग्यता का लोहा मनवा लिया है। ओडिशा के सुप्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक उनके गुरु 'द्रोणाचार्य" हैं। सुदर्शन की कलाकृतियां देखकर उन्होंने मन ही मन उन्हें अपना गुरु मानकर अभ्यास आरंभ किया । अभी तक वे दो सौ से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं। 


 
हेमचंद साहू बताते हैं कि वे मूलतः मूर्तिकार हैं। मिट्टी और सीमेंट से मूर्ति बनाते हैं। इसी से उनकी आजीविका चलती है। रेत कलाकृति उनका शौक है।  सबसे पहले हाईस्कूल तामासिवनी में उन्होंने शिक्षक दिवस पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का रेत पर कलाकृति बनाई, जिसे बहुत प्रोत्साहन मिला। इसी बीच  जाने-माने रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक छत्तीसगढ़ आए थे। राजिम मेला में उन्हें रेत पर कलाकारी करते देखकर हेमचंद साहू मन ही मन उन्हें गुरू मान लेते हैं। उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। उन्ही के नक्शे कदम पर चलने लगे, अब वे छत्तीसगढ़ के प्रथम सेंड आर्टिस्ट हैं। 



हेमचंद साहू की रेत पर कलाकारी ज्यादातर संदेश परक होते हैं। किसी सामाजिक और वैश्विक मुद्दे को लेकर लोगों को जागरूक करने का संदेश वे कलाकृतियों से देते हैं। भविष्य में पीने के पानी की गंभीर समस्या को देखते हुए पानी बचाओ, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, जिससे पेड़ों की संख्या में लगातार कमी को देखते हुए पौधारोपण करने, रक्तदान महादान जैसे सन्देशपूर्ण कलाकृतियों के लिए मशहूर हैं।  कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाने, वन्यजीव हाथी को बचाने, अनेक महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि पर कलाकृति, सिनेमा जगत के नायकों की कलाकृतियों सहित संदेश देने वाली अनेक रेत कलाकृतियां हेमचंद ने बनाई है। 


हेमचंद साहू छत्तीसगढ़ के एकमात्र रेत कलाकार हैं। उनकी प्रतिभा को अब तक कई अवसरों पर पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी हेमचंद की प्रतिभा को सराहा है। इसके अलावा हेमचंद के नाम राजा मोरध्वज महोत्सव आरंग, ताराचंद स्मृति चिह्न, बेटी बचाओ अभियान के लिए पुरस्कार जैसे दर्जनों पुरस्कार मिले हैं।
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