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मुख्यमंत्री गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को देंगे 44.61 करोड़ रूपए की सौगात

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल 19 जून को गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को 44 करोड़ 61 लाख रूपए की लागत वाले 57 विकास कार्यो की सौगात देंगे, जिसमें 16 करोड़ 99 लाख लागत से निर्मित 35 विकास एवं निर्माण कार्यो का लोकार्पण तथा 27 करोड़ 62 लाख रूपए की लागत वाले 22 विकास कार्यो का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल पेण्ड्रा में आयोजित कार्यक्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में 27 करोड़ 62 लाख रूपए की लागत से बनने वाले कई भवन, सड़क एवं पुल-पुलिया का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करेंगे।

जिसमें मुख्य रूप से 11 करोड़ 69 लाख रूपए की लागत से पेण्ड्रारोड से अमरकंटक मार्ग के 18.80 किलोमीटर का निर्माण, 4 करोड़ 11 लाख रूपए की लागत से ग्राम निमधा से ग्राम दरमोहली मार्ग लंबाई 3.20 किलोमीटर, 3 करोड़ 85 लाख रूपए की लागत से मड़वाही से करसींवा मार्ग का निर्माण, 2 करोड़ 45 लाख रूपए की लागत से चुकतीपानी-बाजारडांड से आमानकान बस्ती पहुंच मार्ग में आमानकान नाला में उच्चस्तरीय पुल निर्माण, 2 करोड़ 37 लाख रूपए की लागत से लाटा-सरईधार(जोगीसार) मार्ग के जैतरणी नाला पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण, 71.12 लाख रूपए की लागत से तहसील ऑफिस कार्यालय भवन सकोला का निर्माण,

37 लाख रूपए की लागत से कोटमी में नवीन विश्राम गृह निर्माण, 34.64 लाख रूपए की लागत से 10 बिस्तरीय आईसोलेशन वार्ड का सीएचसी पेण्ड्रा में निर्माण, 25 लाख रूपए की लागत से  विकासखण्ड स्तरीय आदिवासी समाज भवन निर्माण, 22.12 लाख रूपए की लागत से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल पेण्ड्रा में विभिन्न निर्माण, 16 लाख रूपए की लागत से पेण्ड्रा में शासकीय आयुर्वेद औषधालय भवन का निर्माण, 14.25 लाख रूपए की लागत से नाली एवं टेंक निर्माण (ग्राम पंचायत ठाड़पथरा), 14 लाख रूपए की लागत से पुलिया उन्नयन एवं रिटर्निग वाल निर्माण कार्य (ग्राम पंचायत ठाड़पथरा),

12.95 लाख रूपए की लागत से सी.सी रोड निर्माण एवं उन्नयन कार्य (जिला अस्पताल परिसर में), 10.54 लाख रूपए की लागत से जिला चिकित्सालय परिसर में गढ़ कलेवा का उन्नयन/नवीनीकरण कार्य एवं सीटिंग शेड निर्माण, 9.88 लाख रूपए की लागत से मितानिन सेल्टर एमसीएच गौरेला में, 9.02 लाख रूपए की लागत से लावइलीहुड कॉलेज का उन्नयन/नवीनीकरण कार्य, 8.93 लाख रूपए की लागत से जिला चिकित्सालय परिसर में आर.सी.सी ढक्कन युक्त नाली निर्माण कार्य, 8.04 लाख रूपए की लागत से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का जीर्णोधार ग्राम पंचायत सेमरदर्री, 8 लाख रूपए की लागत से सी.सी रोड निर्माण ठाड़पथरा पहुंच मार्ग, 7 लाख रूपए की लागत से पुलिया निर्माण कार्य आवास टोला से कन्हारी पहुंच मार्ग ग्राम पंचायत गोरखपुर, 6.50 लाख रूपए की लागत से सकोला में सामुदायिक भवन का निर्माण शामिल है।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 16 करोड़ 99 लाख रूपए की लागत से निर्मित 35 निर्माण कार्यो का लोकार्पण करेंगे, जिसमें मुख्य रूप से 5 करोड़ 57 लाख रूपए की लागत से अमेराटीकरा-भर्रीडांड-मटियाडांड मार्ग पर सोन नदी पर उच्चरस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण, 2 करोड़ 81 लाख रूपए की लागत से ठेंगाडांड एनीकट निर्माण, एक करोड़ 97 लाख रूपए की लागत से स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल पेण्ड्रा, एक करोड़ 32 लाख रूपए की लागत से स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल सेमरा का निर्माण,  एक करोड़ 5 लाख रूपए की लागत से स्मृति वाटिका निर्माण कार्य, 50 लाख रूपए की लागत से प्रेस क्लब भवन निर्माण, वाचनालय निर्माण, मूर्ति स्थापना विद्यानगर पेण्ड्रा, 41 लाख रूपए की लागत से शारीरिक शिक्षण एवं प्रशिक्षण कॉलेज में रेनोवेशन कार्य, 33.15 लाख रूपए की लागत से गढ़कलेवा कुम्हारी में एस.एच.जी शेड निर्माण, 25.82 लाख रूपए के मान से कोड़गार और नेवसा उप-स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण, 20 लाख रूपए की लागत से बाउण्ड्रीवाल निर्माण हायर सेकेण्डरी स्कूल ग्राम पंचायत नेवसा, 19 लाख रूपए की लागत से वार्ड 11 में बीटी रोड निर्माण कार्य, 18.25 लाख रूपए की लागत से वार्ड क्रमांक 10 में बी.टी. रोड,

15.76 लाख रूपए की लागत से सी.सी रोड निर्माण वाटिका निर्माण, 14.04 लाख रूपए की लागत से बी.टी रोड वार्ड क्रमांक 12, 13.55 लाख रूपए की लागत से आंगनबाड़ी से जगेश्वर यादव के घर तक बी.टी रोड का निर्माण वार्ड क्रमांक 14, 10.48 लाख रूपए की लागत से बी.टी रोड निर्माण वार्ड क्रमांक 01, 10 लाख रूपए की लागत से पुलिया निर्माण, 10 लाख रूपए की लागत से मुख्य सड़क से प्राथमिक शाला घाटबहरा सी.सी रोड निर्माण 300 मीटर, 10 लाख रूपए की लागत से आर.आर.सी पुलिया निर्माण कार्य बगड़ी, 10 लाख रूपए की लागत से पुलिया निर्माण कार्य मेन रोड से सोसायटी पहुंच मार्ग मझगवां, 9.57 लाख रूपए की लागत से बी.टी. रोड वार्ड क्रमांक 06, 9.14 लाख रूपए के मान से उप-स्वास्थ्य केन्द्र नवागांव, पीपरखुंटी, सारबहरा, भरौदा, सिवनी में वार्ड निर्माण कार्य,  नगर पंचायत गौरेला में 33 लाख रूपए की लागत से पांच बी.टी रोड निर्माण कार्य, ग्राम पंचायत गौरखेड़ा में 5 लाख रूपए की लागत से बनी पुलिया आदि शामिल है।

 


आगे बढ़ते जाओ तुम मत देखो अपने पैर के छालों को

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कवर्धा। पवित्र श्रावण माह का कल तीसरा सोमवार है। बीते इस पूरे माह में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से लेकर मध्यप्रदेश की अमरकंटक तक बोल-बम और हर-हर महादेव का गुंजायमान होने लगा है। ऐसी ही नजारा पड़ोंसी जिले बेमेतरा, मुंगेली और राजानांदगांव के सरहदी क्षेत्रों से आने वाले पदयात्रियों और कांवड़ियो में उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा है। हालांकि पड़ोंसी जिलों की तुलना में इस बार अमरकंटक से मां नर्मदा की जल लाने वाले कांवड़ियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।



कांवड़ियो की बढ़ती संख्या को देखते हुए कबीरधाम जिला प्रशासन द्वारा कांवडियों की मूलभूत सुविधाओं, जैसे उनके ठहरने की व्यवस्था, उनके प्राथमिक स्वास्थ्य की व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं में भी विस्तार किया जा रहा है। कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देशानुसार अमरकंटक से पहाड़ी और पथरिली जंगलों की रास्तों से कबीरधाम जिले में प्रवेश करने वाले सभी कावड़ियों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

कबीरधाम जिले के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हनुमंतखोल के पास कांवड़ियो के उपचार की बेहतर व्यवस्था कराई जा रही है। यहां चिकित्सक से लेकर स्टॉप नर्स और ड्रेसर्स कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसी प्रकार कांवड़ियो को ठहराने के लिए कुकूदूर विश्राम गृह परिसर में उचित व्यवस्था की गई, यहां भी चिकित्सको की टीम को तैनात किया गया है। अमरकंटक से लेकर भोरमदेव पहुंच पहुंच मार्ग पर अलग-अलग 7 से 8 स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर कांवड़ियों को पांव के छालों में आवश्यकतानुसार पट्टी लगाई जा रही 

तो वही उनके कांवड़ियों के पैरों में होने वाले मोच व अकड़न को ठीक करने के लिए स्प्रे की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य टीम द्वारा कॉवडियों का हौसला बढ़ाते हुए यह भी कहा जा रहा है कि आगे बढ़ते जाओं तूम मत देखों अपने पैर के छालों को। मुख्य चिकित्सा एवं जिला अधिकारी डॉक्टर सुजॉय मुखर्जी ने बताया कि अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 300 से अधिक कांविड़यों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई है। 

कांवड़ियो के पैरो में होने वाले छालों के उपचार से लेकर कोविड जांच परीक्षण की सुविधा भी देने में टीम लगी हुई है। इसके अलावा कवर्धा के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के सपीम 6 अलग-अलग समाजिक भवन व विशेष वाटर फ्रुप टेंट लगाकर विश्राम शिविर बनाई गई है। श्रद्धालु और कावरियों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन के पूरा अमला, कोटवार से लेकर प्रशासनिक अधिकारी, नगरीय निकायों के अमले और अन्य सुविधाएं सहित पुलिस के जवान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाने में लगे हुए है।

दो साल कोविड सकंमण के बाद दो दोगूनी उत्साह और उमंग के साथ कावड़ियों की संख्या में इस बाद इजाफा

पवित्र श्रावण मास में भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने वाले कांवड़ियों के लिए प्रत्येक सोमवार को ज्वाइड हैण्डस् द्वारा मंदिर परिसर के समीप निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की जाती है। इस भोजन में कांवरियों के लिए दाल-भात-सब्जी से लेकर मीठा जैसे खीर, पुड़ी व हलवे भी निःशुल्क दी जाती है। कांवड़ियों को निःशुल्क जल-पान करने वाले ज्वाइंड हैण्डस् के सदस्यों ने बताया इस बार कांवड़ियों की संख्या पिछले सालों की तुलना भी बढ़ी है। इसका एक वजह कोविड़ संक्रमण काल के प्रथम सावन मास भी हो सकता है। सदस्यों ने बताया कि मंदिर मंदिर परिसर में आने वाले सभी कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नही हो इसके लिए समन्वय बना कर पूरा व्यवस्था बनाने में सहयोग भी किया जा रहा है। 

कवर्धा को क्यो कहा जाता है छोटा काशी

कहते है कि काशी के कण-कण में भगवान शिव का वास है। मां गंगा पावन तट पर बसे विश्व की धार्मिक राजधानी काशी को शायद इसीलिए मोक्षदायिनी भी कहा जाता है। ऐसी ही काशी की समतुल्यता की झलक छत्तीसगढ़ की कबीरधाम जिले में दिखाई देती है। कबीरधाम जिले कवर्धा शहर में विश्व का एक मात्र पवित्र-पावन पंचमुखी शिव लिंग बुढ़ा महादेव विराजित है। यह स्वमं-भू शिव लिंग है। ऐसी मान्यता है। कवर्धा से महज 16 किलोमीटर की दूरी पर 11वीं शताब्दी की प्राचिन व ऐतिहासिक बाबा भोरमदेव मंदिर का शिवालय है।

प्राचीन भोरमदेव मंदिर पहुंचते तक पूरे 16 किलोमीटर तक कवर्धा की जीवन दायिनी पवित्र सकरी नदी यहां प्रवाहित होती है। वहीं कवर्धा से महज 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ग्राम डोंगरिया। डोंगरिया में सकरी नदी की सहायक नदी फोक नदी के तट पर बसा हुआ है। इसी नदी में आदि अनंतकाल से नदी के मध्यम में स्वयं-भू शिव जी का वास है, जिसे जलेश्वर महोदव के नाम से जाना जाता है।

आदि अनंत काल से धार्मिक राजधानी काशी सहित अन्य आश्रमों से कवर्धा में दण्डी सन्यासियों का आगमन होता रहा है और कवर्धा के प्राचीन व ऐतिहासिक स्वमं-भू पंचमुखी शिव लिंग में दण्डी सन्यासियों द्वारा विशेष पूजा अर्चना भी की जाती है। देश के अन्य दिव्य ज्योर्तिलिंगों की भांति दण्डी स्वामियों द्वारा दण्ड सहित इस पंच मुखी शिव लिंग बूढ़ामहादेव को प्रणाम किया जाता है। किवदंती अनुसार इसीलिए भी दण्डी सन्यासियों द्वारा कवर्धा नगरी को छोटा काशी की संज्ञा दी जाती है।

’बाबा भोरमदेव मंदिर में 30 हजार अधिक श्रद्धालुओं का आगमन, हजारों कावरियों ने किया जलाभिषेक’

कबीरधाम कवर्धा का नाम जुबां पर आते ही बाबा भोरमदेव मंदिर की प्रतिबिम्ब दिखाई देती है। मैकल पर्वत के तलटली पर पहाड़ियां से घिरा हुआ बाबा भोरमदेव मंदिर का शिवालय वैसे तो पूरे साल भर हर-हर महादेव से गुंजायमान रहता है। लेकिन पवित्र सावन माह का प्रारंभ होते ही यहां पहले सोमवार से हजारों भक्तों और कांवरियों का आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। सावन मास के दो सोमवार से अब तक बाबा भोरमदेव मंदिर में लगभग 25-30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हो चुका है। वहीं हजारों कांवरियों द्वारा बाबा भोरमदेव मंदिर के गर्भ गृह में विराजित शिव लिंग का जलाभिषेक किया जा चुका है। कवर्धा के अलग-अलग बोलबम समिति के कांवरियों द्वारा मध्यप्रदेश के अमरकंटक से मां नर्मदा नदी की पवित्र जल कांवर में लेकर 180 किलोमीटर की जंगल-पहाड़ियों और पथरीलि रास्तों से होते हुए पदयात्रा करते हुए

कबीरधाम जिले के हनुमंत खोल से गुजरकर जिले के जलेश्वर महोदव में प्रथम आगमन होता है। यहां हजारों की संख्या में प्रतिवर्ष कावरियों द्वारा जलेश्वर महादेव में जलाभिषेक की जाती है। इसके बाद पदयात्रा करते हुए कवर्धा के प्राचीन पंचमुखी बुढ़ामहोदव पहुंचकर श्रद्धापूर्वक शिव लिंग में जलाभिषेक और पूजा अर्चना की जाती है। बोल-बम पदयात्रियों का अगला पड़ाव कवर्धा से 16 किलोमीटर दूर बाबा भोरमदेव मंदिर तक होती है। यहां हजारों की संख्या में काविरयों द्वारा मां नर्मदा नदी की जल से बाबा भोरमदेव मंदिर में विजारित शिव जी का जलाभिषेक किया जाता है। 

श्रद्धालु और कांवरियों को मुलभूत सुविधाएं देने लगा जिला प्रशासन का पूरा अमला

कबीरधाम जिले में सावन मास में आने वाले श्रद्धालु और कांवरियों को मुलभूत सुविधाएं देने के लिए पुरा जिला प्रशासन का अमला लगा हुआ है। कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर अमरकंटक से आने वाले कांवरियों के विश्राम के लिए कुकदूर में विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कवर्धा के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के सपीम 6 अलग अलग समाजिक भवन व विशेष वाटर फ्रुप टेंट लगाकर विश्राम शिविर बनाई गई है। श्रद्धालु और कावरियों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन के पूरा अमला, कोटवार से लेकर प्रशासनिक अधिकारी, नगरीय निकायों के अमले और अन्य सुविधाएं सहित पुलिस के जवान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाने में लगे हुए है।

अंमरकंटक से लेकर भोरमदेव मंदिर पहुंच तक मार्ग के हनुमंत खोल के पास स्वास्थ शिविर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ग्राम कुकदूर, जलेश्वर महादेव डोंगरिया, कवर्धा स्थित पंचमुखी बुढ़ा महादेव मंदिर और प्रत्येक सोमवार को भोरमदेव मंदिर के समीप स्वास्थ्य शिविर लगाई जा रही है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की टीम स्टॉप नर्स से लेकर ड्रेसर और चिकित्सकों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा इस मार्ग में आने वाले सभी स्वास्थ्य केन्द्रों को श्रद्धालु एवं कांवरियों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुचाने के लिए अलर्ट रहने के निर्देश भी दिए गए है। साथ ही हेल्प लाइन के लिए प्रशानिक अधिकारियों के संपर्क मोबाइल नम्बर भी जारी किए गए है।

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